सोमवार, 29 अक्टूबर 2018

अब क्यों नहीं धरने पर बैठते शिवराज ?

कमलनाथ ने कहा मोदी ने पंचायती राज का निकाला दिवाला

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा किए जा रहे सवालों के तहत आज उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कहा कि मनमोहन सिंह की सरकार के वक्त आप कभी भी धरने, उपवास पर बैठ जाते थे, परन्तु अब क्यों नहीं बैठते?, जिन समस्याओं को लेकर आपने धरने दिए, उपवास किए वे तो अब भी यथावत हैं. 
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आज केन्द्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  ने पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला निकाल दिया है, अब मामा क्यों चुप हैं. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में तो धरने, उपवास पर बैठते थे, अब क्यों नहीं बासमती की मांग उठा रहे हो. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पंचायती राज को सशक्त करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय स्थापित किया था. मोदी सरकार ने नियोजित रूप से पंचायती राज का गला घोंट कर उसे समाप्त प्राय: कर दिया. इस मंत्रालय के तहत दो प्रमुख कार्यक्रम चलाए जाते थे. पहला, देश के पिछड़े जिलों का विकास और दूसरा, पंचायतों को सशक्त करने के लिए राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान चलाया था. मोदी सरकार ने दोनों कार्यक्रमों को 2015-16 के बाद बंद कर दिया.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि  कांग्रेस सरकार ने मध्यप्रदेश के 30 पिछड़े जिलों को आगे लाने के लिए पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि  कार्यक्रम 2006-07 से प्रारंभ किया था, जिसके तहत 2013 -14 तक मध्यप्रदेश पर  2995.59 करोड़ रुपए खर्च किए. उन्होंने कहा कि अलीराजपुर , अनूपपुर , अशोकनगर, बालाघाट, बड़वानी, बैतूल, बुरहानपुर, झाबुआ, मंडला, टीकमगढ, डिंडोरी, श्योपुर इत्यादि पिछड़े 30 जिलों का  अनुदान बंद. उन्होंने कहा कि  मध्यप्रदेश की पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान को भी अनुदान बंद कर दिया. प्रधानमंत्री ने आखरी वर्ष  2015-16 में  इस हेतु प्रावधानित किए मात्र 41.63 करोड़ और दिए सिर्फ़ 10.8 करोड़.  कमलनाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फरवरी 2014 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह  को पत्र लिखकर धरने पर बैठे थे कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल की पहचान, जो जियोग्राफिकल इंडिकेशन ने स्वीकारी है, को एपीडा द्वारा स्वीकारा नहीं जा रहा है. ये मध्यप्रदेश के किसानों के साथ कांग्रेस सरकार का अन्याय है.  अब क्या हुआ मामा , जब मोदी सरकार ने फरवरी 2016 में आपकी मांग को ठुकरा कर आदेश दिया कि मध्यप्रदेश के किसान अपने चावलों को बासमती की पहचान नहीं दे सकेंगे? मध्यप्रदेश में 2 लाख हेक्टेयर के 13 जिलों, विदिशा ,सीहोर होशंगाबाद, नरसिंहपुर, जबलपुर, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया ,भिंड ,श्योपुर, मुरैना,रायसेन के किसानों को मोदी ने कहा कि वे अपने चावल  बासमती के नाम से नहीं बेच सकेंगे. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मामा, मध्यप्रदेश के बासमती चावल उत्पादक किसानो के लिए अब धरने का स्वांग भी नही करोगे? अब क्या मोदी सरकार से डर लगता है या कांग्रेस सरकार के समय दिखावा कर रहे थे?

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