रविवार, 4 नवंबर 2018

शिवराज किसान पुत्र को किसानों पर क्यों चली गोलियां: संजय सिंह

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान पर आज उनके साले संजय सिंह ने जमकर हमला बोला. संजय ने कहा कि जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपने आपको किसान पुत्र कहते हैं तो राज्य में किसान आंदोलन क्यों हुआ, किसानों पर गोलियां क्यों चली.
संजय सिंह दिल्ली में शनिवार को कांग्रेस की सदस्यता लेने के बाद आज राजधानी पहुंच और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय जाकर वरिष्ठ नेताओं से उन्होंने मुलाकात की. संजय सिंह जब कांग्रेस कार्यालय पहुंचे तो वहां उनका नेताओं ने स्वागत किया. इस दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए संजय सिंह ने अपने जीजा और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि जब शिवराज सिंह खुद किसान पुत्र है, तो राज्य में किसानों पर गोलियां क्यों चली. उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन की जररुत किसानों को क्यों पड़ी. संजय सरकार द्वारा चलाई जा रही भावांतर योजना और मंदसौर गोलीकांड के अलावा संबल योजना पर भी हमला सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन योजनाओं की ात कहती है, मगर अब तो लोग भी जान गए हैं कि ये योजनाएं केवल वोट के लिए बनाई गई हैं. 
संजय ने बताई चुनाव की तैयारियां
महाराष्ट्र के गोदिया के रहने वाले संजय सिंह ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचकर नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी चकित किया. उन्होंने मीडिया के एक सवाल का जवाब देते हुए बताया कि वे अपने क्षेत्र में चुनावी तैयारी को लेकर पहले से ही सक्रिय हैं. उन्होंने बताया कि क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए वे कार्य कर रहे हैं. जब उन्होंने अपने क्षेत्र वारासिवनी विधानसभा के 150 गांवों के नाम बोलाना शुरु किए तो सभी लोग हतप्रभ रह गए. उन्होंने बिना कागज का सहारा लिए गांवों का नाम लिया और बताया कि इन गांवों में वे लंबे समय से सक्रिय हैं. 
वारासिवनी से मैदान में उतार सकती है कांग्रेस
संजय को कांग्रेस बालाघाट जिले के वारासिवनी विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतार सकती है. महाराष्ट्र के गोदिंया के रहने वाले संजय सिंह जब अपने जीजा शिवराज सिंंह चौहान मुख्यमंत्री बने थे तब बालाघाट जिले के इस अंचल में तेजी के साथ सक्रिय हुए थे. यह क्षेत्र उनके प्रभाव वाला माना जाता है. 

मनाने वाले ही नाराज, तो रुठों को कौन मनाए

 जिन्हें जिम्मेदारी सौंपी थी वे रहे असफल, अब संघ करेगा नाराजगी दूर
भारतीय जनता पार्टी टिकट वितरण के बाद प्रदेश में नाराज टिकट के दावेदारों और उनके समर्थकों की नाराजगी को दूर करने वालों का टोटा पड़ गया है. भाजपा के वरिष्ठ नेता जिनके भरोसे रुठों को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी जाती रही वे खुद नाराज चल रहे हैं. वहीं जिन्हें टिकट वितरण के पूर्व माहौल को शांत करने की जिम्मेदारी दी गई थी, वे अब तक नाराज लोगों को शांत नहीं कर पा रहे हैं. इसके चलते संगठन की चिंंता बढ़ गई है. मामले को भांपते हुए अब संघ नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की रणनीति कर रहा है. 
मध्यप्रदेश भाजपा में विधानसभा और लोकसभा चुनाव के वक्त नाराज कार्यकर्ताओं और दावेदारों की नाराजगी को दूर करने के लिए कभी कुशाभाऊ ठाकरे जिम्मेदारी संभाला करते थे, उसके बाद सुंदरलाल पटवा और कैलाश जोशी इस काम को अंजाम दिया करते थे. ठाकरे और पटवा के निधन के बाद पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी जाने लगी, मगर वर्तमान में टिकट वितरण के बाद पार्टी के अधिकांश वरिष्ठ नेता या तो खुद दावेदार थे और टिकट से वंचित होने के चलते नाराज है या फिर अपने समर्थकों को टिकट न दिलाने के कारण मौन हैं. इस वजह से संगठन के सामने संकट बना हुआ है कि नाराज दावेदारों और कार्यकर्ताओं को कौन मनाएगा. संगठन को यह भरोसा था कि इस बार कैलाश जोशी को कमान सौंपकर संगठन इस जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएगा, मगर जोशी खुद नाराज हैं. जोशी ने हाल ही में एट्रोसिटी एक्ट को लेकर बयान दिया था कि इस एक्ट के विरोध के चलते पार्टी पर इस बार चुनाव में असर पड़ेगा. साथ ही उन्होंने टिकट को लेकर नाराज लोगों को लेकर कहा कि यह पार्टी जाने, पार्टी तय करती है, मेरे कहने से कुछ थोड़ी होगा. जोशी के इस बयान में उनकी नाराजगी साफ दिखाई दे रही है. जोशी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से निवाड़ी को नया जिला बनाए जाने के बाद से नाराज चल रहे हैं, जोशी को शिवराज सिंह ने वचन दिया था कि प्रदेश में जब भी नया जिला बनाया जाएगा, बागली को जिला बनाने की घोषणा पहले होगी. मगर ऐसा नहीं हुआ. जोशी के अलावा वरिष्ठ नेता हिम्मत कोठारी, बाबूलाल गौर, सरताज सिंह और रघुनंदन शर्मा का नंबर आता है, मगर ये नेता भी इन दिनों नाराज चल रहे हैं. रघुनंद शर्मा की नाराजगी जरुर कुछ कम नजर आती है, मगर उनकी सक्रियता नाराज लोगों को मनाने में फिलहाल कम ही दिखाई दे रही है.
जिन्हें जिम्मेदारी सौंपी वे रहे असफल
टिकट वितरण के दावेदारों की दावेदारी और वर्तमान विधायकों के खिलाफ उठ रहे विरोध के स्वर को भांपते हुए भाजपा संगठन ने अलग-अलग अंचलों में भाजपा नेताओं को रुठों को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी, मगर ये नेता खुद टिकट के लिए उलझे रहे और समय रहते नाराज लोगों की नाराजगी को दूर नहीं कर पाए, इसके चलते हालात आज ऐसे निर्मित हो गए हैं कि भाजपा के लिए रुठों को मनाने में परेशानी हो रही है. पूर्व में संगठन ने बुंदेलखंड में मंत्री भूपेन्द्र सिंह, महाकौशल में प्रहलाद पटेल, मालवा में कैलाश विजयवर्गीय और मध्य क्षेत्र में नरोत्तम मिश्रा को जिम्मेदारी सौंपकर रुठों को मनाने को कहा था, मगर ये सभी नेता प्रत्याशी चयन प्रक्रिया में उलझे रहे  और नाराज लोगों को नहीं मना पाए.
अब तोमर पर भरोसा
भाजपा को एक बार फिर केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर पर भरोसा है कि वे रुठों को मना लेंगे, मगर फिलहाल उन्हें यह जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है. इस बीच संघ ने सक्रियता दिखानी शुरु कर दी है. संघ ने मंडल और बूथ स्तर पर नाराज चल रहे कार्यकर्ताओं की नाराजगी को देख मैदान में उतरने का मन बनाया है. बताया जाता है कि संघ प्रचारक अब नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने जाएंगे. अलग-अलग अंचल में पहुंचने वाले संघ प्रचारक टोलियों में सौ-डेढ़ सौ कार्यकर्ताओं की बैठकें लेंगे और उनकी बातों को सुनेंगे. इसके बाद उन्हें भाजपा के पक्ष में चुनाव के लिए प्रेरित करेंगे. संघ का यह कदम कितना सफल होता है, यह तो कहा नहीं जा सकता.

भाजपा में थम नहीं रहे टिकट को लेकर दावेदारों के बगावती तेवर

सरताज हुए खफा, निर्दलीय चुनाव लड़ने के दिए संकेत, गौर, महदेले भी नाराज
मध्यप्रदेश भाजपा में पहली सूची आने के बाद उठे विरोध के स्वर और मुखर होते जा रहे हैं. टिकट को लेकर वंचित रहे विधायकों के अलावा जिन्हें टिकट कटने की आशंका है, वे लगातार बगावती तेवर दिखा रहे हैं. इन नेताओं में पूर्व मंत्री बाबूलाल गौर, पूर्व मंत्री सरताज सिंह शामिल हैं. सरताज सिंह ने आज टिकट कटने की आशंका के चलते निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में चुनाव लड़ने के संकेत भी दे डाले. सरताज की नाराजगी को देख संगठन ने उन्हें मनाने की कवायद भी शुरु कर दी है. वहीं बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में मैदान में उतारने की बात कही है.
होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा विधानसभा सीट से विधायक सरताज सिंह के टिकट काटने का इशारा संगठन पहले दे चुका है. हालांकि अभी भाजपा ने यहां पर प्रत्याशी घोषित नहीं किया है, मगर सरताज सिंह को इस बात का अंदेशा है कि उन्हें जिस तरह उम्र का हवाला देकर पार्टी से बाहर किया गया, उसी तरह इस बार टिकट से वंचित किया जाएगा. भाजपा की पहली सूची में विधायकों के टिकट कटता देख अब सरताज सिंह ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोला है. आज उन्होंने कहा कि जनता और कार्यकर्ता चाहता है कि वे चुनाव लड़ें, मैं दोनों का सम्मान करुंगा, टिकट न मिलने पर जनता के बीच जाऊंगा और चर्चा के बाद फैसला करुंगा. सरताज ने निर्दलीय चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं. रविवार को जब उनका बयान आया तो भाजपा में हड़कंप मच गया और खनिज निगम के अध्यक्ष शिव चौबे उनके निवास पहुंचे और बंद कमरे में काफी देर चर्चा की. शिव चौबे होशंगाबाद से ही हैं और सरताज सिंह से उनकी घनिष्ठता भी है, मगर इस मामले में सरताज सिंह चौबे की कितनी बात मानते हैं, यह कहना अभी संभव नहीं है.
कृष्णा गौर ने कहा वे लड़ेंगी चुनाव
राजधानी भोपाल के गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधायक बन कर इतिहास रचने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर भी टिकट कटने की आशंका के चलते नाराज चल रहे हैं. उन्होंने शनिवार को अपने निवास पर अपने समर्थकों के साथ बैठक की. गौर ने फिलहाल तो दो दिन का मौन साध रखा है, मगर साफ संकेत दिए हैं कि अगर उनका टिकट कटा और उनकी पुत्रवधू कृष्णा गौर को टिकट नही दिया तो वे भी कोई कदम उठाएंगे. हालांकि गौर ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं, मगर कृष्णा गौर ने साफ तौर पर कहा कि वे किसी भी हालात में गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरेंगी. कयास इस बात के भी लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ टिकट कटने के बाद गौर को कांंग्रेस में लाने का प्रयास कर रहे है. कमलनाथ और गौर की चर्चा भी हुई है, मगर दोनों नेता इस चर्चा को नकार रहे हैं.
कांग्रेस ने कहा सरताज, गौर का है स्वागत
मध्यप्रदेश कांग्रेस की मीडिया सेल की प्रभारी शोभा ओझा ने कहा कि सरताज सिंह और कृष्णा गौर का कांग्रेस में स्वागत हे. टिकट मिलना ना मिलना तो शीर्ष नेतृत्व तय करेगा, मगर प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ कह चुके हैं कि साफ छवि और कांग्रेस की विचारधारा रखने वाले नेताओं का कांग्रेस में स्वागत है.
व्यक्ति ना तो सीट बनाता है और ना ही बिगाड़ता है
 कृष्णा गौर के गोविंदपुरा सीट  को बाबूलाल गौर द्वारा भाजपा की सीट बनाने के बयान  पर पर्यटन निगम के अध्यक्ष तपन भौमिक ने कहा कि व्यक्ति कोई सीट ना तो बनाता है और ना ही बिगाड़ता है. भाजपा की साखा भाजपा के कार्य और भाजपा की सीट है गोविंदपुरा. उन्होंने कहा कि भाजपा गोविंदपुरा से जिसको भी टिकट देगी, वह प्रत्याशी प्रचंड मतों से जीतेगा. कृष्णा गौर के निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात कहने पर उन्होंने कहा कि इसके लिए पार्टी के पदाधिकारी ही तय करेंगे और वे निर्णय लेंगे.
 सिर झुकाकर मानते हैं पार्टी का फैसला
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने बगावत को लेकर कहा कि पार्टी से कोई बड़ा नहीं होगा, पार्टी बड़ी होती है. कृष्णा गौर के बयान पर उन्होंने कहा कि जब तक प्रत्याशी का फैसला नही होता तब तक सभी अपनी बात कह सकते हैं, लेकिन पार्टी के फैसले के बाद सभी को पार्टी का निर्णय सिर झुकाकर मानना पढ़ता है.
कुसुम महदेले मिली सुहास भगत से
मंत्री कुसुम महदेले को भी उम्र का हवाला देकर टिकट काटने की बात कही जा रही है. बाबूलाल गौर और सरताज सिंह के साथ वे भी निर्दलीय मैदान में उतरने की तैयारी कर रही हैं. वैसे उन्होंने अभी मीडिया में या फिर सार्वजनिक रुप से ऐसा कहा नहीं है, मगर उनकी नाराजगी साफ इस बात का संकेत दे रही है. शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की और अपना पक्ष रखा. इसके बाद उन्होंने संगठन मंत्री सुहास भगत से भी मुलाकात कर अपनी बात रखी है और चुनाव लड़ने की बात कही है. पन्ना विधानसभा क्षेत्र जहां से वे चुनाव लड़ी थी, इस सीट पर भाजपा ने अभी प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है.
अनूप मिश्रा भी हैं खफा
सांसद अनूप मिश्रा भी ग्वालियर पूर्व से टिकट की मांग कर रहे थे, मगर भाजपा की पहली सूची में उनका नाम नदारत हैं. मिश्रा ने अपनी दूसरी पसंद भीतरवार विधानसभा क्षेत्र भी भाजपा संगठन को बताया था. मिश्रा को भाजपा की दूसरी सूची का इंतजार है. अगर इस सूची में उनका नाम नहीं आया तो वे भी कोई कदम उठा सकते हैं.

मध्यप्रदेश में दो घंटे कर सकेंगे आतिशबाजी

मध्यप्रदेश मे दीपावली के दिन सिर्फ दो घंटे आतिशबाजी की जा सकेगी. गृह विभाग ने रात 8 से 10 बजे के बीच आतिशबाजी करने का समय तय कर सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का पालन कराया जाए.
गृह विभाग ने प्रदेश के समस्त जिला कलेक्टरों एवं जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं कि दीपावली के दिन आतिशबाजी के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अंतर्गत नियत समय सीमा रात 8 से 10 बजे तक का विशेष रुप से क्रियान्वयन सुनिश्चित करें. गृह विभाग द्वारा दिए निर्देशों में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना, उल्लंघन की दशा में संबंधित थाना प्रभारी को व्यक्तिश: जिम्मेदार माना जाएगा. जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि सभी थाना प्रभारियों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान करें, ताकि आदेश का पालन हो सके और किसी भी दशा में अवमानना की स्थिति निर्मित नहीं हो. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस बारे में जारी किए गए आदेश,निर्देश न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं.

विधायक ने कहा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने रुपए लेकर दिया टिकट

 रतलाम ग्रामीण के विधायक के बाद टीकमगढ़ विधायक ने लगाया टिकट बेचने का आरोप
भाजपा के टीकमगढ़ से विधायक के.के.श्रीवास्तव ने भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा पर आरोप लगाया है कि झा ने करोड़ों रुपए लेकर टिकट की पैरवी की है.
भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद टिकट कटने से नाराज विधायकों द्वारा अब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं पर सीधे तौर पर टिकट बेचने का आरोप लगाया जा रहा है. टीकमगढ़ के विधायक के.के.श्रीवास्तव ने टिकट कटने के बाद नाराज होकर खुलकर यह आरोप लगाया कि टीकमगढ़ में टिकट को लेकर करोड़ों का सौदा हुआ है. उन्होंने कहा कि झा ने रुपए लेकर अपने प्रत्याशी की पैरवी की है. श्रीवास्तव के साथ झा का विरोध करने वालों में पूर्व सहकारी बैंक अध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी,मनीराम तिवारी मोरखा, सीमा श्रीवास्तव भी मौजूूद थे. गौरतलब है कि श्रीवास्तव का टिकट उनके खराब परफारमेंस की बात कहकर संगठन ने काटा दिया है. जिसके चलते वे नाराज हैं.
वहीं इस मामले में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने ेकहा कि श्रीवास्तव का टिकट कट गया है, जिसके चलते वे नाराज है, इस वजह से वे इस तरह की बात कह रहे हैं.
डामर ने भी लगाए आरोप
श्रीवास्तव के पहले रतलाम ग्रामीण के वर्तमान विधायक मथुरालाल डामर ने भी टिकट कटने के बाद डेढ़ करोड़ में टिकट बिकने का आरोप लगाया था. हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया है. डामर ने कहा कि भाजपा ने डेढ़ करोड़ रुपए लेकर दिलीप मकवाना को टिकट बेचा है. डामर और श्रीवास्तव के बयान के बाद भाजपा मेंं खलबली मच गई है. श्रीवास्तव के वीडियो के वायरल होने के बाद भाजप के वरिष्ठ नेता इस मामले में मौन साधे हुए हैं.

गुरुवार, 1 नवंबर 2018

मंत्री ने जताई चुनाव न लड़ने की इच्छा, मुख्यमंत्री को लिखा खत

राज्य के खाद्य एवं उद्यान की प्रसंस्करण राज्यमंत्री सूर्य प्रकाश मीणा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक खत लिखकर इस बार विधानसभा चुनाव न लड़ने की इच्छा जताई है.  
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बुधवार की देर रात लिखे गए खत में उद्यानिकी मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा ने कहा है कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने  पिछले दो चुनावों में प्रत्याशी बनाया था, इसके साथ ही उन्हें भारतीय जनता पार्टी जिला का अध्यक्ष और उसके बाद राज्य सरकार में मंत्री बनाया गया था, लेकिन अब संगठन   की आवश्यकता को देखते हुए इस बार विधानसभा चुनाव  न लड़कर जिले की सभी सीटों पर भाजपा के प्रत्याशियों को  सफलता दिलाने के लिए काम करना चाह रहे हैं
भाजपा की अंदरूनी सूत्रों के अनुसार प्रदेश में इस बार हो रहे विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी अपने खिलाफ  तगड़ी  सत्ता विरोधी लहर महसूस कर रही है इसके चलते ही राज्य में भाजपा के लगभग 60-70 विधायकों के टिकट काटे जाने की संभावना  है. दिल्ली में चल रही भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय चुनाव समिति की बैठक में जब यह संकेत मिलने लगे कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी भी स्थिति उन लोगों को टिकट देने के पक्ष में नहीं है जिनकी हारने की आशंका है, इससे उन विधायकों और मंत्रियों में खलबली मच गई, जिन्हें टिकट कटने का अंदेशा.  उसके तहत बुधवार की देर रात जब  विदिशा जिले के शमशाबाद से विधायक सूर्यप्रकाश मीणा को यह खबर लग गई तो उनका टिकट कटने वाला है तो उन्होंने आनन-फानन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर इस बार चुनाव लड़ने के स्थान पर संगठन के लिए काम करने की इच्छा जताई है. बताया जा रहा है कि एक-दो दिन के अंदर भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशियों की पहली सूची आ जाएगी. इस सूची में ज्यादातर वह नाम होंगे जिन पर कोई विवाद नहीं है और जिनके जीतने को लेकर भाजपा प्रदेश नेतृत्व,संघ और संगठन एक मत है.

सरताज को नाम न भेजने का मलाल, सीताशरण को विक्रम वर्मा का मिला सहारा

मध्यप्रदेश भाजपा में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के दौरान प्रदेश चुनाव समिति के सामने राज्य के कद्दावर और वरिष्ठ नेताओं को सूची में नाम भेजने के लिए मशक्कत करनी पड़ी. इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष डा. सीताशरण शर्मा को वरिष्ठ नेता विक्रम वर्मा का समर्थन मिला और उनका नाम होशंगाबाद से जोड़ दिया गया, मगर सिवनी मालवा से पूर्व केन्द्रीय मंत्री सरताज सिंह अपना नाम दिल्ली नहीं भेज पाए. वहीं रतलाम शहर के भाजपा के पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी भी एक बार फिर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के दौरान आहत नजर आए.
मध्यप्रदेश भाजपा में 70 पार के नेताओं के अलावा अन्य वरिष्ठ  नेताओं को इस बार चयन प्रक्रिया में टिकट के लिए जूझता देखा गया. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर अपने गढ़ गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से एक बार फिर चुनाव मैदान में उतरने के लिए आतुर रहे, मगर प्रदेश चुनाव समिति के सदस्यों ने उनकी कई बार अनदेखी की. गौर फिर भी अड़े रहे, उन्होंने अंत तक अपना दावा नहीं छोड़ा, आखिरकार समिति को गौर एवं उनकी पुत्र वधू कृष्णा गौर का पैनल बनाकर गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से भेजना पड़ा. इसके अलावा उम्र का हवाला देकर मंत्री पद से हटाए सरताज सिंह की भी इस बार भाजपा संगठन में अनदेखी हुई. सरताज सिंह भाजपा प्रदेश कार्यालय भी पहुंचे और अपना दावा सिवनी मालवा से चुनाव लड़ने के लिए किया, मगर उनकी भी अनदेखी ही हुई. सरताज को इस बात का मलाल है कि वे केन्द्र में मंत्री रहे, मगर कभी इस तरह की अनदेखी नहीं की गई. सिवनी मालवा से पूर्व विधायक प्रेमशंकर वर्मा और खुद सरताज सिंह का विरोध करने वाले योगेन्द्र मंडलोई का नाम प्रदेश चुनाव समिति ने दिल्ली भेजा है.
सरताज के अलावा इस बार विधानसभा अध्यक्ष डा. सीताशरण शर्मा को भी टिकट के लिए जूझना पड़ा है. डा. शर्मा को मुख्यमंत्री का आश्वासन ही मिला, मगर प्रदेश चुनाव समिति की ओर से उन्हें किसी तरह का सहयोग नहीं मिला. बाद में डा. शर्मा ने वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की, तब कहीं जाकर विक्रम वर्मा के कहने पर विधानसभा अध्यक्ष का नाम होशंगाबाद से सूची में शामिल किया गया. बताया जाता है कि डा. शर्मा को लेकर इस बार संघ की नाराजगी का सामना करना पड़ा. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर भी उनका विरोध काफी था, जिसके चलते उनकी अनदेखी होती रही. 
कोठारी को भी नहीं मिला सहारा
प्रदेश के पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी को भी इस बार प्रदेश चुनाव समिति ने मौका नहीं दिया. बताया जाता है कि कोठारी खुद प्रदेश कार्यालय पहुंचे थे, मगर वहां पर रतलाम  शहर के वर्तमान विधायक चेतन्य कश्यप से उनकी मुलाकात हुई और फिर चर्चा के दौरान उन्होंने कोठारी को मनाने का प्रयास भी किया. इसके बाद भी कोठारी वरिष्ठ नेताओं से मिले और रतलाम शहर से टिकट की दावेदारी की, मगर उन्हें भी इस बार वरिष्ठता को कोई फायदा नहीं मिला. चयन समिति के सदस्यों ने उम्रदराज नेताओं की इस बार खूब अनदेखी भी की.

भाजपा के सेवानिवृत्त भ्रष्टाचारियों की ऐशगाह है कांग्रेस

 आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह ने भाजपा-कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कांग्रेस को भाजपा के सेवानिवृत्त भ्रष्टाचारियों की ऐशगाह बताया.  
आम आदमी पार्टी कार्यालय में आज पत्रकारों से चर्चा करते हुए राज्यसभा सांसद ने कहा कि  अब मतदान तक मध्य प्रदेश के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में जाकर आम आदमी पार्टी की सरकार बनाने के लिए अपना योगदान देंगे. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के जो हालात हैं, वह यहां की जनता से छुपे नहीं हैं. पिछले 15 सालों में भाजपा और शिवराज सिंह की सरकार ने मध्य प्रदेश को घोटाला प्रदेश के रूप में पहचान दिलाई है. कुपोषण प्रदेश के रूप में पहचान दिलाई है. शिवराज सरकार भ्रष्टाचार में सिर से लेकर पांव तक डूबी हुई है. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की आजादी के बाद का अब तक सबसे बड़ा खूनी घोटाला व्यापमं घोटाला है. इस घोटाले में भाजपा सरकार के शीर्ष नेताओं का नाम प्रमुखता से आया है. बहुत से साक्ष्य सामने आए, लेकिन सीबीआई इनकी थी तो किसी तरह बचाए रखा गया. उन्होंने केहा कि इसमें पत्रकार की मौत हुई, कई नेताओं की मौत हुई, राज्यपाल के बेटे तक की मौत हुई, लेकिन व्यापमं का सच अभी तक सामने नहीं आया है। इसके खिलाफ जो पार्टी संघर्ष कर रही है, वह आम आदमी पार्टी है. 
उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव मैदान में बहरूपिया बनकर निकली है। वह भाजपा के सेवानिवृत्त भ्रष्टाचारियों को नौकरी दे रही है. उन्होंने हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए संजय शर्मा और गुलाब सिंह किरार का जिक्र करते हुए कहा कि खनन घोटाले और व्यापमं में शािमल रहे लोगों को कांग्रेस अब अपने यहां जगह दे रही है, इसलिए कांग्रेस भाजपा के भ्रष्टाचार से नहीं लड़ सकती है. चाहे वह व्यापमं का घोटाला हो, या डंपर घोटाला हो, या फिर ईटेंडरिंग का घोटाला इनसे कांग्रेस नहीं लड़ सकती है. न ही वह प्रदेश के शिक्षा, स्वास्थ्य सड़क को बेहतर बना सकती है, जिस सड़कों को शिवराज सिंह अमरीका से अच्छा बताते हैं। उन्हें कांग्रेस ठीक नहीं कर सकती है, क्योंकि इन दोनों के बीच मिला जुला खेल चल रहा है. कमलनाथ के खिलाफ मोदी जी प्रचार के लिए नहीं जाते हैं, तो शिवराज के खिलाफ कांग्रेस मजबूत प्रत्याशी नहीं देती है. कमलनाथ का नाम जिन कंपनियों से जुड़ा है, उन्हें बड़े बड़े बडे ठेके मध्य प्रदेश में मिले हैं. इन कंपनियों में कमलनाथ और उनके परिवार की कंपनियां शामिल हैं.इसलिए कांग्रेस इस भ्रष्ट घोटालेबाज भाजपा सरकार का कोई विकल्प नहीं है. वह भाजपा से नहीं लड़ सकती है. 

भाजपा से आए नेताओं का कांग्रेस में विरोध

सामूहिक इस्तीफे तक के दे रहे चेतावनी
मध्यप्रदेश में भाजपा के बाद अब कांगे्रस में विरोध तेज हो गया है. कांग्रेस नेताओं को भाजपा से आए नेता रास नहीं आ रहे हैं. इन नेताओं द्वारा कांग्रेस की सदस्यता लेते ही कांग्रेस नेताओं ने मोर्चा खोल दिया, मामले ने तूल इतना पकड़ा कि विधानसभा अध्यक्ष डा. सीताशरण शर्मा के भाई और भाजपा के पूर्व विधायक गिरजाशंकर शर्मा द्वारा कांग्रेस से की दावेदारी के विरोध में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को पत्र लिखकर सामूहिक इस्तीफे तक की चेतावनी दे डाली. 
प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में भाजपा के बाद अब कांग्रेस में विरोध तेज हो गया है. विरोध के स्वर भाजपा से कांग्रेस में शामिल होकर टिकट की मांग करने वाले नेताओं के खिलाफ है. हाल ही में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के मालवा प्रवास के दौरान भाजपा के विधायक संजय शर्मा द्वारा कांग्रेस की सदस्यता लेना कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रास नहीं आई.  तेंदूखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को पत्र लिखकर शर्मा को टिकट न देने की मांग करते हुए कांग्रेस ेसे इस्तीफे तक देने की बात कही है.
संजय शर्मा के अलावा होशंगाबाद जिले में विधानसभा अध्यक्ष डा. सीताशरण शर्मा के भाई और भाजपा के पूर्व विधायक गिरजाशंकर शर्मा का विरोध होशंगाबाद में हो गया है. गिरजाशंकर शर्मा पहले सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र से टिकट की मांग कर रहे थे, बाद में उन्होंने होशंगाबाद विधानसभा क्षेत्र से टिकट की मांग कांग्रेस से कर डाली. यह जानकरी जब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश मीडिया प्रभारी माणक अग्रवाल को लगी तो उन्होंने होशंगाबाद के नेताओं के साथ शर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. शर्मा का विरोध इतना बड़ा कि होशंगाबाद के कांग्रेस नेताओं ने भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और पार्टी आलाकमान राहुल गांधी को पत्र लिखकर सामूहिक इस्तीफा देने की मांग कर डाली. 
वहीं कटनी जिले में भाजपा की पूर्व मंत्री पद्मा शुक्ला को लेकर विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस नेता भी खफा है. कांग्रेस नेताओं ने यहां से पद्मा शुक्ला को टिकट न दिए जाने की मांग की है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर पद्मा शुक्ला को टिकट दिया गया तो कार्यकर्ता घर बैठ जाएंगे. विरोध के स्वर दतिया जिले के पूर्व विधायक कमलापत आर्य के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर भी उठ रहे हैं.
पेराशुट से उतरने वालों को टिकट न देने की याद दिला रहे कार्यकर्ता
 राहुल गांधी जब भोपाल प्रवास पर आए थे, तब उन्होंने पेराशुट से उतरने वाले नेताओं को टिकट न देने की बात कही थी. विरोध करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष यह संदेश दे चुके थे तो प्रदेश संगठन भाजपा और अन्य दलों से आए नेताओं को टिकट देने की सिफारिश क्यों कर रहा है. उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी के इस बयान के बाद जब पद्मा शुक्ला ने कांग्रेस की सदस्यता ली थी, तब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा था कि पार्टी जीतने वाले उम्मीदवार को टिकट देगी.
कांग्रेस ने कहा गुलाब सिंह किरार को नहीं दी सदस्यता
व्यापमं मामले में आरोपी गुलाब सिंह किरार को राहुल गांधी के सामने कांग्रेस की सदस्यता दिलाने वाले कांग्रेस नेता अब किरार से दूरी बना रहे हैं. इन नेताओं ने अब मौन साध लिया है. वहीं कांग्रेस की प्रदेश मीडिया प्रभारी शोभा ओझा ने इस मामले में बयान दिया है कि गुलाब सिंह किरार सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से मिलने आए थे, उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता नहीं ली है. उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने गुलाब सिंह किरार को कांग्रेस में लिए जाने का विरोध किया था. मजे की बात यह है कि गुलाब सिंह किरार को पार्टी सदस्यता देने के बाद भी राहुल गांधी व्यापम के मुद्दे पर शिवराज को घेरते नजर आए. मामला मीडिया में आने के बाद कांग्रेस नेताओं को यह अहसास हुआ कि गुलाब सिंह किरार को लेकर उन्होंने गलती कर दी है. इससे फायदा कम नुकसान ज्यादा हुआ है. खासतौर पर इससे राहुल गांधी की छवि को धक्का लगा है. उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है. इसके बाद उन्होंने गुलाब किरार को लेकर मौन साध लिया.

गौर ने कहा मोदी लहर नहीं, प्रत्याशी अच्छे दिए तो जीतेगी भाजपा

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर  आज फिर बयान देकर सुर्खियों में आ गए. उन्होंने कहा कि अगर भाजपा अच्छे लोगों को टिकट देगी तो चौथी बार सरकार बनाएगी.
भाजपा के उम्रदराज नेता बाबूलाल गौर का यह बयान टिकट कटने की आशंका के तहत देखा जा रहा है. गौर ने कहा कि अगर उन्हें पार्टी टिकट नहीं देगी तो भी वे पार्टी के लिए ही काम करते रहेंगे. वैसे गौर से पहले केन्द्रीय मंत्री उमा भारती ने भी राजधानी में भाजपा के आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की उपस्थिति में यह कहा था कि इस बार का चुनाव कठिन है. उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा था कि 2003 में उमा लहर थी, 2013 में मोदी लहर थी, मगर अब इस चुनाव में कोई लहर नहीं है, इसलिए कार्यकर्ता को खूब मेहनत करनी होगी.
यहां उल्लेखनीय है कि गौर को गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से टिकट नहीं मिलने की बात संगठन द्वारा कही गई है, मगर उन्हें इस बात का आश्वासन है कि अगर उनका टिकट कटा तो उनकी बहू कृष्णा गौर को टिकट मिलेगी. हालांकि गौर फिर भी प्रयासरत हैं.

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव का शंखनाद आज से

मध्यप्रदेश की 15वीं विधानसभा के चुनाव के लिए 2  से 9 नवंबर  तक नाम निर्देशन पत्र प्रात: 11 बजे से अपरान्ह 3 बजे तक रिटर्निंग आफिसर के कार्यालय में प्रस्तुत किए जा सकेंगे. रविवार 4  एवं 7 नवंबर को दीपावली का सार्वजनिक अवकाश होने के कारण नाम निर्देशन पत्र जमा नहीं किए जाएंगे. अभ्यर्थी द्वारा अधिकतम 4 सेट नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकेंगे. नाम निर्देशन पत्र प्रस्तुत करते समय रिटर्निग आफिसर के कार्यालय की  100 मीटर की परिधि में अभ्यर्थी के साथ अधिकतम 3 वाहन और अधिकतम पांच व्यक्तियों (1 + 4) को लाने की अनुमति रहेगी.
विधानसभा निर्वाचन  में प्रत्याशियों के लिए रुपए 10 हजरी (दस हजार) और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए रुपए 5 हजार (पांच हजार) जमानत राशि जमा कराना होगी. फार्म ए. फार्म बी. नाम निर्देशन पत्र जमा किए जाने के अंतिम दिनांक को 3 बजे तक रिटर्निंग आफिसर को दिया जाना चाहिए.  सुप्रीम कोर्ट के 25 सितंबर  के आदेशानुसार शपथ पत्र  देना होगा, जिसमें अभ्यर्थियों को स्वयं पर चल रहे आपराधिक प्रकरण एवं दोषसिद्धि के प्रकरणों की घोषणा एवं प्रकाशन कराए जाने के  संबंध में प्रारूप सी 1, सी 2 एवं सी3 प्रदाय किया जाएगा.
चुनाव खर्च के लिए अलग से खुलावाया जाएगा खाता
निर्वाचन व्यय के लिए प्रत्येक अभ्यर्थी द्वारा पृथक से बैंक खाता खुलवाया जाएगा. बैंक खाता निर्वाचन अभिकर्ता के  साथ संयुक्त रूप से भी खुलवाया जा सकता है. नामांकन पत्र प्रस्तुत करने के तुरंत बाद रिटर्निंग आफिसर के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान लेना आवश्यक हैं. रिटर्निंग आफिसर द्वारा तैयार किए जाने वाले चेकलिस्ट के प्रारूप और दिशा-निर्देशों की पुस्तिका प्रदाय की जाएगी. रिटर्निग अधिकारी द्वारा नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा के समय, अभ्यर्थी, उनके निर्वाचन अभिकर्ता, प्रत्येक अभ्यर्थी का एक प्रस्तावक और प्रत्येक अभ्यर्थी द्वारा लिखित में सम्यक रूप से प्राधिकृत एक और व्यक्ति उपस्थित रह सकता है. रिटर्निंग अधिकारी के द्वारा एक-एक करके नामांकन पत्रों की संवीक्षा की जाएगी तथा पारदर्शिता हेतु संवीक्षा की वीडियाग्राफी भी की जाएगी.
इन कारणों से निरस्त होगा नामांकन
नामांकन पत्रों की अस्वीकृति की जा सकती है, यदि अभ्यर्थी संबंधित विधायिका का सदस्य बनने के लिए विधि में स्पष्ट रूप से अर्हित नहीं है या अभ्यर्थी ऐसा सदस्य बनने के लिए विधि में स्पष्ट रूप से अनर्हित है. अनर्हित की सूची मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा रिटर्निग आफिसर को दी जाएगी. अभ्यर्थी द्वारा विहित शपथ पत्र दाखिल नहीं किए जाने पर, नामांकन पत्र पर अभ्यर्थी या अपेक्षित संख्या के प्रस्तावक द्वारा हस्ताक्षर नही किए जाने पर, समुचित निक्षेप राशि जमा न किए जाने पर, अभ्यर्थी द्वारा शपथ, प्रतिज्ञान नही लिए जाने पर, यदि अभ्यर्थी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जन जाति का नहीं है और उसके द्वारा आरक्षित सीट पर लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया गया है, अभ्यर्थी उस निर्वाचन क्षेत्र का निर्वाचक नहीं है, जिसके लिए उसने नामांकन पत्र दाखिल किया है तथा उसने जिस निर्वाचन क्षेत्र में वह रजिस्टर्ड है, उस निर्वाचक नामावली या उसके सुसंगत भाग की सत्यापित प्रति नामांकन पत्र के साथ दाखिल नहीं की है और फार्म 26 शपथ पत्र के बिंदुओं को खाली छोड़ दिए जाने पर नामांकन पत्र अस्वीकृत किया जा सकता हैं.

बुधवार, 31 अक्टूबर 2018

पटेल ने मजबूर किया था भोपाल, हैदराबाद के निजामों को रियासत विलय के लिए: शिवराज





मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अगर जम्मू कश्मीर का मामला भी सरदार वल्लभ भाई पटेल देखते तो कश्मीर का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में नही जाता. भोपाल के नवाब और हैदराबाद के निजाम ने गड़बड़ करने की कोशिश की तब लौह पुरुष सरदार पटेल का ही प्रताप था की इन रियासतों को विलय के लिए मजबूर होना पड़ा.
आजाद भारत के पहले गृह मंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर बुधवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंत्रालय के सामने वल्लभभाई पटेल पार्क में सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यकर्ता राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई.   इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को एक बनाए रखने का काम लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने किया था.  भारत का वर्तमान स्वरूप सरदार पटेल के अथक प्रयासों का परिणाम है. उन्होंने देश की पांच सौ रियासतों को मिलाने का काम किया था. भोपाल के नवाब और हैदराबाद के निजाम ने गड़बड़ करने की कोशिश की तब लौह पुरुष सरदार पटेल का ही प्रताप था की इन रियासतों को विलय के लिए मजबूर होना पड़ा.
मुख्यमंत्री ने कहा दुर्भाग्य था कि कश्मीर का मामला सरदार पटेल के पास नही था. यदि जम्मू कश्मीर का मामला भी सरदार वल्लभ भाई पटेल देखते तो कश्मीर का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में नही जाता. चौहान ने कहा कि लौह पुरुष सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता के प्रतीक है. आज स्टैच्यू आॅफ यूनिटी का लोकार्पण गुजरात की धरती पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों हो रहा है जो पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है.
 इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाते हुए कहा कि हम संकल्प करे कि अपने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनायें रखने में हम अपने आप को समर्पित करेंगे. जरूरत पड़ी तो अपने देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर देंगे लेकिन देश की एकता और अखंडता को कभी टूटने नही देंगे.

भाजपा महिला मोर्चा ने मांगे 57 टिकट, भाजपा हुई चिंतित


मध्यप्रदेश में भाजपा में चल रही टिकट को लेकर माथापच्ची के बीच दावेदारों द्वारा किए गए शक्ति प्रदर्शन ने भाजपा को चिंता में डाले रखा है. वहीं भाजपा की चिंता तब बढ़ गई जब महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष लता ऐलकर ने पार्टी से इस बार चुनाव में महिला मोर्चा को 24 फीसदी टिकट दिए जाने की मांग कर डाली है. महिला मोर्चा द्वारा 57 महिलाओं को टिकट दिए जाने की मांग का पत्र भी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह को सौंपा है.
मध्यप्रदेश भाजपा में इस बार टिकट वितरण को लेकर लगातार नई-नई मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है. भाजपा पर संघ का तो दबाव है ही, साथ ही भाजपा के लिए दावेदारों की संख्या इस बार कुछ ज्यादा है. एक सीट पर भाजपा के सामने 4 से 6 दावेदार सामने आए हैं. दावेदारों ने प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचकर शक्ति प्रदर्शन तक कर डाला. भाजपा द्वारा इन दावेदारों को भाजपा शांत भी नहीं कर पाई थी कि भाजपा के सामने नई मुसीबत यह बन गई कि भाजपा महिला मोर्चा ने भी अपने महिलाओं के लिए पार्टी से 24 फीसदी टिकट दिए जाने की मांग कर डाली. महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष लता ऐलकर ने इस मांग का पत्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को दिया है. इस पत्र में उन्होंने जिक्र किया है कि इस बार टिकट वितरण में महिला महिलाओं को अधिक से अधिक स्थान दिया जाए. ऐलकर ने पत्र में कहा है कि भाजपा इस चुनाव में 57 महिलाओं को टिकट दें. 
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में भाजपा की 22 महिला विधायक है, इनमें से वर्तमान में पांच महिला विधायक माया सिंह, यशोधरा राजे सिंधिया, अर्चना चिटनिस, कुसुम महदेले एवं ललिता यादव वर्तमान में मंत्री है.  पार्टी सूत्रों के मुताबिक मंत्रियों में माया सिंह का ग्वालियर पूर्व सीट पर विरोध हो रहा है. इसके अलावा छतरपुर से ललिता यादव का विरोध भी किया जा रहा है.  संगठन के सर्वे में भी यह सीट कमजोर मानी गई है, फिर भी महिला मोर्चे की सूची में उनका नाम रखा गया है. पन्ना से कुसुम महदेले की जगह आशा गुप्ता के लिए टिकट की सिफारिश महिला मोर्चा ने की है. बाकी सभी महिला विधायकों को फिर उम्मीदवार बनाने की सिफारिश की गई है.
इन महिलाओं को टिकट दिए जाने की सिफारिश
महिला मोर्चा द्वारा भोपाल के गोविंदपुरा से बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर, बालाघाट से महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष लता ऐलकर, शिवपुरी से यशोधरा राजे सिंधिया, ग्वालियर पूर्व से मायासिंह, बुरहानपुर से अर्चना चिटनिस, छतरपुर से ललिता यादव, हटा से उमा देवी खटीक, बड़ामलहरा से रेखा यादव शहडाले से प्रमिला सिंह, पन्ना से आशा गुप्ता, सिहोरा से नंदनी मरावी, बैरसिया से मोहिनी शाक्य, सुरखी से पारुल साहू, पृथ्वीपुर से अनीता सुनील नायक, मनावर से रंजना बघेल, चाचौड़ा से ममता मीना, अशोक नगर से गीता जाटव, पंधाना से योगिता बोरकर, इंदौर क्रमांक-चार से मालिनी गौड़, रतलाम से संगीता चारेल, होशंगाबाद जिले में राजो मालवीय को टिकट दिए जाने की सिफारिश की है.




कपड़ा मंत्री मेरी बहन, 12 हजार साड़ियां मंगवाकर बटवाऊंगा

 कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन का वीडियो हुआ वायरल, कांग्रेस ने की शिकायत

मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा कि कपड़ा मंत्री उनकी बहन है, मैंने 10 हजार साड़ियां मंगवाई है, ये साड़ियां क्षेत्र में बटवाऊंगा. कांग्रेस ने इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग को की है.
मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री बिसेन का यह कहते हुए एक वीडियो वायरल हुआ है. इस वीडियो को लेकर कांग्रेस ने इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग से की है. शिकायत विशाल बिसेन ने कहा कि मंत्री के इस वीडियो में वो अपने अथवा अपनी बेटी के चुनाव की रणनीति बता रहे हैं, जिसमे उनके द्वारा कहा गया है कि केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी उनकी बहन है और वे सूरत गुजरात से दस हजार प्रिंटेड साड़ियां मंगवाकर जिनकी कीमत तीस लाख रुपए होगी वह क्षेत्र में बटवाएंगे. साथ ही उनके द्वारा यह भी कहा गया है कि किस तरीके से मंडी निधि से निर्माण कार्यों एवं कृषि महाविद्यालय एवं मेडिकल कालेज की आड़ में करोड़ों रुपए कमाए गए है एवं भविष्य में कमाएं जाएंगे. इसके अलावा किस तरीके से चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के समतुल्य बनने के लिए भविष्य के लोकसभा चुनाव लड़कर एवं जीतकर केंद्रीय मंत्री बना जाएगा. उन्हें यह भी कहते दिखाई एवं सुनाई पड़ रहा है कि वो किस तरीके से सैकड़ो करोड़ो में ठेका करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से केंद्रीय कृषि मंत्री बनने का काम करेंगे.
एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि एवं प्रदेश सरकार में मंत्री द्वारा आगामी चुनावों में धनबल का उपयोग करने की बात कहना लोकतांत्रिक मयार्दाओं का हनन है और भ्रष्टाचार में कमाए गए करोड़ों रुपए के आधार पर राजनीति में पद हासिल करने की बात करना यह स्पष्ट करता है कि आगामी चुनावों में गौरीशंकर बिसेन अथवा उसकी पुत्री मौसम हरिनखेड़े चुनावों में आचार संहिता और निर्वाचन प्रणली का हनन करने की तैयारी में है. कांग्रेस ने इस वीडियो को लेकर शिकायत की है कर गौरीशंकर बिसेन पर तत्काल आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की मांग की है. साथ ही बिसेन की पुत्री  मौसम हरिनखेड़े को आगामी चुनाव लड़ने हेतु आयोग्य घोषित किया जाए.

सोनिया के नाम दिग्विजय का फर्जी पत्र वायरल

 टिकट दिलाने का किया जिक्र, दिग्विजय ने बताया फर्जी

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समन्वय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह का सोनिया गांधी के नाम लिखा एक पत्र वायरल हुआ है. इस पत्र में सिंह ने 57 प्रबल दावेदारों को टिकट दिलाने की बात कही है. सिंह ने इस पत्र को फेसबुक और ट्वीटर पर जारी कर फर्जी बताया है. उन्होंने कहा कि  यह पत्र मैंने नहीं लिखा है.
सिंह ने खुद आज अपने फेसबुक और ट्वीटर एकाउंट पर एक पत्र डाला है. सिंह ने इस पत्र को फ्राड बताया है. उन्होंने कहा है कि यह पत्र मैंने नहीं लिखा है. सोनिया गांधी के नाम सिंह द्वारा लिखे पत्र में कहा गया है कि मैं राहुल गांधी और आप तक 57 प्रबल दावेदारों के नाम पहुंचा रहा हूं. यह लोग सालों से पार्टी के साथ जुड़े हैं और मध्यप्रदेश कांग्रेस के अंदर बने किसी भी गुट से नाता नहीं रखते हैं. इन्होंने सालों से केवल पार्टी के हित में काम किया है और आगे भी करेंगे. शायह यही वजह है कि उन्हें मौका न दिया जने का डर खा रहा है. मेरा आपसे अनुरोध है कि विगत 3-4 चुनावों की तरह बाहर से आए अन्य पार्टियों के नेताओं की जगह हम इस बार पार्टी और हमारी विचारधारा से जुड़े पुराने लोगों को आगे आने का मौका दें.
पत्र में उल्लेख किया गया है कि आपको पता है कि 6 महीने तक पैदल नर्मदा परिक्रमा करने के बाद भी मैंने पार्टी के हित में इस चुनाव से खुद को दूर रखा है. प्रदेश के नेताओं द्वारा पूरी तरह उपेक्षा किए जाने और कार्यकर्ताओं एवं मीडिया द्वारा उठाए गए सवालों के बाद भी मैं अपने निर्णय पर अड़ा रहा, परंतु जब सुनने में आया कि राज्य चुनाव समिति, टिकट वितरण प्रक्रिया को धंधे की तरह चला रही है, तो मुझे बहुत पीड़ा हुई और आपको यह पत्र लिखने का विचार आया. 

दो पूर्व प्रदेश अध्यक्षों पर टिकी नजर, टिकट को लेकर संशय

पत्ते नहीं खोल रहे दोनों नेता, लोकसभा के बजाय विधानसभा लड़ाने पर पार्टियों का जोर

मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के दोनों पूर्व अध्यक्षों नंदकुमार सिंह चौहान और अरुण यादव को भाजपा और कांग्रेस इस बार लोक सभा के बजाए विधानसभा चुनाव में मैदान में  उतार सकती है. दोनों ही नेता भी इस बात को दबी जुबान से स्वीकार तो कर रहे हैं, मगर अरुण यादव इसके लिए तैयार नजर नहीं आते हैं. नंदकुमार सिंह चौहान की करीब-करीब सहमति इस बात को लेकर है. 
मध्यप्रदेश में इस बार विधानसभा के पहले प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल काफी उलझन महसूस कर रहे हैं. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने सांसदों को और लोकसभा चुनाव हारे उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का फैसला लिया है. नंदकुमार सिंह चौहान खंडवा संसदीय क्षेत्र से सांसद है, भाजपा उन्हें खण्डवा जिले के मांधाता विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारना चाहती है. वहीं वर्तमान विधायक लोकेन्द्र सिंह इसका विरोध कर चुके हैं, मगर वे यह कहते हैं कि अगर पार्टी का निर्णय होगा तो वे स्वीकार करेंगे. नंदकुमार सिंह चौहान का कहना है कि उन्होंने अपनी ओर से विधानसभा चुनाव लड़ने की मंशा नहीं जताई है, मगर पार्टी अगर उन्हें मैदान में उतारेगी तो विधानसभा चुनावा लड़ेंगे. 
भाजपा के अलावा पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव को भी कांग्रेस मांधता सीट से ही चुनाव मैदान में उतारना चाहती है, मगर यादव उसके लिए तैयार  नहीं है. यादव यहां पर राजपूत समाज के मतदाताओं की अधिकता के कारण  पूर्व विधायक राजनारायण सिंह पूरनी  को मैदान में उतारने की तैयारी में है. वैसे राजनारायण सिंह भी खुद इस बार चुनाव न लड़कर यहां से उनके पुत्र  उत्तम पाल सिंह को मैदान में उतारना चाहते हैं. यादव के छोटे भाई सचिन यादव कसरावद से विधायक है. इस वजह से भी वे विधायक के बजाय लोकसभा का चुनाव लड़ने की इच्छा जता रहे हैं. वैसे मांधता सीट पर कांग्रेस की ओर से नारायण पटेल और परमजीत सिंंह नारंग का नाम भी सामने आया है. दोनों ही अपनी दावेदारी कर चुके हैं. नारंग को सिंधिया समर्थक माना जाता है, जबकि राजनारायण सिंह दिग्विजय समर्थक है. 
विजय शाह अपने पुत्र को सौंपेंगे विरासत!
भाजपा द्वारा सांसद नंदकुमार सिंह चौहान को विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला लेती है तो इस बार विजय शाह का हरसूद विधानसभा से चुनाव लड़ने पर संशय है. हालांकि अभी पार्टी ने शाह को इस तरह से कोई इशारा नहीं दिया है. माना जा रहा है कि शाह को विधानसभा चुनाव लड़ाकर पार्टी लोकसभा चुनाव के वक्त उन्हें लोकसभा के लिए खंडवा-बुरहानपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतार सकती है. इस स्थिति में शाह अपने पुत्र दिव्यशक्ति शाह को हरसूद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति बना रहे हैं. वैसे माना जा रहा है कि इस स्थिति में शाह की पत्नी और खंडवा की पूर्व महापौर शाह का भी संगठन आगे ला सकता है. फिलहाल भावना शाह का इरादा पुत्र को हरसूद विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारने का है.

भाजपा के पूर्व सांसद के बेटे ने ली आप की सदस्यता


 आम आदमी पार्टी के बढ़ते जनाधार को देखते हुए अन्य दलों के दिग्गज नेताओं का आप से जुड़ने का सिलसिला लगातार जारी है. इसी क्रम में आज भाजपा के दिग्गज नेता और सतना के दो बार सांसद रहे रामानंद सिंह के बेटे राजवंश सिंह ने आप की सदस्यता ग्रहण की है.  इसके अलावा बसपा के प्रदेश महासचिव रहे विदय राज मालवीय ने भी आप का दामन थामा है.  साथ ही बैगा समाज के नेता और वरिष्ठ समाजसेवी गिरधारी बैगा ने भी आम आदमी पार्टी की सदस्यता ली.
आम आदमी पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आज तीनों नेताओं को पार्टी के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल ने पार्टी की सदस्यता दिलाई. सदस्यता लेने के लिए रामानंद सिंह के बेटे राजवंश तो नहीं आए, मगर उन्होंने अपने बेटे अनुराग को भेज कर यह पुष्टि मीडिया के सामने की कि उन्होंने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है.पारिवारिक कारणों से राजवंश सिंह कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके, उनके प्रतिनिधि के रूप में बेटे अनुराग सिंह मौजूद थे.  अनुराग ने कहा कि हमारा परिवार बरसों से राजनीति के माध्यम से समाजसेवा कर रहा है. मौजूदा समय में आम आदमी पार्टी ही एकमात्र उम्मीद प्रदेश वासियों के लिए है. इस पार्टी से जुड़कर हम क्षेत्र के विकास और भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश की अवधारणा को मजबूत करेंगे. 
बसपा में छात्र संगठन के प्रदेश सचिव और प्रदेश महासचिव रह चुके विद्यराज फिलहाल आदि महाराजा बली पुनुरोत्तथान कल्याण संघ के अध्यक्ष हैं. उन्होंने कई सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम चलाए हैं और पदयात्राएं भी की हैं. इस मौके पर विद्यराज मालवीय ने कहा कि आम आदमी पार्टी मध्य प्रदेश में बदलाव की राजनीति कर रही है.  भाजपा और कांग्रेस ने लगातार प्रदेश को लूटा है और भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है. आम आदमी पार्टी इस लूट और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाली एकमात्र पार्टी है. इसलिए राजनीतिक रूप से अब पार्टी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे.  
गिरधारी बैगा ने बताया कि वे लंबे समय से राजनीति और समाजसेवा में हैं, लेकिन किसी दल से सीधे तौर पर नहीं जुड़े रहे हैं. आम आदमी पार्टी के सिद्धांत और विचारधारा से प्रभावित होकर वे आप की सदस्यता ले रहे हैं.

गौशाला खोलने के हमारे वचन पर दुखता है पेट


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने आज सवालों की श्रृंखला में प्रदेश के गौ-धन में कमी आने के मामले को लेकर शिवराज सरकार पर करारा हमला बोला. उन्होंने कहा कि सरकार गौ माता के नाम पर हल्ला को खूब मचाती है, मगर लगातार गौ-धन की कमी पर कुछ नहीं करती. उन्होंने कहा कि हम अगर पंचायत में गौशाला खोलने का वचन दें तो इनका पेट दुखने लगता है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि भाजपा के लोग गौ-माता के नाम पर खूब हल्ला मचाते हैं. हम हर पंचायत में गौ-शाला खोलने का वचन दें, तो इनके पेट दुख जाते हैं. कमलनाथ ने कहा कि मामा सरकार की पोल खोल रही है मोदी सरकार की लाइव स्टाक सेंसस की रिपोर्ट ,जो यह बताती है कि  18 वीं सेंसस में मध्यप्रदेश में गौ-धन की संख्या में भारी कमी आई है. मध्यप्रदेश में 18 वीं सेंसस में 2 करोड़ 19 लाख गौधन था, जो 5 सालों में कम होकर 1 करोड़ 96 लाख रह गया. यानी मामा के शासनकाल में 23 लाख 13 हजार गौ-धन खत्म हो गया. उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान को  जवाब दीजिए देना चाहिए कि  23 लाख 13 हजार गौ-धन कहां गया? प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भैंसों की संख्या 91 लाख 29 हजार से कम होकर 81 लाख 87 हजार रह गई. मामा को जवाब देना चाहिए कि 9 लाख 41 हजार भैंसें कहाँ गायब हो गयीं? उन्होंने कहा कि सभी तरह के पशुधन में 43 लाख 62 हजार की कमी आई है. क्या मध्यप्रदेश में अवैध कत्लखाने चल रहे हैं ? इतना ही नहीं, शिवराज सिंह की सरकार ने हमारे राज्य की देशी प्रजातियों को खत्म करने का काम किया है. मध्यप्रदेश में 26 लाख 79 हजार देशी प्रजाति के पशु खत्म हो गए.  क्या यह सही है कि आपने प्रावधान तो गौ शाला के लिए प्रति गाय लगभग 17 रुपए किया, मगर 2 रु भी खर्च नहीं किए ? उन्होंने कहा कि 2013-14 में सालाना 608 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज 1 रुपए 66 पैसे,  2014-15 में सालाना 635 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज 1 रुपए 73 पैसे,  2015-16 में सालाना 591 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज 1 रुपए 61 पैसे,  2016-17 में सालाना 577 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज 1 रुपए 58 पैसे, 2017-18 में सालाना 679 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज 1 रुपए 86 पैसे.  कमलनाथ ने पूछा है कि क्या गौ माता का खाना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया?

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2018

कन्फ्यूजन नहीं, झूठ की फैक्ट्री चला रही है कांग्रेस: राकेश सिंह

 भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा प्रदेश की जनता से माफी मांगें राहुल गांधी

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद राकेश सिंह ने कहा है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को कोई कन्फ्यूजन नहीं हुआ, बल्कि पूरी कांग्रेस प्रदेश की जनता को भ्रमित करने के लिए झूठ की फैक्ट्री चला रही है. सिंह ने राहुल गांधी से मांग की है कि वे मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के परिवार और प्रदेश की जनता से माफी मांगे, जिनका उन्होंने पूर्व नियोजित तरीके से अपमान किया है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को झाबुआ में भाषण के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बेटे का नाम पनामा पेपर्स में शामिल होने का आरोप लगाया था. बाद में जब वे इस मामले में घिरने लगे, तो उन्होंने मंगलवार को इस पूरे मामले को कन्फ्यूजन बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की. सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने यह बयान किसी कन्फ्यूजन के कारण नहीं, बल्कि जान बूझकर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और प्रदेश की जनता को अपमानित करने की गरज से दिया था. बाद में इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा दी गई चेतावनी और प्रदेश की जनता के आक्रोश को देखते हुए राहुल गांधी ने मंगलवार को इसे कन्फ्यूजन बता दिया, लेकिन फिर भी माफी नहीं मांगी. राकेश सिंह ने कहा कि राहुल गांधी की इस तरह की बयानबाजी कांग्रेस मुक्त भारत के नारे को साकार करने में मददगार होगी और उन्हीं के नेतृत्व के दौरान देश को कांग्रेस से मुक्ति मिलेगी.
झूठ की फैक्ट्री चला रही कांग्रेस
राकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस लगातार सत्ता से बाहर रहकर बौरा गई है और उसके नेता तमाम तरह की हथकंडे बाजी अपनाते हुए झूठ का सहारा ले रहे हैं. यही वजह है कि कभी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह रावलपिंडी के पुल को मध्यप्रदेश का पुल बताते हैं, तो कभी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ बांग्लादेश की सड़क को प्रदेश की सड़क बताते हैं. इसी कड़ी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह के बेटे कार्तिकेय के नाम पनामा पेपर्स से जोड़ा था, लेकिन उनका यह दांव उल्टा पड़ गया है.

रोजगार कानून अधिकार को मामा सरकार के किया बेकार

 कमलनाथ ने पूछा शिवराज से सवाल

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने आज शिवराज सिंह को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में शिवराज सरकार ने रोजगार कानून अधिकार को बेकार कर दिया. उन्होंने कहा कि प्रदेश के मेहनतकशों पर सरकार ने कुठाराघात किया है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आज ग्यारहवां सवाल पूछते हुए कहा कि  मध्यप्रदेश में 68.35 लाख मनरेगा के जाब कार्ड्स हैं अर्थात लगभग 3 करोड़ 41 लाख 75 हजार लोग प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से मजदूरी के माध्यम से जीवन यापन कर रहे हैं.  कांग्रेस ने यह तय किया था कि एक साल में 100 दिनों का रोजगार इस योजना के तहत दिया जाएगा. मध्यप्रदेश में मनरेगा में पंजीकृत लोगों में से वर्ष 2014-15  में 100 दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार - 1,58,776 (2.33 प्रतिशत), वर्ष 2015-16  में 100 दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार - 2,25,502 (3.30 प्रतिशत), वर्ष 2016-17  में 100 दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार -1,40,990 (2.1 प्रतिशत), वर्ष 2017-18  में 100 दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार - 1,34,724 (1.97 प्रतिशत) थे.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस द्वारा बनाए गए कानून में कहा गया था कि हर मजदूर को काम करने के एक सप्ताह के भीतर मजदूरी का भुगतान हो जाएगा और यदि नहीं हुआ तो सरकार देरी से मजदूरी के भुगतान का मुआवजा देगी. उन्होंने कहा कि शिवराज ने वर्ष 2013-14 से सितंबर 2018-19 तक 6 हजार 167 करोड़ रुपए की मजदूरी का देरी से भुगतान किया. हजारों मजदूरों को अब भी उनकी मेहनत की कमाई नहीं दी गई. कानून के मुताबिक देरी से भुगतान पर सरकार को 10 प्रतिशत के मान से कम से कम 610 करोड़ रुपए का मुआवजा देने का अनुमान था, मगर मामा ने दिए लगभग केवल 3 करोड़ रुपए.
उन्होंने कहा कि मामा सरकार ने  2014-15 मात्र 42 दिन, 2015-16 मात्र 45 दिन 2016-17 मात्र 40 दिन, 2017-18 मात्र 46 दिन और 2018 -19 मात्र 38 दिन का रोजगार मुहैया कराया.  2014-15 मात्र 149 रुपए, 2015-16 मात्र 149 रुपए 2016-17 मात्र 155 रुपए ,2017-18 मात्र 165 रुपए और 2018 -19 मात्र 170 रुपए मजदूरी उपलब्ध कराई गई.

भाजपा के दो सांसदों ने चुनाव लड़ने से कर दिया मना

लगातार विरोध झेल रही भाजपा को दो सांसदों ने विधायक का चुनाव लड़ने से मना कर दिया. वहीं भाजपा संगठन  सीट बदलकर चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वालों को संकेत दे चुका है कि वे चुनाव लड़े या फिर मैदान छोड़ें.
मध्यप्रदेश में भाजपा के लिए इस बार चुनाव में प्रत्याशी चयन की समस्या ज्यादा परेशानी दे रही है. हालांकि मध्यप्रदेश चुनाव समिति ने लगातार तीन दिनों तक भोपाल में मंथन करने के बाद अब मामला दिल्ली भेज दिया है. दिल्ली में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह की चर्चा भी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से हो चुकी है. भाजपा 1 नवंबर से प्रत्याशियों की सूची जारी करेगी. बताया जा रहा है कि भाजपा इस बार टूकड़ों में सूची जारी करेगी. इसके पीछे संगठन का मानना है कि  टिकट कटने वालों के विरोध को देखते हुए ऐसा किया जा रहा है.
भाजपा की प्रदेश चुनाव समिति ने वर्तमान विधायकों के विरोध को देखते हुए सांसदों को भी मैदान में उतारने का फैसला किया था, इसके तहत करीब आधा दर्जन से ज्यादा सांसदों के नाम भी पैनल में बनाकर राष्ट्रीय कार्यकारिणी को भेजे गए हैं, मगर भाजपा के दो सांसदों ने विधानसभा चुनाव लड़ने से मना कर दिया है. भाजपा के सतना से सांसद गणेश सिंह को पार्टी अमरपाटन विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारना चाहती थी, मगर सिंह ने यहां से चुनाव लड़ने से मना कर दिया है. वहीं विंध्य के रीवा से सांसद जनार्दन मिश्रा को भी भाजपा ने विधानसभा चुनाव लड़ने को कहा, मगर मिश्रा भी इसके लिए तैयार नहीं है. बताया जाता है कि मिश्रा को भाजपा रीवा जिले की सेमरिया सीट से चुनाव मैदान में उतारना चाहती है. मगर मिश्रा इसके लिए तैयार नहीं है.
शिवराज बुधनी से ही लड़ेंगे चुनाव
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर बार-बार यह बात कही जा रही है कि वे भोपाल के गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे. इस बात ने कल सोमवार को उस वक्त ज्यादा जोर पकड़ा जब मुख्यमंत्री ने पूर्व मंत्री बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर के साथ गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में जनसंपर्क किया. इसके बाद जब यहां से मुख्यमंत्री के चुनाव लड़ने की चर्चा तेज हुई तो उन्होंने इस पर विराम लगा दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि वे बुधनी से ही चुनाव लड़ेंगे. यहां उल्लेखनीय है कि संघ द्वारा बीते दिनों कराए गए सर्वे के बाद यह कहा गया था कि शिवराज सिंह चौहान को बुधनी के साथ-साथ गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से भी मैदान में उतारा जाए, मगर यहां से पूर्व मंत्री बाबूलाल गौर फिर से मैदान में उतरने की तैयारी कर चुके हैं. वे बार-बार यही बात कह रहे हैं, कि उनकी बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हो चुकी है.

व्यापमं घोटाले का आरोपी बसपा से मांग रहा टिकट


मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले के मुख्य आरोपी जगदीश सगर भी चुनाव मैदान में उतरने का मन बना चुके हैं. वे बहुजन समाज पार्टी से टिकट की मांग कर रहे हैं. सगर को टिकट देने पर बसपा के पदाधिकारी दो गुटों में बंटे नजर आ रहे हैं, हालांकि यह मामला बसपा प्रमुख मायावती के पास भेज दिया गया है.
मध्यप्रदेश के व्यापमं घोटाले के मुख्य आरोपी जगदीश सगर ने बकायदा बहुजन समाज पार्टी कार्यालय पहुंचकर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के तहत अपना आवेदन दिया और साक्षात्कार भी बसपा के पदाधिकारियों ने लिया. सगर ने भिंड जिले की गोहद विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है. सगर के पक्ष में बसपा के कुछ पदाधिकारी हैं, जबकि कुछ उन्हें टिकट ने देने की सिफारिश कर रहे हैं. इन पदाधिकारियों का मानना है कि अगर सगर को पार्टी ने टिकट दिया तो संदेश गलत जाएगा. कांग्रेस इस मामले को लेकर लगातार भाजपा को घेर रही है, कांगे्रस ने पिछला चुनाव भी इसी मुद्दे पर लड़ा था. कांग्रेस ने नेता अब भी इस मुद्दे का जीवित रखे हुए हैं. सगर को टिकट दिए जाने के मुद्दे पर दो गुटों में बंटे नेताओं को देख पदाधिकारियों ने पूरा मामला बसपा प्रमुख मायावती के पास भेज दिया है. अब सगर को टिकट दिए जाने का फैसला मायावती करेंगी.

आप के 8 प्रत्याशियों सहित 11 को भेजा जेल

आम आदमी पार्टी के 8 प्रत्याशियों सहित 11 नेताओं को एक साल पुराने मामले में जेल भेज दिया गया. इस मामले में प्रदेश अध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा और कांग्रेस बौखला गई हैं. इसीलिए एक साल पुराने मामले में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, जबकि इसी मामले में अन्य लोगों को जमानत दी गई है.
उन्होंने कहा कि पुलिस ने इस मामले में जानबूझकर देरी की ताकि अदालत में सुनवाई का ज्यादा वक्त न मिल पाए. पार्टी कार्यकर्ता पुलिस के समन पर टीटी नगर थाने दोपहर 12 बजे ही पहुंच गए थे, लेकिन पुलिस ने देरी करते हुए थाने में बैठाए रखा और अंतिम समय में कोर्ट में प्रस्तुत किया गया, जहां अदालत ने मामला कल यानी 30 अक्तूबर के लिए निर्धारित कर दिया है.  उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस आम आदमी पार्टी के खिलाफ मिलकर काम कर रही हैं. इसका बड़ा सबूत आज ही जबलपुर हाई कोर्ट में देखने को मिला. जहां आम आदमी पार्टी के भोपाल उत्तर के प्रत्याशी जुबैर खान की जमानत याचिका पर अचानक कांग्रेस नेता विवेक तन्खा के कार्यालय से आए उनके एक साथी वकील ने आपत्ति दर्ज कराई है.  आप के प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर भाजपा और कांग्रेस षडय़ंत्र के तहत प्रत्याशियों को परेशान कर रही हैं। लेकिन आम आदमी पार्टी इस दमन से डरेगी नहीं और इसका मुकाबला करेगी. 
गौरतलब है कि इससे पहले भी आम आदमी पार्टी के 3 दर्जन से ज्यादा कार्यकर्ता और नेता बीते माह एक सप्ताह के दौरान गिरफ्तार किए गए थे. इनमें छतरपुर में आप के प्रदेश उपाध्यक्ष अमित भटनागर, ग्वालियर में प्रदेश संगठन सचिव हिमांशु कुलश्रेष्ठ, ग्वालियर के जोन सचिव शुभम गुप्ता, छतरपुर के युवा शक्ति के जोन प्रभारी केश कुमार राजपूत, ग्वालियर पूर्व की विधानसभा प्रत्याशी मनीक्षा सिंह तोमर और आप के युवा शक्ति के प्रदेश अध्यक्ष निशांत गंगवानी समेत 30 से ज्यादा कार्यकर्ता पिछले दिनों में गिरफ्तार किए थे.
इन नेताओं को भेजा जेल
सुनील मिश्रा कटनी मुड़वारा प्रत्याशी, अनिल सिंह सेंगर,  बोहरीबन्द प्रत्याशी, शैलेन्द्र सिंह रूपावत उज्जैन दक्षिण प्रत्याशी,  भारत गौसर,  विनोद कुमार शर्मा उज्जैन उत्तर प्रत्याशी, प्रेम चंद्र नागराज, रतन सिंह नागदा प्रत्याशी, पंकज भाऊ अभंगे, जसवंत सिंह तराना प्रत्याशी, बहादुर सिंह मंडलोई देपालपुर प्रत्याशी, प्रहलाद राठौर सोनकच्छ प्रत्याशी है.

स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह पर दर्ज हुआ मामला

मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री  रुस्तम सिंह पर मुरैना जिले के नूराबाद थाने में मामला दर्ज किया गया है. सिंह पर यह मामला जातिगत भाषण देने के आरोप में दर्ज किया गया है. वायरल वीडियो के बाद कलेक्टर के प्रतिवेदन पर यह मामला दर्ज किया गया है.
वायरल हुए वीडियो में मुरैना से भाजपा विधायक रुस्तम सिंह जनता को साफ तौर पर धमकी देते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसमें वे कह रहे हैं कि हमारे खिलाफ जाने का मतलब ब्राह्मण को विधायक बनाना है. स्वास्थ्य मंत्री का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. रविवार को विधायक रुस्तम सिंह अपने क्षेत्र में जनता से मिलने पहुंचे थे, जहां उन्होंने चर्चा के दौरान क्षेत्रवासियों को धमकी भरे अंदाज में कहा कि दिल में जो बात आती है, वो कहता हूं, गुर्जर समाज के साथ हमेशा छलावा किया गया है. समाज के लोगों का इस्तेमाल किया गया है. हमारे खिलाफ जाने का मतलब ब्राह्मण को विधायक बनाना है. साथ ही कहा कि मैं आपको बता रहा हूं, पहले ये गलती हो चुकी है, लेकिन दोबारा इसे मत दोहराना. अब इसे टिकट पाने के लिए दबाव की राजनीति कहें या सीधी धमकी, ये तो खुद मंत्री  ही बता सकते हैं. फिलहाल इस मामले में कलेक्टर के प्रतिवेदन के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है.

विवादों में सपाक्स, संस्थापक अध्यक्ष ने कहा त्रिवेदी को संचालन का अधिकार नहीं

 सपाक्स ने कहा बनाया महागठबंधन, शास्त्री का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं
सपाक्स पार्टी फिर विवादों में आ गई है. सपाक्स के संस्थापक अध्यक्ष ललित शास्त्री ने मामले को यह कहकर गर्मा दिया है कि हीरालाल त्रिवेदी को सपाक्स के संचालन संबंधी अधिकार नहीं है. वहीं इस मामले में सपाक्स द्वारा यह कहा जा रहा है कि ललित शास्त्री का अब संस्था से कोई लेना देना नहीं है.
एट्रोसिटी एक्ट के विरोध के बाद पार्टी बनी सपाक्स जिस तेजी से राजनीतिक क्षेत्र में उभरी थी, उसी तेजी से वह विवादों में भी घिर गई है. पार्टी बनते ही पहले जैसी भीड़ कार्यक्रमों में नजर नहीं आ रही, साथ ही उसके अपने भी उससे दूर होकर आरोप लगाने से नहीं चूक रहे हैं. पार्टी के संस्थापक सदस्य ललित शास्त्री ने हाल ही में आरोप लगाया कि हीरालाल त्रिवेदी को सपाक्स संचालन संबंधी अधिकार नहीं है, वे केवल संरक्षक सदस्य हैं. शास्त्री ने यहां तक कह दिया कि  पीएस परिहार को पदमुक्त कर दिया गया है. रीवा निवासी आशुवेन्द्र प्रताप सिंह और भोपाल के आशीष कुर्ल को संस्था का सहसंयोजक नियुक्त किया है. यदि संस्था के पंजीयन का राजनीतिक दल के गठन में दुरुपयोग किया तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. शास्त्री के इन बयानों को सपाक्स समाज ने सिरे से नकार दिया है. सपाक्स समाज के पदाधिकारियों को कहना है कि शास्त्री पहले ही इस संस्था को छोड़ चुके हैं. उनका संस्था से कोई लेना-देना नहीं है. सपाक्स का कहना है कि पार्टी बनकर उभरी सपाक्स को विवाद में लाने का काम शास्त्री कर रहे हैं.
बैठकों में नहीं पहुंच रहे लोग
 सपाक्स द्वारा चुनावी तैयारी को लेकर पूरे प्रदेश में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया भी चल रही है. जिसके तहत सपाक्स के पदाधिकारी जिलों में जाकर प्रत्याशी चयन प्रक्रिया को अंजाम दे रहे हैं, मगर इस दौरान पहले जैसी भीड़ नजर  नहीं आ रही है. हाल ही में सपाक्स के पदाधिकारी जब रतलाम जिले पहुंचे तो वहां पर मात्र डेढ़ दर्जन लोग ही पदाधिकारियों की बैठक में शामिल होने पहुंचे, इस पर सपाक्स के पदाधिकारी नाराज भी हुए, मगर वे करते भी क्या. जैसे-तैसे उन्होंने काम निपटाया और वापस चले आए. रतलाम जैसा नजारा कई स्थानों पर देखने को मिल रहा है. 
त्रिवेदी का दावा बनाया महागठबंधन
सपाक्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी ने दावा किया है कि मध्यप्रदेश में हम ताकतवर विकल्प देने की स्थिति में हैं.  प्रदेश के 21 संगठनों के महागठबंधन को लेकर सहमति जताई गई है. उन्होंने कहा कि एट्रोसिटी एक्ट में संशोधनों के खिलाफ और आर्थिक आधार पर आरक्षण देने जैसे मुद्दों पर ये सभी संगठन एकजुट हुए हैं. बैठक में आरक्षण विरोधी पार्टी, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, राष्ट्रीय समानता देशभक्त मोर्चा, राष्ट्रीय सवर्णदल, भारतीय पॉलिटिकल अलायंस, सवर्ण समाज, विश्व शक्ति पार्टी, संपूर्ण समाज पार्टी, राष्ट्रव्यापी जनता पार्टी, विश्व शक्ति पार्टी के पदाधिकारी एवं जोगेंद्र सिंह भदौरिया शामिल थे. 

सोमवार, 29 अक्टूबर 2018

जनता से जुड़ रही आम आदमी पार्टी: गोपाल राय


आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी और दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री गोपाल राय ने ग्वालियर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में आम आदमी पार्टी पूरी मजबूती से प्रदेश की 230 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. यहां पार्टी भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ एक मजबूत विकल्प के रूप में जनता के सामने है. हमारे डोर टू डोर कैंपेन के जरिए जनता पार्टी से जुड़ रही है. आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी जनता के राज को स्थापित करेगी. 
राय ने पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे. इस मौके पर ग्वालियर जोन के प्रभारी और प्रदेश संगठन मंत्री हिमांशु कुलश्रैष्ठ, ग्वालियर पूर्व की विधानसभा प्रत्याशी मनीक्षा सिंह तोमर और ग्वालियर के जिला संयोजक सौमिल शर्मा भी उपस्थित थे. पत्रकारों को संबोधित करते हुए राय ने कहा कि आजादी के बाद मध्य प्रदेश के लोगों ने कांग्रेस को मौका दिया. कांग्रेस ने सत्ता हासिल करने के बाद देश की तरह मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया. किसानों पर अत्याचार हुआ. भुखमरी, कुपोषण, गरीबी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ती चली गईं. इससे निराश होकर मध्यप्रदेश के लोगों ने कांग्रेस को हटाकार भाजपा को सत्ता सौंपी. इसके बाद पिछले 15 सालों में भाजपा ने जिस तरह से किसान, नौजवान, आदिवासी हर आवाज को दबाया. इन हालात में अब पूरा प्रदेश बदलाव चाहता है. बदलाव के लिए जनता के पास दो विकल्प हैं, एक कांग्रेस का है, जो भाजपा की तरह ही भ्रष्ट और जनविरोधी है, जिसे मध्य प्रदेश के लोगों ने उखाड़कर फेंका था. दूसरा विकल्प दिल्ली का है. जहां आम आदमी पार्टी की सरकार ने विकास का एक अलग मॉडल पेश किया है. साढ़े तीन साल में दिल्ली में स्कूल, अस्पताल, बिजली, पानी के लिए एक क्रांति पैदा हुई है. विकास के हर पैमाने पर काम किया गया है. मध्य प्रदेश में लोग इस विकास के माडल में शामिल होना चाहते हैं. आम आदमी पार्टी घर घर जा रही है और लोगों के भीतर यह विश्वास जागा है कि मध्य प्रदेश भी इस बदलाव में शामिल होगी. 
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में आम आदमी पार्टी सत्ता में आकर शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था को ठीक करने के साथ नौजवानों को रोजगार देगी, किसानों की समस्याओं को हल करेगी. आम आदमी पार्टी ने अपना शपथ पत्र दिया है और इसके आधार पर हम चुनाव लड़ रहे हैं. यहां दिल्ली के नेता भी लगातार आ रहे हैं. अभी हमारा प्रवास ग्वालियर जोन में है. इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व के अलग-अलग जगह कार्यक्रम होंगे. 




भाजपा ने तय किए सभी प्रत्याशी, घोषणा दिल्ली में

 अब भोपाल में प्रत्याशी चयन को लेकर नहीं होगी बैठक

भारतीय जनता पार्टी ने सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को पूरा कर लिया है. प्रदेश चुनाव समिति ने दो दिनों तक चली बैठक में सभी सीटों पर नामों के पैनल तैयार कर केन्द्रीय समिति को भेज दिए हैं. केन्द्रीय समिति इन नामों पर मोहर लगाएगी. संभावना यह है कि 1 नवंबर को भाजपा अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर सकती है.
प्रदेश चुनाव समिति की चल रही बैठक आज समाप्त हो गई. आज बैठक में सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों के लिए आए नामों और पैनलों पर समिति के सदस्यों ने मंथन कर सूची तैयार कर केन्द्रीय चुनाव समिति को भेज दी है. चुनाव समिति के सदस्य कृष्णमुरारी मोघे ने यह बात आज पत्रकारों से कही. उन्होंने कहा कि अब प्रदेश स्तर पर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया या नामों पर कोई चर्चा नहीं होगी. सभी 230 विधानसभा सीटों के लिए नामों के पैनल केन्द्रीय चुनाव समिति को भेज दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि अगर इसके बाद भी कहीं कोई जरुरत पड़ती है तो खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान उस क्षेत्र के नेताओं से चर्चा करेंगे, जहां पर कोई शिकायत मिलेगी. 
सूत्रों के अनुसार दो दिन तक चली प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में करीब आधा दर्जन मंत्रियों और 60 विधायकों के नाम काटे जाने की संभावना है. पहली सूची 1 नवंबर को जारी होगी, इस सूची में 150 से ज्यादा नामों की घोषणा भाजपा कर सकती है. बताया जाता है कि अधिकांश स्थानों पर जहां पर वर्तमान विधायकों का विरोध है, वहां पर समिति ने नये चेहरों पर दाव लगाने का फैसला लिया है. 

संबित की प्रेस कांफे्रंस की जांच के बाद कार्रवाई


मध्यप्रदेश के निर्वाचन पदाधिकारी व्ही.एल.कांताराव ने कहा कि संबित पात्रा की प्रेस कांफ्रेंस मामले में जांच के बाद कोई कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि तपन भौमिक के वायरल इस्तीफे मामले को भी जांच में लिया जाएगा.
कांताराव ने आज पत्रकारों से चचार्  करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में 15 वीं विधानसभा के लिए 28 नवंबर को होने वाले मतदान की सभी तैयारियों पूरी हो गई है. 28 नवंबर को होने वाला मतदान सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा. सभी मतदाताओं को पहले से वीवीपेट की जानकारी दी जाएगी. इसके लिए 9 हजार मजिस्ट्रेट मध्यप्रदेश में काम कर रहे है और 800 चेकिंग पाइंट लगाए गए है. एक  परिवार को एक नोट बुक दी जाएगी. आयोग ने राजनीतिक दल की शिकायत के लिए आनलाइन की भी सुविधा की है.
निर्वाचन पदाधिकारी ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि संबित पात्रा की प्रेस कांफे्रंस मामले की जांच की जाएगी, इसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि पर्यटन निगम के अध्यक्ष तपन भौमिक के इस्तीफे के वायरल होने के मामले की भी आयोग जांच करेगा.
बालाघाट, लांजी, परसवाड़ा में सुबह 7 से होगा मतदान
निर्वाचन पदाधिकारी कांताराव ने बताया कि राज्य के बालाघाट, परसवाड़ा और लांजी विधानसभा क्षेत्रों में सुबह 7 बजे से मतदान शुरु होगा और दोपहर को 3 बजे वहां समाप्त कर दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि प्रदेश के 51 जिलों में 8 हजार 795 सेक्टर अधिकारी को आईपीसी की धारा 21 के तहत सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाया गया है. इसके अलावा केन्द्र से 198 जनरल आर्ब्जबर, 127 एक्सपेंडिचर आर्ब्जबर, 32 पुलिस आर्ब्जबर और 3 एक्सेसिबलिटी आर्ब्जबर भी चुनाव की निगरानी के लिए 8 नवंबर को प्रदेश पहुंच जाएंगे.

भाजपा ने कहा चुनाव लड़ों या सीट छोड़ो

सीट बदलने की मांग कर रहे मंत्री विधायकों को संगठन ने दी नसीहत

भारतीय जनता पार्टी उन मंत्रियों और विधायकों को साफ कह दिया कि अगर वे सीट बदलकर चुनाव लड़ना चाह रहे हैं तो उन्हें सीट छोड़नी होगी या फिर चुनाव लड़ना होगा. भाजपा के सामने आधा दर्जन मंत्री और करीब दर्जनभर विधायक ऐसे थे जो सीट बदलकर चुनाव लड़ने के लिए प्रयास कर रहे थे.
भारतीय जनता पार्टी के सामने प्रत्याशी चयन के वक्त जो संकट खड़े हो रहे हैं, उससे संगठन अब खफा नजर आने लगा है. संगठन ने भी अब कड़ा रुख अपना लिया है. संगठन के सामने दावेदारों के अलावा आधा दर्जन मंत्री ऐसे थे, जो लगातार सीट बदलकर चुनाव लड़ने के लिए दबाव बना रहे थे. मंत्रियों के अलावा राज्य के करीब एक दर्जन विधायक भी सीट बदलकर चुनाव लड़ने के लिए प्रयास कर रहे थे. लगातर दबाव को देख अब संगठन ने मंत्रियों और विधायकों को साफ कह दिया कि अगर उन्हें चुनाव लड़ना है तो वर्तमान सीट से ही मैदान में उतारना होगा, नहीं तो उन्हें चुनाव मैदान से हट जाना चाहिए.  इन मंत्री-विधायकों ने सत्ता-संगठन से सुरक्षित सीट से चुनाव लडने की मंशा जताई थी, क्योंकि पिछले पांच साल अपनी विधानसभा में कोई खास काम न करने से उनको लेकर जनता में गहरी नाराजगी है.  साथ ही कार्यकर्ता भी रूठे हैं. इसलिए इन मंत्री-विधायकों की इच्छा है कि वे यदि अपनी सीट छोड़कर किसी अन्य से चुनावी मैदान में उतरते हैं तो शायद उनकी नैया पार हो जाएंगी, जिसको लेकर कई मंत्रियों ने कुछ विधायकों की सीट से अपनी दावेदारी ठोकी है.
संगठन ने ऐसे मंत्री-विधायकों को लेकर गहरी नाराजगी जताई है जो सीट बदलकर चुनाव लड़ना चाहते हैं. सूत्रों की माने तो संगठन पदाधिकारियों ने ऐसे मंत्रियों और विधायकों से कहा कि आपने पांच साल में क्या किया, जो आपकों विधानसभा क्षेत्र ही बदलने को विवश होना पड़ रहा है.   पार्टी का मानना है कि यदि इन मंत्री-विधायकों को दूसरी विधानसभा से चुनाव लड़ाया जाता है तो इनकी विधानसभा तो हारेंगे ही दूसरे विधानसभा क्षेत्र में भी इनके खिलाफ विरोध का सामना करना पड़ेगा. यही वजह है कि पार्टी ऐसे मंत्री-विधायकों को घर बैठना उचित मान रही है और उनकी जगह पर नए चेहरे को मौका देने की सोच रही है.
गौर के विस क्षेत्र में जनसंपर्क किया शिवराज ने
भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए गए घर-घर जनसंपर्क अभियान के तहत आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र पहुंचे. उन्होंने यहां पर घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क किया और भाजपा के पक्ष में  मतदान करने की अपील की. गोविंदपुरा क्षेत्र से पूर्व विधायक बाबूलाल गौर लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं, यह क्षेत्र भाजपा का गढ़ बन गया है. भाजपा इस बार गौर को चुनाव मैदान में नहीं उतारना चाह रही है, लेकिन माना यह जा रहा है कि गौर की पुत्रवधू कृष्णा गौर को संगठन टिकट देगा, मगर परिवारवाद के विरोध के चलते गौर का विरोध भी इस क्षेत्र में हो रहा है. वहीं संघ ने भी बीते दिनों मुख्यमंत्री को बुधनी के साथ-साथ गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की सलाह दी थी. आज जब शिवराज इस क्षेत्र में जनसंपर्क के लिए गए तो भाजपा में राजनीति और गर्मा गई. हालांकि शिवराज सिंह चौहान ने यहां से चुनाव न लड़ने की बात कही है. 

अब क्यों नहीं धरने पर बैठते शिवराज ?

कमलनाथ ने कहा मोदी ने पंचायती राज का निकाला दिवाला

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा किए जा रहे सवालों के तहत आज उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कहा कि मनमोहन सिंह की सरकार के वक्त आप कभी भी धरने, उपवास पर बैठ जाते थे, परन्तु अब क्यों नहीं बैठते?, जिन समस्याओं को लेकर आपने धरने दिए, उपवास किए वे तो अब भी यथावत हैं. 
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आज केन्द्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  ने पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला निकाल दिया है, अब मामा क्यों चुप हैं. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में तो धरने, उपवास पर बैठते थे, अब क्यों नहीं बासमती की मांग उठा रहे हो. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पंचायती राज को सशक्त करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय स्थापित किया था. मोदी सरकार ने नियोजित रूप से पंचायती राज का गला घोंट कर उसे समाप्त प्राय: कर दिया. इस मंत्रालय के तहत दो प्रमुख कार्यक्रम चलाए जाते थे. पहला, देश के पिछड़े जिलों का विकास और दूसरा, पंचायतों को सशक्त करने के लिए राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान चलाया था. मोदी सरकार ने दोनों कार्यक्रमों को 2015-16 के बाद बंद कर दिया.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि  कांग्रेस सरकार ने मध्यप्रदेश के 30 पिछड़े जिलों को आगे लाने के लिए पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि  कार्यक्रम 2006-07 से प्रारंभ किया था, जिसके तहत 2013 -14 तक मध्यप्रदेश पर  2995.59 करोड़ रुपए खर्च किए. उन्होंने कहा कि अलीराजपुर , अनूपपुर , अशोकनगर, बालाघाट, बड़वानी, बैतूल, बुरहानपुर, झाबुआ, मंडला, टीकमगढ, डिंडोरी, श्योपुर इत्यादि पिछड़े 30 जिलों का  अनुदान बंद. उन्होंने कहा कि  मध्यप्रदेश की पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान को भी अनुदान बंद कर दिया. प्रधानमंत्री ने आखरी वर्ष  2015-16 में  इस हेतु प्रावधानित किए मात्र 41.63 करोड़ और दिए सिर्फ़ 10.8 करोड़.  कमलनाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फरवरी 2014 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह  को पत्र लिखकर धरने पर बैठे थे कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल की पहचान, जो जियोग्राफिकल इंडिकेशन ने स्वीकारी है, को एपीडा द्वारा स्वीकारा नहीं जा रहा है. ये मध्यप्रदेश के किसानों के साथ कांग्रेस सरकार का अन्याय है.  अब क्या हुआ मामा , जब मोदी सरकार ने फरवरी 2016 में आपकी मांग को ठुकरा कर आदेश दिया कि मध्यप्रदेश के किसान अपने चावलों को बासमती की पहचान नहीं दे सकेंगे? मध्यप्रदेश में 2 लाख हेक्टेयर के 13 जिलों, विदिशा ,सीहोर होशंगाबाद, नरसिंहपुर, जबलपुर, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया ,भिंड ,श्योपुर, मुरैना,रायसेन के किसानों को मोदी ने कहा कि वे अपने चावल  बासमती के नाम से नहीं बेच सकेंगे. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मामा, मध्यप्रदेश के बासमती चावल उत्पादक किसानो के लिए अब धरने का स्वांग भी नही करोगे? अब क्या मोदी सरकार से डर लगता है या कांग्रेस सरकार के समय दिखावा कर रहे थे?

छोटे दल मौन, इंतजार कर रहे भाजपा, कांग्रेस की सूचियों का


मध्यप्रदेश में चुनाव की घोषणा के पहले से मैदानी ताकत दिखाने वाले छोटे और क्षेत्रीय दल इन दिनों मौन साधे हुए हैं. एट्रोसिटी एक्ट के विरोध के तहत पार्टी बनी सपाक्स भी अपनी चुनावी रणनीति का खुलासा नहीं कर पा रही है. ये सभी दल भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों की सूचियों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि टिकट कटने के बाद बागी बनने वाले उम्मीदवारों को वे अपने पक्ष में कर सकें.
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी सहित राज्य के अन्य क्षेत्रीय दल और एट्रोसिटी एक्ट के विरोध के बाद जन्मी सपाक्स पार्टी द्वारा भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों पर जमकर दबाव बनाया जा रहा था, रैलियों और सभाएं कर भीड़ जुटाते हुए शक्ति प्रदर्शन किए जा रहे थे, मगर अब ये सभी दल एकदम शांत हो गए हैं. बसपा ने प्रदेश में 50 प्रत्याशियों की सूची जारी की है और शेष प्रत्याशियों की घोषणा वह नवंबर माह में करेगी. इसी तरह समाजवादी पार्टी ने अब तक केवल 17 प्रत्याशी घोषित किए हैं, जबकि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने एक भी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है. बसपा और सपा ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में ही अब तक प्रत्याशी चयन प्रक्रिया को अंजाम दिया है. दोनों ही दल जहां पर अपना प्रभाव नहीं है या फिर जहां पर उनका प्रभाव कम है, वहां पर दूसरे दलों के ऐसे नेताओं का इंतजार कर रहे हैं, जो टिकट न मिलने पर नाराज होकर उनके दल में शामिल होंगे.
वहीं जय युवा आदिवासी शक्ति संगठन (जयस) द्वारा मध्यप्रदेश के मालवा अंचल में खासा प्रभाव बनाने की बात कही थी, मगर यह संगठन भी अब तक अपने प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाया है. संगठन के डा. हीरालाल अलावा यह कह रहे हैं कि उनके प्रत्याशियों की चयन प्रक्रिया चल रही है, जल्द ही प्रत्याशी घोषित होंगे, मगर वास्तव में वे कांग्रेस के  साथ चल रही गठबंधन की बात को लेकर कांग्रेस के जवाब का इंतजार कर रहे हैं. 
राज्य में जनता दल यू ने भी अब तक एक भी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है, जबकि दल के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप जायसवाल ने यह घोषणा की है कि वे राज्य में सौ से ज्यादा स्थानों पर अपने प्रत्याशी मैदान उतारेंगे. जद यू द्वारा भी प्रत्याशियों को लेकर अब तक केवल आवेदन मंगवाए गए हैं, मगर उन आवेदनों पर विचार तक नहीं किया गया है. जद यू भाजपा और कांगे्रस के उन उम्मीदवारों का इंतजार कर रही है, जो टिकट न मिलने की स्थिति में बगावत कर सकते हैं. जद यू की तरह अन्य क्षेत्रीय दल भी इसी इंतजार में अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं कर पा रहे हैं. 
बहुजन संघर्ष दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष फूल सिंह बरैया का कहना है कि वे अपने दल के प्रत्याशियों की घोषणा 1 नबंवर के बाद करेंगे. बरैया ने कहा कि अगर कोई दूसरे दल से आकर हमसे टिकट मांगेंगा तो हम उसे टिकट देंगे. हमने तय किया है कि हम जीताऊ उम्मीदवार को मैदान में उतारेंगे. वहीं एट्रोसिटी एक्ट के विरोध के बाद सपाक्स पार्टी बनने वाले सपाक्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी खुद प्रदेश भर में घूम आए और प्रत्याशी चयन को लेकर जिला स्तर पर चर्चा कर चुके हैं, मगर वे भी अब तक अपने दल के प्रत्याशियों की घोषणा नहीं कर पाए हैं. सपाक्स भी भाजपा या फिर कांग्रेस छोड़कर सपाक्स में शामिल होने वाले को अपना प्रत्याशी बनाएगी. 
कांग्रेस से ज्यादा भाजपा को खतरा
टिकट वितरण के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में बगावत के आसार नजर आ रहे हैं, मगर कांग्रेस से ज्यादा भाजपा में यह स्थिति निर्मित होती दिखाई दे रही है. कांगे्रस द्वारा इस बार रणनीति के तहत टिकट वितरण किए जा रहे हैं, जिसके चलते विवाद वाले स्थानों पर लगातार और कई आधारों पर स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा चर्चा की जा रही है. वहीं भाजपा में अब तक चुनाव समिति द्वारा पैनल तैयार किए गए हैं, इसी दौरान विरोध करने और दावेदारी करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. विरोध करने वाले प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रदर्शन कर शक्ति प्रदर्शन तक करने से नहीं चूके रहे हैं.इसके देखते हुए टिकट वितरण के बाद भाजपा में बागियों की संख्या इस बार ज्यादा नजर आने की संभावना है.

भाजपा के 118, कांग्रेस के 40 विधायक थे करोड़पति

 54 विधायकों ने जमा नहीं किया आयकर रिटर्न 

मध्यप्रदेश की 14 वीं विधानसभा में 72 फीसदी विधायक करोड़पति थे. इनमें 118 भाजपा के और 40 विधायक कांग्रेस के थे. वहीं बहुजन समाज पार्टी का एक विधायक करोड़पति था, जबकि 2 निर्दलीय भी करोड़पति थे. वहीं 54 ऐसे भी विधायक थे, जिन्होंने आयकर रिटर्न जमा नहीं किया था.
मध्यप्रदेश की 14 वीं विधानसभा में 72 प्रतिशत विधायक करोड़पति थे, जो 2008 की तुलना में 34 फीसदी ज्यादा था. 2008 के विधानसभा चुनाव में निर्वाचित हुए विधायकों में 84 विधायक करोड़पति थे. यह जानकारी मध्यप्रदेश इलेक्शन वाच द्वारा विधायकों के संपत्ति के विश्लेषण द्वारा दी गई है. इलेक्शन वाच द्वारा दी जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में 2013 के विधानसभा चुनाव में 161 विधायक करोड़पति थे. जबकि 2008 में करोड़पति विधायकों की संख्या 84 थी. करोड़पति विधायकों में भाजपा के 118, कांग्रेस के 40, निर्दलीय 2, बहुजन समाज पार्टी के 1 विधायक थे. सर्वाधिक संपत्ति की घोषणा करने वाले विधायकों  में विजयराघवगढ़ से भाजपा के विधायक संजय पाठक 114 करोड़, रतलाम शहर के भाजपा विधायक चेतन्य कश्यप 120 करोड़, तेंदूखेड़ा से भाजपा विधायक संजय शर्मा 65 करोड़, पिछोर से कांग्रेस के विधायक के.पी. सिंह कक्काजू 60 करोड़ और भोजपुर से भाजपा विधायक सुरेन्द्र पटवा 38 करोड़ शामिल थे. विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक ने सबसे ज्यादा 8 करोड रुपए की आय की घोशणा की थी. वहीं तेंदूखेड़ा के भाजपा विधायक संजय शर्मा ने 3 करोड़ रुपए एवं दमोह से भाजपा विधायक जयंत मलैया ने 88 लाख रुपए की आय की घोषणा की थी.
इलेक्शन वाच के विश्लेषण के अनुसार सबसे कम संपत्ति वाले विधायकों में इंदौर क्रमांक 3 की भाजपा विधायक ऊषा ठाकुर 1.38 लाख, झाबुआ से भाजपा विधायक शांतिलाल भिलवाल 4.88 लाख, जतारा से कांग्रेस विधायक दिनेश अहिरवार 6.02 लाख, गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य 10 लाख और रैंगाव से बसपा विधायक ऊषा 12 लाख थीं.
54 ने नहीं भरा था आयकर रिटर्न
इलेक्शन वाच के विश्लेषण के अनुसार राज्य के 54 विधायक ऐसे थे, जिन्होंने आयकर रिटर्न जमा नहीं किया था. वहीं 19 विधायक ऐसे थे जिन्होेंने अपने पैन अकाउंट (पैन नंबर ) का विवरण नहीं दिया था.
सबसे ज्यादा देनदारी वाले विधायक थे संजय पाठक
21 विधायक ऐसे भी थे, जिन्होेंने अपनी देनदारी 1 करोड़ रुपए या उससे ज्यादा की बताई थी. इनमें सबसे ज्यादा देनदारी विजयराघवगढ़ के भाजपा विधायक संजय पाठक की देनदारी 58 करोड़ थी. पाठक के अलावा भोजपुर के भाजपा विधायक सुरेन्द्र पटवा की देनदारी 34 करोड़ उज्जैन दक्षिण  से भाजपा विधायक डा. मोहन यादव ने अपनी देनदारी 5 करोड़ रुपए बताई थी. 

रविवार, 28 अक्टूबर 2018

विरोध के शिकार हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह

भारतीय जनता पार्टी में प्रत्याशी चयन को लेकर चल रही बैठकों के दौरान प्रदेश कार्यालय में पर दावेदारों द्वारा किए जाने वाला हंगामा आज रविवार को भी जारी रहा. चुनाव समिति की बैठक में शामिल होने पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को भी दावेदारों द्वारा की गई नारेबाजी का सामना करना पड़ा.
प्रत्याशी चयन को लेकर प्रदेश चुनाव समिति की आज बैठक थी. इस बैठक में शामिल होने के लिए दोपहर बाद जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश कार्यालय पहुंचे तो दावेदारों ने हंगामा करना शुरु कर दिया. सुरखी और बड़ामलहरा विधानसभा क्षेत्रों से आए कार्यकर्ताओं द्वारा यह हंगामा किया गया. सुरखी से आए कार्यकर्ताओं द्वारा वर्तमान विधायक पारुल साहू को टिकट दिए जाने की मांग की. कार्यकर्ताओं का कहना है कि सांसद लक्ष्मीनारायण यादव के पुत्र इस क्षेत्र में प्रचार-प्रसार में जुटे हैं. अगर पारुल को टिकट नहीं दिया गया तो वे सामूहिक इस्तीफा दे देंगे. वहीं छतरपुर जिले के बड़ामलहरा से आए कार्यकर्ताओं ने रेखा यादव का विरोध किया. रेखा यादव वर्तमान में विधायक है, कार्यकर्ताओं का कहना था कि रेखा यादव बाहरी है, उन्हें इस बार क्षेत्रीय  प्रत्याशी चाहिए.

मामा ने किया लाखों आदिवासियों को घर-बदर


कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ आज नौवां प्रश्न पूछते हुए  आदिवासियों के मुद्दे को लेकर शिवराज सरकार को घेरा है. उन्होंने ट्वीट किया है कि मोदी सरकार ने दी अंदर की दर्दनाक खबर, मामा ने किया लाखों आदिवासी भाइयों को 'घर-बदर'. मामा, आदिवासियों के सपनों को क्यों रौंदा? क्यों छीन लिया उनका घरौंदा?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज से आज प्रश्न पूछा है कि केंद्र की कांग्रेस सरकार ने 2006 में 10 करोड़ आदिवासी भाइयों को वनों में रहने और वनोपज से आजीविका का अधिकार सुनिश्चित किया. देश में सबसे ज्यादा आदिवासी भाई मध्यप्रदेश में निवास करते है और मध्यप्रदश्ो और छत्तीसगढ़ ,दो ऐसे भाजपा शासित राज्य हैं, जिन्होंने आदिवासियों के वनों में रहने के अधिकार को रौंदा. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश  में 6 लाख 63 हजार 424 आदिवासी परिवारों ने वन में निवास और सामुदायिक उपयोग के लिए मामा सरकार को आवेदन किया. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षक्ष ने कहा कि मामा ने निर्दयतापूर्वक 3 लाख 63 हजार 424 परिवारों के आवेदन को अवैधानिक तरीके से निरस्त कर दिया. लगभग 18 लाख आदिवासी भाइयों के सपनो को रौंद दिया. इसमें 1.54 लाख अनुसूचित जाति, पिछडा वर्ग के परिवारों ने भी दावे किये थे. उनमें से 1.50 लाख ,अर्थात 97.9 प्रतिशत दावे खारिज कर दिए गए. राज्य के 42 जिलों में इस श्रेणी के 100 प्रतिशत दावे खारिज किए गए.
कमलनाथ ने कहा कि संसद द्वारा बनाये गए कानून के मुताबिक यह तय किया गया कि ग्राम वन समिति द्वारा दावों का सत्यापन करके, उन्हें स्वीकृत किया जाएगा.  फिर विकासखंड स्तरीय समिति उन्हें मान्यता देगी. यहां ग्राम वन समिति, ग्राम सभा और विकासखण्ड स्तरीय समिति ने सभी दावों को मान्य किया, किन्तु इन सबके बावजूद शिवराज ने आदिवासी भाइयों के अधिकारो को निर्ममता पूर्वक रौंद दिया. प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष ने कहा कि गंभीर कुपोषण से प्रभावित कोल और मवासी आदिवासी बहुल जिले सतना में 8466 दावों मे से 6398 दावे,अर्थात 75.6 प्रतिशत दावे निरस्त किए गए, सीधी मे 78 प्रतिशत , उमरिया मे 63 प्रतिशत , सिवनी में 67.4 प्रतिशत ,पन्ना में झाबुआ में 65.5 प्रतिशत है. उन्होंने कहा कि व्यापक तौर पर वनाधिकार कानून के तहत अधिकतम 4 हेक्टेयर पर अधिकार देने का प्रावधान है, मगर मध्यप्रदेश में औसतन मात्र 1.4 हेक्टेयर पर यह अधिकार दिए गए.  आदिवासी बहुल झाबुआ में 1 हेक्टेयर , अलीराजपुर में 1.2 हेक्टेयर ,मंडला में 1.4 हेक्टेयर ,बालाघाट में 1.2हेक्टेयर है. इसी प्रकार सीधी में औसतन 0.5 हेक्टेयर ,अनूपपुर में 0.7हेक्टेयर, शहडोल में 0.3 हेक्टेयर, इत्यादि .आश्चर्यजनक रूप से भोपाल आदिवासी जिला न होते हुए भी यहाँ औसतन 7.2 हेक्टेयर जमीन का अधिकार दिया गया. भोपाल में 7391 हेक्टेयर भूमि पर 1026 दावे स्वीकृत किये गए. इनमें से आदिवासी भाइयों के सिर्फ 210 दावे थे.
भाजपा नहीं देगी जवाब
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा 40 दिन 40 सवाल की श्रृंखला शुरु कर भाजपा और सरकार से सवाल किए जा रहे हैं, मगर भाजपा ने इनके जवाब न देने की रणनीति तय की है. भाजपा पदाधिकारियों का कहना है कि जिन सवालों को लेकर कांग्रेस सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, वे बेकार के है, क्योंकि पिछले दिनों ही पार्टी विज्ञापनों के माध्यम से जनता को आंकड़ों के साथ सारे सवालों के जवाब दे चुकी है, ऐसे में अब फिर से इन सवालों के जवाब देना जरुरी नहीं. हम जनता से सीधे संवाद कर रहे हैं और अब कमलनाथ खुद सवाल बन गए हैं. जनता को सब पता है और चुनाव में इसका नतीजा भी देखने को मिल जाएगा. 

पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष के इस्तीफे की अफवाह


मध्यप्रदेश के पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष और संघ के वरिष्ठ नेता तपन भौमिक के इस्तीफे अफवाल आज ऐसी फैली की उन्हें अपना स्पटीकरण तक देना पड़ा. भौमिक राजधानी के गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से टिकट की दावेदारी भी कर रह हैं.
मध्यप्रदेश में संघ के वरिष्ठ नेता तपन भौमिक का आज सोशल मीडिया पर इस्तीफा वायरल हो गया. यह इस्तीफा बकायदा उनके पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष वाले लेटर हैड पर जारी हुआ है. इस्तीफा प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत के नाम लिखे पत्र के रुप में है. इस्तीफे के वायरल होते ही भाजपा में हड़कंप मच गया. मामला यहां तक पहुंचा कि संगठन के नेता सकते में आ गए और एक-दूसरे से जानकारी लेते रहे. माहौल कुछ इस तरह हुआ कि तपन भौमिक को स्पष्टीकर देना पड़ा कि यह उनके खिलाफ की गई साजिश है. यहां उल्लेखनीय है कि तपन भौमिक राजधानी की गोविंदपुरा विधानसभा सभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए प्रयास कर रहे हैं, वे इसके लिए लगातार मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर सहित अन्य नेताओं से मुलाकात भी करना चाह रहे हैं. बताया जाता है कि भौमिक तीन दिन से शिवराज सिंह चौहान और नरेन्द्र सिंह तोमर से मिलना चाह रहे थे, मगर उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने अंदर तक नहीं जाने दिया.
वायरल इस्तीफे में कही यह बात
वायरल हुए इस्तीफे में तपन भौमिक ने कहा है कि बाल्यकाल से संघ का स्वयंसेवा रहते हुए, मीसाबंदी रहते हुए, नगर, तहसील, जिला प्रचारक रहते हुए भाजपा का संभागीय संगठन मंत्री जिला संगठन मंत्री, प्रदेश कार्यालय मंत्री रहा और वर्तमान में मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम का अध्यक्ष रहते हुए पूरा जीवन संघ विचार को समर्पित कर दिया, लेकिन कुछ सालों से कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से व्यथित हूं. पिछले तीन दिनों से आपसे मिलकर उज्जैन संभाग के चुनावी परिस्थितियों  पर चर्चा करना चाहता था, मगर सुरक्षाकर्र्मियों ने अंदर जाने नहीं दिया. तीन दिन से मिलने का प्रयास में हूं. यही स्थिति मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के यहां भी उनके साथ हुई. यदि मेरे साथ ऐसा हुआ है तो आम कार्यकर्ता के साथ क्या होगा. 
  बाद में किया खंडन
सोशल मीडिया पर मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष तपन भौमिक के इस्तीफे का पत्र वायरल हुआ हैं. इसमें उनके द्वारा भाजपा से इस्तीफा दिए जाने की बात कही गई है. इसे लेकर तपन भौमिक द्वारा खंडन करते हुए कहा गया है कि यह पत्र न मेरे द्वारा लिखा हैं और न ही वो हस्ताक्षर मेरे हैं. जो लेटर पेड हैं, वह किसी ने स्केन करके इसका दुरुपयोग किया हैं. मैं भाजपा का कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ता हूँ और हमेशा रहूंगा.

मायावती लेंगी सभाएं, केजरीवाल करेंगे रोड शो


मध्यप्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती 8 सभाएं करेंगी. वहीं आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजधानी भोपाल सहित राज्य के 7 शहरों में रोड शो करेंगे.
मध्यप्रदेश में चुनाव के नजदीक आते ही अब राजनीतिक दलों की सक्रियता तेज हो गई है. बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी द्वारा लगातार अपने प्रत्याशी घोषित किए जा रहे हैं, साथ ही पार्टी द्वारा सभाएं और रैलियों के लिए रणनीति भी तय की जा रही है. बसपा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की राज्य में 8 स्थानों पर सभाएं कराने का फैसला लिया है. बसपा द्वारा जहां पर पार्टी का प्रभाव है, वहां पर मायावती की सभाएं कराने की रणनीति बनाई गई है. पार्टी द्वारा तय किए कार्यक्रम के अनुसार  मायावती 16 नवंबर से प्रदेश में दौरे शुरू करेंगी. वे  26 नवंबर तक आठ स्थानों पर सभाएं लेंगी. इसमें एक-एक सभा भोपाल और जबलपुर में भी शामिल है. इसके अलावा रीवा और चंबल संभाग में तीन-तीन सभाएं होंगी. बसपा का इन क्षेत्रों में प्रभाव है.  दूसरी और आम आदमी पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व मध्यप्रदेश में सक्रिय हो गया है. आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद सुशील गुप्ता ने राजधानी में नुक्कड़ सभाएं कर पार्टी का चुनाव अभियान का शुभारंभ कर दिया है. पार्टी के 26 स्टार प्रचारक भी जल्द ही प्रदेश में आमद देंगे. पार्टी ने राष्ट्रीय संयोजक और  दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल प्रदेश में सात स्थानों पर रोड शो कराने का फैसला लिया है,  जिन शहरों में केजरीवाल का रोड शो तय हुआ है उनमें भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, छतरपुर, रीवा और जबलपुर शामिल है. 

पात्रा की फजीहत पर शाह हुए नाराज


मध्यप्रदेश में भाजपा के  राष्ट्रीय प्रवक्ता संबिद पात्रा की शनिवार को प्रेस कांफं्रेस के बाद कांग्रेस की शिकायत पर हुई एफआईआर को लेकर भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदेश संगठन से खफा है. राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश के नेताओं से इस बारे में जानकारी ली और सवाल-जबाब कर डाले.
मध्यप्रदेश में भाजपा ने विधानसभा चुनाव को देखते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता संबिद पात्रा को मीडिया की कमान सौंपी है. पात्रा को राजधानी भोपाल में शनिवार को  सड़क पर पत्रकार वार्ता करना महंगा  पड़ गया. पात्रा जब नेशलन हेराल्ड को लेकर सवाल उठा रहे थे, तभी पत्रकारों ने उन्हें घेरा और जिस बिल्ंिडग के निर्माण की बात वे कर रहे थे, उसके निर्माण को लेकर भाजपा सरकार के कार्यकाल में स्वीकृति देने की बात कही और सवाल दागे. इस बीच पात्रा असहज हुए और पत्रकार वार्ता छोड़कर चले गए.दूसरी ओर पात्रा की इस पत्रकार वार्ता को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग को शिकायत की कि पात्रा ने बिना अनुमति के सड़क पर पत्रकार वार्ता की. कांग्रेस की शिकायत पर आयोग ने जांच कराई और मामले में दोषी पाए जाने पर पात्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का फैसला सुनाया. 
पात्रा के साथ हुई इस कार्यवाही की जानकारी जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को मिली जो वे खफा हो गए. उन्होंने प्रदेश मीडिया प्रभारी सहित अन्य नेताओं से चर्चा की और नाराजगी जताई. सूत्रों के अनुसार प्रदेश के कुछ नेताओं ने यह जानकारी शाह को दी कि सरकार ने जिन पत्रकारों को लाभांवित किया वे ही पत्रकार इस तरह के सवाल दाग रहे थे.
राष्ट्रीय नेताओं को कमान देने से प्रदेश के नेता भी हैं खफा
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव की कमान राष्ट्रीय नेताओं को दिए जाने से प्रदेश के नेता और पदाधिकारी भी खफा है. शाह के कहने पर केन्द्रीय मंत्री प्रधान को प्रदेश प्रभारी बनाया गया है. जबकि मीडिया की जिम्मेदारी संबित पात्रा सहित उत्तरप्रदेश के मीडिया से जुड़े पदाधिकारियों को सौंपी है. इससे प्रदेश के नेता अपने को उपेक्षित मान रहे हैं. एक नेता ने तो बीते दिनों मीडिया कार्यशाला में संबित पात्रा की उपस्थित में यहां तक कह दिया था कि  ‘आप मेहमान हैं, मेहमान की तरह रहें’ भाजपा के मध्यप्रदेश संगठन और मीडिया विभाग की कार्यशैली का उदाहरण वरिष्ठत नेता देश के अन्य राज्यों में देते रहे हैं.

मेरे प्रदेश का युवा नौकरी देने वाला बने: शिवराज


राजधानी भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित युवा मतदाता टाउन हाल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं चाहता हूं कि मेरे प्रदेश के युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें. आपकी मदद के लिए हम हैं, जैसी अनेक योजनाएं आपकी सहायता के लिए हमने प्रारम्भ की हैं.
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि  देश को बनाने का काम, प्रदेश को गढ़ने का काम युवा शक्ति ने ही किया है. दुनिया को बनाने वाले जिनके दिल में कुछ कर दिखाने का जज्बा और आंखों में सपने होते हैं, हर संकल्प को पूरा करके ही चैन की सांस लेने वाले ही असली युवा है. उन्होंने कहा कि युवा में संकल्प की वह शक्ति है, जिससे वह दुनिया को बदल देते हैं. जगदगुरु शंकराचार्य से लेकर हम देश की आजादी के लिए शहीद हुए क्रांतिकारियों तक देखें, तो बहुत ही कम उम्र में युवाओं ने वह काम कर दिए हैं, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती.  
मुख्यमंत्री ने कहा कि  इंसान यदि ठान ले तो कठिन से कठिन काम भी कर सकता है और बड़ी से बड़ी चुनौतियों को भी पार कर सकता है. मैं छात्र जीवन से ही अन्याय के खिलाफ संघर्ष करता रहा और स्वामी विवेकानंद सहित विभिन्न महापुरुषों की किताबें पढ़ी, जिन्होंने मुझे राह दिखाई. नौजवानों की बात अगर आती है तो उनके लिए सबसे जरूरी है शिक्षा. कांग्रेस ने शिक्षा व्यवस्था चौपट कर एक पीढ़ी का भविष्य बर्बाद कर दिया. हमने शिक्षा की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिये, बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करने के लिए अनेक प्रयास किए. बच्चों के लिए एक समृद्ध मध्यप्रदेश का नवीन रास्ता हमें तैयार करना है. इसके लिए आपके सुझाव आमंत्रित किये हैं. युवाओं के सुझावों पर ही रोजगार के लिए विभिन्न योजनाओं व प्रयासों से अनेक अवसर हमने पिछले वर्षों में सृजित किए. युवाओं से मेरा यही कहना है कि कोशिश करो अपना उद्यम खड़ा करने की.
विवादों में घिरा टाउनहाल, स्कूली बच्चे पहुंचे
नवमतदाता को भाजपा की ओर से आकर्षित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा द्वारा आयोजित टाउनहाल कार्यक्रम विवादों में आ गया. इस कार्यक्रम में आज बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे आए थे. भाजयुमो द्वारा ऐसा इसलिए किया कि हाल पूरी तरह भर जाए.  कार्यक्रम में राजधानी के आनंदराम टी सहानी स्कूल बैरागढ़, हमीदिया स्कूल, ज्ञानोदय स्कूल सहित अन्य स्कूलों के 12 से 15 आयु वर्ष के छात्र-छात्राओं को कार्यक्रम में शामिल कर भीड़ का हिस्सा बनाया गया. कार्यक्रम में इन छोटे-छोटे बच्चों के अलावा भाजपा के कद्दावर पदाधिकारी, मंत्री, सांसद, महापौर, विधायक और कार्यकर्ता ही नजर आए. जबकि इस कार्यक्रम का उद्देश्य था कि युवा टाउन हॉल में युवा डॉक्टर, इंजीनियर, उद्यमी और स्वयंसेवी संस्थाओं में काम करने वाले युवा शामिल हो.

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2018

बसपा ने जारी की दूसरी सूची


मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बहुजन समाज पार्टी ने आज दूसरी सूची जारी कर दी है. जबकि समाजवादी पार्टी ने तीसरी सूची जारी की है.
बहुजन समाज पार्टी द्वारा जारी की सूची में सुमावली से मानवेन्द्र सिंह सिकरवार, गुन्नौर से जीवनलाल सिद्धार्थ, नेपानगर से अशोक मार्को,  मऊगंज से मृगेन्द्र सिंह, त्योंथर से गीता राजमणि मांझी, गुढ़ से मुनिराज पटेल, अलीराजपुर से भदिया सिंह डाबर, चित्रकूट से रावेन्द्र सिंह पटवारी, टिमरनी से भागीरथ इवने, सतना से पुष्कर सिंह तोमर, बड़वानी से सुमेर सिंह बडोले, झाबुआ से बालूसिंह निनामा, मेहगांव से कौशल तिवारी, कोलारस से अशोक शर्मा, शिवपुरी से मोहम्मद इरशाद राइन, लखनादौन से जलसो उइके, पोहरी से कैलाश कुशवाह, सिंगरौली से सुरेश सहवाल, देवसर से शिवशंकर प्रसाद साकेत, ग्वालियर ग्रामीण से रामअवतार सिंह गुर्जर, डबरा से पी.एस. मंडलोई, मानपुर से रेखा कौल, जबलपुर केंटोमेंट से राजेश सिंह, पनागर से जवाहर अहिरवार, बैरसिया से अनीता अहिरवार, श्योपुर से तुलसी नारायण मीणा और भैंसदेही से नर्मदी वाई उइके को प्रत्याशी बनाया है.
सपा ने घोषित किए सात प्रत्याशी
समाजवादी पार्टी ने अपनी तीसरी सूची जारी करते हुए राजगुरु यादव को जिला शिवपुरी की पोहरी , बच्छ राज सिंह यादव को जिला गुना की बमोरी,  रामनिवास उरमलिया को जिला सतना की मैहर ,पंडित बी के बौहरे जिला भिंड की अटेर, रति भान सिंह यादव को जिला अशोकनगर की मुंगावली, नरेन्द्र प्रताप सिंह को जिला सीधी की सिहावल, डॉ शिशुपाल सिंह यादव को जिला टीकमगढ़ की पृथ्वीपुर, प्रहलाद सिंह लोधी को जिला पन्ना की पवई, शिखा सिंह को जिला सिंगरौली की सिंगरौली विधानसभा से समाजवादी पार्टी प्रत्याशी घोषित किया गया है .

मैदान छोड़, बैठकों का दौर तेज

 भाजपा भोपाल में और कांग्रेस नेता दिल्ली में हैं सक्रिय

मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के नेता इन दिनों कमरा बंद बैठकों में सक्रिय हो गए हैं. भाजपा की जनआशीर्वाद यात्रा के बाद आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे और चुनाव दृष्टिपत्र समिति के पदाधिकारियों के साथ बैठक की.  मुख्यमंत्री को भाजपा कार्यालय में देख टिकट के दावेदारों ने उन्हें भी घेर लिया.
मध्यप्रदेश में इन दिनों विधानसभा चुनाव के लिए चल रही प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल जुटे हुए हैं. कांग्रेस नेता लंबे समय से दिल्ली में नामों पर मंथन कर रहे हैं, तो भाजपा नेता राजधानी भोपाल में केन्द्रीय मंत्री और प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के नेतृत्व में लगातार बैठकें कर रहे हैं. भाजपा की बैठकों में आज से ज्यादा सक्रियता दिखाई दी. जनआशीर्वाद यात्रा के समाप्त करने के बाद अब खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन बैठकों में शामिल होने लगे. आज उन्होंने चुनाव अभियान समिति के अलावा दृष्टिपत्र समिति की बैठकों में हिस्सा लिया. मुख्यममंत्री जब भाजपा कार्यालय पहुंचे तो भी टिकट के दावेदारों से घिरे नजर आए. मुख्यमंत्री ने सभी से उनकी बात सुनी और कहा कि जो निर्णय समिति लेगी उसे सभी को मान्य करना होगा. 
विधायक का विरोध करने पहुंचे लोग
प्रदेश भाजपा कार्यालय में आज श्योपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक दुर्गालाल विजय का विरोध करने के लिए लोग पहुंचे थे. श्योपुर विधानसभा क्षेत्र के महावीर सिंह सिसोदिया के समर्थन में भाजपा कार्यालय में नारेबाजी करते नजर आए. उन्होंने भाजपा पदाधिकारियों से मुलाकात कर कहा कि इस बार दुर्गालाल विजय को टिकट न दिए जाए, बल्कि क्षेत्र से वे सिसोदिया को उम्मीदवार के रुप में देखना चाहते हैं. कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विजय ने विधायक रहते हुए नगर पालिका और नगर परिषद के चुनाव में भाजपा को हरवाया है.
प्रियंका धरने में शामिल हुई तो सांबित बैठकें करते रहे
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर मीडिया सेल में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही राष्ट्रीय नेताओं को मध्यप्रदेश की जिम्मेदारी सौंप दी है. भाजपा की ओर से संबित पात्रा दो दिनों से राजधानी में मीडिया सेल की टीम के साथ बैठकें कर उन्हें टिप्स दे रहे हैं. वे मीडिया टीम को बार-बार आक्रामक होने की बात कह रहे हैं. वहीं कांग्रेस की प्रियंका चतुर्वेदी भी इन दिनों भोपाल में डेरा डाले हुए हैं. वे आज सीबीआई आफिस के सामने प्रदर्शन में शामिल हुई और धरने पर भी बैठीं. प्रियंका महिला कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ पैदल प्रदर्शन करते हुए सीबीआई कार्यालय पहुंची थी.
अब जनादेश यात्रा निकालेंगे शिवराज
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जनआशीर्वाद यात्रा को बीच में रोकने के बाद भाजपा ने फैसला लिया है कि अब शिवराज सिंह चौहान जनादेश यात्रा पर निकलें. उनकी यह यात्रा 31 अक्तूबर से भोजपुर से शुरू होगी. इस बात की जानकारी भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने दी है. झा ने कहा है कि वोट के लिए मुख्यमंत्री अब जनादेश यात्रा निकालेंगे. मुख्यमंत्री शिवराज आम लोगों के बीच अब जनादेश लेने जाएंगे. इस दौरान उनके साथ पार्टी के कई बड़े नेता भी शामिल रहेंगें, जिस तरह से जनआशीर्वाद यात्रा में रहें. इस यात्रा के माध्यम से फिर मुख्यमंत्री जनता से सीधा रुबरु होंगे और जनादेश लेंगे.

मामा के मुखौटे में निकले कई खोट

कमलनाथ ने पूछा मामा बच्चों के साथ क्यों किया विश्वासघात?

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज सरकार से प्रदेश की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल पूछा है. कमलनाथ ने अपने ट्वीट किया है कि मोदी सरकार से जानिए मामा सरकार की स्कूली शिक्षा का रोंगटे खड़े कर देने वाला सच.' बच्चों के भविष्य को पहुंचाई चोट, मामा के मुखौटे में निकले कई खोट. मामाजी, बच्चों से क्यों किया विश्वासघात ? स्कूली शिक्षा को क्यों पहुंचाया गंभीर आघात ?
कमलनाथ ने आज सातवें  सवाल के जरिए पूछा कि मध्यप्रदेश के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चत्तर माध्यमिक, कुल 150762 स्कूलों में से 1 लाख 6 हजार से अधिक,अर्थात 71 प्रतिशत स्कूलों मे बिजली पहुंची ही नहीं है.  उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के नौनिहालों की आधुनिक शिक्षा का हाल यह है कि मात्र 15. 7 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर एजुकेशन की व्यवस्था है, अर्थात राज्य के 1.22 लाख स्कूलों में आज भी कम्प्यूटर शिक्षा नहीं है. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के सिर्फ 15.6 प्रतिशत माध्यमिक स्कूलों में और मात्र 19 प्रतिशत उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में लाइब्रेरी की व्यवस्था है. सरकारी स्कूलों में तो यह नगण्य है. 
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र की डाईस-2017 रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में 19 हजार स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे चलते हैं. उन्होंने कहा कि 14.6 हजार स्कूलों में बारिश के दिनों में पहुँच का रास्ता ही नहीं रहता,यानी इन स्कूलों में बच्चे पढ़ने ही नहीं जा पाते. कमलनाथ ने कहा कि राज्य में 46.6हजार स्कूलों में अब भी नहीं बन पाया बच्चों के लिए खेल मैदान. प्रदेश के 93 हजार से अधिक स्कूलों में आज भी दिव्यांग बच्चों के लिये नहीं बन पाया है रैंप.
कमलनाथ ने कहा कि आज भी मध्यप्रदेश के 4451 स्कूलों में सिर्फ़ एक ही कमरा है। यानी चार से आठ वर्ग के बच्चे एक ही रूम में पढ़ते हैं.  उन्होंने कहा कि कक्षा 1 से 5 तक की स्कूली शिक्षा के दौरान ही एक साल मे 3.57लाख बच्चों को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है. कक्षा 6 से 8 तक की स्कूली शिक्षा के दौरान ही 1 साल में 3.42लाख बच्चो को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है कुल मिलाकर कक्षा 1से8 तक 1 साल मे 7.17 लाख बच्चों को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है. कंट्रोलर आॅडिटर जनरल की रिपोर्ट बताती है कि 2010 से 2016 तक माध्यमिक शिक्षा अर्थात आठवीं तक के 42 लाख 46 हजार बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत 1 से 8 वीं तक मुफ्त किताबें बांटे जाने का प्रावधान है, कैग ने अपनी 2017 की रिपोर्ट में बताया कि 2010 से 2016 तक 42 लाख 88 हजार किताबें बाँटी ही नहीं गई. उन्होंने कहा कि कैग की 2017 की रिपोर्ट बताती है कि मध्यप्रदेश के माध्यमिक स्कूलों में 63 हजार 851 शिक्षकों की कमी है. उन्होंने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने स्कूल शिक्षा के लिए आवंटित कुल बजट में से 2011-2016 के बीच 7284.61 करोड़ रुपए (आवंटन का 31 प्रतिशत) जारी ही नहीं किये। सरकार बच्चों के शिक्षा के अधिकार के हनन में सबसे बड़ी अपराधी रही. कल्पना कीजिए बगैर पुस्तक , बगैर शिक्षक ,बगैर कंप्यूटर , बगैर बिजली लाखों बच्चे अपना भविष्य कैसे सँवार सकते हैं.

43 विधानसभा क्षेत्रों में शिवराज नहीं पहुंचे आशीर्वाद लेने



मध्यप्रदेश में चौथी बार सरकार बनाने के लिए जनआशीर्वाद यात्रा पर निकले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 43 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं से आशीर्वाद नहीं ले पाए. राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर उन्हें यात्रा समाप्त करनी पड़ी. मुख्यमंत्री की इस यात्रा को बीच में रोकने पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ  ने इस पर तंज कसा है कि जनविरोध को देखते हुए यात्रा को रोकना पड़ा है. वहीं कांग्रेस के विधायक डा. गोविंद सिंह ने यात्रा पर खर्च किए छह करोड़ रुपए की वसूली भाजपा से करने की मांग की है.
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उज्जैन से जनआशीर्वाद यात्रा की शुरुआत की थी. दो हाईटेक रथों पर सवार होकर वे 187 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं से आशीर्वाद ले भी चुके थे, मगर गुरुवार को उन्हें अपनी यह यात्रा बीच में ही रोकनी पड़ी. बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर मुख्यमंत्री को यात्रा बीच में रोकने पड़ी. यात्रा के रुकने से मुख्यमंत्री को इस बार चुनाव से पहले 43 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं के आशीर्वाद से वंचित रहना पड़ा. यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने 43 दिन के सफर में 350 जनसभाएं की है. 14 जुलाई से शुरु हुई इस यात्रा ने 4100 किलोमीटर का सफर तय किया था.
पहले भी रुकी और विरोध का सामना भी किया
मुख्यमंत्री की जनआशीर्वाद यात्रा को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के चलते पहले भी सात दिनों के लिए यात्रा को रोकना पड़ा था. इसके बाद गणेश उत्सव और दुर्गा उत्सव के चलते कई स्थानों पर यात्रा को स्थगित भी किया और कई स्थानों पर कार्यक्रम भी बदले गए. इतना ही नहीं इस बार मुख्यमंत्री को अपनी इस यात्रा के दौरान विरोध का सामना भी करना पड़ा था. राज्य के चुरहट में तो रथ पर चप्पल तक फेंकी गई थी. इसे लेकर जमकर राजनीति भी हुई थी. यहां उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में मुख्यमंत्री अपनी इस जनआशीर्वाद यात्रा के जरिए 200 विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचे थे, तब उन्हें 165 सीटें मिली थी. इस बार मुख्यमंत्री की यह यात्रा 187 विधानसभा क्षेत्रों में ही हो पाई है.
 जन विरोध को भांपकर बंद की जनआशीर्वाद यात्रा
प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि शिवराज सिंह की जन आशीर्वाद यात्रा बनाम जबरन आशीर्वाद यात्रा एक मजाक बनकर रह गयी थी. विपरीत परिस्थितियों को भांपते हुए शिवराज सिंह ने घबराकर यह यात्रा चुनावी व्यस्तताओं का बहाना बनाकर स्वयं बंद कर दी है, जबकि उन्होंने बड़े दंभ के साथ ऐलान किया था कि इसे चुनाव तक चलाएंगे. यात्रा बंद करने का असली कारण जनता द्वारा यात्रा से दूरी बना लेना है. मुख्यमंत्री को जनआशीर्वाद यात्रा में जनता नदारत दिख रही थी, क्योंकि आचार संहिता लगने के बाद सरकारी कर्मचारी, पटवारी, आशा-ऊषा कार्यकर्ता सब गायब हो रहे थे. मुख्यमंत्री को यात्रा के दौरान हजारों शिकायती आवेदन भी मिलने लगे थे.
छह करोड़ की राशि भाजपा से वसूली जाए
डॉ. गोविन्द सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक एवं पूर्व मंत्री डा. गोविन्द सिंह ने आरोप लगाया है कि जनजातीय विभाग में आदिवासियों के विकास की लगभग छ: करोड़ की राशि मुख्यमंत्री के सभाओं के नाम पर वसूली जा रही है. उनका कहना है कि यह राशि भारतीय जनता पार्टी से वसूली जाए. डॉ.  सिंह ने इस संबंध में चुनाव आयुक्त को भी पत्र लिखा है . डॉ. सिंह का कहना है कि म.प्र. में आदर्श आचार संहिता लगने के बाद तीन दिन पुरानी तिथि में जनजातीय कल्याण विभाग के सचिव राजेश प्रसाद मिश्रा ने आयुक्त जनजातीय विभाग को पत्र लिखकर लगभग छ: करोड़ की राशि मुख्यमंत्री की सभा में हुए व्यय के नाम पर मांगी है. इस राशि का भुगतान म.प्र. माध्यम को किया जाना है.

तीन नये दलों की धमक, कितनी प्रभावित होगी मध्यप्रदेश की राजनीति

आम आदमी पार्टी, सपाक्स और जयस पहली बार चुनाव मैदान में

मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव में इस बार तीन नये दल आम आदमी पार्टी, सपाक्स और जयस पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं. द्विदलीय प्रदेश की राजनीति को ये दल कितना प्रभावित करते हैं, यह तो कहा नहीं जा सकता, मगर राज्य के प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस के अलावा छोटे दलों बसपा, सपा और गोंगपा की राजनीति को  ये दल जरुर प्रभावित कर सकते हैं.
मध्यप्रदेश में राजनीति मुख्य रुप से दो दलीय रही है. दो दलीय राजनीति के चलते कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा की सरकारें बनती रही. बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने भी प्रदेश में काफी मेहनत कर स्थान बनाने का प्रयास किया, मगर इनकी स्थिति क्षेत्रीय दलों के तरह कुछ क्षेत्रों तक सिमट गई. बसपा, सपा के बाद राज्य में 2003 में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का उदय हुआ, जो अपना प्रभाव महाकौशल के बाद कुछ हद तक विंध्य अंचल के उन जिलों में जो छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे हैं, जमा पाई. कुल मिलाकर ये सभी क्षेत्रीय दल बनकर उभरे, मगर अपनी ताकत इतनी नहीं बना पाए कि सरकार बनाने या फिर गिराने में सफल हो पाते. इन दलों के अलावा राज्य में दर्जनों छोटे दल हुए जो कुछ जिलों और संभागों में भी अपना प्रभाव नहीं जमा पाए.
प्रदेश में अब वर्ष 2018 के लिए  हो रहे विधानसभा चुनाव में राज्य इस बार तीन नये दलों आमद दी है. इन दलों में आम आदमी पार्टी, एट्रोसिटी एक्ट के विरोध के बाद बनी सवर्ण वर्ग का नेतृत्व करने वाली सपाक्स और महाकौशल अंचल में जय युवा आदिवासी संगठन (जयस) है. ये तीनों दल मध्यप्रदेश में पहली बार चुनाव मैदान में हैं, इन दलों से इस बार राज्य की राजनीति कितनी प्रभावित होगी, यह तो नहीं कहा जा सकता, मगर भाजपा और कांग्रेस के अलावा सपा, बसपा और गोंगपा के लिए ये दल चुनौती साबित हो सकते हैं.
आप नेताओं में राजनीतिक अनुभव की कमी
मध्यप्रदेश में आम आदमी पार्टी ने चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर मुख्यमंत्री पद के लिए प्रदेश संयोजन आलोक अग्रवाल को चेहरा भी घोषित कर दिया है. पार्टी ने अब तक 11 अलग-अलग सूचियां जारी कर 172 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है. आप ने वैसे तो जिला स्तर पर अपना नेटवर्क बनाया है, मगर इस दल को अब तक अनुभव वाले राजनेता नहींं मिले हैं. अधिकतर पदाधिकारी युवा है, मगर राजनीतिक अनुभव की इन नेताओं में कमी भी है. खुद आलोक अग्रवाल नर्मदा आंदोलन से जुड़े रहे, जो लोगों की समस्याओं को समझते हैं, समस्याओं के समाधान के लिए जूझने वाले नेताओं के रुप में उनकी गिनती है, मगर राजनेता जैसी छवि उनमें कम नजर आती है. अग्रवाल के अलावा आप की मध्यप्रदेश इकाई में ऐसा कोई पदाधिकारी नजर  नहीं आता जिसकी प्रदेश स्तर राजनीति में अपनी पहचान हो. आप के साथ चुनाव मैदान में होने से युवा वर्ग जरुर जुड़ा है, जो वोट काटने वाले प्रत्याशी इस चुनाव में साबित हो सकते हैं, जिससे भाजपा, कांग्रेस के साथ बसपा, सपा और गोंगपा को जरुर फर्क पड़ेगा, मगर सरकार बनाने या बिगाड़ने की स्थिति इस दल में फिलहाल कम ही नजर आ रही है.
भाजपा को प्रभावित कर सकता है सपाक्स
सामान्य, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारियों, कर्मचारियों की संस्था के रुप में सपाक्स का गठन हुआ था. यह संगठन इस वर्ग के कर्मचारियों, अधिकारियों के पदोन्नति में आरक्षण के अलावा एट्रोसिटी एक्ट के लिए लड़ाई लड़ रहा है. संगठन को एट्रोसिटी एक्ट के विरोध के चलते प्रदेश स्तर पर चलाए आंदोलन के दौरान खास पहचान मिली. सपाक्स द्वारा चलाए आंदोलन को मिले समर्थन के बाद सपाक्स ने गांधी जयंती 2 अक्तूबर को प्रदेश में राजनीतिक दल के रुप में पहचान बनाई और राज्य के 230 विधानसभा क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी मैदान में उतारने की घोषणा कर दी. हालांकि अभी चुनाव चिन्ह इस दल को नहीं मिला है, मगर दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी जिलों में जाकर प्रत्याशी चयन प्रक्रिया को अंजाम दे रहे हैं. जल्द ही यह दल अपने प्रत्याशियों की घोषणा करेगा. माना जा रहा है कि सपाक्स के प्रत्याशी भाजपा को इस चुनाव में प्रभावित कर सकता है.
जयस का मालवा में दिखेगा असर
जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन जयस का से भी आदिवासी  समाज का युवा वर्ग जुड़ा है. जयस के संरक्षक डा. हीरालाल अलावा ने युवा पंचायत के जरिए संगठन की पैठ आदिवासी वर्ग के बीच बनाई. मध्यप्रदेश के अलावा आज वे संगठन को राजस्थान और झारखंड में भी पहचान दे चुके हैं. जयस ने 80 विधानसभा क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी मैदान में उतारने की घोषणा की है. जयस का दावा है कि राज्य के 47 आरक्षित सीटों पर तो वह प्रत्याशी मैदान में उतारेगा साथ ही 33 सामान्य वर्ग की सीटों पर भी वह मैदान में होगा. जयस का खासा असर मालवा-निमाड़ में है. इसके प्रभाव को देख कांग्रेस द्वारा गठबंधन की चर्चा भी की जा रही है. माना जा रहा है कि जयस से कांग्रेस 28 सीटों पर तालमेल कर चुनाव मैदान में उतरेगी. अगर ऐसा होता है तो आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर जयस के सहारे कांग्रेस को संजीवनी मिल सकती है.