सीबीआई के पास मध्यप्रदेश के करीब दो सौ से ज्यादा मामले ऐसे हैं, जिनका निराकरण नहीं हो पाया है़ करीब पैंसठ मामले तो ऐसे हैं जो पांच से ज्यादा समय से सीबीआई के पास है़ वहीं एक प्रकरण ऐसा है जिसका हल बीस साल से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी नहीं हुआ है़
राज्य में समय-समय पर राजनेताओं के दबाव में और कई बार परिजनों के दबाव में सीबीआई को अपराध और भ्रष्टाचार के मामले सौंपे जाते रहे हैं, मगर इन मामलों का समय पर निदान न जल्दी नहीं हो पाता है़ कई बार तो बर्षों बीत जाते हैं और मामलों का हल नहीं होता है़ इस कारण सीबीआई के पास प्रदेश के मामलों की संख्या बढ़Þती जा रही है, मगर उनका निराकरण नहीं हो पा रहा है़ सीबीआई ऐसे मामलों की तह तक तो पहुंचती है, मगर उनका हल क्यों नहीं हो पा रहा है इसका जवाब किसी के पास नहीं हैं़ सीबीआई के पास भ्रष्टाचार और अपराध दोनों के प्रकरण प्रदेश के दर्ज हैं़ मगर उनका हल समय पर नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है़
सीबीआई के पास इस वर्ष की प्रथम छह माही रिपोर्ट के अनुसार जून 2011 तक 219 प्रकरण भ्रष्टाचार और अपराध से जुड़े हुए जांच में थे़ इन प्रकरणों की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है़ इन प्रकरणों में प्रदेश के दो वर्ष की समयावधी बीत जाने के बाद भी हल नहीं होने वाले मामलों की संख्या 77 थी़ जबकि दो से पांच साल की समयावधि वाले मामले 77, पांच से दस साल की समयावधि वाले मामले 55, दस से पंद्रह साल की समयावधि वाले मामले 6, पंद्रह से बीस साल की समयावधि वाले मामले 3 और 1 मामला ऐसा पेंडिंग है जिसे बीस साल बीत जाने के बाद भी सीबीआई निपटा नहीं सकी है़ लंबे समय से पेंडिंग पड़े इन मामलों के समय से न निपटने की वजह से हाल ही में हाइप्रोफाइल शेहला हत्याकांड जो सीबीआई को सौंपा गया है, उसे लेकर भी आशंका यह जताई जा रही है कि कहीं यह मामला भी लंबित न हो जाए़ वैसे फिलहाल अधिकारी इस मामले में जल्द निराकरण करने की बात कहते हैं, उनका कहना है कि जिस तरह से जांच तेज गति से हो रही है, जल्द ही इस प्रकरण का निराकरण होगा़
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