गुरुवार, 26 नवंबर 2015

भाजपा में घमासान के आसार

उपचुनाव में रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में भाजपा को मिली हार के बाद अब संगठन में घमासान के आसार नजर आ रहे हैं. भाजपा संगठन संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया को इसी वर्ष पूरा कराकर नया अध्यक्ष बनाने की कवायद करने में जुटेगा.
रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में पूरी ताकत लगाने के बाद मिली हार के कारण भाजपा नहीं समझ पा रही है. पूरा संगठन इस हार को लेकर चिंतित हो गया है. यहां तक की प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे भी अपनी प्रतिक्रिया में यह कह चुके हैं कि हार से सबक सीखने की जरूरत है. सहस्त्रबुद्धे ने खुद इस संसदीय क्षेत्र में रहकर चुनाव प्रचार किया था, साथही कार्यकर्ताओं की बैठक लेकर उनसे एकजुट होकर पार्टीप्रत्याशी निर्मला भूरिया के पक्ष में काम करने को कहा था, मगर संगठन के नेताओं की बात का उस संसदीय क्षेत्र के कार्यकर्ताओं पर प्रभाव न पड.ने के कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा पूरा संगठन अब चिंतित हो उठा है. यहां पर सबसे ज्यादा सवाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की कार्यशैली को लेकर भी उठने लगे हैं. संगठन ने उपचुनाव के कारण प्रदेश में चल रही संगठनात्मक चुनाव की गतिविधि को पूर्व में झाबुआ, रतलाम, अलीराजपुर, देवास जिलों में रोक दिया था. अब यहां पर यह प्रक्रिया 29 नवंबर से फिर शुर की जा रही है. इसकी घोषणा भी चुनाव अधिकारी अजय प्रताप सिंह कर चुके हैं. सिंह के अनुसार इन जिलों में 29 एवं 30 नवंबर को स्थानीय सतितियों का गठन किया जाएगा, जबकि प्रदेश के शेष सभी जिलों में मंडलों के गठन की प्रक्रिया 5 एवं 6 दिसंबर को होगी. उपचुनाव के बाद भाजपा में अब संगठनात्मक चुनाव को लेकर घमासान भी तेज होता नजर आने लगा है. संगठन के कुछ पदाधिकारी और भाजपा नेता अब यह चाहते हैं कि संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया को जल्द ही यानि दिसंबर माह में ही पूरा करा लिया जाए. साथ ही भाजपा अध्यक्ष का निर्वाचन भी दिसंबर माह में ही पूरा कराया जाए.
यहां उल्लेखनीय है कि नरेंद्र सिंह तोमर के बाद उनके शेष कार्यकाल के लिए नंदकुमार सिंह चौहान को अध्यक्ष बनाया गया था. संगठन चुनाव की प्रक्रिया के साथ ही यह माना जा रहा था कि चौहान दूसरा कार्यकाल भी पूरा करेंगे, मगर रतलाम संसदीय क्षेत्र में मिली हार अब उनके लिए भी संकट खड. करेगी. अध्यक्ष पद के लिए वैसे पूर्व में ही कई नाम सामने आए थे, मगर अब अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की संख्या में इजाफा हो सकता है. यह माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व इस मामले को अब गंभीरता से लेगा.
कोर कमेटी की बैठक 29 को 
 रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में मिली हार के बाद भाजपा कोर कमेटी हार के कारणों को जानने के लिए समीक्षा बैठक 29 नवंबर को भोपाल में कर रही है. बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल, प्रदेश भाजपा के प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे के अलावा मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान भी उपस्थित रहेंगे. बैठक में संगठनात्मक ढांचा कहां पर कमजोर हुआ इस बात को लेकर गंभीरता से मंथन किया जाएगा. साथ ही यह कारण भी जानने का प्रयास होगा कि इस संसदीय क्षेत्र के आठों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा कार्यकर्ता एक साथ इतना क्यों रुठा. कार्यकर्ताओं को साधने के पूरे काम किए, मगर उसने संगठन की बात को ध्यान क्यों नहीं दिया. इस बात को लेकर पूरा संगठन चिंतित है. संगठन के नेता यह तो मान रहे हैं कि रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र वैसे तो परंपरागत रूप से कांग्रेस का गढ. रहा है, मगर 2014 के चुनाव में सीट भाजपा के हाथ में आने के बाद यहां पर भाजपा को उम्मीद थी कि इस सीट पर वह अब अपना कब्जा बरकरार रखेगी. मगर ऐसा नहीं हो पाया. संगठन नेताओं का मानना है कि जब मतदाता के बीच पहुंचकर खुद मुख्यमंत्री ने विकास और सरकार के कामों को बताया, उसके बाद भी अगर संघ के इस गढ. में भाजपा को हार मिली तो कहीं न कही कार्यकर्ता की नाराजगी और संगठन की कमजोरी सामने आ रही है.

शनिवार, 14 नवंबर 2015

अब गरमाएगा चुनावी माहौल

प्रदेश में 21 नवंबर को होने वाले उपचुनाव के लिए मतदान के पूर्व चुनावी माहौल में अब शनिवार से गर्माहट नजर आएगी. कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के दिग्गज कल से चुनाव अभियान में पूरी ताकत के साथ जुटेंगे. कांग्रेस की ओर से जहां दिग्विजयसिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथ में चुनाव प्रचार की कमान रहेगी, वहीं भाजपा ने एक बार फिर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के हाथ में चुनाव प्रचार की कमान सौंपी है. राज्य के रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र और देवास विधानसभा क्षेत्र के लिए हो रहे उपचुनाव में अब दिग्गज नेता अपनी ताकत झोंकने की तैयारी कर चुके हैं. कांग्रेस का पूरा जोर रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र पर है, तो भाजपा भी इसी क्षेत्र मे अपनी पूरी ताकत लगा रही है. कांग्रेस के दिग्गजों के दौरों को लेकर लगाए जा रहे कयासों का दौर अब शांत हो गया है. कल शनिवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव प्रचार की शुरुआत करने रतलाम पहुंच रहे हैं. उनके बाद कांग्रेस नेता संजय निरुपम 15 नवंबर को पहुंचेंगे और वहीं पर डेरा जमाए रहेंगे. इसके बाद 16 नवंबर को कमलानाथ का रतलाम के अलावा देवास दौरा तय है. वहीं, दिग्विजयसिंह के 18 एवं 19 दो दिन तक इन दोनों क्षेत्रों में सभाएं लेने की बात कही जा रही है. इसके अलावा राजस्थान की सीमा से सटे इस संसदीय क्षेत्र में सचिन पायलेट सभाएं लेंगे. कांग्रेस पूरी ताकत यहां पर राहुल गांधी की सभा के लिए लगा रही है. हालांकि राहुल गांधी की सभा होगी या नहीं इस बारे में कांग्रेस नेता मौन हैं. कांग्रेस नेताओं को कहना है कि जल्द ही दिल्ली से इसकी जानकारी मिल जाएगी. दूसरी ओर, भाजपा ने एक बार फिर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पर भरोसा जताया है. भाजपा संगठन पूरे संसदीय क्षेत्र के अलावा देवास विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री की 50 से ज्यादा सभाएं कराने की तैयारी कर चुका है. इसके अलावा केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की सभाएं लगातार हो रही हैं. उधर, संगठन के नेता लगातार कार्यकर्तासम्मेलन कर कार्यकर्ताओं को संगठित करते हुए भाजपा के पक्ष में घर-घर पहुंचकर माहौल बनाने की बात कह रहे हैं. भाजपा का पूरा संगठन देवास के बजाए रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में अपनी ताकत लगा रहा है. भाजपा किसी भी तरह से इस सीट पर फतह चाहती है. यही वजह है कि रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में संगठन ने भाजपा के स्टार प्रचारक के रूप में मुख्यमंत्री पर ही भरोसा जताया है.
 चिंता बने पंचायत प्रतिनिधि 
भाजपा के लिए रतलाम-झाबुआ संसदीय में कार्यकर्ताओं की गुटबाजी के बाद अब पंचायत प्रतिनिधियों की एकजुटता और उनके द्वारा गांव-गांव पहुंचकर भाजपा के खिलाफ काम करने की बात चिंता बन गई है. पंचायत प्रतिनिधि भी इस क्षेत्र में कल 14 नवंबर से सक्रिय हो रहे हैं. इसके लिए आज से ही वहां पर पंचायत प्रतिनिधियों पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है. पंचायत प्रतिनिधियों के नेता डी.पी.धाकड. और अभय मिश्रा दोनों ही आज रतलाम में रहे. उन्होंने भविष्य की रणनीति बनाने के लिए कल से सक्रियता दिखाने की बात कही. धाकड. का कहना है कि कल से पंचायत प्रतिनिधि पूरे संसदीय क्षेत्र में सक्रिय होकर भाजपा के खिलाफ प्रचार का काम करेंगे. उन्होंने बताया कि कल से गांव-गांव में पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा नुक्कड. सभाएं ली जाएंगी. इन सभाओं में यह बताया जाएगा कि भोपाल में पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा जब अपने अधिकार की मांग की जा रही थी तब यह सरकार उन पर किस तरह लाठियां भांज रही थी. भोपाल में आंदोलन को कुचलने वाली तस्वीरों को पंचायत प्रतिनिधि गांव-गांव पहुंचकर बताएंगे.

रविवार, 14 जून 2015

डेरा डालने लगे नेता

गरोठ विधानसभा उपचुनाव को लेकर भाजपा के नेताओं ने भीतरघात को भांप कर डेरा डालना शुरु कर दिया है. यहां पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है. वहीं कांग्रेस नेता भी अब सक्रियता दिखाने की तैयारी कर रहे हैं. सोमवार से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव वहां डेरा डालेंगे. यादव के अलावा प्रदेश कांग्रेस प्रभारी मोहन प्रकाश भी आज गरोठ जाने के लिए भोपाल पहुंचे हैं. गरोठ विधानसभा उपचुनाव भाजपा के लिए चुनौती बन गया है. विशेषकर यहां पर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के बाद जब संघ और संगठन के कुछ कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी खफा नजर आए तो संगठन ने यहां पर पूरी ताकत लगानी शुरु कर दी है. फिलहाल डैमेज कंट्रोल करने के लिए नेताओं ने प्रयास शुरु कर दिए हैं. भाजपा नेताओं ने गरोठ पहुंचकर सभाएं लेने के अलावा कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क भी शुरु कर दिया है. खुद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान गरोठ पहुंचे हैं. चौहान के अलावा प्रदेश संगठन मंत्री अरविंद मेनन एवं भाजपा नेता तपन भौमिक, जगदीश देवड़ा, कैलाश चावला के अलावा मालवा के नेताओं ने गरोठ पहुंचना शुरु कर दिया है. ये नेता अभी कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय पदाधिकारियों से संपर्क कर उन्हें पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार अभियान में भाजपा प्रत्याशी चंदरसिंह सिसोदिया के समर्थन में मैदान में उतरने को कह रहे हैं. भीतरघात की स्थिति को देखने के बाद इन नेताओं ने एकजुटता दिखाते हुए स्थानीय पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को यह कहना शुरु कर दिया है कि संगठन द्वारा घोषित प्रत्याशी के पक्ष में पूरी ताकत हर कार्यकर्ता को लगानी है. दूसरी ओर कांग्रेस ने भी यहां पर चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत तो कर दी है. प्रदेश कांग्रेस की ओर से अभी कोई बड़ा नेता तो वहां कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में चुनावी माहौल बनाने नहीं पहुंचा है, मगर स्थानीय स्तर पर सुभाष सोजतिया की टीम सक्रियता बनाए हुए हैं. सोमवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव खुद अपनी टीम के साथ गरोठ पहुंच रहे हैं. वह अब चुनाव प्रचार के अंतिम समय तक वहां रहकर सिसोदिया के पक्ष में माहौल बनाएंगे. वहीं प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी मोहन प्रकाश भी आज भोपाल पहुंच गए. वे कल सीहोर होते हुए गरोठ पहुंचेंगे. गरोठ में चुनाव प्रचार में अब तेज आने लगी है. साथ ही दोनों दलों ने अब मैदानी जमावट शुरु कर दी है. बड़े नेताओं ने पहुंचकर चुनावी माहौल को गति देने और कार्यकर्ताओं को संगठित होकर चुनाव प्रचार में जुटने की बात कहनी शुरु कर दी है. भाजपा को यहां पर अपने ही दल के भीतरघातियों से भय है, तो कांग्रेस इस बार यहां पूरी ताकत से मैदान में उतरकर बहोरीबंद में मिली विजय के बाद फिर से खाता खोलने की तैयारी कर रही है. आठ प्रत्याशी मैदान में गरोठ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों सहित आठ प्रत्याशी मैदान में हैं. नाम वापसी के बाद यहां पर छह निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में जमे हुए हैं. छोटे दलों बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी के अलावा अन्य दलों ने उपचुनाव से दूरी बनाने का पहले ही फैसला कर लिया है. इस वजह से इन दलों के प्रत्याशी मैदान में नहीं है. छह निर्दलीय प्रत्याशी जो मैदान में है, उनमें से एक भी ऐसा प्रत्याशी नहीं है, जो भाजपा या फिर कांग्रेस प्रत्याशी की जीत-हार में मुसीबत खड़ी कर सके.

शुक्रवार, 12 जून 2015

भीतरघात से डरी भाजपा

मध्यप्रदेश के गरोठ विधानसभा क्षेत्र के लिए हो रहे उपचुनाव में भाजपा को एक बार फिर भीतरघात का डर सताने लगा है. भाजपा ने इसके लिए अभी से डेमेज कंट्रोल करना शुरु कर दिया है. टिकट से वंचित दावेदारों को पदों का प्रलोभन देकर शांत करने की कवायद संगठन ने शुरु कर दी है. गरोठ विधानसभा क्षेत्र में हो रहे उपचुनाव को लेकर नामांकन भरने के बाद से भाजपा संगठन ज्यादा चिंतित नजर आने लगा है. संगठन विशेषकर प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की यहां पर प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है. संघ के देवीलाल धाकड़ का टिकट काटना उनकी चिंता का प्रमुख कारण है. चौहान ने नामांकन भरने के बाद जब वहां पर कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों को गुटों में बंटा देखा तो उनकी यह चिंता कुछ ज्यादा ही बढ़Þ गई. भीतरघात ज्यादा न बढ़Þे इसके लिए उन्होंने गुरुवार की रात से ही प्रयास भी शुरु कर दिए. सबसे पहले उन्होंने दिवंगत विधायक राजेश यादव के पुत्र विनीत से चर्चा की और उनकी नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया. नाराज विनीत को अध्यक्ष की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बना दिया जाएगा. फिलहाल वे नाराजगी को छोड़कर संगठन के घोषित प्रत्याशी के पक्ष में काम करें. विनीत के अलावा प्रदेश अध्यक्ष ने संघ से जुड़े और टिकट के प्रमुख दावेदार देवीलाल धाकड़ गुट से जुड़े लोगों से भी चर्चा की. हालांकि धाकड़ समर्थकों की नाराजगी को वे पूरी तरह से अब तक तो दूर नहीं कर पाए हैं, मगर उन्होंने धाकड़ को इस बात का संदेश दे दिए हैं कि चुनाव के बाद उन्हें संगठन कोई अच्छा पद देगा. हालांकि धाकड़ इस मामले में अब तक संगठन को इस बात के लिए आस्वस्त नहीं कर पाए हैं कि वे चंदरसिंह सिसोदिया के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे या नहीं. फिलहाल धाकड़ के साथ बड़ी संख्या में गरोठ विधानसभा क्षेत्र के पदाधिकारी और कार्यकर्ता हैं, जो भाजपा संगठन की चिंता बने हुए हैं. यहां उल्लेखनीय है कि धाकड़ संघ के मंदसौर जिला कार्यवाह थे, जिन्हें संघ ने चुनाव लड़ने के लिए कार्यमुक्त कर दिया था. इसके बाद भी संगठन ने उन्हें टिकट नहीं दिया. इसी तरह से दिवंगत विधायक यादव की पत्नी सीमा यादव का नाम भी चुनाव समिति ने पैनल में रखा था, मगर ऐनवक्त पर प्रदेश अध्यक्ष चौहान ने सिसोदिया पर भरोसा जताया और उनके नाम पर मोहर लगा दी. इसके बाद से धाकड़ के अलावा यादव समर्थक भी नाराज है. इस मामले में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान का कहना है कि गरोठ में संगठन पूरी एकता और ताकत के साथ चुनाव लड़ेगा और भाजपा प्रत्याशी जीतेगा. उन्होंने कहा कि वहां पर ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जो संगठन के लिए चिंता की बात हो. वैसे हर चुनाव के वक्त जिसे टिकट नहीं मिलता है वह नाराज तो होता है, मगर संगठन से दूर नहीं होता. उन्होंने कहा कि अगर कोई नाराज है तो उसकी नाराजगी दूर कर दी जाएगी. अभी तो चुनाव प्रचार की शुरुआत है. सभी लोग मिलकर भाजपा के पक्ष में काम करेंगे. उन्होंने कहा कि भाजपा ने हर चुनाव को गंभीरता से लिया और लड़ा है. गरोठ में भी पूरी गंभीरता के साथ चुनाव लड़ा जाएगा.

संघ की नाराजगी का भय

गरोठ में होने वाले उपचुनाव में भाजपा को प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को लेकर नामांकन भरने के बाद संघ की नाराजगी का भय सताने लगा है. संघ यहां पर यहां अपने जिला कार्यवाह देवीलाल धाकड़ को मैदान में उतारना चाहता था, मगर संगठन ने उसकी मंशा को नजरअंदाज कर दिया और चंदरसिंह सिसोदिया को टिकट दिया. हालांकि भाजपा जीत के प्रति आश्वस्त है और सिसोदिया को भी संघ का कार्यकर्ता बता रही है. मगर अंदरुनि कलह भी सामने दिखाई दे रही है. भाजपा के लिए गरोठ उपचुनाव अपनों की नाराजगी से घिरता नजर आ रहा है. यहां पर संघ के धाकड़ को टिकट न दिए जाने से दो गुटों में भाजपा नेता और कार्यकर्ता बंट से गए हैं. इसका नजारा बुधवार को जब घोषित प्रत्याशी सिसोदिया का नामांकन भराने स्वयं मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान वहां पहुंचे तो भाजपा दो गुटों में बंटी नजर आई. नामांकन भरने से लेकर सभा तक संगठन और संघ से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच साफतौर पर दूरी दिखाई. इस बात को संगठन ने भांप भी लिया और वह अब यहां पर कोई भी गलति नहीं करना चाह रहा है. संघ को मनाने के लिए संगठन की ओर से प्रदेश महामंत्री अरविंद मेनन को जिम्मेदारी सौंपने की बात कही जा रही है. मेनन इस मामले में संघ के नाराज पदाधिकारियों को कार्यकर्ताओं को मनाने का प्रयास करें ऐसा संगठन चाहता है, हालांकि अभी मेनन से इस मामले में संगठन की ओर से कोई चर्चा नहीं की गई है. फिलहाल स्वयं मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही इस मामले में आई दूरी को कम करने का प्रयास कर रहे हैं. उपचुनाव की तारीख घोषित होने के बाद से ही संघ ने भाजपा संगठन को इस बात के संकेत दे दिए थे कि संघ के देवीलाल धाकड़ को मैदान में उतारा जाए. इसके बाद संघ ने भाजपा चुनाव समिति की बैठक वाले दिन धाकड़ को जिला कार्यवाह के पद से भी मुक्त कर दिया था, ताकि यह पद उनके प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में आड़े नहीं आए. इसके बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और यहां पर अपनी पसंद के व्यक्ति चंदरसिंह सिसोदिया को प्रत्याशी बनाने की घोषणा कर दी और नामांकन भी भरा दिया. इसके बाद संघ के मंदसौर जिले एवं मालवा के पदाधिकारी खफा से हो गए हैं. ये पदाधिकारी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष द्वारा उठाए गए इस कदम से नाराज हैं, यही वजह है कि गरोठ में नामांकन भरने के साथ ही भाजपा को संघ के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों का साथ नहीं मिल रहा है. यह भाजपा के चिंता खड़ी कर रहा है. वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान यहां पर भाजपा की जीत के प्रति आश्वस्त हैं. उनका कहना है कि ऐसी कोई बात नहीं है कि वहां पर भाजपा दो गुटों में बंटी है और प्रत्याशी चयन को लेकर संघ या वहां के संघ के कार्यकर्ता नाराज हैं.

विकास के भरोसे भाजपा

मध्यप्रदेश के गरोठ विधानसभा उपचुनाव को लेकर गहमा-गहमी शुरु हो गई है. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल यहां पर जीत के गुणा-भाग बैठाने लगे हैं. भाजपा को सरकार के कार्यकाल में हुए विकास पर भरोसा है, तो कांग्रेस यहां पर जाति और वर्ग की राजनीति कर मतदाता को साधने की रणनीति बना रही है. वहीं वरिष्ठ नेताओं को साथ कांग्रेस प्रत्याशी को मिलने की उम्मीद भी बताई जा रही है. गरोठ विधानसभा में आज नामांकन भरने के अंतिम दिन स्थिति साफ हो गई है. यहां पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है. भाजपा ने यहां पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के चेहरे पर एक बार फिर विजय की उम्मीद जताई है. संगठन ने वैसे तो 40 से ज्यादा स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर उसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भी शामिल किया है, मगर पूरा जोर संगठन की ओर से मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पर ही रहेगा. संगठन यहां पर उनकी ज्यादा से ज्यादा सभाएं कराकर विजय का रथ जारी रखना चाह रहा है. बहोरीबंद उपचुनाव में हार के बाद संगठन ने अब फैसला किया है कि गरोठ में भी कांग्रेस के बढ़Þते उत्साह को देखते हुए मुख्यमंत्री को ही चुनावी कमान सौंपी जाए. आज भी मुख्यमंत्री ने भाजपा प्रत्याशी चंदर सिंह का नामांकन भरवाया और साथ रहकर रोड शो भी किया. जनता के बीच उन्होंने यह विश्वास दिलाया कि विकास की भाजपा का ध्येय हैं. भाजपा संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने मतदाता के बीच साफ संदेश दिया कि भाजपा विकास के लिए ही चुनाव लड़ रही है. गरोठ का विकास भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में परिणाम आने पर और तेज होगा. उल्लेखनीय है कि भाजपा संगठन ने यहां पर जातिगत आधार पर प्रत्याशी का चयन किया है. गरोठ विधानसभा क्षेत्र में सोंधिया राजपूत समाज के मतदताओं की अधिकता को देख संगठन ने चंदरसिंह को प्रत्याशी बनाया. इसके अलावा उनके अब तक के मैदानी कामों का फायदा और संघ की पृष्ठभूमि का फायदा मिलने की उम्मीद भाजपा को है. इन सबके अलावा भाजपा को यहां पर विश्वास है कि विकास के कामों के आधार पर ही उसकी विजय तय है. वहीं कांग्रेस यहां पर वर्ग और जाति का सहारा ले रही है. कांग्रेस द्वारा पूर्व मंत्री और चार बार चुनाव जीत चुके सुभाष सोजतिया को मैदान में उतार यह संदेश दिया है कि जैन समाज का मतदाता उसके प्रत्याशी के साथ जाएगा. गरोठ विधानसभा में सोंधिया राजपूत और जैन समाज के मतदाताओं की संख्या ज्यादा है. जैन समाज के मतदाता सोंधिया समाज से ज्यादा बताए जाते हैं. जैन समाज के मतदाताओं के बीच सोजतिया की पैठ को लेकर कांग्रेस आश्वस्त है कि वह बहोरीबंद विधानसभा क्षेत्र में जिस तरह से उसके पक्ष में परिणाम आए थे, ठीक उसी तरह का परिणाम यहां भी आएगा. कांग्रेस की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव के हाथ में चुनाव की कमान रहेगी. वे 15 जून से अपनी टीम के साथ गरोठ में ही डेरा जमाए रहेंगे. कांग्रेस ने बदलेगी रणनीति गरोठ विधानसभा में कांग्रेस भी अपनी रणनीति बदलकर बूथ स्तर पर सक्रियता दिखाएगी. सूत्रों की माने तो भाजपा के पेज प्रभारी की तर्ज पर कांग्रेस भी यहां पर बूथ स्तर पर प्रभारी बनाकर बूथ प्रभारी को 20 से 25 मतदाताओं की जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी कर रही है.बूथ प्रभारी के ऊपर कांग्रेस सेक्टर प्रभारी बनाएगी, जो इनकी मॉनीटरिंग करेगा. साथ ही हर बूथ की जानकारी कांग्रेस पदाधिकारियों को देता रहेगा. यहां उल्लेखनीय है कि भाजपा ने पिछला विधानसभा चुनाव और उसके बाद लोकसभा चुनाव पेज प्रभारी बनाकर लड़ा था. उसे इस मामले में सफलता भी मिली थी. इसके बाद भाजपा ने महाराष्ट्र, दिल्ली और हरियाणा विधानसभा के चुनाव में भी इस प्रयोग को अपनाया जहां उसे सफलता मिली थी.

परिवारवाद से दूर हुई भाजपा

गरोठ में होने जा रहे उपचुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने काफी मंथन के बाद मैदान में घुटे हुए और क्षेत्र में खासा पहचान वाले नेताओं को मैदान में उतारा है. भाजपा ने बहोरीबंद उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद यहां पर परिवार से दूरी बनाई है. वहीं कांग्रेस ने पूर्व मंत्री और चार मर्तबा चुनाव जीत चुके सुभाष सोजतिया को यहां मैदान में उतारा है. मंदसौर जिले के गरोठ विधानसभा के विधायक स्वर्गीय राजेश यादव के निधन के बाद यह सीट रिक्त थी. यहां पर 27 जून को मतदान होना है. बुधवार को नामांकन का अंतिम दिन होने से एक दिन पहले दोनों ही दलों ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी. दोनों दलों ने भाजपा ने जहां संघ की पृष्ठभूमि वाले चंदरसिंह सिसोदिया को मैदान में उतारा है, तो कांग्रेस ने यहां पर पूर्व मंत्री रहे सुभाष सोजतिया पर भरोसा जताया है. दोनों ही नेता जमीन से जुड़े हैं और क्षेत्र के मतदाताआें के बीच खासा पकड़ भी रखते हैं. संघ की पृष्ठभूमि वाले सिसोदिया वर्तमान में भाजपा की मंदसौर जिला इकाई के उपाध्यक्ष है साथ ही गरोठ जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष भी है. वे बीते विधानसभा चुनाव में चुनाव प्रभारी भी रहे. इसके अलावा कई पदों पर वे सांगठनिक पदों पर भी वे रहे हैं. सरपंच पद से लेकर जनपद अध्यक्ष तक का चुनाव उन्होंने लड़ा और जीता भी. इस बार भी प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में उनसे आगे संघ के ही देवीलाल धाकड़ का नाम था. इसके बाद अचानक चुनाव समिति की बैठक वाले दिन संगठन ने तय नामों के पैनल में स्वर्गीय राजेश यादव की पत्नी सीमा यादव का नाम आया था. मगर संगठन ने यहां पर इस बार परिवारवाद से दूरी बनाना बेहतर समझा. इसके पीछे मूल कारण यह रहा कि बहोरीबंद में हुए उपचुनाव में भाजपा ने स्वर्गीय प्रभात पाण्डे के पुत्र को मैदान में उतारा था. भाजपा को यहां पर सदभावना लहर के तहत विजय मिलने की पूरी उम्मीद थी. मगर ऐसा नहीं हुआ. यहां पर भाजपा को करारी हार मिली और सत्ता से बाहर रहते हुए भी कांग्रेस ने यहां पर चुनाव जीता. इस हार को इस बार उपचुनाव में भाजपा ने सबक के रुप में लिया है और जमीन से जुड़े सिसोदिया को उम्मीदवार के रुप में मैदान में उतारा है. वहीं कांग्रेस के लिए गरोठ उपचुनाव एक बार फिर चुनौती के रुप में सामने आया. कांग्रेस के सामने वैसे तो एक दर्जन दावेदार यहां से थे, मगर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव यहां पर पूर्व मंत्री और चार बार चुनाव जीते सुभाष सोजतिया को यहां पर मैदान में उतारना चाहते थे. पूर्व में सिसोदिया चुनाव लड़ने से मना करते रहे, मगर प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं विशेषकर दिग्विजयसिंह के प्रयासों से वे राजी हो गए और कांग्रेस ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया. दोनों ही दल अब अपने प्रत्याशी मैदान में उतार चुके हैं. दोनों प्रत्याशी जमीन से जुड़े हैं और चुनाव लड़ने का भी खासा अनुभव भी है. इस बार दोनों प्रत्याशियों को संगठन पर पूरा भरोसा है कि संगठन पूरी ताकत से उनके पक्ष में मैदान में दिखाई देगा. सोजतिया खुद संगठन का साथ मिलने की स्थिति में यहां से चुनाव लड़ने को तैयार हुए हैं. उन्हें भरोसा है कि सभी वरिष्ठ नेताओं और संगठन यहां पर पूरी ताकत से उनके पक्ष में चुनाव मैदान में उतरकर प्रचार करेगा. छोटे दलों ने बनाई दूरी गरोठ विधानसभा उपचुनाव में इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के बीच सीधा मुकाबला होना तय हो गया है. यहां पर छोटे दलों ने चुनाव मैदान में अपने प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया है. बहुजन समाज पार्टी से सालों से ही प्रदेश में उपचुनाव में प्रत्याशी मैदान में उतारती ही नहीं है. वहीं समाजवादी पार्टी ने भी इस बार चुनाव मैदान में प्रत्याशी न उतारने का फैसला किया है. सपा के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव ने कहा कि हमारा पूरा लक्ष्य अब संगठन को मजबूत करना है. इस कारण हम जिला इकाईयों को सक्रिय कर रहे हैं. उपचुनाव लड़ने से ज्यादा हमारा उद्देश्य संगठन को मजबूती देना है. हम सीधे अब विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे. इसके अलावा जनता दल यू ने भी यहां पर चुनाव लड़ने से दूरी बना ली है. जनता दल यू के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद यादव का कहना है कि उपचुनाव वैसे तो सत्ता के पक्ष में ही जाते रहे हैं. इस वजह से चुनाव मैदान में हम प्रत्याशी नहीं उतारेंगे.