मध्यप्रदेश में चौथी बार सरकार बनाने के लिए जनआशीर्वाद यात्रा पर निकले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 43 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं से आशीर्वाद नहीं ले पाए. राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर उन्हें यात्रा समाप्त करनी पड़ी. मुख्यमंत्री की इस यात्रा को बीच में रोकने पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने इस पर तंज कसा है कि जनविरोध को देखते हुए यात्रा को रोकना पड़ा है. वहीं कांग्रेस के विधायक डा. गोविंद सिंह ने यात्रा पर खर्च किए छह करोड़ रुपए की वसूली भाजपा से करने की मांग की है.
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उज्जैन से जनआशीर्वाद यात्रा की शुरुआत की थी. दो हाईटेक रथों पर सवार होकर वे 187 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं से आशीर्वाद ले भी चुके थे, मगर गुरुवार को उन्हें अपनी यह यात्रा बीच में ही रोकनी पड़ी. बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर मुख्यमंत्री को यात्रा बीच में रोकने पड़ी. यात्रा के रुकने से मुख्यमंत्री को इस बार चुनाव से पहले 43 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं के आशीर्वाद से वंचित रहना पड़ा. यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने 43 दिन के सफर में 350 जनसभाएं की है. 14 जुलाई से शुरु हुई इस यात्रा ने 4100 किलोमीटर का सफर तय किया था.
पहले भी रुकी और विरोध का सामना भी किया
मुख्यमंत्री की जनआशीर्वाद यात्रा को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के चलते पहले भी सात दिनों के लिए यात्रा को रोकना पड़ा था. इसके बाद गणेश उत्सव और दुर्गा उत्सव के चलते कई स्थानों पर यात्रा को स्थगित भी किया और कई स्थानों पर कार्यक्रम भी बदले गए. इतना ही नहीं इस बार मुख्यमंत्री को अपनी इस यात्रा के दौरान विरोध का सामना भी करना पड़ा था. राज्य के चुरहट में तो रथ पर चप्पल तक फेंकी गई थी. इसे लेकर जमकर राजनीति भी हुई थी. यहां उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में मुख्यमंत्री अपनी इस जनआशीर्वाद यात्रा के जरिए 200 विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचे थे, तब उन्हें 165 सीटें मिली थी. इस बार मुख्यमंत्री की यह यात्रा 187 विधानसभा क्षेत्रों में ही हो पाई है.
जन विरोध को भांपकर बंद की जनआशीर्वाद यात्रा
प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि शिवराज सिंह की जन आशीर्वाद यात्रा बनाम जबरन आशीर्वाद यात्रा एक मजाक बनकर रह गयी थी. विपरीत परिस्थितियों को भांपते हुए शिवराज सिंह ने घबराकर यह यात्रा चुनावी व्यस्तताओं का बहाना बनाकर स्वयं बंद कर दी है, जबकि उन्होंने बड़े दंभ के साथ ऐलान किया था कि इसे चुनाव तक चलाएंगे. यात्रा बंद करने का असली कारण जनता द्वारा यात्रा से दूरी बना लेना है. मुख्यमंत्री को जनआशीर्वाद यात्रा में जनता नदारत दिख रही थी, क्योंकि आचार संहिता लगने के बाद सरकारी कर्मचारी, पटवारी, आशा-ऊषा कार्यकर्ता सब गायब हो रहे थे. मुख्यमंत्री को यात्रा के दौरान हजारों शिकायती आवेदन भी मिलने लगे थे.
छह करोड़ की राशि भाजपा से वसूली जाए
डॉ. गोविन्द सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक एवं पूर्व मंत्री डा. गोविन्द सिंह ने आरोप लगाया है कि जनजातीय विभाग में आदिवासियों के विकास की लगभग छ: करोड़ की राशि मुख्यमंत्री के सभाओं के नाम पर वसूली जा रही है. उनका कहना है कि यह राशि भारतीय जनता पार्टी से वसूली जाए. डॉ. सिंह ने इस संबंध में चुनाव आयुक्त को भी पत्र लिखा है . डॉ. सिंह का कहना है कि म.प्र. में आदर्श आचार संहिता लगने के बाद तीन दिन पुरानी तिथि में जनजातीय कल्याण विभाग के सचिव राजेश प्रसाद मिश्रा ने आयुक्त जनजातीय विभाग को पत्र लिखकर लगभग छ: करोड़ की राशि मुख्यमंत्री की सभा में हुए व्यय के नाम पर मांगी है. इस राशि का भुगतान म.प्र. माध्यम को किया जाना है.
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