प्रचार की रस्म अदायकी न करें: कमलनाथ
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज फिर श्रमिकों के मुद्दे पर सरकार को घेरा है. उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मांग की कि वे श्रमिकों को 7500 रुपए प्रतिमाह की राहत प्रदान करें. संबल योजना के नाम पर प्रचार की रस्म अदायकी को बंद करें.
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि हाल ही में अपने पूर्व से प्रचलित संबल नया सबेरा योजना को पुन: प्रांरभ करने की बात कही है, जबकि इस योजना को कभी बंद ही नहीं किया गया था. कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तो योजना को और अधिक प्रभावी बनाकर वास्तविक श्रमिकों को लाभ दिया गया. उन्होंने लिखा कि वर्ष 2018 में आपकी सरकार के कार्यकाल में करीब 2 करोड़ लोगों को श्रमिकों के रुप में पंजीकृत किया गया था. दिसंबर 2019 में जब मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार ने आकाल लिया तब मेरे संज्ञान में लाया गया कि बहुत बड़े पैमाने पर श्रमिकों के नाम पर साधन संपन्न लोगों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है. मुझे यह जानकार बेहद दुख हुआ कि कोई सरकार समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े आमजन के हक के साथ धोखा कैसे कर सकती है.इसके दृष्टिगत ही कांग्रेस सरकार ने इस योजना को नया सबेरा के रुप में व्यापक और अधिक प्रभावी रुप से लागू किया था. योजना में अपात्र पाए गए व्यक्तियों के नाम हटाए गए थे, जिन्हें पूर्व सरकार ने जोड़ा था. इस योजना में हुए भ्रष्टाचार को तत्कालीन श्रम मंत्री और आज के भाजपा नेता महेन्द्र सिंह सिसोदिया द्वारा सार्वजनिक रुप से आज भी स्वीकार कर रहे हैं और आपके संज्ञान में भी उक्त तथ्य लाने का कथन भी कर रहे हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि इस योजना में मात्र 1903 श्रमिकों को लाभ दिया है, जबकि कोरोना महामारी की इस घड़ी में योजना में पंजीबद्ध कल श्रमिक करोड़ से भी ज्यादा है, वे लाभ की प्रतीक्षा में हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नारा दिया है जान भी और जहान भी अर्थात हमें नागरिकों के स्वास्थ्य का ध्यान भी रखना है और उनकी आजीविका का भी. आज हमें सबसे ज्यादा हमारे किसान और श्रमिकों की आजीविका की चिंता करने की जरुरत है. मैंने आपसे पूर्व में भी आग्रह किया है कि हमारे श्रमिकों के पास बीते डेढ़ माह से अधिक समय से काम नहीं है और उनकी आजीविका संकट में है. उन्हें तीन माह तक 7500 रुपए प्रतिमाह की राहत दी जाए.
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में आग्रह किया है कि आप संबल के नाम पर सिर्फ प्रचार की रस्म अदायकी की अपेक्षा श्रमिकों को आज के समय की मांग के अनुरुप न्यूनतम तीन माह तक 7500 रुपए प्रति श्रमिक प्रति माह राहत प्रदान कर वास्तविक संबल प्रदान करेंगे.
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज फिर श्रमिकों के मुद्दे पर सरकार को घेरा है. उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मांग की कि वे श्रमिकों को 7500 रुपए प्रतिमाह की राहत प्रदान करें. संबल योजना के नाम पर प्रचार की रस्म अदायकी को बंद करें.
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि हाल ही में अपने पूर्व से प्रचलित संबल नया सबेरा योजना को पुन: प्रांरभ करने की बात कही है, जबकि इस योजना को कभी बंद ही नहीं किया गया था. कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तो योजना को और अधिक प्रभावी बनाकर वास्तविक श्रमिकों को लाभ दिया गया. उन्होंने लिखा कि वर्ष 2018 में आपकी सरकार के कार्यकाल में करीब 2 करोड़ लोगों को श्रमिकों के रुप में पंजीकृत किया गया था. दिसंबर 2019 में जब मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार ने आकाल लिया तब मेरे संज्ञान में लाया गया कि बहुत बड़े पैमाने पर श्रमिकों के नाम पर साधन संपन्न लोगों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है. मुझे यह जानकार बेहद दुख हुआ कि कोई सरकार समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े आमजन के हक के साथ धोखा कैसे कर सकती है.इसके दृष्टिगत ही कांग्रेस सरकार ने इस योजना को नया सबेरा के रुप में व्यापक और अधिक प्रभावी रुप से लागू किया था. योजना में अपात्र पाए गए व्यक्तियों के नाम हटाए गए थे, जिन्हें पूर्व सरकार ने जोड़ा था. इस योजना में हुए भ्रष्टाचार को तत्कालीन श्रम मंत्री और आज के भाजपा नेता महेन्द्र सिंह सिसोदिया द्वारा सार्वजनिक रुप से आज भी स्वीकार कर रहे हैं और आपके संज्ञान में भी उक्त तथ्य लाने का कथन भी कर रहे हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि इस योजना में मात्र 1903 श्रमिकों को लाभ दिया है, जबकि कोरोना महामारी की इस घड़ी में योजना में पंजीबद्ध कल श्रमिक करोड़ से भी ज्यादा है, वे लाभ की प्रतीक्षा में हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नारा दिया है जान भी और जहान भी अर्थात हमें नागरिकों के स्वास्थ्य का ध्यान भी रखना है और उनकी आजीविका का भी. आज हमें सबसे ज्यादा हमारे किसान और श्रमिकों की आजीविका की चिंता करने की जरुरत है. मैंने आपसे पूर्व में भी आग्रह किया है कि हमारे श्रमिकों के पास बीते डेढ़ माह से अधिक समय से काम नहीं है और उनकी आजीविका संकट में है. उन्हें तीन माह तक 7500 रुपए प्रतिमाह की राहत दी जाए.
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में आग्रह किया है कि आप संबल के नाम पर सिर्फ प्रचार की रस्म अदायकी की अपेक्षा श्रमिकों को आज के समय की मांग के अनुरुप न्यूनतम तीन माह तक 7500 रुपए प्रति श्रमिक प्रति माह राहत प्रदान कर वास्तविक संबल प्रदान करेंगे.
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