भाजपा अपने पास रखेगी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार को विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन करना हैं। इसमें भाजपा ने रणनीति तय की है कि वह कांग्रेस को अब परंपरा अनुसार उपाध्यक्ष पद नहीं देगी। भाजपा का मानना है कि कांग्रेस ने इस परंपरा को पिछली सरकार में तोड़ा है, इसके चलते वह भी उसी कदम पर चलेगी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान एक तरफ मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं कर पा रहे हैं,वहीं उनके लिए अब मानसून सत्र से पहले अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पर किसे दें यह मुसीबत बन गई है। पहले वे और संगठन की चाहत थी कि किसी वरिष्ठ नेता को यह पद देकर मंत्रिमंडल विस्तार की राह को आसान किया जाए। इसके लिए भाजपा ने तय किया था कि अध्यक्ष के साथ ही अब उपाध्यक्ष पद पर भी वह भाजपा के वरिष्ठ विधायक को ही बैठाएगी। कांग्रेस ने कमलनाथ सरकार में भाजपा को उपाध्यक्ष पद नहीं दिया था, इसके चलते अब भाजपा भी इस कदम पर ही चलेगी।
भाजपा के इस फैसले से दो विधायकों को पद तो मिल जाएंगे, जिससे दावेदारों का दबाव कम होगा। मगर यह दबाव कम होता नजर नहीं आ रहा है। भाजपा ने पहले गोपाल भार्गव का नाम अध्यक्ष पद के लिए आगे बढ़ाया था, मगर भार्गव इसके लिए तैयार नहीं है। इसी तरह वर्तमान प्रोटेम स्पीकर जगदीप देवड़ा और डा सीताशरण शर्मा भी अध्यक्ष नहीं बनना चाहते,दोनों की नजरें मंत्री पद के लिए टिकी हुई है। भाजपा संगठन चाहता है कि बुंदेलखंड और विंध्य से दोनों नेताओं का चयन हो जाए, ताकि मंत्रिमंडल विस्तार में परेशानी न हो।
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार को विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन करना हैं। इसमें भाजपा ने रणनीति तय की है कि वह कांग्रेस को अब परंपरा अनुसार उपाध्यक्ष पद नहीं देगी। भाजपा का मानना है कि कांग्रेस ने इस परंपरा को पिछली सरकार में तोड़ा है, इसके चलते वह भी उसी कदम पर चलेगी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान एक तरफ मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं कर पा रहे हैं,वहीं उनके लिए अब मानसून सत्र से पहले अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पर किसे दें यह मुसीबत बन गई है। पहले वे और संगठन की चाहत थी कि किसी वरिष्ठ नेता को यह पद देकर मंत्रिमंडल विस्तार की राह को आसान किया जाए। इसके लिए भाजपा ने तय किया था कि अध्यक्ष के साथ ही अब उपाध्यक्ष पद पर भी वह भाजपा के वरिष्ठ विधायक को ही बैठाएगी। कांग्रेस ने कमलनाथ सरकार में भाजपा को उपाध्यक्ष पद नहीं दिया था, इसके चलते अब भाजपा भी इस कदम पर ही चलेगी।
भाजपा के इस फैसले से दो विधायकों को पद तो मिल जाएंगे, जिससे दावेदारों का दबाव कम होगा। मगर यह दबाव कम होता नजर नहीं आ रहा है। भाजपा ने पहले गोपाल भार्गव का नाम अध्यक्ष पद के लिए आगे बढ़ाया था, मगर भार्गव इसके लिए तैयार नहीं है। इसी तरह वर्तमान प्रोटेम स्पीकर जगदीप देवड़ा और डा सीताशरण शर्मा भी अध्यक्ष नहीं बनना चाहते,दोनों की नजरें मंत्री पद के लिए टिकी हुई है। भाजपा संगठन चाहता है कि बुंदेलखंड और विंध्य से दोनों नेताओं का चयन हो जाए, ताकि मंत्रिमंडल विस्तार में परेशानी न हो।
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