भाजपा हुई आक्रामक, कहा माफी मांगे, नहीं तो कांग्रेस निकाले बाहर
मध्यप्रदेष के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा लड़कियों की ष्षादी की उम्र को लेकर दिए बयान पर घिर गए हैं। उनके बयान पर बाल संरक्षण आयोग ने उन्हें नोटिस दिया हैं। वहीं वर्मा के बयान पर भाजपा आक्रामक हो गई है और कहा है कि वर्मा अपने बयान को लेकर माफी मांगे, नहीं तो कांग्रेस उन्हें पार्टी से बाहर निकाले।
राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग ने सज्जन सिंह वर्मा को उनके बयान को लेकर नोटिस जारी कर दो दिनों के अंदर इस पर जवाब देने को कहा है। आयोग ने कहा कि यह बयान बाल संरक्षण और अधिकारों के विरुद्ध हैं। सोशल मीडिया या पब्लिक प्लेटफार्म पर दिए गए ऐसे असंगत और गैरजिम्मेदाराना बयान लड़कियों के प्रति भेदभाव पूर्ण हैं। यह नोटिस के उस बयान पर आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि डॉक्टर कहते हैं कि 15 साल के बाद ही बच्ची प्रजनन के योग्य हो जाती है. लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल करने की क्या जरूरत है? शिवराज सिंह चैहान बड़े डॉक्टर हो गए हैं क्या? वर्मा के इस बयान की खूब आलोचना हो रही है। इससे पहले मंगलवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने एक कार्यक्रम में कहा था कि जब लड़के के लिए शादी की उम्र 21 साल है, तो फिर लड़की के परिपक्वता की उम्र भी 21 साल होनी चाहिए। अब समाज को लड़कियों के प्रति अपनी सोच बदलनी चाहिए. लड़कियों की शादी भी 21 साल होनी चाहिए इसलिए इस पर विचार हो, लेकिन इस बीच अब सज्जन सिंह वर्मा के बयान से मामला गर्मा गया है।
महिलाओं का किया अपमान
भाजपा प्रवक्ता नेहा बग्गा ने इसे महिलाओं का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि सज्जन सिंह वर्मा अपने नाम के विपरीत चले गए. उन्हें तत्काल माफी मांगनी चाहिए। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सज्जन सिंह वर्मा ने प्रदेश के नहीं देश की बेटियों का अपमान किया है। वर्मा शायद भूल गए कि उनकी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद महिला हैं। वर्मा से सार्वजनिक माफी मंगवाना चाहिए। साथ ही पार्टी से उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। वर्मा ने जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है इससे उन्होंने अपनी पार्टी और खुद के संस्कारों को सामने रख दिया है।
सौ साल पुरानी पार्टी की सौ साल पुरानी सोच
कांग्रेस नेता के बयान पर भाजपा के राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि 100 साल पुरानी पार्टी की सोच 100 साल पुरानी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि बार -बार महिलाओं के प्रति कांग्रेस नेताओं की ओछी सोच सामने आई है। कभी जन-सभाओं में महिलाओं के लिए अपशब्द का इस्तेमाल, कभी गर्ल चाइल्ड पर अभद्र टिप्पणी, तो अब मीडिया में लड़कियों की शादी की उम्र के विषय में अयोग्य बयान, यह अत्यंत निंदनीय है और मातृशक्ति का घोर अपमान है। ऐसी विकृत मानसिकता शर्मनाक है। 21वीं सदी के भारत में ऐसी पिछड़ी विचारधारा समाज के लिए हानिकारक है। ये दर्शाता है कि 100 साल पुरानी पार्टी की सोच 100 साल पुरानी है।
दीपावली त्यौहार पर पटाखा बाजार इस बार पूरी तरह से स्वदेशी होगी। प्रशासन ने विदेशी पटाखों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। यदि कोई भी व्यापारी विदेशी पटाखे बेचते हुए पकड़ा गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करते हुए तत्काल लायसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। इस संबंध में गृह मंत्रालय ने आदेश जारी कर दिए हैं।
दरअसल, भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने राज्य सरकारों को विदेशी पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर निर्देश जारी किए थे। जिसको लेकर प्रदेश का गृह मंत्रालय सख्त है और बाजार में विदेशी पटाखों की बिक्री प्रतिबंधित कर दिया है। इसके लिए गृह सचिव ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी कर दिया है, जिसमें विदेशी पटाखों की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए है। प्रशासन को विदेशी पटाखे सहित पोटेशियम नाइट्रेट से बने पटाखों को जब्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही ई-कामर्स कंपनियों से विदेशी पटाखे मंगाने वालों पर भी नजर सख्त नजर रहेगी। प्रशासन ने विदेशी पटाखे की बिक्री पर नजर रखने के लिए एक टीम तैयार की है। यह टीम दुकानों पर जाकर पटाखों की जांच करेगी और इसके सैंपल भी लेगी। जांच में विदेशी पटाखा पाए जाने पर दुकान संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि दिवाली के समय बाजार में चीनी पटाखों की भरमार रहती थी, लेकिन इस साल चीन के साथ भारत के बिगड़े रिश्ते और आत्मनिर्भर भारत के साथ स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए बाजारों में सिर्फ बाजार में बने पटाखे ही बिकेंगे जो दिवाली की रौनक बढ़ाऐंगे।
पत्रकार अर्नब गोस्वामी को मुंबई पुलिस ने बुधवार सुबह उनके घर पहुंचकर हिरासत में ले लिया और उन्हें वैन में बैठाकर अपने साथ ले गई। इस घटना की प्रदेष मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा है कि महाराष्ट्र सरकार का यह कृत्य लोकतंत्र विरोधी एवं पत्रकारिता विरोधी है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने बुधवार को ट्वीट करते हुए कहा कि ‘महाराष्ट्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचला गया है, प्रेस की आजादी छीन ली गई है। महाराष्ट्र में इमरजेंसी से बदतर हालात है। जिन्होंने लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास किया अंततः वे स्वयं समाप्त हो गए हैं। महाराष्ट्र सरकार के इस लोकतंत्र विरोधी कदम के पीछे पूरी तरह से कांग्रेस है। कांग्रेस ने पहले भी लोकतांत्रिक परंपराओं का तार-तार किया है।’
शिवराज ने अपने दूसरे ट्वीट में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा है कि ‘इमरजेंसी के समय कांग्रेस ने किस प्रकार पत्रकार और पत्रकारिता को कुचला था ये किसी से छुपा नहीं है। आज कांग्रेस के शह पर महाराष्ट्र सरकार ने इमरजेंसी जैसे हालात फिर बना दिये हैं। महाराष्ट्र सरकार द्वारा लोकतंत्र विरोधी, पत्रकारिता विरोधी इस कृत्य की मैं घोर निंदा करता हूँ।’ वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट के माध्यम से कहा है कि कांग्रेस की आपातकाल वाली मानसिकता अभी तक बरकार है और शिवसेना उनके साथ है। आज अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार करके महाराष्ट्र सरकार ने लोकतंत्र के चैथे स्तंभ को कुचलने का काम किया है। इंतजार कर रहा हूँ कि समय - समय पर प्रेस की आजादी की दुहाई देने वाले कब बाहर निकलेंगे?
प्रदेष में 28 सीटों के लिए मतदान हो चुका है, लेकिन नेताओं के आरोप प्रत्यारोप का दौर अब भी जारी है। प्रदेष के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आज संघ प्रमुख मोहन भागवत के भोपाल आगमन पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि भागवत का भोपाल आने पर स्वागत करते हुए पूछा कि क्या संघ विधायकों की खरीद फरोख्त को समर्थन देता है?
संघ प्रमुख मोहन भागवत के भोपाल आगमन पर कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर संघ पर निशाना साधा। उन्होंने आज टवीट कर कहा कि मोहन भागवत का भोपाल में पुनः हार्दिक स्वागत। क्या भाजपा की गिरती साख पर चर्चा करेंगे? क्या खुल कर करोड़ों में बिकने वाले पूर्व विधायकों को संघ के चाल चरित्र व चेहरे से परिचित कराएँगे? या संघ भी विधायकों की खरीद फरोख्त का समर्थन करती है? भागवत को स्पष्टीकरण देना चाहिए।
गौरतलब है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत आज भोपाल पहुंचे है। वे संघ के क्षेत्रीय कार्यकारी मंडल की 5-6 नवंबर को होने वाली बैठक में कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे। मध्य क्षेत्र यानी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के संघ पदाधिकारी इस बैठक में शामिल होंगे। भोपाल के शारदा विहार में आयोजित होने वाली इस बैठक में लगभग 40 लोग शामिल होंगे।
शिवराज
सिंह और कमलनाथ ने की पार्टी नेताओं के साथ चर्चा, ली जानकारी
मध्यप्रदेष में उपचुनाव के लिए हुए मतदान के बाद आज भाजपा और कांगे्रेस पार्टी के नेताओं ने मतदान के प्रतिशत के आधार पर विधानसभा क्षेत्रवार आकलन किया। वहीं मतगणना की तैयारियों को लेकर रणनीति बनाई।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने निवास पर विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी और पार्टी के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में सभी सीटों के तहत फीडबैक लिया गया, वहीं मतगणना की तैयारियों को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कमलनाथ सरकार के जो मंत्री थे, उन्हें विधानसभा वार जिम्मेदारी सौंपी थी। इन सभी मंत्रियों से मिलकर सिलसिलेवार फीडबैक लिया गया और मतगणना को लेकर क्या-क्या सावधानियां बरती जा रही हैं और क्या तैयारियां की जा रही हैं, उस पर चर्चा की गई। कांग्रेस ने भरोसा जताया है कि वह उपचुनाव की मतगणना के बाद फिर सरकार बनाने जा रही है।
वहीं मुख्यमंत्री
शिवराज
सिंह चैहान ने संगठन पदाधिकारियों से चर्चा की। प्रदेष भाजपा अध्यक्ष वीडी ष्षर्मा के अलावा अन्य पदाधिकारियों से चर्चा कर उन्होंने विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी ली। मतगणना के प्रतिषत के आधार पर पार्टी नेताओं ने मंथन किया और मतगणना को लेकर रणनीति बनाई।
जनता का गुस्सा था कांग्रेस के खिलाफ
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रदेश की जनता भारतीय जनता पार्टी के साथ खड़ी है। जनता ने 15 महीने में कांग्रेस का भ्रष्टाचार देखा। कांग्रेस ने भाजपा सरकार की सारी योजनाएं बंद कर दी। उन्होंने कहा कि जनता का गुस्सा कांग्रेस के खिलाफ था। वहीं सत्ता में आने के बाद भाजपा ने विकास के सारे काम शुरू कर दिए। लिहाजा जनता भाजपा के साथ खड़ी है। उपचुनाव में प्रचार के दौरान कमलनाथ के अकेले सभाएं करने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह तो कांग्रेस पार्टी ही जानें। हमें किसी और से क्या लेना-देना है। हम और हमारी जनता काफी है. वहीं इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा इस बार दीवाली जनता की अच्छी मनेगी।
मुददा नहीं बचता तो कांग्रेस उठाती है सवाल
कांग्रेस द्वारा प्रशासन और ईवीएम पर सवाल उठाए जाने पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि जब जब कांग्रेस सवाल उठाती है, तब यह समझ जाइए कि, कांग्रेस हारने वाली है। जब कोई मुद्दा नहीं बचता तब कांग्रेस सवाल उठाना शुरू कर देती है. क्योंकि जब उनकी जीत होती है, तो ईवीएम सही हो जाती है और जब हारते है, तो ईवीएम खराब हो जाती है। उन्होंने कमलनाथ के द्वारा कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में 7 घंटे वोटिंग की मॉनिटरिंग करने पर तंज कसते हुए कहा कि, पहले ही बैठक कर लेते, तो अभी नहीं बैठना पड़ता. उनका कहना है कि मंैने सुना है कार्यालय में मूवर एंड पैकर्स भी आ गया था, सामान पैक करने वाला। इतनी भी जल्दी क्या है, 10 नवंबर तक प्रतिक्षा करें, आराम से 11 नवंबर को घर जाना।
प्रदेष में जैसे जैसे उपचुनाव के मतदान के तारीख समीप आ रही है, वैसे वैसे राजनीतिक दलों के नेता वादा करने से भी नहीं चूक रहे हैं। इन वादों के तहत आज राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने फिर युवाओं को लेकर एक वादा किया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही हमारी सरकार आती है, हम पुलिस विभाग में बड़ी संख्या में भर्ती करेंगे।
मध्यप्रदेष में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अब चुनावी वादों का दौर तेज कर दिया है। दोनों दलों के नेता लगातार किसानों और युवाओं को अपनी ओर आकर्शित करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके चलते आज राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने युवाओं को लेकर एक वादा किया है। उन्होंने टवीट कर कहा कि हमने फरवरी 2020 में ही पुलिस विभाग में बंपर भर्ती की तैयारी कर ली थी, लेकिन हमारी सरकार गिरा दी गई। अगले माह हमारी सरकार बनते ही पुलिस विभाग में बड़ी संख्या में भर्ती कर युवाओं को उज्जवल भविष्य दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की जनता लोकतंत्र बचाने में अवश्य ही कामयाब होगी।
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ अपनी सभाओं में भी लगातार किसानों से कर्ज माफी के वादे कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने विधानसभा क्षेत्रों के लिए जारी किए वचनपत्र में भी किसानों और युवाओं के लिए वादे किए हैं।
आपको रोजगार के मुददे पर बोलने का हक नहीं
गृह मंत्री नरोत्तम मिश्राने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के युवाओं से किए वादे को लेकर कटाक्ष किया और कहा कि आपको रोजगार के मुद्दे पर बोलने का कोई हक नहीं। आपकी सरकार पुलिस भर्ती के लिए इतनी चिंतित थी तो 15 महीने में भी परीक्षा कार्यक्रम क्यों नहीं तय कर पाए। भाजपा सरकार ने 07 महीने में ही परीक्षा की तारीख घोषित कर दी लेकिन आप तो आइफा के आयोजन की तारीख तय करने में व्यस्त थे।
कांग्रेस में कमलनाथ ने अजय सिंह को प्रचार में रखा अपने साथ
मध्यप्रदेष कांग्रेस में इन दिनों कमलनाथ के साथ अजय सिंह की सभाओं में सक्रियता चर्चा में है। कमलनाथ अपने साथ सभाओं में भी उन्हें रख रहे हैं, इसके अलावा अजय सिंह को उन्होंने हेलिकाप्टर भी उपलब्ध कराया है, ताकि वे दूसरे स्थानों पर भी सभाएं कर सकें। वहीं कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे डा गोविंद सिंह हासिए पर हैं, उन्होंने ग्वालियर चंबल की 16 सीटों का प्रभार न देकर केवल चार सीटों पर समेट कर रख दिया है। इसी तरह की स्थिति कुछ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की है।
वैसे तो राजनीति में कोई स्थायी नहीं होता, मगर समय समय पर नेताओं की जोड़ी चर्चा में रहती रही है। कभी कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी की चर्चा प्रदेष की राजनीति में होती रही। मगर कमलनाथ सरकार के गिरने के बाद से दिग्विजय सिंह हासिए पर आ गए हैं। वहीं विंध्य और बंुदेलखंड के नेता के रूप में उभर रहे अजय सिंह जिन्हें कमलनाथ सरकार में हासिए पर पर रखा और उनके स्थान पर कमलेष्वर पटेल को स्थापित करने के लिए मंत्री बनाया गया, मगर आज फिर समय बदला और पटेल को अजय सिंह ने पीछे छोड़ दिया। उपचुनाव में कमलनाथ अपनी सभाओं में अजय सिंह को साथ रख रहे हैं, इतना ही नहीं जहां पर अजय सिंह नहीं जाते उन्हें दूसरे स्थानों पर सभाएं लेने भेजा जा रहा है इसके लिए कमलनाथ ने उन्हें हेलिकाप्टर भी उपलब्ध कराया है। कमलनाथ और अजय सिंह अब तक मांधाता, नेपानगर, बदनावर, गोहद, डबरा, सुमावली, दिमनी और हाटपिपल्या विधानसभा क्षेत्रों में एक साथ चुनाव प्रचार कर चुके हैं। वे ही एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्हें कमलनाथ अपने दौरों में लगातार साथ रख रहे हैं।
विपरीत इसके पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व मंत्री डा गोविंद सिंह इन दिनों कांग्रेस में हासिए पर हैं। दिग्विजय सिंह ने खुद माहौल को समझा और दिल्ली की ओर अपना रूख करते हुए सक्रियता दिखानी षुरू कर दी। वहीं डा गोविंद सिंह जो सिंधिया के बाद ग्वालियर चंबल अंचल का बड़ा नेता खुद को मान रहे थे उन्हें चार विधानसभा सीटों पर समेट कर रखा गया है। कांग्रेस में आए इस अचानक बदलाव को लेकर खासा चर्चा है।
कांग्रेस में आए इस नये बदलाव के मायने क्या होंगे यह तो कोई समझ नहीं पा रहा है, मगर कमलनाथ के निकट अजय सिंह के आने से नेताओं की चिंता ज्यादा है। वैसे अजय सिंह दिग्विजय सिंह के समर्थक माने जाते हैं, मगर कमलनाथ उन पर इतना भरोसा कर दिग्विजय सिंह और गोविंद सिंह को हासिए पर ला रहे हैं, इस समीकरण को कोई समझ नहीं पा रहा है। गोविंद सिंह की भी सक्रियता कहीं नजर नहंी आ रही है। वे भिंड जिले तक सिमट कर रह गए हैं। कांग्रेस की यह नई जोड़ी उपचुनाव के बाद क्या गुल खिलाएगी इस बात की चिंता अधिकांष कांग्रेस नेताओं को हो रही है। वे इन दिनों कमलनाथ के रूख को पहचान नहंी पा रहे है। यहां तक कि दिग्विजय सिंह खुद इन दिनों ष्षांत नजर आ रहे हैं।