शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

सिंधिया की नाराजगी का लेकर समर्थक और मंत्री देते रहे सफाई

 समर्थकों ने कहा सिंधिया को पद की लालसा नहीं, कुछ ने इस्तीफे तक देने की दी धमकी

मध्यप्रदेश में  प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर सियासी पारा आज दिनभर चढ़ा रहा. पूर्व सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की नाराजगी की खबरें भी तेज रहीं. इस तरह की खबरें जब सामने आई तो कमलनाथ के मंत्रियों और सिंधिया समर्थकों ने मैदान संभाला और यह सफाई देते रहे कि सिंधिया पद के लिए नाराज नहीं है. हालांकि सिंधिया की ओर से न तो नाराजगी को लेकर स्पष्ट किया गया और न ही इस तरह की खबरों का खंडन किया गया.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस  की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ बैठकों का दौर आज शुक्रवार को भी दिल्ली में जारी रहा. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उनसे मुलाकात की,  वहीं इस बीच यह खबर तेजी से मीडिया में आई कि इस पद के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपनी दावेदारी पेश की और पार्टी हाईकमान को चेतावनी भी दे दी कि अगर उन्हें प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाया गया तो विकल्प तलाशेंगे. हालांकि सिंधिया ने इन खबरों की न तो पुष्टि की और न ही खंडन. इस तरह की खबरें जब तेज हुई तो कांग्रेस में हड़कंप सा मच गया.  इस बीच समर्थकों और कमलनाथ सरकार के मंत्रियों ने मैदान संभाला और यह स्पष्ट करते रहे कि सिंधिया पद के लिए नाराज नहीं हैं.
राज्य के सहकारिता मंत्री डा. गोविन्द सिंह ने प्रदेश में सियासी गतिविधि पर कहा कि कांग्रेस पार्टी में हाई कमान सारे निर्णय लेता हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जिसे अध्यक्ष बनाएंगी, वही बनेगा और उनके फैसले का स्वागत किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी हमारी नेता हैं उनके फैसले का स्वागत करूंगा. सोनिया गांधी पर कोई दबाव नहीं बना सकता है. वहीं उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का सभी को अधिकार है. परिवार के लोग संगठन के अंदर भी बात करते हैं और बाहर भी. नेता खुद को योग्य समझने पर ही भाव व्यक्त करता है. उन्होंने कहा कि जो भी प्रदेश अध्यक्ष बनेगा वह सभी की पसंद का होगा. नया अध्यक्ष सरकार और मुख्यमंत्री का सहयोगी होगा.
 वहीं सिंधिया समर्थक प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा है कि यह केवल अफवाह है, सिंधिया पद की लालसा में कभी नहीं रहते है. वह सिर्फ समाजसेवा के लिए राजनीति करते हैं. कुछ लोग हैं, जो ऐसी अफवाह फैला रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के लोगों की भावना है कि सिंधिया को प्रदेशाध्यक्ष बनाया जाए. तोमर के अलावा राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि पार्टी को सिंधिया को सम्मानजनक पद सौंपा जाना चाहिए. 
प्रदेश अध्यक्ष पद से काफी ऊंचा है सिंधिया का कद
पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया  की प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर दावेदारी को लोक निर्माण   मंत्री  सज्जन सिंह वर्मा ने  कहा कि कुछ लोगों द्वारा उड़ाई गई ये अफवाह है कि सिंधिया प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी पेश करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि सिंधिया का कद इतना बड़ा है कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के लिए दावेदारी पेश करने की जरूरत ही नहीं है. जब जो पद चाहेंगे वो उन्हें मिल जाएगा, क्योंकि हाईकमान उनकी कार्यशैली और क्षमता को बखूबी जानता है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस महासचिव के पद से काफी छोटा है प्रदेश अध्यक्ष का पद.
शिवराज ने ली चुटकी
ज्योतिरादित्य सिंधिया की नाराजगी पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चुटकी ली है. शिवराज सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार में भी नाटक चल रहा है.  विधायक भी अलग-अलग बयान दे रहे हैं. अब इस कांग्रेस का क्या कहें-दिल के टुकड़े हजार हुए, कोई इधर गिरा, कोई उधर गिरा. बाकी अध्यक्ष पद उनका मामला है.
समर्थकों ने दी इस्तीफे धमकी
दतिया के कांग्रेस नेता अशोक दांगी ने तो खुलकर यह धमकी दी कि अगर सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाया जाता है तो वे 5 सौ कार्यकर्ताओं के साथ इस्तीफा दे देंगे. प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने में एक चमत्कारी एवं करिश्माई व्यक्तित्व की कड़ी मेहनत एवं अथक परिश्रम है तो वह ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं. उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने में सराहनीय योगदान को कांग्रेस नेतृत्व को नहीं भूलना चाहिए. अगर उन्हें प्रदेश की राजनीति से दूर किया जाता है तो मैं कार्यकारी अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी एवं जिला पंचायत सदस्य 500 निष्ठावान कार्यकर्ताओं के साथ के साथ दे देंगे.
सिंधिया समर्थकों ने किया प्रदर्शन
प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए सिंधिया द्वारा दावेदारी करने और उनकी नाराजगी की खबरें जब राजधानी भोपाल पहुंची तो सिंधिया समर्थकों ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन तक कर दिया. सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग को लेकर भोपाल जिला कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कृष्णा घाडगे के साथ बड़ी संख्या में सिंधिया समर्थक प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे और जमकर नारेबाजी करते हुए सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की मांग करते रहे.

कुठियाला पहुंचे ईओडब्ल्यू कार्यालय, दर्ज कराए बयान


माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बी.के. कुठियाला आज ईओडब्ल्यू दफ्तर पहुंचे हैं. वे अपना बयान दर्ज कराने ईओडब्ल्यू के दफ्तर पहुंचे थे. राजधानी की विशेष अदालत ने कुठियाला को फरार घोषित किया है,  उन्हें 31 अगस्त तक कोर्ट में हाजिर होने को कहा गया था. 
आर्थिक अनियमितता तथा अन्य गड़बड़ी के मामले में दर्ज आपराधिक मामले में चार माह तक ईओडब्ल्यू अधिकारियों को छकाने के बाद अंतत: माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बी.के. कुठियाला आज ईओडब्ल्यू पहुंचे.  उनके साथ उनके वकील भी थे.  कुठियाला की संपत्ति कुर्की के मामले में कल शनिवार को कोर्ट में सुनवाई होना है. इसके पहले उन्होंने आज ईओडब्ल्यू कोर्ट में आज अपना पक्ष रखा.
पूर्व में कुठियाला ने ई-मेल कर अधिकारियों से ईओडब्ल्यू में उपस्थित होने का समय मांगा था. ईओडब्ल्यू द्वारा 26 अगस्त को कुठियाला को पेश होने के लिए तारीख दी गई थी, लेकिन वे भोपाल कोर्ट में उपस्थित होकर वापस चले गए. इस पर ईओडब्ल्यू ने फिर नोटिस जारी कर कहा था कि प्रकरण में सीआरपीसी की धारा 161 के तहत बयान देना अनिवार्य है. नोटिस के जवाब में कुठियाला ने फोन पर आज फिर उपस्थित होने का समय मांगा था. हालांकि अफसरों को लग रहा था कि पूर्व की भांति फिर कुठियाला का आना संभव नहीं है, लेकिन दोपहर में वे अपने अधिवक्ता  के साथ ईओडब्ल्यू मुख्यालय मेंं उपस्थित हुए.  कुठियाला ने सबसे पहले डीजी के.एन. तिवारी से मुलाकात की. इसके बाद एसपी अरुण मिश्रा के समक्ष विवेचक अधिकारी द्वारा उनके बयान लिए गए. 
सूत्रों के अनुसार मेडिकल बिलों का विश्वविद्यालय प्रशासन से भुगतान, सेवा समाप्ति के बाद मोबाइल फोन और लैपटाप जमा नहीं करने, घर पर विवि की राशि से बोरवेल कराने, विभिन्न संस्थानों को सेमिनार तथा अन्य आयोजन के लिए अनुदान देने, उनके कार्यकाल में विवि में हुई नियुक्ति, पदोन्नति तथा प्रतिनियुक्ति, विवि में निर्माणाधीन मकान की डीपीआर में बदलाव की शिकायत तथा उनके कार्यकाल में प्रदेश तथा प्रदेश से बाहर खोले गए स्टडी सेंटरों के मामलों में बयान पूछताछ की गई है.

लक्ष्य से पांच गुना ज्यादा बनाए सदस्य

भोपाल जिले में डेढ़ लाख से ज्यादा नए सदस्य बनें

भारतीय जनता पार्टी ने सदस्यता अभियान में मध्यप्रदेश में 68 लाख नए सदस्य बनाए हैं. सदस्यता का यह आंकड़ा प्रदेश को मिले लक्ष्य से पांच गुना ज्यादा है. 
भाजपा द्वारा चलाए गए वर्ष 2019 के सदस्यता अभियान में पार्टी ने पुराने सदस्यों में 20 प्रतिशत नए सदस्य जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया था. इस हिसाब से मध्यप्रदेश में 13 लाख नए सदस्य बनाए जाने थे, लेकिन पार्टी ने  लगभग 68 लाख नए सदस्य बनाए हैं. इनमें से आनलाइन और आफलाइन दोनों मोड से पार्टी ने 49 लाख नए सदस्यों का रिकार्ड दर्ज कर लिया है. बाकी बचे 18 लाख से अधिक नए सदस्यों का रिकार्ड कम्प्यूटर पर अपलोड करने का काम जारी है.
मध्यप्रदेश के सदस्यता अभियान प्रभारी एवं विधायक अरविंद सिंह भदौरिया ने बताया कि इस बार के सदस्यता अभियान के तहत पार्टी ने आनलाइन 26 लाख 96 हजार नए सदस्य बनाए हैं, जबकि आफलाइन मोड से बनाए गए सदस्यों में से अभी तक 22 लाख 93 हजार सदस्यों का डेटा फीड किया जा चुका है. आफलाइन मोड से अभी भी लगभग 18 लाख से अधिक सदस्यों का डेटा फीड किया जाना बाकी है. इसे फीड करने के लिए सभी जिलाध्यक्षों को दस दिन का समय दिया गया था. 31 अगस्त तक पूरा डेटा फीड होने की उम्मीद है. 
पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने बताया कि सदस्यता अभियान के लिए 6 जुलाई से 20 अगस्त तक अभियान चलाया गया. यह सदस्यता तीन वर्ष के लिए की गई है. इससे पहले नवंबर 2014 से मार्च 2015 के दौरान पार्टी का पूर्ण सदस्यता अभियान चलाया गया था, जिसमें छह साल के लिए सदस्य बनाए गए थे. इस तरह से दोनों सदस्यों की अवधि मिलाकर अगला सदस्यता अभियान 2022 में चलाया जाएगा. तब तक यह सभी पार्टी के प्राथमिक सदस्य रहेंगे.
भोपाल जिले में बनाए पौने दो लाख नए सदस्य 
भोपाल जिला शहर इकाई को डेढ़ लाख नए सदस्य बनाने के लिए कहा गया था, जिसके विरुद्ध जिले में अभी तक 1 लाख 72 हजार नए सदस्य बनाए जा चुके हैं. भाजपा के भोपाल जिला अध्यक्ष विकास वीरानी ने बताया कि अभी भी आफलाइन मोड के फार्मों को अपलोड करने का काम जारी है, जिससे आंकड़ा दो लाख के पास पहुंच सकता है.

कमलनाथ सरकार में फिक्स हैं थानों के रेट



मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कमलनाथ सरकार में थानों के रेट फीक्स हैं. सरकार लाचार और प्रशासन लचर है. वहीं कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि चौहान अपने कार्यकाल को देखे, इनके चाल चरित्र से सब वाकिफ हैं.
कानून व्यवस्था को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया है कि कमलनाथ सरकार में थानों का रेट फिक्स हो गया है,  सरकार लाचार हैं और प्रशासन लचर. रेत माफिया बेखौफ कारनामों को अंजाम दे रहे हैं. हर तरफ लूट, भ्रष्टाचार, और अराजकता है,  हम चुप नहीं बैठेंगे, प्रदेश के हक की लड़ाई लड़ेंगे. वहीं शिवराज सिंह चौहान के इस ट्वीट पर राज्य के सहकारिता मंत्री डा. गोविंद सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि शिवराज सिंह चौहान अपने कार्यकाल को देख लें, उस दौरान क्या स्थिति थे. इनके चाल चरित्र को सब जानते हैं. अवैध उत्खनन को लेकर उन्होंने कहा कि हमने जो सच्चाई थी, वह मुख्यमंत्री कमलनाथ को बताई थी और इसके बाद कार्रवाई होने के बाद वहां पर अवैध उत्खनन बंद हो गया है.
 दूसरे ट्वीट में चौहान ने कहा कि महाकाल मंदिर के विकास कार्यों को लेकर चर्चा में राज्य सरकार ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों व उज्जैन की जनता को शामिल नहीं किया. मेरी मांग है कि जो भी नीतिगत फैसले मंदिर के संबंध में लिए जाएं,  उसमें स्थानीय विधायक, सांसद, महापौर और जनता को भी सम्मिलित कर उन्हें भागीदार बनाया जाए. 
कमलनाथ सरकार पर किसानों को नहीं भरोसा
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने ट्वीट कर किसानों को ढांढस बंधाते हुए कमलनाथ सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज हमारा अन्नदाता खुद को अकेला महसूस कर रहा है. कमलनाथ सरकार पर किसान को भरोसा नहीं. न कर्ज़ माफी की आस, न मुआवजा मिलने का भरोसा, हमें उनके हक के लिए अंतिम सांस तक लड़ना है और उनका हक दिलवाना है.
पोल-खोल स्पर्धा शुरु
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने मंत्री गोविंद सिंह द्वारा अवैध उत्खनन के मामले को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के बाद उसका समर्थन किया साथ ही इसे लेकर कटाक्ष भी किया. उन्होंने कहा कि रेत खनन को लेकर राज्य में कांग्रेस सरकार में सरकार और मंत्रियों के बीच पोल-खोल स्पर्धा शुरु हो गई है, जो जीता रेस उसकी.

गुरुवार, 29 अगस्त 2019

कमलनाथ भले आदमी, मंत्री खुद को मान रहे भगवान



मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार को समर्थन देने वाले सपा विधायक राकेश शुक्ला मंत्रियों के कामकाज से नाराज हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ तो भले आदमी हैं, वे काम कर रहे हैं, मगर मंत्री खुद को भगवान समझ रहे हैं.
समाजवादी पार्टी के विधायक राकेश शुक्ला ने आज पत्रकारों से चर्चा करते हुए यह बात कही. उन्होंने मंत्रियों के कामकाज पर सख्त नाराजगी जताई. शुक्ला ने जहां मुख्यमंत्री कमल नाथ को भला आदमी बताते हुए उनके कामकाज की तारीफ की है, वहीं मंत्रियों के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार में मंत्री अपने आपको भगवान समझ रहे हैं. मंत्रियों के पास मिलने का समय नहीं है और सब खुली दुकानें चला रहे हैं. छतरपुर की बिजावर सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक शुक्ला ने कहा कि यह मामला केवल निर्दलीय या समर्थन देने वाले दलों के विधायकों का नहीं है. कांग्रेस के विधायक भी मंत्रियों के व्यवहार और उपेक्षा से दुखी हैं.
 शुक्ला ने कहा कि हम समर्थन देने वाले विधायकों पर तो मुख्यमंत्री नाथ की कृपा है, उनसे मिलकर हम अपनी पीड़ा सुना देते हैं. मगर मंत्री तो खुद को भगवान समझ रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के अलावा कोई भी मंत्री काम नहीं कर रहा है. मलाईदार विभाग संभाल रहे मंत्री खुली दुकानें चला रहे हैं.  मंत्रियों के अलावा शुक्ला ने अधिकारियोंं को भी निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि कलेक्टर और अधिकारी विधायकों के साथ दौरों पर नहीं जाते. विधायकों के फोन तक अधिकारी नहीं उठाते हैं. सपा विधायक ने सरकार की जनहित की योजनाओं को लेकर भी नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि योजनाएं जमीन पर नहीं पहुंच पाई है, यह बड़े दुर्भाग्य की बात है. मंत्री और अधिकारी इस ओर भी ध्यान नहीं दे रहे हैं. 
डा. गोविंद सिंह के आरोपों को लें गंभीरता से
सपा विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि अवैध खनन को लेकर वरिष्ठ मंत्री डा. गोविंद सिंह द्वारा लगाए आरोपों को सरकार गंभीरता से ले. शुक्ला ने कहा कि जब एक वरिष्ठ मंत्री यह बात कह रहा है तो उसे मानना चाहिए. यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि उसी जिले के विधायक उनका विरोध कर रहे हैं. यह शोभा नहीं देता है. उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में अवैध उत्खनन हो रहा है, इसमें दो राय नहीं है. छतरपुर में जब पिछली सरकार थी, तो उन्होंने उत्खनन किया, अब इनके नेता खनन में शामिल हैं. 

आदिवासी विधायक हुए लामबंद, अध्यक्ष का दावा किया पेश


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर अब आदिवासी विधायक लामबंद हुए हैं. आदिवासी विधायकों की ओर से पूर्व मंत्री बिसाहूलाल सिंह ने अध्यक्ष पद के लिए दावा पेश किया है. उन्होंने यह भी दावा किया है कि आदिवासी विधायकों की ओर से राहुल गांधी को एक पत्र लिखकर मांग की है कि प्रदेश में आदिवासी को अध्यक्ष बनाया जाए, इसके लिए विधायकों की ओर से बिसाहूलाल सिंह का नाम भी सुझाया गया है.
राज्य में गुटों में बंटी कांग्रेस के लिए प्रदेश अध्यक्ष का चयन टेड़ी खीर हो गया है. अध्यक्ष पद के लिए भोपाल से दिल्ली तक कवायद तेज है. मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपने समर्थकों को इस पद पर बैठाने के लिए सक्रिय हैं. बुधवार को जब इस पद के लिए दिग्विजय सिंह खेमे के विधायक सक्रिय हुए तो आज आदिवासी विधायकों ने भी अपनी दावेदारी कर दी. बिसाहूलाल ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी की है. उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथ आदिवासी विधायक हैं और आदिवासी विधायकों ने उन्हें (बिसाहू लाल) कोा अध्यक्ष बनाए जाने के लिए एक पत्र भी राहुल गांधी को लिखा है. उन्होंने कहा कि वे वरिष्ठ विधायक हैं, साथ ही उन्हें जब कमलनाथ सरकार में मुझे मंत्री नहीं बनाया गया, अब मुझे अध्यक्ष तो बनाना चाहिए. साथ ही उन्होंने अब तक इस पद के लिए जो भी दावेदार सामने आए हैं, उन्हें विवादित बताया है.
उल्लेखनीय है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कमलनाथ खेमा गृह मंत्री बाला बच्चन का नाम आगे बढ़ा रहे हैं. बच्चन भी आदिवासी विधायक हैं. उनके नाम के लिए कमलनाथ समर्थक मंत्री सज्जन सिंह वर्मा खुलकर पैरवी कर चुके हैं. वहीं सिंधिया गुट के विधायक ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा दिग्विजय समर्थक विधायकों की ओर से अजय सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के लिए पैरवी की जा रही है. 

अवैध उत्खनन को लेकर गर्माई सियासत, नेता प्रतिपक्ष ने कहा अनशन पर बैठूंगा

 भाजपा ने आरोप लगाया कमलनाथ सरकार में बढ़ा अवैध उत्खनन, कांग्रेस ने शिवराज सरकार को बताया दोषी

मध्यप्रदेश में अवैध उत्खनन को लेकर सियासत गर्मा गई है. भाजपा ने कमलनाथ सरकार पर हमला बोला है और अवैध उत्खनन को बढ़ावा देने वाली सरकार बनाया है. वहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने अवैध उत्खनन रोकने कार्रवाई न किए जाने पर मुख्यमंत्री निवास पर अनशन पर बैठने की चेतावनी दे डाली है. जबकि अवैध उत्खनन को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखने वाले सहकारिता मंत्री डा. गोविंद सिंह ने आज बयान जारी कर कहा कि उनके पत्र लिखे जाने के बाद भिंड और दतिया में अवैध उत्खनन बंद हो गया है. कांग्रेस ने इस पूरे मामले को लेकर शिवराज सरकार के कार्यकाल को कोसा और कहा कि कमलनाथ सरकार प्रदेश में अवैध उत्खनन बंद कराएगी.
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में नदियों और खदानों से अवैध उत्खनन बढ़ा है. प्रदेश सरकार के मंत्री खुद यह बात कह रहे हैं कि अवैध उत्खनन के गोरखधंधे से आ रहा पैसा ऊपर तक जा रहा है.  सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ को प्रदेश की जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी सरकार में सबसे ऊपर कौन है और अवैध उत्खनन का पैसा किसके पास जा रहा है. मुख्यमंत्री से यह सवाल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद राकेश सिंह ने मीडिया से चर्चा के दौरान किया. उन्होंने कहा कि मंत्री डा. गोविंद सिंह का बयान मुख्यमंत्री कमलनाथ सरकार की छत्रछाया में चल रही अवैध उत्खनन की बंदरबांट को उजागर करता है. सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार का कर्ताधर्ता मुख्यमंत्री होता है और इस नाते मुख्यमंत्री कमलनाथ को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदेश के मुखिया वे ही हैं, या उनसे भी ऊपर कोई है जो सरकार चला रहा है. मंत्री डॉ. गोविंद सिंह द्वारा आरोप लगाए जाने के बाद मुख्यमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अवैध उत्खनन से हो रही कमाई किस के पास तक जा रही है.
नेता प्रतिपक्ष ने दी अनशन पर बैठने की चेतावनी
गोपाल भार्गव 
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अवैध उत्खनन को लेकर सरकार द्वारा अगर कार्यवाही नहीं की गई तो मैं प्रदेश के पर्यावरणविदों एवं कार्यकर्ताओं के साथ मुख्यमंत्री निवास के सामने अनशन पर बैठ जाऊंगा. उन्होंने कहा कि जब तक अवैध उत्खनन का काला बाजार बंद नहीं हो जाता मेरा अनशन जारी रहेगा.भार्गव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि सरकार के ही वरिष्ठ सदस्य सामान्य प्रशासन मंत्री डा. गोविंद सिंह द्वारा प्रदेश में अवैध उत्खनन के बारे में जो पीड़ा जाहिर की है.वह उनकी अंतरात्मा की आवाज है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि शासन एवं प्रशासन ने प्रदेश के 52 जिलों में पिछले 6 महीनों में हुई कार्यवाही में मात्र 3 करोड रुपए की वसूली की है. जिस प्रकार से रेत का अवैध उत्खनन एवं बिक्री हो रही है और प्रदेश की नदियों का सीना छलनी करके बड़ी-बड़ी मशीनों से उत्खनन हो रहा है. कम से कम जुर्माने की राशि 1 हजार गुना अधिक होकर 3 हजार करोड़ रुपए होनी थी. 
शिवराज के कार्यकाल में चरम पर रहा अवैध उत्खनन 
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने बताया कि जिनकी 15 वर्ष की सरकार में अवैध उत्खनन चरम पर रहा, गोरखधंधा बना रहा. प्रदेश अवैध उत्खनन के मामले में देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल रहा, वह शिवराज सिंह किस मुंह से कांग्रेस की 8 माह की सरकार पर अवैध उत्खनन के आरोप लगा रहे है. उन्होंने कहा कि यह सही है कि भाजपा के 15 वर्ष के राज में अवैध उत्खनन एक गंभीर बीमारी बन चुका है. आठ माह की कांग्रेस सरकार इसको रोकने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है. हमारी सरकार ने ही अवैध उत्खनन को बढ़ावा देने वाली पिछली रेत नीति को भी खत्म कर नई रेत नीति बनायी है. लगातार हम अवैध रेत उत्खनन को रोकने को लेकर, नई रेत नीति पर जनता से पारदर्शी तरीके से सुझाव मांग रहे हैं, लगातार हमारी सरकार अवैध उत्खनन को रोकने की दिशा में कड़े कदम उठा रही है. यह सही है कि इस गंभीर रोग का इलाज करने में समय लगेगा, लेकिन यह भी सच्चाई है कि कमलनाथ सरकार इस रोग को जड़ से समाप्त कर देगी.      
गोविंद सिंह ने भिंड, दतियां में बंद हो गया अवैध उत्खनन   
प्रदेश में अवैध खनिज उत्खनन के मामले में कतिपय समाचार पत्रों द्वारा लिखा गया है कि मेरे द्वारा यह कहा गया कि कुछ विधायक जो सिंधिया गुट के हैं, मेरे खिलाफ गुटबाजी कर साजिश कर रहे हैं. मेरे द्वारा ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया और ना ही सिंधिया का नाम लिया गया. मेरा आशय प्रदेश में अवैध खनिज उत्खनन के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने से है तथा इस संबंध में कार्रवाई तेज हुई है.  भिंड एवं दतिया जिÞलों में अवैध खनिज उत्खनन बंद हो गया है.
शिकायतें मिलने पर अधिकारी होंगे जिम्मेदार
खनिज साधन मंत्री प्रदीप जायसवाल ने विभिन्न माध्यमों से प्राप्त हो रही रेत के अवैध उत्खनन व परिवहन की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि भविष्य में ऐसी शिकायतें प्राप्त होने पर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं जिला खनिज अधिकारी इस संबंध में उत्तरदायी समझे जायेंगे. मंत्री जायसवाल ने इस सिलसिले में प्रमुख सचिव, खनिज साधन से कहा कि संभागायुक्तों को उनके अधीन जिलों में रेत के अवैध खनन और परिवहन पर कार्यवाही की नियमित मानीटरिंग के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाएं. साथ ही संचालनालय स्तर से भी मानीटरिंग सुनिश्चित की जाए.

34 साल बाद वोट के जरिए चुने जाएंगे छात्र नेता

उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने दिए संकेत, सितंबर, अक्तूबर में हो सकते हैं चुनाव


प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव का रास्ता खुला गया है. मध्यप्रदेश में 34 साल बाद कालेजों में वोट के जरिए छात्र नेता चुने जाएंगे. छात्र संघ चुनाव के लिए कालेजों में चुनाव की तारीखों की घोषणा भी जल्द की जाएगा.
 उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने स्वयं इस बात के संकेत दिए हैं. मंत्री का कहना है कि प्रदेश के प्राइवेट और सरकारी कालेजों में इस साल प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्र संघ चुनाव कराए जाएंगे. पटवारी ने कहा कि कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में घोषणा कि थी कि वो सरकार में आने पर प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्र संघ चुनाव आयोजित कराएगी. चुनाव उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी अकादमिक कैलेंडर के अनुसार ही आयोजित कराए जाएंगे. इस हिसाब से चुनाव सितंबर या अक्तूबर में कराए जा सकते हैं.  
उल्लेखनीय है कि कालेजों में छात्र-छात्राएं अपना नेता खुद चुनें, सरकार यही चाहती है. 34 साल बाद यह पहला मौका होगा जब कालेजों में वोट के जरिए छात्र नेता चुने जाएंगे. प्रदेश विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में मतदान के जरिए छात्र संघ 34 साल से नहीं हुए हैं. राजधानी भोपाल में 1984- 85 में अधिकतर कालेजों में आखिरी बार मतदान से छात्र नेता चुने गए थे. छात्र संगठन लंबे समय से प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने की मांग को लेकर सैकड़ों आंदोलन कर चुके हैं.  छात्र संगठनों ने हड़लात की, प्रदेश बंद किया और विधानसभा का घेराव किया, लेकिन उनको आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला. हालांकि सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने छात्रों से चुनाव कराने का वादा किया था जिसे अब वह पूरा करने जा रही है. 
2003  से बंद है प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्र संघ चुनाव
प्रदेश में 2003 से भाजपा सरकार के आने के बाद से ही प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्र संघ चुनाव कराना बंद कर दिया गया था. साल 2006 में उज्जैन प्रोफेसर सभरवाल की छात्र संघ चुनाव में हुई मौत के बाद अप्रत्यक्ष प्रणाली से भी चुनाव कराना बंद कर दिया गया था. इसके बाद साल 2011 और 2017 में अप्रत्यक्ष प्रणाली से छात्र संघ चुनाव कराए गए थे.

कांग्रेस ने शिवराज को बताया मिलावटखोरों के सरपरस्त

शिवराजसिंह चौहान 

मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे ने जारी एक बयान में बताया कि कांगे्रस पार्टी मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान में मिलावटखोरों के सरपरस्त शिवराजसिंह चौहान का साथ नहीं चाहती. उन्होंने कहा कि चौहान ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में मिलावटखोरी के खिलाफ कोई कड़ा कदम नहीं उठाया, अब वे मिलावटखोरों के खिलाफ सजा देने की बात कर केवल स्वांग रच रहे हैं.
दुबे ने कहा कि 15 वर्षो में भाजपा सरकार ने प्रदेश को मिलावटखोरों का गढ़ बना दिया था. आज जिस खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत मिलावटखोरों के खिलाफ कार्यवाही की जा रही है, उसे लागू नहीं होने देने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने केंद्र की तत्कालीन कांगे्रस सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को एक पत्र भी लिखा था और तीन दिन तक पूरे मध्यप्रदेश में भ्रम फैलाकर हड़ताल भी करायी थी. इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट में भी झूठा एफीडेविट देकर तत्कालीन भाजपा सरकार ने कहा था कि वह मिलावटखोरी के खिलाफ आईपीसी के सेक्शन 272 को संशोधित कर मिलावटखोरी के खिलाफ उम्रकैद की सजा का प्रावधान करेगी. उन्होंने कहा कि  खाद्य पदार्थों की जांच के लिए 13 वर्षों तक शिवराजसिंह चौहान के कार्यकाल में सिर्फ एक ही लेबोरेटरी थी, वह भी केवल भोपाल में. जिसकी वजह से 2016 से 2018 के बीच 13 हजार खाद्य पदार्थ के नमूनों का परीक्षण ही नहीं हो पाया.  मगर शिवराजसिंह ने अपनी सरकार रहते कभी मिलावटखोरी के खिलाफ कोई बड़ा कदम नहीं उठाया और आज मिलावटखोरों के खिलाफ खड़े होने का स्वांग रच रहे हैं.  दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट  ने पूरी दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ मिलावटखोरों के खिलाफ कार्यवाही की है. 

बुधवार, 28 अगस्त 2019

हम इंदिरा गांधी से नहीं डरे तो आप कौन सी चीज हैं: शिवराज


मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला है. पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह द्वारा किए प्रदर्शन के बाद जुर्माना लगाने को लेकर उन्होंने कहा कि  जुर्माना लगाने की कोशिश की तो चेतावनी और चुनौती दोनों देता हूं कि बिना अनुमति के इतने जुलूस निकालेंगे हम, इतने आंदोलन करेंगे हम कि देखे किस-किस पर जुर्माना लगाते है. उन्होंने कहा कि हम इंदिरा गांधी से नहीं डरे तो आप कौन सी चीज हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह  चौहान ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ पर हमला बोलते हुए कहा कि आपने मजाक बना दिया है. क्या फिर से आपातकाल लगाना चाहते है ? जनता की आवाज कुचलना चाहते हैं. लोग परेशान है तो सड़कों पर आएंगे. लोकतंत्र में आंदोलन करना, सरकार से मांग करना ये हमारा अधिकार है. चौहान कहा कि आंदोलन को कुचलने की कोशिश स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाकर किया और परिणाम भुगता. अगर जुर्माना लगाने की कोशिश की तो चेतावनी और चुनौती दोनों देता हूं कि बिना अनुमति के इतने जुलूस निकालेंगे हम, इतने आंदोलन करेंगे हम कि देखे किस- किस पर जुर्माना लगाते है. पता नहीं ये कौन सी मानसिकता है. मैं देख लूंगा जुर्माना लगा दूंगा. हम इंदिरा गांधी से नहीं डरे तो आप क्या चीज है.
उन्होंने कहा कि बनारस में मंदिर के सामने से अतिक्रमण हटा दिया गया, लेकिन उज्जैन में महाकाल के दर्शन करने में लोगों को परेशानी हो रही है. अवैध उत्खनन को लेकर उन्होंने कहा कि आज हालात यह है कि मंत्री ही टीआई के रेट बता रहे है. 50 लाख महीने के, मुख्यमंत्री मौन बैठे है, चारों तरफ लूट मची है. नदिया खोद डाली, पहाड़ खोद डाल रहे है. ये अजब सरकार है. इस लूट को रोके मुख्यमंत्री. इसे अंधेर नगरी और चौपट राजा कहते है, इसे रोके.  पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जनहित के कार्यों के लिए हम पूरी ताकत से सरकार का साथ देंगे. मिलावटखोरों के खिलाफ यदि कमलनाथ सरकार अभियान चला रही है तो मैं इस कदम का स्वागत करता हूं.  नागरिकों के जीवन से खिलवाड़ हम बर्दाश्त नहीं कर सकते, लेकिन दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी होना चाहिए, केवल जांच नहीं!
अब सोनिया गांधी कराएं किसानों का कर्ज माफ
किसानों का कर्ज माफ न किए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि राहुल गांधी ने अपना वादा पूरा नहीं किया है, लेकिन अब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी मध्यप्रदेश के किसानों का कर्ज माफ कराएं. उन्होंने कहा कि पीओके पर पाकिस्तान ने अनाधिकृत रूप से कब्जा करके रखा है. पूरे देश के साथ हम भी यह मानते हैं कि कश्मीर पूरा का पूरा हमारा है और पीओके भी हमारा होगा. उन्होंने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी पाकिस्तान को बोलने को मौका देते हैं. 

प्रदेश अध्यक्ष को लेकर गुटों में उलझी कांग्रेस

कमलनाथ, सिंधिया के बाद दिग्विजय सिंह गुट भी हुआ सक्रिय

मध्यप्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कांग्रेस गुटों में उलझ गई है. मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के अलावा अब दिग्विजय सिंह खेमे के दावेदारों की सक्रियता से हाईकमान की परेशानी  भी बढ़ गई है. दिग्विजय समर्थकों की बंद कमरे में हुई बैठक के बाद कमलनाथ और सिंधिया समर्थक भी चिंतित हुए हैं.
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद से ही प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर अब तक ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है. लोकसभा चुनाव के बाद यह माना जा रहा था कि कांग्रेस हाईकमान इस पद पर जल्द ही ताजपोशी करेगा, मगर हाईकमान अब तक प्रदेश अध्यक्ष नहीं बना पाया है. प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए  अब तक कांग्रेस दो गुटों मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया गुटों में बंटी नजर आ रही थी, मगर मंगलवार को जब दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष चयन को लेकर हाईकमान के साथ बैठकों का दौर शुरु हुआ तो अचानक दिग्विजय सिंह गुट ने सक्रियता दिखाई. दिग्विजय सिंह के साथ बंद कमरे में उनके समर्थक अजय सिंह और डा. गोविंद सिंह उपस्थित थे. तीनों नेताओं के बीच बातचीत के बाद दिग्विजय गुट सक्रिय हो गया है. हालांकि दिग्विजय सिंह ने बैठक के बाद यह साफ किया कि उपयुक्त शख्स को इस पद की जिम्मेदारी मिलेगी, इसके लिए सबकों इंतजार करना होगा. वहीं डा. गोविंद सिंंह ने कहा कि इस पद के लिए कौन व्यक्ति उपयुक्त होगा इसका फैसला सोनिया गांधी करेंगे. इसके अलावा खुद अजय सिंह ने अपने को इस पद की दौड़ से बाहर बताया है. मगर सूत्रों की माने तो दिग्विजय सिंह की ओर से इस पद के लिए डा. गोविंद सिंह और अजय सिंह के नाम आगे किए जा रहे हैं.
मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने समर्थक गृह मंत्री बाला बच्चन का नाम पहले से ही आगे बढ़ा रहे हैं, वे बच्चन या फिर लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा को इस पद पर बैठाने की कवायद कर रहे हैं, ताकि सत्ता और संगठन दोनों पर उनका दबाव रहे. वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट द्वारा पहले तो सिंधिया समर्थक रामनिवास रावत का नाम लिया जा रहा था, मगर हाल ही में बदले समीकरण के चलते इस पद के लिए शिक्षा मंत्री डा. प्रभुराम चौधरी या फिर महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी का नाम चर्चा में आया है. 
सिंधिया का नाम सबसे ऊपर

प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए वैसे प्रदेश कांग्रेस प्रभारी दीपक बावरिया ने नेताओं से चर्चा कर करीब आधा दर्जन नामों की सूची कांग्रेस हाईकमान को सौंपी है. इस सूची में सबसे ऊपर पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम बताया जा रहा है. सिंधिया समर्थक सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए दबाव भी बना रहे हैं. सिंधिया का नाम आगे आने की खबरों के बाद से दिग्विजय सिंह गुट के नेताओं की बढ़ी सक्रियता ने पार्टी हाईकमान सोनिया गांधी को मुसीबत में डाल दिया है. हाईकमान का संदेश साफ था कि प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए ऐसे व्यक्ति को कमान सौंपी जाए जो पूरे पांच साल तक कमलनाथ सरकार को चलाने में सहयोग करते हुए संगठन को भी मजबूती दिला सके.
दिग्विजय का नाम भी आया सामने

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए दिग्विजय सिंह का नाम भी अब सामने आया है. दिल्ली में हुई बैठक के बाद यह माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान सोनिया गांधी अनुभवी और मजबूत व्यक्ति को संगठन की कमान सौंपना चाहती हैं. उनका मानना है कि इस पद पर ऐसे व्यक्ति को बैठाया जाए जो सारे गुटों में तालमेल बना कर रखे और सरकार को भी नुकसान नहीं हो. विधानसभा चुनाव के दौरान दिग्विजय सिंंह ने जिस तरह से सभी गुटों को साधने का प्रयास किया था, उसे देखते हुए हाईकमान उन्हें यह जिम्मेदारी सौंप सकता है. सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री कमलनाथ भी सिंह के नाम पर अपनी सहमति दे सकते हैं. 

अवैध उत्खनन को लेकर मंत्री गोविंद सिंह पर सज्जन वर्मा ने बोला हमला

 अधिकारी मेरी नहीं सूनते तो मैं दे देता इस्तीफा

प्रदेश में अवैध उत्खनन को लेकर दो मंत्री आमने-सामने हो गए हैं. दिग्विजय सिंह समर्थक मंत्री डा. गोविंद सिंह द्वारा मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर अवैध उत्खनन पर रोक लगाने की मांग करने के बाद अब कमलनाथ समर्थक मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने डा. सिंह पर हमला बोला है. इतना ही नहीं सज्जन सिंह वर्मा ने यहां तक कह दिया कि अगर अधिकारी मेरी नहीं सुने तो मैं पद से इस्तीफा दे देता.
लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने मध्यप्रदेश में चल रहे अवैध उत्खनन को लेकर राज्य के सहकारिता मंत्री डा. गोविंद सिंह पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि  अवैध उत्खनन रोकना हम सबकी जिम्मेदारी है और यदि डाक्टर गोविंद सिंह अवैध उत्खनन होने की बात कर रहे हैं तो उन्हें खुद जाकर  दतिया भिंड मुरैना में अवैध  उत्खनन रोकना चाहिए. मीडिया से चर्चा करते हुए वर्मा ने कहा कि गोविंद सिंह सबसे वरिष्ठ मंत्री हैं, इसलिए उनकी चिंता जायज है और वरिष्ठ होने के नाते ही उन्हें अपने जिले से अवैध उत्खनन खत्म करने की शुरूआत करनी चाहिए. वर्मा ने कहा कि गोविंद सिंह इतने बड़े कद्दावर मंत्री हैं और अधिकारियों की इतनी मजाल कैसे हो गई कि उनकी न सुने.  सज्जन ने  कहा कि यदि अधिकारी मेरी ना सुने तो मैं तुरंत मंत्री पद से इस्तीफा दे देता.  वर्मा द्वारा डा. गोविंद सिंह को लेकर दिए इस बयान के बाद राजनीतिक हल्कों में हलचल तेज हो गई है. वर्मा का यह बयान डा. गोविंद सिंह पर कटाक्ष किए जाने वाला माना जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश कांग्रेस सचिव सुनील तिवारी ने मंगलवार को गोविंद सिंह पर अवैध खनन को लेकर बड़ा आरोप लगाया था. कांग्रेस सचिव के मुताबिक अवैध खनन के नाम पर थानों में जमकर उगाही की जा रही है.  सुनील तिवारी ने मंत्री के कार्यक्षेत्र में हो रहे इस अवैध कारोबार पर लगाम लगाने की सलाह दी थी. साथ ही ये नसीहत भी दी थी कि अगर वो इस अवैध खेल को रोकने में नाकाम हो रहे हैं तो अपने पद से इस्तीफा दे दें. वहीं डा. गोविंद सिंह ने पिछले दिनों न केवल अवैध खनन को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखा था बल्कि चंबल क्षेत्र के आईजी पर रेत उत्खनन में लिप्त होने के आरोप तक लगा दिए थे.इसके पहले सांसद विवेक तन्खा ने भी इस मामले को लेकर कमलनाथ सरकार पर हमला बोला था.
कम्प्यूटर बाबा ने किया खंडन
प्रदेश में अवैध उत्खनन को लेकर सहकारिता मंत्री डा. गोविंद सिंह के बयान को लेकर नदी-न्यास के अध्यक्ष कम्प्यूटर बाबा ने नकारा है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में अवैध उत्खनन नहीं हो रहा है. बाबा ने कहा कि डा. सिंह ने ग्वालियर-चंबल को लेकर जो बात कही, उसके आधार पर यह नहीं मान लिया जाना चाहिए कि अवैध उत्खनन पूरे प्रदेश में हो रहा है. उन्होंने कहा कि मंत्री द्वारा ग्वालियर-चंबल में उत्खनन का मामला उठाया गया वे खुद वहां जाकर देखेंगे कि क्या स्थिति है.

मध्यप्रदेश में उठी पुलिस कमिश्नर प्रणाली की मांग


मध्य प्रदेश में नई सरकार में नई पुलिस व्यवस्था की मांग फिर जोर पकड़ रही है. प्रदेश की आईपीएस लाबी चाहती है कि प्रदेश में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू हो. इसके लेकर  आईपीएस एसोसिएशन के पदाधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिलकर अपनी मांग रखी.  इस बार गृह विभाग इस पर गंभीर दिख रहा है.
मध्यप्रदेश आईपीएस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ से मंत्रालय में सौजन्य भेंट की. विशेष पुलिस महानिदेशक एसएएफ एवं आईपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय यादव के नेतृत्व में एसोसिएशन के पदाधिकारी मुख्यमंत्री से भेंट करने पहुंचे थे. मुख्यमंत्री से भेंट के दौरान आईपीएस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने खासतौर पर इंदौर व भोपाल महानगरों में पुलिस आयुक्त प्रणाली की आवश्यकता के बारे में बताया. साथ ही वर्ष 1987 बैच के आईपीएस अधिकारियों की पुलिस महानिदेशक वेतनमान व वर्ष 1994 बैच के अधिकारियों की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के पदों पर पदोन्नति एवं मूलवेतन के प्रतिशत के अनुसार जोखिम भत्ता अनुदान देने की मांग रखी. इसके अलावा राज्य में पुलिसिंग से संबंधित उन महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी आईपीएस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से विस्तारपूर्वक चर्चा की, जो पुलिस सिस्टम के दीर्घकालिक मजबूती के लिए जरूरी हैं.
मुख्यमंत्री से भेंट करने पहुंचे प्रतिनिधि मंडल में आईपीएस एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारी एवं गृह सचिव शाहिद अबसार, वर्तमान आईपीएस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान रवि गुप्ता, सचिव एवं सेनानी 23 वी वाहिनी एसएएफ सिमाला प्रसाद और सदस्य एवं उप पुलिस महानिरीक्षक भोपाल डॉ. आशीष व सहायक पुलिस महानिरीक्षक प्रबंध मनीष कपूरिया भी शामिल थे.



सोमवार, 26 अगस्त 2019

विपक्ष की मारक शक्ति से हो रहा भाजपा नेताओं का निधन

 सांसद का विवादित बयान, प्रदेश की राजनीति उठा नया विवाद 

भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर भाजपा नेताओं के हो रहे निधन को लेकर कहा कि विपक्ष की मारक शक्ति के कारण हमारे नेताओं का निधन हो रहा है. सांसद के इस बयान के बाद भाजपा में हलचल मच गई है.
हमेशा विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाली सांसद प्रज्ञा सिंह ने यह बयान आज प्रदेश भाजपा कार्यालय में भाजपा नेता अरुण जेटली और बाबूलाल गौर के निधन पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में दिया. सांसद ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मैं जब चुनाव लड़ रही थी, जब एक महाराज मेरे पास आए थे, तब उन्होंने मुझसे कहा था कि यह बुरा समय चल रहा है. विपक्ष एक मारक शक्ति का प्रयोग कर आपकी पार्टी और उसके नेताओं के लिए कर रहा है, आप सावधान रहें. मैंने उस वक्त इस बात पर ध्यान नहीं दिया. मगर अब जब मैं यह देखती हूं कि हमारी पार्टी के नेताओं का एक-एक कर निधन हो रहा है तो मुझे यह बात सत्य लग रही है, मुझे उन महाराज की बात याद आ रही है. भले ही आप विश्वास करें या न करें, मगर यही सत्य है जो हो रहा है.
सांसद के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भाजपा में हलचल मच गई. नेता एक-दूसरे से यही चर्चा करते रहे कि सांसद का यह बयान कितना सही है. सांसद के इस बयान से प्रदेश की राजनीति में नया विवाद उठ खड़ा हुआ है. हालांकि पार्टी के नेता प्रज्ञा सिंह के इस बयान से किनारा करते नजर आए. वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि प्रज्ञा सिंह के इस बयान को राजनीतिक चश्में से नहीं देखा जाना चाहिए. वहीं सांसद के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि उन्होंने जो कहा उसको स्पष्ट स्वयं प्रज्ञा ठाकुर ही सही से बता सकती हैं. मीडिया से चर्चा करते हुए भार्गव ने कहा कि   वो प्रज्ञा ठाकुर के इस बयान से कोई इत्तेफाक नहीं रखते हैं,और न ही वो ऐसी विचार धारा पर विश्वास करते हैं.
उल्लेखनीय है कि प्रज्ञा सिंह वैसे भी अपने बयानों को लेकर चर्चा में रही है. उनके विवादित बयानों के चलते पार्टी की फजीहत भी हुई है और बाद में उन्होंने इसके लिए माफी भी मांगी है. सांसद द्वारा लोकसभा चुनाव के दौरान एटीएस के हेमंत करकरे और उसके बाद नाथूराम गोडसे को लेकर विवादित बयान दिए गए थे, जिसे लेकर उन पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक की नाराजगी का सामना भी करना पड़ा था.

सांसद के बयान को लेकर  विरोध 
* भाजपा की भोपाल से सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर के आज विपक्ष को लेकर दिए विवादित बयान को कांग्रेस नेता नरेंद्र सलूजा ने शर्मनाक बताया है. मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कमलनाथ के मीडिया समन्वयक सलूजा ने कहा कि ठाकुर के पिछले बयानों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही अब उन्हें मन से माफ कर दिया हो, लेकिन सांसद ठाकुर के निरंतर ऊलजलूल बयानों से देशवासी उन्हें कभी माफ नहीं कर पाएंगे.
* मध्यप्रदेश में कांग्रेस के कोषाध्यक्ष गोविंद गोयल का बयान सामने आया है.  गोविंद ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा पर मोदी संज्ञान लें. अगर उनके पास ऐसी मारक शक्ति है तो पाकिस्तान पर इस्तेमाल करें हमारे पास ऐसी शक्ति होती तो हमारा राज दिल्ली में होता.
* लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भी साध्वी प्रज्ञा के मारक शक्ति के बयान पर कहा मोदी काका ने कैसे-कैसे को सांसद बना दिया है. उनको एक मंदिर दे दो और ये भी ना हो तो सांसद से पार्षद बना दो. सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि साध्वी सेटिंग करके हत्या के मामले से बची हैं.
* बसपा  विधायक रामबाई ने भोपाल सांसद  प्रज्ञा के बयान पर कहा कि वो साधु हैं वही जानती है काला जादू क्या होता है. वही पूजा पाठ करती हैं वही करवाती होंगीं ये सब.
* कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.के.मिश्रा ने कहा कि जिस भारतवर्ष में शाश्वत सत्य मृत्यु को लेकर सभी राजनैतिक दलों व समाज के हृदय में वास्तविक दर्द-मानवीय संवेदनाएं व्याप्त होकर उच्चादर्श स्थापित हैं, वहां भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर द्वारा विपक्ष पर मारक शक्ति के उपयोग की बात कहना मूर्खता के दोयम दर्जे पराकाष्ठा है.

एक रुपए जमा न करें, मैं उनके साथ हूं, हम सब निपट लेंगे



विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने भाजपा के पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह पर प्रदर्शन के लिए किए जुर्माने को लेकर कहा कि सुरेन्द्र सिंह चिंता न करें, मैं उनके साथ हूं. एक पैसा जमा नहीं करें, हम सब निपट लेंगे.
मध्यप्रदेश में पूर्व विधायक सुरेंद ्रनाथ सिंह द्वारा विधानसभा घेराव व आंदोलन करने पर पुलिस प्रशासन के जुर्माने लगाने पर पक्ष और विपक्ष के कई नेता प्रशासन के खिलाफ खड़े हो गए हैं. अब नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह पर लगाए गए लाखों के जुर्माने पर कहा है कि राजधानी के कलेक्टर, कलेक्टरी करने लायक नहीं है. इस तरह से धरना प्रदर्शन करने पर जुर्माना लगाना लोकतंत्र की हत्या है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मैं सुरेंद्र नाथ सिंह से कहूंगा, एक रुपए जमा न करें मैं उनके साथ हूं, हम सब निपट लेंगे.  वहीं आज सहकारिता मंत्री डा. गोविंद सिंह ने  सुरेन्द्र नाथ सिंह के समर्थन में सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि प्रजातंत्र में आंदोलन नहीं होगा तो क्या होगा? पूर्व विधायक से वसूली रोकने के लिए मुख्यमंत्री से अपील करूंगा और कलेक्टर को भी निर्देश दूंगा. 
उल्लेखनीय है कि सुरेन्द्र नाथ सिंह पर लगाए गए जुर्माने को लेकर कांग्रेस के मंत्री पीसी शर्मा और विधायक  कुणाल चौधरी भी सिंह के समर्थन में आए हैं. उन्होंने भी प्रशासन की इस कार्रवाई को उचित नहीं माना और मुख्यमंत्री कमलनाथ से इस मामले में जुर्माना राशि माफ करने की मांग करने को कहा. गौरतलब है कि पुलिस ने यह दलील दी है कि पूर्व विधायक द्वारा बिना सूचना और बिना अनुमति के आंदोलन किया गया था जिसके कारण पुलिस को 23 लाख रूपए का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा ऐसे में यह राशि सुरेंद्रनाथ सिंह से ही वसूला जाएगा.

टेरर फंडिंग पर तकरार, दिग्विजय का शिवराज पर हमला



मध्यप्रदेश के सतना में टेरर फंडिंग के आरोप में 5 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद  प्रदेश का सियासी माहौल गर्मा गया है. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर प्रहार किया है. उन्होंने टेरर फंडिंग के आरोपियों का बीजेपी से कनेक्शन करार देते हुए सवाल पूछा है कि बताओ शिवराज देशद्रोही कौन है.
दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया कि आईएसआई पाकिस्तान के लिए खुफियागीरी करते हुए भाजपा के नेताओं को एनएसए में गिरफ्तार कर सख्त सजा मिलनी चाहिए. धिक्कार है शिवराज तुम्हें. तुम्हारे चेले पाकिस्तान आईएसआई के एजेंट निकले, जिन्हें तुमने जमानत पर छुड़वाने में मदद की. अब बताओ कि देशद्रोही कौन है ? भोपाल एटीएस ने सतना में टेरर फंडिंग रैकेट का खुलासा करते हुए बलराम समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. बलराम सिंह साल 2017 में भी टेरर कनेक्शन के आरोप में गिरफ्तार हो चुका था, लेकिन बाद में उसे कोर्ट से जमानत मिल गई थी. कांग्रेस का आरोप है कि बलराम का कनेक्शन बजरंग दल से रहा है. यही वजह है कि उसके खिलाफ तब की सरकार ने सख्ती नहीं बरती. सतना से पहले पुलिस भोपाल में भी एक ऐसे ही रैकेट का खुलासा कर चुकी है जो समानांतर टेलिफोन एक्सचेंज चलाकर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को जानकारी मुहैया कराता था. इस रैकेट में भाजपा युवा मोर्चा का नेता ध्रुव सक्सेना शामिल पाया गया था.
भाजपा के लोग आंतकी गतिविधियों में हैं शामिल
टेरर फंडिंग रैकेट गिरोह के खुलासे के बाद मंत्री डॉ गोविंद सिंह ने कहा कि भाजपा के लोग आतंकवादी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और फंडिंग भी करते रहे हैं. सहकारिता मंत्री ने भोपाल सांसद  प्रज्ञा ठाकुर का नाम लिए बगैर कहा कि अपराधियों को भोपाल के आयुर्वेदिक अस्पताल में राजा-महाराजों जैसी सुविधाएं दी गई थीं.

रविवार, 25 अगस्त 2019

सिंधिया को महाराष्ट्र की जिम्मेदारी, समर्थक नाराज

 दे रहे इस्तीफे की धमकी, मंत्री बता रहे हाईकमान ने सौंपी जिम्मेदारी

मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर गुटबाजी उभर कर सामने आई है. पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को महाराष्ट्र की कमान सौंपे जाने से उनके समर्थक खुलकर नाराज हो गए हैं और नाराजगी के चलते वे पद से इस्तीफा देने तक की बात करने लगे हैं. वहीं कमलनाथ सरकार के मंत्री इस जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण बता रहे हैं. मंत्रियों का कहना है कि महाराष्ट्र  में देश का सबसे बड़ा चुनाव होना है, इस लिहाज से सिंधिया को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है.
सिंधिया समर्थक मंत्री इमरती देवी की नाराजगी के बाद अब प्रदेश में सिंधिया के समर्थक नेता और कार्यकर्ता सिंधिया को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी चयन की स्क्रीनिंग कमेटी की जिम्मेदारी दिए जाने से नाराज है.  समर्थकों को इस बात की आशंका है कि हाईकमान ऐसा करके सिंधिया को प्रदेश से दूर रख रहा है, जो वे नहीं चाहते हैं.समर्थक यह चाहते हैं कि सिंधिया को प्रदेश की कमान सौंपी जाए. सबसे पहले इसका विरोध राज्य के महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने किया. इसके बाद अब सिंधिया के समर्थक नेता और कार्यकर्ता भी इसके विरोध में सामने आ रहे हैं. 
सिंधिया समर्थक और भाजपा जिला कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कृष्णा घाडके ने तो  सिंधिया को महाराष्ट्र की जिम्मेदारी दिए जाने का विरोध करते हुए पद से इस्तीफा तक देने की बात कह दी है. घाडके का कहना है कि सिंधिया को प्रदेश की कमान सौंपनी चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सिंधिया को प्रदेश की कमान नहीं सौंपी जाती है तो वे पद से इस्तीफा दे देंगे. सिंधिया के अन्य समर्थक नेता भी इसी तरह का विरोध करते हुए अब खुलकर सामने आने लगे हैं. इसी तरह कांग्रेस  प्रवक्ता और सिंधिया समर्थक माने जाने वाले पंकज चतुर्वेदी का कहना है कि विधानसभा चुनाव में कमलनाथ एवं सिंधिया की जोड़ी ने अच्छे परिणाम दिए थे. इस लिहाज से उन्हें प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी जानी चाहिए. वहीं सिंधिया समर्थक नेता और मंत्रियों के विवादित ट्वीट और बयानबाजी का दौर भी तेज हो चला है.
मंत्रियों ने बताया सिंधिया को सौंपी अहम जिम्मेदारी
ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों की नाराजगी जब खुलकर सामने आई तो कमलनाथ सरकार के दूसरे मंत्री इस जिम्मेदारी को हाईकमान द्वारा दी गई अहम जिम्मेदारी बता रहे हैं. जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा ने कहा कि सिंधिया को हाईकमान ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है. इसलिए कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यह फैसला सोच-समझकर ही लिया है. वहीं उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि पार्टी का अनुशासन और मर्यादा है. मैं अपनी बात पार्टी फोरम पर रखंूगा. उन्होंने कहा कि सिंधिया को नई जिम्मेदारी दिए जाने को मैं सही मानता हूं. ये उनका अधिकार है. पटवारी ने कहा कि सिंधिया समर्थक भी जो बात उठा रहे हैं वे भी अपने दिल की बात कह रहे हैं. इसी तरह राज्य के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव पांसे ने भी सिंधिया को दी जिम्मेदारी को अहम जिम्मेदारी बताया है. उन्होंने कहा कि समर्थकों को यह नहीं सोचना चाहिए कि सिंधिया राज्य से बाहर हो गए हैं. वे तो अभी भी प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में हैं.

भाजपा के पूर्व विधायक के समर्थन में आए शिवराज, मंत्री और कांग्रेस विधायक

मंत्री ने कहा नहीं लगना चाहिए जुर्माना, प्रदर्शन करना सबका अधिकार

बिना अनुमति के प्रदर्शन करने का लेकर प्रशासन द्वारा भाजपा पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह पर जुर्माने की कार्रवाई करने का विरोध पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के अलावा राज्य के जनसंपर्क मंत्री पी.सी. शर्मा कांग्रेस के युवा विधायक कुणाल चौधरी ने किया है. शिवराज सिंह ने जहां इस फरमान को तुगलगी फरमान बताया, वहीं कांग्रेस विधायक का कहना है कि प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है. इस मामले को मुख्यमंत्री कमलनाथ संज्ञान में लेंगे. पुलिस की कार्रवाई को उन्होंने गलत माना है.
राजधानी भोपाल में बीते दिनों गुमठी संचालकों के साथ भाजपा के पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह मुख्यमंत्री निवास पर प्रदर्शन किया गया था. इसके अलावा सिंह ने समर्थकों के साथ पुलिस महानिदेश, कमिश्नर और वल्लभ भवन पर भी घेराव किया था. इस प्रदर्शन की उन्होंने अनुमति नहीं ली थी, इसके बाद  पुलिस ने इस संबंध में 23 लाख 76 हजार 280 रुपए की वसूली का प्रस्ताव भोपाल कलेक्टर को भेज दिया है. पुलिस ने जुर्माना लगाए जाने के पीछे तर्क दिया है कि पूर्व विधायक सुरेंद्र नाथ सिंह ने अपने समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री निवास सहित 12 जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया था. जिसके चलते पुलिस को प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा.
सिंह पर जुर्माना लगाए जाने के मामले में अब सियासत गर्मा गई है. पूर्व मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह का समर्थन करते हुए प्रशासन के कदम को तुगलकी करार दिया है. चौहान ने इस मामले पर कमलनाथ सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार जनता के असंतोष को देखकर डर गई है, लिहाजा जुमार्ना लगाकर विरोध की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है. शिवराज ने चेतावनी दी है कि अभी तो वो सरकार से अपील कर रहे हैं लेकिन बाद में देखेंगे कि आखिर कितने लोगों की संपत्ति सरकार कुर्क करती है.
कांग्रेस विधायक भी आए पूर्व विधायक के साथ
कांग्रेस के युवा विधायक कुणाल चौधरी ने भी भाजपा के पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह पर की गई जुर्माने की कार्रवाई को गलत बताया है. पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि  कहा है कि लोकतंत्र में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने का सभी को अधिकार है. उन्होंने पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई को गलत बताया है. कुणाल चौधरी ने कहा मुख्यमंत्री कमलनाथ इस पूरे मामले में संज्ञान लेंगे.  इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नेताओं को भी जनता के हितों का ध्यान रखना चाहिए. मुझे लगता है मुख्यमंत्री कमलनाथ पुलिस के इस फैसले को निरस्त करेंगे.
शिवराज को बताया बीमा एजेंट
कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बीमा एजेंट बताया. उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की बात कर रहे हैं, जिससे बीमा कंपनियों को फायदा होगा और उन्हें फसल बीमा का पैसा नहीं देना पड़ेगा, जबकि क्राप कटिंग होने पर किसान को मुआवजा और बीमा राशि भी मिलती है. चौधरी ने कहा कि शिवराज आरोप लगा रहे हैं कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में बेटियों की शादियों के पैसे नहीं मिल रहे हैं, यह झूठ है. अभी तक 26 से ज्यादा बेटियों की शादी का पैसा उनके खातों में जमा करा दिया गया ळै, जबकि उनके कार्यकाल में तो नकली जेवर बेटियों को दिए गए. चौधरी ने कहा कि किसानों की छाती पर  गोलियां चलवाने वाले शिवराज सिंह को किसानों की बात करने का अधिकार नहीं है. वे मुख्यमंत्री रहते हुए  हेलिकाप्टर से किसानों के बीच जरुर गए, लेकिन किसानों को समय पर पैसा नहीं दिया.
धरना-प्रदर्शन पर नहीं लगाया जाना चाहिए जुर्माना
विधायक कुणाल चौधरी के बाद अब पूर्व विधायक सुरेंद्र नाथ सिंह को जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा का भी समर्थन मिल गया है. सुरेंद्र नाथ सिंह के समर्थन में उतरे शर्मा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा है कि धरना-प्रदर्शन पर जुर्माना लगाना सही नहीं है, इस पर फिर से विचार किया जाना चाहिए.  उन्होंने कहा है कि मैंने इस मामले में कलेक्टर से बात की है.  राजनीति में धरना प्रदर्शन नैसर्गिक प्रक्रिया है. पिछली सरकार ने हमारे खिलाफ 100 से अधिक केस किए और जेल भेजे गए, लेकिन इस संबंध में जुर्माना नहीं लगाया जाना चाहिए.
सिंधिया को महाराष्ट्र की जिम्मेदारी, समर्थक नाराज

टेरर फंडिंग की रिपोर्ट तलब की मुख्यमंत्री ने


मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सतना टेरर फंडिंग मामले में पकड़ाए आरोपियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने इस मामले में अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट पुलिस अधिकारियों से मांगी है.
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सतना टेरर फंडिंग मामले को लेकर उनके द्वारा दिए आदेश के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई है, इसकी रिपोर्ट आला अधिकारियों से मांगी है. इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों से जानकारी मांगी है कि  इस अपराध में 2 वर्ष पूर्व पकड़ाए आरोपियों की जमानत होने और जमानत निरस्त को लेकर तत्कालीन सरकार ने क्या फैसले लिए, आरोपियों की निगरानी की क्या व्यवस्था रही इसकी भी रिपोर्ट उन्हें दी जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि इतने संगीन अपराध में पकड़ाए गए आरोपी की जमानत होने के बाद वापस से उनका इसी अपराध में पकड़े जाना गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. मुख्यमंत्री ने इस मामले को लेकर पूर्व में ही अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. मुख्यमंत्री ने आला पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है और कहा है कि मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने कहा कि इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश होना चाहिए और मध्यप्रदेश की धरती पर इस तरह का देशद्रोही कार्य करने वाले रैकेट नेस्तानाबूद किए जाने चाहिए.
उल्लेखनीय है कि बीते दिनों बजरंग दल के पूर्व नेता बलराम सिंह और तीन अन्य को सतना जिले से रात में गिरफ्तार किया गया था. उन्हें टेरर फंडिंग और खुफिया जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचाने के आरोप में पकड़ा गया है. इन आरोपियों को 26 अगस्त तक एटीएस ने हिरासत में लिया है. इससे पहले बलराम और भाजपा कार्यकर्ता ध्रुव सक्सेना फरवरी 2017 में मध्यप्रदेश एटीएस की गिरफ्त में आए थे. उन्हें पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के  मामले में पकड़ा गया था. इस मामले ेमें 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से ध्रुव और बलराम सहित 13 आरोपियों को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी. इसके बाद से मामले ठंडे में पड़ गया था. अब फिर बलराम की गिरफ्तारी के बाद इसे लेकर सरकार सख्त हुई है और सियासत भी गर्मा गई है. इस पूरे मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों आमने-सामने है.

शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

किसान कर्ज माफी का मुद्दा फिर गर्माया, भाजपा हुई हमलावर

शिवराज सिंह चौहान 
कांग्रेस ने किया बचाव, मुख्यमंत्री ने किसानों को लिखी चिट्ठी

मध्यप्रदेश में किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है.  कमलनाथ सरकार ने कर्जमाफी को लेकर नया प्रारूप बनाया है, जिसमें 2 लाख रुपए से एक रूपए भी कर्ज ज्यादा होगा, तो उस किसान का कर्जमाफ नहीं किया जाएगा, इस पर भाजपा कांग्रेस पर हमलावर है. कमलनाथ सरकार में मंत्री सचिन यादव और कांग्रेस संगठन भाजपा के आरोपों को नकार रहे हैं.
लोकसभा चुनाव के बाद अब फिर से मध्यप्रदेश में किसान कर्ज माफी का मुद्दा गरमाया है. भाजपा इस मुद्दे को लेकर फिर से कमलनाथ सरकार पर हमलावर हुई है.  5 लाख किसानों की कर्जमाफी के दायरे से बाहर किए जाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने सरकार पर कड़ा प्रहार किया है. उन्होंने कहा है कि प्रदेश में सोयाबीन की फसलों में कीट लगने से किसान बबार्दी की कगार पर हैं. सरकार सर्वे भी नहीं कर पा रही है. इस मामले को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखने की बात कही है. इस दौरान उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि किसानों को मुआवजा नहीं मिला तो सड़क पर उतर कर आंदोलन करेंगे.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्जमाफी तो दूर की बात, यह कमलनाथ सरकार मक्के और सोयाबीन के 5 सौ रुपए क्विंटल खा गई, धान का बोनस खा गई, गेहूं 21 सौ रुपए क्विंटल बिकना था, उसके 160 रुपए भी नहीं मिल रहे हैं.  भाजपा द्वारा उठाए गए कर्ज माफी के मुद्दों के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज किसानों के नाम एक पत्र लिखा, इस पत्र का प्रकाशन भी अखबारों में कराया गया. इस पत्र को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मैं एक बात से हैरान हूं, मुख्यमंत्री कमलनाथ जी की लंबी-चौड़ी चिट्ठी अखबारों में छपी है! अरे  किसानों को चिट्ठी नहीं, कर्ज़माफी चाहिए!  आज जिन किसानों का कर्ज माफ नहीं हुआ वे डिफाल्टर बन गए और अब 14 प्रशित ब्याज देना पड़ रहा है, मैं पूछता हूं. यह ब्याज कौन भरेगा? चिट्ठियां लिखने से कुछ नहीं होगा, कर्जमाफी की एकमुश्त राशि किसानों के खातों में जमा करें, तभी वे संतुष्ट होंगे.
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के किसानों को लेकर प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है. प्रदेश सरकार की कर्जमाफी योजना से 5 लाख किसान अब बाहर हो जाएंगे, योजना के तहत ऐसे सभी किसान कर्जमाफी योजना से बाहर हो जाएंगे, जिनका 2 लाख रूपए से ज्यादा का कर्ज होगा, यहां तक कि 2 लाख एक रूपए होने पर भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा. हालांकि बाद में कांग्रेस संगठन ने इस तरह का फैसला सरकार द्वारा लिए जाने को नकार दिया है.
लोगों को सरेआम जलाना आतंक की पराकाष्ठा नहीं थी
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि सोनिया ने कहा कि जब राजीव गांधी  पूर्ण बहुमत से प्रधानमंत्री बने तब भी डर का माहौल नहीं बनने दिया गया! हजारों सिख भाई-बहनों का कत्लेआम किसने किया? किस पार्टी के कार्यकर्ता उस समय माब-लिंचिंग के लिए निकले थे? लोगों को सरेआम जिÞंदा जला दिया गया था, क्या वह आतंक की पराकाष्ठा नहीं थी? उन्होंने कहा कि जिस पार्टी या नेता ने नरेन्द्र मोदी को जितनी गाली दी, वह उतने ही गहरे गड्ढे में गया. चौहान ने कहा कि  आप आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार को देख लीजिए, जहां जिसने जितनी गाली दी, जनता ने उसे उतने ही गहरे गड्ढे में भेजने का काम किया.
मुख्यमंत्री तो नहीं बदले, अध्यक्ष बदल गए
पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सरकार पर साधा निशाना. कर्ज माफी के प्रारूप को बदलने को लेकर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने 10 दिन में कर्ज माफ नही करने पर मुख्यमंत्री बदलने की बात कही थी, लेकिन मुख्यमंत्री तो नही खुद कांग्रेस अध्यक्ष बदल गए.  मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस सरकार यू टर्न वाली सरकार है जो बार-बार अपने वादों से मुकर रही है. प्रदेश में किसी भी किसान का कोई कर्ज माफ नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसी भी किसान का कोई कर्ज माफ नहीं हुआ है.
किसानों के प्रति संवेदनशील है सरकार
मध्यप्रदेश में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस ने कहा कि राज्य की कमलनाथ सरकार किसानों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और सरकार अपने वचन के अनुरूप एक एक किसान की कर्जमाफी के लिए प्रतिबद्ध है. प्रदेश कांग्रेस की मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने  कहा कि किसानों की कर्जमाफी को लेकर मीडिया में आई खबर सत्य नहीं है. उन्होंने कहा कि किसानों की कर्जमाफी से संबंधित वह खबर निराधार और भ्रामक है, जिसमें कहा गया है कि सरकार 2 लाख रुपए के ऊपर के कर्जदार किसानों की कर्जमाफी नहीं करेगी.
सभी किसानों का 2 लाख रुपए तक का कर्ज होगा माफ
किसान कर्ज माफी को लेकर फैली भ्रम की स्थिति को  कृषि मंत्री सचिन यादव ने स्पष्ट करते हुए कहा कि 2 लाख रूपए से अधिक का कर्ज माफ नहीं होने की जो खबरें सामने आ रही हैं, वे भ्रामक हैं. प्रदेश सरकार ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है. सचिन यादव ने अपने बयान में कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ किसानों को लेकर बहुत संवेदनशील है. किसानों की मदद करने के लिए प्रदेश सरकार वचनबद्ध है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने किसान कर्ज माफी की जो घोषणा की थी, कांग्रेस सरकार अपने वचन की पक्की सरकार है. प्रदेश के सभी किसानों को 2 लाख रूपए तक का कर्ज माफ होगा. 

सिंधिया के साथ कांग्रेस में हो रहा खराब व्यवहार

विश्वास सारंग 

मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए कांग्रेस में कोई रास्ता नहीं है. वे कद में, पद में हर हिसाब से राहुल से बीस है,. सिंधिया के साथ निश्चित रुप से कांग्रेस में खराब व्यवहार हो रहा है.
पूर्व मंत्री विश्वास सारंग ने आज मीडिया से चर्चा करते हुए यह बात कही.  ज्योतिरादित्य सिंधिया को स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाएं जाने पर पूर्व मंत्री  ने कहा कि कांग्रेस में केवल नेहरू परिवार को पद नेहरू परिवार को ही सत्ता मिलेगी यह निश्चित है. सिंधिया के लिए कांग्रेस पार्टी में कोई रास्ता नहीं है. पूर्व मंत्री  ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ निश्चित रूप से कांग्रेस में खराब व्यवहार हो रहा है. साथ ही कहा कि सिंधिया राजनीति में हस्तक्षेप न करें, इसलिए मध्यप्रदेश से हटाकर दूसरे राज्य भेज दिया गया है. उन्होंने कहा कि सिंधिया कद में, पद में हर हिसाब से राहुल से बीस है, पर कांग्रेस पार्टी में कोई रास्ता नहीं है. उन्होंने कहा कि सिंधिया के द्वारा राजनीति में हस्तक्षेप न हो, इसलिए उन्हें मध्यप्रदेश से हटाकर दूसरे राज्य में भेज दिया गया, ये उनका अपमान है. 
सारंग ने प्रदेश सरकार को लेकर कहा कि मध्यप्रदेश की सरकार झूठे वादों और झूठी नीतियों के सहारे चल रही है. यह सरकार अपनी नाकामी को झुपाने के लिए विज्ञापनों के माध्यम से अपने ही कर्तव्य की इतिश्री कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार ने वादा किया था कि आर्थिक रुप से कमजोर जोड़ों को मुख्यमंत्री विवाह योजना के माध्यम से 51 हजार रुपए देंगे, साढ़े 22 हजार विवाह इस योजना के तहत हुए, मगर अब तक किसी को भी राशि नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि हम उन कन्याओं से मुलाकात करेंगे ओर उन बच्चियों की आवाज भी उठाएंगे. 
यह गफलत की सरकार है
पूर्व मंत्री विश्वास सारंग ने राज्य की कमलनाथ सरकार को गफलत की सरकार बताया. उन्होंने कहा कि गुट और गिरोह में बंटी हुई कांग्रेस पार्टी की सरकार जब भी बनती है तब ऐसा ही होता है. राज्य के लोगों से वादा तो किया जाता है, मगर उसे निभाया नहीं जाता है. उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस में पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का अपमान हो रहा है और उनके समर्थक मंत्री भी अपमानित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि सभी गफलत में हैं, यह सरकार गफलत की सरकार है.

राज्यसभा जाने वाले मठाधीश वकील चिदंबरम को नहीं दिला सके जमानत

लक्ष्मण सिंह 

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के छोटे भाई और विधायक लक्ष्मण सिंह ने आज अपनी ही पार्टी के वकीलों पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि राज्यसभा जाने वाले ये मठाधीश वकील चिदंबरम को जमानत नहीं दिला पाए हैं.
विधायक लक्ष्मण सिंह ने आज एक ट्वीट किया और अपनी पार्टी के  उन वकीलों को निशाना बनाया जो पार्टी कोटे से राज्यसभा तो जाते हैं, मगर पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम को ये जमानत नहीं दिला पाए. लक्ष्मण सिंह ने ट्वीट कर कहा कि चिदंबरम निर्दोष सिद्ध हों, पार्टी की स्वच्छ छवि बने यही कामना है, परंतु दुख इस बात का है कि हमारे सभी मठाधीश अधिवक्ता, जिन्हें बार बार राज्यसभा का सदस्य बनाया, उनकी जमानत नहीं करा पाए. 
यहां उल्लेखनीय है कि लक्ष्यमण सिंह का सीधा इशारा कपिल सिब्बल, मनु सिंघवी और विवेक तन्खा की ओर हैं. ये तीनों चिदंबरम को जमानत दिलाने का प्रयास तो करते रहे, मगर सफल नहीं हुए. इनकी वकीलों की दलीलें को अस्वीकार कर कोर्ट ने चिदंबरम को रिमांड पर भेजने का फैसला सुनाया. पी चिदंबरम को 26 अगस्त तक सीबीआई की रिमांड पर भेजने का फैसला सुनाया गया है.
गड़बड़ी की तो सजा जरुर मिलेगी
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आज इंदौर में बड़ा बयान दिया है. सुमित्रा महाजन ने कहा कि कोई कितना भी ताकतवर और किसी भी पार्टी का हो, अगर गड़बड़ी की है तो सजा जरूर मिलेगी. यही लोकतंत्र की खूबी है. उल्लेखनीय है कि आईएनएक्स  घोटाले मामले में सीबीआई ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम को अदालत ने  सीबीआई की हिरासत में भेज दिया है. कांग्रेस इस कार्रवाई को साजिश करार दे रही है, वहीं भाजपा इसे सही बता रही है.

बुधवार, 21 अगस्त 2019

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का निधन

 राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, तीन दिन का राजकीय शोक

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर का आज सुबह निधन हो गया. वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे. आज दोपहर को गौर का राजकीय सम्मान के साथ सुभाष नगर स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया. गौर का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया. उनके पोते आकाश गौर ने मुखाग्नि दी.  
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने आज सुबह भोपाल के नर्मदा हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली. गौर को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. इसके अलावा उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था. निधन के बाद पहले बाबूलाल की पार्थिव देह उनके आवास ले जाई गई, जहां मुख्यमंत्री कमलनाथ सहित दिग्गज नेता गौर को श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे. दोपहर 12 बजे बाबूलाल गौर के पार्थिव देह को भाजपा कार्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस दौरान उन्हें कंधा दिया. भाजपा कार्यालय से गौर की अंतिम यात्रा निकाली गई. गौर का  सुभाष नगर विश्राम घाट पर बारिश के बीच अंतिम संस्कार किया गया. उनके पोते आकाश गौर ने उन्हें मुखाग्नि दी.
राज्यपाल लालजी टंडन ने विश्राम घाट पहुंचकर स्वर्गीय गौर को श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राकेश सिंह, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पार्टी के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, पार्टी उपाध्यक्ष प्रभात झा, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा और उमाशंकर गुप्ता समेत पार्टी के बहुत से आला नेता वहां मौजूद रहे.
मोदी सहित राजनेताओं ने दी श्रद्धांजलि
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के निधन की खबर के बाद भाजपा सहित सभी राजनीतिक दलों में शोक की लहर छाई रही. गौर के निधन के समाचार सुनते ही मुख्यमंत्री कमलनाथ सहित मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता गौर के निवास पर पहुंचे और श्रद्धांजलि दी. गौर के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के अलावा कई केन्द्रीय मंत्रियों और भाजपा एवं कांग्रेस के नेताओं ने अपनी ओर से श्रद्धांजलि दी.
तीन दिन का राजकीय शोक
 पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के निधन पर मध्यप्रदेश में आधे दिन का अवकाश घोषित कर दिया गया है. प्रदेश में भोजन अवकाश के बाद किसी भी सरकारी कार्यालय में कामकाज नहीं हुआ. राज्य शासन ने सभी जिलों के कलेक्टरों और संभागीय कमिश्नरों को आदेश जारी कर दिए हैं. मध्यप्रदेश के सामान्य प्रशासन मंत्री डॉक्टर गोविंद सिंह ने बताया कि बाबूलाल गौर के निधन पर सरकार ने मध्यप्रदेश में 3 दिन का राजकीय शोक घोषित कर दिया है. अगले 3 दिनों तक मध्यप्रदेश में कोई भी सांस्कृतिक या उत्साह मनाने वाले कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे. वहीं बुधवार को भोजन अवकाश के बाद सभी कार्यालय बंद रहे. 

बुलडोजर मंत्री के रूप में मिली पहचान



मध्यप्रदेश में वर्ष 1990 से 1992 तक सुंदरलाल पटवा की सरकार का शासन रहा. इस दौरान बाबूलाल गौर को नया नाम बुलडोजर मंत्री का मिला था. गौर इस शासनकाल में नगरीय प्रशासन मंत्री रहे. पुराने भोपाल की सड़कों पर बहुत ज्यादा अतिक्रमण था, जो विकास की राह में रोड़ा बन रहा था.  
उन्होंने नगर को अतिक्रमण मुक्त करने का बीड़ा उठाया और सख्ती के साथ कार्रवाई भी की. इस दौर के कई किस्से आज भी शहर में याद किए  जाते हैं. जैसे एक बार गौतम नगर में अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए गौर ने सिर्फ बुलडोजर खड़ा करके इंजन चालू करा दिया था. इस दौरान बुल्डोजर के डर से अतिक्रमणकारी अपने अतिक्रमण के साथ खुद ब खुद गायब हो गए थे. इसके अलावा, वीआईपी रोड बनने से पहले उस स्थान पर तालाब के किनारे झुग्गियां थीं, जो रोड निर्माण में बाधा बन रहीं थी. इसे लेकर भी लंबे समय विवाद चलता रहा. इस विवाद का निपटारा करने के लिए बाबूलाल गौर एक बार सुबह से ही बुलडोजर लेकर खुद अतिक्रमण स्थल पर पहुंच गए और सामने खड़े होकर बुल्डोजर चलवा दिया था. इस घटना ने बाबूलाल गौर को शहर ही नहीं दिल्ली तक बुलडोजर मंत्री के रूप में पहचान मिली थी.,
भोपाल को पेरिस बनाना चाहते थे 
अपने जीवन का बड़ा हिस्सा भोपाल में गुजारने के कारण बाबूलाल गौर का राजधानी भोपाल  से खास लगाव था. मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने राजधानी को पेरिस बनाने का सपना देखा था. इतना ही नहीं वे अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में कई बार सार्वजनिक रुप से यह बात कह भी चुके थे.  गौर को अपनी बेबाक छवि के लिए भी जाना जाता है, जब भी अपनी ही सरकार की कोई चीज उन्हें ठीक नहीं लगती थी तो खुलकर इस पर बात करते थे. भाजपा ही नहीं विपक्षी दल कांग्रेस के नेता बाबूलाल गौर के इस अंदाज के कायल रहे. उनका हर हमेशा अपने क्षेत्र के लोगों सहित सभी के लिए खुला रहता था. बाबूलाल गौर को अपनी सख्त छवि के लिए भी जाना जाता है. 

उमा भारती ने वचन लेकर बनवाया था मुख्यमंत्री



2003 के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत के साथ जब उमा भारती के नेतृत्व में भाजपा ने सरकार बनाई थी, उसके बाद एक समय ऐसा भी आया जब उमा भारती ने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने से पहले अपने उत्तराधिकारी के रुप में बाबूलाल गौर के हाथ में गंगाजल देकर बाबूलाल गौर से वचन लिया था कि वे जब कहेंगी गौर मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ देंगे. 
दरअसल  उमा भारती के मुख्यमंत्री बनने के  साल भर बाद ही कर्नाटक में हुबली की एक अदालत ने दंगा भड़काने के 10 साल पुराने एक मामले में उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया था. इसके बाद भाजपा  नेतृत्व ने उमा भारती पर नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने को कहा और उन्होंने पद छोड़ दिया. मगर कुर्सी छोड़ने से पहले राज्य के गृहमंत्री बाबूलाल गौर का नाम उन्होंने मुख्यमंत्री पद के लिए बढ़ाया. उमा भारती का बाबूलाल पर इतना भरोसा था कि जब भी वे कहेंगी तो उनके लिए बाद में कुर्सी खाली कर देंगे.  क्लीन चिट मिलने पर जब उमा ने उनसे इस्तीफा मांगा तो गौर ने साफ मना कर दिया था. उमा भारती बागी हो गई. इसके बाद भाजपा ने बीच का रास्ता निकालते हुए दोबारा उमा भारती को मौका देने की जगह शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया, तब शिवराज सिंह चौहान पार्टी के महासचिव थे. आखिरकार 2005 में शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने.
बचपन से ही भोपाल में रहे 
बाबूलाल गौर बचपन से ही भोपाल में रहे. इनके पिता का नाम रामप्रसाद था. बाबूलाल गौर ने अपनी शैक्षणिक योग्यताओं में बी.ए. और एल.एल.बी. की डिग्रियाँ प्राप्त की हैं. गौर पहली बार 1974 में भोपाल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में जनता समर्थित उम्मीदवार के रूप में निर्दलीय विधायक चुने गए थे. वे 7 मार्च, 1990 से 15 दिसम्बर, 1992 तक मध्य प्रदेश के स्थानीय शासन, विधि एवं विधायी कार्य, संसदीय कार्य, जनसम्पर्क, नगरीय कल्याण, शहरी आवास तथा पुनर्वास एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत मंत्री रहे. वे 4 सितंबर, 2002 से 7 दिसम्बर, 2003 तक मध्य प्रदेश विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे. सामाजिक तथा सार्वजनिक जीवन में किये गये विभिन्न महत्त्वपूर्ण कार्यों के लिए गौर को कई सम्मान तथा पुरस्कार प्राप्त होते रहे हैं.  ग्यारहवीं विधान सभा 1999-2003 में बाबूलाल गौर नेता प्रतिपक्ष बनने के पूर्व भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे. गौर को 8 दिसम्बर, 2003 को नगरीय प्रशासन एवं विकास, विधि एवं विधायी कार्य, आवास एवं पर्यावरण, श्रम एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत मंत्री बनाया गया. उन्हें 2 जून, 2004 को गृह, विधि एवं विधायी कार्य तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री बनाया गया था. बाबूलाल गौर 23 अगस्त, 2004 से 29 नवंबर, 2005 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. उन्हें 4 दिसम्बर, 2005 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में वाणिज्य, उद्योग, वाणिज्यिक कर रोजगार, सार्वजनिक उपक्रम तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के मंत्री के रूप में शामिल किया गया था और 20 दिसंबर, 2008 को उन्हें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में फिर से सम्मिलित किया गया.
कपड़ा मिल में मजदूरी कर चलाई थी आजीविका
राजनीति में आने से पहले बाबूलाल गौर ने भोपाल की कपड़ा मिल में मजदूरी की थी और श्रमिकों के हित में अनेक आंदोलनों में भाग लिया था. वे भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक सदस्य थे. उत्तरप्रदेश से मध्यप्रदेश आकर बसने का सफर भी उनका बड़ा रोचक रहा है. इसका खुलासा उन्होंने एक समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में किया था. गौर ने बताया था कि अंग्रेजों के समय में उनके ग्राम नागौरी में दंगल हुआ था. इस दंगल में उनके पिता रामप्रसाद गौर जीते थे. इससे प्रभावित होकर उन्हें शराब कंपनी ने भोपाल में नौकरी दे दी थी. इसके बाद उनका परिवार यहां आकर बस गया था. उस वक्त उनकी उम्र करीब 8 वर्ष थी. इसके बाद यहां पर शराब कंपनी ने उनके पिता को शराब की एक दुकान भी दी. इस दुकान से उस वक्त 35 रुपए की आमदनी हुआ करती थी. जब गौर ने संघ की शाखाओं में जाना शुरु किया तो संघ पदाधिकारियों ने कुछ समय बाद उन्हें शराब दुकान बंद करने और शराब का विक्रय करना बंद करने को कहा. इस पर गौर ने शराब दुकान बंद कर दी और वापस अपने गांव चले गए थे. बाद में वहां भी वे ठीक से खेती नहीं कर पाए तो वापस भोपाल आए और कपड़ा मिल में मजदूरी की.

अलविदा गौर, राजनीति के एक अध्याय का हुआ समापन

गौर युग का हुआ अंत, जनहित के मुद्दों पर नहीं किया समझौता

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के निधन के साथ प्रदेश की राजनीति के एक युग का भी अवसान हो गया. उन्होंने राजनीति के अजेय योद्धा के रुप में अंतिम सांस ली. बुल्डोजर मंत्री के रुप में पहचान बनाने वाले गौर ने मजदूर से मुख्यमंत्री तक के सफर में भाजपा ही नहीं, बल्कि विपक्षी दलों के नेताओं के साथ भी उनके अच्छे संबंध रहे. जनता से जीवंत संपर्क रखने वाले इस नेता ने कभी भी जनहित के मुद्दों पर समझौता नहीं किया. कई अवसरों पर वे पार्टी गाईड लाइन से हटकर अपनी बात रखते थे. 
मध्यप्रदेश की सियासत में आज गौर युग का अंत हो गया. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के निधन के साथ ही आज प्रदेश ने कुशल प्रशासक और कुशल राजनीतिज्ञ को खो दिया.   1974 में मध्य प्रदेश शासन द्वारा बाबूलाल गौर को गोआ मुक्ति आंदोलन में शामिल होने के कारण स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का सम्मान प्रदान किया गया था. सक्रिय राजनीति में आने से पहले बाबूलाल गौर ने भोपाल की कपड़ा मिल में मजदूरी की थी और श्रमिकों के हित में अनेक आंदोलनों में भाग लिया था. वे भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक सदस्य थे . वे 7 मार्च 1990 से 15 दिसंबर 1992 तक मध्यप्रदेश के स्थानीय शासन, विधि एवं विधायी कार्य, संसदीय कार्य, जनसंपर्क, नगरीय कल्याण, शहरी आवास तथा पुनर्वास एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत मंत्री रहे. गौर 4 सितंबर 2002 से 7 दिसंबर 2003 तक मध्य प्रदेश विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे. बाबूलाल गौर सन 1946 से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे.  उन्होंने दिल्ली तथा पंजाब आदि राज्यों में आयोजित सत्याग्रहों में भी भाग लिया था. गौर आपातकाल के दौरान 19 माह की जेल भी काटी .
विधायक से मुख्यमंत्री तक का सफर
उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के ग्राम नौगीर में 2 जून 1930 को जन्मे बाबूलाल गौर का भाजपा के नेता के रूप में मध्यप्रदेश की राजनीति में प्रमुख स्थान रहा. 23 अगस्त 2004 से 29 नवंबर 2005 तक वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.  बीए और एलएलबी डिग्रीधारी गौर पहली बार 1974 में भोपाल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में निर्दलीय विधायक चुने गए थे. उन्होंने 1977 में गोविन्दपुरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और वर्ष 2013 तक वहां से लगातार 10 बार विधानसभा चुनाव जीते. 1993 के विधानसभा चुनाव में 59 हजार 666 मतों के अंतर से विजय प्राप्त कर बाबूलाल गौर ने कीर्तिमान रचा था और 2003 के विधानसभा चुनाव में 64 हजार 212 मतों के अंतर से विजय पाकर अपने ही कीर्तिमान को तोड़ा.  जून 2016 में भाजपा आलाकमान ने उम्र का हवाला देकर गौर को मंत्री पद छोड़ने के लिए कहा था. पार्टी के इस निर्णय से वे स्तब्ध और दुखी थे. 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा न तो उन्हें टिकट देना चाहती थी न उनकी पुत्रबधू कृष्णा को. गौर ने बगाबती तेवर अपना लिए और पार्टी के खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी. आखिरकार भाजपा ने कृष्णा गौर को टिकट दिया और कृष्णा को इस सीट पर जीत मिली.

मंगलवार, 20 अगस्त 2019

प्रज्ञा के बयान पर गर्माई सियासत, कांग्रेस ने किया विरोध

शोभा ओझा ने कहा कि उनके अंदर से गांधीजी का हत्यारा गोडसे बोल रहा है

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बाद अब भोपाल से सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को अपराधी की संज्ञा दी है. शिवराज के नेहरू को अपराधी कहे जाने वाले बयान पर भोपाल में प्रतिक्रिया देते हुए सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि 'हमारे भारत को जो भी पीड़ा पहुंचाएगा, हमारे भारत को जो भी खंडित करने का प्रयास करेगा, वह निश्चित रूप से अपराधी होगा, इसमें कोई शक नहीं'. प्रज्ञा के बयान पर कांग्रेस मीडिया सेल की प्रभारी शोभा ओझा ने कहा कि उनके अंदर से गांधीजी का हत्यारा गोडसे बोलता है.
सांसद प्रज्ञा सिंह ने कहा कि कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद पाक अधिकृत कश्मीर भी भारत का हिस्सा है. कांग्रेस सरकारों द्वारा किए गए तमाम समझौते धारा 370 के खत्म होते ही खत्म हो गए. इसलिए अब पाक अधिकृत कश्मीर भारत का है और अब आगे उस पर ही बात होगी और उसे वापस लिया जाएगा.  प्रज्ञा  ने कहा कि धारा 370 खत्म होने के बाद देशभक्त जश्न मना रहे हैं, जो देशभक्त नहीं है वे रो रहे हैं. ऐसे लोग देश भक्त तो हो ही नहीं सकते. धारा 370 और 5 ए हटने पर जो लोग खुश हैं, हमारे देश पर गर्व कर रहे हैं, जो लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर गर्व कर रहे हैं वह देशभक्त हैं.  उन्होंने कहा कि यह परिभाषा इस बार सिद्ध हो गई है कि कौन देश के साथ है और कौन देश के विरुद्ध है. उन्होंने कहा हमारे अखंड भारत को जो भी पीड़ा पहुंचाएगा, भारत को जो भी खंडित करने का प्रयास करेगा वह निश्चित रूप से अपराधी होगा इसमें कोई शक नहीं है. 
प्रज्ञा के इस बयान का कांग्रेस की मीडिया सेल की प्रभारी शोभा ओझा ने विरोध किया है. उन्होंने कहा कि प्रज्ञा ने जो बयान दिया है वह यह साबित करता है कि आज भी उनके अंदर गोडसे बोलता है. 
उल्लेखनीय है कि इससे पहले शिवराज सिंह चौहान ने ओडिशा में सदस्यता अभियान के दौरान देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को कश्मीर में धारा 370 लगवाने पर अपराधी कहा था, जिसके बाद देशभर में विवाद खड़ा हो गया था. हालांकि बाद में भोपाल आकर शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि जवाहरलाल नेहरू को लेकर उन्होंने जो कुछ भी ओडिशा में कहा, वह तथ्यों के आधार पर कहा. हालांकि प्रज्ञा ने कांग्रेस द्वारा धारा 370 का विरोध करने को लेकर कहा कि जो लोग प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर गर्व कर रहे हैं वह देश भक्त हैं, जो नहीं वह देश के विरुद्ध है.

रतुल से मेरा व्यावसायिक संबंध नहीं


मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भोपाल में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती पर आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि रतुल से मेरा कोई व्यावसायिक संबंध नहीं है. लेकिन यह मुझे विशुद्ध रूप से एक माला कार्रवाई प्रतीत होता है. 
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मुझे विश्वास है कि अदालत इस बारे में सही रुख अपनाएगी. उनकी जो गिरफ्तारी की गई है मैं इसे मानता हूं कि यह मेलाफाइड है. उन्होंने कहा कि सब संस्थाओं का जिस तरह से राजनैतिक दुरुपयोग किया जा रहा है, यह दुख की बात है.  उन्होंने कहा कि यह सब कुछ सामने हे कि क्या किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी चिदंबरम, कभी अहमद पटेल, कभी शिवसेना के नेताओं के, कभी उद्योगपतियों पर इन संस्थाओं द्वारा दबाव बनाया जा रहा है. यह सब ठीक नहीं है. यह देश कहा घसीटा जा रहा है मैं किसी चीज से परेशान नहीं हूं.
स्कूल से निकाले बहनों को फिर से दें प्रवेश
मध्यप्रदेश के धार मे मांडव रोड स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली नेपाली मूल की दो बहनों अनुष्का और अवनिशा को स्कूल से निकालने की घटना को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गंभीरता से लिया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय ना हो, उन्हें पढ़ाई से वंचित ना होने दिया जाए. उन्होंने कहा कि एक तरफ तो हम नारा देते हैं ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, दूसरी तरफ बेटियों को स्कूल से निकाले जाने की घटना,बेहद आपत्तिजनक है. मुख्यमंत्री ने प्रशासन को निर्देश दिए कि पूरे मामले की तत्काल जांच की जाए. बेटियां वापस स्कूल में पढ़ाई करें. यह सुनिश्चित किया जाए और इसमें अभिभावकों की कोई गलती भी जांच में सामने आती है तो उसके आधार पर बच्चियों को स्कूल से निकालने का निर्णय पूरी तरह से गलत है. मुख्यमंत्री ने कहा कि भले इन बच्चियों ने देश के प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर न्याय की गुहार लगाई है, लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के नाते, प्रदेश की जनता के प्रति प्रथम दायित्व मेरा है. उन्होंने कहा कि बहन-बेटियों साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं हो, उनके सम्मान को ठेस ना पहुंचे, यह मेरा दायित्व व कर्तव्य है. इसको लेकर मेरी सरकार सदैव वचनबद्ध है.

मिलावट के बाद नशीले पदार्थों के खिलाफ चलेगा अभियान

 मुख्यमंत्री कमल नाथ का युवाओं से संवाद में की घोषणा

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि हम प्रदेश में शुद्ध के लिए युद्ध के बाद नशीले पदार्थों के विरूद्ध बड़ा अभियान चलाएंगे. उन्होंने कहा कि मेरी सभी युवाओं से अपेक्षा है कि वह हमारे इस अभियान से जुड़े ताकि हम प्रदेश में मिलावटमुक्त प्रदेश बनाएं और युवाओं को नशीले पदार्थों से मुक्त करें.
 युवा संकल्प वर्ष 2019-20 समारोह में युवाओं से संवाद के दौरान रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के छात्र आशुतोष मेहरा के प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री ने यह बात कही. उन्होंने कहा कि हम प्रदेश में शुद्ध के लिए युद्ध के बाद नशीले पदार्थों के विरूद्ध बड़ा अभियान चलाएंगे. उन्होंने कहा कि मेरी सभी युवाओं से अपेक्षा है कि वह हमारे इस अभियान से जुड़े ताकि हम प्रदेश में मिलावटमुक्त प्रदेश बनाएं और युवाओं को नशीले पदार्थों से मुक्त करें। उन्होंने कहा कि यह अभियान तभी सफल होगा जब युवा वर्ग इससे जुड़ेगा. एमवीएम के छात्र चंद्रशेखर प्रजापति द्वारा मुख्यमंत्री की युवाओं से अपेक्षा पर पूछे प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री ने यह कहा. मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में दो बाते प्रमुखता से होती हैं अचीवमेंट और दूसरा फुलफिलमेंट नाथ ने कहा कि हम शिक्षा प्राप्त करके, रोजगार प्राप्त करके उपलब्धि हासिल कर लेते हैं लेकिन हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हम अपनी उपलब्धि को संतुष्टि में परिवर्तित करें. हमें अपने देश, समाज और परिवार के विकास के लिए भी योगदान देना चाहिए. 
एक्सीलेंस कालेज के छात्र अक्षय तिवारी द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि हम प्रदेश में निवेश के लिए विश्वास का वातावरण तैयार कर रहे हैं ताकि प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार दिए जा सकें. हम अपनी नई निवेश नीति को उद्योगों के जरूरत के मुताबिक सेक्टर वाईस बना रहे हैं. बेहतर निवेश के बगैर हम अपने प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल नहीं कर सकते. 
मानसी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा मिशन है कि अपने प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराएं ताकि वे रोजगार और अन्य प्रदेश के छात्र-छात्राओं के साथ पूरी सक्षमता के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें. इसके लिए हम मध्यप्रदेश में कौशल विकास पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. 
सरोजनी नायडु कन्या महाविद्यालय की छात्रा कुमारी ईशा सक्सेना के प्रश्नों के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि हम प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बराबरी से प्रयास कर रहे हैं. अधिक से अधिक स्टेडियम बनाने के साथ ही प्रतिभावान खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय ट्रेनिंग दी जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलकूद हमारे जीवन के लिए जरूरी है क्योंकि यह में मानसिक अनुशासन के साथ ही हमें शारीरिक रूप से स्वस्थ भी बनाता है.
एक छात्र द्वारा छिंदवाड़ा मॉडल की तरह मध्यप्रदेश के अन्य क्षेत्रों को भी विकसित करने संबंधी प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि कौशल विकास के क्षेत्र में हमने आज से दस-बारह वर्ष पहले ही छिंदवाड़ा में काम करना शुरू कर दिया था. उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा मेरे लिए सिर्फ एक निर्वाचन क्षेत्र ही नहीं है बल्कि एक परिवार है जिसकी मैं चिंता करता हूं. मुख्यमंत्री ने कहा कि छिंदवाड़ा मॉडल में मैंने शिक्षा के हर स्तर के अनुसार युवाओं को रोजगार देने की व्यवस्था की है. उन्होंने कहा कि आज सबसे ज्यादा स्किल सेंटर छिंदवाड़ा में है.

सोमवार, 19 अगस्त 2019

आश्वासन के बाद मान गए देव मुरारी बापू



मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार से नाराज चल रहे संत देव मुरारी बापू ने सरकार से मिले आश्वासन के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ के निवास के सामने आत्मदाह करने की घोषणा वापस ले ली. उन्होंने राजधानी के टीटी नगर एसडीएम और टीटी नगर थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी घोषणा वापस ली है.
कथा वाचक संत देव मुरारी बापू ने टीटी नगर एसडीएम राजेश गुप्ता और थाना प्रभारी टीटी नगर को ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने कहा कि मैं अपने आत्मदाह की घोषणा को वापस लेता हूं और अब किसी प्रकार का आंदोलन नहीं होगा. संत देवमुरारी ने सरकार से सुरक्षा देने और पद की मांग की थी. वे अपनी इस मांग को लेकर जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा के साथ मुख्यमंत्री कमलनाथ से भी मिले थे, मगर उनकी मांग पूरी नहीं हो पाई थी. इसके चलते उन्होंने रविवार को मीडिया से चर्चा करते हुए आज सोमवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ के निवास के सामने आत्मदाह की चेतावनी दी थी. इस चेतावनी के बाद देवमुरारी बापू को सरकार की ओर से सुरक्षा और शासकीय पद दिए जाने का आश्वासन मिला है. 
उल्लेखनीय है कि रविवार को  देव मुरारी बापू ने मीडिया से चर्चा करते हुए कमलनाथ सरकार के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की थी. उन्होंने कहा था कि विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने कांग्रेस के पक्ष में कार्य किया था. चुनाव पूर्व कांग्रेस ने उनसे कुछ वादे किए थे जो अब तक पूरे नहीं हुए हैं. उनकी मेहनत और कार्य को देखकर शंकराचार्य के शिष्य सुबोधानंद व कम्प्यूटर बाबा की तरह सम्मान दिया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके अलावा देव मुरारी बापू ने खुद की जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी.
मैं सरकार के साथ हूं और रहूंगा
संत देव मुरारी बापू को सरकार द्वारा सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने पर उन्होंने कहा कि मैंने अपनी मांग सरकार के सामने रखी थी, जिसे सरकार ने पूरी कर ली है. जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने देव मुरारी बापू को आश्वस्त किया कि निश्चित ही आपको शासकीय पद दिया जाएगा. सरकार से आश्वासन मिलने के बाद देव मुरारी बापू ने  जो आत्मदाह की घोषणा की थी उसे निरस्त कर दिया. मीडिया से बातचीत में देव मुरारी बापू ने कहा कि मैं सरकार के साथ हूं और हमेशा सरकार के साथ रहूंगा. सरकार के लिए कार्य करूंगा.