सोमवार, 3 जून 2013

तीसरे मोर्चे में टिकट को लेकर चिकचिक

मध्यप्रदेश में सपा के नेतृत्व में बन रहे तीसरे मोर्चे में एक बार फिर विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है़ इस बार विवाद की वजह टिकट पर सहमति का न बन पाना है़ विंध्य, बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल अंचल में समाजवादी पार्टी जहां अपना प्रत्याशी खड़ा करना चाहती है, वहां पर माकपा और भाकपा के बीच सहमति नहीं बन पा रही है़ अब सहमति बनाने के लिए एक बार फिर 4 जून को बैठक होना तय किया गया है, जबकि इस तारीख को सपा ने 50 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करने की बात भी कही है़
समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव के नेतृत्व में तीसरे मोर्चा के गठन को लेकर छोटे दल उत्साहित तो नजर आ रहे थे, मगर जैसे-जैसे इन दलों के बीच हुई बैठकें होती गई, मतभेद भी उभरते गए़ इन मतभेदों के चलते गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और भारतीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने तो दूरी ही बना ली, इसके अलावा कुछ और भी दल दूर होते गए़ अब तीसरे मोर्चे में सपा के अलावा समानता दल, माकपा, भाजपा और लालू प्रसाद यादव का जनता दल शामिल है़ इन दलों के बीच सब कुछ तो ठीक-ठाक चल रहा था, मगर बीते तीन बैठकों से टिकट वितरण को लेकर विवाद भी उभरा़ माकपा जहां ग्वालियर-चंबल अंचल में विधानसभा क्षेत्र को लेकर सपा के तर्कों पर सहमत नहीं है, वहीं भाकपा विंध्य में सपा की बातों पर सहमत नजर नहीं आ रही है़ बताया जाता है कि ग्वालियर-चंबल अंचल और विंध्य में कुछ विधानसभा क्षेत्रों में माकपा और भाकपा अपने उम्मीदवार खड़ा करना चाहते हैं, मगर समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव इन सीटों पर सपा का प्रत्याशी खड़ा करना चाहते हैं. श्री यादव माकपा और भाकपा को यह तर्क देते हैं कि ये क्षेत्र उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे हुए हैं. इस कारण इन क्षेत्रों में सपा की स्थिति मजबूत हैं, वे भाकपा और माकपा से इन क्षेत्रों की करीब एक दर्जन सीटों पर समझौता नहीं करना चाहते हैं़ इस मुद्दे पर तीनों दलों में बीते तीन बैठकों से टकराव के चलते समझौता नहीं हो पा रहा है़
वहीं सपा के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव ने 50 विधानसभा क्षेत्रों में 4 जून को प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करने की बात कहकर विवाद को और गहरा दिया है़ श्री यादव ने यहां तक कह दिया कि ये सभी प्रत्याशी विंध्य, बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल के उन विधानसभा क्षेत्रों से होंगे जो विधानसभा क्षेत्र उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे हुए हैं़ इस बात को लेकर माकपा के बादल सरोज कुछ खफा नजर आ रहे हैं. अब सपा ने बादल सरोज सहित भाकपा के पदाधिकारियों को मनाने के लिए 4 जून को प्रत्याशियों की घोषणा करने के पूर्व सुबह एक बैठक और करने की रणनीति तय की है़ इस बैठक में अगर गीले-शिकवे दूर होते हैं तो ठीक नहीं तो तीसरे मोर्चे में दरार पड़  सकती है़ बताया जाता है कि तीसरा मोर्चा बनने के पहले ही बिखर सकता है़

बुधवार, 29 मई 2013

छग में नक्सली वारदातों से घटाई आदिवासी जनसंख्या

गोंगपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा आदिवासियों को सरकार, नक्सली और नक्सली मानते हैं मुखबिर


छत्तीसगढ़ में बीते एक दशक में नकस्ली वारदातों के कारण आदिवासियों की संख्या कम हो गई है़यह संख्या करीब डेढ़ फीसदी कम हुई है़ यहां से आदिवासी दूसरे राज्यों में पलायन कर गए हैं यहां तक की आंध्रप्रदेश में तो छत्तीसगढ़ के नाम से ही एक कालोनी बनाकर छग के आदिवासी रह रहे हैं, मगर वे वहां भी सुविधाविहीन जीवन, जी रहे हैं छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासियों को नक्सली बताती है, तो नक्सली आदिवासियों को सरकार का मुखबिर बता कर मार देते हैं़ यह आरोप गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम ने लोकमत समाचार से चर्चा करते हुए लगाए़ उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में विशेषकर बस्तर संभाग में आदिवासियों की स्थिति ठीक नहीं है़ इस संभाग के करीब 75 गांवों में आदिवासी पुरुष रह ही नहीं रहे हैं़ उन्हें कभी सरकार की ओर से नक्सली मानकर परेशान किया जाता है तो कभी नक्सली रात के अंधेर में उन्हें उठाकर ले जाया जाता है और सरकार का मुखबिर बताकर मारा जाता है़ श्री मरकाम ने बताया कि राज्य में नक्सलियों की गतिविधियां जब से बढ़ी है तब से छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की परेशानी भी बढ़Þी है़ उन्होंने बताया कि राज्य सरकार आदिवासियों के नाम पर योजनाएं चलाने का दावा करती है, मगर यहां के आदिवासी आज भी सुविधाओं के अभाव में जीवन जी रहे हैं उन्होंने बताया कि सरकार का सहयोग न मिलने और नक्सलियों के द्वारा लगातार आदिवासियों को परेशान किए जाने के कारण यहां से लगातार आदिवासियों का पलायन होता जा रहा है़ आज यह स्थिति निर्मित हो गई है कि बीते एक दशक में राज्य में आदिवासियों की संख्या करीब डेढ़ फीसदी कम हो गई है़ श्री मरकाम ने बताया कि छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में पलायन हुआ है़ यह पलायन महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और आंध्रप्रदेश में हुआ है़ उन्होंने बताया कि आंध्रप्रदेश के खम्माम जिले में तो छत्तीसगढ़Þ के आदिवासियों ने एक कालोनी बनाकर रहना शुरु कर दिया है,मगर वे वहां पर आज भी सुविधाओं से जूझ रहे हैं वहां की सरकार उनकी सुध तक नहीं ले रही है़ उन्होंने इन सब परेशानियों ने आदिवासी समाज को आज उसकी संस्कृति से दूर कर दिया है़ हटाएं राज्यपाल को, लगाएं राष्ट्रपति शासन गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम ने हाल ही में हुए नक्सली हमले में कांग्रेस नेताओं की मौत को लेकर छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार को दोषी बताया है़ साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य के राज्यपाल शेखर दत्त का भी आदिवासियों के प्रति उपेक्षित व्यवहार रहा है, इस कारण यहां पर आदिवासियों की सुनवाई ही नहीं होती है़ उन्होंने कहा कि केन्द्र को छत्तीसगढ़ राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाकर तुरंत ही यहां के राज्यपाल शेखर दत्त को हटा देना चाहिए़ श्री मरकाम ने कहा कि छग की सरकार आदिवासियों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है इस कारण यहां का आदवासी परेशान हैं

वारदात में मप्र के नक्सली भी शामिल

छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले में मध्यप्रदेश के नक्सलियों के भी शामिल होने की आशंका प्रदेश की पुलिस और खुफिया विभाग को है़ सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश के नक्सल प्रभावित जिलों में काफी समय से नक्सलियों की गतिविधियां शांत देखी जा रही हैं खुफिया विभाग का मानना है कि नक्सली जब किसी बड़ी वारदात को अंजाम देते हैं तो समीपवर्ती राज्यों में बसे उनके साथियों का सहयोग भी लेते हैं़ इसके चलते यह आशंका है कि मध्यप्रदेश के नक्सली लंबे समय से छत्तीसगढ़Þ में रहकर इस वारदात को अंजाम देने में वहां के नक्सलियों का सहयोग कर रहे होंगे़ राज्य के पुलिस महानिदेशक नंदन दुबे ने भी इस बात को मंगलवार को स्वीकार किया कि राजय में नक्सल प्रभावित जिलों में नक्सली गतिविधियां लंबे समय से शांत हैं उन्होंने इस बात की आशंका जताई थी कि राज्य के नक्सली भी छत्तीसगढ़ में हुई इस वारदात में शामिल हुए होंगे़ वैसे राज्य में इस वारदात के बाद से सुरक्षा के इंतजाम बढ़Þा दिए हैं नक्सल प्रभावित जिलों में चौकसी भी बढ़Þा दी है़ इसके अलावा 31 मई को पुलिस और प्रशासनिक अफसरों का एक दल भी नक्सल प्रभावित जिलों का दौरा करने की तैयारी कर चुका है़

चुटका परमाणु बिजली परियोजना का विरोध, गोंगपा के नेतृत्व में होगा बड़ा आंदोलन

नर्मदा पर बने बरगी बांध के किनारे प्रस्तावित ‘चुटका मध्यप्रदेश परमाणु विद्युत परियोजना’ के विरोध में महाकौशल अंचल के आदिवासी अब लामबंद हो रहे हैं़ आदिवासियों ने यह तय कर लिया है कि यह परियोजना को यहां नहीं लगाया जाए़ आदिवासी 2 जून को एक बार फिर एकत्रित होकर विरोध की रणनीति तय करेंगे़ विरोध का नेतृत्व कर रही गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और अन्य संगठन इस मुद्दे पर एक बड़ा आंदोलन करने की तैयारी में हैं़ मध्यप्रदेश के मण्डला जिले के चुटका में प्रस्तावित ‘चुटका मध्यप्रदेश परमाणु विद्युत परियोजना’ का विरोध अब तेज हो गया है़ परियोजना से प्रभावित मंडला जिले के बीजाडांडी , नारायणगंज विकासखंड और सिवनी जिले के घंसौर विकासखंड के करीब 54 गांव प्रभावित हो रहे हैं़ इन प्रभावित गांवों को बचाने के लिए गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, चुटका संघर्ष समिति, बरगी विस्थापित संघ के अलावा दर्जनों संगठनों ने विरोध तेज कर दिया है़ प्रशासन द्वारा वहां पर प्रस्तावित जनसुनवाई को विरोध को देखते हुए स्थगित कर दिया, मगर आदिवासियों का यह विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है़ आदिवासियों ने इस परियोजना का विरोध करने के लिए अब 2 जून को जबलपुर में एक बैठक आयोजित की है़ इस बैठक में विरोध की रणनीति तय की जाएगी़ इसके बाद अगर प्रशासन ने जनसुनवाई का प्रयास किया तो उसे फिर विफल किया जाएगा़ गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश महामंत्री बजारीलाल यादव ने बताया कि 2 जून की बैठक के बाद हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम से चर्चा कर यहां पर बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं़ राष्ट्रीय अध्यक्ष से चर्चा के बाद यह तय किया जाएगा कि आंदोलन किस रूप में और किस तरह से किया जाए़ विरोध का कारण * 1400 मेगावाट बिजली बनाने के लिए बरगी जलाशय से पानी लिया जाएगा एवं पुन: उस पानी को जलाशय में छोड़ा जाएगा़ इससे पानी प्रदूषित होगा और मनुष्यों सहित इस पर आश्रित सभी जैवित घटकों का जीवन खतरें में पढ़Þेगा़ * न्यूक्लियर पावर, कॉर्पोरेशन आॅफ इंडिया लिमिटेड की गाइड लाइन के अनुसार परमाणु विद्युत परियोजनाओं को भूकंप वाले क्षेत्र में स्थापित नहीं किया जा सकता, किंतु इस महत्वपूर्ण बिन्दु को नजरअंदाज करते हुए हाई रिस्क जोन में यह परियोजना बड़ा खतरा उत्पन्न कर सकती है़ * पूर्व में बरगी बांध के कारण क्षेत्र के लोगों को हुए नुकसान की भरपाई हुई नहीं, अब इस परियोजना के कारण प्रभावित लोग और नुकसान झेलेंगे़ * परियोजना के मसौदे की तैयार 2000 पेज की रिपोर्ट अंग्रेजी में है़ इस रिपोर्ट को हिन्दी में देने की मांग़ मगर प्रशासन ने इस रिपोर्ट को मात्र 65 पन्नों में समेट दिया़ * वन क्षेत्र के दोहन से आदिवासी संस्कृति और सभ्यता को बाहरी खतरा उत्पन्न होगा़ बरगी बांध की पीड़ा छेलने वाले आदिवासी अब दोबारा इस तरह की पीड़ा नहीं छेलना चाहते हैं़ विरोध में शामिल संगठन गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, चुटका संघर्ष समिति, बरगी विस्थापित संघ, सद्भावना विचार मंच, नागरिक अधिकार मंच, अभिनय थियेटर मंच, रंग अभियान, त्रिवेणी परिषद, आदिवासी अधिकार जबलपुर, आजादी बचाओ आंदोलन, हमारा अधिकार अभियान,जनसंघर्ष मोर्चा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी लेनिनवादी, पीपल्स इंनिशियेटिव अगेंस्ट न्युक्लियर पावर, आॅल इंडिया स्टूडेंट्स मध्यप्रदेश, क्रांतिकारी नौजवान भारत सभा, अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन मध्यप्रदेश, गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन भोपाल, मध्यप्रदेश महिला मंच, शिक्षा अधिकार मंच भोपाल, वुमेन अगेंस्ट सेक्शुअल वॉयलेंस एंड स्टेट रिप्रेशन मध्यप्रदेश़

खोये ‘गढ़’ की तलाश में जद यू

मध्यप्रदेश में नब्बे के दशक के बाद मालवा अंचल के झाबुआ और रतलाम में कमजोर हुआ जनता दल यू अब एक बार फिर अपने खोये ‘गढ़Þ’ को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है़ जनता दल यू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव 26 मई को रतलाम जिले के सैलाना विधानसभा क्षेत्र में व्यस्था परिवर्तन अभियान की शुरुआत कर पार्टी में विधानसभा चुनाव का एलान करते हुए आदिवासियों को फिर से क्रांतिकारियों की याद दिलाने हुए समाजवाद का नारा बुलंद करेंगे़ जनता दल यू ने मध्यप्रदेश में 26 मई से व्यवस्था परिवर्तन अभियान चलाकर चुनावी शंखनाद फूंकने की तैयारी कर ली है़ तैयारी का अंतिम चरण चल रहा है़ इस अभियान की शुरुआत जद यू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा क्षेत्र से करेंगे़ वे 26 मई को यहां पर एक बड़ी सभा का आयोजन करने जा रहे हैं़ इस सभा का आयोजन कर वे झाबुआ और रतलाम जिले के आदिवासियों को एक बार फिर उनके क्रांतिकारी रूप की याद दिलाएंगे जिसके तहत आदिवासियों ने हमेशा क्रांति की राह पकड़कर परिवर्तन किया है़ बताया जाता है कि इस स्थान को पार्टी ने इसलिए भी चुना है क्योंकि नब्बे के दशक के बाद से यहां पर पार्टी का जनाधार लगातार कम होता गया है़ क्रांतिकारियों की कर्मभूमि रहे इस अंचल में पार्टी विशेषकर समाजवाद के नारे के कमजोर होने से पार्टी नेता चिंतित हो रहे थे़ इस कारण इस अंचल के सैलाना को पार्टी नेतृत्व ने चुना और यहां से व्यवस्था परिवर्तन अभियान चलाते हुए प्रदेश में होने वाले वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव के लिए शंखनाद फंूकने की तैयारी कर ली़ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद यादव ने बताया कि लंबे समय से हमारे प्रयासों के बावजूद यहां पर हम पार्टी का खोया जनाधार नहीं पा रहे थे, इस कारण हमने यहां पर राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में व्यवस्था परिवर्तन अभियान चलाने का फैसला किया है़ वैसे यह अभियान राजस्थान और मध्यप्रदेश दोनों ही राज्यों में चलाया जाएगा़ राजस्थान के बांसवाड़ा में इस अभियान की शुरुआत 25 मई को राष्ट्रीय अध्यक्ष करेंगे़ उसके बाद 26 मई को मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के सैलाना में इस अभियान की शुरुआत की जाएगी़ श्री यादव ने बताया कि इस अभियान के तहत हम मालवा अंचल के आदिवासी इलाकों में एक बार फिर समाजवाद का नारा बुलंद करते हुए पार्टी की ताकत को बढ़Þाएंगे़ 25 एवं 26 मई को दोनों ही दिन राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव दो अलग-अलग बड़ी सभाओं को संबोधित कर दोनों ही राज्यों में विधानसभा चुनाव का शंखनाद फूंकेंगे़

गुरुवार, 9 मई 2013

भाजपा करेगी साधने का काम

कर्नाटक में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई चिंता में आ गई है़ संगठन के पदाधिकारियों विशेषकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, संगठन महामंत्री और मुख्यमंत्री के बीच इस मुद्दे पर लंबे समय तक बैठक कर मंथन किया गया़ इसके बाद यह तय हुआ कि नेता और कार्यकर्ताओं में असंतोष को रोका जाए और जल्द ही गैर राजनीतिक पदों पर नियुक्तियां की जाएं़ कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी को मिली हार के बाद प्रदेश भाजपा की चिंता बढ़Þ गई है़ राज्य में तीसरी बार सरकार बनाने का सपना देख रही भाजपा के सामने अब अपने नेता और कार्यकर्ताओं को साधने की चिंता सताने लगी है़ भाजपा ने इस संबंध में बुधवार रात को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, संगठन महामंत्री अरविंद मेनन और मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने घंटों बैठक कर इस मुद्दे पर मंथन किया़ बैठक में तय किया गया कि प्रशासनिक और संगठन के बीच तालमेल कुछ इस तरह बैठाया जाए जिससे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी नहीं बढ़Þे़ इसके अलावा सरकार की योजनाओं को अब लोगों तक पहुंचाने के काम में अधिकारियों की मदद कार्यकर्ता और नेता करें़ इससे सरकार और संगठन दोनों के बीच तालमेल बना रहेगा और कार्यकर्ता की नाराजगी से भी बचा जाएगा़ इस बैठक में निगम मंडलों एवं प्राधिकरणों में रिक्त पड़े पदों पर जल्द ही नियुक्तियां किए जाने का फैसला भी किया गया़ सूत्रों के अनुसार इस फैसले पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की ग्रामीण अंचलों की यात्राओं के बाद अमल किया जाएगा़ श्री चौहान ने संगठन के साथ चर्चा में नियुक्तियां जल्द ही करने की बात कही है़

चुनौती है बाल विवाह रोकना

राज्य सरकार के सामने बाल विवाह होना कड़ी चुनौती है़ सरकार द्वारा लोगों को सजग करने और समझाइश देने जैसे उठाए गए कदम से लोगों में कोई बदलाव नहीं आया है़ सरकार भले ही बाल विवाह न होने की बात कहे, मगर बाल संरक्षण आयोग के सदस्यों को मिल रही शिकायतें इस बात का संदेश दे रही है कि सरकार के सार बाल विवाह को चाह कर भी नहीं रोक पा रही है़ राज्य सरकार भले ही बाल विवाह को रोकने के लिए ढिंढोरा पीटे, मगर यह प्रथा प्रदेश में चाहकर भी वह रोक नहीं पा रही है़ इस वर्ष 13 मई को अक्षय तृतीया पर बड़ी संख्या में होने वाले सामूहिक विवाहों को देखते हुए सरकार का महिला एवं बाल विकास विभाग काफी सक्रिय नजर आ रहा है, लेकिन विभाग द्वारा उठाए गए कदमों का अब तक लोगों पर कोई असर होता नहीं दिख रहा है़ लंबे समय से चल रही बाल विवाह प्रथा अब भी नहीं रुक रही है़ बाल विवाह को लेकर राज्य में बाल संरक्षण आयोग की सदस्यों को लगातार तीन दिनों से बाल विवाह होने की शिकायतें मिल रही है़ इन शिकायतों पर आयोग की सदस्यों ने गंभीरता दिखाई है और अब तक दो बाल विवाह रुकवाने का दावा भी किया जा रहा है़ आयोग की महाकौशल क्षेत्र की प्रभारी सदस्य श्रीमती रीना गुजराल ने बताया कि उनके पास अब तक शिकायतें तो नहीं आई हैं, मगर उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों से कहा है कि महाकौशल में कहां-कहां पर सामूहिक विवाह हो रहे हैं, वहां की जानकारी उन्हें उपलब्ध कराई जाए़ जानकारी के अलावा वे बाल विवाह को रोकने के लिए कड़े कदम भी उठाएं़ उज्जैन संभाग की प्रभारी श्रीमती आऱएच़ लता ने बताया कि उन्हें लगातार दूरभाष पर शिकायतें मिल रही है़ उनके पास अब तक करीब 50 से ज्यादा शिकायतें आई हैं़ आज ही शाजापुर जिले से एक शिकायत आई कि एक चौकीदार अपनी नाबालिग पुत्री की शादी कर रहा है, उसे आज हल्दी भी लगा दी गई है़ इस मामले में उन्होंने कलेक्टर को निर्देश देकर वहां जांच कर सही बात पता कर कड़ी कार्रवाई करने को कहा है़ श्रीमती लता ने बताया कि अगर यह सच होगा तो वे लड़की के पिता पर भी कार्यवाही करेंगी़ उन्होंने बताया कि अब तक जो शिकायतें मिली हैं, उनमें दो स्थानों पर तो बाल विवाह को आयोग की सदस्यों ने रुकवाने का काम किया है़ इसी तरह ग्वालियर-चंबल संभाग की प्रभारी श्रीमती विजया शुक्ला ने बताया कि उन्हें आज एक शिकायत मिली इस शिकायत में 13 मई अक्षय तृतीया पर बाल विवाह होने की जानकारी दी गई़ इस शिकायत को उन्होंने इंदौर संभाग की प्रभारी सदस्य डा़रीना उपमन्यु को भेज कर जानकारी लेने को कहा है़ इस मामले में इंदौर प्रभारी जांच करा रही हैं़ रीवा-शहडोल संभाग की प्रभारी आशा यादव ने बताया कि उन्हें भी कुछ शिकायतें मिली है, इस संबंध में कलेक्टरों के अलावा महिला एवं बाल विकास अधिकारियों को सख्त कार्यवाही के निर्देश उन्होंने दिए हैं़ उन्होंने बताया कि समाज में बदलाव तभी आएगा जब हम शासकीय अधिकारियों के अलावा बाल विवाह करने वाले अभिभावकों पर कड़ी कार्यवाही की जाए़ उन्होंने बताया कि आज ही विदिशा जिले के ग्यारसपुर में बाल विवाह होने की शिकायत उन्हें मिली थी, इस शिकायत को भोपाल संभाग की प्रभारी को सौंप दिया गया है़

बुधवार, 17 अप्रैल 2013

बदजुबान मंत्री, बढ़ा रहे सरकार का संकट

राज्य के आधा दर्जन से ज्यादा मंत्री ऐसे हैं, जो अपनी बदजुबानी के कारण सरकार के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं़ मंत्रियों द्वारा लगातार कभी महिलाओं को लेकर तो कभी पंडितों और कभी अफसरों को इंगित करते हुए की गई टिप्पणियों के कारण सरकार संगट में खड़ी नजर आने लगी है़ चुनावी वर्ष को देखते हुए संगठन भी अब इन मंत्रियों पर कसावट लाने की मुद्रा में नजर आ रहा है़ राज्य के आधा दर्जन से अधिक मंत्रियों द्वारा की गई टिप्पणियों ने कांग्रेस को मैदान में उतरने का कारण दिया, तो सरकार के लिए ये टिप्पणियां मुसिबत भी बनती जा रही हैं़ शिवराज सरकार के केबिनेट से लेकर राज्य मंत्री तक के बयानों के कारण सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस को मुद्दा मिलता रहा है़ हाल ही में आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह द्वारा झाबुआ में एक शासकीय कार्यक्रम (लड़कियों के समर कैंप के शुभारंभ) के दौरान लड़कियों को लेकर दिए द्विअर्थी एक बयान ने कांग्रेस को सड़क पर उतार दिया है़ कांग्रेसियों ने राजधानी से लेकर जिला स्तर पर इसका विरोध किया और शाह के पुतले तक जला दिए़ शाह द्वारा यह कोई पहला विवादित बयान नहीं था़ श्री शाह इसके इसके पूर्व अलीराजपुर में लड़कियों के हास्टल की मांग कर रहे अभिभावकों से कुछ इसी तरह के बयान पर विवाद में आए थे़ उन्होंने तब कहा था कि लड़कियों की सुरक्षा की गारंटी अगर अभिभावक लें, तो सरकार हास्टल खोलेगी़ इतना ही नहीं खण्डवा में वे पंडितों को खाना न खिलाने और मालेगांव मेले में एक नृत्य को लेकर भी चर्चा में रहे़ शाह द्वारा अपने मंत्रित्वकाल में करीब आधा दर्जन बार ऐसे बयान दिए गए जिसमें वे स्वयं ही उलझे हैं़ झाबुआ में दिए बयान के बाद तो उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से दूरभाष पर चर्चा कर अपनी सफाई तक दी, इसके अलावा उन्होंने इंदौर में पत्रकार वार्ता बुलाकर सार्वजनिक रुप से माफी भी मांगी़ शाह के अलावा प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर भी विवादित बयानों से घिरे रहे हैं़ गौर ने राजधानी में एक समारोह के दौरान महिलाओं को मर्यादा में रहने की नसीहत दी़ उन्होंने विश्वामित्र और मेघना का उदाहरण देकर कहा था कि विश्वामित्र का तप भंग करने में मेघना का ही हाथ था़ इसी तरह महिलाएं को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा था कि महिलाओं को पाश्चात्य सभ्यता को छोड़ भारतीय परिधान पहनने चाहिए़ इसे लेकर विरोध भी खूब हुआ और गौर का पुतला तक महिला कांग्रेस ने जलाया़ गौर के अलावा राज्य के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी इंदौर में रामायण का हवाला देते हुए कहा था कि मर्यादा का उल्लंघन होता है, तो सीता-हरण हो जाता है़ लक्ष्मण रेखा हर व्यक्ति की खींची हैं़ उस रेखा को कोई भी पार करेगा तो रावण सामने बैठा है, वह सीता हरण करके ले जाएगा़ पर्यटन मंत्री तुकोजीराव पवार ने पर्यटन दिवस पर आयोजित एक समारोह में मंच के सामने बैठी एक महिला को देख यह बयान दे डाला था कि वे तो टाइगर हैं और महिलाएं टाइग्रेस हैं़ यह कार्यक्रम टूर आपरेटरों का था, जिसमें महिला टूर आपरेटर भी शामिल हुई थी़ उनका यह बयान काफी विवादित रहा, इस पर भी कांग्रेस ने मोर्चा खोला था़ सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन भी इस मामले में पीछे नहीं रहे़ उन्होंने भोपाल में जिला सहकारी बैंक के अध्यक्षों की एक बैठक में सतना जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष कमलाकर चतुर्वेदी को पोंगा पंडित और पन्ना जिले के जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष संजय नगाइच को चोर तक कह डाला था़ इसके बाद वे अपनी ही पार्टी में घिरे नजर आए़ इतना ही नहीं बिसेन ने छिंदवाड़ा में एक आदिवासी बालक शुभम उर्फ छोटू के हाथों जूते की लैस बंधवाकर विवाद में घिर गए थे़ इसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए यह कसम भी खाई कि वे अब बिना लेस वाले जूते ही पहनेंगे़ यही नहीं श्री बिसेन ने सार्वजनिक मंच पर सिवनी जिले के छिंदा में एक पटवारी से ऊठक-बैठक और होशंगाबाद में सहकारी बैंक के प्रबंधक आरक़े़दुबे को फटकार तक लगा दी थी, इसके बाद वे काफी विवादों में आ गए थे, और कांग्रेस ने सरकार को इन मुद्दों पर काफी घेरा था़ लंबे समय तक मंत्रिमंडल से बाहर रहे अनूप मिश्रा भी मंत्री पद संभालते ही बद्जुबान हो गए़ श्री मिश्रा ने भिंड जिले के लहार में एक कार्यक्रम में यहां तक कह डाला था कि वे तो खादी वाले गुंडे हैं़ जिले में तो एक ही गुंडा रहता है़ श्री मिश्रा के अलावा राज्य के गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता भी इस मामले में पीछे नहीं रहे़ बीते दिनों दतिया जिले में स्विस महिला के साथ हुए बलात्कार और लूटपाट की घटना पर उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर महिला पूर्व में यहां आने की सूचना देती तो, शायद यह घटना नहीं घटती़ पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव भी अपने विधानसभा क्षेत्र में बुंदेलखंड के राई नृत्य को लेकर विवाद में आए थे़ उन्होंने इस नृत्य का पक्ष लिया और इसे बुंदेलखंड की परंपरा तक बता दिया था़ कृषि मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया ने कटनी में महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं द्वारा ब्रिज मांग करने पर यह बयान दिया था कि वे प्रसव पीड़ा का आनंद लें़ इसके अलावा वे किसानों द्वारा आत्महत्या करने पर यह कह चुके हैं कि ये उनके पुराने पापों का फल है बयानों के अलावा राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री रंजना बघेल तो इन मंत्रियों से भी आगे निकल गई़ उन्होंने वर्ष 2009 के लोक सभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मुकाम सिंह किराडेÞ के समर्थन में चुनाव प्रचार के दौरान मनावर विधानसभा क्षेत्र के पलासी गांव में एक महिला गंगा बाई को थप्पड़ तक रसीद कर दिया था़ गंगाबाई कुछ महिलाओं के साथ मंत्री के पास पहुंची थी और विधानसभा चुनाव में सरकार द्वारा 50 हजार रुपए ऋण माफी के बारे में जानकारी लेते हुए यह पूछ रही थी कि सरकार कब तक ऋण माफ करेगी़ इस पर मंत्री को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने महिला को थप्पड़ दे मारा़ हालांकि इस मामले में पुलिस ने शिकायत तक दर्ज कर ली थी़