बुधवार, 23 दिसंबर 2015

होगा जिला अध्यक्षों के काम का आकलन


 कांग्रेस नये साल में बदलेगी डेढ़ दर्जन से ज्यादा जिला अध्यक्ष

प्रदेश कांग्रेस अब जिला अध्यक्षों के चार माह के काम काज का आकलन करेगी. यह आकलन ही यह बताएगा कि व्यक्ति पद पर बना रहेगा या नहीं. इस आकलन की रिपोर्ट प्रदेश प्रभारी मोहन प्रकाश के अलावा प्रदेश के राष्ट्रीय नेताओं को दी जाएगी, ताकि वे भी यह जान सकेंगे की उनका समर्थक पद पर रहने काबिल है या नहीं.
प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के बाद  जब विरोध के स्वर मुखरित हुए तो प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने जिला अध्यक्षों की नियुक्ति का मामला टाल दिया था. इसके बाद जिला अध्यक्षों की बैठक में उन्हें जिला स्तर पर सक्रियता दिखाने को कहा गया था. अब प्रदेश अध्यक्ष नये साल में याने जनवरी माह के पहले सप्ताह में एक बैठक जिला अध्यक्षों की लेने जा रहे हैं. इस बैठक में जिला अध्यक्षों से पिछले चार माह में उनके जिलों किए गए कांग्रेस द्वारा प्रदर्शन और अन्य गतिविधियां जिसमें जिला अध्यक्ष की सक्रियता दिखाई दे, वह रिपोर्ट साथ लाने को कहा जा रहा है. प्रदेश अध्यक्ष ने यह रास्ता इसलिए निकाला है कि ताकि जहां पर उन्हें जिला अध्यक्ष को बदलना है, वे वहां बदलकर किसी दबाव से बच जाएं. जिला अध्यक्ष अपने चार माह के कामकाज की रिपोर्ट बनाने में जुटे हैं. सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष ने यह इसलिए तय किया है कि वे जिला अध्यक्षों की नियुक्ति अगर करते हैं तो विवादों से बच जाएं साथ ही जिला अध्यक्षों के कामकाज का आकलन भी किया जा सके. राजधानी में होने वाली जिला अध्यक्षों की इस बैठक प्रदेश पदाधिकारी जिला अध्यक्षों के कामकाज की रिपोर्ट लेंगे. इसके बाद इस रिपोर्ट को प्रदेश अध्यक्ष यादव ने वरिष्ठ नेताओं खासकर प्रदेश  प्रभारी मोहन प्रकाश के अलावा दिग्विजयसिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुरेश पचौरी को भी भेजने की रणनीति तय की है. जिला अध्यक्षों के इस लेखा-जोखा की रिपोर्ट तैयार कराने के पीछे प्रदेश कांग्रेस का मकसद साफ है कि जिला इकाईयों को और अधिक सक्रिय किया जाए साथ ही जहां पर निष्क्रिय जिला अध्यक्ष हंै उन्हें बदला जाए.
बच जाएंगे वरिष्ठों के दबाव से
प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव जिन जिला अध्यक्षों को बदलना चाहते हैं, मगर वहां पर दिग्गज नेताओं के कारण वे नहीं बदल पा रहे हैं. इस स्थिति से बचने के लिए उन्होंने यह रास्ता निकाला है. जिला अध्यक्षों को लेखा-जोखा भी वे इसलिए वरिष्ठ नेताओं को भेजकर यह दिखाना चाहते हैं कि आपके समर्थक नेता जिले में कितने सक्रिय हैं. सूत्रों की माने तो इस रिपोर्ट के साथ वे उन जिलों के जिला अध्यक्षों की जानकारी भी वरिष्ठों देंगे, जहां से उनकी शिकायतें आई हैं. 
डेढ़ दर्जन से ज्यादा जिलों में बदले जाएंगे अध्यक्ष
प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के साथ ही यादव ने इस बात के संकेत दिए थे कि वे वर्तमान जिला अध्यक्षों में से करीब दो दर्जन जिला अध्यक्षों को बदलना चाहते हैं, अगर उस वक्त विरोध न होता तो वे अध्यक्षों की नियुक्ति कर देते, मगर विरोध के कारण यह सूची अटक गई है. इसके बाद यादव ने अब फिर नये साल में जिला अध्यक्षों को बदलने का मन बनाया है, मगर इस बार वे पहले जिला अध्यक्षों के कामकाज का लेखा-जोखा देंखेंगे. इसी कामकाज के आधार पर ही यह तय होगा कि वर्तमान जिला अध्यक्ष बने रहेगा या नहीं. फिलहाल इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, राजगढ़, सीहोर, होशंगाबाद, विदिशा, उज्जैन सहित डेढ़Þ दर्जन जिला अध्यक्षों को बदलने की तैयारी यादव कर चुके हैं.

अध्यक्ष को लेकर घमासान

सहमति से जिला अध्यक्ष निर्वाचन कराना चाहती है भाजपा, दिल्ली तक पहुंच रहे दावेदार
प्रदेश भाजपा में चल रहे संगठनात्मक चुनाव को लेकर अब जिला अध्यक्ष बनने के लिए दावेदारों की सक्रियता तेज हो गई है. इस पद के लिए घमासान को देखते हुए संगठन ने वर्तमान जिला अध्यक्षों और चुनाव अधिकारियों की बैठक बुलाई है. इस बैठक में इस बात पर सहमति बनाने का प्रयास किए जाएंगे कि जिला अध्यक्ष का निर्वाचन सहमति से हो.
भाजपा में संगठनात्मक चुनाव के तहत अब जिला अध्यक्षों के चुनाव प्रक्रिया शुरू होने वाली है. इस प्रक्रिया के शुरू होने के पहले ही पद के लिए दावेदारों का घमासान मच गया है. हर जिले में एक से ज्यादा दावेदार इस पद के लिए सामने आ रहे हैं. इस वजह से संगठन खुद अब चिंतित हो उठा है. जिला अध्यक्ष पद के लिए जब दावेदारों की दावेदारी बढ.ती नजर आईतो संगठन ने अब जिला अध्यक्षों और जिला चुनाव अधिकारियों की बैठक मंगलवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में बुलवाई है. इस बैठक में सभी जिलों की जानकारी मंगवाईगई है. साथ ही इस बैठक में संगठन इस बात की गाइड लाइन तय करना चाहता है कि जिन जिलों में चुनाव की प्रक्रिया होनी है, वहां सहमति से चुनाव कराए जाएं और मतदान की स्थिति निर्मित न हो. प्रदेश चुनाव अधिकारी अजय प्रताप सिंह के मुताबिक जिला अध्यक्ष निर्वाचन की प्रक्रिया इसी माह की 27-28 तारीख को कराईजानी है. प्रयास इस बात का है कि सभी जिलों में सहमति से जिला अध्यक्ष का निर्वाचन हो जाए. 
दूसरी ओर दावेदारों ने अपने आकाओं पर पद पाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है. दावेदार किसी भी रूप से इस पद को पाना चाहते हैं. कुछ दावेदार तो इसके लिए दिल्ली तक पहुंच गए और कुछ ने भोपाल में डेरा डाल रखा है. सबसे ज्यादा संकट भाजपा के लिए भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर शहर जिला अध्यक्ष का पद बन गया है. यहां पर दावेदारों की संख्या काफी है. इन शहरों में वर्तमान जिला अध्यक्ष और स्थानीय विधायक आमने-सामने होते नजर आ रहे हैं. विधायक अपने सर्मथक को जिला अध्यक्ष बनवाना चाहते हैं, तो वर्तमान अध्यक्ष अपने सर्मथकों को आगे बढ.ा रहे हैं. अध्यक्ष पद पाने के लिए दावेदारी कर रहे लोग अपने आकाओं के पास निरंतर पहुंच रहे हैं. जिला अध्यक्षों के निर्वाचन के बाद इस महीने में सांसदों और विधायकों की बैठक भी आयोजित की जा रही है. इस बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को लेकर चर्चा की जाएगी. इसके बाद अगले माह भाजपा को नया अध्यक्ष भी मिल जाएगा. इन जिलों में नए चेहरों की तलाश
भोपाल, सीहोर, राजगढ., विदिशा, छिंदवाड.ा, बैतूल, होशंगाबाद, भिंड, बड.वानी, आगर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, नीमच, रतलाम, अलीराजपुर, गुना, श्योपुर, मुरैना, ग्वालियर नगर, ग्वालियर ग्रामीण, सागर, टीकमगढ., पन्ना, रीवा, सीधी,सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, जबलपुर नगर, जबलपुर ग्रामीण में संगठन नया चेहरा जिला अध्यक्ष के रूप में लाना चाहता है.
वहीं रायसेन, खरगोन, खंडवा, मंदसौर, धार, शिवपुरी,अशोक नगर, अनुपपूर, सिवनी में मौजूदा अध्यक्षों को दोबारा जिम्मेदारी सौंपे जाने का संगठन ने करीब-करीब मन बना लिया है. जबकि सतना में जिला अध्यक्ष का चुनाव नहीं कराया जा रहा है.इसी तरह की स्थिति सागर की भी है. यहां पर वर्तमान जिला अध्यक्ष के पक्ष में परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह हैं, जो चुनाव नहीं कराना चाहते हैं. मगर अन्य नेता यहां पर चुनाव कराने का मन बना चुके हैं.

लामबंद हो रहे पांच दल

गैर कांग्रेसी और गैर भाजपाईदल प्रदेश में एक साथ करेंगे हर जिले में संघर्ष
प्रदेश में हाल ही में हुए लोकसभा के उपचुनाव में एक होकर ताकत दिखाने का प्रयास कर चुके पांच राजनीतिक दलों ने अब एक और साझा कार्यक्रम बनाया है. ये दल अब एक साथ 2018 को लक्ष्य बनाकर प्रदेश के हर जिले में संघर्षकरेंगे. इन दलों के प्रदेश प्रमुखों ने तय किया है कि इस दौरान वे जनता के बीच पहुंचकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने अब तक प्रदेशहित के लिए क्या किया इसकी जानकारी देंगे. 
रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में हाल में हुए उपचुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर एक दूसरे से दूरी बनाकर चलने वाले पांच राजनीतिक दल एक हुए और उपचुनाव लड.ा. इसके बाद उनका हौसला कुछ ज्यादा बढ.ता नजर आने लगा है. अब इन पांच दलों जनता दल यू, माकपा, भाकपा, राष्ट्रीय समानता दल और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने यह तय किया कि वे प्रदेश में अब अपनी नींव को मजबूत करेंगे. अलग-अलग होकर चुनाव लड.ने के बजाय संगठित होकर वे चुनाव लडे.ंगे. इन दलों के प्रदेश प्रमुखों ने राजधानी में हाल ही में एक बैठक की और बैठक में रतलाम-झाबुआ उपचुनाव की समीक्षा की. समीक्षा के बाद यह तय किया गया कि चुनाव लड.ने के साथ-साथ वे अब संगठित होकर जनता के साथ मिलकर प्रदेश सरकार और कांग्रेस के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंकेंगे. इसके लिए वे जल्द ही रणनीति तय करने जा रहे हैं.
बैठक में यह तो तय हो गया कि अब वर्ष2018 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से रणनीति बनाकर काम किया जाए. इसके लिए तय यह किया गया कि हर जिले में एक मंच पर ये दल एक साथ बैठकर संघर्षकरेंगे. हर जिले में भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ बिगुल फूंकेंगे. जनता के बीच जाकर उन्हें यह बताने का प्रयास करेंगे. कि भाजपा और कांग्रेस ने अब तक प्रदेश हित में कितना और कैसे काम किया. इसके अलावा निम्न और मध्यमवर्गीय तबके लिए ये दल कितने काम करने में सफल रहे हैं. 
राष्ट्रीय स्तर पर भले ही ये दल बिखरे नजर आ रहे हों, मगर मध्यप्रदेश में इन दलों ने एकजुटता दिखाने का जो प्रयास किया है वह भविष्य में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों को चिंता में डालने का काम करेंगे. इन दलों ने जनता के बीच जाकर दलित व पिछड.ों पर हो रहे अत्याचारों के मामले पर मुहिम छेड.ने की रणनीति बनाई है और अब जल, जंगल और जमीन की लड.ाईको ये जनता के बीच ले जाकर तेज करेंगे. विशेष कर इन दलों की रणनीति आदिवासी और पिछडे. वर्ग बाहुल्य वाले जिलों में संघर्ष तेज करने की है. 
जनता दल यू के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद यादव का कहना है कि हमने सबसे पहले गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ मिलकर पिछला विधानसभा चुनाव लड.ा. हालांकि परिणाम हमारे पक्ष में नहीं रहा, लेकिन हम मजबूत होकर उभरे. जहां भी हमारे प्रत्याशी मैदान में थे, हमें पूर्व की अपेक्षा ज्यादा मत मिले. यादव ने कहा कि अब हम प्रदेश में गठबंधन कर अपना प्रभाव प्रदेश में दिखाएंगे. जिस दल का जिस क्षेत्र में प्रभाव है, हम उस क्षेत्र में उस दल की ताकत हो और बढ.ाएंगे. इसके लिए एक एजेंडा जल्द ही तैयार किया जाएगा.
 माकपा के प्रदेश सचिव बादल सरोज का कहना है कि प्रदेश की जनता में भाजपा और कांग्रेस को लेकर लगातार नाराजगी बढ. रही है. प्रदेश का मतदाता अब मजबूत विकल्प की तलाश कर रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य में हम अब संगठित होकर चुनाव लड.ने की तैयारी कर चुके हैं. रतलाम-झाबुआ में हमने पहला चुनाव लड.ा. अब मैहर में होने वाले उपचुनाव में हम मजबूती के साथजनता के बीच पहुंचेंगे. हमे विश्‍वास है यहां पर नतीजा चौंकाने वाला होगा. इसके साथ ही प्रदेश भर में हम एक साथ संघर्ष करेंगे.

मंगलवार, 1 दिसंबर 2015

पैदा होते ही बीमारियां जकड़ रही बच्चों को

विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना भोपाल गैस त्रासदी को भले ही 31 साल बीत रहे हैं, मगर इस त्रासदी का असर अब भी भोपाल में जन्म ले रहे बच्चों में दिखाई दे रहा है. बच्चों को हृदयघात,शरीर के अंगों में टेड़ापन आना, तुतलाना के अलावा अन्य कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी किसी को कल्पना तक नहीं थी. आज भी राजधानी के बड़ी संख्या में गैस  पीड़ितों के बच्चे इन बीमारियों को भोग रहे हैं.
1984 में घटी गैस त्रासदी आज भी भोपाल के लोगों को रुला देती है. आज भी कई परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपनों को खोने के बाद त्रासदी के बाद जन्म लेने वाले बच्चों में हो रही तरह-तरह की बीमारियों को लेकर चिंतित और भयभीत हैं. विशेषकर पुराने शहर की उन बस्तियों में आज भी बड़ी संख्या  में ऐसे बच्चें हैं, जो जन्म लेते ही बीमारियों के आगोश में आ जाते हैं. बच्चों में हो रही इन बीमारियों को लेकर राजधानी में संभावना ट्रस्ट द्वारा एक शोध  कराया जा रहा है. इस शोध कार्य में लगे को-आर्डिनेटर रीतेश पाल ने बताया कि शोध के आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है. प्रारंभिक तौर पर यह बात सामने आई है कि अपीड़ित आबादी के मुकाबले जहरीली गैस या प्रदूषित जल का असर प्रभावित आबादी के बच्चों पर खास दिखाई देता है. उन्होंने बताया कि शोध में इस आबादी के 2500 से ज्यादा ऐसे बच्चों को शामिल किया और इस बात की पुष्टि हुई कि इन बच्चों को जन्म लेते ही बीमारियों ने घेर लिया. शोध कार्य में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 30 चिकित्सकों ने अब तक 1700 से ज्यादा बच्चों में इस तरह की बीमारियों के लक्ष्ण देखे. पाल की सहयोगी आफरीन का कहना है कि वे सिर्फ बच्चों की विकृति के बारे में ही जानकारी नहीं जुटा रहे, बल्कि उनके इलाज क लिए भी किस तरह मदद की जाए इस बारे में भी कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि अब तक मंदबुद्धि, सेरेब्रल पाल्सी (अण्डकोष), सिन्डेक्टिली-पालिटेक्टिली (ऊंगलियों की विकृति) तथा जन्मजात विकृतियों वाले 164 बच्चों का इलाज सरकारी और गैर सरकारी चिकित्सा केन्द्रों में कराया जा रहा है. इनका इलाज संभावना ट्रस्ट द्वारा कराया जा रहा है. अब तक 43 बच्चों का इलाज पूरा हो चुका है और वे स्वास्थ हैं.
स्वस्थ होने के बाद खुश है परिजन
गैस प्रभावित बस्ती द्वारका नगर निवासी शांती बाई ने बताया कि उनके ५६ साल के लड़के अभिषेक को हृदय रोग की बीमारी हो गई. इसके बाद परिवार की स्थिति उसका इलाज कराने की नहीं थी. मगर ट्रस्ट द्वारा भोपाल मेमोरियल में उसका आपरेशन कराया आज वह स्वस्थ है. इसी तरह न्यू आरिफ नगर निवासी आयशा ने बताया कि उनके 8 वर्षीय बेटे अमन अण्डकोश की विकृति से पीड़ित था. ट्रस्ट के शोध से जब जानकारी मिली तब उसके बाद ट्रस्ट द्वारा ही हमीदिया चिकित्सालय में उपचार कराया आज वह खुश है. वल्लभ नगर निवासी जीतेन्द्र वैश्य ने बताया कि हमीदिया चिकित्सालय में उनकी लड़की वैष्णवी का भी एक छोटा आपरेशन हुआ, पहले वह तुतलाती थी, अब साफ बोलती है. जिन 43 बच्चों का इलाज हुआ है उनके परिजन आज खुश हैं.
30  हजार से ज्यादा हैं पंजीकृत
संभावना ट्रस्ट के क्लिनिक में गैस पीड़ित एवं कारखाने के समीप की बस्तियों के प्रदूषित भूजल से पीड़ितों की संख्या हजारों में हैं. ट्रस्ट की रचना ढींकरा ने बताया कि क्लीनिक में 30 हजार से ज्यादा की संख्या में लोग पंजीकृत हैं. इनका अंग्रेजी, आयुर्वेद और योग तीनों ही विधियों से उपचार किया जा रहा है.क्लीनिक को चलाने के लिए भारत और ब्रिटेन के 15 हजार से अधिक दानदाता है. उन्होंने बताया कि अंतराष्ट्रीय लेखक डामिनिक लेपियर खुद संभावना ट्रस्ट द्वारा संचालित स्त्री रोग क्लीनिक एवं अनौपचारिक विद्यालय के लिए पैसे जुटाते हैं.

साल दर साल बढ़ रहे एड्स के मरीज

प्रदेश में एड्स के मरीजों की संख्या में साल-दर-साल इजाफा हो रहा है. बीते 10 सालों में प्रदेश में 2120 एड्स के मरीज मिले हैं. वर्ष 2005 में इनकी संख्या प्रदेश में 1759 मिले थे, वहीं वर्ष 2015 में मरीजों की संख्या 3870 हो गई. प्रदेश में वर्तमान में एड्स के मरीजों की संख्या 43,359 हैं.
मध्यप्रदेश में एड्स के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बाद भी इस बीमारी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2005 में इस बीमारी के नये मरीजों की संख्या 1759 थी, वहीं वर्ष 2015 के अक्तूबर माह तक इस बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़कर 3870 हो गई थी. वर्ष 2005 में  15,357 मरीजों के टेस्ट लिए थे,जिनमें 1759 मरीज इस बीमारी से ग्रसित मिले थे. वहीं वर्ष 2015 के अक्तूबर माह तक मध्यप्रदेश एड्स कंट्रोल सोसायटी और स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस बीमारी के जांच के लिए 7,85,488 मरीजों के सैम्पल लिए जिनमें से 3870 मरीज इस बीमारी से पीड़ित पाए थे. प्रदेश में लगातार एड्स की मरीजों की संख्या में हो रही वृद्धि देख स्वास्थ्य विभाग और एड्स कंट्रोल सोसायटी द्वारा लगातार लोगों को सजग करने अभियान चलाए गए, मगर उसके बाद भी इस तरह के अभियानों में सफलता हासिल नहीं हुई. राज्य में सबसे ज्यादा भयावह स्थिति औद्योगिक नगरी इंदौर जिले की है, जहां पर एड्स के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा 9695 है. इसके बाद जबलपुर जिले में 4327, राजधानी भोपाल जिले में 4268, उज्जैन में 2544 और ग्वालियर जिले में 2489 एड्स के मरीज हैं. 

किस जिले में कितने मरीज

जिला मरीज
इंदौर        9695
जबलपुर 4327
भोपाल 4268
उज्जैन 2544
ग्वालियर        2489
रीवा        2267
मंदसौर 1727
बुरहानपुर         1184
बड़वानी 1023
सिवनी 975
नीमच 922
बालाघाट        841
छिंदवाड़ा        824
रतलाम 823
धार         790
सागर 755
खरगोन 579
देवास 557
खंडवा 553
बैतूल        490
होशंगाबाद        481
सतना 469
मुरैना 449
शिवपुरी 428
झाबुआ 404
भिंड        384
मंडला 362
गुना         321
शाजापुर 286
सीहोर 279
हरदा        228
शहडोल 225
सीधी        211
रायसेन 181
विदिशा 162
छतरपुर 160
कटनी 156
राजगढ़Þ 137
दमोह 133
नरसिंहपुर        132
सिंगरौली        128
अनूपपुर 105
अशोक नगर 91
डिंडोरी 89
दतिया 81
टीकमगढ़Þ 72
पन्ना 55
अलीराजपुर 43
श्योपुरकलां 42
उमरिया 32
---------------------
कुल 43,959

गुरुवार, 26 नवंबर 2015

भाजपा में घमासान के आसार

उपचुनाव में रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में भाजपा को मिली हार के बाद अब संगठन में घमासान के आसार नजर आ रहे हैं. भाजपा संगठन संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया को इसी वर्ष पूरा कराकर नया अध्यक्ष बनाने की कवायद करने में जुटेगा.
रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में पूरी ताकत लगाने के बाद मिली हार के कारण भाजपा नहीं समझ पा रही है. पूरा संगठन इस हार को लेकर चिंतित हो गया है. यहां तक की प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे भी अपनी प्रतिक्रिया में यह कह चुके हैं कि हार से सबक सीखने की जरूरत है. सहस्त्रबुद्धे ने खुद इस संसदीय क्षेत्र में रहकर चुनाव प्रचार किया था, साथही कार्यकर्ताओं की बैठक लेकर उनसे एकजुट होकर पार्टीप्रत्याशी निर्मला भूरिया के पक्ष में काम करने को कहा था, मगर संगठन के नेताओं की बात का उस संसदीय क्षेत्र के कार्यकर्ताओं पर प्रभाव न पड.ने के कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा पूरा संगठन अब चिंतित हो उठा है. यहां पर सबसे ज्यादा सवाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की कार्यशैली को लेकर भी उठने लगे हैं. संगठन ने उपचुनाव के कारण प्रदेश में चल रही संगठनात्मक चुनाव की गतिविधि को पूर्व में झाबुआ, रतलाम, अलीराजपुर, देवास जिलों में रोक दिया था. अब यहां पर यह प्रक्रिया 29 नवंबर से फिर शुर की जा रही है. इसकी घोषणा भी चुनाव अधिकारी अजय प्रताप सिंह कर चुके हैं. सिंह के अनुसार इन जिलों में 29 एवं 30 नवंबर को स्थानीय सतितियों का गठन किया जाएगा, जबकि प्रदेश के शेष सभी जिलों में मंडलों के गठन की प्रक्रिया 5 एवं 6 दिसंबर को होगी. उपचुनाव के बाद भाजपा में अब संगठनात्मक चुनाव को लेकर घमासान भी तेज होता नजर आने लगा है. संगठन के कुछ पदाधिकारी और भाजपा नेता अब यह चाहते हैं कि संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया को जल्द ही यानि दिसंबर माह में ही पूरा करा लिया जाए. साथ ही भाजपा अध्यक्ष का निर्वाचन भी दिसंबर माह में ही पूरा कराया जाए.
यहां उल्लेखनीय है कि नरेंद्र सिंह तोमर के बाद उनके शेष कार्यकाल के लिए नंदकुमार सिंह चौहान को अध्यक्ष बनाया गया था. संगठन चुनाव की प्रक्रिया के साथ ही यह माना जा रहा था कि चौहान दूसरा कार्यकाल भी पूरा करेंगे, मगर रतलाम संसदीय क्षेत्र में मिली हार अब उनके लिए भी संकट खड. करेगी. अध्यक्ष पद के लिए वैसे पूर्व में ही कई नाम सामने आए थे, मगर अब अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की संख्या में इजाफा हो सकता है. यह माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व इस मामले को अब गंभीरता से लेगा.
कोर कमेटी की बैठक 29 को 
 रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में मिली हार के बाद भाजपा कोर कमेटी हार के कारणों को जानने के लिए समीक्षा बैठक 29 नवंबर को भोपाल में कर रही है. बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल, प्रदेश भाजपा के प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे के अलावा मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान भी उपस्थित रहेंगे. बैठक में संगठनात्मक ढांचा कहां पर कमजोर हुआ इस बात को लेकर गंभीरता से मंथन किया जाएगा. साथ ही यह कारण भी जानने का प्रयास होगा कि इस संसदीय क्षेत्र के आठों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा कार्यकर्ता एक साथ इतना क्यों रुठा. कार्यकर्ताओं को साधने के पूरे काम किए, मगर उसने संगठन की बात को ध्यान क्यों नहीं दिया. इस बात को लेकर पूरा संगठन चिंतित है. संगठन के नेता यह तो मान रहे हैं कि रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र वैसे तो परंपरागत रूप से कांग्रेस का गढ. रहा है, मगर 2014 के चुनाव में सीट भाजपा के हाथ में आने के बाद यहां पर भाजपा को उम्मीद थी कि इस सीट पर वह अब अपना कब्जा बरकरार रखेगी. मगर ऐसा नहीं हो पाया. संगठन नेताओं का मानना है कि जब मतदाता के बीच पहुंचकर खुद मुख्यमंत्री ने विकास और सरकार के कामों को बताया, उसके बाद भी अगर संघ के इस गढ. में भाजपा को हार मिली तो कहीं न कही कार्यकर्ता की नाराजगी और संगठन की कमजोरी सामने आ रही है.

शनिवार, 14 नवंबर 2015

अब गरमाएगा चुनावी माहौल

प्रदेश में 21 नवंबर को होने वाले उपचुनाव के लिए मतदान के पूर्व चुनावी माहौल में अब शनिवार से गर्माहट नजर आएगी. कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के दिग्गज कल से चुनाव अभियान में पूरी ताकत के साथ जुटेंगे. कांग्रेस की ओर से जहां दिग्विजयसिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथ में चुनाव प्रचार की कमान रहेगी, वहीं भाजपा ने एक बार फिर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के हाथ में चुनाव प्रचार की कमान सौंपी है. राज्य के रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र और देवास विधानसभा क्षेत्र के लिए हो रहे उपचुनाव में अब दिग्गज नेता अपनी ताकत झोंकने की तैयारी कर चुके हैं. कांग्रेस का पूरा जोर रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र पर है, तो भाजपा भी इसी क्षेत्र मे अपनी पूरी ताकत लगा रही है. कांग्रेस के दिग्गजों के दौरों को लेकर लगाए जा रहे कयासों का दौर अब शांत हो गया है. कल शनिवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव प्रचार की शुरुआत करने रतलाम पहुंच रहे हैं. उनके बाद कांग्रेस नेता संजय निरुपम 15 नवंबर को पहुंचेंगे और वहीं पर डेरा जमाए रहेंगे. इसके बाद 16 नवंबर को कमलानाथ का रतलाम के अलावा देवास दौरा तय है. वहीं, दिग्विजयसिंह के 18 एवं 19 दो दिन तक इन दोनों क्षेत्रों में सभाएं लेने की बात कही जा रही है. इसके अलावा राजस्थान की सीमा से सटे इस संसदीय क्षेत्र में सचिन पायलेट सभाएं लेंगे. कांग्रेस पूरी ताकत यहां पर राहुल गांधी की सभा के लिए लगा रही है. हालांकि राहुल गांधी की सभा होगी या नहीं इस बारे में कांग्रेस नेता मौन हैं. कांग्रेस नेताओं को कहना है कि जल्द ही दिल्ली से इसकी जानकारी मिल जाएगी. दूसरी ओर, भाजपा ने एक बार फिर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पर भरोसा जताया है. भाजपा संगठन पूरे संसदीय क्षेत्र के अलावा देवास विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री की 50 से ज्यादा सभाएं कराने की तैयारी कर चुका है. इसके अलावा केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की सभाएं लगातार हो रही हैं. उधर, संगठन के नेता लगातार कार्यकर्तासम्मेलन कर कार्यकर्ताओं को संगठित करते हुए भाजपा के पक्ष में घर-घर पहुंचकर माहौल बनाने की बात कह रहे हैं. भाजपा का पूरा संगठन देवास के बजाए रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में अपनी ताकत लगा रहा है. भाजपा किसी भी तरह से इस सीट पर फतह चाहती है. यही वजह है कि रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में संगठन ने भाजपा के स्टार प्रचारक के रूप में मुख्यमंत्री पर ही भरोसा जताया है.
 चिंता बने पंचायत प्रतिनिधि 
भाजपा के लिए रतलाम-झाबुआ संसदीय में कार्यकर्ताओं की गुटबाजी के बाद अब पंचायत प्रतिनिधियों की एकजुटता और उनके द्वारा गांव-गांव पहुंचकर भाजपा के खिलाफ काम करने की बात चिंता बन गई है. पंचायत प्रतिनिधि भी इस क्षेत्र में कल 14 नवंबर से सक्रिय हो रहे हैं. इसके लिए आज से ही वहां पर पंचायत प्रतिनिधियों पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है. पंचायत प्रतिनिधियों के नेता डी.पी.धाकड. और अभय मिश्रा दोनों ही आज रतलाम में रहे. उन्होंने भविष्य की रणनीति बनाने के लिए कल से सक्रियता दिखाने की बात कही. धाकड. का कहना है कि कल से पंचायत प्रतिनिधि पूरे संसदीय क्षेत्र में सक्रिय होकर भाजपा के खिलाफ प्रचार का काम करेंगे. उन्होंने बताया कि कल से गांव-गांव में पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा नुक्कड. सभाएं ली जाएंगी. इन सभाओं में यह बताया जाएगा कि भोपाल में पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा जब अपने अधिकार की मांग की जा रही थी तब यह सरकार उन पर किस तरह लाठियां भांज रही थी. भोपाल में आंदोलन को कुचलने वाली तस्वीरों को पंचायत प्रतिनिधि गांव-गांव पहुंचकर बताएंगे.

रविवार, 14 जून 2015

डेरा डालने लगे नेता

गरोठ विधानसभा उपचुनाव को लेकर भाजपा के नेताओं ने भीतरघात को भांप कर डेरा डालना शुरु कर दिया है. यहां पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है. वहीं कांग्रेस नेता भी अब सक्रियता दिखाने की तैयारी कर रहे हैं. सोमवार से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव वहां डेरा डालेंगे. यादव के अलावा प्रदेश कांग्रेस प्रभारी मोहन प्रकाश भी आज गरोठ जाने के लिए भोपाल पहुंचे हैं. गरोठ विधानसभा उपचुनाव भाजपा के लिए चुनौती बन गया है. विशेषकर यहां पर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के बाद जब संघ और संगठन के कुछ कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी खफा नजर आए तो संगठन ने यहां पर पूरी ताकत लगानी शुरु कर दी है. फिलहाल डैमेज कंट्रोल करने के लिए नेताओं ने प्रयास शुरु कर दिए हैं. भाजपा नेताओं ने गरोठ पहुंचकर सभाएं लेने के अलावा कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क भी शुरु कर दिया है. खुद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान गरोठ पहुंचे हैं. चौहान के अलावा प्रदेश संगठन मंत्री अरविंद मेनन एवं भाजपा नेता तपन भौमिक, जगदीश देवड़ा, कैलाश चावला के अलावा मालवा के नेताओं ने गरोठ पहुंचना शुरु कर दिया है. ये नेता अभी कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय पदाधिकारियों से संपर्क कर उन्हें पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार अभियान में भाजपा प्रत्याशी चंदरसिंह सिसोदिया के समर्थन में मैदान में उतरने को कह रहे हैं. भीतरघात की स्थिति को देखने के बाद इन नेताओं ने एकजुटता दिखाते हुए स्थानीय पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को यह कहना शुरु कर दिया है कि संगठन द्वारा घोषित प्रत्याशी के पक्ष में पूरी ताकत हर कार्यकर्ता को लगानी है. दूसरी ओर कांग्रेस ने भी यहां पर चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत तो कर दी है. प्रदेश कांग्रेस की ओर से अभी कोई बड़ा नेता तो वहां कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में चुनावी माहौल बनाने नहीं पहुंचा है, मगर स्थानीय स्तर पर सुभाष सोजतिया की टीम सक्रियता बनाए हुए हैं. सोमवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव खुद अपनी टीम के साथ गरोठ पहुंच रहे हैं. वह अब चुनाव प्रचार के अंतिम समय तक वहां रहकर सिसोदिया के पक्ष में माहौल बनाएंगे. वहीं प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी मोहन प्रकाश भी आज भोपाल पहुंच गए. वे कल सीहोर होते हुए गरोठ पहुंचेंगे. गरोठ में चुनाव प्रचार में अब तेज आने लगी है. साथ ही दोनों दलों ने अब मैदानी जमावट शुरु कर दी है. बड़े नेताओं ने पहुंचकर चुनावी माहौल को गति देने और कार्यकर्ताओं को संगठित होकर चुनाव प्रचार में जुटने की बात कहनी शुरु कर दी है. भाजपा को यहां पर अपने ही दल के भीतरघातियों से भय है, तो कांग्रेस इस बार यहां पूरी ताकत से मैदान में उतरकर बहोरीबंद में मिली विजय के बाद फिर से खाता खोलने की तैयारी कर रही है. आठ प्रत्याशी मैदान में गरोठ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों सहित आठ प्रत्याशी मैदान में हैं. नाम वापसी के बाद यहां पर छह निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में जमे हुए हैं. छोटे दलों बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी के अलावा अन्य दलों ने उपचुनाव से दूरी बनाने का पहले ही फैसला कर लिया है. इस वजह से इन दलों के प्रत्याशी मैदान में नहीं है. छह निर्दलीय प्रत्याशी जो मैदान में है, उनमें से एक भी ऐसा प्रत्याशी नहीं है, जो भाजपा या फिर कांग्रेस प्रत्याशी की जीत-हार में मुसीबत खड़ी कर सके.

शुक्रवार, 12 जून 2015

भीतरघात से डरी भाजपा

मध्यप्रदेश के गरोठ विधानसभा क्षेत्र के लिए हो रहे उपचुनाव में भाजपा को एक बार फिर भीतरघात का डर सताने लगा है. भाजपा ने इसके लिए अभी से डेमेज कंट्रोल करना शुरु कर दिया है. टिकट से वंचित दावेदारों को पदों का प्रलोभन देकर शांत करने की कवायद संगठन ने शुरु कर दी है. गरोठ विधानसभा क्षेत्र में हो रहे उपचुनाव को लेकर नामांकन भरने के बाद से भाजपा संगठन ज्यादा चिंतित नजर आने लगा है. संगठन विशेषकर प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की यहां पर प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है. संघ के देवीलाल धाकड़ का टिकट काटना उनकी चिंता का प्रमुख कारण है. चौहान ने नामांकन भरने के बाद जब वहां पर कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों को गुटों में बंटा देखा तो उनकी यह चिंता कुछ ज्यादा ही बढ़Þ गई. भीतरघात ज्यादा न बढ़Þे इसके लिए उन्होंने गुरुवार की रात से ही प्रयास भी शुरु कर दिए. सबसे पहले उन्होंने दिवंगत विधायक राजेश यादव के पुत्र विनीत से चर्चा की और उनकी नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया. नाराज विनीत को अध्यक्ष की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बना दिया जाएगा. फिलहाल वे नाराजगी को छोड़कर संगठन के घोषित प्रत्याशी के पक्ष में काम करें. विनीत के अलावा प्रदेश अध्यक्ष ने संघ से जुड़े और टिकट के प्रमुख दावेदार देवीलाल धाकड़ गुट से जुड़े लोगों से भी चर्चा की. हालांकि धाकड़ समर्थकों की नाराजगी को वे पूरी तरह से अब तक तो दूर नहीं कर पाए हैं, मगर उन्होंने धाकड़ को इस बात का संदेश दे दिए हैं कि चुनाव के बाद उन्हें संगठन कोई अच्छा पद देगा. हालांकि धाकड़ इस मामले में अब तक संगठन को इस बात के लिए आस्वस्त नहीं कर पाए हैं कि वे चंदरसिंह सिसोदिया के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे या नहीं. फिलहाल धाकड़ के साथ बड़ी संख्या में गरोठ विधानसभा क्षेत्र के पदाधिकारी और कार्यकर्ता हैं, जो भाजपा संगठन की चिंता बने हुए हैं. यहां उल्लेखनीय है कि धाकड़ संघ के मंदसौर जिला कार्यवाह थे, जिन्हें संघ ने चुनाव लड़ने के लिए कार्यमुक्त कर दिया था. इसके बाद भी संगठन ने उन्हें टिकट नहीं दिया. इसी तरह से दिवंगत विधायक यादव की पत्नी सीमा यादव का नाम भी चुनाव समिति ने पैनल में रखा था, मगर ऐनवक्त पर प्रदेश अध्यक्ष चौहान ने सिसोदिया पर भरोसा जताया और उनके नाम पर मोहर लगा दी. इसके बाद से धाकड़ के अलावा यादव समर्थक भी नाराज है. इस मामले में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान का कहना है कि गरोठ में संगठन पूरी एकता और ताकत के साथ चुनाव लड़ेगा और भाजपा प्रत्याशी जीतेगा. उन्होंने कहा कि वहां पर ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जो संगठन के लिए चिंता की बात हो. वैसे हर चुनाव के वक्त जिसे टिकट नहीं मिलता है वह नाराज तो होता है, मगर संगठन से दूर नहीं होता. उन्होंने कहा कि अगर कोई नाराज है तो उसकी नाराजगी दूर कर दी जाएगी. अभी तो चुनाव प्रचार की शुरुआत है. सभी लोग मिलकर भाजपा के पक्ष में काम करेंगे. उन्होंने कहा कि भाजपा ने हर चुनाव को गंभीरता से लिया और लड़ा है. गरोठ में भी पूरी गंभीरता के साथ चुनाव लड़ा जाएगा.

संघ की नाराजगी का भय

गरोठ में होने वाले उपचुनाव में भाजपा को प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को लेकर नामांकन भरने के बाद संघ की नाराजगी का भय सताने लगा है. संघ यहां पर यहां अपने जिला कार्यवाह देवीलाल धाकड़ को मैदान में उतारना चाहता था, मगर संगठन ने उसकी मंशा को नजरअंदाज कर दिया और चंदरसिंह सिसोदिया को टिकट दिया. हालांकि भाजपा जीत के प्रति आश्वस्त है और सिसोदिया को भी संघ का कार्यकर्ता बता रही है. मगर अंदरुनि कलह भी सामने दिखाई दे रही है. भाजपा के लिए गरोठ उपचुनाव अपनों की नाराजगी से घिरता नजर आ रहा है. यहां पर संघ के धाकड़ को टिकट न दिए जाने से दो गुटों में भाजपा नेता और कार्यकर्ता बंट से गए हैं. इसका नजारा बुधवार को जब घोषित प्रत्याशी सिसोदिया का नामांकन भराने स्वयं मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान वहां पहुंचे तो भाजपा दो गुटों में बंटी नजर आई. नामांकन भरने से लेकर सभा तक संगठन और संघ से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच साफतौर पर दूरी दिखाई. इस बात को संगठन ने भांप भी लिया और वह अब यहां पर कोई भी गलति नहीं करना चाह रहा है. संघ को मनाने के लिए संगठन की ओर से प्रदेश महामंत्री अरविंद मेनन को जिम्मेदारी सौंपने की बात कही जा रही है. मेनन इस मामले में संघ के नाराज पदाधिकारियों को कार्यकर्ताओं को मनाने का प्रयास करें ऐसा संगठन चाहता है, हालांकि अभी मेनन से इस मामले में संगठन की ओर से कोई चर्चा नहीं की गई है. फिलहाल स्वयं मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही इस मामले में आई दूरी को कम करने का प्रयास कर रहे हैं. उपचुनाव की तारीख घोषित होने के बाद से ही संघ ने भाजपा संगठन को इस बात के संकेत दे दिए थे कि संघ के देवीलाल धाकड़ को मैदान में उतारा जाए. इसके बाद संघ ने भाजपा चुनाव समिति की बैठक वाले दिन धाकड़ को जिला कार्यवाह के पद से भी मुक्त कर दिया था, ताकि यह पद उनके प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में आड़े नहीं आए. इसके बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और यहां पर अपनी पसंद के व्यक्ति चंदरसिंह सिसोदिया को प्रत्याशी बनाने की घोषणा कर दी और नामांकन भी भरा दिया. इसके बाद संघ के मंदसौर जिले एवं मालवा के पदाधिकारी खफा से हो गए हैं. ये पदाधिकारी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष द्वारा उठाए गए इस कदम से नाराज हैं, यही वजह है कि गरोठ में नामांकन भरने के साथ ही भाजपा को संघ के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों का साथ नहीं मिल रहा है. यह भाजपा के चिंता खड़ी कर रहा है. वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान यहां पर भाजपा की जीत के प्रति आश्वस्त हैं. उनका कहना है कि ऐसी कोई बात नहीं है कि वहां पर भाजपा दो गुटों में बंटी है और प्रत्याशी चयन को लेकर संघ या वहां के संघ के कार्यकर्ता नाराज हैं.

विकास के भरोसे भाजपा

मध्यप्रदेश के गरोठ विधानसभा उपचुनाव को लेकर गहमा-गहमी शुरु हो गई है. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल यहां पर जीत के गुणा-भाग बैठाने लगे हैं. भाजपा को सरकार के कार्यकाल में हुए विकास पर भरोसा है, तो कांग्रेस यहां पर जाति और वर्ग की राजनीति कर मतदाता को साधने की रणनीति बना रही है. वहीं वरिष्ठ नेताओं को साथ कांग्रेस प्रत्याशी को मिलने की उम्मीद भी बताई जा रही है. गरोठ विधानसभा में आज नामांकन भरने के अंतिम दिन स्थिति साफ हो गई है. यहां पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है. भाजपा ने यहां पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के चेहरे पर एक बार फिर विजय की उम्मीद जताई है. संगठन ने वैसे तो 40 से ज्यादा स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर उसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भी शामिल किया है, मगर पूरा जोर संगठन की ओर से मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पर ही रहेगा. संगठन यहां पर उनकी ज्यादा से ज्यादा सभाएं कराकर विजय का रथ जारी रखना चाह रहा है. बहोरीबंद उपचुनाव में हार के बाद संगठन ने अब फैसला किया है कि गरोठ में भी कांग्रेस के बढ़Þते उत्साह को देखते हुए मुख्यमंत्री को ही चुनावी कमान सौंपी जाए. आज भी मुख्यमंत्री ने भाजपा प्रत्याशी चंदर सिंह का नामांकन भरवाया और साथ रहकर रोड शो भी किया. जनता के बीच उन्होंने यह विश्वास दिलाया कि विकास की भाजपा का ध्येय हैं. भाजपा संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने मतदाता के बीच साफ संदेश दिया कि भाजपा विकास के लिए ही चुनाव लड़ रही है. गरोठ का विकास भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में परिणाम आने पर और तेज होगा. उल्लेखनीय है कि भाजपा संगठन ने यहां पर जातिगत आधार पर प्रत्याशी का चयन किया है. गरोठ विधानसभा क्षेत्र में सोंधिया राजपूत समाज के मतदताओं की अधिकता को देख संगठन ने चंदरसिंह को प्रत्याशी बनाया. इसके अलावा उनके अब तक के मैदानी कामों का फायदा और संघ की पृष्ठभूमि का फायदा मिलने की उम्मीद भाजपा को है. इन सबके अलावा भाजपा को यहां पर विश्वास है कि विकास के कामों के आधार पर ही उसकी विजय तय है. वहीं कांग्रेस यहां पर वर्ग और जाति का सहारा ले रही है. कांग्रेस द्वारा पूर्व मंत्री और चार बार चुनाव जीत चुके सुभाष सोजतिया को मैदान में उतार यह संदेश दिया है कि जैन समाज का मतदाता उसके प्रत्याशी के साथ जाएगा. गरोठ विधानसभा में सोंधिया राजपूत और जैन समाज के मतदाताओं की संख्या ज्यादा है. जैन समाज के मतदाता सोंधिया समाज से ज्यादा बताए जाते हैं. जैन समाज के मतदाताओं के बीच सोजतिया की पैठ को लेकर कांग्रेस आश्वस्त है कि वह बहोरीबंद विधानसभा क्षेत्र में जिस तरह से उसके पक्ष में परिणाम आए थे, ठीक उसी तरह का परिणाम यहां भी आएगा. कांग्रेस की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव के हाथ में चुनाव की कमान रहेगी. वे 15 जून से अपनी टीम के साथ गरोठ में ही डेरा जमाए रहेंगे. कांग्रेस ने बदलेगी रणनीति गरोठ विधानसभा में कांग्रेस भी अपनी रणनीति बदलकर बूथ स्तर पर सक्रियता दिखाएगी. सूत्रों की माने तो भाजपा के पेज प्रभारी की तर्ज पर कांग्रेस भी यहां पर बूथ स्तर पर प्रभारी बनाकर बूथ प्रभारी को 20 से 25 मतदाताओं की जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी कर रही है.बूथ प्रभारी के ऊपर कांग्रेस सेक्टर प्रभारी बनाएगी, जो इनकी मॉनीटरिंग करेगा. साथ ही हर बूथ की जानकारी कांग्रेस पदाधिकारियों को देता रहेगा. यहां उल्लेखनीय है कि भाजपा ने पिछला विधानसभा चुनाव और उसके बाद लोकसभा चुनाव पेज प्रभारी बनाकर लड़ा था. उसे इस मामले में सफलता भी मिली थी. इसके बाद भाजपा ने महाराष्ट्र, दिल्ली और हरियाणा विधानसभा के चुनाव में भी इस प्रयोग को अपनाया जहां उसे सफलता मिली थी.

परिवारवाद से दूर हुई भाजपा

गरोठ में होने जा रहे उपचुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने काफी मंथन के बाद मैदान में घुटे हुए और क्षेत्र में खासा पहचान वाले नेताओं को मैदान में उतारा है. भाजपा ने बहोरीबंद उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद यहां पर परिवार से दूरी बनाई है. वहीं कांग्रेस ने पूर्व मंत्री और चार मर्तबा चुनाव जीत चुके सुभाष सोजतिया को यहां मैदान में उतारा है. मंदसौर जिले के गरोठ विधानसभा के विधायक स्वर्गीय राजेश यादव के निधन के बाद यह सीट रिक्त थी. यहां पर 27 जून को मतदान होना है. बुधवार को नामांकन का अंतिम दिन होने से एक दिन पहले दोनों ही दलों ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी. दोनों दलों ने भाजपा ने जहां संघ की पृष्ठभूमि वाले चंदरसिंह सिसोदिया को मैदान में उतारा है, तो कांग्रेस ने यहां पर पूर्व मंत्री रहे सुभाष सोजतिया पर भरोसा जताया है. दोनों ही नेता जमीन से जुड़े हैं और क्षेत्र के मतदाताआें के बीच खासा पकड़ भी रखते हैं. संघ की पृष्ठभूमि वाले सिसोदिया वर्तमान में भाजपा की मंदसौर जिला इकाई के उपाध्यक्ष है साथ ही गरोठ जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष भी है. वे बीते विधानसभा चुनाव में चुनाव प्रभारी भी रहे. इसके अलावा कई पदों पर वे सांगठनिक पदों पर भी वे रहे हैं. सरपंच पद से लेकर जनपद अध्यक्ष तक का चुनाव उन्होंने लड़ा और जीता भी. इस बार भी प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में उनसे आगे संघ के ही देवीलाल धाकड़ का नाम था. इसके बाद अचानक चुनाव समिति की बैठक वाले दिन संगठन ने तय नामों के पैनल में स्वर्गीय राजेश यादव की पत्नी सीमा यादव का नाम आया था. मगर संगठन ने यहां पर इस बार परिवारवाद से दूरी बनाना बेहतर समझा. इसके पीछे मूल कारण यह रहा कि बहोरीबंद में हुए उपचुनाव में भाजपा ने स्वर्गीय प्रभात पाण्डे के पुत्र को मैदान में उतारा था. भाजपा को यहां पर सदभावना लहर के तहत विजय मिलने की पूरी उम्मीद थी. मगर ऐसा नहीं हुआ. यहां पर भाजपा को करारी हार मिली और सत्ता से बाहर रहते हुए भी कांग्रेस ने यहां पर चुनाव जीता. इस हार को इस बार उपचुनाव में भाजपा ने सबक के रुप में लिया है और जमीन से जुड़े सिसोदिया को उम्मीदवार के रुप में मैदान में उतारा है. वहीं कांग्रेस के लिए गरोठ उपचुनाव एक बार फिर चुनौती के रुप में सामने आया. कांग्रेस के सामने वैसे तो एक दर्जन दावेदार यहां से थे, मगर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव यहां पर पूर्व मंत्री और चार बार चुनाव जीते सुभाष सोजतिया को यहां पर मैदान में उतारना चाहते थे. पूर्व में सिसोदिया चुनाव लड़ने से मना करते रहे, मगर प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं विशेषकर दिग्विजयसिंह के प्रयासों से वे राजी हो गए और कांग्रेस ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया. दोनों ही दल अब अपने प्रत्याशी मैदान में उतार चुके हैं. दोनों प्रत्याशी जमीन से जुड़े हैं और चुनाव लड़ने का भी खासा अनुभव भी है. इस बार दोनों प्रत्याशियों को संगठन पर पूरा भरोसा है कि संगठन पूरी ताकत से उनके पक्ष में मैदान में दिखाई देगा. सोजतिया खुद संगठन का साथ मिलने की स्थिति में यहां से चुनाव लड़ने को तैयार हुए हैं. उन्हें भरोसा है कि सभी वरिष्ठ नेताओं और संगठन यहां पर पूरी ताकत से उनके पक्ष में चुनाव मैदान में उतरकर प्रचार करेगा. छोटे दलों ने बनाई दूरी गरोठ विधानसभा उपचुनाव में इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के बीच सीधा मुकाबला होना तय हो गया है. यहां पर छोटे दलों ने चुनाव मैदान में अपने प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया है. बहुजन समाज पार्टी से सालों से ही प्रदेश में उपचुनाव में प्रत्याशी मैदान में उतारती ही नहीं है. वहीं समाजवादी पार्टी ने भी इस बार चुनाव मैदान में प्रत्याशी न उतारने का फैसला किया है. सपा के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव ने कहा कि हमारा पूरा लक्ष्य अब संगठन को मजबूत करना है. इस कारण हम जिला इकाईयों को सक्रिय कर रहे हैं. उपचुनाव लड़ने से ज्यादा हमारा उद्देश्य संगठन को मजबूती देना है. हम सीधे अब विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे. इसके अलावा जनता दल यू ने भी यहां पर चुनाव लड़ने से दूरी बना ली है. जनता दल यू के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद यादव का कहना है कि उपचुनाव वैसे तो सत्ता के पक्ष में ही जाते रहे हैं. इस वजह से चुनाव मैदान में हम प्रत्याशी नहीं उतारेंगे.

संघर्ष करो, नहीं तो पद छोड़ो

समाजवादी पार्टी ने अब प्रदेश में संगठन को मजबूत करने के लिए संघर्ष करने वाले पदाधिकारियों को ही पद देने का फैसला किया है. जनसमस्याओं को लेकर सड़क पर संघर्ष करने वालों की जानकारी प्रदेश इकाई जुटा रही है. लंबे समय से प्रदेश में शांत दिखाई दे रही समाजवादी पार्टी की प्रदेश इकाई में अब बदलाव के आसार नजर आ रहे हैं. पार्टी ने तय किया है कि कार्यकर्ताओं को संगठित कर पार्टी को मजबूत करने वाले पदाधिकारियों की सूची तैयार की जाए. इसके लिए संगठन ने काम शुरु कर दिया है. प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव ने संगठन पदाधिकारियों के अलावा कार्यकर्ताओं एवं जिला इकाई के पदाधिकारियों को इस बात का संदेश दे दिया है कि जो संगठन में काम करेगा, संगठन को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर उन्हें संगठित करेगा, वही पद पर रह पाएगा. यादव ने कहा कि कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सड़क पर उतरना होगा. अगर वे सड़क पर उतरकर संघर्ष नहीं करेंगे तो उन्हें पद छोड़ना होगा. इसके लिए पार्टी निष्क्रिय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की जानकारी जुटा रही है. सपा के प्रदेश अध्यक्ष यादव ने कहा कि संगठन को गति देने के लिए हमने संभागीय सम्मेलनों की शुुरुआत की थी, जो चल रहे हैं. इन सम्मेलनों के दौरान हमें यह देखने को मिला कि हमारी कुछ जिला इकाईयां निष्क्रिय है, इन जिला इकाईयों को सक्रिय करने के लिए हमें अनुशासन का डंडा चलाना पड़ेगा. यादव ने कहा कि इसके लिए हमने तय किया है कि जो कार्यकर्ता और पदाधिकारी सक्रिय रहेंगे साथ ही जो सड़क पर उतरकर कार्यकर्ताओं के साथ संघर्ष करेंगे हम उन्हें ही पद देंगे. जल्द ही प्रदेश में सपा का नया संगठन नजर आएगा. भोपाल से की जिला इकाईयों भंग करने की शुरुआत समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव के निर्देश मिलने के बाद प्रदेश महामंत्री अजहर अली खान ने भोपाल जिला शहर एवं ग्रामीण दोनों ही इकाईयों को भंग कर दिया है. उन्होंने बताया कि इन इकाईयों को इसलिए भंग किया गया, क्योंकि इनमें पदाधिकारी निष्क्रिय थे. एक सप्ताह के अंदर दोनों ही इकाईयों में जिला अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों की नियुक्ति कर दी जाएगी. उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष द्वारा दिए निर्देश के तहत अन्य जिला इकाईयों की भी जानकारी जुटाई जा रही हैं, जो निष्क्रिय हैं. जल्द ही उन पर भी कार्रवाई की जाएगी.

शुक्रवार, 29 मई 2015

तो अपनाएंगे इस्लाम धर्म

मध्यप्रदेश के औकारेश्वर ज्योर्तिलिंग पर पर्वकाल के वक्त जलाभिषेक करने का विवाद इतना बढ़Þा कि पंडे और पुजारी आमने-सामने हो गए. पंडे और पुजारियों की नाराजगी दूर करना प्रशासन और ट्रस्ट के लिए परेशानी बन गया. पंडों ने जहां सात दिन में मांग पूरी न होने पर इस्लाम धर्म अपनाने की चेतावनी दी है, वहीं पुजारियों ने इसे हिन्दू धर्म के नाम पर कलंक बताते हुए कहा कि ये ट्रस्ट और प्रशासन को दबाव में लाने का प्रयास है. औकारेंश्वर ज्योर्तिलिंग पर पर्वकाल के दौरान प्रशासन द्वारा जलाभिषेकर, बिल्वपत्र आदि चढ़Þाने को की बंदिश लगाने को लेकर वहां पर पंडे खण्डवा जिला प्रशासन और ट्रस्ट से खफा हो गए हैं. पंडों ने जिला प्रशासन को एक ज्ञापन देकर कहा है कि उन्हें प्रतिदिन जलाभिषेक करने दिया जाए और बिल्वपत्र एवं फूल ज्योतिर्लिंग पर चढ़Þाने की अनुमति दी जाए.पंडों ने इसे लेकर गुरुवार को विरोध स्वरुप धरना भी दिया. साथ ही यह धमकी भी दे डाली की अगर जिला प्रशासन सात दिनों में उनकी मांग को पूरा नहीं करता है तो वे इस्लाम धर्म अपना लेंगे. पंडों की इस धमकी के बाद जिला प्रशासन चिंता में आ गया है. इसके साथ ही पुजारियों ने भी मोर्चा खोल दिया है. पुजारियों को कहना है कि पंडों की यह मांग अनुचित है. उन्हें मंदिर परिसर में बैठकर पूजन की अनुमति है, उस पर कोई रोक नहीं लगी है. पुजारियों ने पंडों को हिन्दू धर्म के नाम पर छल करने वाला तक कह दिया. किसने क्या कहा * खण्डवा कलेक्टर महेश अग्रवाल ने इस बात को नकार दिया कि वहां पर जिला प्रशासन ने ऐसी कोई रोक लगाई है. महापर्वों के दौरान भीड़ को देखते हुए इस तरह की रोक लगाई जाती रही है. अगर मंदिर प्रशासन याने ट्रस्ट ने रोक लगाई है तो उनकी जानकारी में नहीं है. उन्होंने कहा कि पंडों ने धरना दिया इस बात की जानकारी मिली है. जल्द ही विवाद समाप्त करने का प्रयास करेंगे. * औंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के प्रबंध ट्रस्टी राव देवेन्द्र सिंह ने कहा कि त्यौहार विशेष पर जब भीड़ रहती है तब इस तरह की व्यवस्था की जाती है. यह व्यवस्था आज से नहीं पूर्व से जारी है. पंडे चाहते हैं कि वे इस दौरान भी अंदर ज्योतिर्लिंग के समीप पहुंचकर पूजा-अर्चना कराएं. यह संभव नहीं है. क्योंकि ज्योतिर्लिंग जहां स्थापित है वहां ज्यादा स्थान ही नहीं है. * औकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के सायंकाल के समय के पुजारी डंडेश्वर दीक्षित का कहना है कि पंडे जिला प्रसाशन और ट्रस्ट को दबाव में लेकर मंदिर परिसर में प्रवेश कर श्रद्धालुओं से पैसा कमाने के लिए ऐसा कर रहे हैं. उनका कहना है कि हिन्दू होने के नाम पर ये कलंक हैं. अगर इस्लाम अपनाना है तो अपनाएं, मगर पूजा-पाठ और धर्म के नाम पर दबाव न बनाएं. * श्री तीर्थ पंडा संघ के अध्यक्ष ब्रह्मानंद शर्मा का कहना है हमने अपनी मांग प्रशासन को बता दी है. उम्मीद है जल्द ही नतीजा निकलेगा. नहीं तो हम सात दिन बाद अपने चेतावनी पर अमल करेंगे. उन्होंने बताया कि औंकारेश्वर में करीब साढ़Þे तीन सौ पंडे हैं.

भाजपा से आगे निकले मोदी

कभी पंडित दीनदयाल उपाध्याय और श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बाद कुशाभाऊ ठाकरे, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी को मार्गदर्शक मानकर आगे बढ़Þने वाली भाजपा आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से काफी पीछे नजर आ रही है. पार्टी द्वारा केन्द्र की मोदी सरकार के एक साल के कामकाज में भाजपा और एनडीए कहीं दिखाई नहीं दे रहा है. दिखाई दे रहे हैं तो केवल मोदी, वो भी सबसे आगे. कभी संगठन को सर्वोपरी मानने वाली भाजपा में आज साफ दिखाई दे रहा है कि राजनीति में करिश्मा संगठन का नहीं, व्यक्ति का चलता है. भाजपा द्वारा मोदी सरकार के एक साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाने के लिए देशभर में भाजपा सभाएं, रैली और प्रदर्शनियां कर सिर्फ एक बात का गुणगान कर रही है कि मोदी सरकार ने क्या किया. भाजपा के लिए आज मोदी आगे हो गए हैं और संगठन पीछे छूट गया है. भाजपा ने शायद इस बात को स्वीकार भी कर लिया है. मोदी सरकार के कामकाज को जनता तक ले जाने के लिए लगाई गई प्रदर्शनियों में इस बात की झलक साफ दिखाई दी. राजधानी भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर लगाई भाजपा द्वारा प्रदर्शनी में मोदी का एक अलग चेहरा दिखाई दिया. इस प्रदर्शनी में लगे एक चित्र में उन्हें ध्यान मुद्रा े योग करते दिखाई दिया है. इस चित्र का शीर्षक दिया गया है ‘माय आइडिया आॅफ इंडिया’. इसी चित्र में नीचे की ओर सबसे छोटे आकार में भाजपा के कमल निशान का चित्र अंकित हैं, मगर उसके ऊपर एक लाइन लिखी गई है ‘सब लोग सुखी हों, सब लोग निरोगी हों.’पूरी प्रदर्शनी में लगाए गए कई चित्रों में सिर्फ मोदी के व्यक्तित्व को ही निखारते हुए दिखाया गया है. उनके प्रधानमंत्रित्वकाल के दौरान बनाई नीतियों का बखान किया गया. हालांकि प्रदर्शनी मध्यप्रदेश की राजधानी में लगाई गई है, इस वजह से तस्वीरों में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान भी उभरे हैं. इतना ही नहीं इस बात भी ध्यान रखा गया है कि मोदी के उन भाषणों के हिस्सों को प्रदर्शनी में दिखाया गया है जो मध्यप्रदेश की तरक्की का जिक्र करते हुए दिखाई देते हैं. कुल मिलाकर पूरी प्रदर्शनी में अगर देखा जाए तो मोदी के व्यक्ति को कुछ इस तरह उंगेरा गया है कि भाजपा से वे काफी आगे निकल गए हैं. इतना हीं नहीं भाजपा संगठन और एनडीए का इस प्रदर्शनी में कहीं कोई उल्लेख नहीं नजर नहीं आया है. मार्गदर्शकों को भी भुला दिया भाजपा द्वारा प्रदर्शनी में जो भी कुछ दिखाया गया है वह वर्तमान में व्यक्ति केन्द्रित नजर आ रहा है. यहां तक की संगठन अपने मार्गदर्शकों पंडित दीनदयाल उपाध्याय, श्यामाप्रसाद मुखर्जी, कुशाभाऊ ठाकरे, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी तक को भुला बैठी है. भाजपा ने इस प्रदर्शनी में न तो इन व्यक्तियों का जिक्र किया है और न ही इनके दिखाए मार्ग पर आगे बढ़Þकर केन्द्र में सरकार बनाने की बात को बताया है. इतना हीं नहीं संगठन ने एनडीए का भी कहीं कोई जिक्र नहीं किया है. पूरी प्रदर्शनी में मोदी सबसे आगे हैं.