गुरुवार, 24 मई 2012

वंशवाद में घिरी कांग्रेस

प्रदेश कांग्रेस वंशवाद की परंपरा से घिरती जा रही है़ विधानसभा के उपचुनाव हों, या फिर मुख्य चुनाव कांग्रेस नेताओं का प्रयास यही रहता है कि उनकी किसी परिजन को ही टिकट मिले़ यही जून में महेश्वर में होने जा रहे उपचुनाव के लिए हुआ़ यहां भी राज्यसभा सदस्य डॉ़ विजय लक्ष्मी साधौ विरोध के बाद भी अपने भाई देवेन्द्र साधौ को टिकट दिलाने में सफल हो गर्इं़ उपचुनाव में वैसे कांग्रेस को वंशवाद महंगा ही पड़ा है़ वर्तमान विधानसभा में कांग्रेस को मात्र एक ही सीट पर जीत हासिल हुई, जबकि वंशवाद के चलते तीन स्थानों पर उसे हार का मुंह देखना पड़ा है़ प्रदेश कांग्रेस में वर्षों से चली आ रही वंशवाद की परंपरा अब भी जारी है़ इस परंपरा के चलते कांग्रेस में जमीनी नेता को पद से लेकर चुनाव में टिकट तक से वंचित होना पड़ता है़ चाहे विधानसभा के मुख्य चुनाव हों या फिर उपचुनाव वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का यही प्रयास रहता है कि पहली प्राथमिकता उनके परिवार के सदस्य को मिले़ वर्तमान विधानसभा के लिए हुए अब तब पांच उपचुनाव में भी यही देखने को मिला है़ सद््भावना लहर का फायदा राष्ट्रीय नेतृत्व को दिखाकर कांग्रेस के नेता वंशवाद की बेल को आगे तो बढ़Þा ले जाते हैं, मगर परिणाम पार्टी हित में नहीं ला पाते हैं़ तेरहवीं विधानसभा के अब तक के हुए पांच उपचुनाव में कांग्रेस ने चार स्थानों गोहद, जबेरा, कुक्षी और सोनकच्छ में परिवारवाद के चलते कांग्रेस नेता टिकट तो दिला पाए, मगर उन्हें फायदा केवल एक स्थान गोहद में मिला़ यहां पर स्वर्गीय माखनलाल जाटव के पुत्र रणवीर जाटव को कांग्रेस ने खड़ा किया, जिन्हें सद्भावना लहर का फायदा भी मिला़ इसके अलावा कुक्षी में नेता प्रतिपक्ष रही स्वर्गीय जमुनादेवी की भतीजी निंशा सिंघार, सोनकच्छ में सांसद सज्जनसिंह वर्मा के भाई अर्जुन वर्मा और जबेरा में स्वर्गीय रत्नेश सालोमन की पुत्री तान्या रत्नेश सालोमन को कांग्रेस ने टिकट दिया, मगर इन तीनों ही स्थानों पर उसे हार का मुंह देखना पड़ा़ केवल एक उपचुनव तेंदूखेड़ा में कांग्रेस परिवारवाद से जरुर उभरी, लेकिन यहां भी सांसद बने राव उदयप्रताप सिंह के समर्थक विश्वनाथ को टिकट मिला, मगर उन्हें भी हार का मुंह देखना पड़ा़ कांग्रेस में वंशवाद की परंपरा तो बढ़Þ रही है,मगर नेता अपने परिजनों को जीत नहीं दिला पा रहे हैं़ हालांकि ये परिणाम उपचुनाव के हैं़ कांग्रेस इन स्थानों पर नेताओं के बीच गुटबाजी की भी शिकार हो रही है जिस कारण वंशवाद को भी हार का मुंह देखना पड़ा है़ महेश्वर में एक बार फिर कांग्रेस ने वंशवाद की बेल को आगे बढ़Þाते हुए राज्यसभा सदस्य डॉ़ विजय लक्ष्मी साधौ के भाई देवेन्द्र साधौ पर दाव खेला है़ यहां देखना है कि कांग्रेस को कितना फायदा मिलता है़ 12 जून को होने वाले मतदान के लिए अभी से यहां पर निमाड़ के नेताओं के बीच गुटबाजी दिखाई दे रही है़

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