गुरुवार, 8 जून 2023

एमपी में आदिवासी, मुस्लिम मतदाता बढ़ाएंगे कांग्रेस की परेशानी

केसीआर और ओवैसी बिगाड़ रहे समीकरण, भाजपा को हो सकता है फायदा

भोपाल। चुनावी साल में भाजपा के लिए सबसी बड़ी मुसीबत प्रदेश का आदिवासी
मदताता था, जिसे लेकर हर बैठक में पदाधिकारी चिंतित रहते थे। मगर अब आदिवासी वर्ग के बीच तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर पैठ जमाने में जुट गए हैं। वहीं मुस्लिम मतदाताओं के बीच ओवैसी भी अपने दल के सहारे प्रदेश में राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। ये दोनों दल कांग्रेस के लिए चुनाव में बड़ी परेशानी खड़ी करते नजर आ रहे हैं। दोनों ही दलों ने मालवा अंचल पर ज्यादा पूरा फोकस किया हुआ है, जहां से कांग्रेस के लिए सत्ता बनाने का रास्ता निकलता है। 

प्रदेश में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जहां अपनों से जूझ रही थी, वहीं अब उसके लिए तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर और एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी परेशानी खड़ी कर रहे हैं। दोनों ही दलों ने इस साल मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के राजनीतिक जमीन तलाशनी शुरू कर दी है। केसीआर इन दिनों प्रदेश में अपने दल भारत राष्ट्र समिति को मजबूत करने के लिए लगातार भाजपा, कांग्रेस के अलावा बसपा और आदिवासी संगठनां से जुड़े लोगों को दल में शामिल करा रहे हैं। पूर्व लोकसभा सदस्य बुद्धसेन पटेल, पूर्व विधायक और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से जुड़े रहे धीरेन्द्र धीरू पहले ही केसीआर के साथ हो गए हैं। ये नेता विंध्य अंचल में कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। वहीं मालवा अंचल में केसीआर के साथ हुए डा आनंद राय के नेतृत्व में जयस के कुछ पदाधिकारी कांग्रेस की मुसीबत खड़ी करेंगे। मालवा में जयस को मजबूती देने में वीरेन्द्र अछालिया के अलावा डा राय की अहम भूमिका रही। जयस के संरक्षक डा हीरालाल अलावा के कांग्रेस में शामिल होने के बाद से यह संगठन दो धड़ों में बंट चुका था। कुल मिलाकार केसीआर ने जिन लोगों को अपने दलों की सदस्यता दिलाई है, वे आदिवासी और दलित मतदाता के बीच खासी पैठ रखते हैं। इस अंचल में जयस ही भाजपा के लिए सबसे ज्यादा मुसीबत भी खड़ी कर रहा था। अब यह संगठन टूटकर दो धड़ों में बंटता नजर आ रहा है। 

ओवैसी पहले ही हैं सक्रिय

एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के दौरान से ही सक्रियता बढ़ाए हुए हैं। हाल ही में उन्होंने भी इंदौर में बैठक कर तय किया है कि मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों में वे अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे। इसके लिए उन्होंने मालवा अंचल की 15 विधानसभा सीटों का चयन भी किया है। इन सीटों पर ओवैसी ने सात सदस्यों की समिति बनाकर प्रत्याशी की तलाश का काम शुरू भी कर दिया है। मालवा में अगर मुस्लिम मतदाता का रूझान ओवैसी के दल की ओर हुआ तो कांग्रेस के लिए यह भी बड़ा झटका ही होगा। कांग्रेस को बीते चुनाव में मालवा अंचल में आदिवासी और मुस्लिम मतदाताओं का ही सहारा रहा है, जिसके दम पर वह सत्ता हासिल करने में कामयाब हुई थी। 

आप के निशाने पर भी आदिवासी नेता

आम आदमी पार्टी भी अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए प्रदेश के विंध्य के अलावा ग्वालियर-चंबल अंचल में ज्यादा सक्रियता दिखा रही है। इन दिनों उसका फोकस भी वे आदिवासी नेता हैं, जो भाजपा और कांग्रेस की उपेक्षा के चलते हासिए पर चल रहे हैं। आप का पूरा फोकस इन दिनों इन नेताओं पर है। आप के पदाधिकारी चाहते हैं कि आदिवासी नेताओं को अपने दल में ष्शामिल कराकर उन्हें चुनाव मैदान में उतारा जाए। अगर ऐसा हुआ तो आप भी कांग्रेस के समीकरण बिगाड़ेगी और इसका सीधा फायदा भी भाजपा को ही होगा। 


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