प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा के दुष्प्रचार पर पलटवार कर कहा है कि भाजपा पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर अनर्गल आरोप लगाकर चीन सीमा की चुनौतियों से ध्यान भटकाना चाहती है। उन्होंने भाजपा को सबूत सामने लाने की चुनौती दी।
पटवारी ने कहा कि सच यह है कि भाजपा एवं संघ 2009 से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से संबंध बढ़ाने में लगे हैं जब उन्होंने अपने प्रतिनिधिमंडल को वहां पर भेजा था। इस प्रतिनिधिमंडल ने सीपीसी से समानता के बिंदु ढूंढने का काम किया था। इसके बाद 2014 में भारतीय जनता पार्टी का दूसरा शिष्ट मंडल चीन गया और उसने कम्युनिस्ट पार्टी की संगठनात्मक बारीकियों का अध्ययन कर उसे भाजपा में लागू कर सकने के लिए समझ विकसित की। यह 13 सदस्यीय दल बीजिंग और ग्वांगझाऊ शहरों में भी भ्रमण पर गया था। इसके पूर्व युवा नेताओं का एक दल भी सिद्धार्थ नाथ सिंह के नेतृत्व में भेजा गया था, जिसने वहां पर चाइना सीपीसी से जुड़े हुए स्कूलों का अध्ययन किया था और उसी आधार पर भाजपा ने तब अपने सांसदों और विधायकों के लिए रिफ्रेशर कोर्स जैसे पाठ्यक्रम भी चलाए थे।
उन्होंने कहा कि भाजपा के महासचिव राम माधव भी 2009 में चीन जा चुके हैं। सितंबर 2014 में वे पुनः चीन गए थे और उन्होंने शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। भाजपा के एक अन्य दल में भगत सिंह कोश्यारी तरुण विजय, भोला नाथ सिंह आदि कई नेता चीन दौरे पर गए थे ।27 अगस्त 2019 में भी भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल चीन गया था, जिसका नेतृत्व महासचिव अरुण सिंह ने किया था।
पटवारी ने कहा कि चीन और कम्यूनिस्ट पार्टी से भारतीय जनता पार्टी लगातार पींगे बढ़ाती रही है और 2014 के बाद से इन संबंधों के चलते भारत का सकल व्यापार घाटा चीन के साथ बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह की सरकार के समय जो आयात औसत 32 लाख 45 हजार 100 अमरीकी डालर प्रति माह के लगभग था, वह अब बढ़कर लगभग 96 लाख 16 हजार करोड़ डालर पर पहुंच चुका है। भारतीय जनता पार्टी को यह बताना चाहिए कि उनकी पार्टी के राज में जब चीन का व्यापार भारत के साथ तीन गुना बढ़ गया है तो कौन चीन के एजेंट की तरह काम कर रहा है? दुर्भाग्यजनक है कि भाजपा द्विराष्ट्रीय संबंधों की नजाकत को दरकिनार कर बातों की महाभारत में देश को उलझा रही हैं, जबकि सरकार को पुरानी स्थिति पर लौटने के लिये चीन को बाध्य करना चाहिए। पूरा देश और कांग्रेस भारत की संप्रभुता की रक्षा में सरकार के साथ है। भारतीय जनता पार्टी के नेता विशेषकर प्रभात झा को बताना चाहिए कि भारतीय जनता पार्टी के इतने नेता बार-बार चीन क्यों जाते हैं?
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