शुक्रवार, 28 अप्रैल 2023

सांसदों , विधायकों के कामकाज से खुश नहीं संगठन

आम लोगों के साथ कार्यकर्ता से भी बढ़ी दूरी

भोपाल। भाजपा संगठन सांसदों और विधायको के कामकाज से खुश नजर नहीं आ रहा है। संगठन द्वारा तय कार्यक्रमों में इनकी रूचि न होना संगठन की चिंता को बढ़ा रहा है। संगठन को जो रिपोर्ट प्राप्त हुई उसमें यह जानकारी मिली है कि जनप्रतिनिधियों की कार्यकर्ताओं और आम नागरिक से भी दूरियां बढ़ी है।
भाजपा संगठन की नजरें अब सांसदों और विधायकों पर टिकी हुई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद कई बार विधायकों से बैठकों में मैदानी सक्रियता बढ़ाने की बात कह चुके हैं, मगर उसके बाद भी सुधार नजर नहीं आया। राजधानी में भाजपा की  बूथ विजय संकल्प अभियान के तहत राज्य स्तरीय बैठक में एक बार फिर यह खुलासा हुआ है कि कार्यकर्ताओं और आम नागरिक से इनकी दूरियां बढ़ती जा रही है। संगठन के सामने यह बात चिंता का कारण बन गई है। चुनावी साल को देखते हुए एक ओर संगठन मैदानी जमावट करता नजर आ रहा है। वह कार्यकर्ता को खुश रखने और मैदान में सक्रिय करने के लिए काम कर रहा है,वहीं जनप्रतिनिधि विशेशकरण सांसद और विधायक संगठन के कार्यक्रमों में रूचि नहीं दिखा रहे हैं। बैठक में जो जानकारी सामने आई उसमें कहा गया कि कई सांसद, विधायक संगठन के कामकाज में किसी तरह की रुचि नहीं ले रहे हैं।
स्थानीय नेताओं की काम में नहीं है दिलचस्पी
सत्ता और संगठन के पास जो फीडबैक आ रहा है वह अगले चुनाव में बड़ी चुनौती के संकेत दे रहा है। यही कारण है कि लगातार विधायकों और सांसदों के कामकाज पर नजर रखी जा रही है। पार्टी के पास जो रिपोर्ट आई है वह विधायकों और प्रभारी मंत्रियों को लेकर जनता ही नहीं पार्टी कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी है। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की सिर्फ कार्यकर्ता ही नहीं आम लोगों से भी दूरी बनी हुई है और इस स्थिति का सरकारी मशीनरी लाभ भी उठा रही है और वह स्थानीय नेताओं के काम में दिलचस्पी नहीं लेती।

बुधवार, 26 अप्रैल 2023

भाजपा, कांग्रेस के टिकट से वंचित नेताओं को टिकट देगी आप

भोपाल। आम आदमी पार्टी के सांसद संदीप पाठक ने आज कहा कि भाजपा और कांग्रेस के टिकट से वंचित नेताओं को आम आदमी पार्टी टिकट देगी। उन्होंने कहा कि दोनों ही दलों के ऐसे कई नेता हैं, जो सालों से काम कर रहे हैं, मगर टिकट के वक्त इन नेताओं की उपेक्षा की जाती है।

पाठक ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा और कांग्रेस के कई अच्छे नेता ज़मीनी तौर पर काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ नेताओं को पार्टी ज़रूरत के हिसाब से पद नहीं देती है. कई ऐसे नेता है, जो सालों साल काम किए जा रहे है, लेकिन इतनी प्राथमिकता नहीं दी गई. आम आदमी पार्टी ऐसे नेताओं के लिए हमेशा दरवाज़े खोली हुई है. ऐसे नेताओं को हमारी पार्टी में कई मौके दिए जाएंगे, लेकिन सिर्फ जोड़ तोड़ की राजनीति हमारा काम नहीं है.
पाठक ने कहा कि जब केजरीवाल मुख्यमंत्री बने तब उन्हें बहुत छोटा मकान दिया गया। उनका घर जर्जर परिस्थिति में था। इसलिए उसे तोड़कर बनाया गया। सरकारी मकान की कई जगह से छत टूट रही थी। इसके बाद इस सरकारी मकान को नए सिरे से बनाये जाने का फैसला लिया गया। अगर केजरीवाल साहब के सरकारी मकान की तुलना करनी ही तो दूसरे के सरकारी मकान से की जानी चाहिए।

कर्नाटक चुनाव के नतीजों का असर दिखेगा मध्यप्रदेश भाजपा में

फिलहाल टाले कई संभावित बदलाव के फैसले

भोपाल। कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव परिणाम का असर प्रदेश भाजपा पर दिखाई देगा। फिलहाल प्रदेश भाजपा में संभावित लंबित फैसलों को टाल दिया है। अब ये फैसले कर्नाटक चुनाव परिणाम के बाद ही लिए जाएंगे। माना जा रहा है कि कर्नाटक में जिस तरह से नाराज नेताओं ने पार्टी का विरोध किया, उसका क्या असर होता है, इसके बाद प्रदेश भाजपा संगठन और सरकार बदलाव के फैसले भाजपा करेगी।
कर्नाटक में मई माह में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी भाजपा का फोकस है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी डी शर्मा भी वहां चुनाव प्रचार के लिए मैदान में उतर गए हैं। वहीं कई संगठन पदाधिकारी और नेता भी कर्नाटक पहुंचे हैं। यह चुनाव प्रदेश भाजपा के कई नेताओं का भविष्य तय करेगा। प्रदेश में लंबे समय से अटका मंत्रिमंडल विस्तार सहित अन्य लंबित फैसले भी फिलहाल भाजपा संगठन ने रोक दिए हैं। अब माना जा रहा है के संगठन सभी फैसले कर्नाटक के चुनाव परिणाम आने के बाद ही लेगा। इसके पीछे बताया जा रहा है कि पार्टी के पीछे जो चुनौतियां खड़ी हुई है, उसका असर संगठन देखना चाह रहा है।
गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में  टिकट वितरण के बाद कई नेताओं ने नाराजगी जताई और पार्टी भी छोड़ी और कुछ तो नाराज होकर बैठ गए हैं। इस मामले को पार्टी हाईकमान गंभीरता से लिया है और  कर्नाटक के चुनाव पर खास नजर रख रहा है। भाजपा के लिए कर्नाटक का यह चुनाव बड़ी चुनौती भी बन गया है। यही वजह है कि हाईकमान ने तय किया है कि कर्नाटक चुनाव के नतीजों तक मध्यप्रदेश के लंबित फैसलों का टाला जाए। वहां का चुनाव परिणाम आने के बाद ही अब ये फैसले लिए जाएंगे। प्रदेश संगठन में बड़े पैमाने पर सर्जरी होना तय है, साथ ही मंत्रिमंडल का विस्तार भी होना है। वर्तमान में मंत्रिमंडल में चार पद रिक्त हैं।
कांग्रेस का दावा भाजपा काटेगी 70 विधायकों के टिकट
कर्नाटक चुनाव के बीच कांग्रेस ने दावा किया है कि भाजपा प्रदेश में 70 वर्तमान विधायकों के टिकट काटेगी। पूर्व मंत्री और विधायक पी सी शर्मा ने कहा कि भाजपा 70 से ज्यादा विधायकों के टिकट काटेगी। वर्तमान भाजपा सिंधिया भाजपा बन गई है, इसके चलते मूल भाजपाई परेशान हैं। इस स्थिति में भाजपा में भगदड़ मचना तय है।
असंतुष्टों की भी लंबी कतार
मध्यप्रदेश भाजपा में असंतुष्ट नेताओं की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। हाल ही में मैहर के विधायक नारायण त्रिपाठी अलग पार्टी बनाने की बात कह चुके हैं। उनके अलावा पूर्व मंत्री रामकृश्ण कुसमरिया, पूर्व मंत्री जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ मलैया, पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा, पूर्व मंत्री दीपक जोशी, पूर्व मंत्री अजय विश्नोई, पूर्व मंत्री हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू भी समय-समय पर अपनी नाराजगी जता चुके हैं। इसके अलावा संगठन के कई पदाधिकारी ऐसे हैं, जो कई बार पार्टी के फैसलों को लेकर चुनौती देते नजर आए हैं।

पंद्रह दल हुए संगठित, बनाया मोर्चा, उतरेंगे मैदान में

भोपाल। विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश के पंद्रह छोटे दलों ने मिलकर मोर्चा बनाकर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है। इन दलों ने मोर्चा का नाम दिया है अपनी सरकार बनाओ-संविधान बचाओ।

प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सहित सपा, बसपा की सक्रियता तो अब तक मैदान में नजर आ रही थी। वहीं अब राज्य के पंद्रह ऐसे दलों ने मोर्चा बनाया है, जिनका वजूद तो नजर नहीं आता, मगर संगठित होने के चलते जातिगत समीकरण बैठाते हुए ये दल प्रत्याशी का समीकरण जरूर बिगाड़ सकते हैं। इन दलों ने आज फैसला किया है कि ये सभी मिलकर मोर्चा के नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरेंगे। राजधानी के गांधी भवन में आज हुई इन दलों की बैठक राष्ट्रीय समानता दल के प्रदेश अध्यक्ष महेश कुशवाहा के नेतृत्व में हुई। दलों ने सरकार बनाओ-संविधान बचाओ मोर्चा का गठन किया। इस मोर्चा में फिलहाल 15 दल शामिल हैं। बैठक में प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा किया है। हालांकि नए मोर्चे का अधिक फोकस आदिवासी बाहुल्य 80 सीटों पर रहेगा। आदिवासी क्षेत्रों में तीसरा मोर्चा अधिक ध्यान देगा।
मोर्चा में ये दल हैं शामिल
राष्ट्रीय समानता दल, समतामूलक समाज पार्टी, भारतीय गोंडवाना पार्टी, जनविकास पार्टी, ओबीसी महासभा, भारतीय वीरदल, राश्टीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, सामाजिक परिवर्तन मिशन, आरक्षित समाज पार्टी, क्रांति जनशक्ति पार्टी, परिवर्तन पार्टी ऑफ़ इंडिया’, इंक़लाब विकास दल, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन, आदिवासी संगठन जयस और कुशवाह महासभा है।

मंगलवार, 25 अप्रैल 2023

चुनावी साल, तेज हुई शहरों और स्थानों के नाम बदलने की रफतार


भोपाल के बरखेड़ा पठानी का नाम बदला, अब कहलाएगा लाल बहादुर शास़्त्री नगर

                                                                                



 उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली के बाद अब मध्यप्रदेश में शहरों और स्थानों के नाम बदलने का सिलसिला तेज हुआ है। मुगल काल के दौर में रखे गए शहरों और स्थानों के नाम लगातार बदले जा रहे हैं। इसके चलते प्रदेश की राजधानी भोपाल में हबीबगंज स्टेशन, इस्लामनगर के बाद अब क्षेत्र बरखेड़ा पठानी का नाम बदला गया है। इसका नया नाम लाल बहादुर शास्त्री नगर कर दिया है। भोपाल का नाम बदलकर भोजपाल करने की मांग भी काफी समय से उठ रही है। देर सबेर यह नाम भी परिवर्तित हो सकता है।
वैसे तो मध्यप्रदेश में लंबे समय से शहरों और इलाकों के नाम बदलने की मांग हो रही है। ये मांग भाजपा नेताओं द्वारा की जा रही है। इसके चलते कुछ माहों के अंतराल से प्रदेश में इस काम को सरकार अंजाम भी दे रही है। चुनावी साल होने के कारण नाम बदलने का सिलसिला और भी तेज हो चला है। खासकर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में यह काम प्रदेश के अन्य शहरों एवं स्थानों के बजाय और तेजी से हो रहा है। राजधानी में कुछ माह पूर्व हबीबगंज स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति स्टेशन किया गया। इसी तरह एक कस्बे  इस्लाम नगर का नाम बदलकर जगदीशपुर किया गया। राजधानी के ही मिंटो हॉल का नाम बदलकर कुशाभाऊ ठाकरे हाल कर दिया गया। अब नगर निगम भोपाल ने एक अन्य क्षेत्र जिसका नाम बरखेड़ा पठानी था, उसका नाम बदलकर लाल बहादुर शास्त्री नगर कर दिया है। इसके आदेश भी जारी हो गए हैं। वहीं भोपाल का नाम बदलने की मांग लंबे समय से उठ रही है। नगर निगम परिषद भोपाल शहर का नाम बदलकर भोजपाल करने का प्रस्ताव पारित कर चुका है, यह प्रस्ताव फिलहाल शासन स्तर पर लंबित है।
इन शहरों, स्थानों के भी बदले गए नाम
इसके पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने गृह जिले सीहोर के नसरुल्लागंज का नाम बदल चुके हैं। अब नसरुल्लागंज का नाम भैरूदा हो गया है। प्रदेश में होशंगाबाद शहर का नाम बदलकर नर्मदापुरम कर दिया गया है। तो इसी जिले के बाबई कस्बे का नाम बदलकर अब माखननगर कर दिया गया है। वहीं टीकमगढ़ जिले के शिवपुरी का नाम बदलकर कर कुंडेश्वरधाम कर दिया गया। इसी तरह इंदौर जिले के पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम टंट्या मामा और इंदौर के भंवरकुआ चौराहे और एमआर टेन बस स्टेंड का नाम भी बदलकर टंटया मामा कर दिया गया है।  

गुरुवार, 6 अप्रैल 2023

आसान नहीं टिकट की पाने की राह

 संघ से जुड़े पदाधिकारियों का फीडबैक दिलाएगा टिकट

 मध्यप्रदेश में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में विधायकी का टिकट पाने के लिए भाजपा नेताओं को कड़ी मेहनत करनी होगी। मेहनत ही नहीं अपने को यह साबित करना होगा कि वे जमीन से जुड़े नेता है। जिस तरह से संघ पदाधिकारियों ने मैदानी मोर्चा संभाला है, वह इस बात का संकेत दे रहा है कि प्रदेश के नेताओं को अपने समर्थकों को भी टिकट दिलाना आसान नहीं होगा। टिकट वितरण में केन्द्रीय नेतृत्व के अलावा संघ की ही चलेगी।
मध्यप्रदेश में साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं। भाजपा ने इस बार मैदानी तैयारी के लिए केन्द्रीय नेताओं और संघ से जुड़े संगठन के पदाधिकारियों पर ज्यादा भरोसा जताया है। प्रदेश संगठन और सरकार ने भले ही विकास यात्राओं और भीड़ जुटाउ कार्यक्रमों के जरिए इस बात के संकेत केन्द्रीय नेताओं को दिए कि प्रदेश में भाजपा की स्थिति बेहतर है, मगर भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व इस बार प्रदेश के नेताओं पर बिल्कुल भरोसा दिखाता नजर नहीं आ रहा है। यही वजह है कि प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संघ प्रमुख मोहन भागवत के लगातार कार्यक्रम बन रहे हैं।
प्रदेश में संकेत इस बात के साफ होते जा रहे हैं कि मैदान में प्रदेश संगठन को पूरी ताकत से उतरना है। उनका साथ संघ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता देंगे। वहीं संकेत इस बात के भी है कि टिकट वितरण में भी संघ और केन्द्रीय नेताओं की ज्यादा चलेगी। इसके पीछे मूल कारण यह माना जा रहा है कि संघ से जुड़े संगठन पदाधिकारियों की मैदानी सक्रियता पिछले कुछ समय से ज्यादा ब़ढ़ी है। इसके तहत क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल को मैदान में उतारा है। वे हर अंचल के जिलों में पहुंचकर फीडबैक ले रहे हैं। जामवाल अब तक भिंड, मुरैना, मंदसौर, नीमच, रतलाम, अनूपपुर, सिंगरौली और जबलपुर समेत कई जिलों का फीडबैक ले चुके है। कहा जा रहा कि जामवाल के संभाग और जिला वार दौरे की तैयार हो रही रिपोर्ट न केवल वजनदार होगी, बल्कि उम्मीदवारों के बायोडाटा पर उनकी मुहर लगी होगी।
मैदान में होंगे शिवराज, सिंधिया, पर संघ की रणनीति पर होगा काम
प्रदेश में इस बार विधानसभा चुनाव में चेहरे के रूप में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही होंगे। संघ और संगठन के अलावा केन्द्रीय नेतृत्व भी यह जान रहा है कि शिवराज के चेहरे के अलावा कोई दूसरा चेहरा नहीं होगा। वहीं कांग्रेस से भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी पसीना बहाने के लिए मैदान में उतारा जाएगा। दोनों नेताओं को पूरे प्रदेश में सक्रियता दिखानी होगी, मगर चुनावी रणनीति पूरी तरह से केंद्रीय नेतृत्व और संघ की होगी। उसी रणनीति पर भाजपा मैदान में नजर आएगी। 

महाकुंभ के जरिए अनुसूचित जाति के मतदाताओं को साधेगी भाजपा

 बसपा और कांग्रेस के वोट बैंक में सेंधमारी की तैयारी

मध्यप्रदेश में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा का फोकस हर वर्ग को साधने पर है। पेसा एक्ट के जरिए आदिवासी वर्ग को साधने और लाड़ली बहना के सहारे आधी आबादी यानि महिलाओं को आकर्षित करने के बाद अब भाजपा अनुसूचित जाति वर्ग को साधने की तैयारी में जुट गई है। 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती पर महूं में और फिर ग्वालियर में 16 अप्रैल को किए जा रहे महाकुंभ के जरिए भाजपा का लक्ष्य इस वर्ग को साधने का है।
प्रदेश सरकार की लगातार की जा रही घोषणाएं और भाजपा संगठन के कार्यक्रमों ने प्रदेश में कांग्रेस सहित अन्य दलों के लिए परेशानी बढ़ा दी है। भाजपा इस बार घोषणाओं को चुनाव के पहले अमलीजामा पहना कर इन दलों को परेशान कर रही है। फिर चाहे आदिवासी वर्ग के लिए पेसा एक्ट हो या फिर हाल ही में घोषित की लाडली बहना योजना हो। पेसा एक्ट लागू कर दिया गया है, वहीं लाडली बहना योजना के तहत सरकार जून माह तक बहनों के खातों में एक हजार रूपए जमा कराने की तैयारी कर चुकी है। अब भाजपा ने अनुसूचित जाति वर्ग को साधने के लिए प्रदेश में दो बड़े आयोजन करने की तैयारी है। 14 अप्रैल आंबेडकर जयंती पर सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 16 अप्रैल को ग्वालियर में अनुसूचित जाति वर्ग का महाकुंभ आयोजित किया जा रहा है। इस महाकुंभ में सरकार इस वर्ग के लिए कोई बड़ी घोशणा भी करने जा रही है। वहीं प्रदेश के सागर जिले में बनाए जा रहे संत रविदास मंदिर के निर्माण की योजना भी बनाई जाएगी। इस मंदिर निर्माण की घोशणा खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 19 फरवरी को एक कार्यक्रम के दौरान की थी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद सरकार ने मंदिर के लिए 11 एकड़ जमीन भी आवंटित कर दी है। इस मंदिर का निर्माण भाजपा अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की तर्ज पर करना चाहती है। भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा ने इसकी रणनीति भी बनाई है।
राम मंदिर निर्माण की तरह मांगेंगे चंदा
भाजपा की योजना है कि सागर जिले नरयावली विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बड़तूमा में बनाए जाने वाले इस भव्य मंदिर के लिए राम मंदिर की तर्ज पर ईट, पत्थर, मिट्टी और चावल लोगों से चंदे के रूप में लिया जाएगा। चावल का उपयोग मंदिर के भूमिपूजन के दौरान आयोजित किए जाने वाले भोज के लिए किया जाएगा। जबकि ईट, पत्थर और मिट्टी मंदिर निर्माण के काम आएगी। भाजपा की योजना है कि हर गांव से एक मुट्ठी ईंट इस मंदिर के निर्माण के लिए लाई जाए। मंदिर निर्माण के लिए भाजपा ने सौ करोड़ रूपए का प्रावधान किया है।
कांग्रेस की सीटों पर नजर
प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 35 सीटें आरक्षित है। वर्तमान में इनमें से 20 पर भाजपा और 15 पर कांग्रेस का कब्जा है। जबकि इस वर्ग को वोट बैंक मानने वाली बहुजन समाज पार्टी के खाते में एक भी सीट नहीं है। भाजपा इस चुनाव में अपनी सीटों की संख्या बढ़ाना और कांग्रेस की सीटों की संख्या कम करने की तैयारी कर रही है। प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग की आबादी करीब 21 प्रतिशत है। इस आबादी को साधने में अगर भाजपा सफल रही तो कांग्रेस को बड़ा झटका लग सकता है।
बसपा को भी लगेगा झटका
ग्वालियर-चंबल अंचल में बसपा का भी प्रभाव रहा है। इस अंचल की अधिकांश सीटों पर इस वर्ग का मतदाता परिणामों पर सीधा प्रभाव डालता है। यही वजह है कि भाजपा ने महाकुंभ के लिए ग्वालियर को चुना है। यहां से भाजपा प्रदेश स्तर पर इस वर्ग के मतदाताओं को बड़ा संदेश देकर अपनी ओर आकर्षित करने की तैयारी कर चुकी है।