राज्य में दलित आईएएस अफसर रमेश थेटे के बाद अब दलित विधायक जुगल किशोर बागरी ने मोर्चा खोल दिया है़ बागरी के तेवरों को देख संगठन और सरकार की चिंता बढ़Þने लगी है़ क्षेत्र के प्रभारी मंत्री को लेकर बागरी का कहना है कि उनके इशारे पर अफसर बिना लिए-दिए कुछ काम ही नहीं करते हैं, ऐसे में हमें जनता के काम कराने में तकलीफ होती है़ अगर हम जनता का काम ही नहीं करा पाएं तो हमें आत्महत्या कर लेनी चाहिए़ बागरी ही नहीं इसी तरह की समस्या से भाजपा के एक और विधायक रमेश खटीक भी जूझ रहे हैं, उन्होंने तो अफसर के खिलाफ पुलिस में जान से मारने की शिकायत भी दर्ज करा दी है़
राज्य में दलित अफसर रमेश थेटे द्वारा दलित अफसर की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए आत्महत्या करने की चेतावनी देने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब भाजपा के ही विधायक एवं पूर्व मंत्री जुगलकिशोर बागरी ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है़ सतना जिले के अजा के लिए आरक्षित विधानसभा सीट रैंगाव से विधायक श्री बागरी ने अफसरों के साथ-साथ क्षेत्र के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ला की कार्यशैली पर भी प्रश्न उठाए हैं़ उनका कहना है कि अफसर क्षेत्र की जनता के काम ही नहीं करते हैं, अफसरों के पास क्षेत्र के लोग जब काम के लिए जाते हैं तो उनके काम ही नहीं होते हैं़ उन्होंने कहा कि यह किसी एक विभाग का मामला नहीं बल्कि सभी विभागों के अफसर ठीक इसी तरह काम कर रहे हैं़ उन्होंने कहा कि अगर अफसरों के इस रवैए को सरकार नहीं रोक पाती है, तो हमारे जैसे जनप्रतिनिधियों का होने से क्या फायदा़
बागरी ही नहीं इसी तरह की परेशानियों से शिवपुरी जिले की करैरा विधानसभा सीट जो की अजा के लिए आरक्षित है, के विधायक रमेश खटीक भी जूझ रहे हैं़ श्री खटीक को बीते सप्ताह ही एक अफसर ने जान से मारने की धमकी दे डाली थी़ खटीक ने तो मत्स्य विभाग के अफसर एमक़े़दुबे के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज करा दी है़ खटीक और दुबे के बीच भी विवाद सिर्फ जनता की शिकायतों को लेकर ही उठा है़ खटीक को उनके विधानसभा क्षेत्रों के लोगों ने शिकायती पत्र दिए थे, जिसमें उक्त अधिकारी द्वारा उन्हें परेशान किए जाने की शिकायतें की गई थी़ इन सभी शिकायतों को खटीक ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को दे दी थी़ इसके बाद कलेक्टर जॉन किंग्सली ने इस मामले की जांच कराने के आदेश दिए थे़ इस आदेश के बाद मत्स्य विभाग के अधिकारी दुबे ने विधायक खटीक को भला-बुरा करते हुए जान से मारने तक की धमकी दे डाली थी़
रैगांव विधायक जुगल किशोर बागरी का कहना है कि जिस जनता के पास हम चुनाव के वक्त हाथ जोड़कर वोट मांगने जाते हैं, अगर उसी के काम नहीं करा पाए तो हमें जनप्रतिनिधि होना ही नहीं चाहिए़ हमारी बात को ही अधिकारी नहीं सुने, गंभीरता से नहीं ले, हमारे कहने के बाद भी वह जनता से काम के लिए पैसे मांगे तो हमें आत्महत्या कर लेनी चाहिए़ मैंने अब तय कर लिया है कि मैं अगला चुनाव नहीं लड़ूंगा़ भाजपा में ही रहूंगा, मगर सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखूंगा़
करेरा के विधायक रमेश चंद्र खटीक का कहना है कि अफसरों के खिलाफ जब भी हम कोई शिकायत करते हैं तो वे जनप्रतिनिधियों को दबाने के लिए यूनियन बनाकर लामबंद हो जाते हैं और सरकार पर दबाव बनाते हैं़ मैं इस मामले को लेकर फिर से मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से मिलूंगा और उन्हें अवगत कराऊंगा कि हम क्या करें, जिससे जनता के काम ये अफसर कर सकें़
गुरुवार, 29 सितंबर 2011
पदाधिकारियों में उलझे दल
राज्य में तीन दलों ने अपने अध्यक्ष तो बदल दिए, मगर अध्यक्षों को अपनी टीम की घोषणा करने में मश्क्कत करनी पढ़ रही है. कांग्रेस के अलावा बहुजन समाज पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने भी अपने अध्यक्ष बदल दिए, परंतु ये अध्यक्ष अपनी टीम को लेकर राष्ट्रीय नेताओं की अनुमति न मिलने से उलझे हुए हैं. बसपा और गोंगपा के नवनियुक्त अध्यक्षों को तो राष्ट्रीय अध्यक्षों द्वारा साफ संकेत दे दिए हैं कि वे पहले प्रदेश के दौरें करें, उसके बाद कार्यकारिणी पर विचार करें.
प्रदेश के तीन दलों कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अपने-अपने प्रदेश अध्यक्ष बदल दिए हैं, मगर तीनों ही दलों के प्रदेश अध्यक्षों के सामने अपनी टीम बनाने के लिए पदाधिकारियों का चयन करना मुश्किल सा हो गया है. प्रदेश कांगे्रस के अध्यक्ष बनने के बाद कांतिलाल भूरिया लंबे समय से कार्यकारिणी के लिए जद्दोजहद करना पड़ रही है, मगर वे कार्यकारिणी तय नहीं कर पाए हैं. भूरिया एक बार फिर कार्यकारिणी के लिए सक्रिय हुए हैं, वे अपनी टीम की सूची बनाकर दिल्ली पहुंचे हैं, मगर इस बार भी उन्हें निराशा ही हाथ लग सकती है. पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से वे दिल्ली में मुलाकात कर इस बारे में चर्चा करने का प्रयास तो करेंगे, राष्ट्रीय मुद्दों के कारण इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि यह मामला इस बार फिर टल सकता है. वैसे भूरिया के सामने कार्यकारिणी के अलावा अब घोषित किए गए जिलाध्यक्षों को लेकर भी असंतोष के स्वर मुखरित होने लगे हैं. करीब आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में घोषित किए जिला अध्यक्षों को लेकर असंतोष सामने आ रहा है. कई नेताओं ने तो भूरिया से मुलाकात कर इस बात पर आपत्ति भी जताई है.
कांगे्रस के अलावा बहुजन समाज पार्टी ने भी प्रदेश अध्यक्ष पद पर युवा नेता आई.एस.मौर्य की नियुक्ति कर संगठन में बदलाव के संकेत दिए हैं, मगर मौर्य भी अपनी टीम की घोषणा नहीं कर पाए हैं. उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ संकेत दिए हैं कि वे पहले प्रदेशव्यापी दौरा कर कर्मठ और पार्टी के सक्रिय नेताओं का चयन करें उसके बाद इस मुद्दे पर विचार करें. ठीक इसी तरह की कुछ परिस्थिति गोडवाना गणतंत्र पार्टी के नवनियुक्त अध्यक्ष कमल मरावी के साथ है. उन्हें भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम ने प्रदेश के दौरे करने के बाद ही नयी टीम गठन की बात कही है. एक ओर जहां कांग्रेस के अध्यक्ष श्री भूरिया को पदाधिकारी चयन को लेकर जद्दोजहद करनी पड़ रही है, वहीं बसपा और गोंगपा के नवनियुक्त अध्यक्षों के सामने राष्ट्रीय अध्यक्षों ने जो लक्ष्य निर्धारित किया है उसने उनकी परेशानी भी बढ़ाई है. इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए दोनों ही अध्यक्ष इन दिनों प्रदेश स्तरीय दौरों के लिए सक्रिय नजर आ रहे हैं. बसपा के अध्यक्ष श्री मौर्य ने ग्वालियर-चंबल अंचल का दौरा कर अब बुंदेलखंड, विंध्य और महाकौशल अंचल का दौरा शुरु कर दिया है़ इसके बाद वे मालवा अंचल की ओर रुख करेंगे़ वहीं गोंगपा के अध्यक्ष श्री मरावी 29 सितम्बर को प्रदेश के नेताओं की बैठक जबलपुर में ले रहे हैं़
प्रदेश के तीन दलों कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अपने-अपने प्रदेश अध्यक्ष बदल दिए हैं, मगर तीनों ही दलों के प्रदेश अध्यक्षों के सामने अपनी टीम बनाने के लिए पदाधिकारियों का चयन करना मुश्किल सा हो गया है. प्रदेश कांगे्रस के अध्यक्ष बनने के बाद कांतिलाल भूरिया लंबे समय से कार्यकारिणी के लिए जद्दोजहद करना पड़ रही है, मगर वे कार्यकारिणी तय नहीं कर पाए हैं. भूरिया एक बार फिर कार्यकारिणी के लिए सक्रिय हुए हैं, वे अपनी टीम की सूची बनाकर दिल्ली पहुंचे हैं, मगर इस बार भी उन्हें निराशा ही हाथ लग सकती है. पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से वे दिल्ली में मुलाकात कर इस बारे में चर्चा करने का प्रयास तो करेंगे, राष्ट्रीय मुद्दों के कारण इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि यह मामला इस बार फिर टल सकता है. वैसे भूरिया के सामने कार्यकारिणी के अलावा अब घोषित किए गए जिलाध्यक्षों को लेकर भी असंतोष के स्वर मुखरित होने लगे हैं. करीब आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में घोषित किए जिला अध्यक्षों को लेकर असंतोष सामने आ रहा है. कई नेताओं ने तो भूरिया से मुलाकात कर इस बात पर आपत्ति भी जताई है.
कांगे्रस के अलावा बहुजन समाज पार्टी ने भी प्रदेश अध्यक्ष पद पर युवा नेता आई.एस.मौर्य की नियुक्ति कर संगठन में बदलाव के संकेत दिए हैं, मगर मौर्य भी अपनी टीम की घोषणा नहीं कर पाए हैं. उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ संकेत दिए हैं कि वे पहले प्रदेशव्यापी दौरा कर कर्मठ और पार्टी के सक्रिय नेताओं का चयन करें उसके बाद इस मुद्दे पर विचार करें. ठीक इसी तरह की कुछ परिस्थिति गोडवाना गणतंत्र पार्टी के नवनियुक्त अध्यक्ष कमल मरावी के साथ है. उन्हें भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम ने प्रदेश के दौरे करने के बाद ही नयी टीम गठन की बात कही है. एक ओर जहां कांग्रेस के अध्यक्ष श्री भूरिया को पदाधिकारी चयन को लेकर जद्दोजहद करनी पड़ रही है, वहीं बसपा और गोंगपा के नवनियुक्त अध्यक्षों के सामने राष्ट्रीय अध्यक्षों ने जो लक्ष्य निर्धारित किया है उसने उनकी परेशानी भी बढ़ाई है. इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए दोनों ही अध्यक्ष इन दिनों प्रदेश स्तरीय दौरों के लिए सक्रिय नजर आ रहे हैं. बसपा के अध्यक्ष श्री मौर्य ने ग्वालियर-चंबल अंचल का दौरा कर अब बुंदेलखंड, विंध्य और महाकौशल अंचल का दौरा शुरु कर दिया है़ इसके बाद वे मालवा अंचल की ओर रुख करेंगे़ वहीं गोंगपा के अध्यक्ष श्री मरावी 29 सितम्बर को प्रदेश के नेताओं की बैठक जबलपुर में ले रहे हैं़
बुधवार, 21 सितंबर 2011
महिला शख्सियत पर अफसर मौन
राज्य सरकार ने प्रदेश में हर साल ‘बेटी दिवस’ मनाने का निर्णय तो कर लिया, मगर यह कब और किस महिला शख्सियत के जन्मदिन पर मनाएं, इसे लेकर उलझन भी खड़ी कर ली है़ इस उलझन में सरकार के अफसर और संगठन के बीच तालमेल नहीं बन पा रहा है़
राज्य सरकार ने बेटी बचाओ अभियान के तहत प्रतिवर्ष ‘बेटी दिवस’ मनाने का निर्णय भी लिया है़ यह निर्णय बीते दिनों राज्य मंत्रिमंंडल की बैठक में लिया गया़ इस निर्णय के तहत सरकार ने बेटी दिवस मनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है़ विभाग को यह कहा गया है कि प्रतिवर्ष एक नियत तिथि को ‘बेटी दिवस’ के रुप में आयोजित करना है, जो कि किसी प्रसिद्ध महिला शख्सियत का जन्मदिन हो सकता है़ इस निर्देश के बाद अब महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी इस उलझन में फंस गए हैं कि वह कौन सी महिला शख्सियत हो जिसके जन्मदिन पर ‘बेटी दिवस’ मनाया जाए़ अफसरों के सामने बड़ी मुसीबत यह है कि वे अगर किसी ऐसी महिला का नाम तय कर दें जो कांग्रेस से जुड़ी रही हो, तो भाजपा संगठन इस पर आपत्ति जताएगा़ अफसरों ने इस मुद्दे पर महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री रंजना बघेल पर निर्णय छोड़ दिया है़ मंत्री ने भी इस मामले में संगठन के सामने जब यह तारीख तय करने की बात कही तो संगठन भी फिलहाल इस विषय पर चुप्पी साध गया है़ संगठन इस मामले में भाजपा से जुड़ी किसी नेत्री के जन्मदिन के अवसर पर राज्य में ‘बेटी दिवस’ मनाने की तारीख तय करना चाहता है, मगर संगठन के सामने भी फिलहाल ऐसा कोई नाम सर्वसम्मति से नहीं आ रहा है़ इस सब मामले को लेकर अफसर इस बात को लेकर चिंतित इसलिए भी हैं, क्योंकि पूर्व में लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं का लाभ लेने वालों को भाजपा संगठन पार्टी का सदस्य बनाने के लिए अफसरों पर दबाव बना चुका है़ यह मुद्दा तब गर्माया भी था, हालांकि बाद में मामला शांत भी हो गया था, मगर अब अफसर इस मुद्दे पर अपनी ओर से कोई तारीख बताने से बच रहे हैं़ अफसरों ने इस मामले में निर्णय के लिए फिलहाल विभाग की मंत्री को ही यह कह दिया है कि वे कोई नाम विचार कर लें, इसके बाद ही यह दिवस कब मनाया जाए इसकी तारीख तय कर दी जाएगी़
राज्य सरकार ने बेटी बचाओ अभियान के तहत प्रतिवर्ष ‘बेटी दिवस’ मनाने का निर्णय भी लिया है़ यह निर्णय बीते दिनों राज्य मंत्रिमंंडल की बैठक में लिया गया़ इस निर्णय के तहत सरकार ने बेटी दिवस मनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है़ विभाग को यह कहा गया है कि प्रतिवर्ष एक नियत तिथि को ‘बेटी दिवस’ के रुप में आयोजित करना है, जो कि किसी प्रसिद्ध महिला शख्सियत का जन्मदिन हो सकता है़ इस निर्देश के बाद अब महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी इस उलझन में फंस गए हैं कि वह कौन सी महिला शख्सियत हो जिसके जन्मदिन पर ‘बेटी दिवस’ मनाया जाए़ अफसरों के सामने बड़ी मुसीबत यह है कि वे अगर किसी ऐसी महिला का नाम तय कर दें जो कांग्रेस से जुड़ी रही हो, तो भाजपा संगठन इस पर आपत्ति जताएगा़ अफसरों ने इस मुद्दे पर महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री रंजना बघेल पर निर्णय छोड़ दिया है़ मंत्री ने भी इस मामले में संगठन के सामने जब यह तारीख तय करने की बात कही तो संगठन भी फिलहाल इस विषय पर चुप्पी साध गया है़ संगठन इस मामले में भाजपा से जुड़ी किसी नेत्री के जन्मदिन के अवसर पर राज्य में ‘बेटी दिवस’ मनाने की तारीख तय करना चाहता है, मगर संगठन के सामने भी फिलहाल ऐसा कोई नाम सर्वसम्मति से नहीं आ रहा है़ इस सब मामले को लेकर अफसर इस बात को लेकर चिंतित इसलिए भी हैं, क्योंकि पूर्व में लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं का लाभ लेने वालों को भाजपा संगठन पार्टी का सदस्य बनाने के लिए अफसरों पर दबाव बना चुका है़ यह मुद्दा तब गर्माया भी था, हालांकि बाद में मामला शांत भी हो गया था, मगर अब अफसर इस मुद्दे पर अपनी ओर से कोई तारीख बताने से बच रहे हैं़ अफसरों ने इस मामले में निर्णय के लिए फिलहाल विभाग की मंत्री को ही यह कह दिया है कि वे कोई नाम विचार कर लें, इसके बाद ही यह दिवस कब मनाया जाए इसकी तारीख तय कर दी जाएगी़
‘अनुशंसा’ पर कार्रवाई नहीं
लोकायुक्त जांच में दोषी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ लोकायुक्त द्वारा दोषियों पर कार्यवाही करने की अनुशंसा करने के बाद भी वर्षों बीत जाते हैं, मगर सरकार उन पर कार्यवाही नहीं कर पाती है़ राज्य के सोलह विभागों द्वारा 170 मामले ऐसे हैं जिनमें लोकायुक्त द्वारा अनुशंसा करने के बाद भी वर्षों बीत गए, मगर आज तक कार्रवाई नहीं हुई़ इनमें 8 विभागों के 33 मामले तो ऐसे हैं जिनमें दस वर्ष से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन विभाग द्वारा अधिकारियों पर कार्यवाही नहीं की गई है़
राज्य लोकायुक्त द्वारा विभिन्न मामलों में शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के लोकायुक्त जांच में दोषी पाए जाने पर सरकार को उनके खिलाफ कार्यवाही की अनुशंसा तो की जाती है, मगर कार्यवाही इन अधिकारियों पर नहंी हो पाती है़ लोकायुक्त जांच के बाद राज्य में करीब 170 ऐसे मामले हैं जिनमें लोकायुक्त ने अधिकारियों और कर्मचारियों को शिकायतों के आधार पर की गई जांच में सही पाया और सरकार को इन पर कार्रवाई करने को कहा, मगर वर्षो बीत जाने के बाद भी विभागों द्वारा ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई़ 170 अनुशंसाओं में से 33 अनुशंसाएं तो ऐसी है, जिन पर लोकायुक्त ने दस साल से अधिक समय पहले कार्यवाही की अनुशंसा की थी, मगर इन अनुशंसाओं पर विभाग ध्यान हीं नहीं दे रहे हैं़
राज्य के सोलह विभाग ऐसे हैं जिनमें ये मामले आज भी लंबित पड़े हैं़ पांच से दस वर्ष के बीच की समयावधि वाले मामलों की संख्या 59 है, जबकि 3 से पांच वर्ष की अवधि वाले मामलों की संख्या 38 और एक वर्ष से अधिक एवं तीन वर्ष से कम समयावधि वाले लंबित मामलों की संख्या 27 है, जिन पर लोकायुक्त कार्यवाही करने की मोहर लगा चुका है, मगर विभाग इन मामलों को लेकर गंभीर नहीं हैं़
विभाग लंबित मामले
लोक निर्माण विभाग 71
जल संसाधन विभाग 28
नगरीय निकाय 27
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी 14
पंचायत एवं ग्रामीण विभाग 10
आदिम जाति कल्याण 03
आवास एवं पर्यावरण 03
वाणिज्य एवं उद्योग 02
नर्मदा घाटी विकास 02
कृषि विभाग 02
वन विभाग 02
ऊर्जा विभाग 02
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण 01
सामान्य प्रशासन 01
मत्स्य विभाग 01
जनशक्ति नियोजन 01
राज्य लोकायुक्त द्वारा विभिन्न मामलों में शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के लोकायुक्त जांच में दोषी पाए जाने पर सरकार को उनके खिलाफ कार्यवाही की अनुशंसा तो की जाती है, मगर कार्यवाही इन अधिकारियों पर नहंी हो पाती है़ लोकायुक्त जांच के बाद राज्य में करीब 170 ऐसे मामले हैं जिनमें लोकायुक्त ने अधिकारियों और कर्मचारियों को शिकायतों के आधार पर की गई जांच में सही पाया और सरकार को इन पर कार्रवाई करने को कहा, मगर वर्षो बीत जाने के बाद भी विभागों द्वारा ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई़ 170 अनुशंसाओं में से 33 अनुशंसाएं तो ऐसी है, जिन पर लोकायुक्त ने दस साल से अधिक समय पहले कार्यवाही की अनुशंसा की थी, मगर इन अनुशंसाओं पर विभाग ध्यान हीं नहीं दे रहे हैं़
राज्य के सोलह विभाग ऐसे हैं जिनमें ये मामले आज भी लंबित पड़े हैं़ पांच से दस वर्ष के बीच की समयावधि वाले मामलों की संख्या 59 है, जबकि 3 से पांच वर्ष की अवधि वाले मामलों की संख्या 38 और एक वर्ष से अधिक एवं तीन वर्ष से कम समयावधि वाले लंबित मामलों की संख्या 27 है, जिन पर लोकायुक्त कार्यवाही करने की मोहर लगा चुका है, मगर विभाग इन मामलों को लेकर गंभीर नहीं हैं़
विभाग लंबित मामले
लोक निर्माण विभाग 71
जल संसाधन विभाग 28
नगरीय निकाय 27
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी 14
पंचायत एवं ग्रामीण विभाग 10
आदिम जाति कल्याण 03
आवास एवं पर्यावरण 03
वाणिज्य एवं उद्योग 02
नर्मदा घाटी विकास 02
कृषि विभाग 02
वन विभाग 02
ऊर्जा विभाग 02
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण 01
सामान्य प्रशासन 01
मत्स्य विभाग 01
जनशक्ति नियोजन 01
पद छोड़ने को मजबूर महिला सरपंच
सिवनी जिले की खुर्सीपार ग्राम पंचायत की निर्विरोध निर्वाचित हुई आदिवासी महिला सरपंच इन दिनों पंचायत सचिव की कार्यशैली से परेशान है़ सरपंच ने अब सचिव न हटाने पर पद छोड़ने की चेतावनी दी है़ महिला सरपंच की इस पीड़ा को देख गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को भी इसकी शिकायत कर कार्यवाही की मांग की है़
राज्य के सिवनी जिले की लखनादौन जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत खुर्सीपार की आदिवासी महिला बिन्दो बाई दो वर्ष पूर्व निर्विरोध सरपंच निर्वाचित हुई थी़ उनके सरपंच बनने के बाद से वे पंचायत सचिव राकेश तिवारी की कार्यशैली से लगातार परेशान हैं़ महिला सरपंच का आरोप है कि सचिव पंचायत भवन में पंचायत का कार्य न करके अपने घर पर कार्य करते हैं और उन्हें केवल अंगूठा लगाने को कहते हैं़ किस कागज पर, किस काम के लिए सचिव ने अंगूठा लगवाया इसकी जानकारी भी वे उन्हें नहीं देते हैं़ महिला सरपंच द्वारा सचिव की इस कार्यशैली की शिकायत लखनादौन की विधायक शशि ठाकुर से मौखिक तौर पर पूर्व में की जा चुकी है, मगर उनके द्वारा इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया़ इसके अलावा उन्होंने इसकी शिकायत जनपद पंचायत सीईओ, कलेक्टर और मुख्यमंत्री को भी की है़ इसके बाद सचिव पर कार्यवाही न होने पर अब उन्होंने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की सिवनी जिला इकाई के जिला अध्यक्ष हरिश्चंद्र उइके से की है़ इस पर गोंगपा ने पंचायत सचिव की शिकायत कलेक्टर सिवनी के माध्यम से 15 सितम्बर को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से की है़ गोंगपा ने मांग की है कि आदिवासी महिला सरपंच जो की निर्विरोध निर्वाचित हुई उन्हें सचिव द्वारा परेशान किया जा रहा है, इस मामले को गंभीरता से लें और उसे वहां से हटा दें़
खुर्सीपार की महिला सरपंच बिन्दो बाई ने बताया कि सचिव उन्हें घर पर बुलवाकर कागजों पर केवल अंगूठा लगवाते हैं, इसके अलावा कोई जानकारी नहीं देते हैं़ सरपंच की वे पूर्व में शिकायत भी कर चुकी हैं, मगर शासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है़ सरपंच को स्थानीय राजनेताओं का समर्थन है जिस कारण वे मुझे परेशान करते हैं़ बिन्दो बाई का कहना है कि अगर अब भी उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया तो वे पद से इस्तीफा दे देंगी़ इस्तीफा देने के पीछे उनका कहना है कि अगर सचिव द्वारा कुछ गलत काम किया गया होगा तो उसका खामियाजा उन्हें उठाना पड़ेगा़ वे अनपढ़Þ हैं इस वजह से सचिव उन्हें परेशान करता रहा है़ उन्होंने कहा कि सचिव को अगर दूसरी पंचायत में पदस्थ कर दिया जाए तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी़ उन्होंने आरोप लगाया कि सचिव द्वारा पंचों के बीच फूट डालकर अपने हिसाब से काम किया जाता है, वे क्या काम कर रहे हैं इसकी जानकारी भी किसी को नहीं दी जाती है़
लखनादौन की भाजपा विधायक शशि ठाकुर का इस मामले में कहना है कि सरपंच ने तो उनसे मुलाकात नहीं की, मगर उनके पति जयकुमार जरुर उनके पास सचिव की समस्या को लेकर आए थे़ उन्होंने जो भी शिकायतें की उसे सुनने के बाद मैंने उनसे समन्वय बैठाकर काम करने की बात कही थी़ उन्होंने मुझे लिखित में कोई भी शिकायत नहीं की है़ शशि ठाकुर का कहना है कि वैसे तो सरपंच और सचिव के बीच हर पंचायत में कुछ न कुछ शिकायतें होती हैं, मैंने उन्हें आश्वस्त किया है कि मैंने दोनों पक्षों को देखकर ही कुछ कह सकती हूं़ मैं इस मामले में सचिव का पक्ष भी जानूंगी उसके बाद ही इस विषय पर कुछ कहूंगी़
राज्य के सिवनी जिले की लखनादौन जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत खुर्सीपार की आदिवासी महिला बिन्दो बाई दो वर्ष पूर्व निर्विरोध सरपंच निर्वाचित हुई थी़ उनके सरपंच बनने के बाद से वे पंचायत सचिव राकेश तिवारी की कार्यशैली से लगातार परेशान हैं़ महिला सरपंच का आरोप है कि सचिव पंचायत भवन में पंचायत का कार्य न करके अपने घर पर कार्य करते हैं और उन्हें केवल अंगूठा लगाने को कहते हैं़ किस कागज पर, किस काम के लिए सचिव ने अंगूठा लगवाया इसकी जानकारी भी वे उन्हें नहीं देते हैं़ महिला सरपंच द्वारा सचिव की इस कार्यशैली की शिकायत लखनादौन की विधायक शशि ठाकुर से मौखिक तौर पर पूर्व में की जा चुकी है, मगर उनके द्वारा इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया़ इसके अलावा उन्होंने इसकी शिकायत जनपद पंचायत सीईओ, कलेक्टर और मुख्यमंत्री को भी की है़ इसके बाद सचिव पर कार्यवाही न होने पर अब उन्होंने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की सिवनी जिला इकाई के जिला अध्यक्ष हरिश्चंद्र उइके से की है़ इस पर गोंगपा ने पंचायत सचिव की शिकायत कलेक्टर सिवनी के माध्यम से 15 सितम्बर को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से की है़ गोंगपा ने मांग की है कि आदिवासी महिला सरपंच जो की निर्विरोध निर्वाचित हुई उन्हें सचिव द्वारा परेशान किया जा रहा है, इस मामले को गंभीरता से लें और उसे वहां से हटा दें़
खुर्सीपार की महिला सरपंच बिन्दो बाई ने बताया कि सचिव उन्हें घर पर बुलवाकर कागजों पर केवल अंगूठा लगवाते हैं, इसके अलावा कोई जानकारी नहीं देते हैं़ सरपंच की वे पूर्व में शिकायत भी कर चुकी हैं, मगर शासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है़ सरपंच को स्थानीय राजनेताओं का समर्थन है जिस कारण वे मुझे परेशान करते हैं़ बिन्दो बाई का कहना है कि अगर अब भी उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया तो वे पद से इस्तीफा दे देंगी़ इस्तीफा देने के पीछे उनका कहना है कि अगर सचिव द्वारा कुछ गलत काम किया गया होगा तो उसका खामियाजा उन्हें उठाना पड़ेगा़ वे अनपढ़Þ हैं इस वजह से सचिव उन्हें परेशान करता रहा है़ उन्होंने कहा कि सचिव को अगर दूसरी पंचायत में पदस्थ कर दिया जाए तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी़ उन्होंने आरोप लगाया कि सचिव द्वारा पंचों के बीच फूट डालकर अपने हिसाब से काम किया जाता है, वे क्या काम कर रहे हैं इसकी जानकारी भी किसी को नहीं दी जाती है़
लखनादौन की भाजपा विधायक शशि ठाकुर का इस मामले में कहना है कि सरपंच ने तो उनसे मुलाकात नहीं की, मगर उनके पति जयकुमार जरुर उनके पास सचिव की समस्या को लेकर आए थे़ उन्होंने जो भी शिकायतें की उसे सुनने के बाद मैंने उनसे समन्वय बैठाकर काम करने की बात कही थी़ उन्होंने मुझे लिखित में कोई भी शिकायत नहीं की है़ शशि ठाकुर का कहना है कि वैसे तो सरपंच और सचिव के बीच हर पंचायत में कुछ न कुछ शिकायतें होती हैं, मैंने उन्हें आश्वस्त किया है कि मैंने दोनों पक्षों को देखकर ही कुछ कह सकती हूं़ मैं इस मामले में सचिव का पक्ष भी जानूंगी उसके बाद ही इस विषय पर कुछ कहूंगी़
शुक्रवार, 16 सितंबर 2011
‘आदर्शों’ का संदेश याद दिलाएगी गोंगपा
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही के नेताओं को सबक सिखाने के लिए अब उनके आदर्शों के दिए संदेश को याद दिलाने की पहल शुरु की है़ इस पहल के तहत गोंगपा की सिवनी जिला इकाई पं़दीनदयाल उपाध्याय और महात्मा गांधी की जयंती पर रक्तदान शिविर आयोजित कर रक्तदान करेगी़
आदिवासियों का हितैषी होने का दावा कर रही प्रदेश के भाजपा और कांग्रेस दोनों को सबक सीखाने के लिए आदिवासियों का नेतृत्व करने वाली गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अब दोनों दलों के नेताओं को सबक सिखाने का मन बनाया है़ इसके तहत गोंगपा की सिवनी जिला इकाई तीन रक्तदान शिविर का आयोजन करने जा रही है़ ये शिविर सिवनी में ही 18 सितम्बर को अमर शहीद राजा शंकरशाह, रघुनाथशाह के बलिदान दिवस पर, 25 सितम्बर को पं़ दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर और 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर लगाए जाएंगे़ इन शिविरों में गोंगपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी आदिवासियों के साथ रक्तदान करेंगे़ रक्तदान शिविर का उद्देश्य सिर्फ इतना है कि भाजपा पं़दीनदयाल उपाध्याय को आदर्श मानती है, जबकि कांग्रेस महात्मा गांधी को़ दोनों ही नेताओं का ध्येय यह था कि अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचना और उसकी पीड़ा में शामिल होकर उसे मदद करना़
गोंगपा की सिवनी जिला इकाई के प्रवक्त विवेक डेहरिया ने बताया कि पार्टी द्वारा ये शिविर इसलिए आयोजित किए जा रहे हैं ताकि हम भाजपा और कांग्रेस दोनों ही कि नेताओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अपने आदर्शाें के संदेश को भूल गए हैं़ पं़दीनदयाल उपाध्याय और महात्मा गांधी के बताए मार्ग पर ये दोनों दलों के नेता न चलकर केवल छल की राजनीति कर रहे हैं़ श्री डेहरिया का कहना है कि दोनों ही दलों के नेता आदिवासियों को फिर भ्रमित कर उन्हें आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं, इसलिए हम उन्हें यह याद दिलाना चाहते हैं कि वे आदिवासियों के लिए अगर कार्य करते हैं या चिंता करते हैं तो उन्हें पूरी मदद करें़ उन्हें अपमानित नहंी करें़
उन्होंने बताया कि आदिवासी मतदाता को रिछाने के लिए इन दिनों भाजपा और कांग्रेस दोनों ही आदिवासी इलाकों में सक्रिय हैं, मगर दोनों ही दलों द्वारा आदिवासी समाज की उपेक्षा की गई है़ इसलिए गोंगपा ने रक्तदान शिविर बलिदान दिवस और महापुरुषों की जयंती पर आयोजित करने का फैसला लिया है़
आदिवासियों का हितैषी होने का दावा कर रही प्रदेश के भाजपा और कांग्रेस दोनों को सबक सीखाने के लिए आदिवासियों का नेतृत्व करने वाली गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अब दोनों दलों के नेताओं को सबक सिखाने का मन बनाया है़ इसके तहत गोंगपा की सिवनी जिला इकाई तीन रक्तदान शिविर का आयोजन करने जा रही है़ ये शिविर सिवनी में ही 18 सितम्बर को अमर शहीद राजा शंकरशाह, रघुनाथशाह के बलिदान दिवस पर, 25 सितम्बर को पं़ दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर और 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर लगाए जाएंगे़ इन शिविरों में गोंगपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी आदिवासियों के साथ रक्तदान करेंगे़ रक्तदान शिविर का उद्देश्य सिर्फ इतना है कि भाजपा पं़दीनदयाल उपाध्याय को आदर्श मानती है, जबकि कांग्रेस महात्मा गांधी को़ दोनों ही नेताओं का ध्येय यह था कि अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचना और उसकी पीड़ा में शामिल होकर उसे मदद करना़
गोंगपा की सिवनी जिला इकाई के प्रवक्त विवेक डेहरिया ने बताया कि पार्टी द्वारा ये शिविर इसलिए आयोजित किए जा रहे हैं ताकि हम भाजपा और कांग्रेस दोनों ही कि नेताओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अपने आदर्शाें के संदेश को भूल गए हैं़ पं़दीनदयाल उपाध्याय और महात्मा गांधी के बताए मार्ग पर ये दोनों दलों के नेता न चलकर केवल छल की राजनीति कर रहे हैं़ श्री डेहरिया का कहना है कि दोनों ही दलों के नेता आदिवासियों को फिर भ्रमित कर उन्हें आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं, इसलिए हम उन्हें यह याद दिलाना चाहते हैं कि वे आदिवासियों के लिए अगर कार्य करते हैं या चिंता करते हैं तो उन्हें पूरी मदद करें़ उन्हें अपमानित नहंी करें़
उन्होंने बताया कि आदिवासी मतदाता को रिछाने के लिए इन दिनों भाजपा और कांग्रेस दोनों ही आदिवासी इलाकों में सक्रिय हैं, मगर दोनों ही दलों द्वारा आदिवासी समाज की उपेक्षा की गई है़ इसलिए गोंगपा ने रक्तदान शिविर बलिदान दिवस और महापुरुषों की जयंती पर आयोजित करने का फैसला लिया है़
बसपा को भाए आदिवासी
बहुजन समाज पार्टी की मध्यप्रदेश इकाई की नजरें अब आदिवासियों पर टिक गई हैं़ इन्हें रिझाने के लिए बसपा शहीद शंकर शाह, रघुनाथ शाह की जयंती पर सम्मेलन का आयोजन करने जा रही है़ इसके सहारे बसपा आदिवासियों के बीच पैठ जमाने का काम कर रही है़ बसपा की यह सक्रियता भाजपा, कांग्रेस और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के लिए चिंता बढ़Þा सकती है़
बहुजन समाज पार्टी की मध्यप्रदेश इकाई को भी अब आदिवासी भाने लगे हैं़ प्रदेश इकाई ने आदिवासियों के बीच अपनी पैठ जमाने के लिए 18 सितम्बर को शहीद शंकरशाह, रघुनाथ शाह की जयंती पर एक सम्मेलन का आयोजन कर डाला है़ वैसे तो यह सम्मेलन गुना में होना है, जो कि आदिवासी बहुल इलाका नहीं है, मगर इस सम्मेलन में उसका प्रयास बड़ी संख्या में आदिवासियों को शामिल करने का है़ बसपा के इस सम्मेलन में सांसद और मध्यप्रदेश के प्रभारी राजाराम, धर्मप्रकाश भारतीय के अलावा प्रदेश के नवनियुक्त अध्यक्ष आई़एस़मौर्य के अलावा ग्वालियर-चंबल के सभी चारों बसपा विधायक उपस्थित रहेंगे़ सम्मेलन को सफल बनाने के लिए बसपा के कार्यकर्ता और पदाधिकारी जुट गए हैं़ बसपा ने गुना के अलावा राज्य के आदिवासी बहुल जिलों में भी पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे वहां पर शंकरशाह, रघुनाथ शाह की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित करें़ वैसे पार्टी ने ऐसे निर्देश राज्य के सभी जिलों में दिए हैं, मगर आदिवासी बहुल जिलों के लिए पार्टी के विशेष निर्देश हैं़ गुना में शंकरशाह, रघुनाथशाह की जयंती पर सम्मेलन आयोजित कर बसपा ने साफ संकेत दिया है कि वह आदिवासियों को पार्टी की ओर लाना चाहती है़ बसपा द्वारा वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में वैसे सर्वसमाज का नारा दिया गया था, लेकिन आदिवासी बहुल इलाकों में उसकी रुचि विशेष रुप से दिखाई नहीं थी, मगर इस पर पार्टी ने चुनाव के दो वर्ष पूर्व ही अपनी तय रणनीति के तहत यह कदम उठाया है़
सामान्य सीटों पर है कब्जा
राज्य विधानसभा में बसपा के सात विधायक बीते चुनाव में विजय होकर पहुंचे थे़ ये सातों विधायक अजजा वर्ग की आरक्षित सीटों के बजाय समान्य वर्ग की सीटों पर विजय हुए थे़ इस विजय को देखते हुए बसपा ने अब सामान्य वर्ग के अलावा आदिवासी वर्ग की आरक्षित सीटों पर ध्यान बढ़Þाया है़ बसपा गुना में 18 सितम्बर को आयोजित सम्मेलन में आदिवासी वर्ग के मतदाता को रिझाने की रणनीति तय करेगी, इसके बाद वह पार्टी से आदिवासी वर्ग के नेताओं को जोड़ने का काम भी करेगी़
बहुजन समाज पार्टी की मध्यप्रदेश इकाई को भी अब आदिवासी भाने लगे हैं़ प्रदेश इकाई ने आदिवासियों के बीच अपनी पैठ जमाने के लिए 18 सितम्बर को शहीद शंकरशाह, रघुनाथ शाह की जयंती पर एक सम्मेलन का आयोजन कर डाला है़ वैसे तो यह सम्मेलन गुना में होना है, जो कि आदिवासी बहुल इलाका नहीं है, मगर इस सम्मेलन में उसका प्रयास बड़ी संख्या में आदिवासियों को शामिल करने का है़ बसपा के इस सम्मेलन में सांसद और मध्यप्रदेश के प्रभारी राजाराम, धर्मप्रकाश भारतीय के अलावा प्रदेश के नवनियुक्त अध्यक्ष आई़एस़मौर्य के अलावा ग्वालियर-चंबल के सभी चारों बसपा विधायक उपस्थित रहेंगे़ सम्मेलन को सफल बनाने के लिए बसपा के कार्यकर्ता और पदाधिकारी जुट गए हैं़ बसपा ने गुना के अलावा राज्य के आदिवासी बहुल जिलों में भी पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे वहां पर शंकरशाह, रघुनाथ शाह की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित करें़ वैसे पार्टी ने ऐसे निर्देश राज्य के सभी जिलों में दिए हैं, मगर आदिवासी बहुल जिलों के लिए पार्टी के विशेष निर्देश हैं़ गुना में शंकरशाह, रघुनाथशाह की जयंती पर सम्मेलन आयोजित कर बसपा ने साफ संकेत दिया है कि वह आदिवासियों को पार्टी की ओर लाना चाहती है़ बसपा द्वारा वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में वैसे सर्वसमाज का नारा दिया गया था, लेकिन आदिवासी बहुल इलाकों में उसकी रुचि विशेष रुप से दिखाई नहीं थी, मगर इस पर पार्टी ने चुनाव के दो वर्ष पूर्व ही अपनी तय रणनीति के तहत यह कदम उठाया है़
सामान्य सीटों पर है कब्जा
राज्य विधानसभा में बसपा के सात विधायक बीते चुनाव में विजय होकर पहुंचे थे़ ये सातों विधायक अजजा वर्ग की आरक्षित सीटों के बजाय समान्य वर्ग की सीटों पर विजय हुए थे़ इस विजय को देखते हुए बसपा ने अब सामान्य वर्ग के अलावा आदिवासी वर्ग की आरक्षित सीटों पर ध्यान बढ़Þाया है़ बसपा गुना में 18 सितम्बर को आयोजित सम्मेलन में आदिवासी वर्ग के मतदाता को रिझाने की रणनीति तय करेगी, इसके बाद वह पार्टी से आदिवासी वर्ग के नेताओं को जोड़ने का काम भी करेगी़
शुक्रवार, 9 सितंबर 2011
गडकरी को दी बिसेन और बृजेन्द्र ने सफाई
सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन द्वारा पन्ना जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष पर की गई टिप्पणी को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को प्रदेश के दो मंत्रियों गौरीशंकर बिसेन और बृजेन्द्र सिंह ने दिल्ली जाकर सफाई दी़ वहीं इस मामले को लेकर गठित की जांच समिति अब तक अपनी रिपोर्ट का खुलासा नहीं कर पाई है़
सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन को अपनी ही पार्टी के नेता के खिलाफ टिप्पणी करना महंगा पड़ गया है़ पन्ना जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष संजय नगाइच को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में उन्हें और पन्ना जिले के ही एक और मंत्री बृजेन्द्र प्रतापसिंह को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने दिल्ली बुला लिया़ दोनों ने दिल्ली पहुंचकर अपना पक्ष जरुर रख दिया है़ दोनों मंत्रियों ने इस मामले में अपनी सफाई देकर वापस लौट आए हैं़ मगर पन्ना जिले के भाजपा नेताओं को संगठन की इस कार्रवाई से संतोष नहीं है़ यहां के नेता प्रदेश संगठन द्वारा गठित की जांच समिति द्वारा जांच करने के बाद भी रिपोर्ट न देने से वैसे ही खफा हैं, वहीं प्रदेश संगठन इन नेताओं को पार्टी के अंदर का मामला बताते हुए शांत कर रहे हैं़ फिलहाल तो ये नेता शांत हैं, मगर संगठन से खफा नजर आ रहे हैं़
प्रदेश भाजपा द्वारा इस मामले को लेकर गठित की जांच समिति द्वारा जांच करने के बाद भी अब तक रिपोर्ट नहीं देने को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं़ भाजपा नेताओं को इस बात पर भी संतोष नहीं है कि समिति द्वारा जांच करने के बाद भी रिपोर्ट नहीं दी गई और न ही किसी तरह की कोई कार्यवाही की गई़ संगठन भाजपा नेताओं को ही इस मामले में शांत रहने की हिदायत दे रहा है़ वहीं जांच समिति के दोनों सदस्य जांच के लिए पन्ना न पहुंचकर खजुराहो पहुंचे और जिस तरह से जांच की गई उसे लेकर पन्ना जिले के भाजपा नेताओं में नाराजगी भी है़ इन नेताओं का कहना है कि मामले में संगठन को इस मामले में निष्पक्ष कार्यवाही करानी चाहिए थी़ पन्ना जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष संजय नगाइच का कहना है कि संगठन ने उन्हें शांत रहने को कहा है़ इस वजह से उनके समर्थक और वे शांत हैं़ मामले में जांच समिति ने जांच तो की, मगर अपनी रिपोर्ट क्या तैयार की उसकी जानकारी उन्हें नहीं है़ उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा इस मामले को गंभीरता से लेना अच्छे संकेत हैं़
सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन को अपनी ही पार्टी के नेता के खिलाफ टिप्पणी करना महंगा पड़ गया है़ पन्ना जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष संजय नगाइच को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में उन्हें और पन्ना जिले के ही एक और मंत्री बृजेन्द्र प्रतापसिंह को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने दिल्ली बुला लिया़ दोनों ने दिल्ली पहुंचकर अपना पक्ष जरुर रख दिया है़ दोनों मंत्रियों ने इस मामले में अपनी सफाई देकर वापस लौट आए हैं़ मगर पन्ना जिले के भाजपा नेताओं को संगठन की इस कार्रवाई से संतोष नहीं है़ यहां के नेता प्रदेश संगठन द्वारा गठित की जांच समिति द्वारा जांच करने के बाद भी रिपोर्ट न देने से वैसे ही खफा हैं, वहीं प्रदेश संगठन इन नेताओं को पार्टी के अंदर का मामला बताते हुए शांत कर रहे हैं़ फिलहाल तो ये नेता शांत हैं, मगर संगठन से खफा नजर आ रहे हैं़
प्रदेश भाजपा द्वारा इस मामले को लेकर गठित की जांच समिति द्वारा जांच करने के बाद भी अब तक रिपोर्ट नहीं देने को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं़ भाजपा नेताओं को इस बात पर भी संतोष नहीं है कि समिति द्वारा जांच करने के बाद भी रिपोर्ट नहीं दी गई और न ही किसी तरह की कोई कार्यवाही की गई़ संगठन भाजपा नेताओं को ही इस मामले में शांत रहने की हिदायत दे रहा है़ वहीं जांच समिति के दोनों सदस्य जांच के लिए पन्ना न पहुंचकर खजुराहो पहुंचे और जिस तरह से जांच की गई उसे लेकर पन्ना जिले के भाजपा नेताओं में नाराजगी भी है़ इन नेताओं का कहना है कि मामले में संगठन को इस मामले में निष्पक्ष कार्यवाही करानी चाहिए थी़ पन्ना जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष संजय नगाइच का कहना है कि संगठन ने उन्हें शांत रहने को कहा है़ इस वजह से उनके समर्थक और वे शांत हैं़ मामले में जांच समिति ने जांच तो की, मगर अपनी रिपोर्ट क्या तैयार की उसकी जानकारी उन्हें नहीं है़ उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा इस मामले को गंभीरता से लेना अच्छे संकेत हैं़
लंबित हैं दो सौ से अधिक मामले
सीबीआई के पास मध्यप्रदेश के करीब दो सौ से ज्यादा मामले ऐसे हैं, जिनका निराकरण नहीं हो पाया है़ करीब पैंसठ मामले तो ऐसे हैं जो पांच से ज्यादा समय से सीबीआई के पास है़ वहीं एक प्रकरण ऐसा है जिसका हल बीस साल से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी नहीं हुआ है़
राज्य में समय-समय पर राजनेताओं के दबाव में और कई बार परिजनों के दबाव में सीबीआई को अपराध और भ्रष्टाचार के मामले सौंपे जाते रहे हैं, मगर इन मामलों का समय पर निदान न जल्दी नहीं हो पाता है़ कई बार तो बर्षों बीत जाते हैं और मामलों का हल नहीं होता है़ इस कारण सीबीआई के पास प्रदेश के मामलों की संख्या बढ़Þती जा रही है, मगर उनका निराकरण नहीं हो पा रहा है़ सीबीआई ऐसे मामलों की तह तक तो पहुंचती है, मगर उनका हल क्यों नहीं हो पा रहा है इसका जवाब किसी के पास नहीं हैं़ सीबीआई के पास भ्रष्टाचार और अपराध दोनों के प्रकरण प्रदेश के दर्ज हैं़ मगर उनका हल समय पर नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है़
सीबीआई के पास इस वर्ष की प्रथम छह माही रिपोर्ट के अनुसार जून 2011 तक 219 प्रकरण भ्रष्टाचार और अपराध से जुड़े हुए जांच में थे़ इन प्रकरणों की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है़ इन प्रकरणों में प्रदेश के दो वर्ष की समयावधी बीत जाने के बाद भी हल नहीं होने वाले मामलों की संख्या 77 थी़ जबकि दो से पांच साल की समयावधि वाले मामले 77, पांच से दस साल की समयावधि वाले मामले 55, दस से पंद्रह साल की समयावधि वाले मामले 6, पंद्रह से बीस साल की समयावधि वाले मामले 3 और 1 मामला ऐसा पेंडिंग है जिसे बीस साल बीत जाने के बाद भी सीबीआई निपटा नहीं सकी है़ लंबे समय से पेंडिंग पड़े इन मामलों के समय से न निपटने की वजह से हाल ही में हाइप्रोफाइल शेहला हत्याकांड जो सीबीआई को सौंपा गया है, उसे लेकर भी आशंका यह जताई जा रही है कि कहीं यह मामला भी लंबित न हो जाए़ वैसे फिलहाल अधिकारी इस मामले में जल्द निराकरण करने की बात कहते हैं, उनका कहना है कि जिस तरह से जांच तेज गति से हो रही है, जल्द ही इस प्रकरण का निराकरण होगा़
राज्य में समय-समय पर राजनेताओं के दबाव में और कई बार परिजनों के दबाव में सीबीआई को अपराध और भ्रष्टाचार के मामले सौंपे जाते रहे हैं, मगर इन मामलों का समय पर निदान न जल्दी नहीं हो पाता है़ कई बार तो बर्षों बीत जाते हैं और मामलों का हल नहीं होता है़ इस कारण सीबीआई के पास प्रदेश के मामलों की संख्या बढ़Þती जा रही है, मगर उनका निराकरण नहीं हो पा रहा है़ सीबीआई ऐसे मामलों की तह तक तो पहुंचती है, मगर उनका हल क्यों नहीं हो पा रहा है इसका जवाब किसी के पास नहीं हैं़ सीबीआई के पास भ्रष्टाचार और अपराध दोनों के प्रकरण प्रदेश के दर्ज हैं़ मगर उनका हल समय पर नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है़
सीबीआई के पास इस वर्ष की प्रथम छह माही रिपोर्ट के अनुसार जून 2011 तक 219 प्रकरण भ्रष्टाचार और अपराध से जुड़े हुए जांच में थे़ इन प्रकरणों की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है़ इन प्रकरणों में प्रदेश के दो वर्ष की समयावधी बीत जाने के बाद भी हल नहीं होने वाले मामलों की संख्या 77 थी़ जबकि दो से पांच साल की समयावधि वाले मामले 77, पांच से दस साल की समयावधि वाले मामले 55, दस से पंद्रह साल की समयावधि वाले मामले 6, पंद्रह से बीस साल की समयावधि वाले मामले 3 और 1 मामला ऐसा पेंडिंग है जिसे बीस साल बीत जाने के बाद भी सीबीआई निपटा नहीं सकी है़ लंबे समय से पेंडिंग पड़े इन मामलों के समय से न निपटने की वजह से हाल ही में हाइप्रोफाइल शेहला हत्याकांड जो सीबीआई को सौंपा गया है, उसे लेकर भी आशंका यह जताई जा रही है कि कहीं यह मामला भी लंबित न हो जाए़ वैसे फिलहाल अधिकारी इस मामले में जल्द निराकरण करने की बात कहते हैं, उनका कहना है कि जिस तरह से जांच तेज गति से हो रही है, जल्द ही इस प्रकरण का निराकरण होगा़
गुरुवार, 8 सितंबर 2011
कुछ को मिला, कुछ कर रहे इंतजार
भारतीय जनता पार्टी के लंबे समय से लाल बत्ती का इंतजार कर रहे नेताओं में से कुछ की मुराद तो पूरी हो गई, मगर अब भी बड़ी संख्या में ऐसे नेता हैं, जो पद के लिए इंतजार कर रहे हैं़ इन नेताओं को अब मुख्यमंत्री के चीन जाने के पहले याने बारह सितम्बर तक पद मिलने की उम्मीद है़
भारतीय जनता पार्टी में निगम-मंडल, आयोग और प्राधिकरणों में नियुक्तियों का सिलसिला तो चल रहा हैं, मगर अब भी बड़ी संख्या में ऐसे नेता हैं, जो पद के लिए लालायित हैं, मगर उन्हें अब तक पद मिला नहीं है़ कुछ नेताओं को इस मामले में सफलता मिल गई है, मगर बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और उनकी पत्नी एवं भाजपा महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष साधना सिंह के समर्थकों को अब तक पद नहीं मिले हैं़ इन समर्थकों में उत्साह जरुर कम हुआ है, मगर इनका विश्वास नहीं घटा है़ इनका मानना है कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के चीन दौरे के पूर्व याने बारह सितम्बर तक उन्हें लाल बत्ती मिल जाएगी़ इन नेताओं ने अब मुख्यमंत्री और अपने आकाओं के यहां सक्रियता बढ़Þा दी है़ कुछ ने तो दिल्ली की ओर रुख कर लिया है और कुछ ने भोपाल में अपने आकाओं के यहां डेरा जमा लिया है़ इन नेताओं ने अब आकाआें के सामने कम समय होने की बात कहकर यह दबाव बनाना शुरु कर दिया है कि अगर अब भी उन्हें पद नहीं मिला तो क्या होगा़ हालांकि आकाओं द्वारा उन्हें दिलासा भी मिल रही है कि जल्द ही उन्हें पद मिलेगा़
अभी तक जिन लोगों की नियुक्तियां हुई हैं, उनमें अधिकांश संगठन और प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के अलावा मुख्यमंत्री समर्थक ही हैं़ मगर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह के समर्थकों की संख्या कुछ कम है जिन्हें पद मिला है़ बताया जाता है कि इन दावेदारों ने अब साधनासिंह के पास अपने सक्रियता बढ़Þा दी है़ इन नेताओं ने भाभी की शरण में जाकर जल्द आदेश निकलवाने की गुहार लगानी शुरु कर दी है़ सूत्रों की माने तो इन दावेदारों को यह आश्वासन भी मिल गया है कि उन्हें जल्द ही याने मुख्यमंत्री के चीन दौरे के पूर्व पद मिल जाएगा़ दावेदारों भाभी के आश्वासन पर विश्वास भी जताया है और अब वे पद के लिए तैयारी में जुटे हैं, मगर इंंतजार उन्हें आदेश का है़ सूत्रों की माने तो इन दावेदारों को उपाध्यक्ष और सदस्य पद के लिए हरी झंडी मिल गई है़
भारतीय जनता पार्टी में निगम-मंडल, आयोग और प्राधिकरणों में नियुक्तियों का सिलसिला तो चल रहा हैं, मगर अब भी बड़ी संख्या में ऐसे नेता हैं, जो पद के लिए लालायित हैं, मगर उन्हें अब तक पद मिला नहीं है़ कुछ नेताओं को इस मामले में सफलता मिल गई है, मगर बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और उनकी पत्नी एवं भाजपा महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष साधना सिंह के समर्थकों को अब तक पद नहीं मिले हैं़ इन समर्थकों में उत्साह जरुर कम हुआ है, मगर इनका विश्वास नहीं घटा है़ इनका मानना है कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के चीन दौरे के पूर्व याने बारह सितम्बर तक उन्हें लाल बत्ती मिल जाएगी़ इन नेताओं ने अब मुख्यमंत्री और अपने आकाओं के यहां सक्रियता बढ़Þा दी है़ कुछ ने तो दिल्ली की ओर रुख कर लिया है और कुछ ने भोपाल में अपने आकाओं के यहां डेरा जमा लिया है़ इन नेताओं ने अब आकाआें के सामने कम समय होने की बात कहकर यह दबाव बनाना शुरु कर दिया है कि अगर अब भी उन्हें पद नहीं मिला तो क्या होगा़ हालांकि आकाओं द्वारा उन्हें दिलासा भी मिल रही है कि जल्द ही उन्हें पद मिलेगा़
अभी तक जिन लोगों की नियुक्तियां हुई हैं, उनमें अधिकांश संगठन और प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के अलावा मुख्यमंत्री समर्थक ही हैं़ मगर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह के समर्थकों की संख्या कुछ कम है जिन्हें पद मिला है़ बताया जाता है कि इन दावेदारों ने अब साधनासिंह के पास अपने सक्रियता बढ़Þा दी है़ इन नेताओं ने भाभी की शरण में जाकर जल्द आदेश निकलवाने की गुहार लगानी शुरु कर दी है़ सूत्रों की माने तो इन दावेदारों को यह आश्वासन भी मिल गया है कि उन्हें जल्द ही याने मुख्यमंत्री के चीन दौरे के पूर्व पद मिल जाएगा़ दावेदारों भाभी के आश्वासन पर विश्वास भी जताया है और अब वे पद के लिए तैयारी में जुटे हैं, मगर इंंतजार उन्हें आदेश का है़ सूत्रों की माने तो इन दावेदारों को उपाध्यक्ष और सदस्य पद के लिए हरी झंडी मिल गई है़
शुक्रवार, 2 सितंबर 2011
नेताओं को जांच समिति का है इंतजार
पन्ना जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष पर सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन द्वारा की गई टिप्पणी को लेकर पन्ना जिले के भाजपा नेताओं को जांच समिति का इंतजार है वहीं भाजपा द्वारा इस मामले के लिए गठित जांच समिति के सदस्यों ने जांच के बिन्दु ही तय नहीं किए हैं भाजपा भी इस मुद्दे पर किनारा करते नजर आ रही है, जिसकी वजह अन्य बडबोले मंत्री भी हैं
सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन इस बार अपनी ही पार्टी के नेता पर टिप्पणी करके फंस गए हैं पन्ना जिले सहकारी बैंक के अध्यक्ष संजय नगाइच पर उनके द्वारा की गई टिप्पणी बिसेन को महंगी पडती नजर आ रही है वहीं मामले में पप्रदेश अध्यक्ष पप्रभात झा द्वारा गठित की दो सदस्यीय जांच समिति ने अब तक पन्ना पहुंचकर मामले में जांच की शुरुआत ही नहीं की है, यहां तक कि जांच के बिन्दु ही तय नहीं किए गए हैं जांच समिति के अलावा भाजपा के अन्य नेता भी अब इस मामले में बिसेन के खिलाफ कडा रुख करने से बचते नजर आ रहे हैं
भाजपा नेताओं का मानना है कि अगर बिसेन पर कोई कार्रवाई की जाती है तो कार्यकर्ताओं और नेताओं में गलत संदेश जाएगा मंत्रिमंडल में कुछ और भी बडबोले मंत्री हैं, जिन्होंने समय-समय पर टिप्पणी कर संगठन तो कभी सत्ता और कार्यकर्ताओं को ठेस पहुंचाई है मगर संगठन इस मामले में शांत ही रहा है इस लिहाज से भाजपा अब इस मामले में जांच समिति के सदस्यों पर दबाव भी नहीं डालना चाहती है सूत्रों की माने तो पार्टी ने अब इस विवाद को घर का मामला बताकर पटाक्षेप करने का मन बना लिया है मगर पन्ना जिले के भाजपा नेताओं को जांच समिति का अब भी इंतजार है ये नेता जांच समिति के सामने मंत्री द्वारा किए गए बर्ताव को रखना चाहते हैं
इस मामले में जिला सहकारी बैक पन्ना के अध्यक्ष संजय नगाइच का कहना है कि उन्होंने और जिले के भाजपा नेताओं ने अपनी बात संगठन के सामने रख दी है संगठन ने विश्वास दिलाया है कि वे मामले की जांच कराकर उचित कदम उठाएंगें नगाइच ने कहा कि अब तक जांच समिति आई तो नहीं है, जांच समिति के सदस्यों के सामने हम अपनी बात पूरी तरह से रखेंगे हमे विश्वास है कि संगठन हमारी बात को नकारेगा नहीं
सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन इस बार अपनी ही पार्टी के नेता पर टिप्पणी करके फंस गए हैं पन्ना जिले सहकारी बैंक के अध्यक्ष संजय नगाइच पर उनके द्वारा की गई टिप्पणी बिसेन को महंगी पडती नजर आ रही है वहीं मामले में पप्रदेश अध्यक्ष पप्रभात झा द्वारा गठित की दो सदस्यीय जांच समिति ने अब तक पन्ना पहुंचकर मामले में जांच की शुरुआत ही नहीं की है, यहां तक कि जांच के बिन्दु ही तय नहीं किए गए हैं जांच समिति के अलावा भाजपा के अन्य नेता भी अब इस मामले में बिसेन के खिलाफ कडा रुख करने से बचते नजर आ रहे हैं
भाजपा नेताओं का मानना है कि अगर बिसेन पर कोई कार्रवाई की जाती है तो कार्यकर्ताओं और नेताओं में गलत संदेश जाएगा मंत्रिमंडल में कुछ और भी बडबोले मंत्री हैं, जिन्होंने समय-समय पर टिप्पणी कर संगठन तो कभी सत्ता और कार्यकर्ताओं को ठेस पहुंचाई है मगर संगठन इस मामले में शांत ही रहा है इस लिहाज से भाजपा अब इस मामले में जांच समिति के सदस्यों पर दबाव भी नहीं डालना चाहती है सूत्रों की माने तो पार्टी ने अब इस विवाद को घर का मामला बताकर पटाक्षेप करने का मन बना लिया है मगर पन्ना जिले के भाजपा नेताओं को जांच समिति का अब भी इंतजार है ये नेता जांच समिति के सामने मंत्री द्वारा किए गए बर्ताव को रखना चाहते हैं
इस मामले में जिला सहकारी बैक पन्ना के अध्यक्ष संजय नगाइच का कहना है कि उन्होंने और जिले के भाजपा नेताओं ने अपनी बात संगठन के सामने रख दी है संगठन ने विश्वास दिलाया है कि वे मामले की जांच कराकर उचित कदम उठाएंगें नगाइच ने कहा कि अब तक जांच समिति आई तो नहीं है, जांच समिति के सदस्यों के सामने हम अपनी बात पूरी तरह से रखेंगे हमे विश्वास है कि संगठन हमारी बात को नकारेगा नहीं
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