गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

अविश्वास पर निंदा प्रस्ताव लाएगा युवा मोर्चा

छिंदवाड़ा में जनवरी माह में हो रही दो दिवसीय भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा कार्यसमिति की बैठक में मोर्चा अपने को संगठन द्वारा मिली जिम्मेदारी की दिशा तय करेगा़ इस बैठक में 11 दिन में पांच लाख सदस्य बनाने का संकल्प भी लेगा और कांग्रेस द्वारा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाएगा़
भारतीय जनता युवा मोर्चा की कार्यसमिति की बैठक जनवरी माह की 7 एवं 8 तारीख को छिंदवाड़ा में दो दिनों तक होना तय हो गया है़ इस बैठक में युवा मोर्चा ने कई संकल्प लेने के साथ संगठन द्वारा जो जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है, उसकी दिशा तय करने का निर्णय लिया है़ संगठन द्वारा सदस्यता अभियान को गति देने के लिए सौंपी गई जिम्मेदारी के तहत युवा मोर्चा ने 12 जनवरी को विवेकानंद जयंती से लेकर 23 जनवरी तक पांच लाख नये सदस्य बनाने का निर्णय लिया है़ इसके अलावा आगामी तीन माह के कार्यक्रम इस बैठक में तय किए जाएंगा़
युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जीतू जिराती ने बताया कि मोर्चा ने अब तक जितनी भी बैठकें की हैं, वे सभी शहरों के बजाय जिला मुख्यालयों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में की है, इसका मुख्य कारण सरकार के कामों को ग्रामीण जनता के बीच पहुंचाना और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना है़ उन्होंने बताया कि हम इस बैठक में कांग्रेस द्वारा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में लाए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाएंगे और कांग्रेस की निंदा करेंगे़ इस बैठक में हम विवेकानंद जयंती से लेकर नेताजी सुभाषचंद्र बोस जयंती तक 11 दिन निरंतर सदस्यता अभियान चलाकर पांच लाख नये सदस्य बनाने का निर्णय लेंगे और इतने सदस्य बनाएंगे़ इस बैठक में हम युवा आयोग बनाने के अलावा युवाओें से संबंधित सरकार द्वारा जो भी निर्णय लिए गए हंै उन्हें लेकर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का आभार जताएंगे़
मोर्चा के कार्यालय मंत्री डॉ़ अनिल पचौरी ने बताया कि मोर्चा की इस बैठक में बीते तीन माह के कार्यों की समीक्षा की जाएगी इसके अलावा आगामी तीन माह के कार्यक्रम तय किए जाएंगे़ संगठन ने जो मोर्चा को जिम्मेदारी सौंपी है उस जिम्मेदारी को निभाने के लिए मोर्चा इस बैठक में रणनीति तय करेगा और सभी सदस्य उसके मुताबिक आगामी तीन माह तक अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहकर काम करेंगे़

‘केबल वार’, उलझे मंत्री-सांसद

मध्यप्रदेश के जिले खण्डवा में इन दिनों चल रहे ‘केबल वार’ में राज्य के आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह और वहां के सांसद एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण यादव आमने-सामने होते नजर आ रहे हैं़ दोनों ने अपने-अपने समर्थकों को सर्पोट देकर मामले को तूल पकड़ाने का काम किया है़ मामले को सुलझाने के प्रयास जिला प्रशासन ने भी किया, मगर स्थानीय राजनीति और अपने प्रचार-प्रसार के माध्यम को पुख्ता करने के लिए राजनेताओं ने दोनों पक्षों को अड़े रहकर एक दूसरे के खिलाफ खड़े रहने को कहा है़
रंगीन मिजाज और सदैव चर्चा में रहने वाले प्रदेश के आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह इन दिनों प्रदेश स्तर पर किसी मुद्दे को लेकर तो तो चर्चा में नहीं हैं, मगर बीते एक पखवाड़े से खण्डवा में चल रहे ‘केबल वार’ में जरुर सक्रिय हो गए हैं़ यहां चल रहा ‘केबल वार’ दो राजनेतातओं के बीच टकराव और प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है़ खण्डवा सिटी केबल के अलावा इस शहर में हाल ही में स्काइ टीवी के नाम से एक और सिटी केबल की शुरुआत हुई है़ इसकी शुरुआत होते ही यहां पर ‘केबल वार’ की स्थिति निर्मित हो गई़ पूर्व में जब खण्डवा में सिटी केबल की शुरुआत हुई तो इसके स्थापना करने वालों में अधिकांश लोग वे थे, जो आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह से जुड़े रहे हैं़ इसकी स्थापना के समय एक समिति बनाई गई जिसमें केबल आपरेटरों में कुंदन बजाज, नीतिश शर्मा, रिजवान अंसारी के अलावा मुख्य रुप से भाजपा नेता ओम सोनी कर्ताधर्ता के रुप में रहे़ वैसे तो इस समिति में और भी लोग थे, मगर वे केवल कागजों तक ही सीमित रहे़
‘केबल वार’ शुरुआत और खण्डवा टीवी पर ग्रहण उस वक्त लगा जब यहां पर खण्डवा-बुरहानपुर के सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण यादव के रिश्तेदार अंजड़ निवासी संजय पटेल ने इंदौर के संजीव अग्रवाल के साथ मिलकर स्काइ टीवी की शुरुआत की़ इसमें खण्डवा टीवी के कुछ सदस्यों को उन्होंने मिला लिया़ इसके बाद केबल आपरेटरों के बीच तो घमासान मचने की परिस्थति निर्मित हुई, मगर स्थानीय राजनीति में रखल रखने वाले मंत्री विजय शाह को इस बात की चिंता हुई की अब उनके कार्याें की कहीं बखिया न उधेड़नी शुरु हो जाए़ विशेषकर उन्हें अपनी महापौर पत्नी भावना शाह को लेकर चिंता हुई़ खण्डवा नगर निगम में जो कुछ हो रहा है अब तक तो ढका था, मगर उन्हें अरुण यादव से जुड़े इस ग्रुप को लेकर अपनी छवि खराब होती भी दिख रही थी़ इस कारण उन्होंने अपने निकटमत ओम सोनी को सक्रिय किया और इस ‘केबल वार’ को तेज किया़ उनकी मंशा थी कि स्काइ टीवी यहां से जुदा हो जाए, मगर सांसद अरुण यादव ने भी इस मामले को राजनीतिक दृष्टिकोण से लिया और अपने रिश्तेदार को ताकत देनी शुरु कर दी़ मामले ने जब राजनीतिक मोड़ लिया तो खण्डवा जिला प्रशासन भी सक्रिय हुआ और पुलिस अधीक्षक हरीकृष्ण मिश्र चारी ने दोनों पक्षों को बुलाकर सुलह करानी चाही, मगर यह सुलह हुई नहीं, बल्कि बढ़Þती चली गई़ वर्तमान में दोनों ही पक्ष अपनी बात पर अड़े हुए हैं और राजनीति कर रहे हैं़

मंत्री को क्यों ही चिंता
मंत्री विजय शाह को स्काइ टीवी का खण्डवा आने से चिंता इसलिए हुई क्योंकि वे बीते लोकसभा चुनाव के दौरान खण्डवा सीटी केबल पर चली बुरहानपुर दंगों का सच सीडी का हश्र जानते हैं़ इस सीडी के बाद कुछ ऐसा असर हुआ था कि भाजपा के प्रत्याशी नंदकुमार सिंह चौहान को हारना पड़ा था़ तब इस मामले में मंत्री अर्चना चिटनिस पर सभी को आशंका थी कि यह सीडी उन्हीं ने चलवाई है़ मामला संगठन स्तर तक भी पहुंचा था़ इस मामले को देख अब मंत्री विजय शाह को इस बात की चिंता है कि स्थानीय स्तर अब विरोधी खेमा सक्रिय होकर लोगों के बीच उनकी छवि खराब करने में सक्रियता निभाएगा और कांग्रेस नेता इस मामले में कुछ ज्यादा सक्रिय जाएंगे़ नगर निगम के अलावा उनके क्षेत्र में जो खामियां होंगी उन्हें विरोधी खेमा जनता के बीच पहुंचाने का काम शुरु कर देगा़

नये सीएस और डीजी की शुरु हुई तलाश

मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के वर्ष 2012 में सेवानिवृत्त होने के बाद इन पदों पर कौन पदस्थ होगा, इसे लेकर कयासों का दौर शुरु हो चुका है़ वहीं इन पदों के दावेदारों ने भी सक्रियता बढ़Þा दी है़ दोनों की सेवानिवृत्ति में अभी दो से लेकर चार माह का वक्त है, मगर सरकार और अफसरों ने इस बात को लेकर चिंतन शुरु कर दिया हैं़ मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान मिशन-2013 के तहत सकरात्मक और राजनीतिक सोच वाले अफसर को इन पदों पर बैठाना चाहते हैं़ इसके लिए उन्होंने भी इन दोनों पदों पर किसे पदस्थ किया जाए उसे लेकर मंथन शुरु कर दिया है़
राज्य में मौजूदा मुख्य सचिव अवनि वैश्य का कार्यकाल अप्रैल 2012 में पूरा होने जा रहा है, वहीं पुलिस महानिदेशक एसक़े़राउत का कार्यकाल फरवरी 2012 में पूरा होगा़ इन पदों को लेकर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने मंथन शुरु कर दिया है, उन्होंने तेजतर्रार अफसर को इन पदों पर बैठाने की बजाय सकारात्मक और राजनीतिक की समझ वाले अफसर को इन पदों पर बैठाने का मन बनाया है़ वैसे इन पदों पर पदस्थापना को लेकर आईएएस और आईपीएस अफसरों ने सक्रियता बढ़Þा दी है़ मुख्य सचिव पद के लिए सक्रिय हुए दावेदारों में ओ़पी़रावत, मलय कुमार राय, डॉ़ विश्वपति त्रिवेदी, दिलीपराज सिंह चौधरी पदमवीरसिंह, श्रीमती आभा अस्थाना, उदय वर्मा, सुमित बोस,आर परशुराम सहित अन्य अफसर हैं जो सक्रिय हो गए हैं़वहीं पुलिस महानिदेशक पद के लिए नंदन दुबे, सुरेन्द्र सिंह, डा़आनंद कुमार, यशोवर्धन आजाद के नाम फिलहाल सामने आ रहे हैं़ इनके अलावा कुछ अन्य अफसर भी सक्रियता बढ़Þाए हुए हैं़
कौन होगा वैश्य का उत्तराधिकारी
1975 बैच के आईएएस अवनि वैश्य अप्रैल 2012 में मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं़ वैश्य की सेवानिवृत्ति के बाद उनकी कुर्सी पर कौन बैठेगा यह अभी सुनिश्चित नहीं है़ वरिष्टता के आधार पर देखा जाए तो 1976 बैच के आईएएस सुमित बोस का नाम आगे आता है,मगर वैश्य जब मुख्य सचिव बनाए गए थे, तब भी उनका नाम इस पद के लिए उठा था, मगर उन्होंने इससे दूरी बना ली थी, वे केन्द्र में ही वित्त सचिव बनना चाहते थे़ हालात कुछ ऐसे रहे कि वे इस पद पर नहीं पहुंच पाए, इस कारण उनकी सक्रियता अब इस पद के लिए दिखाई देती है, मगर उनके नाम पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान अब तैयार नहीं बताए जा रहे हैं़ बोस ने केन्द्र में पदस्थापना के दौरान वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से जो नजदीकियां बढ़Þाई वह उनके आड़े आ सकती है़ बोस के बाद 1977 बैच के मलय कुमार राय का नंबर इस पद के लिए आता है, मगर उनका रिटायरमेंट नवंबर 2012 में है़ इसके बाद ओ़पी़रावत जो कि 1977 बैच के ही हैं उनका नाम भी लिया जा रहा है, मगर नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर के मुख्यमंत्रित्वकाल में गौर से रही उनकी नजदीकियां इस पद के लिए उन्हें दूर रख सकती हैं़ रावत के बाद 1977 बैच के ही डा़विश्वपति त्रिवेदी भी इस पद के दावेदार हैं़ अधिकांश समय केन्द्र में ही प्रतिनियुक्ति पर रहने वाले त्रिवेदी पूर्व केन्द्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के रिश्तेदार भी है, इस कारण कांग्रेसी नेता से रिश्तेदारी उनके लिए इस पद पर आड़े आ सकती है़ 1977 बैच के ही अन्य अफसर दिलीप राज सिंह, पदमवीर सिंह, आऱपरशुराम और श्रीमती आभा अस्थाना इस पद के लिए सपना संजोए बैठे हैं, परंतु ये सीएस की कुर्सी पर जाए इसके लिए भी उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख आड़े आ रही है़ इनकी सेवानिवृत्ति 2013 के नवंबर माह में होनी है़ इस लिहार से फिलहाल 1977 बैच के ही पदमवीर सिंह का नाम इस पर कुछ ज्यादा सक्रिय बताया जा रहा है़ इनका कार्यकाल फरवरी 2014 में पूरा होगा़ पदमवीर सिंह के नाम पर बल तब और मिला जब पिछले दिनों प्रशासन अकादमी मसूरी में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का व्याख्यान हुआ था़ इस अकादमी के संचालक वे स्वयं हैं़ उन्होंने पूर्व से ही इस मामले में रुचि दिखाते हुए अपनी जमावट शुरु कर दी थी़ पदमवीर सिंह के लिए आईएएस अफसरों की पंजाबी लाबी भी कर रही है़ इस लाबी ने सक्रियता बढ़Þा दी है़


राउत के बाद कौन
1974 बैच के पुलिस महानिदेशक एसक़े़राउत का भी फरवरी 2012 में सेवानिवृत्त होने जा रहे है़ं श्री राउत का स्थान पाने के लिए वैसे तो आधा दर्जन आईपीएस अफसर सक्रिय हैं, परन्तु यहां भी मुख्यमंत्री की सोच सीएस पद के लिए जिस तरह अफसर की है वैसी ही दिखती है़ इस पद पर वे ऐसे व्यक्ति को बैठाना चाहते हैं जो ऐन चुनाव के वक्त राजनीतिक सोच के हिसाब से काम करे़ वरिष्ठता के आधार पर इस पद के लिए 1976 बैच के नंदन दुबे का नाम सबसे ऊपर हैं, मगर दुबे की कार्यशैली अपनी है, इस कारण उन्हें अड़चने आ सकती हैं़ दुबे की सेवानिवृत्ति भी 2014 में होना है़ इसी तरह 1976 बैच के आईपीएस यशोवर्धन आजाद हैं, लेकिन उनकी सेवानिवृत्ति भी 2014 में मार्च माह में होनी है़ वैसे आजाद मध्यप्रदेश में ज्यादा सक्रिय नहीं रहे हैं़ 1977 बैच के वीक़े़पवार की सेवानिवृत्ति नवंबर 2013 में और वी़एमक़ंवर की सेवानिवृत्ति अक्टूबर 2012 में होना है़ इस कारण ये भी इस पद से आसीन नहीं हो पाएंगे़ इनके अलावा 1980 बैच के सुरेन्द्रसिंह और 1981 बैच के डॉ़ आनंद कुमार का नाम इस पद के लिए लिया जा रहा है़ आनंद कुमार को लेकर मुख्यमंत्री स्वयं तैयार नहीं बताए जाते है़ इस लिहाज से फिलहाल नंदन दुबे का नाम इस पद के लिए सबसे ऊपर माना जा रहा है़ जबकि वरिष्ठता के क्रम में ही 1975 बैच के एचक़े़सरीन भी 2012 में ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं़ इसके अलावा एस़ए़इब्राहिम, रमेश शर्मा, आऱसी़अरोरा भी वरिष्ठता क्रम में सुरेन्द्र सिंह और डॉ़ आनंद कुमार से ऊपर हैं, मगर इनका रिटायरमेंट वर्ष 2013 इस पद पर इन्हें पहुंचाने में आड़े आ रहा है़ वीक़े क़ंवर, इब्राहिम, रमेश शर्मा और अरोरा का रिटायरमेंट 2013 में होना है़
पुलिस महानिदेशक पद पर किस अफसर की पदस्थापना होगी इसे लेकर अफसर अभी से सक्रिय हैं़ इस कारण कुछ अफसर लोकायुक्त में खाली हो रहे पुलिस महानिदेशक के पद पर नहीं जाना चाहते हैं़ इन अफसरों का सोच है कि अगर लोकायुक्त में उनकी पदस्थापना हो गई तो दो माह बाद खाली हो रहे पुलिस महानिदेशक राउत के पद पर उनकी पदस्थापना में संकट खड़ा हो जाएगा, और उनका पुलिस महानिदेशक बनने का सपना पूरा नहीं होगा़ इन अफसरों में ईओडब्ल्यू में पदस्थ रमेश शर्मा भी एक हैं़ लोकायुक्त महानिदेशक पद पर उनका नाम चल रहा है, लेकिन वे यहां अपनी पदस्थापना नहीं चाहते हैं़ हालांकि श्री शर्मा का कार्यकाल भी अक्टूबर 2013 में समाप्त हो जाएगा इस कारण उनकी नियुक्ति इस पद पर होना मुश्किल नजर आती है,क्योंकि 2013 के अंतिम माहों में ही मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव होना है़

34 सीटों पर करेंगे संघर्ष

बहुजन समाज पार्टी फिर भाजपा छोड़कर फूलसिंह बरैया ने अपना नया दल बहुजन संघर्ष दल बनाकर 2013 के विधानसभा चुनाव के लिए सक्रियता बढ़Þा दी है़ उन्होंने अजा के लिए आरक्षित 34 सीटों पर संघर्ष करने का मन बनाया है और यहां पर अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की सक्रियता बढ़Þा दी है़
कभी बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रुप में ताकतवर नेता के बने फूलसिंह बरैया को जब पार्टी से मायावती ने हटाया तो उन्होंने भाजपा की शरण ले ली थी, मगर भाजपा में भी जब उन्हें मुख्यधारा से नहीं जोड़ा गया तो उन्होंने अपना नया दल बहुजन संघर्ष दल बनाकर अपनी सक्रियता प्रदेश में बढ़Þानी शुरु कर दी़ बरैया ने प्रदेश के हर जिले में अपनी टीम तो बना ली है, मगर 2013 के विधानसभा चुनाव के लिए उन्होंने अजा के लिए आरक्षित 34 सीटों पर विशेष ध्यान देना शुरु किया है़ ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड, विंध्य और भोपाल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों पर वे विशेष ध्यान दे रहे हैं़ इन विधानसभा क्षेत्रों में उनके दल के कार्यक्रम भी तेजी से हो रहे हैं़ बहुजन संघर्ष दल का विस्तार करने के साथ-साथ वे बहुजन समाज पार्टी को कमजोर करने का उनका लक्ष्य साफ दिखाई देता है़ बरैया ने इन दिनों ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में लगातार दौरे करके कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी कर ली है, साथ ही वे जातिगत आधार पर अपने नेताओं को आगे बढ़Þा रहे हैं़ अजा वर्ग के लोगों को वे अधिक से अधिक अपने दल में स्थान देकर यह संदेश देना चाहते हैं कि बहुजन समाज पार्टी से जुड़ने के बजाय उनके दल से लोग जुड़ेंगे तो उन्हें क्या फायदा होगा़ बरैया ने इन दिनों अजा वर्ग की आरक्षित सीटों पर कद्दावर नेताओं को जिन्हें चुनाव लड़ाया जा सके उनकी सूची बनानी शुरु कर दी है़ वे अभी से सक्रिय इसलिए भी हैं कि एनवक्त पर कोई चूक न हो जाए और न ही उनके साथ जुड़े लोग अपने को इस दल में आने के बाद उपेक्षित समझें़
बहुजन संघर्ष दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष फूलसिंह बरैया ने लोकमत समाचार से चर्चा करते हुए बताया कि फिलहाल उनका लक्ष्य जातीय आधार पर लोगों को अपने दल से जोड़कर पार्टी को ताकतवर बनाना है़ वे बसपा से ज्यादा मजबूत दल प्रदेश में अपना बनना चाहते हैं़ उन्होंने कहा कि प्रदेश में वे बहुजन संघर्ष दल को ताकतवर दल के रुप में खड़ा करेंगे़ इसके साथ ही अधिक से अधिक अजा वर्ग के लोगों को अपने दल से जोड़ेंगे़ इस बार वे किसी तरह की कोई चूक नहीं होने देंगे और विधानसभा के 2013 में होने वाले चुनाव के लिए वे फिलहाल तो अजा वर्ग की आरक्षित 34 सीटों पर संघर्ष करने का फैसला कर चुके हैं़

आईएएस बनने सक्रिय हुए अफसर

आईएएस अफसर बनने का सपना देख रहे गैर प्रशासनिक सेवा के डेढ़Þ दर्जन अफसर इन दिनों दिल्ली में सक्रिय हैं़ इन अफसरों को 31 दिसंबर को दिल्ली में इंटरव्यू होने हैं़ इसके अलावा जिन अफसरों का चयन इस पद की दौड़ के लिए नहीं हुआ उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री ओर यूपीएसी को कर दी, इसके चलते राज्य सरकार सूची दिल्ली भेजने में भी परेशानी हुई़
राज्य में गैर प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों में से पांच पद पर पदोन्नत कर भारतीय प्रशासनिक सेवा के पद भरे जाना है़ इसके लिए राज्य के करीब 54 अफसर सक्रिय थे, मगर छानबीन समिति द्वारा इन सब नामों पर विचार कर 20 नामों का चयन किया गया़ इसके बाद इन नामों को अनुमोदन के लिए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को भेजा गया़ इसके बाद ये नाम यूपीएससी दिल्ली को भेजे जाने थे, जहां 31 दिसंबर को इनके इंटरव्यू होना हैं़ सूची को दिल्ली भेजने के पहले भी राज्य सरकार को परेशानी का सामना करना पड़ा़ इसकी वजह यह थी कि जिन अफसरों का 20 अफसरों की सूची में चयन नहीं हुआ था उन अफसरों ने मुख्यमंत्री और यूपीएससी को चयनित अफसरों के खिलाफ शिकायत कर डाली़ इस शिकायत के बाद मामले ने ठंडा रुख अपना लिया और चयनित हुए बीस अफसरों की यह सूची भी मंत्रालय में अटक गई थी़ बाद में सरकार ने इस सूची को दिल्ली यूपीएससी को भेजी़ इसके बाद अब आईएएस बनने को सक्रिय हुए अफसरों ने दिल्ली की ओर रुख कर लिया है़ ये अफसर दिल्ली में अपने आकाओं के माध्यम से किसी भी तरह आईएएस बनने के लिए प्रयासरत हैं़
कौन है दौड़ में
महिला एवं बाल विकास विभाग एस़एस़रघुवंशी एवं डॉ़ संध्या व्यास
तकनीकी शिक्षा डी़ के़व्यास एवं एस़एऩअग्रवाल
जेल विभाग संजय गुप्ता
वाणिज्य कर विभाग रघुवीर उपाध्याय व शशि पांडे
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग राजेश बिसारिया
वाणिज्य व उद्योग विभाग सीएस धूर्वे एवं आरक़े़वाजपेयी
लोक निर्माण विभाग बीक़े़अरक एवं अखिलेश उपाध्याय
ग्रामोद्योग एस़एस़सिकरवार
वित्त विभाग नितिन नांदगांवकर एवं मिलिंद वाईकर
जनसंपर्क विभाग मंगला मिश्रा एवं सुरेश गुप्ता

‘फुल’ होटल, रिसोर्ट

राज्य के पर्यटक स्थलों पर न्यू ईयर मनाने वालों को अब ठहरने के लिए परेशानी का सामना करना पढ़Þेगा़ न्यू ईयर मनाने वालों ने आनलाइन के जरिए 30 एवं 31 दिसंबर को पर्यटन विकास निगम के सारे होटल और रिसोर्ट बुक करा लिए हैं़ इसके साथ ही निजी होटलों पर ही कुछ ऐसी ही स्थिति है़
राज्य के पर्यटक स्थलों मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के होटल और रिसोर्ट ‘न्यू ईयर’ के लिए पूरे बुक हो चुके हैं़ पर्यटन विकास निगम अब इस चिंता में है कि प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थलों पर क्या किया जाए जिससे किसी को निराशा नहीं हो, मगर पर्यटन विकास निगम के पास फिलहाल कोई विकल्प नहीं है़ निगम अब वन विभाग की सहायता लेने का विचार कर रहा है, लेकिन वहां भी पूर्व से ही शत-प्रतिशत बुकिंग हो चुकी है़
राज्य में खजुराहो, पचमढ़Þी, माण्डव, बांधवगढ़Þ, ओरछा, पन्ना, कन्ना किसली, अमरकंटक, औंकारेश्वर, उज्जैन आदि पर्यटक स्थल ऐसे हैं जहां पर सभी प्रकार के पर्यटक पहुंचते हैं़ इन स्थानों पर प्रतिवर्ष जोरदार भीड़ होती है़ इस लिहाज से इस बार इन पर्यटन स्थलों पर दिसंबर माह के प्रारंभ से ही आनलाइन बुकिंग का सिलसिला शुरु हो चुका था, जो 20 दिसंबर तक नब्बे फीसदी से ज्यादा पहुंच गया था़ पर्यटन विकास निगम के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में पर्यटन विभाग के राज्य में सभी होटल और रिसोर्ट बुक हो चुके हैं़ विभाग के मैनेजर आऱसी़ चौरसिया का कहना है कि राज्य में निगम के करीब 52 होटल और रिसोर्ट हैं, जो पूरी तक से नये साल का जश्न मानने वालों के लिए बुक हो चुके हैं़ अब हमारे पास और कोई ऐसा उपाय नहीं है जहां पर हम पर्यटकों को ठहरा सके़
पर्यटन विकास निगम के अलावा राज्य के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा जैसे शहरों में स्थित निजी होटलों के भी कुछ ऐसे ही हालत बन गए हैं़ इन होटलों पर नये साल के लिए आज तक याने 23 दिसंबर तक करीब नब्बे फीसदी से ज्यादा बुकिंग हो चुकी है़ अब जो भी बुकिंग के लिए इन शहरों में प्रयास करते हैं उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है़
पर्यटकों की इस परेशानी को देख पर्यटन विभाग ने वन विभाग और लोक निर्माण विभाग से मदद मांगी है, मगर अब तक उसे वहां से निराशा ही हाथ लगी है़ दोनों विभागों के रेस्ट हाउस के लिए विभागीय अधिकारियों ने अब तक कोई स्वीकृति नहीं दी है़

सपनों और सरोकारों की छाया में बीता साल

मध्यप्रदेश के सियासी और सरकारी परिदृश्य पर बीते साल सपनों और सरोकारों का द्वंद छाया रहा़ सत्ता में बैठी भाजपा से लेकर प्रतिपक्ष के खेमें में खड़ी कांग्रेस और दूसरे दलों के सपनों में 2013 का विधानसभा चुनाव घूम रहा था, तो उनके सामने चुनौती खड़ी थी कि वे अपनी भूमि और भूमिका को किस तरफ पुख्ता करें़ सरकार बैठी भाजपा में सालभर यह चर्चा चलती रही कि मंत्रिमंडल का विस्तार अब हुआ और तब हुआ़ इसी चर्चा में पूरा साल बीत गया, मगर मंत्रिमंडल विस्तार नहीं हुआ़ कांग्रेस भी इससे जुदा नहीं थी़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति के छह माह बाद बमुश्किल वे अपने पदाधिकारियों की घोषणा कर पाए़ नेता प्रतिपक्ष कुर्सी को लेकर भी कांग्रेस में घमासान मचा रहा़ यह पहली बार हुआ कि लंबे समय तक कांग्रेस अपने विधायक दल के नेता का चुनाव नहीं कर पाई़ उसे कार्यकारी नेता चौधरी राकेशसिंह चतुर्वेदी से काम चलाना पड़ा़ वर्ष 2010 में जमुनादेवी के मृत्यु के बाद से कांग्रेस यह तय ही नहीं कर पा रही थी कि किसे नेतृत्व की कमान सौंपी जाए़ लंबे समय तक मध्यप्रदेश की राजनीति पर छाये रहे पूर्व मुख्यमंंत्री और पूर्व केन्द्रीय मंत्री अर्जुनसिंह के देहावसान के बाद उनके पुत्र अजयसिंह को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया़ उन्होंने आमद तो धीरे से दर्ज कराई, लेकिन राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र में आए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान उनकी वाणी और बोल धमाकेदार थे़
बीत रहा साल 2011 प्रदेश की सरकार और राजनीतिक दलों के लिए संघर्ष के साथ चिंता में उन्हें डूबाए रखने वाला साबित हुआ़ साल के शुुरुआती माह जनवरी में ओले-पाले का कहर कुछ ऐसा आया कि उसने सरकार को झकझोर दिया़ इस पर राजनीतिक द्वंद भी हुआ़ कांग्रेस और भाजपा दोनों मैदान में दिखाई दिए़ कांग्रेस ने इसे लेकर किसानों को वास्तविक मुआवजा न मिलने की बात कही ओर तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी इस मुद्दे पर धरने पर बैठे और लाठियां भी खाई़ इसके बाद उनका उपवास भी हुआ और केन्द्र से राशि आई़ मगर यह राशि सरकार को नहीं सुहाई, सरकार इस मुद्दे पर केन्द्र के खिलाफ खड़ी नजर आई उसके साथ ही भाजपा का संगठन भी रहा़ इस बीच किसानों की मौतों का सिलसिला भी प्रदेश में शुुरु हो गया़ इसके बाद सरकार ने केन्द्र के खिलाफ मोर्चा खोलकर सहायता राशि न देने का आरोप लगाया तो कांग्रेस किसानों की मौत के लिए कर्ज को जिम्मेदार बताती रही़इस मुद्दे पर करीब तीन माह याने मार्च तक खूब राजनीति हुई़ फरवरी में तो यह राजनीति इतनी गर्माई कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने 13 फरवरी को राजधानी के भेल मैदान में सविनय आग्रह उपवास पर बैठने की घोषणा कर दी़ भाजपा संगठन इस पर खुश नजर आया़ मगर उपवास पर बैठने को लेकर संवैधानिक पद आड़े आया तो तत्कालीन राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने बीच का रास्ता निकाल कर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आश्वासन पर इस मामले में मुख्यमंत्री को उपवास पर नहीं बैठने दिया़ उपवास के लिए मंच सजा, सारी तैयारी हुई और ऐन वक्त पर संगठन को बिना बताए मुख्यमंत्री ने जब उपवास पर न बैठने की घोषणा कर दी तो संगठन खफा हो गया़ कुछ दिनों तक सत्ता और संगठन के बीच ये तकरार साफ दिखाई दी़ इसके बाद सुलह हुई और सरकार एवं संगठन साथ नजर आए़ किसानों पर राजनीति का दौर सभी दलों द्वारा सालभर चलता रहा़ कभी ओले-पाले के बहाने तो कभी खाद-बिजली के संकट को लेकऱ
सरकार के लिए अपनी ही योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में भी संघर्ष की स्थिति बनी रही़ योजनाओं के क्रियांवयन न होने को लेकर सरकार चिंतित भी दिखाई दी़ कई अवसर ऐसे भी आए जब संगठन ने सरकार को इसके लिए चेताया भी़ संगठन इसके लिए अधिकारियों को दोषी बताता रहा़ सरकार को जब इस बात का कुछ अहसास हुआ तो वह जागी और अफसरों की इसके लिए कसावट भी की, मगर यह कसावट भी सफलता में नहीं बदली़ इसके बाद मुख्यमंत्री ने राजधानी भोपाल में कमिश्नर-कलेक्टर कांफ्रेस का आयोजन किया और योजनाओं को गति देने की बात कही, मगर वर्ष के अंत तक स्थिति वहीं ढाक के तीन पान वाली रही़ सरकार ने जनता के हित में कई योजनाओं की शुरुआत की उनमें कुपोषण को दूर करने के लिए अटल बाल आरोग्य और पोषण मिशन, बाल हृदय सुरक्षा योजना, बेटी बचाव अभियान के साथ वनवासी यात्रा भी रही़ इनके अलावा भी शासकीय योजनाएं जारी रही,मगर जमीनी स्तर पर इन योजनाओं को जनता न पहुंचने से संगठन और सरकार चिंता में डूबे रहे़ दोनों ही इस बात को लेकर संघर्षरत रहे कि किस तरह से योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाई जाए और वे उनका लाभ उठाएं़ आखिर इसके लिए भाजपा संगठन को आगे आना पड़ा़ संगठन ने इसके लिए मोर्चा, प्रकोष्ठों को सक्रिय किया और तरह-तरह की यात्राएं निकालकर जनता के बीच योजनाओं की जानकारी देने के फैसला किया़
ऐसा भी नहीं था कि सरकार और संगठन के बीच अच्छा तालमेल ही वर्षभर बना रहा हो, कई अवसर ऐसे भी आए जब यह तालमेल गड़बढ़Þाता नजर आया, मगर जब सत्ता पर आंच दिखाई देती नजर आई तो सरकार के साथ संगठन खड़ा भी नजर आया़ संगठन ने भी उज्जैन और सिंगरौली में हुई कार्यसमिति की बैठकों में सरकार को सबक सिखाने जैसे प्रयास किया, मगर मामला सामान्जस के साथ निपटा लिया गया़ कई अवसरों पर सरकार और संगठन दोनों को मंत्रियों के बेबाक बयानों ने भी चिंता में डाला तो कभी विधायकों और संगठन के नेताओं ने चिंतित किया़ मंत्रियों में रामकृष्ण कुसमारिया, गौरीशंकर बिसेन, कैलाश विजयवर्गीय, बाबूलाल गौर, नारायण कुशवाह, विजय शाह आदि थे़ तो विधायकों में जुगलकिशोर बागरी, रमेशचंद्र खटीक, आशारानी सिंह, गिरिराजगिशोर पोद्दार, हरेन्द्रजीतसिंह बब्बू, संतोष जोशी
थे़ वहीं संगठन के वरिष्ठ नेताओं रघुनंदन शर्मा, यशोधरा राजे सिंधिया, संजय नगाइच के अलावा और भी संगठन नेता रहे हैं़
सरकार और भाजपा संगठन के लिए वर्ष के शुरुआत में कांग्रेस की सुस्त स्थिति को देख उतनी चिंता नहीं थी, जितनी की कांग्रेस द्वारा प्रदेश नेतृत्व और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के बदले जाने के बाद हुई़ 2010 के जुलाई माह से दोनों के बदले जाने की कवायद चल रही थी जो मई 2011 में पूरी हुई़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया को और नेता प्रतिपक्ष पद पर अजयसिंह की ताजपोशी की गई़ इसके बाद कांग्रेस में भी गुटबाजी दिखाई दी, मगर बाद में सत्ता पाने के लिए कांग्रेस ने इन नेताओं को भी स्वीकार कर लिया़ बदलाव के बाद भी भाजपा को विशेष चिंता नहीं रही, क्योंकि उसने कुक्षी, सोनकच्छ और जबेरा जैसे उपचुनाव में कांग्रेस की परंपरागत सीटों को अपने कब्जे में कर लिया था, मगर वर्ष के अंतिम माहों में हरदा नगर पालिका चुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त मिली और भाजपा की चिंता बढ़Þी़ इस चिंता के बाद दिसंबर माह के विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव ने परेशानी में डाला़ कांग्रेस ने इसके जरिए तथ्यों के आधार पर सरकार को घेरा और सरकार उन तथ्यों पर जवाब नहंी दे पाई़ इसके बाद सरकार के अलावा भाजपा के संगठन की चिंता बढ़Þी़ दोनों की चिंता इस बात को लेकर थी कि सामंतवादी माने जाने वाले नेता अजयसिंह इस बार सौम्य नजर आए और जो भी बातें विधानसभा में उन्होंने कही उससे वे गंभीर नेता की भूमिका में दिखाई दिए़ यह भाजपा की चिंता का कारण भी बना़ सत्र समाप्ति के बाद सत्ता और संगठन ने फिर मोर्चा और संगठनों को सक्रिय करना शुरु कर दिया़ संगठन और सत्ता दोनों मिलकर मिशन-2013 की तैयारी में जुट गए़
कांग्रेस के अलावा राज्य के छोटे दलों बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के अलावा अन्य अपना अस्तित्व तलाशते रहे़ प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती द्वारा बनाई गई पार्टी भारतीय जनशक्ति पार्टी का उनके भाजपा में जाने के बाद विलय हो गया था़ इस कारण भाजश के नेता जरुर दिसंबर माह तक चिंतित थे, मगर विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इन नेताओं को उस वक्त राहत मिली जब भाजश के विधायकों का भाजपा में विलय होने की घोषणा विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने की़ वैसे प्रदेश में बसपा और गोंगपा ने भी इस वर्ष अपने प्रदेश अध्यक्षों को बदला और नये व युवा लोगों को मौका दिया़ इसके अलावा सभी दल संगठन को मजबूत करने और सदस्यता अभियान को बढ़Þाने में जुटे रहे़ इनकी भूमिका विशेष रुप से सक्रिय नजर नहीं आई़

बड़बोलों ने बढ़Þाई चिंता
* बाबूलाल गौर : गुजरात में भ्रष्टाचार नहीं है, मध्यप्रदेश में के बारे में स्वयं आकलन करें़
* रामकृष्ण कुसमारिया : किसानों को लेकर कहा, पूर्व जन्म के पापों के कारण हो रही मौतें़
* कैलाश विजयवर्गीय : ठाकुर मेरे हाथ लौटा दो, तो इंदौर का विकास कैसे होगा यह बता दूंगा़
* गौरीशंकर बिसेन : पटवारी को उठक-बैठक लगवाने वाले बिसेन ने आदिवासियों का बताया था नासमझ़
* रघुनंदन शर्मा : मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक हैं बयानवीऱ
* यशोधरा राजे सिंधिया: भाजपा राजमाता सिंधिया के आदर्शों से भटक गयी है, यही हाल रहा तो पार्टी बिखर जाएगी़
* जुगलकिशोर बागरी: संगठन हमारी नहीं सुनता तो हमारा राजनीति में रहना उचित नहीं है़ प्रभारी मंत्री नागेन्द्रसिंह केवल आश्वासन देते हैं, काम नहीं करते
* रमेशचंद्र खटीक : अफसर सुनते नहीं है, मुख्यमंत्री को शिकायतें करने के बाद भी कोई हल नहीं होता है़

फेरबदल की चलती रही अटकलें
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें पूरे वर्षभर चलती रही़ कई बार तो यहां तक स्थिति निर्मित हुई कि एक-दो दिन में यह फेरबदल हो जाएगा, मगर मामला टलता ही गया़ दर्जनों मर्तबा ये सवाल उठे और मंत्रियों को चिंता में डालने के बाद श्री चौहान फेरबदल को टालते रहा़ हालांकि इसके पीछे यह माना जाता रहा कि पार्टी का केन्द्रीय नेतृत्व उन्हें इस बात की इजाजत नहीं दे रहा था़ वहीं यह भी कहा जाता रहा कि संगठन विवादित मंत्रियों को दबाव में लाने के लिए ऐसा करता रहा़
कांग्रेस में जारी रही गुटबाजी
गुटों में बटी कांग्रेस में वर्ष 2011 में भी गुटबाजी बरकरार रही़ यह गुटबाजी उस वक्त साफतौर पर दिखाई दी, जब प्रदेश अध्यक्ष पद पर कांतिलाल भूरिया और नेता प्रतिपक्ष पद पर अजयसिंह की नियुक्ति की गई़ हालांकि ताजपोशी के वक्त मंच पर सभी गुटों के नेता एक दिखाई देने के प्रयास करते रहे, मगर गुटबाजी साफ झलकती रही़ मई के बाद से अंतिम माह तक कमलनाथ, दिग्विजयसिंह, सुरेश पचौरी और ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक कभी भी एक होते नजर नहीं आए़ पचौरी अपना कद केन्द्र में बढ़Þाने का प्रयास भी करते रहे, जिसमें उन्हें उस वक्त सफलता मिली जब उन्हें़ शोधकार्यो के लिए बनाई समिति का अध्यक्ष बनाया गया़ इस समिति में दिग्विजयसिंह को सदस्य बनाया गया है़ अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में कांग्रेस विधायक दिखे तो सरकार के खिलाफ,मगर यहां जिस विधायक ने भी अपनी बात रखी वह अपने हिसाब से न की पार्टी गाइड लाइन से़

रविवार, 18 दिसंबर 2011

नागपुर, आगरा भी जुड़ेंगे एयर टैक्सी से

पर्यटन विभाग द्वारा प्रदेश के पर्यटन स्थलों को बढ़Þावा देने के लिए चलाई एयर टैक्सी अब पड़ौसी राज्यों में चलाने की तैयारी कर रहा है़ पहले एयर टैक्सी से महाराष्ट्र के नागपुर और उत्तरप्रदेश के आगरा को जोड़ने की तैयारी की जा रही है़ इनके लिए सर्वे भी किया जा रहा है़
राज्य में पर्यटन विभाग द्वारा इंदौर-ग्वालियर-भोपाल-जबलपुर के अलावा कान्हा किसली, बाधवगढ़Þ को एयर टैक्सी से जोड़ा गया, जिसे सफलता मिली़ इसकी सराहना राष्ट्रीय स्तर पर होने से विभाग ने अब एयर टैक्सी से खजुराहो-सतना-रीवा को भी जोड़ने का फैसला किया़ इस फैसले के बाद राज्य के पर्यटन स्थलों पर बढ़Þे आकर्षण को देखते हुए पर्यटन विभाग ने इस मामले में एक कदम और आगे बढ़Þाया है़ विभाग अब एयर टैक्सी से पड़ौसी राज्यों को जोड़ने की योजना बना रहा है़ इस योजना के तहत महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश को राज्य की एयर टैक्सी से जोड़ने का फैसला विभाग ने किया है़ इसके तहत विभाग द्वारा दोनों ही स्थानों पर सर्वे कराया जा रहा है़ यह सर्वे इस माह में पूरा हो जाएगा, इसके बाद नागपुर और आगरा को एयर टैक्सी से जोड़ने का फैसला मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग करेगा़
पर्यटन विभाग के अध्यक्ष डॉ़ मोहनलाल यादव ने लोकमत समाचार से चर्चा करते हुए बताया कि हमने जब एयर टैक्सी की शुरुआत की थी, तब हमें यह उम्मीद नहीं थी कि हमारे इस प्रयास की प्रशंसा होगी और हम इतने सफल होंगे़ राज्य में चलाई गई एयर टैक्सी की सराहना केन्द्र सरकार द्वारा भी की है़ इसके बाद हमने खजुराहों और सतना को एयर टैक्सी से जोड़ने का फैसला किया़ इन स्थलों पर सतना से मैहर मां शारदा के दर्शन करने श्रद्धालु जा सकते हैं, जबकि खजुराहो का अपना विश्व में स्थान है़ इसी तरह हम अब एयर टैक्सी को पड़ौसी राज्यों महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश से जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं़ महाराष्ट्र के नागपुर से अधिकांश लोग मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थल पेंच, कान्हा किसली, पचमढ़Þी और खजुराहों आते हैं़ वहीं आगरा में ताजमहल देखने के बाद कम समय में मध्यप्रदेश के खजुराहो सहित अन्य पर्यटन स्थलों पर कम समय में पर्यटक को पहुंचने का साधन मिलेगा तो वह मध्यप्रदेश क्यों नहीं आएगा़ इन सब को देखते हुए हम यहां का सर्वे करा रहे हैं, सर्वे इसी माह में पूरा हो जाएगा़ श्री यादव ने बताया कि अगर सर्वे पूरा में हमें लाभदायी परिणाम मिले तो जनवरी माह में दोनों ही स्थानों को हम एयर टैक्सी से जोड़ देंगे़ श्री यादव ने बताया कि हमारा लक्ष्य यह है कि अधिक से अधिक संख्या में पर्यटक मध्यप्रदेश आएं़ फिलहाल सड़क मार्ग के खराब होने से पर्यटक यहां आने से बचते हैं, अब एयर टैक्सी रहेगी तो स्वाभाविक तौर में इनकी संख्या में इजाफा होगा़

कुलस्ते का करेंगे बहिष्कार

‘नोट फार वोट’ मामले में जेल गए भाजपा के पूर्व सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते के साथ भाजपा भले ही केन्द्र के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है, मगर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने कुलस्ते खिलाफ मोर्चा खोल दिया है़ गोंगपा ने आदिवासी समाज के लोगों से कुलस्ते का समाज से बहिष्कार करने की बात कही है़ साथ ही उनके साथ ‘रोटी और बेटी ’ व्यवहार तक बंद करने की घोषणा कर दी है़ गोंगपा द्वारा मंडला जिले में इसी माह समापन हो रही कुलस्ते सम्मान यात्रा को भी कालेझंडे दिखाने की बात कही है़
‘नोट फार वोट’ मामले मेंं जेल से बाहर आने के बाद भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई जरुर कुलस्ते के सम्मान में यात्रा निकाल कर केन्द्र सरकार का विरोध कर रही है़ मगर कुलस्ते को अपने ही घर में आदिवासियों का नेतृत्व करने वाले दल गोंडवाना गणतंत्र पार्टी मुसीबत खड़ी कर रहा है़ गोंगपा ने आदिवासियों को यह पैगाम दे दिया कि वे फग्गनसिंह कुलस्ते का जाति बहिष्कार करें, यहां तक की उनके साथ ‘रोटी-बेटी का व्यवहार भी न करें’़ गोंगपा के इस फरमान के बाद महाकौशल विशेषकर मण्डला जिले के आदिवासी मुखर होते नजर आ रहे हैं़ उन्होंने कुलस्ते का विरोध करने का मन बना लिया है़ वहीं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा कुलस्ते के खिलाफ यह अभियान चलाया जा रहा है कि कुलस्ते ने संसद की मर्यादा का अपमान किया है़ वे पैसों के कारण जाति धर्म को भी भूल गए हैं़
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमल मरावी ने लोकमत समाचार को बताया कि फग्गनसिंह कुलस्ते भले ही अपने को अब निर्दोष बताएं, मगर उनके जेल जाने के बाद यह साबित हो गया है कि उन्होंने जो कुछ किया वह गलत था़ श्री मरावी ने कहा कि उनके दामन पर जो दाग लगा है वह कभी धुलने वाला नहीं है़ उन्होंने कहा कि संसद में जब किसी वस्तु के ले जाने पर पाबंदी है तो कुलस्ते बड़े-बड़े नोट के बंडल कैसे लेकर सदन में पहुंचे़ अगर वे सच हैं तो उन्हें यह सब बताना चाहिए था कि पैसा कहां से आया था़ श्री मरावी ने कहा कि कुलस्ते ने ऐसा कर संसद का अपमान तो किया है साथ ही आदिवासी समाज को भी कलंकित किया है़ इस कारण आदिवासी समाज ने यह फैसला किया है कि हम कुलस्ते का जाति बहिष्कार करेंगे़ इसके अलावा उनके साथ ‘रोटी-बेटी’ व्यवहार भी नहंी करेंगे़ मरावी ने बताया कि डिंडोरी में भाजपा द्वारा निकाली गई कुलस्ते सम्मान यात्रा का भी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी विरोध करेगी और इसके समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के कार्यकर्ता काले झंडे दिखाएंगे़

शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

प्रशासनिक सर्जरी जल्द

राज्य सरकार जल्द ही बड़ी प्रशासनिक सर्जरी करने की तैयारी कर रही है़ इस सर्जरी के तहत मंत्रालय से लेकर जिलों में पदस्थ कलेक्टरों को भी बदले जाने की संभावना है़ वहीं पदोन्नत हो चुके अफसरों की नई पदस्थापना की जानी है़
विधानसभा में कांग्रेस द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने के बाद अब राज्य सरकार कुछ ज्यादा ही सक्रिय हो गई है़ सरकार ने अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चार दिन की चर्चा में जिन कलेक्टरों या मंत्रालय में पदस्थ अफसरों पर कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लिया है़ मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इस मामले उन अफसरों की सूची तैयार करानी शुरु कर दी है, जिन्हें लेकर कांग्रेस ने सरकार को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया था़ वहीं कुछ अफसरों की शिकायतें संगठन से और सरकार दोनों से पार्टी पदाधिकारी लगातार करने आ रहे हैं, उन शिकायतों पर भी सरकार गंभीर हो रही है़
मुख्यमंत्री श्री सिंह ने अब इन शिकायतों को गंभीरता से लिया है़ उन्होंने वर्ष 1987 बैच के पदोन्नत हुए अफसरों को मंत्रालय में पदस्थापना देने के साथ कुछ मैदानी अफसरों को भी बदलने की तैयारी शुरु कर दी है़ बताया जाता है कि इस माह के अंत तक सरकार द्वारा प्रशासनिक सर्जरी की जाने की पूरी तैयारी है़ इस तैयारी के तहत करीब एक दर्जन कलेक्टरों के बदले जाने की खबरें हैं, इसके अलावा पुलिस अधीक्षकों को भी बदले जाने की तैयारी सरकार कर रही है़ बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस द्वारा जो मुद्दे उठाए गए उन्हें भी मुख्यमंत्री सहित संगठन ने गंभीरता से लिया है़ संगठन ने मुख्यमंत्री से अलग से चर्चा कर यह तय किया है कि जल्द ही अधिकारियों को हटाकर नयी पदस्थापनाएं की जाएं, जिससे कार्यकर्ताओं के अलावा सरकार की साख भी बनी रहे़ संगठन द्वारा मुख्यमंत्री को यह जानकारी भी दी गई है कि जिलों में पदस्थ कलेक्टरों द्वारा शासकीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार में रुचि नहीं दिखाई जा रही है,जिसके कारण लोगों तक जानकारी नहीं पहुंच पा रही है और कांग्रेस उसका फायदा उठा रही है़ कांग्रेस द्वारा भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलते ही संगठन ने सरकार पर दबाव बनाने का काम शुरु कर दिया कि वे जल्द ही प्रशासनिक सर्जरी करे, जिससे मिशन 2013 के तहत संगठन भी सक्रिय होकर काम कर सके़

कौन होगा डीजी लोकायुक्त

मध्यप्रदेश लोकायुक्त में पदस्थ पुलिस महानिदेशक डी़जीक़ापदेव के सेवानिवृत्त होने के बाद उनके स्थान को पाने और उससे बचने वालों की सक्रियता बढ़Þ गई है़ इस पद को पाने वालों से बचने वालों की संख्या कुछ ज्यादा ही दिखाई दे रही है़
मध्यप्रदेश लोकायुक्त में पदस्थ पुलिस महानिदेशक डी़जीक़ापदेव की इसी माह सेवानिवृत्ति होनी है़ इस माह की 27 तारीख को वे साठ साल के हो जाएंगे़ उनका स्थान पर अगला पुलिस महानिदेशक कौन होगा इसके लिए सक्रियता कुछ ज्यादा ही बढ़Þ गई़ पुलिस मुख्यालय से लेकर सरकार तक इस पद को पाने वालों में और इस पद से दूरी बनाने वालों की संख्या बढ़Þ गई है़ सरकार भी इस पद पर किसी ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति चाहती है, जिसके कारण सरकार की छवि बची रहे़ कापदेव के स्थान पर सबसे ऊपर ईओडब्ल्यू में पुलिस महानिदेशक पद पर पदस्थ रमेश शर्मा का नाम है़ वैसे उनके अलावा भी पुलिस महानिदेशक होमगार्ड नंदन दुबे और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशासन सुरेन्द्र सिंह का नाम लिया जा रहा है, लेकिन ये दोनों ही इस पद पर जाने से बचना चाहते हैं़ बताया जाता है कि सुरेन्द्रसिंह को वहां पर पदस्थ करने से सरकार भी बचना चाहती है, जबकि भाजपा के ही एक वरिष्ठ नेता इन्हें वहां पर बैठाना चाहते हैं़ वहीं नंदन दुबे के समर्थन में भी संघ से जुड़े कुछ भाजपा के वरिष्ठ नेता आगे आ रहे हैं, लेकिन दुबे इस पद पर जाने से बचना चाहते हैं़ इनके अलावा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पुलिस मुख्यालय वीक़े़ पंवार, पुलिस हाउंसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष पद पर पदस्थ वीक़ेक़ंवर की भी इस पर पहुंचने के लिए सक्रियता नजर आ रही है़ वे यहां अपने को साइड लाइन में होने के कारण लोकायुक्त जाना चाहते हैं, मगर इन नामों पर सरकार की ओर से सक्रियता कुछ कम ही नजर आ रही है़ कापदेव के बाद पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त कौन होगा इसके लेकर सरकार के सामने भी संकट की स्थिति बनी हुई है़ सरकार वहां पर भाजपा से जुड़े अफसर को पदस्थ करना चाहती है, ताकि मंत्रियों को लेकर जो मामले चल रहे हैं वे किसी तरह से दबे रहे और सरकार को इस मामले कांग्रेस घेरने से बची रहे़ सरकार ने फिलहाल इस मुद्दे पर गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता से चर्चा कर इस पर किसी ऐसे व्यक्ति का नाम सुझाने को कहा है जो भाजपा के निकट रहा हो या फिर उसका कांग्रेस से किसी तरह का नाता न रहा हो़

खफा है किसान संघ

भारतीय जनता पाटी अनुशांगिक संगठन भारतीय किसान संघ एक बार फिर अपनी ही सरकार से खफा है़ किसानों की मांगों को लेकर एक बरस पहले किए आंदोलन के तहत मानी गई मांगें पूरी न होने से नाराज संघ आंदोलन की बरसी मनाएगा और सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ते हुए राज्यभर में प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है़ सरकार भी किसान संघ की तैयारियों पर नजर रखे हुए है, मगर वह उसकी रणनीति को अब भी नहीं भांप पाई है़
भारतीय किसान संघ एक बार फिर किसानों की मांगों को लेकर अपनी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहा है़ एक साल पहले 20 दिसंबर 2010 को राजधानी में पहिये थमा देने वाले आंदोलन की सफलता के बाद किसान संघ फिर से किसानों की मांगों को लेकर गंभीर नजर आ रहा है़ सरकार के पास कई मर्तबा अपनी मांगों को पूरा करने की बात कहने के बाद भी जब उनकी मांगें नहीं मानी गई तो किसान संघ ने इस बार अपनी रणनीति को और गोपनीय रखते हुए इस बात का खुलासा तो किया है कि वह किसानों के लिए किए गए आंदोलन की बरसी 20 दिसंबर को मनाएगा़ इसकी रुपरेखा क्या होगी इसका खुलासा संघ नहीं कर रहा है़ फिलहाल वह इतना जरुर कह रहा है कि इस दिन जिला और तहसील स्तर पर किसान अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन करेगा, मगर राजधानी में उसका स्वरुप क्या होगा इसके बारे में संघ के पदाधिकारी मौन हैं़ किसान संघ के पदाधिकारी इन दिनों वैसे तो अपनी बैठकों में सक्रिय हैं़ वे राज्य सरकार के अलावा केन्द्र सरकार के खिलाफ भी मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहे हैं़ मालवा और मध्यप्रांत में किसान संघ के पदाधिकारियों की बैठकों का दौर लगातार जारी है़
किसान संघ द्वारा राजधानी में आंदोलन की रणनीति क्या होगी इसकी जानकारी के लिए सरकार खुफिया तंत्र भी सक्रिय है, मगर वह भी अब तक कोई जानकारी नहीं जुटा पा रहा है़ किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ‘कक्काजी’ का कहना है कि सरकार ने एक साल पहले जो हमें आश्वासन दिया है उस पर वह खरी नहीं उतरी है़ इसलिए हम आंदोलन की बरसी तो मनाएंगे साथ ही सरकार को यह बताएंगे की वह किसानों से जो वादे करे उन्हें पूरा भी करे़ उन्होंने प्रदर्शन किस तरह का होगा इसके बारे में कुछ कहने से मना कर दिया़ किसान संघ के प्रदेश पदाधिकारियों की सक्रियता तो फिलहाल यह बताती है कि संघ की तैयारी किसी बड़े प्रदर्शन की चल रही है, मगर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है़ वहीं सरकार भी किसान संघ के पदाधिकारियों से संपर्क करने की तैयारी कर रही है़ बताया जाता है कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान तिरुपति यात्रा से लौटने के बाद जल्द ही किसान संघ के पदाधिकारियों से चर्चा करेंगे, मगर किसान संघ के पदाधिकारी इस बार अपनी बात पर अडिग नजर आ रहे हैं़ उनका कहना है कि किसान को बिजली तो मिल नहीं रही, साथ ही यूरिया खाद भी समय पर नहीं मिल पाया है़ किसान अपनी हर समस्या को लेकर परेशान है वह अधिकारियों के पास जाता है, मगर उसकी कोई सुनता नहीं है़ पदाधिकारियों को कहना है कि सरकार ने किसान केबिनेट बनाई, मगर उसका भी कोई फायदा किसान को नहीं मिला है़ इस केबिनेट में लिए जाने वाले निर्णयों से किसान को कोई फायदा नहीं हुआ है़
किसान संघ के प्रवक्ता संदीप श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार ने किसानों को आश्वासन देकर केवल झुनझुना पकड़ा दिया है़ किसान इन दिनों परेशान है, अधिकारी सरकार को आंकड़ों में उलझाकर रखे हुए हैं़ इस कारण सरकार किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है़ उन्होंने बताया कि 20 दिसंबर को प्रदेश के हर जिला और तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन कर किसान एक बार फिर अपनी बात सरकार तक पहुंचाएगा़
सदस्यता बढ़Þाकर दिखाएगा ताकत
भारतीय किसान संघ जनवरी 2012 से सदस्यता अभियान की शुुरुआत करने जा रहा है़ इस अभियान के तहत संघ राज्य में अधिक से अधिक सदस्य बनाने की रणनीति बना चुका है़ संघ के पदाधिकारियों को निर्देश भी दिए जा चुके हैं कि सरकार से मांग मनवाने के लिए अब उसे अपनी ताकत का अहसास एक बार फिर सरकार को कराना होगा़ इसके लिए संघ द्वारा यह रणनीति तय की गई है कि राज्य में अधिक से अधिक संख्या में किसान संघ से किसानों को जोड़ा ताए, ताकि सरकार को इस बात का अहसास हो की किसान संघ के बाद बड़ी ताकत है़़

मंगलवार, 13 दिसंबर 2011

‘नंदी’ को लेकर बंटे आदिवासी

‘नंदी’ बैल को लेकर आदिवासी बंटे नजर आ रहे हैं़ आदिवासियों को बांटने वाले और कोई नहीं, बल्कि उनके समाज का राजनीतिक दल गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और आदिवासी महासभा के ही लोग है़ं राजनीति में एक मंच पर होने बाद भी पद के लालच में ये लोग आदिवासियों को बांटने का काम कर रहे हैं़
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और आदिवासी महासभा के लोगों में एक बार फिर टकराव की स्थिति बन सकती है़ आदिवासी महासभा से जुड़े लोगों ने बीते दिनों बैतूल जिले से पचमढ़Þी तक की निकाली ‘नंदी’ यात्रा को लेकर आदिवासी समाज में विघटन की स्थिति नजर आने लगी है़ महाकौशल के जिले विशेषकर बालाघाट, सिवनी के अलावा विंध्य के सीधी, सिंगरौली के आदिवासी एवं मध्य प्रांत और मालवा के बैतूल, देवास,सीहोर और खण्डवा जिलों के आदिवासियों के बीच ‘नंदी’ यात्रा को लेकर टकराव की स्थिति बन गई है़ मध्यप्रांत और मालवा आदिवासी ‘नंदी’ के श्राप को सही बताते हैं़ यही वजह है कि उनका मानना है कि आदिवासी वर्ग ‘नंदी’ चुराने की घटना के बाद अब भी पिछड़ा हुआ है़ बुजुर्गों की कही बात के बाद आदिवासी महासभा के नेतृत्व में बीते दिनों मध्य और मालवा के आदिवासियों ने पचमढ़Þी के महादेव मंदिर पर जाकर एक ‘नंदी’ खरीदकर वापस किया़ यह ‘नंदी’ समाज के लोगों ने 7001 रुपए चंदा जुटाकर खरीदा था़
‘नंदी’ यात्रा के बाद अब कुछ हिस्सों के विशेषकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से जुड़े लोग खफा हो गए हैं़ गोंगपा के पदाधिकारियों ने महासभा से जुड़े लोगों को महासभा का ही नहीं होना बताया, बल्कि उन्हें आदिवासी समाज की रीति और परंपरा का ज्ञान न होने की बात तक कह डाली़ इसके बाद महासभा से जुड़े लोग विशेषकर गोंगपा से बाहर किए गए और बाद में वे गोंगपा से जुड़े उन्होंने भी विरोध करने वालों पर आरोप लगाना शुरु कर दिया़ परिणाम यह हुआ कि आदिवासी लोग आपस में बंटने की स्थिति में नजर आने लगे हैं़
गोंगपा से अलग होकर नया दल बनाने के बाद पुन: गोंगपा में जाने वाले गुलजार सिंह मरकाम का कहना है कि बैतूल, सीहोर, देवास और खण्डवा के साथ-साथ मालवा के आदिवासी इस बात को सही मानते हैं, इसलिए उन्होंने महादेव को ‘नंदी’ भेंट किया है़ उन्होंने कहा कि हीरासिंह और धीरेन्द्र सिंह धीरु आदिवासियों की परंपरा को क्या जाने़ हीरासिंह छत्तीसगढ़Þ की राजनीति करते रहे हैं, उन्हें मध्यप्रदेश के आदिवासियों के रीति रिवाज के बारे में जानकारी नहीं है़ साथ ही धीरु आदिवासी समाज से नहीं है, इसलिए उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है़ उन्होंने कहा कि जो लोग आदिवासी महासभा के इस कदम को विरोध कर रहे हैं वे आदिवासियों के रीति-रिवाज को नहीं जानते हैं़
वहीं इस मामले में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम मरकाम का कहना है कि यह किवदंती केवल भ्रम फैला रही है़ आदिवासियों को भ्रमित करने के लिए जिन लोगों ने ये कदम उठाया वे आदिवासी महासभा के लोग नहीं हैं़

अवैध उत्खनन, गोंगपा मैदान में

सिवनी जिले के घंसौर के निकट बरेला में लग रहे झाबुआ पॉवर प्लांट में हुए अवैध उत्खनन को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है़ गोंगपा ने प्लांट के अलावा दो कलेक्टरों और प्लांट में काम करने वाली कंपनियों के मालिक के खिलाफ मोर्चा खोलकर विरोध शुरु कर दिया है़ पार्टी ने प्रशासन और सरकार द्वारा कार्यवाही नहीं की गई तो मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाने की बात कही है़ गोंगपा ने इस मामले में आज एक शिकायती आवेदन भी घंसौर थाने में दिया है़
सिवनी जिले के घंसोर विधानसभा क्षेत्र के बरेला गांव में लग रहे झाबुआ पॉवर प्लांट में मिट्टी के हुए अवैध उत्खनन को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है़ गोंगपा का कहना है कि यह अधिसूचित क्षेत्र में होने के बाद भी यहां पर मिट्टी का अवैध उत्खनन किसानों की जमीन पर किया गया है़ यह अवैध उत्खनन किसानों की जमीन के अलावा राजस्व और वन विभाग की जमीन पर भी भाजपा के नेताओं की सांठगांठ से हुआ है़ इसे लेकर भाजपा के स्थानीय नेता वैसे तो लंबे समय से सक्रिय थे, मगर बीते एक पखवाड़े से इन नेताओं की सक्रियता कुछ ज्यादा ही नजर आई़ बीते दिनों गोंगपा ने यहां एक सभा की जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम भी पहुंचे और उन्होंने लोगों से इसका विरोध करने को कहा़ मरकाम के कहने पर गोंगपा पदाधिकारियों ने अपनी सक्रियता कुछ ज्यादा बढ़Þा दी़ इन नेताओं ने अब झाबुआ पॉवर प्लांट प्रबंधन, प्लांट में उत्खनन कार्य में जुटी कंपनियों और सिवनी के पूर्व कलेक्टर मनोहर दुबे एवं वर्तमान कलेक्टर अजीत कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है़ वे इस मामले में पुलिस में प्रकरण दर्ज कराना चाहते हैं, इसके लिए आज घंसौर थाने में एक आवेदन भी एफआईआर दर्ज कराने के लिए दिया है़ मगर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आवेदन लेकर विवेचना कर कोई कार्यवाही करने की बात कही है़
गोंगपा का कहना है कि इस क्षेत्र में अधिसूचित क्षेत्र घंसौर पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार अधिनियम 1996 पेशा कानून लागू होता है़ वहां मध्यप्रदेश सरकार और सिवनी जिला प्रशासन द्वारा झाबुआ पॉवर प्लांट लिमिटेड कंपनी को विद्युत निर्माण इकाई संयंत्र स्थापना की अनुमति दी गई है, जो अनुचित है़ पार्टी पदाधिकारियों का आरोप है कि कंपनी को जितने उत्खनन की अनुमति मिली थी, उससे कई गुना ज्यादा उत्खनन यहां हुआ है़ कपंनी के महाप्रबंधक द्वारा एवं उत्खनन के लिए ठेका लेने वाली कंपनी और फिर उक्त कंपनी क द्वारा पेटी कांट्रेक्ट पर ठेकेदारों को काम देकर उत्खनन का कार्य कराया गया है जिनके खिलाफ शिकायतें की गई़ मगर उन पर प्रशासन ने कोई कार्यवाही नहीं की गई़
गोंगपा के सिवनी जिला इकाई के प्रवक्ता विवेक डेहरिया ने बताया कि यहां पर पावर प्लांट के नाम पर किसानों की जमीन पर तो अवैध उत्खनन प्लांट द्वारा जिन कंपनियों का काम दिया है वे कर रही है़ साथ ही ये कंपनियां राजस्व एवं वन क्षेत्र की जमीनों पर भी उत्खनन कर रही है़ श्री डेहरयिा ने बताया कि इस मामले को लेकर पूर्व में हमने एसडीएम सिवनी के यहां 27 और कलेक्टर सिवनी के यहां 1 शिकायत की थी, मगर आज तक इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई है़ इस कारण अब हम इस मामले की पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे़ उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्लांट द्वारा खनन कार्य का ठेका जिन कंपनियों को दिया गया है उनमें अधिकांश ठेकेदार भाजपा के नेताओं हैं़ ये नेता आगे रहकर उत्खनन कार्य करा रहे हैं, और प्रशासन भी भाजपा की सरकार होने के कारण कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है़ उन्होंने बताया कि आज पार्टी द्वारा घंसौर थाने में इस मामले की एफआईआर दर्ज कराने हेतु शिकायती आवेदन दिया है़ पुलिस ने आवेदन तो ले लिया है, मगर एफआईआर दर्ज नहीं की है़ श्री डेहरिया ने बताया कि इस मामले में अगर सरकार और जिला प्रशासन गंभीर नहीं हुआ तो गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा 12 दिसंबर के बाद पार्टी द्वारा सीबीआई, सीआईडी, लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू, से जांच कराने की मांग का आवेदन वे संबंधित जांच एजेंसियों को देंगे़ इसके बाद भी अगर कोई कार्यवाही नहीं होती है तो पार्टी इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय भी जाएगी़
जिन्हें आरोपी बना रही गोंगपा
* मनोहर दुबे, पूर्व कलेक्टर सिवनी
* अजीत कुमार, कलेक्टर सिवनी
* के़एलग़र्ग, एसडीएम घंसोर
* देवेन्द्र चौधरी, तहसीलदार घंसोर
* ए़एऩमिश्रा, महाप्रबंधक प्लांट
* रंजीत शाह,प्लांट मैनेजर
* ममलेश शर्मा, जय मां खैरापति कंपनी
* पंकज दुबे श्री मां रेवा कंपनी
* संजय नेता ठेकेदार
* प्रवीण सिंह, भवानी ट्रेडर्स
* शाहिद खान, एम़बी़सी़सी कपंनी
* केशरी ट्रेडिंग कंपनी
* अखिलेश सिंह गोमती ट्रेडिंग कंपनी
* राघवेन्द्र पटेल, एमपी फेब्रीकेटर्स गोटेगांव
* पीक़े़सिंह जबलपुर एसोसियेट
* सिद्धार्थ कुशवाह, गुरुकृपा एसोसिएट
* अमित सिंग एम एण्ड एम जबलपुर
* बालाजी इंस्टफ्रक्चर कंपनी मुंबई
* रंजीत ठाकुर सिवनी

कब्रिस्तान पर अतिक्रमण

राज्य में अतिक्रमणकारियों ने कब्रिस्तान की जमीन को भी नहीं छोड़ा है़ लोगों ने इस जमीन पर अतिक्रमण कर पक्के निर्माण कार्य तक करा डाले़ वक्फ बोर्ड भी इस मामले में कार्यवाही करने में असमर्थ रहा है़ चौबीस जिलों में अब तक तीन से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां कब्रिस्तान की जमीन पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है़ सबसे ज्यादा मामले ग्वालियर शहर में हुए हैं़
अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने अब कब्रिस्तान की जमीन पर भी कब्जा जमाना शुरु कर दिया है़ वक्फ बोर्ड खुद इस मामले को जान रहा है, मगर वह कुछ करने की स्थिति में नजर नहीं आ रहा है़ कब्रिस्तान की जमीन पर हुए अतिक्रमण को लोगों ने अब पक्के निर्माण में बदलना भी शुरु कर दिया है़ कहीं पर पक्की दुकानें बना ली गई हैं, तो कहीं पर शापिंग काम्पलेक्स का निर्माण तक करा डाला है़ पूरे राज्य में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें अधिकांश मामले राज्य के बड़े शहरों में हुए हैं़ सबसे ज्यादा अतिक्रमण ग्वालियर जिले में 150, भोपाल जिले में 88, इंदौर जिले में 43 होना पाया गया है़ ये मामले वे हैं जो वक्फ के सामने आए और वक्फ ने इन अतिक्रमण को हटाने के लिए कानूनी कार्यवाही की है़ इसके अलावा ऐसे भी कई मामले हैं जिन पर वक्फ बोर्ड कार्यवाही नहीं कर पाया है़
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष गुफरान-ए-आजम स्वयं इस बात को लेकर सहमत हैं कि राज्य के कई शहरों में कब्रिस्तान की जमीन पर लोगों ने अतिक्रमण किया है़ जहां पर अतिक्रमण की शिकायत मिली या फिर वक्फ की जानकारी में आया वहां हमने इस मामले पर कार्यवाही की है़ उन्होंने बताया कि भोपाल सहित अन्य बड़े शहरों में वक्फ इस तरह के मामलों को लेकर गंभीर है और जल्द ही इन्हें हटाने की कार्यवाही करेगा़ उन्होंने बताया कि अब तक राज्य के चौबीस जिलों में 341 प्रकरण वक्फ के सामने आए थे, जिन पर कार्यवाही की गई है़
कहां कितने प्रकरण
जिला संख्या
ग्वालियर 150
भोपाल 88
इंदौर 43
उज्जैन 17
विदिशा 13
रायसेन 05
सीहोर 04
मुरैना 03
रीवा 03
सागर 03
बैतूल 01
भिंड 01
बुरहानुपर 01
दमोह 01
दतिया 01
देवास 01
जबलपुर 01
मंदसौर 01
नरसिंहपुर 01
रतलाम 01
सतना 01
सिवनी 01
शहडोल 01
अनूपपुर 01

शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

दो घंटे में दो ज्योर्तिलिंग के होंगे दर्शन

राज्य में स्थापित दो ज्योतिर्लिंगों के दर्शन अब श्रद्धालु दो घंटे में कर सकेंगे़ राज्य पर्यटन विकास निगम इन दोनों ज्योर्तिलिंगों के दर्शन कराने के लिए राज्य में हेलीकाप्टर का उपयोग करने जा रहा है़ इसी माह होने वाली संचालक मंडल की बैठक में यह फैसला हो सकता है़ अगर फैसले पर मोहर लगा दी गई तो नये साल में श्रद्धालुओं को यह तोहफा मिल सकता है़
एयर टेक्सी को मिली सफलता के बाद राज्य का पर्यटन विकास निगम अब नई पहल की शुरुआत कर रहा है़ देश भर में मध्यप्रदेश के इस प्रयास को सराहा गया, इसके बाद अब पर्यटन विकास निगम द्वारा राज्य के उज्जैन और औंकारेश्वर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से दो ज्योतिर्लिंगों के दर्शन मात्र दो घंटे में कराने का प्रयास कर रहा है़ इसके तहत इंदौर-उज्जैन-औंकारेश्वर को हवाई मार्ग से जोड़कर श्रद्धालुओं को हेलीकाप्टर द्वारा दोनों ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कराने का प्रयास पर्यटन विकास निगम कर रहा है़ इस प्रयास को मूर्त रुप देने के लिए निगम के संचालक मंडल की बैठक 20 दिसंबर को होनी है जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा होगी़ बैठक में वैसे तो अन्य मुद्दे भी है, जिनमें राज्य के पर्यटन स्थलों को संरक्षित कर पर्यटकों को लुभाने के प्रयास करने के, मगर इस मुद्दे को पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष मोहन यादव मुख्य रुप से जोर देकर पास कराना चाहते हैं़
पर्यटन विकास निगम द्वारा पूर्व में राज्य में एयर टैक्सी की शुरुआत की गई है, जिसे पर्यटकों द्वारा काफी सराहा गया है़ ये एयर टेक्सियां मध्यप्रदेश के इंदौर-भोपाल-ग्वालियर-जबलपुर के अलावा कान्हा किसली और बांधवगढ़Þ के लिए चलाई जा रही हैं़ इनकी सफलता के बाद राष्ट्रीय स्तर पर इसकी सराहना भी हुई इसके बाद पर्यटन विकास निगम द्वारा हेलीकाप्टर द्वारा राज्य के दोनों ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कराने की योजना बनाई जा रही है़
पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष मोहन यादव का कहना है कि हमें एयर टेक्सी की सराहना के बाद यह विचार आया कि जब देश में बालटाल से अमरनाथ और केदारनाथ से गंगोत्री एवं यमनोत्री के लिए हवाई मार्ग से श्रद्धालु जा सकते हैं तो हम हमारे प्रदेश के ज्योतिर्लिंगों का क्यों नहीं हवाई मार्ग से दर्शन श्रद्धालुओं को करा दें़ उन्होंने बताया कि अगर 20 दिसंबर को संचालक मंडल ने यह निर्णय ले लिया तो हम जनवरी माह से इसे मूर्तरुप दे देंगे़ श्री यादव ने बताया कि इसके अलावा हम राज्य के रीवा और सतना को भी एयर टैक्सी से जोड़ने जा रहे हैं़ इन दोनों स्थानों के लिए एक सप्ताह में एयर टैक्सी की शुरुआत कर दी जाएगी़

आक्सीटोसिन बना कहर, पुलिस रोकेगी

प्रदेश में दुधारु जानवरों का दूध बढ़Þाने से लेकर फल और सब्जियों को उनके प्राकृतिक और वजन से ज्यादा वृद्धि देने वाला आक्सीटोसिन इंजेक्सन कहर बन गया है़ इस कारण न केवल दूध गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि दुधारु पशुओं का जीवन भी खतरे में पड़ जाता है़ तमाम प्रतिबंधों के बावजूद आक्सीटोसिन इंजेक्सन के उपयोग तक पर रोक के बावजूद इसकी बिक्री धड़ल्ले से हो रही है़ इस खतरनाक इंजेक्सन को रोकने का काम अब स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस का सौंपा है़ इसके लिए राज्य के सभी पुलिस अधिक्षकों को एक परिपत्र जारी कर इसकी रोक के लिए सख्त निर्देश दिए हैं़
स्वास्थ्य विभाग को लगातार मिल रही आक्सीटोसिन का फल, सब्जियों और दुधारु पशुओं में दुरुपयोग की शिकायतों के बाद अब विभाग सजग हुआ है़ विभाग ने इस संबंध में एक परिपत्र जारी कर प्रत्येक जिले के पुलिस अधिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि इसका दुरुपयोग करने वालों पर कार्रवाई की जाए़ विभाग के अनुसार प्रदेश में आक्सीटोसिन दवा का उपयोग इंडियन फार्माकोपिया-2010 के अनुसार आक्सीओसिक अर्थात गर्भाशय की मांसपेशियों को आकुंचन हेतु उत्तेजितकर प्रसव को उत्पनन करने या प्रसव की गति को बढ़Þाने के लिए किया जाना चाहिए़ डेयरियों में इसका उपयोग करने पर रोक है़
विभाग को बीते लंबे समय से आक्सीटोसिन दवा का उपयोग डेयरियों में भैसों का दूध निकालने, फलों और सब्जियों का आकार बढ़Þाने में उपयोग करने की शिकायतें मिल रही थी़ इन शिकायतों पर विभाग ने जांच तो नहीं कराई, लेकिन मामले को गंभीरता से लिया है़ विभाग ने इस मामले में स्वास्थ्य अमले के बजाय पुलिस को इसकी रोकथाम करने में मदद के लिए लिखा है़ विभाग द्वारा जारी किए गए परिपत्र में सभी जिला पुलिस अधिक्षकों को कहा गया है कि वे पशुओं में इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रिवेंशन आफ क्रूऐल्टी एक्ट 1960 के अनुसार कार्यवाही करें़ इस कार्यवाही के तहत दुरुपयोग करते पकड़े जाने वाले पर पुलिस को साफ निर्देश दिए हैं कि वह आरोपी को तीन माह का कारावास या 100 रुपए के जुर्मानें से दंडित कर सकते हैं़ साथ ही विभाग ने कहा है कि बिना प्रिस्क्रिप्शन के आक्सीटोसिन का विक्रय प्रतिबंधित है़ विभाग का साफ कहना है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 में आक्सीटोसिन से फल सब्जियों का आकार बढ़Þाने संबंधी विषय का कोई प्रावधान नहीं है़

भाजपा के बाद सपा हुई सक्रिय

उत्तरप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीख भले ही अभी घोषित नहीं हुई है, मगर मध्यप्रदेश के भाजपा के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं की नजरें वहां के चुनाव पर टिक गई हैं़ भाजपा के नेताओं द्वारा वहां डेरा जमाने के बाद अब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उत्तरप्रदेश चुनाव में पार्टी के समर्थन में वोट जुटाने की तैयारी शुरु कर दी है़ एक जिले में 50 कार्यकर्ता सपा मध्यप्रदेश से भेजेगी़
उत्तरप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव पर भाजपा, कांग्रेस के बाद अब समाजवादी पार्टी के मध्यप्रदेश के नेताओं की नजरें टिक गई हैं़ नेताओं ने अब उत्तरप्रदेश के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना शुरु कर दिया है़ भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के अलावा संगठन के पदाधिकारी एवं जिला स्तर के कार्यकर्ताओं का उत्तरप्रदेश में जमावड़ा लगने लगा है़ भाजपा के अलावा कांग्रेस नेताओं की सक्रियता भी लंबे समय से उत्तरप्रदेश में रही है़ इन दोनों दलों की सक्रियता को देखते हुए अब समाजवादी पार्टी ने भी उत्तरप्रदेश में अपने कार्यकर्ताओं एवं नेताओं को सक्रिय करने की रणनीति बनाई है़ हाल ही में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह के यहां हुई शादी से लौटने के बाद मध्यप्रदेश के नेतााओं ने उत्तरप्रदेश के चुनाव के लिए सक्रियता बढ़Þाई है़ इन नेताओं ने अपने समर्थकों की सूची बनाकर मुलायम सिंह को भेजने की बात कही है़ सूची में वे सक्रिय कार्यकर्ताओं को उत्तरप्रदेश चुनाव के लिए भेजने की तैयारी कर रहे हैं़
समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव का कहना है कि प्रदेश के सपा नेता तो उत्तरप्रदेश चुनाव के लिए जाएंगे ही, साथ ही मध्यप्रदेश के कार्यकर्ताओं को भी इस चुनाव के लिए भेजा जाएगा़ उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी पचास जिलों से कार्यकर्ताओं को उत्तरप्रदेश चुनाव में भेजने की तैयारी हम कर रहे हैं़ उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की सीमा से लगे उत्तरप्रदेश के जिलों में तो अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं को भेजा जाएगा़ इसके अलावा हम उत्तरप्रदेश के सभी जिलों में हमारे कार्यकर्ताओं को भेजेंगे़ हमारा प्रयास यह है कि एक जिले में कम से कम पचास कार्यकर्ता वहां पहुंचें और समाजवादी पार्टी के समर्थन में हम वहां पर कार्य करें़ हमारा लक्ष्य यह है कि यादव नेताओं के अलावा हम अन्य समाज के नेताओं को भी वहां भेजेंगे ताकि उनका वे जातिगत आधार पर प्रभाव डालकर समाजवादी पार्टी के हित में काम कर सकें़

मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

नर्सों के 45 सौ पद रिक्त

राज्य के पचास जिलों के अस्पतालों में स्टाफ नर्स के 45 सौ पद रिक्त पड़े हैं़ नर्सों के पद भरे न जाने के कारण अस्पतालों में मरीजों को परेशानी का सामना करना पढ़Þ रहा है़ चार वर्षीय बी़एस़सी़ नर्सिंग का प्रशिक्षण लेने वाली प्रशिक्षणार्थियों की संख्या भरपूर होने के बावजूद ये पद न भरे जाने के कारण अस्पतालों में स्टाफ की कमी है़ प्रशिक्षण लेने के बाद ग्रामीण अंचलों में चिकित्सकों की भांति नर्सेंं भी नहीं जाना चाहती हैं इस कारण ये समस्या बनी हुई है़ बालाघाट जिले में सर्वाधिक पद 468 रिक्त हैं जबकि सिवनी जिले में 94, छिंदवाड़ा जिले में 53, बैतूल जिले में 31, बुरहानपुर जिले में 69 और खण्डवा जिले में 115 पद स्टाफ नर्सों के रिक्त पड़े हैं़
राज्य के पचास जिलों में 45 सौ पद स्टाफ नर्स के लंबे समय से रिक्त पड़े हैं़ स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्ष 2006-07 में चार वर्षीय बी़एस़सी नर्सिंग का प्रशिक्षण लेने वाले प्रशिक्षणार्थियों को इन पदों के भरने के लिए काउंसलिंग भी की गई, मगर उसके बाद भी ये पद भरे नहीं जा सके हैं़ विभाग द्वारा सात मर्तबा काउंसलिंग की जा चुकी है, इसके बावजूद इन पदों को भरा नहीं जा सका है़ स्टाफ नर्सों के रिक्त पदों के कारण अस्पतालों में मरीज परेशान होते रहते हैं़ स्टाफ नर्सों की कमी का एक कारण यह भी है कि चिकित्सकों की भांति नर्सें भी ग्रामीण अंचलों में पदस्थापना नहीं चाहती है, जिस कारण ये पद समय रहते नहीं भरे जा सके हैं़ स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब फिर से एक बार इन पदों को भरने की कवायद की जा रही है, इस हेतु नर्सिंग काउंसलिंग के लिए फिर से रजिस्ट्रार एवं कर्मचारियों का काउंसलिंग के लिए रजिट्रेशन की प्रक्रिया शुरु की जा रही है़
जिला रिक्त पद
सिवनी 94
छिंदवाड़ा 53
बालाघाट 468
जबलपुर 62
बैतूल 31
मण्डला 48
डिण्डोरी 25
नरसिंहपुर 72
कटनी 39
उज्जैन 148
देवास 89
शाजापुर 147
रतलाम 108
मंदसौर 173
नीमच 62
सागर 72
दमोह 100
पन्ना 74
छतरपुर 116
टीकमगढ़Þ 68
अशोकनगर 61
भिण्ड 91
मुरैना 127
श्योपुर 59
शिवपुरी 103
गुना 180
दतिया 84
ग्वालियर 52
रीवा 74
सतना 118
सीधी 70
शहडोल 109
उमरिया 26
अनूपपुर 39
सिंगरौली 66
इंदौर 32
धार 114
झाबुआ 49
अलीराजपुर 57
बड़वानी 133
खरगौन 122
खण्डवा 115
बुरहानपुर 69
हरदा 16
विदिशा 110
राजगढ़Þ 163
होशंगाबाद 90
रायसेन 127
सीहोर 70
भोपाल 7

गोंडवाना पर गोंगपा का जोर

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अब गोंड बाहुल्य इलाकों में अपनी ताकत लगानी शुरु कर दी है़ संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़Þावा देते हुए पार्टी द्वारा आदिवासी लोगों को अपनी ओर ज्यादा से ज्यादा आकर्षित करने का काम शुरु कर दिया है़ इसके लिए पार्टी ने एक व्यक्ति को दस सदस्य बनाने का लक्ष्य दिया है़
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी अब राज्य में एक बार फिर अपनी ताकत दिखाना चाहती है़ पार्टी द्वारा राज्य के गोंड क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं़ इन कार्यक्रमों में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम स्वयं उपस्थित होते हैं़ वे पार्टी पदाधिकारियों से कम और आदिवासी लोगों के बीच पहुंचकर ज्यादा चर्चा करते हैं़ उन्होंने आदिवासियों को यह बताना शुरु कर दिया है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अब तक आदिवासियों के नाम पर राजनीति ही की है, इसलिए उन्हें अब अपने दल गोंगपा को ज्यादा से ज्यादा ध्यान देना चाहिए़ विंध्य के अलावा महाकौशल क्षेत्र के कई अंचलों में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे हो चुके हैं़ वे अब पार्टी की गतिविधियों को बढ़Þाने के लिए पदाधिकारियों को सक्रिय कर रहे हैं़
श्री मरकाम ने बीते दिनों विंध्य अंचल के अनूपपुर में बैठक आयोजित कर आदिवासी नेताओं को गोंगपा की ताकत बढ़Þाने के लिए सक्रिय किया़ साथ ही यह भी कहा कि हर व्यक्ति दस सदस्य बनाकर गोंगपा से जोड़ेगा़ ये दस सदस्य अगले दस अन्य दस व्यक्तियों को सदस्य बनाएंगे़ इस लक्ष्य के तहत उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि वे अब पार्टी से आदिवासी समाज के अलावा अन्य समाज के लोगों से भी जोड़ेंगे़ सर्वसमाज के नारे के तहत अब गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने प्रदेश में अपनी ताकत बढ़Þाने का फैसला किया है़ पार्टी द्वारा फिलहाल आदिवासी बहुल इलाकों विशेषकर गोंड बाहुल्य क्षेत्र में ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं़ इसके पीछे पार्टी का मुख्य मकसद यह है कि वह पहले अपने से दूर हुए अपने समाज के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करे, उसके बाद दूसरे समाज के बीच अपनी पैठ जमाए़ पार्टी द्वारा लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं़
पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री श्याम मरकाम का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं दौरा कर लोगों के बीच पहुंचकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को पार्टी से जोड़ने का काम कर रहे हैं़ इसके अलावा वे आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भी पदाधिकारियों को टिप्स से रहे हैं कि चुनाव के दौरान उन्हें क्या करना है और किस तरह सजग रहना है़ फिलहाल उनका लक्ष्य पार्टी का सदस्यता अभियान है़

रविवार, 4 दिसंबर 2011

44 जिलों कम हैं प्राचार्य

राज्य के 44 जिले ऐसे हैं जहां पर हाईस्कूलों में प्राचार्य पदस्थ नहीं है़ स्कूल शिक्षा विभाग यहां पर तीन साल से भी अधिक समय बीत गया, मगर प्राचार्य पदस्थ नहीं कर पा रहा है़ राज्य के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस और स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री नानाभाऊ माहोड़ के गृह जिलों में भी प्राचार्यों की कमी है़ मुख्यमंत्री के गृह जिले सीहोर में 75, अर्चना चिटनिस के गृह जिले बुरहानपुर में 29 और नानाभाऊ मोहोड़ के गृह जिले छिंदवाड़ा में 65 पद प्राचार्यों के रिक्त हैं़ प्राचार्य पद पर पदोन्नति न होने के कारण यह स्थिति निर्मित हो रही है़ वर्तमान में भी स्कूल शिक्षा विभाग इन प्राचार्य विहीन हाईस्कूलों में कब तक प्राचार्यों के पद भर लेगा इसके बारे में वह खुद नहीं जानता़ विभाग की मंत्री अर्चना चिटनिस इस मामले में प्राचार्यों की कमी होना तो स्वीकार करती हैं, मगर यह नहीं बता पा रही हैं कि कब तक इन पदों को भरा जा सकेगा़ मंत्री का कहना है कि वे जल्द ही इन पदों को व्याख्याता पद से पदोन्नत कर भरेंगे़
क्र. जिला हाईस्कूल जहां नहीं हैं प्राचार्य
1 ग्वालियर 12
2 शिवपुरी 49
3 गुना 53
4 दतिया 44
5 अशोकनगर 22
6 भिण्ड 53
7 मुरैना 26
8 श्योपुर 20
9 उज्जैन 37
10 नीमच 21
11 मंदसौर 57
12 रतलाम 36
13 शाजापुर 66
14 देवास 65
15 इंदौर 16
16 धार 04
17 खरगौन 14
18 खण्डवा 31
19 बुरहानपुर 29
20 सागर 67
21 छतरपुर 60
22 पन्ना 38
23 दमोह 42
24 टीकमगढ 49
25 भोपाल 06
26 सीहोर 75
27 विदिशा 72
28 रायसेन 50
29 राजगढ 93
30 होशंगाबाद 17
31 बैतूल 28
32 हरदा 28
33 जबलपुर 12
34 बालाघाट 47
35 कटनी 09
36 छिंदवाडा 65
37 नरसिंहपुर 45
38 सिवनी 36
39 रीवा 37
40 उमरिया 10
41 शहडोल 03
42 सतना 46
43 सीधी 42
44 सिंगरौली 55