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| तरुण पिथोड़े |
अयोध्या मामले में आने वाले फैसले के चलते मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश हाई अलर्ट पर है. सरकार ने भोपाल, ग्वालियर समेत कई जिलों में अलर्ट जारी किया है. इसके तहत कलेक्टर भोपाल ने अब सोशल मीडिया पर शिकंजा कसा है.
भोपाल कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने धारा 144 लागू करने के बाद एहतियातन एक और कदम उठाया है. कलेक्टर ने सोशल मीडिया पर भी शिकंजा कसते हुए आपत्तिजनक, भड़काऊ, किसी संप्रदाय विशेष को टार्गेट करते संदेश, तस्वीर, वीडियो पोस्ट करने पर प्रतिबंध लगा दिया है. संवदेनशील जिला होने के कारण अयोध्या मामले में फैसला आने से पहले कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने भोपाल में धारा 144 लागू करने का आदेश जारी किया है.
वहीं पुलिस को सोशल मीडिया में वाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, मैसेंजर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भड़काऊ मेसेज, गलत टिप्पणी और अन्य सामग्री डालने वालों पर सख्,त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. कलेक्टर ने आदेश जारी करते हुए ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही है साथ ही लोगों से अपील की है कि अगर वह उनके पास ऐसे किसी तरह के मेसेज आते हैं तो तुरंत पुलिस को सूचना दें. उन्होंने कहा कि किसी समुदाय, सम्प्रदाय, धर्म या व्यक्ति के विरुद्ध गलत संदेश डाले जाने पर उसकी जिम्मेदारी ग्रुप एडमिन की होगी.
जारी किया कंट्रोल रूम का नंबर
जिलाधिकारी ने इसके लिए पुलिस कंट्रोल रूम का नंबर जारी करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट किए जाने पर इसकी जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम को 7049106300 पर फोन कर जानकारी दी जा सकती है.
भाजपा-कांग्रेस आमने सामने, गृह मंत्री ने बताया अनुचित, करणी सेना ने दी धमकी
मध्यप्रदेश में अब पुलिस थानों में पुलिस संदिग्ध अपराधी और अपराधियों के साथ मारपीट करने से पहले उसकी जाति पूछेगी. राज्य के पुलिस महानिदेशक वी.के.सिंह ने जरुरी होता तो वर्ग विशेष के लोगों को हिरासतम में लिया जाए और इस दौरान उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार नहीं किया जाए. पुलिस महानिदेशक के इस आदेश का अब विरोध भी तेज हो गया है. गृह मंत्री ने भी इस आदेश को अनुचित बताया है. वहीं करणी सेना ने इसे लेकर विद्रोह की धमकी तक दे डाली है.
मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक वी.के.सिंह के इस निर्देश के बाद राज्य की पुलिस फिर चर्चा में आ गई है. पुलिस महानिदेशक ने 4 नवंबर को एक पत्र राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों को लिखते हुए निर्देश दिए हैं कि थानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों के
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| वी.के.सिंह |
साथ मारपीट और दुव्यर्वहार न किया जाए. अगर ऐसी शिकायतें मिलती हैं तो पुलिस अधिकारी जिम्मेदार होंगे. पुलिस महानिदेशक ने अपने निर्देश में कहा है कि बहुत जरूरी हो तब वर्ग विशेष के लोगों को हिरासत में लिया जाए. हिरासत में लेने के दौरान उनसे मारपीट और दुर्व्यवहार बिल्कुल नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति आयोग ने गंभीर आपत्ति दर्ज की है. पुलिस महानिदेशक ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी विधि के सुसंगत प्रावधानों एवं प्रक्रिया का पूर्णत: पालन करते हुए ही की जाए. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पुलिस हिरासत में किसी भी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्ति के साथ अभद्र व्यवहार अथवा मारपीट न की जाए.
कानून के दायरे में हो कार्रवाई
प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक नंदन दुबे ने वर्तमान पुलिस महानिदेशक वी.के.सिंह के आदेश को लेकर कहा कि पुलिस द्वारा किसी भी व्यक्ति पर कानून के दायरे में कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि पुलिस ध्यान रखे कि किसी के साथ अन्याय न हो. सभी के साथ न्याय करें. एक पक्ष, दो पक्ष कि हिसाब से नहीं, कानून के हिसाब से कार्रवाई करें.
गृह मंत्री ने आदेश को बताया अनुचित
पुलिस महानिदेशक के इस आदेश के बाद गर्माई सियासत को देख अब राज्य के गृह मंत्री बाला बच्चन ने भी पुलिस महानिदेशक के आदेश को अनुचित बताया है. उन्होंने कहा कि जाति पूछकर किसी पर कार्रवाई नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि वे स्वयं पुलिस महानिदेशक से इस मामले को लेकर चर्चा करेंगे. जल्द ही इस मुद्दे को लेकर वे पुलिस मुख्यालय में बैठक भी लेंगे. उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें पूरे देश में सामने आई है. अजा, अजजा वर्ग के लोगों के साथ इस तरह के मामले हुए हैं. उसी के परिपेक्ष्य में पुलिस महानिदेशक ने यह बात कही होगी, मगर मैं आदेश देखकर उनसे (पुलिस महानिदेशक) बात करुंगा.
मंत्री ने आदेश को बताया सही
जनजाति कार्य विभाग के मंत्री ओमकार सिंह मरकाम ने पुलिस महानिदेशक के इस आदेश को सही बताया. उन्होंने कहा कि सबको अपनी बात रखने का अधिकार है. मरकाम ने पिछली सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा की सरकार में आदिवासियों की सुनवाई नहीं होती थी, जिसके कारण ऐसे मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर जातियों पर बात की जाती है तो भोपाल में जितने भी भवन बने हैं, उसमें मजदूरी किन जातियों ने की है, उसका वर्गीकरण करके देख लो. उन्होंने कहा कि अगर गटर की सफाई करनी होती है तो उसे भी एक ही जाती के लोग करते हैं.
पत्र ने साबित किया कानून व्यवस्था है खराब
राज्य के पूर्व मंत्री विश्वास सारंग ने पुलिस महानिदेशक के पत्र को लेकर कहा कि यह पत्र इस बात को साबित कर रहा है कि राज्य में कानून व्यवस्था खराब है. भाजपा इसे लेकर कई बार सरकार पर सवाल खड़े कर चुकी है. उन्होंने कहा कि सरेराह लोगों को मारा जा रहा है, छोटी-छोटी बच्चियों के साथ बलात्कार किए जा रहे हैं. फरियादी थाने जाता है, तो उसके साथ दुर्व्यवहार ही नहीं, मारपीट भी की जाती है. उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने इस तरह जिलों के अधिकारियों को पत्र लिखा है तो कुछ न कुछ तो हैं. मुख्यमंत्री को इस मामले को लेकर सामने आना चाहिए और स्थिति को स्पष्ट करना चाहिए.
विधायक ने पूछा क्या हाथ जोड़कर करोगे गिरफ्तारी
कांग्रेस विधायक संजय यादव ने पुलिस महकमें से इस आदेश को लेकर पूछा है कि क्या अपराधियों को हाथ जोड़कर गिरफ्तार करोगे? यादव ने कहा कि अधिकारी कुछ भी करते हैं इसी में सरकार बदनाम होती है. अच्छा बर्ताव करना है तो जनता के साथ करो अपराधी के साथ अच्छा व्यव्हार करोगे तो वह रोज अपराध करेगा. खातिरदारी करोगे, नाश्ता कराओगे क्या. जनता का ध्यान रखा जाना चाहिए, चाहे वह कोई भी वर्ग का हो. अपराधी तो अपराधी होता है, चाहे वह किसी वर्ग का हो.
करणी सेना ने दी धमकी
पुलिस महानिदेशक के फरमान के विरोध में करणी सेना ने विद्रोह की धमकी दी है. करणी सेना के देश संगठन मंत्री शैलेन्द्र सिंह झाला ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर आदेश वापस नहीं लिया गया तो पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा.
राज्यपाल से की मुलाकात, फैसला निरस्त करने की मांग
मध्यप्रदेश में भाजपा विधायक की सदस्यता शून्य किए जाने के मामले में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा मिली फटकार के बाद प्रदेश संगठन सक्रिय हो गया है. भाजपा नेताओं ने आज सुबह से सक्रियता दिखाई और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के निवास पर एकत्रित होकर बैठक की. इसके बाद राजभवन पहुंचकर राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात कर विधानसभा सचिवालय द्वारा लिए गए फैसले को निरस्त करने की मांग की.
मध्यप्रदेश की पवई विधानसभा सीट के विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता समाप्त कर पवई विधानसभा शून्य घोषित करने के विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति के फैसले को भाजपा के राष्ट्रीय संगठन ने गंभीरता से लिया है. इस मामले को लेकर राज्य में भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग चल रही थी, मगर मुख्यमंत्री कमलनाथ के दिए बयान ‘अभी दो-तीन और आएंगे’ को राष्ट्रीय संगठन ने गंभीरता से लिया है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान की आज दिल्ली में प्रभारी राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश नड्डा से हुई मुलाकात के बाद इस मामले को पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने गंभीरता से लिया और प्रदेश संगठन को फटकार लगाई. इस फटकार के बाद आनन-फानन में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के निवास पर भाजपा के नेता एकत्रित हुए और राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात करने फैसला लिया. मिश्रा के निवास पर चली बैठक में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा, यशोधरा राजे सिंधिया, नारायण त्रिपाठी, शैलेन्द्र जैन, मोहन यादव सहित अन्य विधायक शामिल थे.
मिश्रा के निवास पर बैठक के बाद भाजपा नेताओं ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात की. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा लिया गया फैसला न्याय संगत नहीं है, इसलिए आज हमने राज्यपाल से मुलाकार कर विधानसभा सचिवालय के इस फैसले को निरस्त करने की मांग की है. उन्होंने रिप्रेजेंटेटिव एक्ट की धारा 191 का हवाला देते हुए कहा है कि इस पर राज्यपाल ही फैसला ले सकते हैं. विधानसभा अध्यक्ष या सचिवालय फैसला नहीं ले सकते हैं.
यह है मामला
मध्यप्रदेश के पवई विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी सहित 12 लोगों पर आरोप था कि उन्होंने रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई करने वाले रैपुरा तहसीलदार को बीच सड़क पर रोककर मारपीट की थी. इस मामले में सभी पर बलवा करने का आरोप भी था. इस मामले में लोधी को दो साल की सजा सुनाई गई है. विशेष अदालत के इस फैसले के बाद विधानसभा ने शनिवार को भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता समाप्त कर दी. हाालंकि मामले को लेकर लोधी ने हाईकोर्ट की शरण ली है. भाजपा विधायक ने भोपाल की विशेष अदालत के इस फैसले को सोमवार को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दायर की है. उन्होंने मांग की है कि भोपाल की विशेष अदालत के इस फैसले पर रोक लगाई जाए.
मध्यप्रदेश में तृतीय वर्ग कर्मचारी अपनी 24 सूत्री मांगों को लेकर 7 नवंबर से आंदोलन करेंगे. आंदोलन के पहले चरण में तहसील, ब्लाक सतर पर प्रदर्शन किया जाएगा. जबकि दूसरे चरण में 11 नवंबर से जिला मुख्यालयों पर धरना दिया जाएगा. आंदोलन के तीसरे चरण में प्रदेश स्तरीय धरना राजधानी भोपाल में दिया जाएगा.
तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के उप प्रांताध्यक्ष लक्ष्मीनारायण शर्मा ने बताया कि मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ द्वारा कर्मचारियों की लंबित मांगे जिसमें 5 फीसदी महंगाई भत्ता , सातवें वेतनमान के सभी भत्ते केन्द्रीय दर पर दिये जाएं, विभिन्न कैडर की वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए, प्रदेश के लिपिकों के लिये गठित रमेशचन्द्र शर्मा समिति की 23 अनुसंशाओं को लागू किया जाए, शिक्षकों को पदोन्नत पदनाम दिए जाएंं, ई अटेंडेंस समाप्त की जाए, नई पेंशन योजना को समाप्त कर पूरानी पेंशन योजना लागू की जाए, संविदा प्रथा समाप्त कर सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए, रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति की जाए, केंद्रीय वेतनमान की ग्रेड वेतन विसंगति दूर करने, अध्यापक विभिन्न वर्गों की वेतन ,आंगनबाड़ी स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा कार्यकर्ता को न्यूनतम वेतन 15 हजार दिए जाने आदि प्रमुख है की ओर सरकार का ध्यान खीचने के लिए तीन चरणों में आंदोलन किया जाएगा. आंदोलन के प्रथम चरण में 7 नवंबर को तहसील एवं ब्लॉक स्तर पर कर्मचारी एकत्र होकर प्रदर्शन करेंगे एवं मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपेगे. आंदोलन की तैयारी को लेकर संभाग स्तर पर ग्वालियर, रीवा एवं शहडोल संभाग में बैठक आयोजित की गई है. आंदोलन के दूसरे चरण में 11 दिसंबर को जिला मुख्यालयों पर तथा तृतीय चरण में 17 जनवरी को पूरे प्रदेश के प्रतिनिधि भोपाल में एकत्रित होकर धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपेंगे.

मध्यप्रदेश में पशुओं के लिए चलाई जाने वाली नि:शुल्क संजीवनी एक्सप्रेस को सरकार ने बंद कर दिया है. अब इसके लिए किसानों को पैसे देने पड़ेंगे. प्रदेश सरकार ने संजीवनी एक्सप्रेस के लिए सौ रुपए का शुल्क निर्धारित किया है.
पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव का कहना है कि कई बार कुछ शरारती तत्व फर्जी काल कर संजीवनी एक्सप्रेस को बुला लेते हैं, लेकिन मौके पर पहुंचने पर कुछ नहीं मिलता है. इसी के चलते यह फैसला लिया गया है. उनका कहना है कि जहां इमरजेंसी केस होगा, वहां अब भी नि:शुल्क सेवाएं दी जाएंगी. पिछले साल 2 अक्तूबर को तत्कालीन भाजपा सरकार ने पशु संजीवनी योजना की शुरूआत की थी, जिसमें 1962 पर काल करके पशुओं के इलाज के लिए संजीवनी एक्सप्रेस को बुलाया जा सकता है. संजीवनी एक्सप्रेस में एक पशु चिकित्सक के साथ- साथ एक सहायक भी तैनात रहता है. जो नि:शुल्क इलाज करते थे, लेकिन अब इसके लिए काल करने वाले को सौ रुपए देना पड़ेगा. मध्यप्रदेश में इस समय कुल 1 हजार 313 पशु संजीवनी एक्सप्रेस वाहन चलाए जा रहे हैं.
सरकार गाय से लेगी शुल्क
प्रदेश सरकार द्वारा संजीवनी योजना को बंद किए जाने का विरोध भाजपा ने किया है. भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि सरकार अब गाय से शुल्क लेगी. उन्होंने कहा कि समझ नहीं आ रहा है कि गाय से शुल्क लेकर सरकार कैसे खजाना भरेगी. उन्होंने कहा कि संजीवनी योजना बंद करने के फैसले से कांग्रेस का गाय के प्रति प्रेम उजागर हो गया है. पहले कहा था कि 1 हजार गौ शालाएं खोली जाएंगी, गायों को सड़कों पर नहीं घूमने दिया जाएगा, मगर अब भी गायें सड़कों पर घूमती नजर आ रही है. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने यह योजना किसानों के हित के लिए चलाई थी, हमारी मांग है कि सरकार इस योजना को फिर से चालू करे.
भाजपा ने दिखाया आक्रोश, केन्द्र के खिलाफ कांग्रेस बैठी धरने पर
किसानों को लेकर भाजपा ने आज प्रदेश स्तर पर प्रदर्शन किया. भाजपा ने बिजली बिल और किसानों को मुआवजा न देने के लिए राज्य की कमलनाथ सरकार को जमकर कोसा. प्रदर्शन के दौरान भाजपा ने कई स्थानों पर बिजली बिल भी जलाए.
राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में आज भाजपा ने किसानों को ऋण माफी, मुआवजा और बिजली बिल सहित अन्य मांगों के विरोध में आज किसान आंदोलन के तहत प्रदर्शन किया. भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने अलग-अलग स्थानों पर आंदोलन की कमान संभाली. भाजपा के किसान आंदोलन के दौरान बिजली के भारी भरकम बिल आने पर बिलों की होली जलाई गई और कर्जमाफी तथा बाढ़ राहत का मुआवजा नहीं मिलने पर कमलनाथ सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई. कई जिलों में धारा 144 लागू होने के बावजूद भाजपा नेताओं ने सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन में हिस्सेदारी की. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज रीवा में प्रदर्शन का नेतृत्व करने पहुंचे. वहां उन्होंने पहले कर्जमाफी का फायदा नहीं मिलने और फसल खराब होने के कारण आत्महत्या कर लेने वाले किसान वंशपति साहू के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी. इसके बाद शिवराज गांव की खराब फसलों को देखने खेतों में गए. फिर रीवा आकर प्रदर्शन का नेतृत्व किया. उन्होंने कांग्रेस को झूठा बताया और कहा कि कांग्रेस ने किसानों से कर्ज माफी का वादा किया और उसे पूरा नहीं किया.हमारा किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो रहा है. कर्ज माफ करना होगा नहीं तो जनता सड़कों पर लड़ाई लड़ेगी.
वहीं नरसिंहपुर में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों के लिए जो भी कहा, उसे पूरा नहीं किया. आपदा और अन्य कारणों के नाम पर राज्य सरकार और राशि मांग रही है, जबकि केंद्र से पहले ही इसके लिए राशि मिल चुकी है. कमलनाथ सरकार ने न तो कर्ज माफ किया. न राहत राशि दी और न ही बिजली बिल हाफ किया है.
कांग्रेस सरकार अल्पमत की थी, है और रहेगी
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने मीडिया से बात करते कांग्रेस सरकार पर करारा प्रहार किया है. उन्होंने एक बार फिर कांग्रेस सरकार को अल्पमत की सरकार कहकर संबोधित किया. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को वीर पुरुष बताया. उन्होंने कहा कि तीन साल पहले जब सूखा पड़ा था तब उन्होंने 3800 करोड़ मध्यप्रदेश के कोटे से बांटे थे. कांग्रेसी बोलते थे कि हम वीर हैं, अब कहां गए वो वीर. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसानों को अब तक एक रुपए की राहत राशि नहीं मिली है और न ही बेरोजगारी भत्ता मिला है. कांग्रेस की सरकार अल्पमत की सरकार थी, है और रहेगी. सरकार को चुनौती है कि अभी चुनाव करवा लो 230 में से 30 सीट भी कांग्रेस की आ जाएंं तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा.
केन्द्र के खिलाफ धरने पर बैठी कांग्रेस
भाजपा के किसान आंदोलन के विरोध में किसानों को लेकर आज कांग्रेस ने भी प्रदेशव्यापी धरना दिया. कांग्रेस नेताओं ने जिला मुख्यालयों पर धरना देकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और केन्द्र सरकार पर जमकर प्रहार किया. राजधानी भोपाल में कांग्रेस ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर केन्द्र से जल्द राहत राशि देने की मांग की.
राजधानी भोपाल में सहित पूरे प्रदेश में कांग्रेस द्वारा आज अतिवृष्टि और बाढ़ प्रभावितों को राहत राशि देने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा राशि उपलब्ध नहीं कराए जो के विरोध में आज धरना दिया गया. राजधानी भोपाल में जिला कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश मिश्रा और ग्रामीण जिला अध्यक्ष अरुण श्रीवास्तव के नेतृत्व में जिला कांग्रेस कार्यालय जवाहर भवन के बाहर धरना दिया. इसके बाद दोपहर में सभी ने राजभवन जाकर राष्टÑपति के नाम ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में कहा गया है कि अतिवृष्टि से प्रदेश भर में हुए नुकसान के लिए प्रदेश सरकार ने केंद्र से पैसा मांगा है, लेकिन केंद्र सरकार ने भेदभाव करते हुए अब तक एक पैसा भी नहीं दिया है, जबकि कर्नाटक और बिहार को यह राशि दे दी गई है. प्रदेश के साथ पक्षपात पूर्ण रवैये से यहां के किसानों और अतिवृष्टि से प्रभातिव हुए लोगों को पूरी तरह से राहत नहीं मिल पा रही है. राजधानी के अलावा पूरे प्रदेश में जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस नेताओं ने धरना देने के बाद कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा.
भाजपा राजनीति के लिए कर रही आंदोलन
राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा पूरे प्रदेश में घड़ियाली आंसू बहा रही है. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से पूछा कि आखिर आपके 15 साल के कार्यकाल में किसानों का इतना कर्ज कैसे हुआ, किसान इतना परेशान क्यों हुआ. पहले शिवराज सिंह को यह बात जनता बतानी होगी. उन्होंने कहा कि आपके ही कृषि मंत्री ने कहा था कि उनके पास किसानों के कर्जा माफी के लिए कोई योजना नहीं है. मंदसौर में आपकी सरकार ने 6 किसानो को मरवा डाला. 15 सौ किसानों ने आत्महत्या की आपके कार्यकाल में हुई इसका जवाब पहले दें. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार के साथ भेदभाव किया है. हम किसानों की लड़ाई दिल्ली तक जाकर लड़ेंगे. पटवारी ने कहा कि प्रदेश का किसान जागरुक है, वह आगे भी आपको सबक सीखाता रहेगा.
आरक्षण को लेकर सपाक्स ने एक बार फिर सड़कों पर उतरेगा. सपाक्स कल 5 नवंबर को राजधानी में एक बड़ी रैली करेगा और निजी क्षेत्रों में दिए जा रहे आरक्षण का विरोध करेगा.
एट्रोसिटी एक्ट को लेकर प्रदेश की शिवराज सरकार की परेशानी बढ़ाने वाला संगठन सपाक्स ने अब राज्य की कमलनाथ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है. सपाक्स ने निजी क्षेत्रों में आरक्षण का विरोध करने का फैसला लिया है और इसके तहत संगठन द्वारा कल 5 नवंबर को राजधानी भोपाल में एक बड़ी रैली निकालकर प्रदर्शन किया जाएगा. इस अवसर पर सपाक्स द्वारा एक सभा का भी आयोजन किया जा रहा है. सभा बिट्टन मार्केट स्थित दशहरा मैदान पर आयोजित की जाएगी. संगठन द्वारा कल राजधानी में हलालपुरा बस स्टैंड से लेकर बिट्टन मार्केट दशहरा मैदान तक रैली निकाली जाएगी, इसके बाद यहां सम्मेलन होगा. सपाक्स द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन में प्रदेश सरकार द्वारा एमएसएमई प्रोत्साहन योजना में आरक्षण लागू किए जाने का विरोध किया जाएगा.
सपाक्स संगठन का कहना है कि लघु और मध्यम उद्योगों में रोजगार देने में अजा, अजजा और पिछड़ा वर्ग को राज्य शासन द्वारा घोषित आरक्षण के अनुसार रोजगार दिया जाना अनिवार्य किया गया है. आरक्षण का पालन नहीं करने पर उद्योगों को सब्सिडी और आरक्षित भूमि में अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए लाभ नहीं मिलेगा. संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि कल का विरोध एट्रोसिटी एक्ट और राज्य सरकार द्वारा निजी क्षेत्र में दिए जाने वाले आरक्षण को लेकर किया जा रहा है.
केन्द्र सरकार को घेरने की तैयारी में सपाक्स
संगठन के अध्यक्ष राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी ने बताया कि देशभर में एट्रोसिटी एक्ट के तहत निर्दोष लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं. सपाक्स पार्टी एट्रोसिटी एक्ट की खिलाफत करते हुए केंद्र सरकार को घेरेगा. सपाक्स द्वारा आगामी संसद सत्र में दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर 40 संगठनों से जुड़े लोग केंद्र सरकार के खिलाफ धरना देंगे.