कांग्रेस को युवा पीढ़ी का सहारा, भाजपा संगठन के भरोसे लक्ष्य पाने का कर रही दावा
भोपाल। प्रदेश में आज चार चरणों के तहत सभी 29 सीटों के लिए मतदान हो गया। अब भाजपा और कांग्रेस को चार जून को आने वाले चुनाव परिणाम का इंतजार है। दोनों ही दल अपनी-अपनी जीत को लेकर दावे कर रहे हैं। कांग्रेस इस बार युवा टीम के भरोसे जीत के लिए संजीवनी की तलाश कर रही है। वहीं भाजपा ने अभी से अपने लक्ष्य सभी 29 सीटों पर जीत को लेकर दावा करना ष्शुरू कर दिया है। अब यह तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा कि कौन कितना सफल हो पाया है।
विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद से लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ने पीढ़ी परिवर्तन कर युवा टीम को मौका देकर लोकसभा चुनाव लड़ने की रणनीति तय की थी। इसके चलते पुराने नेताओं की नाराजगी भी सामने आए, मगर कांग्रेस का केन्द्रीय नेतृत्व अपनी बात पर अडिग रहा। चुनाव की तारीख घोशित होने और आचार संहिता लगने के साथ ही भाजपा ने कांग्रेस को झटके भी दिए। ये झटके कांग्रेस नेताओं द्वारा लगातार दल बदलने को लेकर रहे। इस दौरान विधायक, महापौर और कई बड़े नेता भाजपा में चले गए। मगर कांग्रेस का युवा नेतृत्व मैदान में डटा रहा। इस नेतृत्व को राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा और पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरूण यादव का ही साथ मिला। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह छिंदवाड़ा और राजगढ़ में ही कैद रहे, इसके चलते चुनाव प्रचार की कमान भी इन्हीं के पास रही। कांग्रेस की इस युवा पीढ़ी ने माहौल बनाने में कोई कसर भी नहीं छोड़ी। मगर पार्टी छोड़ने वाले नेताओं के आरोपों से भी ये घिरे रहे। इन नेताओं ने हार तो नहीं मानी, मगर अब जब सभी सीटों पर मतदान हो गया तो इन्हें अब जीत के लिए संजीवनी की आस है। ये नेता फिलहाल तो प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति को मजबूत मान रहे हैं और पिछले परिणाम से ज्यादा अच्छे परिणाम की उम्मीद लगा रहे हैं। इन नेताओं को जीत के लिए कौन सी संजीवनी मिली है, यह तो पता नहीं, मगर इन्हें भरोसा है कि कांग्रेस इस बार प्रदेश में भाजपा को सभी 29 सीटों पर जीत तो हासिल नहीं होने दे रही है।
भाजपा अपने मिशन को पूरा करने में जुटी रही
चौथे चरण के अंतिम दौर तक भाजपा का लक्ष्य साफ रहा। भाजपा ने प्रदेश को कांग्रेस मुक्त करने का नारा देते हुए सभी 29 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था। इस लक्ष्य को पाने के लिए उसने हर संभव वह काम किया जो भाजपा को करना था। न्यू ज्वाइनिंग टोली के सहारे एक-एक कर कई कांग्रेस के दिग्गजों को भाजपा में लाकर कांग्रेस के सामने अस्तित्व की लड़ाई खड़ी कर दी। कांग्रेस नेताओं ने भी भाजपा में जाकर कांग्रेस के खिलाफ काम किया। इससे भाजपा खुश भी नजर आई। चौथे चरण के मतदान होने के साथ एक बार फिर भाजपा नेताओं ने इस बात को दोहराते हुए दावा किया है कि वह इस बार सभी 29 सीटें जीत रही है। अब देखना है कि चुनाव परिणाम में उसका दावा कितना खरा उतरता है।
विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद से लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ने पीढ़ी परिवर्तन कर युवा टीम को मौका देकर लोकसभा चुनाव लड़ने की रणनीति तय की थी। इसके चलते पुराने नेताओं की नाराजगी भी सामने आए, मगर कांग्रेस का केन्द्रीय नेतृत्व अपनी बात पर अडिग रहा। चुनाव की तारीख घोशित होने और आचार संहिता लगने के साथ ही भाजपा ने कांग्रेस को झटके भी दिए। ये झटके कांग्रेस नेताओं द्वारा लगातार दल बदलने को लेकर रहे। इस दौरान विधायक, महापौर और कई बड़े नेता भाजपा में चले गए। मगर कांग्रेस का युवा नेतृत्व मैदान में डटा रहा। इस नेतृत्व को राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा और पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरूण यादव का ही साथ मिला। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह छिंदवाड़ा और राजगढ़ में ही कैद रहे, इसके चलते चुनाव प्रचार की कमान भी इन्हीं के पास रही। कांग्रेस की इस युवा पीढ़ी ने माहौल बनाने में कोई कसर भी नहीं छोड़ी। मगर पार्टी छोड़ने वाले नेताओं के आरोपों से भी ये घिरे रहे। इन नेताओं ने हार तो नहीं मानी, मगर अब जब सभी सीटों पर मतदान हो गया तो इन्हें अब जीत के लिए संजीवनी की आस है। ये नेता फिलहाल तो प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति को मजबूत मान रहे हैं और पिछले परिणाम से ज्यादा अच्छे परिणाम की उम्मीद लगा रहे हैं। इन नेताओं को जीत के लिए कौन सी संजीवनी मिली है, यह तो पता नहीं, मगर इन्हें भरोसा है कि कांग्रेस इस बार प्रदेश में भाजपा को सभी 29 सीटों पर जीत तो हासिल नहीं होने दे रही है।
भाजपा अपने मिशन को पूरा करने में जुटी रही
चौथे चरण के अंतिम दौर तक भाजपा का लक्ष्य साफ रहा। भाजपा ने प्रदेश को कांग्रेस मुक्त करने का नारा देते हुए सभी 29 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था। इस लक्ष्य को पाने के लिए उसने हर संभव वह काम किया जो भाजपा को करना था। न्यू ज्वाइनिंग टोली के सहारे एक-एक कर कई कांग्रेस के दिग्गजों को भाजपा में लाकर कांग्रेस के सामने अस्तित्व की लड़ाई खड़ी कर दी। कांग्रेस नेताओं ने भी भाजपा में जाकर कांग्रेस के खिलाफ काम किया। इससे भाजपा खुश भी नजर आई। चौथे चरण के मतदान होने के साथ एक बार फिर भाजपा नेताओं ने इस बात को दोहराते हुए दावा किया है कि वह इस बार सभी 29 सीटें जीत रही है। अब देखना है कि चुनाव परिणाम में उसका दावा कितना खरा उतरता है।

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