विरोधियों पर साधा निशाना, कहा जो विरोध करेगा वह जनता के हितों का विरोध करेगाराज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने राज्य सरकार को जबलपुर और इंदौर नगर निगम को भोपाल नगर निगम की तरह दो भागों में बांटने का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है. साथ ही उन्होंने विरोधियों पर भी निशाना साधा कि इस प्रस्ताव को जो विरोध करेगा वह जनता के हितों का विरोध करेगा.
राज्य सरकार द्वारा भोपाल नगर निगम को दो भागों में बांटने की प्रक्रिया शुुरु किए जाने के बाद जबलपुर और इंदौर नगर निगम को भी दो भागों में बांटने की मांग तेज हो गई है. राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने इस मांग को एक प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है. उन्होंने इसकी जानकारी ट्वीट कर देते हुए कहा कि जबलपुर, इंदौर नगर निगम को दो भागों में बांटने का अभ्यावेदन मेल कर दिया है. जो मैं कहता हूं, वह करता हूं. यह न्याय संगत भी होगा. जनता के अधिकार हैं कि उसको बेहतर म्यूनिसिपल सर्विसेसस प्राप्त हो. ऐसे प्रस्ताव का जो विरोध करेगा पब्लिक इंट्रेस्ट के विरोधी माने जाएंगे. जबलपुर के साथ ही इंदौर नगर निगम को भी दो नगर निगमों में बांटने की बात तन्खा ने कही है.
यहां उल्लेखनीय है कि इसके पहले तन्खा ने ट्वीट कर कहा था कि यदि जयपुर, जोधपुर और कोटा में 2 नगर निगम हो सकते हैं (शहर के आकार और जनसंख्या को देखते हुए) तो मध्यप्रदेश में जबलपुर और इंदौर क्यों नहीं. सिर्फ भोपाल ही क्यों. प्रशासनिक सुविधा कारण सभी पर लागू होता है. इससे पहले एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि यह समय की डिमांड है, जबलपुर कार्पोरेशन 1956 के कानून तहत स्थापित हुआ था, तब जबलपुर की जनसंख्या 2 लाख होगी, अब 15 लाख होगी. आज लगभग 70 वार्ड है, अगर 2 कार्पोरेशन स्थापित होंंगे तो वार्ड संख्या दुगनी हो जाएगी. 2 महापौर भी मिलेंगे. तन्खा के इस ट्वीट पर नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह ने आश्वस्त किया है कि अगर इस मामले को लेकर वहां से (इंदौर एवं भोपाल से) सुझाव या आवेदन आते हैं तो वे इस पर विचार करेंगे. मंत्री ने तन्खा के विचार को उचित बताया था.
ग्वालियर में भी उठी दो नगर निगम की मांग
भोपाल के बाद जबलपुर, इंदौर के अलावा ग्वालियर नगर निगम को भी दो भागों में बांटने की मांग उठी है. कांग्रेस पार्षद और ग्वालियर नगर निगम के उपनेता प्रतिपक्ष चतुर्भुज धनोलिया ने मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को इस मांग का पत्र लिखा है. धनोलिया ने अपने पत्र में कहा है कि भोपाल, जबलपुर, इंदौर के साथ-साथ ग्वालियर को भी दो नगर निगमों में बांट दिया जाए, जिससे शहर वासियों को पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं मिल सकें. उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया कि वर्तमान नगर निगम में 66 वार्ड हैं और शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है, ऐसे में मौजूदा नगर निगम व्यवस्थाओं को संभालने में नाकाम साबित हो रही है.
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