कांग्रेस नये साल में बदलेगी डेढ़ दर्जन से ज्यादा जिला अध्यक्ष
प्रदेश कांग्रेस अब जिला अध्यक्षों के चार माह के काम काज का आकलन करेगी. यह आकलन ही यह बताएगा कि व्यक्ति पद पर बना रहेगा या नहीं. इस आकलन की रिपोर्ट प्रदेश प्रभारी मोहन प्रकाश के अलावा प्रदेश के राष्ट्रीय नेताओं को दी जाएगी, ताकि वे भी यह जान सकेंगे की उनका समर्थक पद पर रहने काबिल है या नहीं.
प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के बाद जब विरोध के स्वर मुखरित हुए तो प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने जिला अध्यक्षों की नियुक्ति का मामला टाल दिया था. इसके बाद जिला अध्यक्षों की बैठक में उन्हें जिला स्तर पर सक्रियता दिखाने को कहा गया था. अब प्रदेश अध्यक्ष नये साल में याने जनवरी माह के पहले सप्ताह में एक बैठक जिला अध्यक्षों की लेने जा रहे हैं. इस बैठक में जिला अध्यक्षों से पिछले चार माह में उनके जिलों किए गए कांग्रेस द्वारा प्रदर्शन और अन्य गतिविधियां जिसमें जिला अध्यक्ष की सक्रियता दिखाई दे, वह रिपोर्ट साथ लाने को कहा जा रहा है. प्रदेश अध्यक्ष ने यह रास्ता इसलिए निकाला है कि ताकि जहां पर उन्हें जिला अध्यक्ष को बदलना है, वे वहां बदलकर किसी दबाव से बच जाएं. जिला अध्यक्ष अपने चार माह के कामकाज की रिपोर्ट बनाने में जुटे हैं. सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष ने यह इसलिए तय किया है कि वे जिला अध्यक्षों की नियुक्ति अगर करते हैं तो विवादों से बच जाएं साथ ही जिला अध्यक्षों के कामकाज का आकलन भी किया जा सके. राजधानी में होने वाली जिला अध्यक्षों की इस बैठक प्रदेश पदाधिकारी जिला अध्यक्षों के कामकाज की रिपोर्ट लेंगे. इसके बाद इस रिपोर्ट को प्रदेश अध्यक्ष यादव ने वरिष्ठ नेताओं खासकर प्रदेश प्रभारी मोहन प्रकाश के अलावा दिग्विजयसिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुरेश पचौरी को भी भेजने की रणनीति तय की है. जिला अध्यक्षों के इस लेखा-जोखा की रिपोर्ट तैयार कराने के पीछे प्रदेश कांग्रेस का मकसद साफ है कि जिला इकाईयों को और अधिक सक्रिय किया जाए साथ ही जहां पर निष्क्रिय जिला अध्यक्ष हंै उन्हें बदला जाए.
बच जाएंगे वरिष्ठों के दबाव से
प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव जिन जिला अध्यक्षों को बदलना चाहते हैं, मगर वहां पर दिग्गज नेताओं के कारण वे नहीं बदल पा रहे हैं. इस स्थिति से बचने के लिए उन्होंने यह रास्ता निकाला है. जिला अध्यक्षों को लेखा-जोखा भी वे इसलिए वरिष्ठ नेताओं को भेजकर यह दिखाना चाहते हैं कि आपके समर्थक नेता जिले में कितने सक्रिय हैं. सूत्रों की माने तो इस रिपोर्ट के साथ वे उन जिलों के जिला अध्यक्षों की जानकारी भी वरिष्ठों देंगे, जहां से उनकी शिकायतें आई हैं.
डेढ़ दर्जन से ज्यादा जिलों में बदले जाएंगे अध्यक्ष
प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के साथ ही यादव ने इस बात के संकेत दिए थे कि वे वर्तमान जिला अध्यक्षों में से करीब दो दर्जन जिला अध्यक्षों को बदलना चाहते हैं, अगर उस वक्त विरोध न होता तो वे अध्यक्षों की नियुक्ति कर देते, मगर विरोध के कारण यह सूची अटक गई है. इसके बाद यादव ने अब फिर नये साल में जिला अध्यक्षों को बदलने का मन बनाया है, मगर इस बार वे पहले जिला अध्यक्षों के कामकाज का लेखा-जोखा देंखेंगे. इसी कामकाज के आधार पर ही यह तय होगा कि वर्तमान जिला अध्यक्ष बने रहेगा या नहीं. फिलहाल इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, राजगढ़, सीहोर, होशंगाबाद, विदिशा, उज्जैन सहित डेढ़Þ दर्जन जिला अध्यक्षों को बदलने की तैयारी यादव कर चुके हैं.