मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अनावश्यक व्यय रोकने पर दी बधाईमध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के प्रशासन ने सरकारी खर्च में कटौती कर गुड गवर्नेंस की एक बड़ी मिसाल पेश की है. जिला प्रशासन ने नागद्वारी मेले में 54 लाख रुपए की बड़ी बचत की है, क्योंकि मेले के लिए बजट करीब 64 लाख रुपए रखा गया था और पिछले 5 सालों में मेले पर 50 लाख रुपए से ज्यादा का खर्च होता आया है, लेकिन इस बार प्रशासन ने महज 10 लाख रुपए में मेला संपन्न करा दिया, जिसकी मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर सराहना की है.
होशंगाबाद जिले के पचमढ़ी में आयोजित नागद्वारी मेला 6 अगस्त को संपन्न हुआ. इस बार आयोजित नागद्वारी मेले में उल्लेखनीय यह रहा की ना केवल हजारों की तादाद में श्रद्धालु नागद्वारी मेले में पहुंचे अपितु प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की उचित व्यस्थाओं के साथ-साथ कम खर्च में मेले का उत्कृष्ट प्रबंधन किया गया. यह कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन और जिला पंचायत सीईओ आदित्य सिंह के निरंतर निरीक्षण और कुशल प्रबंधन से संभव हुआ. पिछले वर्षो के आंकड़ों के आधार पर देखे तो जहो पूर्व में मेले में श्रद्धालुओं के लिए भोजन व्यवस्था हेतु 2016 में 10 लाख, वर्ष 2017 में 11 लाख, 2018 में 22 लाख 47 हजार रूपए की राशि खर्च हुई थी. इसकी तुलना में इस वर्ष मात्र 70 हजार की राशि भोजन व्यवस्था पर व्यय हुई है.
इस वर्ष मेले की व्यवस्था हेतु उपस्थित अधिकारियों द्वारा होटलो में भोजन न कर भंडारों में ही भोजन किया गया. इसी प्रकार टेंट व्यवस्था में पिछले वर्ष किए गए 16 लाख रूपए की राशि की तुलना में इस वर्ष मात्र 4 लाख रूपए की राशि व्यय हुई है. मेले में परिवहन व्यवस्था हेतु अधिकृत वाहनो में प्रयोग ईधन की तुलना की जाए तो वर्ष 2016-17 में 4 लाख, 2018 में 4 लाख 80 हजार रूपए व्यय हुआ था, जबकि इस वर्ष मात्र ईधन हेतु 1 लाख रूपए की राशि खर्च की गई. इसी तरह मेले में साफ-सफाई व अन्य व्यवस्थाओं के लिए लगाए गए श्रमिकों पर 2 लाख रूपए की राशि व्यय की गई. वही विगत वर्ष इसी व्यवस्था पर 12 लाख रूपए की राशि व्यय हुई थी. उल्लेखनीय है कि इस वर्ष श्रमिक पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने थे. इस प्रकार तुलनात्मक रूप से पिछले वर्ष जहां नागद्वारी मेले पर 64 लाख रूपए व्यय हुए थे वही इस वर्ष मात्र 9 लाख रूपए में यह मेला बेहतर प्रबंधन के साथ संपन्न हुआ.
जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि मेले में शासन को सामग्री की नीलामी से 36 लाख रूपए, दुकानों की वसूली से 4 लाख रूपए की राशि प्राप्त हुई है. इस प्रकार मेले की कुल बचत लगभग 54 लाख रही व शासन को 40 लाख रूपए की आय प्राप्त हुई है. जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि मेले का आयोजन इस वर्ष सरकार के लिए लाभदायक रहा है, बचत राशि का उपयोग श्रद्धालुओ की सुविधा हेतु निर्माधाधीन कार्यों व बेहतर व्यवस्था हेतु किया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को दी बधाई
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्विटर पर लिखा है कि होशंगाबाद जिले में सरकारी नागद्वारी मेले के आयोजन में जिला प्रशासन ने वर्षों से हो रहे अनावश्यक व्यय पर रोक लगाकर, खर्च प्रबंधन से इस वर्ष लाखों की बचत कर गुड गवर्नेंश की मिसाल पेश की है. उन्होंने लिखा है कि सरकार का लक्ष्य है फिजूलखर्ची ,भ्रष्टाचार व गड़बड़ी को रोकना, जनता के एक-एक पैसे का सदुपयोग हो, उस दिशा में किया यह कार्य प्रशंसनीय व दूसरों के लिए प्रेरक है. मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन की पूरी टीम को बधाई दी है.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें