तीन घंटे बैठकर सुनेंगे कार्यकर्ता की बात
भोपाल। भाजपा ने सत्ता और संगठन में तालमेल बैठाने के लिए अब मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी है। मंत्रियों से कहा गया है कि वे सप्ताह में पांच दिन प्रदेश भाजपा कार्यालय में बैठें और कार्यकर्ता की समस्याओं को सुनें व उनका निदान करें।
भाजपा ने लोकसभा चुनाव के बाद अब कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने के लिए मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी है। इसके तहत मंत्रियों को अब प्रदेश भाजपा कार्यालय में सप्ताह में पांच दिन तीन घंटे तक बैठना होगा और कार्यकर्ता की समस्याओं को सुन कर उन्हें दूर करना होगा। मंत्रियां के साथ संगठन का एक पदाधिकारी भी बैठेंगे। मंत्रियों के भाजपा कार्यालय में बैठने को लेकर अभी यह फैसला नहीं हुआ है ि कवे कब से बैठेंगे, मगर माना जा रहा है कि विधानसभा के मानसून सत्र के बाद यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। केंद्रीय सह संगठन महासचिव शिवप्रकाश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के बीच चर्चा हो चुकी है।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के फीडबैक में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों ने समीक्षा बैठकों के दौरान कार्यकर्ता की उपेक्षा होने की शिकायतें मिली थी। नाराजगी के चलते कई जगह कार्यकर्ता प्रचार की जगह घर बैठ गए। इससे कई बूथों पर पार्टी को नुकसान हुआ। यह जानकारी शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची। इसके बाद सत्ता और संगठन के बीच समन्वय बनाने के लिए इस सहयोग केंद्र को जल्द शुरू करने की बात कही गई है।
पहले भी की थी इसी तरह की व्यवस्था
पूर्व में शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्रित्व काल में भी इसी तरह से मंत्रियों के प्रदेश कार्यालय में बैठने के निर्देश दिए थे, मगर यह व्यवस्था कारगर साबित नहीं हुई थी। मंत्रियों ने कुछ दिन तो कार्यालय पहुंचकर समस्याएं सुनी, मगर कार्यकर्ता को वे संतुश्ट करने में सफल नहीं रहे। कुछ दिनों के बाद यह व्यवस्था खत्म सी हो गई। ना तो संगठन और ना ही सरकार ने इसे जारी रखने का प्रयास किया।

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