‘नंदी’ बैल को लेकर आदिवासी बंटे नजर आ रहे हैं़ आदिवासियों को बांटने वाले और कोई नहीं, बल्कि उनके समाज का राजनीतिक दल गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और आदिवासी महासभा के ही लोग है़ं राजनीति में एक मंच पर होने बाद भी पद के लालच में ये लोग आदिवासियों को बांटने का काम कर रहे हैं़
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और आदिवासी महासभा के लोगों में एक बार फिर टकराव की स्थिति बन सकती है़ आदिवासी महासभा से जुड़े लोगों ने बीते दिनों बैतूल जिले से पचमढ़Þी तक की निकाली ‘नंदी’ यात्रा को लेकर आदिवासी समाज में विघटन की स्थिति नजर आने लगी है़ महाकौशल के जिले विशेषकर बालाघाट, सिवनी के अलावा विंध्य के सीधी, सिंगरौली के आदिवासी एवं मध्य प्रांत और मालवा के बैतूल, देवास,सीहोर और खण्डवा जिलों के आदिवासियों के बीच ‘नंदी’ यात्रा को लेकर टकराव की स्थिति बन गई है़ मध्यप्रांत और मालवा आदिवासी ‘नंदी’ के श्राप को सही बताते हैं़ यही वजह है कि उनका मानना है कि आदिवासी वर्ग ‘नंदी’ चुराने की घटना के बाद अब भी पिछड़ा हुआ है़ बुजुर्गों की कही बात के बाद आदिवासी महासभा के नेतृत्व में बीते दिनों मध्य और मालवा के आदिवासियों ने पचमढ़Þी के महादेव मंदिर पर जाकर एक ‘नंदी’ खरीदकर वापस किया़ यह ‘नंदी’ समाज के लोगों ने 7001 रुपए चंदा जुटाकर खरीदा था़
‘नंदी’ यात्रा के बाद अब कुछ हिस्सों के विशेषकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से जुड़े लोग खफा हो गए हैं़ गोंगपा के पदाधिकारियों ने महासभा से जुड़े लोगों को महासभा का ही नहीं होना बताया, बल्कि उन्हें आदिवासी समाज की रीति और परंपरा का ज्ञान न होने की बात तक कह डाली़ इसके बाद महासभा से जुड़े लोग विशेषकर गोंगपा से बाहर किए गए और बाद में वे गोंगपा से जुड़े उन्होंने भी विरोध करने वालों पर आरोप लगाना शुरु कर दिया़ परिणाम यह हुआ कि आदिवासी लोग आपस में बंटने की स्थिति में नजर आने लगे हैं़
गोंगपा से अलग होकर नया दल बनाने के बाद पुन: गोंगपा में जाने वाले गुलजार सिंह मरकाम का कहना है कि बैतूल, सीहोर, देवास और खण्डवा के साथ-साथ मालवा के आदिवासी इस बात को सही मानते हैं, इसलिए उन्होंने महादेव को ‘नंदी’ भेंट किया है़ उन्होंने कहा कि हीरासिंह और धीरेन्द्र सिंह धीरु आदिवासियों की परंपरा को क्या जाने़ हीरासिंह छत्तीसगढ़Þ की राजनीति करते रहे हैं, उन्हें मध्यप्रदेश के आदिवासियों के रीति रिवाज के बारे में जानकारी नहीं है़ साथ ही धीरु आदिवासी समाज से नहीं है, इसलिए उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है़ उन्होंने कहा कि जो लोग आदिवासी महासभा के इस कदम को विरोध कर रहे हैं वे आदिवासियों के रीति-रिवाज को नहीं जानते हैं़
वहीं इस मामले में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम मरकाम का कहना है कि यह किवदंती केवल भ्रम फैला रही है़ आदिवासियों को भ्रमित करने के लिए जिन लोगों ने ये कदम उठाया वे आदिवासी महासभा के लोग नहीं हैं़
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