बुधवार, 2 मई 2012
भ्रष्टाचार पर ढीली चाल
लोकायुक्त संगठन की अनुशंसा के बाद भी विभागों द्वारा वर्षों तक कार्रवाई के नाम पर प्रकरण लंबित पड़े रहते हैं़ बीते दस साल में लोकायुक्त द्वारा आठ विभागों को 33 मामले में कार्रवाई करने की अनुशंसा की, मगर ये सभी प्रकरण अब तक लंबित हैं़ वर्तमान में लोकायुक्त द्वारा 16 विभागों को 170 प्रकरण में कार्रवाई के लिए अनुशंसा की गई, मगर इन पर कार्रवाई के नाम पर विभागों ने पहल तक शुरु नहीं की है़
राज्य में भ्रष्टाचार को कम करने के लिए लोकायुक्त संगठन की स्थापना तो कर दी गई, मगर सरकार द्वारा ही संगठन की अनुशंसाओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता है़ लोकायुक्त संगठन ने स्थापना के बाद कई मामलों में जांच के बाद विभागों को कार्यवाही के लिए लिखा, मगर विभाग इन मामलों को गंभीरता से लेता ही नहीं है़ हालात यह है कि कई प्रकरण वर्षों तक कार्रवाई की प्रतिक्षा में पड़े रहते हैं अफसर सेवानिवृत्त हो जाते हैं़ लोकायुक्त संगठन द्वारा 11 अप्रैल 2012 की स्थिति में की गई अनुशंसा के बाद कार्रवाई न करने वाले विभागों में सबसे अव्वल राज्य का लोक निर्माण विभाग है,यहां संगठन की अनुशंसा के बाद 71 मामले अब तक कार्रवाई के लिए लंबित हैं़ लोक निर्माण विभाग में 17 मामले तो ऐसे हैं जिनमें दस साल से अनुशंसा के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई है़ इसी तरह जल संसाधन विभाग में 5, नगरीय प्रशासन विभाग में 5, आदिम जाति कल्याण विभाग में 2, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में 1 और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, कृषि विभाग एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग में 1-1 प्रकरण ऐसे हैं जहां दस साल के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है़
सर्वाधिक लंबित प्रकरणों में दूसरे नंबर पर जल संसाधन विभाग है, जहां पर 28 प्रकरण लंबित हैं़ इस तरह संगठन ने 16 विभागों को 170 प्रकरणों में कार्रवाई के लिए लिखा, मगर विभागों ने अब तक कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया़ लंबे समय से लंबित इन मामलों में कई अफसर तो सेवानिवृत्त भी हो गए हैं़
विभाग लंबित प्रकरण
लोक निर्माण 71
जल संसाधन 28
नगरीय निकाय 27
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी 14
पंचायत एवं ग्रामीण 10
आदिम जाति कल्याण 03
आवास एवं पर्यावरण 03
कृषि विभाग 02
वन विभाग 02
ऊर्जा 02
वाणिज्य एवं उद्योग 02
सामान्य प्रशासन 01
मत्स्य 01
जनशक्ति नियोजन 01
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण 01
नर्मदा घाटी विकास 01
कुल 170
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