मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कोरोना संक्रमित मरीज हीरालाल सिंह को सतना ले आने, बिना जांच किए उसे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किए जाने एवं अचानक हुई उसकी मौत पर सवाल खड़ा किया है. उन्होंने कहा है कि इस मामले की जांच होनी चाहिए कि अब तक पूरी तरह सुरक्षित एवं ग्रीन जोन में शामिल सतना की 30 लाख आबादी की जान को जोखिम में डालने वाला असली गुनाहगार कौन है.
अजय सिंह ने कहा कि जब अच्छे खासे स्वस्थ लोग एक एक पास के लिए मोहताज हो रहे हैं ऐसी स्थिति में एक कारोना संक्रमित मरीज को बिना राजनैतिक हस्तक्षेप के पास मिलना मुमकिन नहीं है. सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि ये कैसे संभव है कि जो मरीज संक्रमण की वजह से जीवन के आखिरी स्टेज में हो और उसकी रिपोर्ट निगेटिव निकल आए. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि सत्ताधारी दल के एक नेता के राजनैतिक हस्तक्षेप से न केवल रिपोर्ट को बदला गया बल्कि उसे सतना के लिए पार्सल भी किया गया! उन्होंने कहा कि भाजपा के उक्त नेता के रसूख के चलते जिले की पूरी आबादी को आग में झोंक दिया गया है.
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि जिला अस्पताल प्रबंधन ने आखिर किसके दबाब के चलते प्रोटोकाल का उल्लंघन कर कोरोना संक्रमित मरीज को आईसीयू वार्ड में दाखिल किया साथ ही उसके परिजनों को मिलने सहित बाहर से दवा, चाय, और खाने की अनुमति दी गयी. सिंह ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन की इस बड़ी चूक के चलते डाक्टर, नर्स, विभाग के अन्य कर्मचारियों सहित कई लोगों पर संक्रमण का जो खतरा बढ़ा है उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. अजय सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गुजरात के मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि आखिर किसके दबाब में कारोना पोजटिव को निगेटिव मरीज बताकर सतना भेजा गया.

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें