कांग्रेस ने कहा जनहित के मुददों से भागती है भाजपा
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर राजनीति गर्मा गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा जनहित के मुददों से भागती है, इसलिए छोटा सत्र रखा है। विधानसभा के छोटे सत्र को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई और कहा कि सरकार पांच दिवसीय इस सत्र को भी दो दिन में समाप्त करना चाहती है।
मध्यप्रदेश विधानसभा के 20 जुलाई से ष्षुरु होने वाले पांच दिवसीय मानसून सत्र को लेकर कांग्रेस हमलावर हो गई है। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने आज मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि सरकार ने सत्र के पहले दिन कोरोना आपदा, कानून व्यवस्था जैसे मुददों को पहले दिन की कार्यसूची में रखा गया, जबकि परंपरा यह रही है कि पहले दिन श्रद्धांजलि सभा होती है, इसके बाद सदन की कार्रवाई स्थगित कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि इन मुददों को दूसरे दिन की कार्रवाई में शामिल किया जाए और इन पर चर्चा कराई जाए। भाजपा हमेशा जनहित के मुद्दों से भागती है, इसलिए उन्होंने इतना छोटा सत्र रखा है और इस सत्र को भी विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष का चयन कर स्थगित करने की कोशिश की जाएगी।
वहीं राज्य के पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा ने कहा कि भाजपा ने अपने पिछले 15 साल के कार्यकाल में हमेशा छोटा सत्र आहूत किया है, ताकि जनहित के मुददों से बचा जा सके। इसके चलते अब मानसून सत्र भी छोटा बुलाया है। सरकार सत्र को दो दिन में समाप्त करना चाहती है।
कमलनाथ ही होंगे नेता प्रतिपक्ष
पूर्व मंत्री पी सी शर्मा ने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र में कमलनाथ ही नेता प्रतिपक्ष होंगे। कांग्रेस का चेहरा वे ही हैं। शर्मा ने कहा कि कमलनाथ ही प्रदेश अध्यक्ष हैं और नेता प्रतिपक्ष भी वे ही होंगे। उन्होंने इस बात का भी दावा किया कि उपचुनाव में ग्वालियर चंबल की सभी सीटों पर कांग्रेस जीतेगी।
आज भी भटक रहे हैं मजदूर
राज्य सरकार द्वारा श्रमिक आयोग का गठन किए जाने पर पीसी शर्मा ने कहा है कि भले ही सरकार प्रवासी मजदूर आयोग का गठन कर ले, लेकिन सच यह है कि आज भी मजदूर दर- दर भटक रहे हैं और फिलहाल इन्हें रोजगार मिलने के कोई आसार नहीं है। सरकार पर निशाना साधते हुए शर्मा ने कहा कि कोरोना के मोर्चे पर सरकार का अब तक कंट्रोल नहीं है। कर्मचारियों को नौकरी से निकला जा रहा है, हम इसकी निंदा करते हैं। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि सरकार को सभी कर्मचारियों को वापस लेना चाहिए, आउटसोर्स कर्मचारियों को निकालने का काम बदले की भावना से किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर राजनीति गर्मा गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा जनहित के मुददों से भागती है, इसलिए छोटा सत्र रखा है। विधानसभा के छोटे सत्र को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई और कहा कि सरकार पांच दिवसीय इस सत्र को भी दो दिन में समाप्त करना चाहती है।
मध्यप्रदेश विधानसभा के 20 जुलाई से ष्षुरु होने वाले पांच दिवसीय मानसून सत्र को लेकर कांग्रेस हमलावर हो गई है। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने आज मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि सरकार ने सत्र के पहले दिन कोरोना आपदा, कानून व्यवस्था जैसे मुददों को पहले दिन की कार्यसूची में रखा गया, जबकि परंपरा यह रही है कि पहले दिन श्रद्धांजलि सभा होती है, इसके बाद सदन की कार्रवाई स्थगित कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि इन मुददों को दूसरे दिन की कार्रवाई में शामिल किया जाए और इन पर चर्चा कराई जाए। भाजपा हमेशा जनहित के मुद्दों से भागती है, इसलिए उन्होंने इतना छोटा सत्र रखा है और इस सत्र को भी विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष का चयन कर स्थगित करने की कोशिश की जाएगी।
वहीं राज्य के पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा ने कहा कि भाजपा ने अपने पिछले 15 साल के कार्यकाल में हमेशा छोटा सत्र आहूत किया है, ताकि जनहित के मुददों से बचा जा सके। इसके चलते अब मानसून सत्र भी छोटा बुलाया है। सरकार सत्र को दो दिन में समाप्त करना चाहती है।
कमलनाथ ही होंगे नेता प्रतिपक्ष
पूर्व मंत्री पी सी शर्मा ने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र में कमलनाथ ही नेता प्रतिपक्ष होंगे। कांग्रेस का चेहरा वे ही हैं। शर्मा ने कहा कि कमलनाथ ही प्रदेश अध्यक्ष हैं और नेता प्रतिपक्ष भी वे ही होंगे। उन्होंने इस बात का भी दावा किया कि उपचुनाव में ग्वालियर चंबल की सभी सीटों पर कांग्रेस जीतेगी।
आज भी भटक रहे हैं मजदूर
राज्य सरकार द्वारा श्रमिक आयोग का गठन किए जाने पर पीसी शर्मा ने कहा है कि भले ही सरकार प्रवासी मजदूर आयोग का गठन कर ले, लेकिन सच यह है कि आज भी मजदूर दर- दर भटक रहे हैं और फिलहाल इन्हें रोजगार मिलने के कोई आसार नहीं है। सरकार पर निशाना साधते हुए शर्मा ने कहा कि कोरोना के मोर्चे पर सरकार का अब तक कंट्रोल नहीं है। कर्मचारियों को नौकरी से निकला जा रहा है, हम इसकी निंदा करते हैं। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि सरकार को सभी कर्मचारियों को वापस लेना चाहिए, आउटसोर्स कर्मचारियों को निकालने का काम बदले की भावना से किया जा रहा है।
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