मध्यप्रदेश के हालात बेहर चिंताजनक, बढ़ रहे संक्रमण और मौत के आकड़ेपूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि आज कोरोना को लेकर लाकडाउन का तीसरा चरण समाप्त हो गया. इन तीन चरणों की समाप्ति के बाद भी मध्य प्रदेश की स्थिति कोरोना को लेकर बेहद चिंताजनक बनी हुई है. प्रदेश में कोरोना संक्रमण व इससे हो रही मौतों के आंकड़े दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं. अब यह महामारी शहरों से गांव की और भी निरंतर बढ़ती जा रही है.
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बताया कि प्रदेश में लाकडाउन के पहले दिन 24 मार्च तक कोरोना संक्रमण के मात्र 4 मरीज थे और आज बात करें तो लाक डाउन 3 की समाप्ति पर प्रदेश में कोरोना संक्रमितो का आंकड़ा बढ़कर 5 हजार के करीब पहुंच चुका है, 250 के करीब मौतों का आंकड़ा पहुंच चुका है, प्रदेश के 45 से अधिक जिले कोरोना की चपेट में आ चुके हैं, 100 से अधिक गांव कोरोना की चपेट में आ चुके हैं. अब यह महामारी शहरों से गांव की और भी निरंतर बढ़ती जा रही है.
प्रदेश का इंदौर देश का 7 वां और भोपाल देश का 11 वां हाटस्पाट बन चुका है. प्रदेश की राजधानी भोपाल में कोरोना संक्रमितो का आंकड़ा एक हजार को पार कर चुका है, वहीं 38 मौतें अभी तक हो चुकी है. वही बात करें प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की तो वहां कोरमा संक्रमितो का आंकड़ा 2500 के करीब पहुंच चुका है और मौतों का आंकड़ा 100 पर पहुंच चुका है. यह सारे आंकड़े बेहद चिंताजनक है, जिस हिसाब से प्रदेश के अंदर कोरोना महामारी का संक्रमण बढ़ता जा रहा है, उस हिसाब से आज भी स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने की आवश्यकता है. आज भी पीपीई किट से लेकर मास्क व अन्य सुरक्षा संसाधनों के अभाव में कोरोना वारियर्स प्रतिदिन संक्रमित हो रहे हैं. जिस हिसाब से कोरोना के संक्रमण के आंकड़े प्रतिदिन बढ़ रहे हैं, उस हिसाब से प्रदेश में आज भी वेंटिलेटर से लेकर अन्य आवश्यक मेडिकल उपकरणो का अभाव है. आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में 75 हजार लोगों पर एक वेंटीलेटर है और 47 हजार लोगों पर एक आईसीयू बेड की उपलब्धता है.
आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के 10 जिले ऐसे हैं जहां पर निजी अस्पतालों में एक भी वेंटिलेटर नहीं है , वही करीब 10 जिलों में कुल वेंटिलेटर की संख्या 5 भी नहीं है। प्रदेश के भोपाल-इंदौर -जबलपुर जैसे शहरों में भी इस महामारी के बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए आवश्यकता अनुसार इनकी कमी है. आज भी निजी अस्पतालों में आम मरीजों को इलाज नहीं उपलब्ध हो पा रहा है, वही कोरोना मरीजों से भी भारी भरकम बिल वसूले जा रहे हैं. इन पर सरकार का अभी तक कोई नियंत्रण नहीं है. आज भी प्रदेश में लोगों को दूध-दवाई व आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति नहीं हो पा रही है ,वही शराब की आपूर्ति सरकार द्वारा करा दी गई है. मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारे व अन्य सभी धार्मिक स्थल बंद है, वहीं शराब की दुकानें चालू है. आज भी प्रदेश वापसी कर रहा मजदूर बेहद परेशानियों का सामना कर रहा है. आज भी प्रदेश के सभी मार्ग व सीमाएं इन मजदूरों से भरी पड़ी है. साधन के अभाव में हजारों गरीब-बेबस-लाचार मजदूर भूखे प्यासे , भीषण गर्मी में नंगे पैर , पैदल ही अपने घर की और जा रहे है. सरकार के सारे दावे हवा-हवाई साबित हो रहे है. सरकार की बसे व साधन कही नजर नहीं आ रहे है. इनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है.
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