गुरुवार, 26 मई 2016

अग्रवाल भाईयों के मिले शव

जमीन विवाद को लेकर तीन दिन पहले वकील नवीन अग्रवाल और उनके भाई सुधीर अग्रवाल के अपहरण के बाद उनकी हत्या कर शव जंगल में फेंक दिए. शवों की शिनाख्ती न हो इसके लिए उनके चेहरों को बुरी तरह जला दिया. शव आज सिवनी मालवा के निकट जंगल में पुलिस को मिले हैं.
राजधानी के वरिष्ठ वकील नवीन अग्रवाल और उनके हरदा निवासी भाई सुधीर अग्रवाल के शव आज पुलिस ने होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा के निकट बांदरखोह के जंगल में नहर के किनारे बरामद किए हैं. दोनों की शिनाख्त न हो इस वजह से अपहरण कर हत्या करने वालों ने उनके चेहरों को जला दिया था. इसके बाद उनके पैर बांधकर वहां झाड़ियों में फेंक दिया था. आरोपियों की निशानदेही पर शवों को बरामद किया है.
उल्लेखनीय है कि हरदा के निकट सिराली में अग्रवाल भाईयों ने मोहनपुर गांव में जमीन खरीदी थी. 7 एकड़ जमीन पर जगदीश राजपूत का कब्जा था, विवाद को निपटाने के लिए दोनों भाई अपने साथियों के साथ वहां गए थे, इसके बाद जगदीश और उसके साथियों ने जमकर मारपीट की और दोनों भाईयों का अपहरण कर लिय था. इसके बाद से पुलिस लगातार उन्हें तलाश रही थी. पुलिस ने मामले में सबसे पहले आरोपी जगदीश को हिरासत में लिया. इसके बाद उसके लड़के को हिरासत में लिया. उनसे पूछताछ के बाद बुधवार की शाम को निखिल तिवारी को इंदौर से पकड़ा. तब जाकर कहीं मामले का खुलासा हुआ. इस मामले में एक आरोपी लालू की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को इस मामले की जानकारी मिलती रही. वह सुराग बताता रहा, इसके बाद इंदौर से जब निखिल की गिरफ्तारी हुई तो इसका खुलासा हुआ कि उसी की गाड़ी से शवों को ले जाकर वहां फेंका गया था.
राजधानी में किया प्रदर्शन
राजधानी भोपाल में आज सुबह जैसे ही अग्रवाल भाईयों की हत्या होने की खबर मिली, इसके बाद अग्रवाल समाज खफा हो गया. वहीं कांग्रेस ने भी इस मामले में विरोध जताया. कांग्रेस कार्यकर्ता और अग्रवाल समाज के लोग गृह मंत्री बाबूलाल गौर के निवास पर पहुंचे और प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान पुलिस का कड़ा पहरा रहा. इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेता गोविंद गोयल और उनके साथियों को गिरफ्तार भी किया.

बुधवार, 25 मई 2016

अब दिग्गज बढ़ाएंगे सक्रियता

राज्य के बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी में हो रहे विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने चुनाव प्रचार की कमान संभाल ली है. चौहान के मोर्चा संभालने के बाद अब कांग्रेस नेता भी सक्रियता दिखाने की तैयारी कर चुके हैं. कांग्रेस की ओर से कमलनाथ सबसे पहले बैतूल पहुंचेंगे. उसके बाद दिग्विजयसिंह और फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया भी वहां पहुंचकर चुनाव प्रचार करेंगे.
बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी में हो रहे विधानसभा उपचुनाव को लेकर सिंहस्थ के समापन के बाद अब मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने मोर्चा संभाल लिया है. वे आज वहां पहुंचे और चुनाव प्रचार अभियान तेज किया. चौहान के अलावा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान भी वहां पर सक्रिय हैं. संगठन यहां पर पूरी ताकत के साथ जुटा हुआ है. इसके  अलावा प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत की घोड़ाडोंगरी पहुंचकर वहां पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से की चर्चा भी इन दिनों भाजपा संगठन में चर्चा का विषय बनी है. भगत ने गुपचुप तरीके से वहां पहुंचकर चुनावी रणनीति को समझाया और कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया. भगत वैसे अपनी नियुक्ति के बाद से अभी तक माहौल और मिजाज देख रहे थे, मगर अब उन्होंने मैदानी मोर्चा भी संभाला है. भगत ने मैदान में उतरकर घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से सीधी बात की और संगठित होकर चुनाव मैदान में दिखाई देने को कहा. वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान भी वहां पर सक्रियता दिखाते हुए पूरे समय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संगठित होकर चुनाव मैदान में दिखाई देने की बात कह रहे हैं. जबकि आज से मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने चुनाव प्रचार को गति देते हुए फिर से विकास के मुद्दे को गर्माने का प्रयास किया है.
भाजपा के अलावा कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता आज से वहां बढ़ेगी. कमलनाथ कल सोमवार को वहां पहुंचकर सभाएं लेंगे. इसके बाद कांग्रेस प्रत्याशी प्रतापसिंह उइके को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजयसिंह को समर्थक माना जाता है, इसलिए उनके समर्थन में सिंह भी वहां पहुंचकर चुनाव प्रचार करेंगे. सिंह को घोड़ाडोंगरी पहुंचकर दो दिनों तक चुनाव प्रचार करने की बात कही जा रही है. वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया भी 25 मई को घोड़ाडोंगरी पहुंचेंगे. इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव वहां पर खुद मोर्चा संभाले हुए है. 
भोपाल, 22  मई 

रास के लिए तेज हुई राजनीति



मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए रिक्त हो रही तीन सीटों के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में राजनीति तेज हो गई है. कांग्रेस के दावेदारों की संख्या की ही तरह भाजपा में भी अब दावेदारों की संख्या अधिक हो गई है, जिससे उसकी चिंता बढ़ गई है. भाजपा के पक्ष में दो सीटें है, जबकि कांग्रेस के खाते में एक सीट जा रही है. दोनों ही दलों के दावेदार इन सीटों पर अपना गुणा-भाग लगाकर दावेदारी को मजबूत कर रहे हैं.
जून माह में होने वाले राज्यसभा के चुनाव हेतु भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में सक्रियता बढ़ गई है. मध्यप्रदेश से रिक्त हो रही तीन सीटों में से भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलना तय माना जा रहा है. पहले भाजपा में यह माना जा रहा था कि यहां पर दावेदारों की संख्या कम होगी, मगर जैसे-जैसे निर्वाचन की तारीख नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे भाजपा में दावेदार अपनी रणनीति के तहत काम करते हुए दावेदारी कर भाजपा संगठन के लिए संकट खड़ा कर रहे हैं. पूर्व में यह माना जा रहा था कि भाजपा के पक्ष में जाने वाली एक सीट पर राज्यसभा सदस्य अनिल माधव दवे का नाम तय है, मगर अब उनके नाम का विरोध करने वाले भी सक्रिय होते नजर आ रहे हैं. दवे को तीसरा मौका मिलना दूसरे दावेदारों को  नहीं भा रहा है. दवे के नाम पर  भाजपा के वरिष्ठ नेता संकट बन सकते हैं. इन नेताओं में विक्रम वर्मा, रघुनंदन शर्मा, कृष्णमुरारी मोघे के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी का नाम भी शामिल है. जोशी इस बात से आहत है कि उन्हें पूर्व में लोकसभा का टिकट यह आश्वासन देकर काटा गया कि उन्हें राज्यपाल बनाया जाएगा. मगर ऐसा अब तक नहीं हुआ. इस वजह से खुद जोशी अब राज्यसभा जाने की इच्छा रखते हैं. वे 26 मई को भाजपा की चुनाव समिति की होने वाली बैठक में इस बात का विरोध कर सकते हैं. जोशी के अलावा एक नया नाम दावेदारों में भाजपा की ओर से और उभरा है. यह नाम प्रदेश के पूर्व संगठन मंत्री अरविंद मेनन का है. मेनन खुद मध्यप्रदेश से राज्यसभा जाने के प्रयास कर रहे हैं. 
भाजपा की दूसरी सीट पर केन्द्रीय नेतृत्व नाम तय करेगा. मगर इस सीट पर भी दावेदारों की संख्या बढ़ रही है. पहले संघ के राम माधव और प्रदेश भाजपा के प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे का नाम लिया जाता रहा, मगर अब तीसरा नाम वैंकैया नायडू के रुप में उभरा है. सूत्रों की माने तो नायडू या फिर राम माधव में से किसी एक नाम पर केन्द्रीय नेतृत्व भरोसा जताएगा.
कांग्रेस में भी उलझन
कांग्रेस में पूर्व से ही एक   सीट के लिए दावेदारों की संख्या ज्यादा थी. इसके अलावा अब और भी दावेदार बढ़ रहे हैं. कांग्रेस में पूर्व में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा, पूर्व सांसद मिनाक्षी नटराजन, वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा दावेदारी कर रहे थे.  इसके अलावा खुद डा. विजय लक्ष्मी साधौ अपनी दावेदारी करते हुए दोबारा राज्यसभा जाने की तैयारी कर रही थीं. मगर अब कांग्रेस में कपिल सिब्बल का नाम भी तेजी से आगे आया है. हालांकि फिलहाल यह माना जा रहा है कि तन्खा को कांग्रेस इस बार मौका दे सकती है. माना जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार का चयन बहुत कुछ घोंडाडोंगरी के उपचुनाव के परिणाम पर निर्भर करेगा. परिणाम अगर कांग्रेस के पक्ष में जाता है तो कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजयसिंह अपने समर्थक को राज्यसभा पहुंचाने में सफल होंगे. वे विवेक तन्खा को टिकट दिलाने में सफल हो सकते हैं. अगर परिणाम विपरित जाता है तो फिर वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ सक्रितयता दिखाकर अपने समर्थक के लिए प्रयास करेंगे. वहीं अन्य दावेदारी दिल्ली दरबार में अपने नाम पर मोहर लगवाने का पूरा प्रयास करेंगे. 

शुक्ला हो सकते हैं नये डीजीपी!

राजेन्द्र पाराशर। भोपाल,  24 मई 
राज्य के नये पुलिस महानिदेशक के पद पर पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष ऋषि कुमार शुक्ला के नाम पर मोहर लग सकती है. शुक्ला का नाम करीब-करीब तय माना जा रहा है. वैसे उनके अलावा सरबजीत सिंह का भी नाम लिया जा रहा था, मगर शुक्ला के लिए संघ से जुड़े पदाधिकारियों की सक्रियता ज्यादा नजर आ रही है. 
राज्य के पुलिस महानिदेशक सुरेन्द्र सिंह को 30 जून को सेवानिवृत्त होना है. उनके उत्तराधिकारी के लिए आधा दर्जन आईपीएस अधिकारी सक्रिय हैं, मगर पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष  ऋषि कुमार शुक्ला के नाम पर मोहर लगना तय माना जा रहा है. शुक्ला के नाम के लिए संघ ने भी सक्रियता दिखाई है. बताया जाता है कि संघ ने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन को इस बात का संकेत दे दिया है कि प्रदेश में संघ की पसंद शुक्ला होंगे. इसके बाद शुक्ला के नाम को नये पुलिस महानिदेशक के रुप में तय माना जा रहा है. 1983 बैच के आईपीएस अधिकारी शुक्ला के हाथ अगर कमान मिलती है तो उनका कार्यकाल वर्ष 1920 तक होगा. इस बीच प्रदेश में विधानसभा के अलावा लोकसभा के चुनाव भी होने हैं.  वैसे पूर्व में शुक्ला के स्थान पर पुलिस महानिदेशक इंटेलिजेंस सरबजीत सिंह के नाम पर मोहर लगने की बात कही जा रही थी, मगर शुक्ला की कार्यशैली को देखते हुए वे पिछड़ते नजर आ रहे हैं. हालांकि सरबजीतसिंह को अगर पुलिस महानिदेशक की कमान मिलती तो उनका कार्यकाल 2017 में ही समाप्त हो जाता. सरबजीतसिंह के अलावा इस पद के लिए पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण रिना मित्रा और उनके पति डी.एम.मित्रा जो की केन्द्र में प्रति नियुक्ति पर हैं का नाम भी सामने आया, मगर डी.एम.मित्रा प्रदेश आना नहीं चाहते हैं. वहीं 1983 बैच की रीना मित्रा इस पद की होड़ में पिछड़ती नजर आई. कुल मिलाकर इस पद के लिए शुरु से ही सरबजीतसिंह और ऋषिकुमार शुक्ला का नाम लिया जा रहा था, मगर अब सत्ता और संगठन दोनों ही शुक्ला के नाम पर सहमत नजर आ रहे हैं. सूत्रों की माने तो शुक्ला के नाम पर सहमति बनी है, जल्द ही उन्हें ओएसडी बनाने के आदेश भी सरकार द्वारा कर दिए जाएंगे.
सूत्रों के अनुसार दो साल पहले शुक्ला जब केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर जा रहे थे, तब उन्हें सरकार की ओर से पुलिस महानिदेशक पद की कमान संभालने का आश्वासन देकर रोका गया था. शुक्ला को तेज-तर्रार और ईमानदार अधिकारी के रुप में महकमें में पहचान मिली है, यही वजह है कि उनकी यह छवि संघ और सरकार को भी पसंद आई है.
 भोपाल,  24 मई 


रविवार, 3 जनवरी 2016

आश्वस्त चौहान, दावेदार मौन

मुख्यमंत्री पर भरोसा है नंदु भैया को, कुलस्ते सहित अन्य दावेदार नहीं खोल रहे पत्ते

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए कल सोमवार को होने वाले चुनाव को लेकर वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान दोबारा ताजपोसी को लेकर आश्वस्त हैं, वहीं अन्य दावेदार इस मामले पर अब मौन साधे हुए हैं. वे कल ही अपने पत्ते खोलेंगे. 
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद के लिए  कल होने वाले चुनाव को लेकर वैसे तो गहमागहमी का माहौल शांत नजर आ रहा है. दावेदार भी दो दिनों से मौन रहकर अपनी जमावट में जुटे हैं, मगर इंदौर में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ हुई मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, प्रदेश संगठन मंत्री अरविंद मेनन के अलावा अन्य पदाधिकारियों की बैठक के बाद करीब-करीब यह तय माना जा रहा है कि चौहान के नाम पर सहमति बनाई गई है. अमित शाह खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष के होने वाले चुनाव को देखते हुए प्रदेशों में फिलहाल किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करना चाहते हैं.  शाह की सहमति के बाद मुख्यमंत्री की ओर से नंदकुमार सिंह चौहान को करीब-करीब यह आश्वासन मिल गया है कि अध्यक्ष पद के लिए उनकी दोबारा ताजपोशी तय है. यही वजह है कि चौहान अपने अपने संसदीय क्षेत्र पहुंचे और समर्थकों के साथ खण्डवा में धुनिवाले दादा के दरबार पहुंचकर मत्था टेका और चादर भी चढ़Þाई. यहां पर उन्होंने अपने समर्थकोें के साथ चर्चा भी की. 
दावेदार हुए मौन
प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी करने वाले दावेदार अब शांत हो गए हैं. इन दावेदारों ने मौन रहकर अपनी जमावट शुरु की है,अब सोमवार को ही वे अपने पत्ते खोलेंगे. मण्डला से सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते प्रमुख दावेदारों में से थे, मगर आज वे मौन हैं. कुलस्ते ने लोकमत समाचार से चर्चा में कहा कि वे कल भोपाल पहुंचेंगे, इसके बाद क्या स्थिति बनती है, तभी वे कुछ कह पाएंगे. कुलस्ते के अलावा अन्य दावेदारों राकेश सिंह, प्रहलाद पटेल, अरविंद भदोरिया भी मौन है. वहीं परिवहन मंत्री भूपेन्द्र सिंह और राजस्व मंत्री रामपाल सिंह का नाम भी इस पद के लिए चला है. इसके अलावा पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने भी संकेत दिए हैं कि वे भी इस पद के लिए दावेदार है. भार्गव ने जिला अध्यक्ष चयन प्रक्रिया के दौरान सागर जिला अध्यक्ष को लेकर नाराजगी जताई थी और कहा था कि संगठन चाहे तो वे अध्यक्ष बन जाएंगे.
तोमर हैं नाराज, झा ने किया समर्थन
केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नंदकुमार चौहान के नाम पर खुलकर सहमत नजर नहीं आ रहे हैं. वे अरविंद भदोरिया के लिए प्रयासरत थे. मगर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के यह कहने पर की भविष्य की स्थिति को देखते हुए उनकी पसंद का अध्यक्ष वे चाहते हैं. इसके बाद भी उन्होंने अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया पर नाराजगी जाहिर की. इस मतदाता सूची से राष्ट्रीय नेताओं के नाम दूर रखे जाने से तोमर खफा है. वहीं झा ने चौहान को अपना समर्थन दिया है, मगर सोमवार को परिस्थिति क्या निर्मित होती है, इसे देखकर झा भी अंमित झणों में अपना फैसला बदल सकते हैं. यहां उल्लेखनीय है कि 2012 में जब झा का नाम भी चौहान की तरह तय माना जा रहा था, तब तोमर का चयन कर सभी को चौंका दिया था. इसके बाद से झा खुद नाराज हैं.


अध्यक्ष के लिए तेज हुईकवायद


नेताओं में बेचैनी, कहीं 2012 जैसी न बन जाए स्थिति
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के लिए 4 जनवरी को होने वाले चुनाव को लेकर दावेदारों ने कवायद तो तेज की है, मगर खुलकर कोईदावेदार सामने नहीं आ रहा है. यही वजह है कि भाजपा नेता बैचेन नजर आ रहे हैं, उन्हें यह लगने लगा है कि कहीं एक बार फिर 2012 के चुनाव की पुनरावृत्ति न हो जाए.
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद के लिए वैसे तो यह माना जा रहा है कि वर्तमान अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के नाम पर सहमति बना ली जाए, मगर दावेदारों की सक्रियता इस समीकरण को बिगाड.ती नजर आ रही है. दावेदार सक्रिय हैं, वे अपने स्तर पर दावेदारी भी कर रहे हैं, मगर मौन रहकर. अब तक केवल सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते ही एक ऐसे दावेदार सामने आए जिन्होंने खुलकर दावेदारी दिल्ली में राष्ट्रीय नेताओं के सामने की है. उनके अलावा अन्य नेताओं में से कोई भी दावेदार खुलकर सक्रिय नजर नहीं आ रहा है. हालांकि वे दावेदारी कर रहे हैं और वरिष्ठ नेताओं के सामने अपनी बात रख भी रहे हैं. ये दावेदार अधिकतर दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय नेताओं से मेल-मुलाकात कर रहे हैं. वैसे इस मामले में चुनाव अधिकारी की नियुक्ति और मतदान के तारीख तय होने के बाद अब दावेदारों की कवायद भी तेज हुई है. साथ ही खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी सक्रिय नजर आ रहे है. इंदौर में राष्ट्रीय संगठन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के निवास पर हुईउनकी करीब 10 मिनटकी मुलाकात को इससे जोड.कर देखा जा रहा है. दोनों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हुई है, हालांकि किस नाम को लेकर चर्चा हुई इस बात का खुलासा नहीं हुआ है. 
वैसे फिलहाल मुख्यमंत्री की पसंद नंदकुमार सिंह चौहान ही बने हुए हैं. इसके अलावा संगठन महामंत्री अरविंद मेनन भी उनके साथ हैं, मगर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और राज्यसभा सांसद प्रभात झा का साथ चौहान को नहीं है, यह माना जा रहा है. झा इस बार मौन रहकर 2012 में मिले झटके से उबरने का प्रयास कर सकते हैं. पिछले चुनाव में झा का नाम भी ठीक चौहान की ही तरह तय माना जा रहा था, मगर ऐन वक्त पर पासा पलटा और तस्वीर बदल गई. झा के स्थान पर तोमर का नाम आ गया. इसी तरह इस बार भी किसी अप्रत्याशित विस्फोट को संगठन के नेता होना मान रहे हैं. इसके पीछे उनका मानना है कि चुनाव प्रक्रिया में जो शांति है, वह किसी तूफान का संकेत भी दे रही है.
 भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व में प्रदेश अध्यक्ष चुनाव के लिए 4 जनवरी की तारीख तय की है. इस दिन दोपहर 4 से 4.30 बजे तक नामांकन भरने का समय तय किया है. 5 बजे नामांकन वापस लेने का समय तय किया है. इसके बाद यह तय हो जाएगा कि अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन है. वहीं चुनाव अधिकारी रामदास अग्रवाल आज इंदौर प्रवास पर रहे. उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष चुनाव को लेकर प्रदेश के नेताओं से चर्चाकी है. यह माना जा रहा है कि आज इंदौर में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर वरिष्ठ नेताओं के बीच चर्चा के बाद किसी एक नाम पर सहमति बनाने की कवायद भी शुरु हुई है. 
क्षेत्रवाद भी बन रहा मुद्दा
भाजपा संगठन में एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष को लेकर क्षेत्रवाद का मामला उठते नजर आ रहा है. पिछले दिनों दिल्ली पहुंचे महाकौशल के नेताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के अलावा कुछ और नेताओं से चर्चाकी. इस चर्चा में उन्होंने वरिष्ठ नेताओं से कहा कि लंबे समय से चंबल-ग्वालियर, मालवा, निमाड. को अध्यक्ष पद प्रतिनिधित्व मिला है. इस बार महाकौलश के अलावा विंध्य या बुंदेलखंड से अध्यक्ष पद के लिए किसी एक व्यक्ति के नाम पर सहमति बनाईजाए. वैसे महाकौशल से विनोद गोटिया इस पद के लिए दावेदार के रुप में सामने भी आए हैं. इसके अलावा विंध्य एवं बुंदेलखंड के नेता मौन रहकर दावेदारी कर हैं.