शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

बसपा को भाए आदिवासी

बहुजन समाज पार्टी की मध्यप्रदेश इकाई की नजरें अब आदिवासियों पर टिक गई हैं़ इन्हें रिझाने के लिए बसपा शहीद शंकर शाह, रघुनाथ शाह की जयंती पर सम्मेलन का आयोजन करने जा रही है़ इसके सहारे बसपा आदिवासियों के बीच पैठ जमाने का काम कर रही है़ बसपा की यह सक्रियता भाजपा, कांग्रेस और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के लिए चिंता बढ़Þा सकती है़
बहुजन समाज पार्टी की मध्यप्रदेश इकाई को भी अब आदिवासी भाने लगे हैं़ प्रदेश इकाई ने आदिवासियों के बीच अपनी पैठ जमाने के लिए 18 सितम्बर को शहीद शंकरशाह, रघुनाथ शाह की जयंती पर एक सम्मेलन का आयोजन कर डाला है़ वैसे तो यह सम्मेलन गुना में होना है, जो कि आदिवासी बहुल इलाका नहीं है, मगर इस सम्मेलन में उसका प्रयास बड़ी संख्या में आदिवासियों को शामिल करने का है़ बसपा के इस सम्मेलन में सांसद और मध्यप्रदेश के प्रभारी राजाराम, धर्मप्रकाश भारतीय के अलावा प्रदेश के नवनियुक्त अध्यक्ष आई़एस़मौर्य के अलावा ग्वालियर-चंबल के सभी चारों बसपा विधायक उपस्थित रहेंगे़ सम्मेलन को सफल बनाने के लिए बसपा के कार्यकर्ता और पदाधिकारी जुट गए हैं़ बसपा ने गुना के अलावा राज्य के आदिवासी बहुल जिलों में भी पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे वहां पर शंकरशाह, रघुनाथ शाह की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित करें़ वैसे पार्टी ने ऐसे निर्देश राज्य के सभी जिलों में दिए हैं, मगर आदिवासी बहुल जिलों के लिए पार्टी के विशेष निर्देश हैं़ गुना में शंकरशाह, रघुनाथशाह की जयंती पर सम्मेलन आयोजित कर बसपा ने साफ संकेत दिया है कि वह आदिवासियों को पार्टी की ओर लाना चाहती है़ बसपा द्वारा वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में वैसे सर्वसमाज का नारा दिया गया था, लेकिन आदिवासी बहुल इलाकों में उसकी रुचि विशेष रुप से दिखाई नहीं थी, मगर इस पर पार्टी ने चुनाव के दो वर्ष पूर्व ही अपनी तय रणनीति के तहत यह कदम उठाया है़
सामान्य सीटों पर है कब्जा
राज्य विधानसभा में बसपा के सात विधायक बीते चुनाव में विजय होकर पहुंचे थे़ ये सातों विधायक अजजा वर्ग की आरक्षित सीटों के बजाय समान्य वर्ग की सीटों पर विजय हुए थे़ इस विजय को देखते हुए बसपा ने अब सामान्य वर्ग के अलावा आदिवासी वर्ग की आरक्षित सीटों पर ध्यान बढ़Þाया है़ बसपा गुना में 18 सितम्बर को आयोजित सम्मेलन में आदिवासी वर्ग के मतदाता को रिझाने की रणनीति तय करेगी, इसके बाद वह पार्टी से आदिवासी वर्ग के नेताओं को जोड़ने का काम भी करेगी़

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें