शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2018

मामा के मुखौटे में निकले कई खोट

कमलनाथ ने पूछा मामा बच्चों के साथ क्यों किया विश्वासघात?

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज सरकार से प्रदेश की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल पूछा है. कमलनाथ ने अपने ट्वीट किया है कि मोदी सरकार से जानिए मामा सरकार की स्कूली शिक्षा का रोंगटे खड़े कर देने वाला सच.' बच्चों के भविष्य को पहुंचाई चोट, मामा के मुखौटे में निकले कई खोट. मामाजी, बच्चों से क्यों किया विश्वासघात ? स्कूली शिक्षा को क्यों पहुंचाया गंभीर आघात ?
कमलनाथ ने आज सातवें  सवाल के जरिए पूछा कि मध्यप्रदेश के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चत्तर माध्यमिक, कुल 150762 स्कूलों में से 1 लाख 6 हजार से अधिक,अर्थात 71 प्रतिशत स्कूलों मे बिजली पहुंची ही नहीं है.  उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के नौनिहालों की आधुनिक शिक्षा का हाल यह है कि मात्र 15. 7 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर एजुकेशन की व्यवस्था है, अर्थात राज्य के 1.22 लाख स्कूलों में आज भी कम्प्यूटर शिक्षा नहीं है. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के सिर्फ 15.6 प्रतिशत माध्यमिक स्कूलों में और मात्र 19 प्रतिशत उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में लाइब्रेरी की व्यवस्था है. सरकारी स्कूलों में तो यह नगण्य है. 
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र की डाईस-2017 रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में 19 हजार स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे चलते हैं. उन्होंने कहा कि 14.6 हजार स्कूलों में बारिश के दिनों में पहुँच का रास्ता ही नहीं रहता,यानी इन स्कूलों में बच्चे पढ़ने ही नहीं जा पाते. कमलनाथ ने कहा कि राज्य में 46.6हजार स्कूलों में अब भी नहीं बन पाया बच्चों के लिए खेल मैदान. प्रदेश के 93 हजार से अधिक स्कूलों में आज भी दिव्यांग बच्चों के लिये नहीं बन पाया है रैंप.
कमलनाथ ने कहा कि आज भी मध्यप्रदेश के 4451 स्कूलों में सिर्फ़ एक ही कमरा है। यानी चार से आठ वर्ग के बच्चे एक ही रूम में पढ़ते हैं.  उन्होंने कहा कि कक्षा 1 से 5 तक की स्कूली शिक्षा के दौरान ही एक साल मे 3.57लाख बच्चों को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है. कक्षा 6 से 8 तक की स्कूली शिक्षा के दौरान ही 1 साल में 3.42लाख बच्चो को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है कुल मिलाकर कक्षा 1से8 तक 1 साल मे 7.17 लाख बच्चों को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है. कंट्रोलर आॅडिटर जनरल की रिपोर्ट बताती है कि 2010 से 2016 तक माध्यमिक शिक्षा अर्थात आठवीं तक के 42 लाख 46 हजार बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत 1 से 8 वीं तक मुफ्त किताबें बांटे जाने का प्रावधान है, कैग ने अपनी 2017 की रिपोर्ट में बताया कि 2010 से 2016 तक 42 लाख 88 हजार किताबें बाँटी ही नहीं गई. उन्होंने कहा कि कैग की 2017 की रिपोर्ट बताती है कि मध्यप्रदेश के माध्यमिक स्कूलों में 63 हजार 851 शिक्षकों की कमी है. उन्होंने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने स्कूल शिक्षा के लिए आवंटित कुल बजट में से 2011-2016 के बीच 7284.61 करोड़ रुपए (आवंटन का 31 प्रतिशत) जारी ही नहीं किये। सरकार बच्चों के शिक्षा के अधिकार के हनन में सबसे बड़ी अपराधी रही. कल्पना कीजिए बगैर पुस्तक , बगैर शिक्षक ,बगैर कंप्यूटर , बगैर बिजली लाखों बच्चे अपना भविष्य कैसे सँवार सकते हैं.

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