मंगलवार, 30 अक्टूबर 2018

रोजगार कानून अधिकार को मामा सरकार के किया बेकार

 कमलनाथ ने पूछा शिवराज से सवाल

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने आज शिवराज सिंह को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में शिवराज सरकार ने रोजगार कानून अधिकार को बेकार कर दिया. उन्होंने कहा कि प्रदेश के मेहनतकशों पर सरकार ने कुठाराघात किया है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आज ग्यारहवां सवाल पूछते हुए कहा कि  मध्यप्रदेश में 68.35 लाख मनरेगा के जाब कार्ड्स हैं अर्थात लगभग 3 करोड़ 41 लाख 75 हजार लोग प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से मजदूरी के माध्यम से जीवन यापन कर रहे हैं.  कांग्रेस ने यह तय किया था कि एक साल में 100 दिनों का रोजगार इस योजना के तहत दिया जाएगा. मध्यप्रदेश में मनरेगा में पंजीकृत लोगों में से वर्ष 2014-15  में 100 दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार - 1,58,776 (2.33 प्रतिशत), वर्ष 2015-16  में 100 दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार - 2,25,502 (3.30 प्रतिशत), वर्ष 2016-17  में 100 दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार -1,40,990 (2.1 प्रतिशत), वर्ष 2017-18  में 100 दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार - 1,34,724 (1.97 प्रतिशत) थे.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस द्वारा बनाए गए कानून में कहा गया था कि हर मजदूर को काम करने के एक सप्ताह के भीतर मजदूरी का भुगतान हो जाएगा और यदि नहीं हुआ तो सरकार देरी से मजदूरी के भुगतान का मुआवजा देगी. उन्होंने कहा कि शिवराज ने वर्ष 2013-14 से सितंबर 2018-19 तक 6 हजार 167 करोड़ रुपए की मजदूरी का देरी से भुगतान किया. हजारों मजदूरों को अब भी उनकी मेहनत की कमाई नहीं दी गई. कानून के मुताबिक देरी से भुगतान पर सरकार को 10 प्रतिशत के मान से कम से कम 610 करोड़ रुपए का मुआवजा देने का अनुमान था, मगर मामा ने दिए लगभग केवल 3 करोड़ रुपए.
उन्होंने कहा कि मामा सरकार ने  2014-15 मात्र 42 दिन, 2015-16 मात्र 45 दिन 2016-17 मात्र 40 दिन, 2017-18 मात्र 46 दिन और 2018 -19 मात्र 38 दिन का रोजगार मुहैया कराया.  2014-15 मात्र 149 रुपए, 2015-16 मात्र 149 रुपए 2016-17 मात्र 155 रुपए ,2017-18 मात्र 165 रुपए और 2018 -19 मात्र 170 रुपए मजदूरी उपलब्ध कराई गई.

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