गुरुवार, 24 मई 2012

सरकारी जांच पर नहीं भरोसा

भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष पद से भले ही शिवकुमार शर्मा कक्काजी को हटा दिया हो़, पर सरकार की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं़ संघ में उनके समर्थक पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सरकार की नीति और नियति पर भरोसा नहीं है़ वे सरकार द्वारा अपर मुख्य सचिव से बरेली घटना की जांच की निष्पक्षता पर यकीन नहीं कर रहे हैं़ शिवकुमार शर्मा समर्थक पदाधिकारी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधिश से न्यायिक या फिर सीबीआई से इस घटना की जांच कराना चाहते हैं़ भारतीय किसान संघ मध्यप्रदेश इकाई में प्रदेश अध्यक्ष पद से शिवकुमार शर्मा कक्काजी को हटाने के बाद विभाजन साफ नजर आने लगा है़ कक्काजी समर्थक पदाधिकारी अब पहले से ज्यादा सक्रिय होकर सरकार और भाजपा के खिलाफ नजर आने लगे हैं़ इन पदाधिकारियों को कक्काजी के जेल से बाहर आने का इंतजार है़ कक्काजी समर्थक पदाधिकारी इन दिनों सरकार के खिलाफ मुहिम छेड़ने की रणनीति बना रहे हैं़ इन पदाधिकारियों ने राज्यपाल रामनरेश यादव से मुलाकात कर संघ के निर्णय पर नाराजगी जताई़ इनका कहना है कि किसान संघ द्वारा जो कदम उठाया गया है वह अनुचित और दबाव में लिया गया निर्णय है़ संघ के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बरेली घटना की तुलना अब 3 दिसंबर 2011 को भोपाल में भोपाल गैस पीड़ितों द्वारा किए गए आंदोलन से करने लगे हैं़ इनका कहना है कि भोपाल गैस कांड की 27 वीं बरसी पर गैस पीड़ितों ने अपनी कई वर्षों पुरानी मांगों को लेकर पुलिस पर पथराव किया था़ बरेली के किसानों की अपेक्षा भोपाल गेस पीड़ितों के पास रेलवे ट्रेक पर अधिक संख्या में बड़े-बड़े पत्थर थे़ गैस पीड़ितों के उग्र प्रदर्शन के दौरान सबसे पहले निशाना मीडियाकर्मी बने थे़ इसके विपरीत भारतीय किसान संघ की जिला इकाई का कार्यक्रम शांति से चला था़ राज्यपाल से दुखड़ा सुनाते हुए कक्काजी समर्थकों ने कहा है कि गैस पीड़ितों पर तो धारा 307 नहीं लगाई गई थी़ उन पर कमजोर धाराएं इसलिए लगाई गई,क्योंकि सरकार वोट बैंक की राजनीति करना चाहती थी़ किसान संघ के कक्काजी समर्थक कार्यकर्ताओं का मानना है कि बरेली में हुई घटना की सरकार द्वारा अपर मुख्य सचिव इंद्रनील दाणी से जांच कराई जा रही है़ वे इस जांच पर भरोसा नहीं रखते हैं़ संघ का मानना है कि जब लाठी, आंशु गैस, बंदूक और गोली पुलिस की थी, और अब जांच कराने वाले अफसर भी शासन के हैं तो जांच कैसे सही होगी़ उन्होंने मांग की है कि सरकार अगर वास्तव में घटना की सच्चाई जानना चाहती है तो वह इस मामले में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से न्यायिक या सीबीआई से जांच कराएं़ राज्यपाल से मुलाकात कर उन्होंने इस मांग का आग्रह भी किया है़

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