फिर तेज हो सकती है वर्चस्व की लड़ाई, एकजुट होने लगे विधायक समर्थक
भोपाल। इंदौर की राजनीति में एक बार फिर बदलाव नजर आ रहा है। पहले सीधी तौर में ताई-भाई के बीच वर्चस्व की लड़ाई नजर आती थी, मगर अब वर्तमान में भाजपा के ही तीन विधायक इंदौर के कद्दावर नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय गुट के नेताओं से आहत नजर आ रहे हैं। इसके चलते वे एकजुट होकर विजयवर्गीय को चुनौती देते नजर आ सकते हैं।
इंदौर में वैसे तो पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमिता महाजन और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समर्थकों के बीच मतभेद और वर्चस्व की लड़ाई होती रही है। मगर इस बार इंदौर में फिर नजारा बदला है। इस बार पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर समर्थक माने जाने वाले नेताओं जिनमें तीन वर्तमान विधायक भी ष्शामिल हैं, अपने को कमजोर मान रहे हैं। इन विधायकों के क्षेत्र में बढ़ते विजयवर्गीय समर्थकों के दखल से ये परेशान हैं। नगर और ग्रामीण इंदौर दोनों ही जगह पर इन दिनों विजयवर्गीय खेमा ज्यादा सक्रिय है, जिसके चलते तीन विधायकों महू से विधायकउषा ठाकुर, इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक चार से विधायक मालिनी गौड़ और देपालपुर से विधायक मनोज पटेल के समर्थक विजयवर्गीय समर्थकों के बढ़ते दखल से खफा हैं। इसके चलते ये तीनों विधायक अब एकजुट होकर कैलाश विजयवर्गीय को चुनौती देने की रणनीति पर काम करने में जुटे हैं। इन तीनों की शिकायत है कि उनके विधानसभा क्षेत्रों में विजयवर्गीय समर्थकों का अनावश्यक दखल बढ़ता जा रहा है। इनमें मालिनी गौड़ की नाराजगी तो महापौर पुष्यमित्र को लेकर भी है। महापौर को कैलाश का समर्थक माना जाता है। इसी तरह उषा ठाकुर के क्षेत्र महू में अंतर सिंह दरबार और मनोज पटेल के क्षेत्र में ग्रामीण जिला अध्यक्ष चिंटू वर्मा का दखल बढ़ा है। इनके दखल को लेकर वर्तमान विधायक में नाराजगी दिखाई दे रही है। वैसे तीनों को ताई यानि सुमित्रा महाजन के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर का समर्थक माना जाता रहा है। इनके कार्यकाल में ये ताकतवर नेता के रूप में रहे, मगर 2023 के बाद मुख्यमंत्री पद पर हुए बदलाव ने इन तीनों का आहत किया है। साथ ही इंदौर की राजनीति का समीकरण भी बदला है।
सांसद का अपना गुट
इंदौर के सांसद शंकर लालवानी जिन्हें ताई समर्थक माना जाता है। उनका अपना गुट है। वैसे विधायक मालिनी गौड़ और लालवानी के समर्थकों के बीच भी लंबे समय से राजनीतिक मतभेद रहा है। वे भी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अक्षय बम के अप्रत्याशित तरीके से भाजपा में शामिल होने के बाद से आहत हैं। ताई ने तो इस प्रकरण पर खुलकर नाराजगी भी जताई थी। भाजपा नेताओं, वर्तमान विधायकों के बीच बढ़ते मतभेद भाजपा के लिए ठीक नजर नहीं आ रहे हैं और जल्द ही यह मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है। इसके पीछे कारण साफ है कि दोनों ही ओर से दिग्गज नेता है। एक ओर विजयवर्गीय हैं, तो दूसरी और दो पूर्व मंत्री और एक वर्तमान विधायक हैं।

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