सोमवार, 4 मई 2020

विरोध के बाद प्रवासी मजदूरों की घर वापसी का किराया देगी सरकार

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने की घोषणा, कांग्रेस ने किया था विरोध

दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों को ट्रेनों और अन्य साधनों से मध्यप्रदेश लाने के किराए को लेकर उठे विवाद के बाद राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि मजदूरों को प्रदेश लाने का किराया सरकार वहन करेगी. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह घोषणा की है. 
कोरोना संक्रमण के लाक डाउन के चलते दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों को लाने के बाद कांग्रेस द्वारा किराए को लेकर सरकार को घेरा था. महाराष्ट्र के नासिक से आए मजदूरों को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि विशेष ट्रेन से मजदूरों को भोपाल लाया गया, लेकिन किराया मजदूरों से वसूला गया. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आरोप लगाया था कि कोरोना महामारी के लाकडाउन के चलते मजदूर का पहले ही रोजगार छीन चुका है , उसके पास खाने को राशन तक नहीं है , ऐसे संकट के दौर में उससे घर वापसी का किराया वसूला जाना बेहद शर्मनाक है. इसके लिए यह तय हुआ कि मजदूरों से किराये की राशि नहीं ली जाएगी, इसका वहन राज्य सरकारे करेगी,  लेकिन जिस प्रकार से तस्वीरें सामने आयी कि नासिक से भोपाल आयी विशेष ट्रेन में यात्रियों से किराया वसूला गया, वो बेहद आपत्तिजनक है.
पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फैसला बदला. अब शासन ने निर्णय लिया है कि अन्य प्रदेशों में फंसे मध्यप्रदेश के श्रमिकों को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से प्रदेश लाने में उनके किराए का भुगतान शासन द्वारा किया जाएगा. श्रमिकों से किराया नहीं लिया जाएगा. अपर मुख्य सचिव एवं प्रभारी स्टेट कंट्रोल रूम आई.सी.पी. केशरी ने स्टेट कार्डिनेटर और कलेक्टरों  को प्रभार के राज्यों के नोडल अधिकारी एवं रेलवे से समन्वय कर इस निर्णय के क्रियांवयन के निर्देश दिए है. 
गौरतलब है कि शनिवार को नासिक से करीब 349 मजदूरों को लेकर एक स्पेशल ट्रेन भोपाल आई थी. उस ट्रेन से आए मजदूरों को पहले नासिक से भोपाल लाया गया और फिर यहां से बसों के जरिए उनके गांव या घर और शहर तक पहुंचाया गया. इस दौरान एक बात यह भी सामने आई थी कि नासिक में ट्रेन में बैठने से पहले मजदूरों से किराया वसूला गया था, इसलिए सरकार ने यह तय किया है कि किसी भी स्पेशल ट्रेन से आने वाले मजदूर से किराया नहीं वसूला जाएगा.
चलाई जाएगी 31 रेल गाड़ियां
 प्रथम चरण में 31 रेल गाड़ियां महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, गोवा एवं दिल्ली में फंसे श्रमिकों को लेकर प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर यथा- भोपाल, जबलपुर, रतलाम, रीवा, कटनी आयेंगी. सभी श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद ट्रेन में चढ़ाया जाएगा. महाराष्ट्र से प्रथम चरण में 22 ट्रेनों में (प्रति ट्रेन लगभग 1200) लोग आएंगे. गुजरात के राजकोट से भोपाल के लिए एक ट्रेन, हरियाणा के रिवाड़ी से कटनी के लिये 2 ट्रेन, नारनोल से कटनी के लिये 2 ट्रेन, दिल्ली से भोपाल के लिये एक ट्रेन, गोवा से भोपाल एक ट्रेन और गोवा से जबलपुर एक ट्रेन आयेगी. इस प्रकार रेल मंत्रालय एवं उक्त राज्यों को 31 रेल गाड़ियों के लिये रीक्वीजेशन दे दी गई है. आगामी सप्ताह में ये रेल गाड़ियां प्रदेश में फंसे श्रमिकों को लेकर आएगी. महाराष्ट्र में फंसे मध्यप्रदेश के 26847 श्रमिकों को 22 ट्रेनों से वापस लाने का प्लान तैयार किया गया है. अमरावती से भोपाल एक ट्रेन में 1403, अमरावती से जबलपुर एक ट्रेन में 1202, औरंगाबाद से रतलाम एक ट्रेन में 1155, औरंगाबाद से जबलपुर एक ट्रेन में 1093, नागपुर से भोपाल एक ट्रेन में 1488 , नागपुर से रीवा एक ट्रेन में 944 , नागपुर से जबलपुर 9 ट्रेन में 10809,  नासिक से भोपाल एक ट्रेन में 1066,  नासिक से रतलाम 3 ट्रेन में 3628, नासिक से रीवा एक ट्रेन में 1407 और नासिक से जबलपुर एक ट्रेन में 1316 श्रमिकों को लाने का प्लान तैयार किया गया है. 

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