सोमवार, 3 जून 2019

राजधानी में पेयजल संकट, किया चक्काजाम

राजधानी में पेयजल संकट को लेकर आज लोग सड़क पर उतर आए. कोलार क्षेत्र में लोगों ने चक्काजाम कर दिया, जिसके चलते वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगी रही. जानकारी मिलने पर पुलिस और प्रशासन के आला अफसर पहुंचे और लोगों को समस्या के जल्द निदान करने का आश्वासन दिया.
राजधानी के कोलार क्षेत्र में पेयजल संकट से जूझ रहे लोग आज एकत्रित होकर सड़क पर उतर आए. इस क्षेत्र में गर्मी के अलावा पूरे बारह महीने पानी की समस्या बनी रहती है. लोगों ने कई बार नगर निगम अधिकारियों से समस्या को लेकर चर्चा की, मगर अब तक केवल आश्वासन ही मिलता रहा. हाल यह है कि लोगों को दो से तीन दिनों तक पानी नहीं मिल पाता है. लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी के इस दौर में भी अधिकारी उनकी नहीं सुन रहे हैं. यहां के लोग निजी टेंकरों से पानी ले रहे हैं. लोगों का कहना है कि इन दिनों टेंकर मालिकों ने भी दमा दो गुना कर दिए हैं, जिससे और भी परेशानी बढ़ गई है. रहवासियों का आरोप था कि क्षेत्र में आए दिन पानी की समस्या से लोग परेशान होते रहे हैं, अधिकारी कभी यह कहते हैं कि पाइप लाइन लीकेज है, तो कभी पाइल लाईन की सफाई की बात कही जाती है. मगर लोगों की समस्याओं को दूर करने के प्रयास अब तक नहीं किए गए हैं.
हो सकती है विकराल स्थिति
उल्लेखनीय है कि राजधानी चार जलस्तत्रोत के भरोसे है नर्मदा,कैरवा डैम, कोलार डैम,  और बड़ा तालाब लेकिन चार की हालत खराब हो चुकी है बड़ा तालाब डैड लेवल से निचे पहुंच चुका है जिसके बाद अब पुराने शहर में जहां बड़े तालाब से पानी की सप्लाई होती है वहां सबसे ज्यादा स्थिति विकराल हो सकती है. कलियासोत डैम और कैरवा डैम की भी यहीं स्थिति बनी हुई है दोनों डैम में भी 15 से 20 दिन का पानी बचा है. उधर मौसम विभाग ने पहले ही संभावना जता दी है कि इस बार मानसून 15 जून के बजाए 20 जून के आसपास आएगा.

प्रदेश कांग्रेस से मांगा बूथों की वोटिंग का रिकार्ड

 परंपरागत वोट बैंक वाले बूथों पर मिली हार  
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मध्यप्रदेश कांग्रेस से बूथ वार वोटिंग का रिकार्ड मांगा है, यह रिकार्ड 7 जून तक कांग्रेस को दिल्ली भेजना है. परंपरागत वोट बैंक वाले बूथों पर कांग्रेस का मिली हार के कारणों की समीक्षा इस रिकार्ड के आधार पर की जाएगी. 
मध्यप्रदेश में कांग्रेस की हार के कारणों को लेकर दिल्ली से लेकर मध्यप्रदेश के नेता मंथन में जुटे हैं. ऐसे में एक बात यह भी सामने आई है कि कांग्रेस को इस लोकसभा चुनाव में कई स्थानों पर अपने परंपरागत बूथों पर भी हार का सामना करना पड़ा है. इस हार की बात सामने आने के बाद एआईसीसी ने बूथों का वोटिंग का रिकार्ड प्रदेश संगठन से मांगा है. कांग्रेस के महासचिव के.सी.वेणुगोपाल की ओर से आए एक सर्कुलर में पार्टी से भी 29 संसदीय क्षेत्रों का यह रिकार्ड भेजने को कहा गया है, साथ ही इस बात का भी सर्कुलर में उल्लेख है कि 7 जून तक यह जानकारी अनिवार्य रुप से दिल्ली भेजी जाए. सूत्रों की माने तो दिल्ली में इस रिकार्ड के आधार पर कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की भूमिका तय की जाएगी पार्टी यह भी देखगी कि कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक वाले बूथों पर उसकी इस बार हार किन कारणों से हुई. उन कारणों को खोज कर बूथवार संगठन को मजबूत करने का काम कांग्रेस द्वारा किया जाएगा.
 थम नहीं रही तकरार
लोकसभा चुनाव में हार पर मंथन करने आए दिल्ली के नेताओं के सामने प्रत्याशी खुलकर बोल रहे हैं. इस दौरान कांग्रेस की कलह भी सामने आ रही है. विंध्य, बुंदेलखंड सहित मालवा अंचल के नेताओं द्वारा संगठन और नेताओं पर ऊंगली भी उठाई जा रही है, तो कहीं प्रत्याशी चयन प्रक्रिया को गलत बताया जा रहा है. वहीं ईवीएम का मुद्दा भी प्रत्याशी बना रहे हैं. एआईसीसी सचिव सुधांशु त्रिपाठी और संजय कपूर मालवा और विंध्य एवं बुंदेलखंड संसदीय क्षेत्रों में कांग्रेस की हार को लेकर लगातार मंथन कर रहे हैं. दोनों नेताओं के सामने प्रत्याशी और स्थानीय नेता खुलकर बोल रहे हैं. वर्तमान विधायक सुखेन्द्र सिंह बना रीवा में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को गलत बताया. वहीं पार्टी फंड का मुद्दा भी उठाया और कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी को फंड कम देती है.वहीं सीधी से प्रत्याशी अजय सिंह ने ईवीएम को मुद्दा बनाया. जबकि मालवा की देवास सीट से चुनाव हारे प्रहलाद टिपाणिया ने गुटबाजी के कारण कांग्रेस की हार को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि उनकी सीट पर गुटबाजी हार का प्रमुख कारण रही है. टिपाणिया ने तो यहां तक आरोप लगा दिए कि उनकी सीट पर सवर्ण नेताओं ने प्रचार नहीं किया, कांग्रेस में जाति को लेकर भेदभाव हुआ है.

रविवार, 2 जून 2019

जमीनी पकड़ मजबूत करने में जुटे दल

कांग्रेस स्थानीय नेताओं से ले रही हार की जानकारी, भाजपा कर रही सदस्यता अभियान की तैयारी

मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव के बाद अब राज्य में भाजपा और कांग्रेस के अलावा अन्य राजनीतिक दल फिर से अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं. इसके लिए दलों द्वारा संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज की गई है. भाजपा जहां राज्य में सदस्यता अभियान की तैयारी में जुटी है, वहीं कांग्रेस के शीर्ष नेता इन दिनों हार पर मंथन करते हुए स्थानीय नेताओं से चर्चा कर रहे हैं. चुनाव में करारी हार के बाद अब कांग्रेस नेताओं का ध्यान स्थानीय नेताओं की ओर गया है. कांग्रेस इन नेताओं के सहारे फिर से प्रदेश में संगठन मजबूत करने का प्रयास कर रही है.
मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस में मंथन का दौर तो जारी है, लेकिन इन दिनों अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा अलग-अलग हिस्सों में भेजे गए पदाधिकारियों द्वारा हार पर मंथन किया जा रहा है. ये पदाधिकारी प्रत्याशी और जनप्रतिनिधियों से तो चर्चा कर हार के कारणों को तो जान रहे हैं, वहीं स्थानीय नेताओं को महत्व देते हुए उनसे हार के कारणों की जानकारी ले रहे हैं. साथ ही संगठन की स्थिति की जानकारी ली जा रही है. कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सुधांशु त्रिपाठी ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में बुंदेलखंड की लोकसभा सीटों की समीक्षा की, इन सीटों पर हारे कांग्रेस प्रत्याशियों से तो उन्होंने जानकारी ली है, साथ ही जनप्रतिनिधियों के अलावा स्थानीय नेताओं से भी हार के कारणों पर मंथन किया. इसी तरह मालवा में लोकसभा सीटों पर कांग्रेस को मिली हार को लेकर सचिव संजय कपूर ने बैठकें के लेकर हार पर मंथन किया है. ये नेता लोकसभा क्षेत्र के जिले के नेताओं से हार का कारण जरुर जान रहे हैं. सूत्रों की माने तो दिल्ली से मिले निर्देश के बाद ये नेता स्थानीय नेताओं को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. राष्ट्रीय नेतृत्व ने इन्हें बड़े नेताओं से बातचीत करने से दूर रहने को कहा है. साथ ही स्थानीय नेताओं की जानकारी एकत्रित करते हुए संगठन की स्थिति का जायजा लेने को कहा गया है. ये नेता अपनी रिपोर्ट बनाकर दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस को देंगे. दिल्ली से आए इन नेताओं की इस पहल से राज्य के स्थानीय नेताओं में इस बात की खुशी है कि लंबे समय पर कांग्रेस स्थानीय  नेताओं को महत्व दे रही है. स्थानीय नेताओं ने दिल्ली से आए नेताओं से चर्चा में कहा कि अगर उनकी सुनी जाती है और कांग्रेस की कमजोरी को समझा जाता है तो संगठन को मजबूत किया जा सकता है.
भाजपा का ध्यान सदस्यता अभियान पर

भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव में जीत के जश्न के साथ ही अब संगठन की मजबूती पर ध्यान देना शुरु कर दिया है. वैसे संगठनात्मक चुनाव के चलते भाजपा का राष्ट्रीय स्तर पर सदस्यता अभियान चलाया जाता है. चुनाव के बाद फिर से संगठनात्मक चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है. संगठन चुनाव के पहले सदस्यता अभियान चलाकर उसे पूरा करने में कम से कम तीन माह का वक्त लगता है, जिसे प्रदेश प्रदेश संगठन जल्द पूरा करना चाह रहा है. वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष राकेश को राष्ट्रीय इकाई प्रदेश में सक्रिय रखना चाह रही है, इसके लिए उन्होंने संगठनात्मक चुनाव के पहले सदस्यता अभियान की तैयारी करनी शुरु कर दी है. भाजपा द्वारा इस माह के अंत में सदस्यता अभियान की शुरुआत की जा सकती है. इस अभियान के साथ-साथ भाजपा संगठन को मजबूती देने का काम कर रही है. भाजपा के ये संगठनात्मक चुनाव जिला, संभाग स्तर से होते हुए प्रदेश स्तर पर होंगे. इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ब्लाक, जिला इकाईयों को महत्व देते हुए आगे की रणनीति तय कर रहे हैं.
बसपा में दिखने लगा बदलाव

लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद बसपा ने राज्य में एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष बदल दिया है. हार की समीक्षा के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने बसपा के प्रदेश अध्यक्ष डी.पी. चौधरी को पद से हटाकर उन्हें उज्जैन जोन का प्रभार दे दिया है. मायावती ने राज्य में युवाओं को सक्रिय करने के लिए अब प्रदेश की कमान रमाकांत पुत्तल को सौंपी है. विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव में भी बसपा को जब करारी हार का सामना करना पड़ा तो मायावती ने अब संगठन में बड़े बदलाव का संकेत दिया है. मायावती ने प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ जोन अध्यक्षों में भी बदलाव किया है. मायावती ने चार माह के अंदर दूसरी बार प्रदेश अध्यक्ष बदला है. विधानसभा चुनाव में हार के बाद प्रदीप अहिरवार को हटाकर डी.पी.चौधरी को अध्यक्ष बनाया था, मगर परिणाम आशा के अनुरुप नहीं आए.
सपा अब भी तलाश रही प्रदेश अध्यक्ष
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी ने प्रदेश की कार्यकारिणी को भंग कर दिया था, मगर यह कार्यकारिणी अब भी नहीं बन पाई है. सपा ने प्रदेश में लोकसभा चुनाव बिना संगठन के ही लड़ा. किसी नेता के पास कोई अधिकार नहीं था. अब सपा से जुड़े नेताओं को इस बात का इंतजार है कि जल्द ही सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदेश इकाई का गठन करेंगे. सूत्रों की माने तो अखिलेश यादव प्रदेश में ऐसा अध्यक्ष चाह रहे हैं जो जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूती दे और नए मतदाताओं को संगठन से जोड़े. खासकर युवाओं को वे संगठन में कमान देना चाह रहे हैं, मगर अब तक उन्हें प्रदेश में ऐसा कोई नेता नहीं मिला है. इसके चलते सपा से जुड़े रहे नेताओं की चिंता बढ़ रही है कि वे क्या करें, किधर जाएं.

12 फीसदी तक बढ़ सकते हैं बिजली के दाम

मध्यप्रदेश में सरकार बिजली महंगी करने की तैयारी कर रही है. बिजली कंपनियों ने इसके लिए सरकार को प्रस्ताव दिया है. अगर सरकार ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी तो 12 प्रतिशत तक बिजली महंगी हो सकती है.
राज्य में बिजली कंपनियां बिजली के दाम बढ़ाना चाहती है. इसके लिए कंपनियों द्वारा एक प्रस्ताव सरकार को दिया गया है.  सूत्रों के अनुसार बिजली कंपनी ने फरवरी 2019 में मप्र विद्युत नियामक आयोग को टैरिफ प्रस्ताव भेजा है, इसमें 1.5 फीसद औसत बढ़ोतरी का जिक्र किया गया है. बिजली कंपनी ने पिछले 23 और 25 मई को दोबारा रिव्यू पिटीशन दायर की, जिसमें 4098 करोड़ का घाटा बताते हुए 12 फीसदी बिजली के दाम बढ़ाने की सिफारिश की गई. सूत्रों की माने तो साल नवंबर 2018 में मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने टू-अप पिटीशन दायर कर 3837 करोड़ रुपए का घाटा दर बढ़ाकर मांगा था, जिसे आयोग ने मंजूर किया है. इसी के बाद दाम बढ़ाने की तैयारी हुई.
बिजली कंपनी के प्रस्ताव के अनुसार 100 यूनिट बिजली की खपत वाले उपभोक्ता के मौजूदा बिल में करीब 25 रुपए अतिरिक्त  बोझ आएगा. घरेलू उपभोक्ता को मौजूदा टैरिफ के मुताबिक औसत दाम 5.95 रुपए प्रति यूनिट बिजली मिलती है. बिजली की मौजूदा दर के हिसाब से अभी 100 यूनिट बिजली बिल का दाम करीब 517 रुपए आता है. बिजली के दाम बढ़े तो ये करीब 542.50 रुपए के आसपास होगा. करीब 25 रूपए का अंतर आएगा.
फिक्स चार्ज भी बढ़ेगा
बिजली कंपनी ने फिक्स जार्च बिल में ऊर्जा प्रभार के साथ जुड़कर आता है. अभी उपभोक्ता को 101 यूनिट से 300 यूनिट तक खपत पर शहर में 90 और गांव में 65 रुपए जार्च देना होता था. इसे अब 80 रुपए किया है। 101 से 300 यूनिट में 17 रूपए प्रति आधा किलोवाट लोड पर बढ़ाकर 24 रुपए. तथा 300 यूनिट से ऊपर पर 21 रुपए प्रति आधा किलोवाट से बढ़ाकर 27 रुपए प्रति आधा किलोवाट करने का प्रस्ताव बनाया है.

शनिवार, 1 जून 2019

सुमित्रा महाजन को मिलेगी मार्गदर्शक मंडल की कमान!

 कैलाश जोशी, बाबूलाल गौर, विक्रम वर्मा होंगे सदस्य

मध्यप्रदेश भाजपा में बड़े स्तर पर बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है. अगर केन्द्र ने सुमित्रा महाजन को कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी तो प्रदेश संगठन उन्हें मार्गदर्शक मंडल की जिम्मेदारी सौंपने पर विचार करने लगा है. मार्गदर्शक मंडल की संख्या में भी इजाफा होगा
मध्यप्रदेश में विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान उम्र का हवाला देकर जिन नेताओं को टिकट से वंचित किया गया था, उन्हें अब मार्गदर्शक मंडल सदस्य बनाने पर विचार किया जाने लगा है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने से यह संकेत स्पष्ट हो गए हैं कि वे अब प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव करने वाले हैं. नई टीम का गठन करने के लिए वे युवाओं को ज्यादा मौका देंगे. वहीं बुजुर्ग नेताओं को लेकर भी वे विचार करने लगे हैं. सूत्रों की माने तो राज्य में कैलाश जोशी, बाबूलाल गौर, विक्रम वर्मा, सुमित्रा महाजन के अलावा आधा दर्जन अन्य बुजुर्ग नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में सदस्य बनाने की कवायद भाजपा में चल पड़ी है. इस मार्गदर्शक मंडल की कमान सुमित्रा महाजन को सौंपी जा सकती है. कहा जा रहा है कि पूर्व में सुंदरलाल पटवा नाराज कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को समझाइश देने का कार्य किया करते थे, अब यह कार्य मार्गदर्शक मंडल को सौंपने की तैयारी भाजपा संगठन कर रहा है.

अगले माह मिल सकती है विद्यार्थियों को साइकिल

स्कूल शिक्षा विभाग ने खरीदी का दिया आर्डर

लोक शिक्षण संचालनालय ने शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों को वितरित की जाने वाली साइकिलों की खरीदी का आर्डर दे दिया है. संभावना जताई जा रही है कि जुलाई माह में विद्यार्थियों को साइकिल मिल सकती है.
मध्यप्रदेश में आचार संहिता लागू रहने के कारण प्रदेश के विद्यार्थियों को साइकिल वितरण का काम अटक गया था. अब इसे जल्द पूरा करने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने काम तेज कर दिया है. संचालनालय ने विद्यार्थियों को साइकिल वितरण के  लिए आर्डर दे दिया है. संचालनालय के अनुसार साइकिल पाने वाले विद्यार्थियों में वो विद्यार्थी शामिल होंगे, जिनके घर से स्कूल की दूरी दो किमी से अधिक है.  इस तरह साइकिल का लाभ प्रदेश के 5 लाख 91 हजार 406 विद्यार्थियों को मिलेगा. बताया जा रहा है कि इस बार साइकिलों की बेहतर क्वालिटी पर ध्यान दिया गया है.
छात्रावास में रहने वालों को भी मिलेगी साइकिल
सत्र 2019-20 में उन सभी विद्यार्थियों को साइकिल वितरित की जाएगी, जो 6 वीं व 9 वीं में अध्ययनरत हैं, इसके लिए लगभग 6 लाख साइकिलें खरीदने के निर्देश दिए गए हैं. भोपाल जिले में 3874 विद्यार्थियों को साइकिल वितरित की जाएगी. साथ ही इस बार छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को भी साइकिलें दी जाएगी. जब वे छात्रावास छोड़ने पर साइकिलें वहीं जमा करनी होगी. 

दलों की नजर अब नगरीय निकाय चुनाव पर

 लोकसभा चुनाव में जीत से भाजपा में उत्साह, कांग्रेस भी जुटी तैयारी में



राज्य में लोकसभा चुनाव के बाद राजनीतिक दलों ने नगरीय निकाय चुनाव की तैयारी शुरु कर दी है. राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने में जूट गए हैं. कांग्रेस जहां नाराज विधायकों को साध रही है, वहीं भाजपा बूथों की कमजोरी को तलाश कर उसे दूर करने की तैयारी कर रही है. वहीं बहुजन समाज पार्टी अपने बिखरे वोट बैंक को फिर से अपनी ओर लाने की कवायद कर रही है.
नगरीय निकाय के तहत राज्य में पंचायत, सहकारिता और मंडी के चुनाव होने हैं.  लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस और बसपा इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर अधिक से अधिक स्थानों पर जीत दर्ज कराकर मैदानी स्तर पर संगठन को मजबूत करने की तैयारी में हैं. दोनों ही दल कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाए रखने के लिए भी यह प्रयास कर रहे हैं. कांग्रेस ने नाराज विधायकों को साधने के लिए जिला योजना समितियों के समितियों के पुनर्गठन के निर्देश दिए हैं. कांग्रेस प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता वाली इस समिति के जरिए विधायकों की अपेक्षा को पूरा करना चाहती है. वहीं भाजपा लोकसभा चुनाव में कमजोर रहे बूथों की कमजोरी को दूर करने की तैयारी में जुट गई है. भाजपा इस चुनाव में भी कांग्रेस को करारी शिकस्त देना चाहती है. भाजपा के पदाधिकारी इस पखवाड़े से मैदानी सक्रियता भी दिखाना शुरु कर देंगे.
बसपा ने पदाधिकारियों को किया सक्रिय
बहुजन समाज पार्टी ने अपने बिखरे वोट बैंक को फिर से अपनी ओर आकर्षित करने की कवायद तेज की है. बसपा ने लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब नगरीय निकाय चुनाव की तैयारी में जुटने के लिए पदाधिकारियों को कहा है. बसपा चाहती है कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जिस तरह से उसका अपना वोट बैंक उसके हाथों से फिसला है, वह फिर से उसकी ओर आकर्षित हो. बसपा के प्रदेश प्रभारी रामजी गौतम ने प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में साफ संकेत दिए हैं कि नगरीय निकाय चुनाव अधिक से अधिक स्थान पर जीत हासिल हो जिससे कार्यकर्ता का मनोबल वापस लौटे.