मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में क्वारेंटाइन सेंटरों से निकले 18 जमातियों को जिला न्यायालय ने जेल भेज दिया है. इन जमातियों पर विदेशी अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम और लाक डाउन तोड़ने का आरोप था.
राजधानी में 18 जमाती क्वारेंटाइन सेंटरों में थे. ये सभी जब समय पूरा होने पर क्वारेंटाइन सेंटरों से बाहर निकले तो पुलिस ने इन्हें जिला न्यायालय में पेश किया. न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी आशीष परसाई की अदालत में सुनवाई के बाद इन सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. जानकारी के अनुसार भोपाल के तलैया में मंगलवारा थाना पुलिस ने 18 जमातियों को क्वारेंटाइन का समय पूरा होने के बाद गिरफ्तार किया था, जिनमें 14 विदेशी हैं, जबकि चार यहीं के नागरिक हैं. जेल भेजे जाने वालों में कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, महाराष्ट्र, बिहार के आरोपी शामिल हैं. पुलिस के अनुसार ये सभी जानकारी छिपाकर राजधानी भोपाल में रह रहे थे और धार्मिक आयोजनों में शामिल हो रहे थे, भोपाल आने से पहले ये सभी दिल्ली मरकज में शामिल हुए थे, इसकी जानकारी भी इन लोगों ने छिपाई थी. इस्लामपुरा और मंगलवारा की मोम नानी मस्जिद में धार्मिक आयोजन हुआ था, जिसमें ये सभी लोग शामिल हुए थे. गिरफ्तार आरोपियों में एक भोपाल का ही रहने वाला है, जिस पर इन सभी को पनाह देने का आरोप है.
गौरतलब है कि अप्रैल में पुलिस ने 65 जमातियों को शहर के अलग-अलग धार्मिक स्थलों से विशेष आपरेशन चलाकर ट्रेस किया था, ये जमाती निजामुद्दीन स्थित मरकज के जमात में शरीक होकर लौटे थे और अपनी जानकारी छिपाने का प्रयास इन्होंने किया था. इसके बाद इन सभी पर पुलिस ने पासपोर्ट अधिनियम, विदेशी अधिनियम, लाकडाउन तोड़ने के मामले दर्ज किए थे.
अदालत के अंदर नहीं ले जाया गया
क्वारेंटाइन सेंटरों से पुलिस जब इन्हें अदालत लेकर पहुंची तो इन सभी को अदालत परिसर में गाड़ी के अंदर ही रखा. सुनवाई के लिए भी इन्हें अदालत में नहीं ले जाया गया, न्यायाधीश ने इनकी सुनवाई परिसर में गाड़ी में बैठे रहते हुए ही की. सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी आरोपियों को जमानत देने से इंकार कर दिया. शासकीय वकील का तर्क था कि ये आरोपी विदेश भाग सकते हैं, इसी आधार पर इन सभी की जमानत याचिका निरस्त कर दी और इन्हें 27 मई तक के लिए जेल भेज दिया गया है.
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