संघ से जुड़े पदाधिकारियों का फीडबैक दिलाएगा टिकट
मध्यप्रदेश में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में विधायकी का टिकट पाने के लिए भाजपा नेताओं को कड़ी मेहनत करनी होगी। मेहनत ही नहीं अपने को यह साबित करना होगा कि वे जमीन से जुड़े नेता है। जिस तरह से संघ पदाधिकारियों ने मैदानी मोर्चा संभाला है, वह इस बात का संकेत दे रहा है कि प्रदेश के नेताओं को अपने समर्थकों को भी टिकट दिलाना आसान नहीं होगा। टिकट वितरण में केन्द्रीय नेतृत्व के अलावा संघ की ही चलेगी।
मध्यप्रदेश में साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं। भाजपा ने इस बार मैदानी तैयारी के लिए केन्द्रीय नेताओं और संघ से जुड़े संगठन के पदाधिकारियों पर ज्यादा भरोसा जताया है। प्रदेश संगठन और सरकार ने भले ही विकास यात्राओं और भीड़ जुटाउ कार्यक्रमों के जरिए इस बात के संकेत केन्द्रीय नेताओं को दिए कि प्रदेश में भाजपा की स्थिति बेहतर है, मगर भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व इस बार प्रदेश के नेताओं पर बिल्कुल भरोसा दिखाता नजर नहीं आ रहा है। यही वजह है कि प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संघ प्रमुख मोहन भागवत के लगातार कार्यक्रम बन रहे हैं।
प्रदेश में संकेत इस बात के साफ होते जा रहे हैं कि मैदान में प्रदेश संगठन को पूरी ताकत से उतरना है। उनका साथ संघ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता देंगे। वहीं संकेत इस बात के भी है कि टिकट वितरण में भी संघ और केन्द्रीय नेताओं की ज्यादा चलेगी। इसके पीछे मूल कारण यह माना जा रहा है कि संघ से जुड़े संगठन पदाधिकारियों की मैदानी सक्रियता पिछले कुछ समय से ज्यादा ब़ढ़ी है। इसके तहत क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल को मैदान में उतारा है। वे हर अंचल के जिलों में पहुंचकर फीडबैक ले रहे हैं। जामवाल अब तक भिंड, मुरैना, मंदसौर, नीमच, रतलाम, अनूपपुर, सिंगरौली और जबलपुर समेत कई जिलों का फीडबैक ले चुके है। कहा जा रहा कि जामवाल के संभाग और जिला वार दौरे की तैयार हो रही रिपोर्ट न केवल वजनदार होगी, बल्कि उम्मीदवारों के बायोडाटा पर उनकी मुहर लगी होगी।
मैदान में होंगे शिवराज, सिंधिया, पर संघ की रणनीति पर होगा काम
प्रदेश में इस बार विधानसभा चुनाव में चेहरे के रूप में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही होंगे। संघ और संगठन के अलावा केन्द्रीय नेतृत्व भी यह जान रहा है कि शिवराज के चेहरे के अलावा कोई दूसरा चेहरा नहीं होगा। वहीं कांग्रेस से भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी पसीना बहाने के लिए मैदान में उतारा जाएगा। दोनों नेताओं को पूरे प्रदेश में सक्रियता दिखानी होगी, मगर चुनावी रणनीति पूरी तरह से केंद्रीय नेतृत्व और संघ की होगी। उसी रणनीति पर भाजपा मैदान में नजर आएगी।
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