भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष का आरोप
मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के ग्राम सकरिया निवासी भिखमतिया कोल की पैतृक जमीन राज्य के पूर्व मंत्री और अनूपपुर विधायक बिसाहूलाल सिंह ने षडयंत्रपूर्वक अपनी पत्नी जगोतिया बाई के नाम कर ली और पीड़ित आदिवासी वृद्ध महिला न्याय के लिए दर-दर की ठोकरे खा रही है.
यह आरोप आज भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष रामलाल रौतेले ने प्रदेश भाजपा कार्यालय में पत्रकार वार्ता में लगाए. रौतेले के साथ पीड़ित आदिवासी महिला भिखमतिया कोल, पुत्र संतोष कोल और उसके परिजन भी मौजूद थे. रौतेले ने कहा कि अनूपपुर के ग्राम सकरिया निवासी भिखमतिया कोल की पैतृक साढ़े 9 एकड़ जमीन में से तत्कालीन पटवारी रमेश सिंह गौड़ द्वारा 2007 में 20 डिसमिल जमीन का सौदा किया गया था, लेकिन उससे अधिक भूमि पर कब्जा कर लिया गया. वृद्ध महिला द्वारा शिकायत करने पर पटवारी रमेश सिंह द्वारा बहला-फुसला कर उस जमीन को अपनी पत्नी बेला बाई के नाम करवा लिया गया. साथ ही पीड़िता से कोरे कागजों पर अंगूठा लगवाया गया था. उन्होंने कहा कि पीड़िता को बिना जानकारी के और कोई सौदा किए बगैर जमीन के कुछ हिस्से का नामांतरण पूर्व मंत्री और अनूपपुर के कांग्रेस विधायक बिसाहूलाल सिंह ने अपनी पत्नी के नाम करवा लिया. पीड़ित परिवार जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और संबंधित अधिकारियों से मिला लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई.
पटवारी को करें बर्खास्त, वापस दिलाएं जमीन
उन्होंने कहा कि इस मामले में पटवारी रमेश सिंह द्वारा धोखाधड़ी की गई और षडयंत्रपूर्वक जमीन के कागजों में हेराफेरी की गई. उन्होंने मांग की है कि पटवारी को शासकीय सेवा से बर्खास्त किया जाए. साथ ही जिस जमीन पर पूर्व मंत्री और विधायक बिसाहूलाल सिंह का कब्जा है, उसे तत्काल बेदखल कर पीड़िता को दिया जाए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ आदिवासियों के संरक्षण और उनको अधिकार संपन्न बनाएं जाने की वकालत करते हैं, लेकिन उनके ही विधायक आदिवासियों का शोषण कर रहे हैं.
अयोध्या में राम जन्म भूमि को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर राजधानी भोपाल में जिला प्रशासन ने धारा 144 लगा दी है. राजधानी में यह धारा 2 माह के लिए लगाई गई है. इस दौरान कहीं भी प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
भोपाल कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने आदेश जारी कर राजधानी में धारा 144 लगा दी है. यह धारा आगामी दिनों में राम जन्म भूमि को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए लगाई गई है. कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार थानों में सूचना दिए बिना कोई भी व्यक्ति अपने मकान में किराएदार, नहीं रख सकेंगा. इसके अलावा होटल, लाज, धर्मशाला और ऐसे ही किसी स्थों पर रुकने वालों को पहचान पत्र और जानकारी रजिस्टर में अंकित कर प्रतिदिन थाने में सूचना देना अनिवार्य होगा. कलेक्टर ने धारा 144 के अंतर्गत आदेश जारी कर सभी सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक, सामाजिक और पंरपरा के अनुसार किए जाने वाले आयोजन के अतिरिक्त अन्य सभी आयोजन पर बिना अनुमति के करने पर प्रतिबंध लगा दिया है.
राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को डीआईजी (सिटी) इरशाद वली ने चौकस कर दिया है, जिसमें सभी धार्मिक स्थलों मंदिर-मस्जिद व संवेदनशील इलाकों में पुलिस व्यवस्था पुख्ता की गई है. सुरक्षा इंतजाम मजबूत रहें, इसके लिए सभी 41 पुलिस थाना क्षेत्रों के प्रभारी अपने-अपने इलाके में समय-समय पर गश्त कर रहे हैं और सुपरविजन अधिकारी इस चौकसी को परखें, ऐसे निर्देश दिए गए हैं. सभी क्षेत्रों में शांति कायम रहे, इसके प्रयास पुलिस कर रही है. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सभी इलाकों की स्थिति की जानकारी ले रहे हैं.
भाजपा ने वरिष्ठ नेताओं को सौंपी कमान, कांग्रेस सौंपेगी कलेक्टर को ज्ञापन
भाजपा द्वारा किसानों की समस्याओं को लेकर कल सोमवार 4 नवंबर को प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जा रहा है. इस आंदोलन की कमान सभी वरिष्ठ नेताओं को जिलेवार सौंपी गई है. वहीं कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर किसानों को यह बताया कि किस तरह से कांग्रेस ने सरकार बनाने के बाद किसानों से वादाखिलाफी की है. वहीं कांग्रेस ने केन्द्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है. कांग्रेस भी कल जिला मुख्यालयों पर केन्द्र द्वारा अतिवृष्टि और बाढ़ के लिए सहायता न दिए जाने का विरोध कर प्रदर्शन करेगी.
मध्यप्रदेश भाजपा द्वारा 4 नवंबर को प्रस्तावित किसान आक्रोश आंदोलन को सफल और प्रभावी बनाने के लिए जोर-शोर से इसकी तैयारियां की गई हैं. पार्टी द्वारा प्रत्येक जिले में आंदोलन की कमान वरिष्ठ नेताओं को सौंपी गई है, जिसकी सूची जारी कर दी गई है. इसके अलावा आंदोलन के प्रत्येक पहलू पर विचार कर समूची तैयारियों की समीक्षा भी की जा रही है. संगठन के स्तर पर की जाने वाली तैयारियों के अलावा पार्टी का सबसे अधिक जोर मैदानी तैयारियों पर है और इसके लिए पार्टी के कार्यकर्ता गांव-गांव संपर्क कर रहे हैं.
भाजपा कार्यकर्ता आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव-गांव में किसानों से मिले हैं और किसानों को बताया है कि किस तरह कांग्रेस ने कर्जमाफी का वादा किया था और उस वादे का क्या हुआ. बिजली के बिल को हाफ से लंबे-चौड़े बिल आ रहे हैं. किसानों को बताया गया कि भाजपा की सरकार किसानों को किस फसल पर कितना बोनस देती थी, प्राकृतिक आपदाओं के समय भाजपा सरकार का रवैया कैसा रहता था, कितनी तत्परता और उदारता से भाजपा की सरकार किसानों की मदद के लिए आगे आती थी और अब कांग्रेस सरकार का किसानों के प्रति सोच और व्यवहार कैसा है. चूंकि इस आंदोलन के दौरान बिजली के बढ़े हुए बिलों की होली भी जलाई जाएगी, इसलिए कार्यकर्ता किसानों से आग्रह कर रहे हैं कि वे अपने साथ अपने गांव के बढ़ी हुई राशि वाले बिजली के बिल अवश्य साथ लेकर आएं.
कांग्रेस भी करेगी आज प्रदर्शन
किसानों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भी केन्द्र सरकार और भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोला है. आज जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस नेताओं ने पत्रकार वार्ताएं लेकर अतिवृष्टि और आपदा को लेकर केन्द्र सरकार द्वारा सहायता राशि न पहुंचाने का विरोध जताया. राजधानी भोपाल में कांग्रेस नेता अभय दुबे ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश ने अतिवर्षा एवं बाढ़ से भीषणतम प्राकृतिक आपदा का सामना किया है. इस आपदा से समूचे प्रदेश के 52 में से 39 जिलों की 284 तहसीलें प्रभावित हुई हैं. आपदा से सर्वाधिक नुकसान प्रदेश के अन्नदाता किसानों का हुआ है. लगभग 60.47 लाख हेक्टेयर की 16270 करोड़ रुपए की फसलें बर्बाद हुई हैं. उन्होंने कहा कि केन्द्र ने अब तक मध्यप्रदेश को कोई सहायता उपलब्ध नहीं कराई. दुबे ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने प्राकृतिक आपदा के लिए भाजपा शासित कर्नाटक और बिहार को तुरंत राहत राशि प्रदान की, किंतु मध्यप्रदेश के साथ राजनैतिक द्वैष की भावना के साथ काम किया जा रहा है और प्रदेश भाजपा का नेतृत्व मध्यप्रदेश के नागरिकों के जख्मों पर मरहम लगाने की अपेक्षा नमक छिड़क रहा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा कल जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा.
भाजपा ने की कहा सरकार के दबाव में लिया फैसला, जाएंगे अदालत
मध्यप्रदेश विधानसभा में भाजपा के विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता समाप्त किए जाने के फैसले को लेकर राजनीति गर्मा गई है. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. कांग्रेस ने जहां अदालत के फैसले का स्वागत किया है, वहीं भाजपा इसका विरोध करते हुए आरोप लगा रही है कि सरकार के दबाव में विधानसभा अध्यक्ष ने यह फैसला लिया है. भाजपा ने फैसले को गलत बताते हुए कहा है कि वह इसके विरोध में अदालत जाएगी.
मध्यप्रदेश में झाबुआ उपचुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद अब राज्य के पवई विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता समाप्त किए जाने के मामले ने भाजपा को संकट में डाल दिया है. राजधानी भोपाल की विशेष अदालत ने भाजपा विधायक लोधी को 2 साल की सजा सुनाई जिसे लेकर शनिवार की शाम को विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने विधायक की सदस्यता समाप्त कर पवई विधानसभा क्षेत्र को रिक्त घोषित कर दिया. इस मामले की विधानसभा की ओर से चुनाव आयोग को भी सूचना भेजी गई है. विधानसभा की इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस खेमे में जहां उत्साह नजर आया, वहीं भाजपा की चिंता बढ़ गई. भाजपा ने इस मामले को लेकर विरोध तेज कर दिया.
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति के इस फैसले को गलत बताया और विरोध करते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने यह कार्रवाई एकतरफा की है. पवई विधायक को अभी उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार है. उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष विधायकों के संरक्षक होते हैं और यह फैसला जो उन्होंने लिया है, वह एक संरक्षक का फैसला नहीं है. उन्होंने कहा कि हम इस फैसले के विरोध में अदालत की शरण लेंगे.
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि विधायक प्रहलाद लोधी के साथ पूरा विधायक दल खड़ा है. इस फैसले के विरुद्ध जो भी विधि सम्मत होगा हम लड़ाई लड़ेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष ने यह फैसला बिना विचार किए सरकार के दबाव में आकर लिया है. विधानसभा अध्यक्ष द्वारा की गई यह कार्रवाई कमलनाथ सरकार के डर को दर्शाती है. वहीं पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी इस फैसले का विरोध करते हुए अदालत की शरण लेने की बात कही है.
इंतजार कीजिए 2-3 सीटें और आएंगी
भाजपा के विरोध के बीच आज मुख्यमंत्री कमलनाथ का बड़ा बयान है. उन्होंने कहा कि अभी दो-तीन सीटें और आएंगी. पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा शासनकाल के 15 साल में भाजपा विधायकों और नेताओं के कारनामें सामने आ रहे हैं, अभी और भी ऐसे कारनामे सामने आएंगे. उन्होंने कहा कि यह मामला अभी सामने आया है, इसी तरह के मामले हर सप्ताह और हर महीने सामने आएंगे, इंतजार कीजिए अभी दो-तीन सीटें और आएंगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस हमेशा ही बहुमत में थी, भाजपा लोगों को गुमराह कर रही थी. हमने विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष चुनाव में यह साबित कर दिया था.
झाबुआ के बाद पवई में भी दिखेगा परिणाम
राज्य के जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा ने कहा झाबुआ उपचुनाव में जिस तरह से कांग्रेस ने भाजपा को करारी शिकस्त दी थी, उसी तरह का परिणाम अब पवई में दिखाई देगा. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के बयानों को लेकर कहा कि भाजपा ने अपने 15 साल के कार्यकाल में जो बड़े-बड़े अपराध किए है, वे अपराध अब सामने आ रहे हैं. शर्मा ने कहा कि झाबुआ में कांग्रेस बिना प्रलोभन दिए जीती है. अब पवई में भी यही परिणाम सामने आएगा.
मुख्यमंत्री का मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर प्रदेश की जनता के नाम संदेश
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने प्रदेश की जनता का आव्हान किया है कि वे आशाओं से भरे मध्यप्रदेश को विश्वास का प्रदेश बनाने में प्राणपण से जुटे. मुख्यमंत्री ने नागरिकों का विश्वास दिलाया कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश एक बदला हुआ प्रदेश होगा जिसका साक्षी देश ही नहीं विश्व होगा.
मुख्यमंत्री ने आज मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर सरदार वल्लभ भाई पटेल उद्यान में आयोजित समारोह में प्रदेश की जनता के नाम संदेश दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के युवाओं का अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कौशल विकास हो और उन्हें सम्मानजनक रोजगार मिले इसके लिए राज्य सरकार भोपाल में ग्लोबल स्किल पार्क स्थापित करेगी. नाथ ने कहा कि विकास के लिए जीडीपी की दर हमारी परिभाषा नहीं होगी. विकास के लिए हमारा पैमाना होगा प्रदेश की जनता में खुशहाली. इसके लिए हमने एक रोडमैप तैयार किया है जिस पर सरकार अगले पांच साल तक पूरी दृढ़ता के साथ काम करेगी.
मुख्यमंत्री ने 63 साल पूर्व मध्यप्रदेश राज्य के निर्माण के बाद धार जिले के मांडू में पंडित जवाहरलाल नेहरू की एक सभा का उल्लेख किया. नाथ ने बताया कि पंडित नेहरू ने कहा था कि मध्यप्रदेश में तरक्की के अवसर हैं, मैं चाहता हूं कि यहां की जनता आगे बढ़े लेकिन याद रखे कि आगे तो हम अपने आप से बढ़ते हैं. आपस में मिलकर, प्रेम से रहकर, आप अपना अच्छी तरह काम करें और नए-नए काम सीखें. इसी से आपकी, आपके पड़ोसियों की और गांव की, सबकी भलाई होगी और देश को भी लाभ होगा. नाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश आज पंडित नेहरू की आशाओं का प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के समग्र विकास के लिए हमने एक रोडमैप तैयार किया है. खेती को आधुनिक बनाने के साथ किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने, खेती की मानसूनता पर निर्भरता को कम करने, सिंचाई, पीने के पानी, बिजली और सड़कों का निर्माण मजबूत नींव के साथ करने का हमारा लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि रोडमैप में हमने प्रदेश के सभी वंचित तबकों का सर्वांगीण विकास, महिलाओं का सशक्तिकरण, कानून के राज की स्थापना और सभी वर्गों को तरक्की के भरपूर अवसर उपलब्ध करवाना भी शामिल किया है. हम सत्ता का विकेन्द्रीकरण करके ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के मौके गांवों के ही लोगों को सौंपने के साथ ही नैसर्गिक संपदा का अधिकार भी उन्हें देंगे.
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता के मामले में प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बने इसके लिए हमें कड़े कदम भी उठाना पड़े तो हम उठाएंगे. नाथ ने कहा कि आज के बदलते संदर्भों में शिक्षा और ज्ञान के बीच बेहतर तालमेल हो यह हमारी प्राथमिकता है. युवाओं को रोजगार मिले इसके लिए मुख्यमंत्री युवा स्वाभिमान योजना के साथ ही सरकार प्रदेश में स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाईयों में 70 प्रतिशत रोजगार प्रदेश के लोगों का देना अनिवार्य करने जा रही है.
लोगों की शक्ति है सरकार की शक्ति
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं लोगों की शक्ति को सरकार की शक्ति मानता हूं. जनादेश का सम्मान हो, उनके विश्वास पर सरकार खरी उतरे इसके लिए हम अपनी सुस्पष्ट नीतियों, सभी वर्गों के कल्याण के कार्यक्रमों और संकटों को अवसर के रूप में लेकर काम कर रहे हैं. हमारा यह भाव मध्यप्रदेश को अब आगे ही आगे बढ़ाएगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर राज्य के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए राज्य के निरंतर प्रगति और विकास की राह पर बढ़ने की कामना की है मध्य भारत के इस प्रदेश की स्थपना 1956 में हुई थी. मोदी ने शुक्रवार को मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर राज्य के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर राज्य के निवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं. मैं कामना करता हूं कि प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध यह प्रदेश निरंतर प्रगति और विकास की राह पर आगे बढ़े.

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ सरकार पर जमकर हमला बोला है. उन्होंने विधानसभा परिषद के गठन को लेकर सरकार से सवाल किया है कि जनता के कल्याण के काम जरुरी है या फिर विधान परिषद का गठन. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कमलनाथ राजनीतिक पिट्टूओं की जेबें गर्म करने के लिए विधान परिषद का गठन कर रहे हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर प्रदेश वासियों को बधाई देते हुए लिखा कि एक तरफ कांग्रेस रो रही है कि उसके पास किसानों की कर्ज माफी, मुआवजे, विवाह, मेधावी विद्यार्थी लैपटाप जैसी योजनाओं के लिए पैसे नहीं है और दूसरी तरफ विधान परिषद के गठन के लिए करोड़ों रुपए स्वाहा करने पर आमादा है. उन्होंने कहा कि जनता के लिए कल्याण के काम जरूरी हैं या फिर विधान परिषद का गठन. चौहान ने कहा कि किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हैं. उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति रुकने से हजारों बच्चों की पढ़ाई अधर में लटक गई है, वहीं कमलनाथ अपने राजनीतिक पिट्टूओं की जेबें गर्म करने के लिए विधान परिषद का गठन कर रहे हैं.
राजनीतिक मतभेदों से ऊपर रहना चाहिए विकास
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा का यही ध्येय है कि विकास राजनीतिक मतभेदों से ऊपर रहना चाहिए. हमारा भी यही संकल्प है कि प्रदेश के विकास में भाजपा, हम सब लोग सकारात्मक योगदान करेंगे. चौहान ने जनता का भी आव्हान किया कि मध्यप्रदेश के विकास में हमारे अंदर जो भी सर्वश्रेष्ठ है, वो झोंकने का प्रयास करें. चौहान ने यह भी कहा कि प्रदेश के विकास में भाजपा सकारात्मक सहयोग करेगी और गड़बड़ करने पर प्रचंड विरोध भी करेगी.
मध्यप्रदेश को मदिरा प्रदेश न बनाएं मुख्यमंत्री
पूर्व मुख्यमंत्री ने अधिक शराब दुकानें और दुकानों के साथ ही अहाते खोलने के फैसले का विरोध किया. चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ मध्यप्रदेश को मदिरा प्रदेश न बनाएं. हमारी सरकार के दौरान भी आबकारी विभाग के प्रस्ताव आते थे, लेकिन हमारी सरकार ने पूरी सख्ती के साथ और दुकानें खोलने को मना कर दिया था. नर्मदा तट के किनारे पांच किलोमीटर के दायरे में जो शराब दुकानें थीं वो बंद करा दी थीं, लेकिन, इस सरकार ने अजूबे तर्क दिए हैं कि केवल रेवेन्यू बढ़ाने के लिए यह खोले जा रहे हैं. चौहान ने कहा कि इससे रेवेन्यू नहीं अपराध बढ़ेंगे. चौहान ने कहा कि विकास की जगह सत्यानाश करने वाले फैसले का हम विरोध करेंगे.

सामान्य प्रशासन मंत्री डा. गोविन्द सिंह ने शासकीय सेवकों के पेंशन प्रकरणों संबंधी मंत्रिमण्डलीय समिति की मंत्रालय में आयोजित बैठक में निर्देश दिए कि दोष-सिद्ध सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों की संपूर्ण पेंशन स्थाई रूप से रोकी जाए. उन्होंने कहा कि जिन प्रकरणों में सेवानिवृत्त शासकीय सेवक दोषी नहीं पाए जाते हैं, उनमें पेंशन न रोकी जाए तथा जिनमें वे आंशिक दोषी पाए जाते हैं, उनमें उनकी आंशिक पेंशन एक नियत अवधि के लिए रोकी जाए.
बैठक में कुल 12 प्रकरण प्रस्तुत किए गए. इनमें लोक निर्माण विभाग के 4, पंचायत विभाग के 2, ग्रामीण विकास विभाग के 4 तथा तकनीकी शिक्षा विभाग के 2 प्रकरण थे. इनमें से 5 दोष-सिद्ध सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों की संपूर्ण पेंशन स्थाई रूप से रोके जाने का निर्णय लिया गया. दो प्रकरणों में विभागीय जांच की अनुमति प्रदान की गई तथा एक प्रकरण को आगामी बैठक में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया. शेष 4 प्रकरणों में सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों की पेंशन आंशिक रूप से एक नियत अवधि के लिए रोके जाने का निर्णय लिया गया.