बुधवार, 21 जून 2023

अमित शाह आज करेंगे गौरव यात्रा का शुभारंभ

भोपाल। केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह कल 22 जून को बालाघाट से वीरांगना दुर्गावती गौरव यात्रा का शुभारंभ करेंगे। यह यात्रा पांच स्थानों से निकाली जाएगी। यात्रा का समापन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 27 जून को शहडोल में करेंगे। 


मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मंत्रालय में गौरव यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती ने अकबर की फौज का वीरतापूर्वक सामना किया और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना बलिदान दे दिया। वर्तमान पीढ़ी को उनके संघर्ष से अवगत कराने के लिए यह यात्राएँ निकालने का निर्णय लिया गया है। यात्राएँ बालाघाट, छिंदवाड़ा, सिंगरामपुर (जबेरा-दमोह), रानी दुर्गावती के जन्म स्थान कालिंजर फोर्ट और धोहनी सीधी से आरंभ होंगी। सभी 5 यात्रा का समापन 27 जून को शहडोल में होगा। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी सिकल सेल एनीमिया से भारत को मुक्ति दिलाने के लिए राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम लाँच करेंगे और मध्यप्रदेश में एक करोड़ आयुष्मान कार्ड का उनके द्वारा प्रतीक स्वरूप वितरण किया जाएगा। प्रदेश के सभी वार्ड और गाँव कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़ेंगे।

उन्होंने बताया कि यात्राओं की बेहतर व्यवस्था के लिए जिला कलेक्टर, स्थानीय जन-प्रतिनिधियों और अधिकारियों को यात्रा और कार्यक्रम प्रमुख बना कर उन्हें जिम्मेदारी सौंपे। जनजातीय कार्य विभाग गौरव यात्रा का नोडल विभाग होगा, साथ ही जनअभियान परिषद, संस्कृति विभाग और युवा आयोग को भी दायित्व सौंपे गये हैं। गौरव यात्राओं की राज्य स्तर से भी मॉनीटरिंग की जाएगी।


मंत्री ने उठाई समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग


भोपाल।  चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि एक देश में एक संविधान लागू होना चाहिए। 

प्रदेश में चुनावी साल में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग उठने लगी है। यह मांग राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने उठाई है। सारंग का कहना है कि राज्य सरकार समान नागरिक कानून के लिए संकल्पित है। हर वर्ग के लिए एक देश में एक कानून जरूरी है, इसलिए मध्यप्रदेश में भी जल्द से जल्द समान नागरिक संहिता लागू किया जाएगा। मंत्री के बयान को लेकर यह माना जा रहा है कि प्रदेश में जल्द ही सरकार इसे लेकर समिति बना सकती है। 

गौरतलब है कि दिसंबर 2022 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समान नागरिक संहिता का समर्थन किया था। 2 दिन पहले भाजपा और संघ की समन्वय बैठक में भी यूसीसी के बारे में चर्चा की जा चुकी है।   

क्या है समान नागरिक संहिता

समान नागरिक संहिता के अनुसार पूरे देश के लिए एक समान कानून के साथ ही सभी धार्मिक समुदायों के लिए विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने के नियम एक होंगे। संविधान के अनुच्छेद 44 में भारत में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून का प्रावधान लागू करने की बात कही गई है। ऐसे में एक पत्नी के रहते हुए आप दूसरी शादी नहीं कर सकते। 


मंगलवार, 20 जून 2023

गायों की एकता, बाघ को बिना शिकार किए भागने पर किया मजबूर

सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई पूरी घटना


भोपाल। कहते हैं एकता में बड़ी शक्ति होती है। घर के बुजुर्ग भी एकता पर जोर देते हैं। इसका एक उदाहरण राजधानी भोपाल में पशुओं की एकता का भी देखने को मिला, जब बीती रात गायों की एकता ने बाघ को अपने शिकार को छोड़कर भागना पड़ा। 

दरअसल राजधानी भोपाल के केरवा क्षेत्र के बाघ भ्रमण क्षेत्र स्थित बुल मदर फार्म में 18 और 19 जून की रात करीब 1 बजे एक बाघ घुस आया। इस बाघ ने फार्म में बैठी एक गाय पर हमला किया। हमले से गाय चौंक गई और उसने रंभाना शुरू कर दिया, जिसके बाद गायों का झुंड वहां पहुंच गया। गायों का झुंड घायल गाय के बचाव के लिए उसके चारों और खड़ा हो गया, जिससे बाघ को मजबूरन दूर जाना पड़ा। इसके बाद काफी देर तक बाघ शिकार का दूर खड़ा होकर इंतजार करता रहा, लेकिन गायों का भी ष्यह अहसास था कि बाघ दोबारा आएगा। इसके चलते गायें घायल गाय के समीप ही झुंड बनाकर खड़ी रही। इसके चलते बाघ भी वहां से लौट गया। यह पूरी घटना फार्म हाउस के सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। फार्म हाउस परिसर में करीब 50 से 55 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। सीसीटीवी फुटेज देखने पर पता चला था कि 15 दिन पहले भी शिकार के लिए बाघ फार्म में आया था, लेकिन उस वक्त गायों को बाड़े में रखा गया था, जिसकी वजह से बाघ को खाली हाथ लौटना पड़ा। हाल ही में घटित इस घटना के बाद फार्म की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।


शनिवार, 17 जून 2023

दिग्विजय ने सौंपी 66 सीटों की अपनी रिपोर्ट

संगठन को मजबूत करने पर फोकस रहेगा कांग्रेस का

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को जिन 66 सीटों की जिम्मेदारी सौंपी थी, उन सीटों की मैदानी रिपोर्ट सिंह ने कमलनाथ को सौंप दी है। सिंह ने कार्यकर्ताओं और लोगों से चर्चा के बाद यह रिपोर्ट तैयार की है। 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को कमजोर और लगातार हार मिलने वाली सीटों की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद से सिंह इन सीटों पर मैदानी स्तर पर सक्रिय हुए और वहां कार्यकर्ताओं एवं लोगों से चर्चा की। इसके बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट तैयार की थी। यह रिपोर्ट आज उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में विस्तृत जानकारी है। बताया जा रहा है कि इन सीटों को लेकर अब हर दस दिन में समन्वय समिति की बैठक होगी। साथ ही कौन सीट के लिए सबसे प्रमुख दावेदार है। इस रिपोर्ट का एक सप्ताह में समीक्षा की जाएगी। जानकारी है कि दावेदारों के नामों पर भी एक सप्ताह में मुहर लगना शुरू हो जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ का सर्वे टिकट में सबसे बड़ा आधार होगा। हारी हुई सीटों पर कांग्रेस एक माह में दावेदारों में से नाम चयन कर सर्वे के आधार पर मैदानी तैयारी के लिए चयनित दावेदार को सक्रिय रहने को कह सकती है। 


39 दिन में किया था 35 जिलों का दौरा

सिंह को जब इन सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी, उसके बाद उन्होंने राजधानी भोपाल की बैरसिया और गोविंदपुरा सीट से अपना दौरे की ष्शुरूआत की थी। इसके बाद वे लगातार 39 दिन तक 35 जिलों का दौरा कर इन 66 सीटों पर पहुंचे थे। इन सीटों पर उन्होंने मंडलम और सेक्टर स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा की। इसके अलावा स्थानीय संगठन पदाधिकारियों से भी चर्चा की थी। साथ ही सभी को एकजुट होकर मैदान में उतरने की नसीहत भी वे देते रहे थे। 


शुक्रवार, 16 जून 2023

आदिवासी सीटों पर खोया धनाधार तलाश रही भाजपा

 एक बार फिर बड़े नेताओं और संघ ने बढ़ाई सक्रियता

भोपाल। प्रदेश में आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर लगातार गिर रहे भाजपा के जनाधार को लेकर संघ और केन्द्रीय नेतृत्व चिंतित है। प्रदेश संगठन भी इन सीटों पर फोकस करते हुए कार्यक्रम कर रहा हैं। वहीं अब संघ और भाजपा के राश्टीय नेताओं ने एक बार फिर इन सीटों पर फोकस करते हुए चुनावी रणनीति तय की है और ये नेता अब मैदान में उतर रहे हैं।
प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए आदिवासी वर्ग का मतदाता चिंता बना हुआ है। यह मतदाता प्रदेश की करीब 84 सीटों के चुनाव परिणाम पर सीधा असर डाला है। इस वर्ग के लिए आरक्षित 47 सीटों पर भाजपा का ग्राफ 2003 के बाद लगातार गिर रहा है। इसने भाजपा के साथ संघ की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि इन दिनों संघ पदाधिकारियों ने मालवा अंचल पर फोकस कर चुनावी रणनीति के तहत मैदानी मोर्चा संभाला है। संघ की सक्रियता के अलावा अब प्रदेश संगठन और राश्टीय नेताओं की सक्रियता भी इन सीटों पर दिखाई देने लगी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राश्टीय अध्यक्ष जे पी नड़डा के अलावा गृह मंत्री अमित ष्शाह के होने वाले प्रदेश के दौरे भी इन सीटों को फोकस करते हुए तय किए हैं। प्रधानमंत्री मध्यप्रदेश दौरे की ष्शुरूआत धार से करेंगे। जब नड्डा खरगोन और शाह बालाघाट पहुंचेंगे। भाजपा इस चुनाव में किसी भी तरह से आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर एक बार फिर 2003 के चुनाव की तरह चुनाव परिणाम लाना चाह रही है। इस चुनाव में भाजपा को 37 सीटें आदिवासी वर्ग की आरक्षित सीटों में से मिली थी, जबकि 2018 में इन भाजपा के खाते में मात्र 16 सीटें रह गई थी। अब भाजपा फिर से इन सीटों पर फोकस कर अपना खोया जनाधार लाना चाहती है।

दो साल से लगातार हो रहे बड़े कार्यक्रम

भाजपा ने इस वर्ग की आरक्षित सीटों को फोकस करते हुए दो साल पहले से ही कार्यक्रम करना शुरू कर दिया था। जबलपुर में अमित शाह ने सितंबर 2021 में गोंडवाना साम्राज्य के अमर शहीद राजा शंकर शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम मेंष्शामिल होकर प्रदेश संगठन को संकेत दिए थे कि यह वर्ग भाजपा के लिए कितना उपयोगी है। इसके बाद नवंबर 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का लोकार्पण कर इस वर्ग के बीच पैठ जमाने का काम किया। इसके बाद सरकार ने पेसा एक्ट कानून लागू कर लगातार इस वर्ग की आरक्षित सीटों पर लगातार कार्यक्रम किए। वहीं अब भी पूरा संगठन इन सीटों पर फोकस कर रणनीति के तहत कार्यक्रम कर रहा है। एक बार फिर भाजपा के बड़े नेताओं के कार्यक्रम इन सीटों को केन्द्रित करते हुए आयोजित किए जा रहे हैं।

गुरुवार, 8 जून 2023

एमपी में आदिवासी, मुस्लिम मतदाता बढ़ाएंगे कांग्रेस की परेशानी

केसीआर और ओवैसी बिगाड़ रहे समीकरण, भाजपा को हो सकता है फायदा

भोपाल। चुनावी साल में भाजपा के लिए सबसी बड़ी मुसीबत प्रदेश का आदिवासी
मदताता था, जिसे लेकर हर बैठक में पदाधिकारी चिंतित रहते थे। मगर अब आदिवासी वर्ग के बीच तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर पैठ जमाने में जुट गए हैं। वहीं मुस्लिम मतदाताओं के बीच ओवैसी भी अपने दल के सहारे प्रदेश में राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। ये दोनों दल कांग्रेस के लिए चुनाव में बड़ी परेशानी खड़ी करते नजर आ रहे हैं। दोनों ही दलों ने मालवा अंचल पर ज्यादा पूरा फोकस किया हुआ है, जहां से कांग्रेस के लिए सत्ता बनाने का रास्ता निकलता है। 

प्रदेश में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जहां अपनों से जूझ रही थी, वहीं अब उसके लिए तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर और एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी परेशानी खड़ी कर रहे हैं। दोनों ही दलों ने इस साल मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के राजनीतिक जमीन तलाशनी शुरू कर दी है। केसीआर इन दिनों प्रदेश में अपने दल भारत राष्ट्र समिति को मजबूत करने के लिए लगातार भाजपा, कांग्रेस के अलावा बसपा और आदिवासी संगठनां से जुड़े लोगों को दल में शामिल करा रहे हैं। पूर्व लोकसभा सदस्य बुद्धसेन पटेल, पूर्व विधायक और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से जुड़े रहे धीरेन्द्र धीरू पहले ही केसीआर के साथ हो गए हैं। ये नेता विंध्य अंचल में कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। वहीं मालवा अंचल में केसीआर के साथ हुए डा आनंद राय के नेतृत्व में जयस के कुछ पदाधिकारी कांग्रेस की मुसीबत खड़ी करेंगे। मालवा में जयस को मजबूती देने में वीरेन्द्र अछालिया के अलावा डा राय की अहम भूमिका रही। जयस के संरक्षक डा हीरालाल अलावा के कांग्रेस में शामिल होने के बाद से यह संगठन दो धड़ों में बंट चुका था। कुल मिलाकार केसीआर ने जिन लोगों को अपने दलों की सदस्यता दिलाई है, वे आदिवासी और दलित मतदाता के बीच खासी पैठ रखते हैं। इस अंचल में जयस ही भाजपा के लिए सबसे ज्यादा मुसीबत भी खड़ी कर रहा था। अब यह संगठन टूटकर दो धड़ों में बंटता नजर आ रहा है। 

ओवैसी पहले ही हैं सक्रिय

एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के दौरान से ही सक्रियता बढ़ाए हुए हैं। हाल ही में उन्होंने भी इंदौर में बैठक कर तय किया है कि मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों में वे अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे। इसके लिए उन्होंने मालवा अंचल की 15 विधानसभा सीटों का चयन भी किया है। इन सीटों पर ओवैसी ने सात सदस्यों की समिति बनाकर प्रत्याशी की तलाश का काम शुरू भी कर दिया है। मालवा में अगर मुस्लिम मतदाता का रूझान ओवैसी के दल की ओर हुआ तो कांग्रेस के लिए यह भी बड़ा झटका ही होगा। कांग्रेस को बीते चुनाव में मालवा अंचल में आदिवासी और मुस्लिम मतदाताओं का ही सहारा रहा है, जिसके दम पर वह सत्ता हासिल करने में कामयाब हुई थी। 

आप के निशाने पर भी आदिवासी नेता

आम आदमी पार्टी भी अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए प्रदेश के विंध्य के अलावा ग्वालियर-चंबल अंचल में ज्यादा सक्रियता दिखा रही है। इन दिनों उसका फोकस भी वे आदिवासी नेता हैं, जो भाजपा और कांग्रेस की उपेक्षा के चलते हासिए पर चल रहे हैं। आप का पूरा फोकस इन दिनों इन नेताओं पर है। आप के पदाधिकारी चाहते हैं कि आदिवासी नेताओं को अपने दल में ष्शामिल कराकर उन्हें चुनाव मैदान में उतारा जाए। अगर ऐसा हुआ तो आप भी कांग्रेस के समीकरण बिगाड़ेगी और इसका सीधा फायदा भी भाजपा को ही होगा। 


मंगलवार, 30 मई 2023

कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष ने गृह मंत्री से मांगी सुरक्षा

मंत्री ने कहा रोएं नहीं, घबराए नहीं, हम सब साथ हैं

डिंडौरी जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष वीरेन्द्र बिहारी शुक्ला ने राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को फोन कर सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने कहा कि उन्हें मुझे और मेरे परिवार को कांग्रेस की ओर से खतरा है। गृह मंत्री ने ष्शुक्ला को आश्वस्त किया कि आप खबराएं नहीं, हम-सब साथ हैं। 

डिंडौरी के जिला कांग्रेस अध्यक्ष वीरेन्द्र बिहारी शुक्ला को हटाने के बाद से उनकी नाराजगी जारी है। इस बीच इस मामले में नया मोड़ तब आया जब शुक्ला ने राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को फोन कर उनसे सुरक्षा की मांग कर डाली। गृह मंत्री से शिकायत करते हुए शुक्ला  रोने भी लगे। पूर्व जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से उनके चरित्र को लेकर बदनाम करने की कोशिश की गई है। मेरे परिवार को कांग्रेस की ओर से खतरा है। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया है और कहा कि घबराओ नहीं आप और हम सब साथ हैं। 

यह है पूरा मामला

गौरतलब है कि वीरेंद्र बिहारी शुक्ला को डिंडोरी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष पद से हटाकर उनके स्थान पर अशोक पड़वार को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया था। इस फैसले से नाराज जिला पंचायत अध्यक्ष रुदेश परस्ते, उपाध्यक्ष अंजू ब्यौहार, नगर परिषद अध्यक्ष सुनीता सारस समेत जिला पंचायत सदस्य एवं पार्षदों ने कांग्रेस पार्टी से सामूहिक इस्तीफा दे दिया था। डिंडोरी कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष के थाने में शिकायत मामले पर गृहमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष का थाने में आवेदन आया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को ऐसा नहीं करना चाहिए, आपको तानाशाह कह दिया तो उसका चरित्र हनन कर दिया।