गुरुवार, 7 मार्च 2024

जहां-जहां भगवान राम, कृष्ण के चरण पड़े उन स्थानों को बनाएंगे तीर्थ स्थल


मुख्यमंत्री ने कहा प्रदेश के सभी देवस्थानों को बनाएंगे धार्मिक पर्यटन का केन्द्र


भोपाल। मुख्यमंत्री डा मोहन यादव ने कहा कि बदलते समय में देश में सांस्कृतिक अनुष्ठान का पर्व चल रहा है। हमारी सरकार ने तय किया है कि मध्यप्रदेश की धरती पर जहां-जहां भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े हैं, उन सभी स्थानों को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डा यादव ने यह बात आज चित्रकूट में अध्यात्म अनुभव परियोजना के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि चित्रकूट सहित पूरे प्रदेश के सभी देवस्थानों को धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनाने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। अब भगवान के शृंगार, पूजा-पाठ की सभी तरह की सामग्री का निर्माण मध्यप्रदेश में ही कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते समय में देश में सांस्कृतिक अनुष्ठान का पर्व चल रहा है। हमारी सरकार ने तय किया है कि मध्यप्रदेश की धरती पर जहां-जहां भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े हैं, उन सभी स्थानों को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ये सुखद सयोंग है कि श्री नगर में कार्यक्रम के चलते-चलते प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्यक्रम के लिए समय निकला। जो श्री नगर नाम का था, जहां श्री का तेज मध्यम पड़ गया था। उस श्री नगर के नाम को 370 हटाकर सार्थक किया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और ये भी श्री नगर है चित्रकूट यहां प्रभू राम के रूप में आए थे। जिन प्रभू राम के नाम से काम सफल हो जाता है उन संबंध चित्रकूट से है, श्री तो इसके नाम में लगना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने की घोषणा
चित्रकूट प्राधिकरण का गठन किया जाएगा।
27 करोड़ की लागत से चित्रकूट के भरत घाट, विश्राम घाट, और राघव प्रयाग घाट का कायाकल्प किया जाएगा। इन घाटों के बनने से लगभग 200 केवट परिवारों को लाभ मिलेगा।
दतिया में पीतांबरा पीठ माता के 25 करोड़ के निर्माण कार्यों की सौगात दी।
अमरकंटक में प्रसाद योजना के माध्यम से 50 करोड़ की लागत से निर्माण कार्य का वर्चुअली शुभारंभ किया।
चित्रकूट में अनुविभागीय अधिकारी बैठेंगे, यहां एक अलग से एसडीएम कार्यालय बनेगा।
चित्रकूट प्रवेश से एमपीटी चौराहा- कामतानाथ, मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश बॉर्डर तक फोर-लेन का निर्माण कार्य कराया जाएगा।
परिक्रमा पथ- गोदावरी, सती अनुसुईया, हनुमान धारा, भरत घाट और अन्य स्थलों पर जो अतिक्रमण है उसे जनता के सहयोग से अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा।

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