मध्यप्रदेष कांग्रेस में इन दिनों कमलनाथ के साथ अजय सिंह की सभाओं में सक्रियता चर्चा में है। कमलनाथ अपने साथ सभाओं में भी उन्हें रख रहे हैं, इसके अलावा अजय सिंह को उन्होंने हेलिकाप्टर भी उपलब्ध कराया है, ताकि वे दूसरे स्थानों पर भी सभाएं कर सकें। वहीं कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे डा गोविंद सिंह हासिए पर हैं, उन्होंने ग्वालियर चंबल की 16 सीटों का प्रभार न देकर केवल चार सीटों पर समेट कर रख दिया है। इसी तरह की स्थिति कुछ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की है।
वैसे तो राजनीति में कोई स्थायी नहीं होता, मगर समय समय पर नेताओं की जोड़ी चर्चा में रहती रही है। कभी कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी की चर्चा प्रदेष की राजनीति में होती रही। मगर कमलनाथ सरकार के गिरने के बाद से दिग्विजय सिंह हासिए पर आ गए हैं। वहीं विंध्य और बंुदेलखंड के नेता के रूप में उभर रहे अजय सिंह जिन्हें कमलनाथ सरकार में हासिए पर पर रखा और उनके स्थान पर कमलेष्वर पटेल को स्थापित करने के लिए मंत्री बनाया गया, मगर आज फिर समय बदला और पटेल को अजय सिंह ने पीछे छोड़ दिया। उपचुनाव में कमलनाथ अपनी सभाओं में अजय सिंह को साथ रख रहे हैं, इतना ही नहीं जहां पर अजय सिंह नहीं जाते उन्हें दूसरे स्थानों पर सभाएं लेने भेजा जा रहा है इसके लिए कमलनाथ ने उन्हें हेलिकाप्टर भी उपलब्ध कराया है। कमलनाथ और अजय सिंह अब तक मांधाता, नेपानगर, बदनावर, गोहद, डबरा, सुमावली, दिमनी और हाटपिपल्या विधानसभा क्षेत्रों में एक साथ चुनाव प्रचार कर चुके हैं। वे ही एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्हें कमलनाथ अपने दौरों में लगातार साथ रख रहे हैं।
विपरीत इसके पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व मंत्री डा गोविंद सिंह इन दिनों कांग्रेस में हासिए पर हैं। दिग्विजय सिंह ने खुद माहौल को समझा और दिल्ली की ओर अपना रूख करते हुए सक्रियता दिखानी षुरू कर दी। वहीं डा गोविंद सिंह जो सिंधिया के बाद ग्वालियर चंबल अंचल का बड़ा नेता खुद को मान रहे थे उन्हें चार विधानसभा सीटों पर समेट कर रखा गया है। कांग्रेस में आए इस अचानक बदलाव को लेकर खासा चर्चा है।
कांग्रेस में आए इस नये बदलाव के मायने क्या होंगे यह तो कोई समझ नहीं पा रहा है, मगर कमलनाथ के निकट अजय सिंह के आने से नेताओं की चिंता ज्यादा है। वैसे अजय सिंह दिग्विजय सिंह के समर्थक माने जाते हैं, मगर कमलनाथ उन पर इतना भरोसा कर दिग्विजय सिंह और गोविंद सिंह को हासिए पर ला रहे हैं, इस समीकरण को कोई समझ नहीं पा रहा है। गोविंद सिंह की भी सक्रियता कहीं नजर नहंी आ रही है। वे भिंड जिले तक सिमट कर रह गए हैं। कांग्रेस की यह नई जोड़ी उपचुनाव के बाद क्या गुल खिलाएगी इस बात की चिंता अधिकांष कांग्रेस नेताओं को हो रही है। वे इन दिनों कमलनाथ के रूख को पहचान नहंी पा रहे है। यहां तक कि दिग्विजय सिंह खुद इन दिनों ष्षांत नजर आ रहे हैं।
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