गुरुवार, 24 मई 2012
फिर खफा किसान संघ
भारतीय किसान संघ एक बार फिर सरकार से खफा दिखाई दे रहा है़ संघ इस बार राजधानी में 21 मई को आयोजित धरने के लिए स्थान को लेकर नाराज है़संघ शासन द्वारा कानून का हवाला देने को दमनकारी कानून बता रहा है़ संघ का कहना है कि उसके धरने को लेकर शासन बाधा डालता है तो किसान सरकार के खिलाफ हो जाएंगे़
भारतीय किसान संघ की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष बदले जाने के बाद संघ के तेवर कम होते नजर नहीं आ रहे हैं़ संघ एक बार फिर सरकार के नाराज हो गया है़ संघ इस बार आक्रामक भूमिका में आ गया है़ विवाद की स्थिति तब बनी जब संघ ने प्रदेश अध्यक्ष पद से शिवकुमार शर्मा कक्काजी और उपाध्यक्ष पद से दर्शन सिंह चौधरी को हटाया़ इसके बाद प्रभारी अध्यक्ष के रुप में संघ ने सुरेश गुर्जर की नियुक्ति की़ इस वक्त सरकार ने जरुर राहत की सांस ली थी, मगर अपनी नियुक्ति के बाद ही गुर्जर बरेली कांड से जुड़े किसानों की रिहाई के लिए 21 मई से भोपाल में प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ने की घोषणा कर दी़ इस घोषणा के साथ ही संघ ने राजधानी के नीलम पार्क पर धरने की अनुमति मांगी़ इस अनुमति को लेकर भोपाल जिला प्रशासन ने संघ के पदाधिकारियों को साफ कह दिया कि धरना नीलम पार्क में नहीं,बल्कि जंबूरी मैदान पर करें़ जिला प्रशासन के इस जवाब के बाद किसान संघ सकते में आ गया़ संघ के पदाधिकारी जिला प्रशासन के इस जवाब के बाद भोपाल में एक बार फिर एकत्रित होने लगे हैं़ उनका कहना है कि वे धरना नीलम पार्क में ही देंगे़ संघ का कहना है कि जब किसान संघ ने 20 दिसंबर 2011 को राजधानी में चक्काजाम किया तब किसी नागरिक को कोई परेशानी नहीं हुई, कहीं उत्तेजना नहीं फैली, फिर सरकार इस बार धरने को लेकर क्यों चिंतित है़
किसान संघ के प्रभारी अध्यक्ष सुरेश गुर्जर का कहना है कि सरकार जो हमें कानून व्यवस्था का हवाला दे रही है वह हमारे लिए दमनकारी कानून बनता दिखाई दे रहा है़ हम जिला प्रशासन के रुख से खुश नहीं है़ हम जो स्थल मांग रहे हैं वह हमें मिलना चाहिए़ श्री गुर्जर ने कहा कि अंग्रेजों के बनाए कानून अब भी चल रहे हैं़ अंग्रेज तो स्वयं को असुरक्षित मानते थे इस कारण पुलिस को साथ रखते थे़ उन्होंने कहा कि अगर हमारे धरने पर पुलिस न हो तो उत्तेजना फैले ही नहीं़ हम तो शांतिप्रिय ढंग से अपनी बात कहते हैं़ सरकार से हमारी मंशा यही है कि सरकार हमें नीलम पार्क पर धरने की अनुमति दे़ श्री गुर्जर ने कहा कि अगर हम जंबूरी मैदान पर धरना देते हैं तो खुले आसमान में हमारे किसान कहां बैठेंगे़ उनके लिए छाया का क्या इंतजाम होगा़ वहां पर पानी भी नहीं मिलेगा़ सरकार चाहती है हम एक दिन धरना देकर चले जाएं़ ऐसा नहीं होगा़ हमारे किसान भाई जो जेल में बंद हैं उन्हें जब तक सरकार नहीं छोड़ेगी हम धरना पर बैठेंगे़
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