रविवार, 2 जून 2019

जमीनी पकड़ मजबूत करने में जुटे दल

कांग्रेस स्थानीय नेताओं से ले रही हार की जानकारी, भाजपा कर रही सदस्यता अभियान की तैयारी

मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव के बाद अब राज्य में भाजपा और कांग्रेस के अलावा अन्य राजनीतिक दल फिर से अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं. इसके लिए दलों द्वारा संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज की गई है. भाजपा जहां राज्य में सदस्यता अभियान की तैयारी में जुटी है, वहीं कांग्रेस के शीर्ष नेता इन दिनों हार पर मंथन करते हुए स्थानीय नेताओं से चर्चा कर रहे हैं. चुनाव में करारी हार के बाद अब कांग्रेस नेताओं का ध्यान स्थानीय नेताओं की ओर गया है. कांग्रेस इन नेताओं के सहारे फिर से प्रदेश में संगठन मजबूत करने का प्रयास कर रही है.
मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस में मंथन का दौर तो जारी है, लेकिन इन दिनों अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा अलग-अलग हिस्सों में भेजे गए पदाधिकारियों द्वारा हार पर मंथन किया जा रहा है. ये पदाधिकारी प्रत्याशी और जनप्रतिनिधियों से तो चर्चा कर हार के कारणों को तो जान रहे हैं, वहीं स्थानीय नेताओं को महत्व देते हुए उनसे हार के कारणों की जानकारी ले रहे हैं. साथ ही संगठन की स्थिति की जानकारी ली जा रही है. कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सुधांशु त्रिपाठी ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में बुंदेलखंड की लोकसभा सीटों की समीक्षा की, इन सीटों पर हारे कांग्रेस प्रत्याशियों से तो उन्होंने जानकारी ली है, साथ ही जनप्रतिनिधियों के अलावा स्थानीय नेताओं से भी हार के कारणों पर मंथन किया. इसी तरह मालवा में लोकसभा सीटों पर कांग्रेस को मिली हार को लेकर सचिव संजय कपूर ने बैठकें के लेकर हार पर मंथन किया है. ये नेता लोकसभा क्षेत्र के जिले के नेताओं से हार का कारण जरुर जान रहे हैं. सूत्रों की माने तो दिल्ली से मिले निर्देश के बाद ये नेता स्थानीय नेताओं को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. राष्ट्रीय नेतृत्व ने इन्हें बड़े नेताओं से बातचीत करने से दूर रहने को कहा है. साथ ही स्थानीय नेताओं की जानकारी एकत्रित करते हुए संगठन की स्थिति का जायजा लेने को कहा गया है. ये नेता अपनी रिपोर्ट बनाकर दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस को देंगे. दिल्ली से आए इन नेताओं की इस पहल से राज्य के स्थानीय नेताओं में इस बात की खुशी है कि लंबे समय पर कांग्रेस स्थानीय  नेताओं को महत्व दे रही है. स्थानीय नेताओं ने दिल्ली से आए नेताओं से चर्चा में कहा कि अगर उनकी सुनी जाती है और कांग्रेस की कमजोरी को समझा जाता है तो संगठन को मजबूत किया जा सकता है.
भाजपा का ध्यान सदस्यता अभियान पर

भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव में जीत के जश्न के साथ ही अब संगठन की मजबूती पर ध्यान देना शुरु कर दिया है. वैसे संगठनात्मक चुनाव के चलते भाजपा का राष्ट्रीय स्तर पर सदस्यता अभियान चलाया जाता है. चुनाव के बाद फिर से संगठनात्मक चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है. संगठन चुनाव के पहले सदस्यता अभियान चलाकर उसे पूरा करने में कम से कम तीन माह का वक्त लगता है, जिसे प्रदेश प्रदेश संगठन जल्द पूरा करना चाह रहा है. वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष राकेश को राष्ट्रीय इकाई प्रदेश में सक्रिय रखना चाह रही है, इसके लिए उन्होंने संगठनात्मक चुनाव के पहले सदस्यता अभियान की तैयारी करनी शुरु कर दी है. भाजपा द्वारा इस माह के अंत में सदस्यता अभियान की शुरुआत की जा सकती है. इस अभियान के साथ-साथ भाजपा संगठन को मजबूती देने का काम कर रही है. भाजपा के ये संगठनात्मक चुनाव जिला, संभाग स्तर से होते हुए प्रदेश स्तर पर होंगे. इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ब्लाक, जिला इकाईयों को महत्व देते हुए आगे की रणनीति तय कर रहे हैं.
बसपा में दिखने लगा बदलाव

लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद बसपा ने राज्य में एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष बदल दिया है. हार की समीक्षा के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने बसपा के प्रदेश अध्यक्ष डी.पी. चौधरी को पद से हटाकर उन्हें उज्जैन जोन का प्रभार दे दिया है. मायावती ने राज्य में युवाओं को सक्रिय करने के लिए अब प्रदेश की कमान रमाकांत पुत्तल को सौंपी है. विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव में भी बसपा को जब करारी हार का सामना करना पड़ा तो मायावती ने अब संगठन में बड़े बदलाव का संकेत दिया है. मायावती ने प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ जोन अध्यक्षों में भी बदलाव किया है. मायावती ने चार माह के अंदर दूसरी बार प्रदेश अध्यक्ष बदला है. विधानसभा चुनाव में हार के बाद प्रदीप अहिरवार को हटाकर डी.पी.चौधरी को अध्यक्ष बनाया था, मगर परिणाम आशा के अनुरुप नहीं आए.
सपा अब भी तलाश रही प्रदेश अध्यक्ष
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी ने प्रदेश की कार्यकारिणी को भंग कर दिया था, मगर यह कार्यकारिणी अब भी नहीं बन पाई है. सपा ने प्रदेश में लोकसभा चुनाव बिना संगठन के ही लड़ा. किसी नेता के पास कोई अधिकार नहीं था. अब सपा से जुड़े नेताओं को इस बात का इंतजार है कि जल्द ही सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदेश इकाई का गठन करेंगे. सूत्रों की माने तो अखिलेश यादव प्रदेश में ऐसा अध्यक्ष चाह रहे हैं जो जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूती दे और नए मतदाताओं को संगठन से जोड़े. खासकर युवाओं को वे संगठन में कमान देना चाह रहे हैं, मगर अब तक उन्हें प्रदेश में ऐसा कोई नेता नहीं मिला है. इसके चलते सपा से जुड़े रहे नेताओं की चिंता बढ़ रही है कि वे क्या करें, किधर जाएं.

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