मंगलवार, 22 अक्टूबर 2019

परिषद ने भोपाल नगर निगम को बांटने का प्रस्ताव खारिज



भोपाल नगर निगम को दो भागों में बांटने का प्रस्ताव का आज नगर निगम परिषद ने खारिज कर दिया. बहुमत के आधार पर निगम के बंटवारे को खारिज किया गया.  महापौर आलोक शर्मा ने आरोप लगाया कि बंटवारा धर्म के आधार पर किया जा रहा है. ऐसा नहीं होना चाहिए. महापौर और भाजपा पार्षदों ने सभापति को घेर लिया और इसका विरोध किया. प्रस्ताव का विरोध करने वालों में कांग्रेस पार्षद भी शामिल रहे.
 भोपाल नगर निगम को दो हिस्सों में बांटने के लिए मंगलवार को कलेक्टर ने परिषद की बैठक बुलाई थी और सभी पार्षदों को इसकी सूचना दी गई थी. कांग्रेस लगातार भोपाल नगर निगम को दो हिस्सों में बांटने की मांग कर रही है. बैठक की खास बात यह रही कि कांग्रेस के ही कुछ पार्षदों ने बैठक से दूरी बनाए रखी वे बैठक में पहुंचे ही नहीं.महापौर आलोक शर्मा ने आरोप लगाया कि बंटवारा धर्म के आधार पर किया जा रहा है. ऐसा नहीं होना चाहिए. कलेक्टर का ड्राफ्ट गलत तरीके से पेश किया गया, दावे आपत्तियों को लेकर एक महीने का वक्त देना था. कोर्ट में याचिका लगाएंगे. इस दौरान महापौर और भाजपा पार्षदों ने सभापति को घेर लिया और प्रस्ताव का विरोध किया. विरोध के दौरान वहां मौजूद कांग्रेस पार्षद इसका समर्थन करते नजर आए. इस दौरान विवाद की स्थिति भी निर्मित हुई. विवाद और विरोध जब बढ़ा तो कांग्रेस पार्षदों ने बर्हिगमन किया और फिर वापस लौटने पर यह आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्षदों को महापौर और भाजपा पार्षदों द्वारा बोलने ही नहीं दिया जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि भोपाल नगर निगम में पार्षदों की कुल 85 है, इसमें से 55 भाजपा और 29 पार्षद कांग्रेस के हैं. जबसे कांग्रेस सरकार ने निगम के हिस्से करने का मन बनाया है, भाजपा तभी से लगातार इसका विरोध कर रही थी. बार-बार नेताओं द्वारा यह तर्क दिया जा रहा था कि भोपाल इतना बड़ा शहर नहीं है कि उसके लिए दो नगर निगम की जरूरत हो. गौरतलब है कि राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने भोपाल की तरह जबलपुर और इंदौर नगर निगम को भी दो हिस्सों में बांटने की मांग कर दी है. इसके लिए वे शहरी विकास मंत्री जयवर्धन सिंह से बात भी कर चुके हैं. उनकी इस मांग के बाद इंदौर और जबलपुर में भी भाजपा ने इसका विरोध शुरू कर दिया है.

सोमवार, 21 अक्टूबर 2019

तन्खा ने भेजा जबलपुर, इंदौर नगर निगम बांटने का प्रस्ताव

विरोधियों पर साधा निशाना, कहा जो विरोध करेगा वह जनता के हितों का विरोध करेगा
राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने राज्य सरकार को जबलपुर और इंदौर नगर निगम को भोपाल नगर निगम की तरह दो भागों में बांटने का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है. साथ ही उन्होंने विरोधियों पर भी निशाना साधा कि इस प्रस्ताव को जो विरोध करेगा वह जनता के हितों का विरोध करेगा.
राज्य सरकार द्वारा भोपाल नगर निगम को दो भागों में बांटने की प्रक्रिया शुुरु किए जाने के बाद जबलपुर और इंदौर नगर निगम को भी दो भागों में बांटने की मांग तेज हो गई है. राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने इस मांग को एक प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है. उन्होंने इसकी जानकारी ट्वीट कर देते हुए कहा कि जबलपुर,  इंदौर नगर निगम को दो भागों में बांटने का अभ्यावेदन मेल कर दिया है. जो मैं कहता हूं, वह करता हूं. यह न्याय संगत भी होगा. जनता के अधिकार हैं कि उसको बेहतर म्यूनिसिपल सर्विसेसस प्राप्त हो. ऐसे प्रस्ताव का जो विरोध करेगा पब्लिक इंट्रेस्ट के विरोधी माने जाएंगे. जबलपुर के साथ ही इंदौर नगर निगम को भी दो नगर निगमों में बांटने की बात तन्खा ने कही है.
यहां उल्लेखनीय है कि इसके पहले तन्खा ने ट्वीट कर  कहा था कि यदि जयपुर, जोधपुर और कोटा में 2 नगर निगम हो सकते हैं (शहर के आकार और जनसंख्या को देखते हुए)  तो मध्यप्रदेश में जबलपुर और इंदौर क्यों नहीं. सिर्फ भोपाल ही क्यों. प्रशासनिक सुविधा कारण सभी पर लागू होता है. इससे पहले एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा  है कि यह समय की डिमांड है, जबलपुर कार्पोरेशन 1956  के कानून तहत स्थापित हुआ था, तब जबलपुर की जनसंख्या 2 लाख होगी, अब 15 लाख होगी. आज लगभग 70 वार्ड है, अगर 2 कार्पोरेशन स्थापित होंंगे तो वार्ड संख्या दुगनी हो जाएगी. 2 महापौर भी मिलेंगे.  तन्खा के इस ट्वीट पर नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह ने आश्वस्त किया है कि अगर इस मामले को लेकर वहां से (इंदौर एवं भोपाल से) सुझाव या आवेदन आते हैं तो वे इस पर विचार करेंगे. मंत्री ने तन्खा के विचार को उचित बताया था.
ग्वालियर में भी उठी दो नगर निगम की मांग
भोपाल के बाद जबलपुर, इंदौर के अलावा ग्वालियर नगर निगम को भी दो भागों में बांटने की मांग उठी है. कांग्रेस पार्षद और ग्वालियर नगर निगम के उपनेता प्रतिपक्ष चतुर्भुज धनोलिया ने मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को इस मांग का पत्र लिखा है. धनोलिया ने अपने पत्र में कहा है कि भोपाल, जबलपुर, इंदौर के साथ-साथ ग्वालियर को भी दो नगर निगमों में बांट दिया जाए, जिससे शहर वासियों को पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं मिल सकें. उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया कि वर्तमान नगर निगम में 66 वार्ड हैं और शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है, ऐसे में मौजूदा नगर निगम व्यवस्थाओं को संभालने में नाकाम साबित हो रही है.

महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता नहीं, राष्ट्रपुत्र मानती है सांसद प्रज्ञा


मध्य प्रदेश के भोपाल से भाजपा की सांसद  प्रज्ञा ठाकुर ने  कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रपुत्र हैं और हमारे लिए आदरणीय हैं. भाजपा की तरफ से देशभर में गांधी संकल्प यात्रा निकाली जा रही है, लेकिन साध्वी प्रज्ञा ने अभी तक इसमें हिस्सा नहीं लिया है.
राजधानी भोपाल रेलवे स्टेशन के एक कार्यक्रम में सांसद प्रज्ञा से पत्रकारों ने पूछा कि वो संकल्प यात्रा में क्यों नहीं जा रहीं हैं? इस सवाल को टालते-टालते साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि गांधी राष्ट्रपुत्र हैं और हमारे लिए आदरणीय हैं, लेकिन मुझे किसी को सफाई नहीं देनी. भाजपा सांसद ने कहा कि देश के लिए जिसने भी जो सराहनीय कार्य किया है, निश्चित रूप से वो हमारे लिए आदरणीय और परम आदरणीय होता है.  हम उनके कदमों पर चलते हैं. साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि हमारे जो लोग हमें मार्गदर्शन देकर गए हैं निश्चित रूप से हम उनका गुणगान करते हैं, उनके कदमों पर चलकर हम लोगों का आगे मार्ग प्रशस्त करते हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कहने से हम अपने सिद्धांतों को नहीं बदलेंगे, जो अच्छा है वो स्वीकार्य है जो गलत है वो अस्वीकार्य है. कांग्रेस जो चाहे कहे, लेकिन मेरे सिद्धांत राष्ट्र के लिए हैं.
उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर बीजेपी पूरे देश में गांधी संकल्प यात्रा निकाल रही है, लेकिन अभी तक इसमें साध्वी प्रज्ञा ने हिस्सा नहीं लिया है. अभी बीते दिनों ही साध्वी प्रज्ञा ने एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने महात्मा गांधी की पत्नी कस्तूरबा गांधी की तारीफ की थी. गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान साध्वी प्रज्ञा ने महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था.

राजधानी भोपाल में डेंगू का आतंक, महिला अधिकारी की मौत


राजधानी भोपाल में डेंगू का आतंक बढ़ता जा रहा है. डेंगू की चपेट में आई एक महिला अधिकारी की आज मौत हो गई.
राजधानी में आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) में इंसपेक्टर पद पर पदस्थ सीमा पटेल की डेंगू से संदिग्ध मौत हो गई है. उनका चार दिन से एक निजी अस्पताल में डेंगू का इलाज चल रहा था. महिला इंस्पेक्टर की सोमवार को सुबह मौत हो गई. हालांकि डेंगू से मौत की पुष्टि तब मानी जाएगी, जब मरीज की रिपोर्ट एलाइजा पाजिटिव आएगी. ये जांच सरकारी अस्पतालों में ही होती है, इसलिए मरीज को डेंगू था या नहीं, इसके लिए एलाइजा रिपोर्ट का इंतजार है. राजधानी में इन दिनों डेंगू का कहर बढ़ता जा रहा है. राजधानी भोपाल के अलावा पूरे प्रदेश में डेंगू के मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है. अब तक प्रदेश में 7 सौ से ज्यादा डेंगू के मरीजों की मौत होने की बात सामने आई है. बीते तीन माहों में तो इसके 50 मरीज प्रतिदिन मिल रहे हैं.
स्वास्थ्य विभाग द्वारा बीते दिनों चलाए गए अभियान के दौरान राजधानी के साकेत नगर, बरखेड़ा पठानी, बागसेवनिया, सेमरा, अशोका गार्डन, नेहरू नगर, कोटरा, सर्वधर्म सी सेक्टर, दामखेड़ा, सलैया क्षेत्र में डेंगू का लार्वा मिला था. स्वास्थ्य विभाग ने राजधानी के करीब 14 हजार 684 घरों में लार्वा होने की बात भी कही थी. राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में अब तक 45 सौ से ज्यादा डेंगू के संदिग्ध मरीज मिले हैं.

पूर्व विधायक ने कहा लव जिहाद की शिकार हुई बेटी


भाजपा के पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह ने कहा कि उनकी बेटी लव जिहाद की शिकार हुई है. उन्होंने कांग्रेस विधायक और भाजपा के पूर्व विधायक पर भी लव जिहाद के आरोप लगाए हैं. सिंह ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी बेटी वापस नहीं लौटी तो कुछ भी हो सकता है.
पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह की बेटी के लापता होने का मामला अब गर्मा गया है. आज भाजपा और संस्कृति मंच के कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध करते हुए राजधानी में प्रदर्शन भी किया. इसके पहले रविवार को भी सुरेन्द्र नाथ सिंह के समर्थकों द्वारा राजधानी के 14 थानों पर प्रदर्शन किए गए थे. पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह ने आज आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और भाजपा के पूर्व विधायक धु्रवनारायण सिंह इस लव जिहाद में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि मेरी बेटी की तबीयत ठीक नहीं है, उसका चार साल से इलाज चल रहा है. यह मामला सामने आने के बाद से ध्रुवनारायण समर्थक फेसबुक पर मेरा अपमान कर रहे हो. उन्होंने कहा कि धु्रव नारायण और आरिफ मसूद मेरी बेटी की मदद कर रहे हैं. 
वहीं सिंह समर्थकों ने आज भी राजधानी भोपाल में अपना प्रदर्शन जारी रखा. भाजपा के अलावा संस्कृति बचाओ मंच के कार्यकर्ताओं ने आज जमकर विरोध किया और राजधानी के सोमवारा चौराहे पर प्रदर्शन कर विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की मांग भी की. 
यह है पूरा मामला
भाजपा के पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह ने कमलानगर थाने में बीते दिनों एफआईआर दर्ज कराकर अपनी 28 वर्षीय बेटी भारती सिंह के लापता होने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि उनकी बेटी मानसिक रुप से अस्वस्थ्य है और उसका इलाज चल रहा है. पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर ली थी. इस बीच दूसरे दिन भारती ने फेसबुक के जरिए एक वीडियो बनाया और वायरल किया था. इस वीडियो में उन्होंने अपने पिता सुरेन्द्र सिंह और अन्य रिश्तेदारों पर आरोप लगाया. पूर्व विधायक की बेटी ने वायरल वीडियो में बताया उसे राजधानी के एक अस्पताल में कैद कर रखा जाता है, ऐसा उसके साथ 10 सालों से किया जा रहा है. वह इन सबसे बचने के लिए कई बार घर से भाग चुकी ळै. मेरे पिता मेरी शादी विधायक के बेटे से कराना चाहते हैं. भारती सिंह ने कहा कि मेरी मानसिक स्थिति ठीक है. मैं घर से भागकर किसी के साथ नहीं आई हूं, मैं अकेले आई हूं. मुझ पर लगाए गए सारे आरोप झूठे हैं. भारती सिंह ने वीडियो जारी कर और हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मदद और सुरक्षा की मांग की थी.

रविवार, 20 अक्टूबर 2019

मिलावट करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा: कमलनाथ


प्रदेश में मिलावटखोरी को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने फिर से एक बार प्रतिबद्धता जताई है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा है कि मिलावट करने वाला चाहे कितना भी बड़ा शख्स हो उसे बख्शा नहीं जाएगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि एफएसएसएआई की राष्ट्रीय दूध गुणवत्ता सर्वे-2018 की रिपोर्ट बेहद गंभीर व चिंतनीय है. देश भर में दूध में मिलावट के आंकड़े चौकाने वाले हैं, देश में मिलावट का जहर स्वस्थ समाज व मानवता को नष्ट कर रहा है, मिलावटखोर समाज व मानवता के दुश्मन है, इन्हें कतई बख्शा जाना नहीं चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि हम इस रिपोर्ट का व्यापक अध्ययन करेंगे, प्रदेश में मिलावट को लेकर हम पूर्व से ही शुद्ध को लेकर युद्ध अभियान चला ही रहे हैं. दोषियों पर प्रतिदिन कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं, अभियान में ओर तेजी लाने के निर्देश दिये गये हैं. मिलावट खोरों के खिलाफ अभियान सतत जारी रहेगा. कोई कितना भी बड़ा शख्स हो, मिलावट करने पर उसे बख्शा नहीं जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के स्वास्थ्य की रक्षा हमारा प्रमुख ध्येय है और हम इसको लेकर वचनबद्ध हैं.
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में मिलावटखोरी को लेकर राज्य सरकार द्वारा अब तक लगभग 3 दर्जन लोगों पर रासुका के तहत कार्रवाई की गई है, वहीं लगभग एक सौ लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है. इसके अलावा त्यौहारी सीजन में लगातार छापेमार कार्रवाई और खाद्वय विभाग द्वारा मिलावट की आशंका पर सैंपल लेकर जांच की जा रही है.

4 कड़ी सुरक्षा के बीच आज होगा मतदान

2 लाख 77 हजार 599 मतदाता करेंगे अपने मत के अधिकार का उपयोग
भोपाल। 20 अक्तूबर। लोस सेवा
मध्यप्रदेश के झाबुआ विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए कल सोमवार को मतदान होगा. कड़ी सुरक्षा के बीच 356 मतदान केन्द्रों पर 2 लाख 77 हजार 599 मतदाता अपने मत के अधिकार का उपयोग करेंगे. आयोग ने मतदान के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने पुलिस और कंपनी जवानों की तैनाती की है.
राज्य के झाबुआ विधानसभा क्षेत्र के लिए कल सोमवार 21 अक्तूबर को मतदान होना है. मतदान के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है.  विधानसभा क्षेत्र 1 लाख 39 हजार 330 पुरूष मतदाता, 1 लाख 38 हजार 266 महिला मतदाता एवं 3 तृतीय लिंग मतदाता सहित कुल 2 लाख 77 हजार 599 मतदाता मतदान करेंगे. विधानसभा झाबुआ में कुल 356 मतदान केंद्रो पर 2 हजार से अधिक शासकीय सेवकों द्वारा मतदान संपन्न कराया जाएगा.
डेढ़ घंटे पहले होगा माकपोल
  विधानसभा उप चुनाव  के लिए 356 मतदान केन्द्र बनाए गए हैं. इन मतदान केन्द्रो पर सुबह 7 बजे से सायं 5 बजे तक मतदान होगा. आयोग के निर्देशानुसार डेढ़ घंटे पहले अर्थात प्रात: 5.30 बजे मोकपोल किया जाएगा. मतदान के दिन सेक्टर अधिकारी सहित अन्य अधिकारी सतत मानीटरिंग करेगे, 100 वाहन भ्रमण पर रहेंगे.
क्वीक रिस्पांस टीम की भी तैनाती
झाबुआ उपचुनाव में 3 हजार पुलिसकर्मी और केंद्रीय बलों की 4 कंपनियों की ड्यूटी लगाई गई है. संवेदनशील केंद्रों पर क्विक रिस्पांस टीम भी तैनात होगी. ये टीमें मतदान के बाद 24 अक्तूबर तक स्ट्रांग रूम की सुरक्षा करेंगी. हर मतदान केंद्र पर मोबाइल सेक्टर मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी के रूप में 100 मोबाइल दल मौजूद रहेंगे. ये दल किसी भी तरह की समस्या होने पर पांच मिनट में मौके पर पहुंच जाएंगे.
सीसीटीवी से निगरानी
356 मतदान केंद्रों में से 61 केंद्र संवेदनशील हैं. इन केंद्रों पर वेब कॉस्टिंग और सीसीटीवी की व्यवस्था है, ताकि मतदान केंद्रों की निगरानी हो सके. सभी 356 मतदान केंद्रों पर कुल 700 ईवीएम से वोटिंग कराई जाएगी.  25 प्रतिशत अतिरिक्त  मशीनें रिजर्व में रखी गई हैं, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तत्काल दूसरे ईवीएम से मतदान प्रक्रिया जारी रखी जा सके. मतदानकर्मियों की व्यवस्था के लिए ग्राम पंचायत और नगरपालिका अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं.