सोमवार, 12 अक्टूबर 2020

उद्योगपति कमलनाथ कभी नहीं मिलते थे मंत्री विधायकों से


मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान ने कहा कि उद्योगपति मुख्यमंत्री कभी अपने विधायक-मंत्रियों से नहीं मिलते थे, केवल उद्योगपतियों और दलालों से मिलते थे। वल्लभ भवन दलालों का अड्डा बन गया था। ट्रांसफर-पोस्टिंग का एक बहुत बड़ा उद्योग फलने-फूलने लगा था। उद्योगपति के गले यह बात नहीं उतर रही है कि एक भूखे-नंगे घर का व्यक्ति इतने बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री बन कैसे सकता है।
गुना जिले के बम्होरी में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान ने कहा कि कमलनाथ  कह रहे थे कि शिवराज जहाँ जाता है, नारियल साथ लेकर जाता है। नारियल भगवान को चढ़ाया जाता है और जनता मेरी भगवान है। मैं जनता की पूजा करता हूँ, इसलिए कांग्रेस के नेताओं को मिर्ची लगती है। कांग्रेस के नेता कहते हैं कि शिवराज भूखे-नंगे घर का है। उन्होंने कहा कि यह देश गरीबों और किसानों का है। इनका दर्द इनके बीच में से आया हुआ व्यक्ति ही समझ सकता है। कमलनाथ तो महलों में रहने वाले लोगों में से एक हैं, उनको गरीबों के दर्द से क्या मतलब! उद्योगपति की सरकार बनी तो वल्लभ भवन दलालों का अड्डा बन गया। गरीब से किए वादे भुला दिए गए और दलालों को खुली बाहों से बुलाया जाने लगा। जब गरीब जनता को लाभ देने की बात आई, तो उद्योगपति ने कहा कि पैसे ही नहीं है। भूखे-नंगे घर के आदमी ने तो छह महीने में ही जनता को रु. 23,000 करोड़ से अधिक का लाभ दे डाला।
उन्होंने कहा कि उद्योगपति की सरकार से अच्छी तो भूखे-नंगे की सरकार है। इस सरकार के राज में जनता सुखी है, किसान खुश हैं और गरीबों की जिंदगी संवर रही है। कोरोना 19 के प्रकोप के समय एक तरफ जहाँ उद्योगपति आइफा अवॉर्ड की बैठक कर रहे थे, फिल्मस्टार के साथ फोटो खिंचवाने में व्यस्त थे, दूसरी तरफ भूखे-नंगे की सरकार ने जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ देना प्रारम्भ कर दिया,खजाना खोल दिया, कोरोना को नियंत्रित किया।
उन्होंने कहा कि मैंने तय किया कि प्रदेश सरकार भी 4 हजार रुपए किसानों के खाते में डालेगी। प्रदेश के किसानों को एक वर्ष में 10 हजार रुपए मिलेंगे। उद्योगपति मुख्यमंत्री कभी अपने विधायक-मंत्रियों से नहीं मिलते थे, केवल उद्योगपतियों और दलालों से मिलते थे। वल्लभ भवन दलालों का अड्डा बन गया था। ट्रांसफर-पोस्टिंग का एक बहुत बड़ा उद्योग फलने-फूलने लगा था। उद्योगपति के गले यह बात नहीं उतर रही है कि एक भूखे-नंगे घर का व्यक्ति इतने बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री बन कैसे सकता है। 

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