स्वतंत्रता दिवस पर नहीं किया जाएगा सम्मान
मध्यप्रदेश में स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस बार मीसाबंदी न तो विशेष अतिथि होंगे और न ही उन्हें सम्मानित किया जाएगा. राज्य सरकार ने पिछले सालों में इस मौके पर किए जाने वाले उनके सम्मान के कार्यक्रम को टाल दिया है. मीसाबंदियों और भाजपा सरकार ने प्रदेश सरकार के इस फैसले का विरोध भी तेज कर दिया है.
शिवराज सरकार के कार्यकाल में मीसाबंदियों (आपातकाल के दौरान जेल में रहे लोगों) को स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में सम्मानित किया जाता रहा है, इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले निर्देशों में 8वें क्रम पर यह निर्देश पिछले साल तक जारी होता रहा है, लेकिन इस साल कलेक्टरों को भेजे गए स्वतंत्रता दिवस समारोह के निर्देश से मीसाबंदियों से संबंधित निर्देश हटा दिए गए है.
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी किए निर्देश में मुख्य कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों एवं गणमान्य व्यक्तियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा. स्वतंत्रता दिवस समारोह में मीसाबंदियों को आमंत्रित नहीं किए जाने पर भाजपा ने इसका विरोध भी करना शुरु कर दिया है. भाजपा नेताओं का कहना है कि यह कांग्रेस सरकार की ओछी राजनीति है. कमलनाथ सरकार पहले भी पेंशन को लेकर विवाद में आ चुकी है. इसके बाद जांच के नाम पर कई जिलों में मीसाबंदियों को अब तक पेंशन नहीं दी गई है. सरकार के इस फैसले का मीसाबंदियों ने भी इसका विरोध जताया है. मीसाबंदियों का कहना है कि सरकार ने पहले ही कई जिलों में मीसाबंदियों की पेंशन रोक दी है, अब उन्हें सम्मान से भी वंचित रखा जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मीसाबंदियों को दी जाने वाली पेंशन भौतिक सत्यापन के बाद ही दिए जाने के आदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने दिए थे, इसके बाद कुछ जिलों में सत्यापन के बाद तो पेंशन की जाने लगी है पर लगभग 2 दर्जन जिलों में अभी भी पेंशन नहीं मिल रही है.
किसी भी लड़ाई से कोई लेना-देना नहीं
जनसंपर्क मंत्री मंत्री पी.सी. शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिवार और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को सरकार के द्वारा आमंत्रित और सम्मानित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मीसाबंदियों को स्वतंत्रता संग्राम या देश की किसी भी लड़ाई से कोई लेना देना नहीं है. सरकार ने इस बाबत सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी कर दिया है.
मध्यप्रदेश में स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस बार मीसाबंदी न तो विशेष अतिथि होंगे और न ही उन्हें सम्मानित किया जाएगा. राज्य सरकार ने पिछले सालों में इस मौके पर किए जाने वाले उनके सम्मान के कार्यक्रम को टाल दिया है. मीसाबंदियों और भाजपा सरकार ने प्रदेश सरकार के इस फैसले का विरोध भी तेज कर दिया है.
शिवराज सरकार के कार्यकाल में मीसाबंदियों (आपातकाल के दौरान जेल में रहे लोगों) को स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में सम्मानित किया जाता रहा है, इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले निर्देशों में 8वें क्रम पर यह निर्देश पिछले साल तक जारी होता रहा है, लेकिन इस साल कलेक्टरों को भेजे गए स्वतंत्रता दिवस समारोह के निर्देश से मीसाबंदियों से संबंधित निर्देश हटा दिए गए है.
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी किए निर्देश में मुख्य कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों एवं गणमान्य व्यक्तियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा. स्वतंत्रता दिवस समारोह में मीसाबंदियों को आमंत्रित नहीं किए जाने पर भाजपा ने इसका विरोध भी करना शुरु कर दिया है. भाजपा नेताओं का कहना है कि यह कांग्रेस सरकार की ओछी राजनीति है. कमलनाथ सरकार पहले भी पेंशन को लेकर विवाद में आ चुकी है. इसके बाद जांच के नाम पर कई जिलों में मीसाबंदियों को अब तक पेंशन नहीं दी गई है. सरकार के इस फैसले का मीसाबंदियों ने भी इसका विरोध जताया है. मीसाबंदियों का कहना है कि सरकार ने पहले ही कई जिलों में मीसाबंदियों की पेंशन रोक दी है, अब उन्हें सम्मान से भी वंचित रखा जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मीसाबंदियों को दी जाने वाली पेंशन भौतिक सत्यापन के बाद ही दिए जाने के आदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने दिए थे, इसके बाद कुछ जिलों में सत्यापन के बाद तो पेंशन की जाने लगी है पर लगभग 2 दर्जन जिलों में अभी भी पेंशन नहीं मिल रही है.
किसी भी लड़ाई से कोई लेना-देना नहीं
जनसंपर्क मंत्री मंत्री पी.सी. शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिवार और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को सरकार के द्वारा आमंत्रित और सम्मानित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मीसाबंदियों को स्वतंत्रता संग्राम या देश की किसी भी लड़ाई से कोई लेना देना नहीं है. सरकार ने इस बाबत सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी कर दिया है.
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