मंगलवार, 13 अक्टूबर 2020

सही मायनों मंे अब आजाद हुआ है बामौरी

कमलनाथ ने कहा सिंधिया ने एक कालेज नहीं खोलाए जबकि वे कितने स्कूल चलाते हैं


मध्यप्रदेष के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज फिर भाजपा और ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हमला बोला। उन्हांेने कहा कि लोकसभा चुनाव में सिंधिया को हराने के बाद अब सही मायने में बामौरी आजाद हुआ है। सिंधिया ने यहां एक कालेज भी नहीं खोलाए जबकि वे कितने स्कूल चलाते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह बात आज बामौरी में कांग्रेस प्रत्याषी कन्हैयालाल अग्रवाल के समर्थन में जनसभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व कार्याकाल के दौरान किए गए कार्यों का उल्लेख किया और बताया कि कांग्रेस की सरकार ने 15 माह में कितने और क्या काम किए। उन्होंने कहा कि बमौरी की जनता बिकाऊ नहीं है। देश में लोग कहते हैं मध्यप्रदेष की राजनीति बिकाऊ है। सौदेबाजी कर देश भर में मध्यप्रदेष को बदनाम कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कि 2018 में शिवराज सरकार को जनता ने घर बैठा दिया था। मध्यप्रदेश को शिवराज सरकार ने 15 साल में भ्रष्टाचार में नंबर 1ए महिला अत्याचार में नंबर 1 दिया था। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि  बमौरी अब सही मायने में आजाद हुआ है। पिछले लोकसभा में सिंधिया को हराकर संदेश दिया कि हम गुलाम नहीं हैं। बमौरी महाराजा का क्षेत्र रहा है। पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि बमौरी में एक कॉलेज नहीं है जबकि वो कितने स्कूल कॉलेज चलाते हैं।

कमलनाथ के साथ आज मंच पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह भी उपस्थित नजर आए। वे आज उनके साथ पहली बार चुनाव प्रचार में दिखाई दिए। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मैं बरसों बाद बामौरी आया हूं। यहां आकर पता चला कि यहां की जनता बिकाउ नहीं हैए जनता टिकाउ हैए जबकि सिंधिया कहते हैं मैं पैसों के दम पर जनता को खरीद सकता हूं। अजय सिंह के अलावा आज मंच पर आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया भी नजर आए। जबकि कमलनाथ की सभाओं में इन नेताओं के नहीं होने और चुनाव प्रचार में दिखाई नहीं देने को लेकर सवाल उठने लगे थे।


विजय संकल्प के साथ बूथ सम्मेलन में जुटेंगे भाजपा नेता

मंडल सम्मेलनों में कांग्रेस पर किया हमला, अब बूथ स्तर के कार्यकर्ता को साधने की तैयारी


मध्यप्रदेष में उपचुनाव को लेकर भाजपा के बड़े नेताओं ने ग्वालियर चंबल अंचल में मंडल सम्मेलनों के जरिए कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। लगातार कांग्रेस पर बोले गए हमलों में भाजपा नेताओं का सीधा निषाना गांधी परिवार और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ रहे। इस सम्मेलनों के जरिए भाजपा नेताओं ने कार्यकर्ताओं में जोष भरने का काम भी किया।
भाजपा ने उपचुनाव की तैयारियां तो चुनाव तारीख की घोशणा के पहले ही कर दी थी, मगर अब वह सम्मेलनों के जरिए कार्यकर्ता की नाराजगी को दूर करने का पूरा प्रयास कर रही है। सम्मेलनों में भाजपा के सभी बड़े नेता और पदाधिकारी जिनमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, अजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य के साथ ही राज्य सरकार के कई मंत्रियों ने 10 दिन तक मंडल कार्यकर्ताओं के सम्मेलनों को संबोधित किया और कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम किया। इसके अलावा कांग्रेस पर भाजपा नेताओं ने जमकर हमला बोला। खासकर रणनीति के तहत भाजपा नेताओं ने गांधी परिवार और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर इन सम्मलेनों में निषाना साधा और मतदाता तक अपनी बात पहुंचाई।
 अब भाजपा का पूरा फोकस 15 अक्टूबर से षुरू होने वाले बूथ सम्मेलनों पर है।  भाजपा के ये नेता अब बूथ स्तर पर जाकर सम्मेलन करने की तैयारी में जुट गए हैं। बूथ सम्मेलन 15 अक्टूबर से शुरू होंगे और 25 अक्टूबर तक चलेंगे। बूथ सम्मेलनों को विजय संकल्प के रूप में मनाया जाएगा। इनके जरिए जिन क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति कमजोर है उन क्षेत्रों में वोटरों को रिझाने संगठन स्तर पर रणनीति बनाई जाएगी। इसके साथ ही इन बूथों में नियुक्त किए गए बूथ संयोजक, पन्ना प्रभारी व बूथ अध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों को उत्साहित करने का काम भी किया जाएगा। भाजपा ने इन सम्मेलनों की जिम्मेदारी जिला स्तर के पदाधिकारियों विधायकों को ही सौंपी जाना है। सांसद, विधायक, मोर्चा व संगठन के प्रदेश पदाधिकारियों के साथ जिला अध्यक्ष, जिलों के पदाधिकारी ही इन सम्मेलनों के जरिए बूथ कार्यकर्ता और कार्यकर्ताओं से चर्चा करेंगे।
बड़े नेता भी पहंुच सकते हैं सम्मेलनों में
मंडल सम्मेलनों की तरह ही बूथ सम्मेलनों में भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, अजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ष्षामिल होंगे। इसके अलावा भाजपा के  बड़े नेताओं की जोड़ी भी पहुंच सकती है। बड़े नेताओं की बैठकों में एक साथ कई बूथों की टीम को एक साथ बुलाने की भी तैयारी की जा रही है। ताकि अधिक से अधिक बूथों तक पार्टी की बात पहुंच सके। 15 अक्टूबर से सभी के दौरे फाइनल किए जाएंगे।

सोमवार, 12 अक्टूबर 2020

शिवराज की एक्टिंग से शाहरूख़ और सलमान भी शरमा जाएं


शिवराज को आती है खूब एक्टिंग

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान पर आज फिर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि शिवराज सिंह को खूब एक्टिंग आती है, वे तो मंच पर लेट जाते हैं। इनको तो मुंबई जाना चाहिए, एक्टिंग करना चाहिए।  उनकी एक्टिंग से शाहरुख खान और सलमान खान भी शरमा जाएं।
सागर जिले के सुरखी में कांग्रेस प्रत्याषी पारूल साहू के समर्थन में जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने यह बात कही। उन्होंने भाजपा प्रत्याषी गोविंद राजपूत को चेतावनी देते हुए कहा कि कहा है कि गोविंद सिंह 1 तारीख तक अपनी दबाव की राजनीति कर लें, फिर 3 तारीख को जनता भी जवाब देगी और कमलनाथ भी हिसाब लेगा। इस दौरान उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान पर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि शिवराज सिंह को खूब एक्टिंग आती है, वे तो मंच पर लेट जाते हैं। इनको तो मुंबई जाना चाहिए, एक्टिंग करना चाहिए।  उनकी एक्टिंग से शाहरुख खान और सलमान खान भी शरमा जाएं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पारूल साहू को जिताएं वे सागर का विकास छिंदवाड़ा की तर्ज पर करेंगे। पार्टी छोड़कर भाजपा में गए और उनकी सरकार गिराई उन लोगों को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों ने जब ईमान का सौदा कर लिया तो वे जनता के लिए क्या करेंगे। यह सोचने वाली बात है। जनता इस बात को इस समय बखूबी समझ चुकी है। ऐसे लोगों को सबक सिखाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि मैंने न केवल माफिया के खिलाफ अभियान चलाकर उनकी कमर तोड़ने की कोषिष की, बल्कि ष्षुद्ध के लिए युद्ध अभियान भी चलाया। किसान कर्जा माफी की प्रक्रिया अंतिम चरण जून में ष्षुरू होने वाली थी, इसके पहले भाजपा ने षड्यंत्र कर उनकी सरकार को गिरा दिया। 

उद्योगपति कमलनाथ कभी नहीं मिलते थे मंत्री विधायकों से


मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान ने कहा कि उद्योगपति मुख्यमंत्री कभी अपने विधायक-मंत्रियों से नहीं मिलते थे, केवल उद्योगपतियों और दलालों से मिलते थे। वल्लभ भवन दलालों का अड्डा बन गया था। ट्रांसफर-पोस्टिंग का एक बहुत बड़ा उद्योग फलने-फूलने लगा था। उद्योगपति के गले यह बात नहीं उतर रही है कि एक भूखे-नंगे घर का व्यक्ति इतने बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री बन कैसे सकता है।
गुना जिले के बम्होरी में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान ने कहा कि कमलनाथ  कह रहे थे कि शिवराज जहाँ जाता है, नारियल साथ लेकर जाता है। नारियल भगवान को चढ़ाया जाता है और जनता मेरी भगवान है। मैं जनता की पूजा करता हूँ, इसलिए कांग्रेस के नेताओं को मिर्ची लगती है। कांग्रेस के नेता कहते हैं कि शिवराज भूखे-नंगे घर का है। उन्होंने कहा कि यह देश गरीबों और किसानों का है। इनका दर्द इनके बीच में से आया हुआ व्यक्ति ही समझ सकता है। कमलनाथ तो महलों में रहने वाले लोगों में से एक हैं, उनको गरीबों के दर्द से क्या मतलब! उद्योगपति की सरकार बनी तो वल्लभ भवन दलालों का अड्डा बन गया। गरीब से किए वादे भुला दिए गए और दलालों को खुली बाहों से बुलाया जाने लगा। जब गरीब जनता को लाभ देने की बात आई, तो उद्योगपति ने कहा कि पैसे ही नहीं है। भूखे-नंगे घर के आदमी ने तो छह महीने में ही जनता को रु. 23,000 करोड़ से अधिक का लाभ दे डाला।
उन्होंने कहा कि उद्योगपति की सरकार से अच्छी तो भूखे-नंगे की सरकार है। इस सरकार के राज में जनता सुखी है, किसान खुश हैं और गरीबों की जिंदगी संवर रही है। कोरोना 19 के प्रकोप के समय एक तरफ जहाँ उद्योगपति आइफा अवॉर्ड की बैठक कर रहे थे, फिल्मस्टार के साथ फोटो खिंचवाने में व्यस्त थे, दूसरी तरफ भूखे-नंगे की सरकार ने जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ देना प्रारम्भ कर दिया,खजाना खोल दिया, कोरोना को नियंत्रित किया।
उन्होंने कहा कि मैंने तय किया कि प्रदेश सरकार भी 4 हजार रुपए किसानों के खाते में डालेगी। प्रदेश के किसानों को एक वर्ष में 10 हजार रुपए मिलेंगे। उद्योगपति मुख्यमंत्री कभी अपने विधायक-मंत्रियों से नहीं मिलते थे, केवल उद्योगपतियों और दलालों से मिलते थे। वल्लभ भवन दलालों का अड्डा बन गया था। ट्रांसफर-पोस्टिंग का एक बहुत बड़ा उद्योग फलने-फूलने लगा था। उद्योगपति के गले यह बात नहीं उतर रही है कि एक भूखे-नंगे घर का व्यक्ति इतने बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री बन कैसे सकता है। 

शिवराज ने कहा हां मैं भूखे नंगे घर से हूं, इसलिए समझता हूं गरीबों की समस्या


कांग्रेस नेता के बयान पर हमलावर हुई भाजपा, कांग्रेस को देनी पड़ी सफाई

मध्यप्रदेष में उपचुनाव के दौरान नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इसी के चलते मुरैना के कांग्रेस नेता दिनेश गुर्जर के बयान के बाद राजनीति गर्मा गई और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने कांग्रेस नेताओं पर पलटवार करते हुए कहा कि हां मैं भूखे नंगे घर से हूं मैंने गरीबी देखी है और गरीबों की समस्या को जानता हूं।
मुरैना में कांग्रेस नेता दिनेश गुर्जर ने एक सभा में प्रदेष के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान को लेकर विवादित बयान दे दिया। इसके बाद राजनीति गर्मा गई। भाजपा नेता कांग्रेस पर हलावर हो गए।दरअसल गुर्जर ने सभा में कहा कि  कमलनाथ भारत के नंबर 2 उद्योगपति हैं. शिवराज के विपरीत वो भूखे घर से नहीं हैं. शिवराज के पास चंद एकड़ जमीन थी, लेकिन अब उनके पास हजारों एकड़ जमीन है। क्योंकि वे किसानों का खून पी रहे हैं।
गुर्जर के इस बयान के बाद मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान ने भी आज पलटवार किया और कहा कि कांग्रेस के नेता कहते हैं कि शिवराज भूखे-नंगे घर का है।  उन्होंने कहा कि हाँ, मैं भूखे-नंगे घर का हूं। मैंने बीमारियाँ, गरीबी, समस्याएँ देखी है। मैं गरीबों का दर्द जनता हूँ। उद्योगपति यह क्या जानें!  उन्होंने टवीट कर लिखा कि हाँ...मैं गरीब हूँ इसी लिए गरीब बेटे-बेटियों को मामा बन पढ़ाता हूँ। गरीब हूँ इसी लिए गरीब माँ-बाप की बेटियों का कन्यादान करता हूँ। गरीब हूँ, इसी लिए हर गरीब का दर्द समझता हूँ... प्रदेश को समझता हूँ।
कमलनाथ जैसे नेता तो सोने का चम्मच लेकर पैदा होते हैं: मिश्रा
गृह मंत्री डा नरोत्तम मिश्रा ने अपने निवास पर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि  हम तो पहले से कहते आए हैं कि कमलनाथ जैसे नेता सोने का चम्मच लेकर पैदा होते हैं। इसीलिए इन्हें जनता के बीच से निकलकर आने वाले नेता नहीं सुहाते। उनकी सरकार ने गरीबों के कल्याण की कई योजनाएं बंद कर दीं। दरअसल जनता के दुख-दर्द वही नेता समझ सकता है जिसने गरीबी देखी हो। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को कमलनाथ सरकार के कामकाज के बारे में जनता से ज्यादा सवाल नहीं करने चाहिए, वरना जनता जनार्दन उन्हें ऐसे ही आइना दिखाएगी।
 कांग्रेस ने दी सफाई
कांग्रेस नेता के बयान पर कांग्रेस को सफाई देना पड़ा। कांग्रेस ने सफाई देते हुए कहा है कि, दिनेश गुर्जर का बयान तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है. एमपी कांग्रेस के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा है कि, दिनेश गुर्जर कहना चाह रहे थे कि, कमलनाथ औद्योगिक घराने से आते हैं, उद्योगपति हैं, लेकिन जब वो मध्यप्रदेश आए, तो उन्होंने किसानों का दर्द समझा, किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए उन्हें कर्ज के दलदल से निकालने की पहल की. गरीबों की योजना में शिवराज सरकार के समय से हो रहे भ्रष्टाचार को बंद किया। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की राशि और वृद्धावस्था पेंशन को भी बढ़ाया. युवाओं के रोजगार और महिलाओं के सम्मान के लिए काम दिया। औद्योगिक घराने से आने के बाद उनकी सोच गरीब किसानों और आम आदमी के हित की सोच है।

फिर मैदान में माई के लाल, भाजपा की बढ़ी चिंता

सपा के बाद सपाक्स भी उतरा मैदान

मध्यप्रदेष में हो रहे 28 सीटों के लिए उपचुनाव में सपाक्स पार्टी ने भी अपने प्रत्याषी मैदान में उतार दिए हैं। सपाक्स के प्रत्याषियों की घोषणा से भाजपा नेता चिंतित हो गए है। पिछले विधानसभा चुनाव में माई के लाल के नारे के चलते भाजपा को ग्वालियर चंबल अंचल की सीटों पर सवर्ण वर्ग की नाराजगी के चलते करारी हार का सामना करना पड़ा था और इसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिला था।
मध्यप्रदेष में उपचुनाव को लेकर सियासत चरम पर है। वहीं लगातार एक के बाद एक दल अपने प्रत्याषी मैदान में उतार रहे हैं। कभी उपचुनाव न लड़ने वाली बहुजन समाज पार्टी ने भी इस बार अपने प्रत्याषी मैदान में उतार कर कांग्रेस और भाजपा की चिंता को बढ़ा दिया है। वहंी अब सपाक्स पार्टी ने भी मैदान में उतारने का फैसला कर अपने प्रत्याषियों की घोषणा कर दी है।
गौरतलब है कि प्रदेष में साल 2018 के चुनाव में भाजपा को सत्ता से बाहर कराने में माई के लालों की बड़ी भूमिका रही थी, वो माई के लाल जो आरक्षण के खिलाफ है और आरक्षण खत्म नहीं करने के शिवराज सिंह चैहान के भाषण के बाद खफा हो गए थे और फिर सामान्य पिछड़ा वर्ग का संगठन बनाकर राजनीतिक पार्टी बना ली थी, जिसकी वजह से भाजपा को ग्वालियर चंबल में हार का सामना करना पड़ा था। सपाक्स ने अब फिर हुंकार भरी है।
एट्रोसिटी एक्ट और आरक्षण को बनाएंगे मुददा
सपाक्स पार्टी उपचुनाव में एट्रोसिटी एक्ट और आरक्षण को फिर से मुद्दा बनाएगी। सपाक्स देश के सभी वर्गों और समुदायों के गरीबों को आरक्षण देने की बात करती है, जबकि जो दशकों से ऊंचे पदों पर बैठकर आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। उनका विरोध करती है। सपाक्स ने सत्ता में आने पर अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 फीसद आरक्षण देने का वादा किया है। साथ ही जनता से भाजपा और कांग्रेस का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। सपाक्स की सक्रियता से बीजेपी में चिंता है तो कांग्रेस को 2018 की तरह फायदा मिलने की उम्मीद नजर आ रही है।
11 उम्मीदवारों की घोषणा
सपाक्स पार्टी ने 11 विधानसभा क्षेत्रों में अपने प्रत्याषियों की घोषणा कर दी है। सपाक्स ने सुमावली से शत्रुघ्न सिकरवार,  मुरैना से धर्मेंद्र सिकरवार,  अंबाह से बीरबल महावर,  मेहगांव से दीपक सिंह कुशवाह,  ग्वालियर ईस्ट से सुनील कुमार शर्मा,  पोहरी से उदयभान सिंह परिहार,  बमोरी से शिशुपाल यादव,  अशोकनगर से महेंद्र सिंह महावर, सांची से हरिनारायण बेदी, हाटपिपल्या से सुरेश शर्मा और सांवेर से संतोष रत्नाकर को प्रत्याषी बनाया है। 

रविवार, 11 अक्टूबर 2020

उपचुनाव के बहाने प्रदेश में जमीन तलाश रही शिवसेना


मध्यप्रदेष में 28 सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव में शिवसेना भी अपनी जमीन तलाशने में जुट गई है। महाराश्ट सीमा से लगे मालवा निमाड़ अंचल की आधा दर्जन सीटों पर शिवसेना अपने प्रत्याषी उतार सकती है। इसके लिए पार्टी सर्वे भी करा रही है। जल्द ही शिवसेना के नेता इस बात का खुलासा करेंगे।
राज्य में 28 सीटों पर हो रहे उपचुनाव में कभी दिलचस्पी न लेने वाली बसपा ने अपने प्रत्याषी उतारकर वैसे ही कांग्रेस और भाजपा नेताओं की नींद उड़ा दी है। खासकर ग्वालियर चंबल अंचल में बसपा ने कई सीटों पर चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाकर दोनों दलों के लिए संकट पैदा कर दिया है। वहीं अब शिवसेना भी राज्य में जमीन तलाषने में जुटी है। बताया जाता है कि महाराश्ट सीमा से लगे प्रदेष के मालवा निमाड़ अंचल की विधानसभा सीटों पर शिवसेना अपने प्रत्याषी मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे है। इसके शिवसेना के प्रदेष से जुड़े नेता इन दिनों महाराश्ट के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे और शिवसेना नेता संजय राउत के सीधे संपर्क में है। उद्धव ठाकरे ने दोनों को  प्रदेष में शिवसेना के लिए स्थिति देखते हुए प्रत्याषी मैदान में उतारने की जिम्मेदारी सौंपी है। दोनों नेताओं ने इसके लिए सर्वे का कार्य कराया है। अब इसके बाद शिवसेना को तय यह करना है कि वह प्रदेष में उपचुनाव लड़े या नहीं। सूत्रों  की माने तो शिवसेना ने यह तय किया है कि मालवा निमाड़ अंचल आगर, हाटपिपलिया, नेपानगर, सांवेर, मांधाता, बदनावर और सुवासरा सीटों पर वह प्रत्याषी मैदान में उतारे। इन सीटों पर शिवसेना का सर्वे हुआ है।
शिवसेना के प्रदेष के नेताओं का कहना है कि शिवसेना इस उपचुनाव में कुछ प्रत्याषी मैदान में उतारकर यह देखना चाहती है कि उसका जमीनी आधार कितना है। उद्धव ठाकरे चाहते हैं कि महाराश्ट से लगे होने के नाते अब मध्यप्रदेष में शिवसेना को अपना वोट बैंक बढ़ाना चाहिए। वे संगठन का विस्तार करते हुए शिवसेना को मजबूती देना चाहते हैं। ठाकरे उपचुनाव में प्रत्याषी खड़े कर यह भी देखना चाहते हैं कि उसे प्रदेष में कितनी मेहनत करने की जररूत है, जिससे वह अपने दल को यहां पर मजबूती दे सके। यही वजह है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे उनके बेटे आदित्य ठाकरे और प्रवक्ता संजय राउत सहित कई बड़े चेहरों को इस काम में लगाया है। ये जल्द ही यह तय करेंगे कि उपचुनाव मंे शिवसेना को प्रत्याषी उतारने चाहिए या नहीं, अगर उतारने हैं तो किन विधानसभा क्षेत्रों में। शिवसेना के प्रदेश अध्यक्ष ठाणेश्वर महावर ने भी इस बात की पुष्टि की है कि शिवसेना उपचुनाव में प्रत्याषी मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस के स्टार प्रचारकों में उद्धव ठाकरे
मध्यप्रदेष कांग्रेस ने महाराश्ट के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को स्टार प्रचारकों की सूची में ष्षामिल किए जाने के भी कयास लगाए जा रहे हैं। अगर ठाकरे कांग्रेस के स्टार प्रचारक बने तो षिवसेना के लिए प्रदेष में प्रत्याषी मैदान में उतारने मंे परेशानी हो सकती है। शिवसेना के बड़े नेता इस बात को लेकर भी संकट में हैं कि क्या किया जाए। फिलहाल तो ठाकरे के निर्देश पर प्रदेष के शिवसेना के नेताओं ने जो निर्देश उन्हें मिले थे, उसके मुताबिक सर्वे कराया और जानकारी भी दे दी। अब ठाकरे के फैसले का इंतजार इन नेताओं को है।