गुरुवार, 30 नवंबर 2023

गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग बंद करने के प्रयास की निंदा


गैस पीड़ित संगठनों ने द रेलवे मेन के कलाकारों को दी बधाई

भोपाल। भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के मंत्री और अधिकारियों द्वारा विभाग को बंद करने के प्रयासों की गैस राहत संगठनों ने कड़ी निंदा की है। संगठनों का कहना है कि ऐसा कुतर्क के दावों के तहत किया जा रहा है। वहीं फिल्म द रेलवे मेन के निर्माता और कलाकारों को संगठनों ने बधाई दी है।  
भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने आज मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि भोपाल पीड़ितों के कल्याण के लिए प्रदेश सरकार के स्थापित विभाग को बंद करने की आधिकारिक योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि हमें हाल ही में एक गोपनीय दस्तावेज मिला है, जिसमें भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग को बंद करने की योजना बताई गई है। राज्य मंत्रिमंडल की अगली बैठक में चर्चा की जाने वाली इस योजना में गैस राहत विभाग द्वारा संचालित पांच अस्पतालों और नौ औषधालयों को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा विभागों को सौंपने का प्रस्ताव है। कुतर्क के माध्यम से यह दावा किया जा रहा है कि इस तरह के स्थानांतरण से भोपाल गैस पीड़ितों की इलाज में सुधार होगा।
वहीं भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त निगरानी समिति की सिफारिशों का पालन करने में गंभीर ढिलाई के लिए भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग को फटकार लगाई है। गैस पीड़ित मरीजों के कंप्यूटरीकृत पंजीकरण, इलाज के प्रोटोकॉल और देखभाल की गुणवत्ता में बहुप्रतीक्षित सुधार करने के बजाय संबंधित अधिकारी न्यायिक प्रतिबंधों से बचने के लिए गायब हो जाने की कोशिश कर रहे हैं। भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने कहा कि यूनियन कार्बाइड पिछले 31 वर्षों से फरार है। अब भगोड़ी कंपनी के मालिक डाव केमिकल को हमारे प्रयासों से हादसे पर आपराधिक मामले में तलब किया गया है। सीबीआई सीधे प्रधानमंत्री के अधीन काम करती है और हम डाव केमिकल के प्रभावी और त्वरित अभियोजन के लिए उन्हें अपील भेज रहे हैं।
सरकारी उदासीनता को किया उजागर
भोपाल गैस पीड़ित महिला महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा की नसरीन खान ने कहा कि हम दुनियाभर के दर्शकों को भोपाल गैस हादसे की कहानी ताकतवर तरीके से बताने के लिए ‘द रेलवे मेन’ के निर्माताओं और कलाकारों को धन्यवाद देते हैं। यह वास्तव में खुशी की बात है कि निर्माताओं ने आपदा के पीछे कॉर्पोरेट साजिशों और सरकारी उदासीनता और उसके लंबे समय के परिणामों को स्पष्टता के साथ उजागर किया है। हमें उम्मीद है कि इस श्रृंखला की सफलता अन्य फिल्म निर्माताओं को भोपाल में चल रही दुनिया की सबसे भयानक औद्योगिक हादसे की पूरी कहानी बताने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

हमारी सरकार बन रही , कुछ चीजें छूट रही

मुझे बनाने में किसी का नहीं, परिस्थितियों का रोल : उमा 


भोपाल।  पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि हमारी सरकार बन रही है पर कुछ चीजें छूठ रही हैं। उमा भारती ने केन, बेतवा, भोजशाला, गऊ और खनन का जिर्क्र भी किया। उन्होंने कहा कि मुझे बनाने के लिए किसी का रोल नहीं रहता बल्कि परिस्थितियों का रोल रहता है।

मतगणना के पहले पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आज मीडिया से चर्चा करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि मुझे बनाने के लिए किसी का रोल नहीं रहता बल्कि परिस्थितियों का रोल रहता है। मैंने चुनाव से पहले जेपी नड्डा से मुलाक़ात की थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि चुनाव ख़त्म हो जाए तो मुझे संगठन में ज़िम्मेदारी दीजिए, मुझे 2024 का लोक सभा का चुनाव लड़ना है। उमा ने अवैध खनन का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रसन्न सिंह की जो हत्या हुई है खनन मुझे हमेशा चुभ रहा था। कई बार मैंने इसकी आवाज भी उठाई। मुझे पता नहीं किसकी सरकार होगी, मैं चाहती हूं कि हमारी ही सरकार बने। खनन के लिए मैं खड़ी हूं, मैं खिलाफत में नहीं हूं लेकिन खनन के कारण एक बलिदान हो गया। ये सरकार विरोधी बयान नहीं है लेकिन माफिया खड़े हो गए हैं।

खनन माफिया के सामने सब हो गए दीन-हीन

उन्होंने कहा कि खनन माफिया के सामने शासन प्रशासन सब दिन हीन हो गए हैं। क्या हम लोगो को लठ्ठ लेकर खड़े होना पड़ेगा? पार्टी मुझे संगठन में काम दे और चुनाव लड़ाए मुझे बहुत खुशी होगी लेकिन मैं खनन के खिलाफ रहूंगी। इतना ही नहीं गंगा आंदोलन भी जारी रहेगा। मेरा गाय,शराब, खनन के खिलाफ आंदोलन होगा। मैं ब्योहारी से आंदोलन शुरू करूंगी। आईपीएस नरेंद्र कुमार के परिवार से मिलूंगी।

मैं तो चाहती हूं भाजपा की सरकार बनें

उमा भारती ने कहा कि एक्सपेक्टेशन जब मैच नहीं होता तो मुझे परेशानी होती है, क्योंकि जब उम्मीद है मुझसे पूरी नहीं होती तो मुझे परेशानी होती है। मेरी पोज़ीशन और मेरी योगदान का मेल होना चाहिए। अगर मैं योगदान देने की पोज़ीशन में हूं तो मुझे योगदान देना ही है वरना मुझे उलझन होती है। मोदी जी ने मेरे गुरु जी से शिकायत की थी कि वो ज़िद्दी है, दूसरी बार चुनाव ना लड़ कर उसने मेरा संकट की घड़ी में साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को मैं अपना नेता मानती हूं। शाह के कारण कश्मीर के गांव-गांव में तिरंगा फहराया है। उन्होंने कहा कि वे चाहती हैं कि भाजपा की सरकार बने।


कैबिनेट में मुख्य सचिव की विदाई, नवनियुक्त मुख्य सचिव ने संभाला कामकाज

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड के दौरान किया बेहतर काम


भोपाल। शिवराज कैबिनेट की अहम बैठक में आज मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस को विदाई गई। इकबाल सिंह बैंस सेवानिवृत्त हो गए हैं। 2 बार मिले एक्सटेंशन के बाद 30 नवंबर को उनका कार्यकाल पूरा हो गया। वहीं मध्य प्रदेश की मुख्य सचिव वीरा राणा ने गुरुवार को चार्ज संभालते ही कामकाज की शुरुआत कर दी। नव नियुक्त मुख्य सचिव वीरा राणा ने बैंस को शुभकामनाएं दी।

मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के विदाई समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अपने लिए जिएं तो क्या जिएं। देश, समाज के लिए जीना ही जीना है। बैंस ने यही कर दिखाया है। उन्होंने अच्छा काम किया, जो भी काम उन्हें सौंपे गए, बिना किसी तनाव और दबाव के पूरे किए। कोविड के दौरान भी उन्होंने बेहतर काम कर दिखाया। सीएम राइज स्कूल, सिटीजन चार्टर और आनंद उनकी बेहतर उपलब्धियां रहीं। बैठक के दौरान प्रमुख अधिकारियों द्वारा मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के कार्यकाल को याद किया गया। वहीं विदाई पर मुख्य सचिव बैंस ने कहा कि यह एक पड़ाव, कोई अंत नहीं। काम करते रहेंगे, सक्रियता बनी रहेगी। आनंद विभाग को उन्होंने अपनी प्रमुख उपलब्धि बताया। 

वीरा राणा ने संभाला कामकाज


इकबाल सिंह बैंस की जगह पर आईएएस वीरा राणा को प्रदेश के मुख्य सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, 1988 बैच की अधिकारी वीरा राणा ने प्रदेश के मुख्य सचिव पद का पदभार ग्रहण कर लिया। कार्यवाहक मुख्य सचिव वीरा राणा ने चार्ज संभालते ही कामकाज की शुरुआत कर दी है।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हुए नवाचार को पूरे देश ने स्वीकारा

कैबिनेट की बैठक खत्म होने के बाद प्रदेश के वर्तमान गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने जानकारी दी। मिश्रा ने कहा कि इस टर्म कि अंतिम बैठक हो गई है। पौने चार साल में ऐतिहासिक काम किया, मुख्यमंत्री तो हमारे ऐतिहासिक है ही, इतने लंबे समय तक मध्य प्रदेश में कोई मुख्यमंत्री नहीं रहा। इस दौरान कोरोना काल पर चर्चा हुई। जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने खुद बताया कि कोरोना काल में जब हम सरकार में आए थे और जो मजदूरों की सेवा की वह ऐतिहासिक काम था। बैठक में भाजपा सरकार की गरीब कल्याण योजना और लाडली बहन योजना का जिक्र करते हुए कहा कि ये नवाचार मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में हुए वह पूरे देश ने स्वीकार की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मंत्रियों का और मंत्रियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।


बुधवार, 29 नवंबर 2023

शिवराज सरकार की आखिरी कैबिनेट बैठक आज

मुख्य सचिव की हो सकती है विदाई


भोपाल। मौजूदा शिवराज सरकार की आखिरी कैबिनेट बैठक कल होने जा रही है। मंत्रालय में होने वाली इस बैठक में प्रदेश के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस विदाई हो सकती है। साथ ही नए सचिव के लिए वरिश्ठ आईएएस वीरा राणा के नाम पर मुहर लगाई जा सकती है। बैठक के लिए सभी मंत्रियों को बुलाया गया है। 

प्रदेश की वर्तमान शिवराज सरकार की आखिरी कैबिनेट बैठक कल सुबह 11 बजे मंत्रालय में होगी। इस बैठक के लिए सभी मंत्रियों को पत्र लिखकर राजधानी भोपाल बुलाया गया है। उन्हें कहा गया है कि बैठक में उपस्थित रहें। बैठक में वर्तमान मुख्यसचिव इकबाल सिंह बैस जिनका कार्यकाल 30 नवंबर को समाप्त हो रहा है। उनकी विदाई होने की अटकलें लगाई जा रही है। हालांकि अभी निर्वाचन आयोग की ओर से किसी तरह का कोई फैसला नहीं लिया गया है। माना जा रहा है कि कल होने वाली कैबिनेट बैठक में वर्तमान मुख्य सचिव की विदाई के साथ ही वरिश्ठ आईएएस अधिकारी वीरा राणा के नाम पर मोहर लगाई जा सकती है।  बैठक के लिए सभी मंत्रियों को बुलाया गया है।

गौरतलब है कि दो बार से 6-6 महीने की सेवावृद्धि पा चुके मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस का कार्यकाल 30 नवंबर को पूरा होने जा रहा है। इसके बाद माना जा रहा है जो सबसे आगे 1988 बेच की वीरा राणा का नाम है। यही कारण है कि इनके नाम पर मुहर लग सकती है। इनके बाद संजय बंदोपाध्य के नाम को लेकर भी चर्चाएं हैं, तो वहीं इसी क्रम में अजय तिर्की का नाम भी है।

वीरा राणा ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात

अपर मुख्य सचिव वीरा राणा ने आज दोपहर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद मुख्य सचिव पद पर उनके नाम की अटकलें और भी तेज हो गई हैं। माना जा रहा है निर्वाचन आयोग उनके नाम का आदेश जारी कर सकता है। 1988 बैच की आईएएस अफसर वीरा राणा मौजूदा मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस की जगह ले सकती हैं, जिनका कार्यकाल 30 नवंबर 2023 को खत्म हो रहा है। 


मतगणना की तैयारी पूरी, परिणाम का इंतजार

मतगणना के बाद नई सरकार की हो जाएगी तस्वीर साफ 


भोपाल। प्रदेश में विधानसभा निर्वाचन के तहत 17 नवंबर को हुए मतदान के लगभग दो सप्ताह बाद तीन दिसंबर को होने वाली मतगणना को अब महज चार दिन शेष रहने के बीच प्रशासन की सभी तैयारियां अब लगभग अंतिम दौर में हैं। तीन दिसंबर को मतगणना के साथ ही नई सरकार को लेकर तस्वीर साफ हो जाएगी।

निर्वाचन आयोग के अनुसार तीन दिसंबर को सुबह आठ बजे से सभी 52 जिला मुख्यालयों में स्थापित केंद्रों में मतगणना शुरु होगी। मतगणना के हर राउंड के परिणाम प्रदर्शित किए जाएंगे। सुबह आठ बजे से पोस्टल बैलेट की गिनती शुरु होगी, उसके आधे घंटे बाद ईवीएम में दर्ज मतों की गणना होगी। पोस्टल बैलेट की गणना समाप्त होने के बाद हर उम्मीदवार को मिले डाक मतों की घोषणा की जाएगी। मतगणना के परिणाम भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट रिजल्ट्स डॉट ईसीआई डॉट जीओवी डॉट इन और वोटर हेल्पलाइन ऐप के माध्यम से देखे जा सकेंगे। मतगणना के परिणाम सीईओमध्यप्रदेश डॉट एनआईसी डॉट इन पर प्रदर्शित किए जाएंगे।

राजनीतिक दल भी जुटे है तैयारियों में 

राजनीतिक दल भी मतगणना के पूर्व अपनी तैयारियों में जुटे हैं। इसी क्रम में राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद विष्णुदत्त शर्मा के नेतृत्व में दो दिन पहले पार्टी ने चुनाव से जुड़े अपने राज्य भर के प्रतिनिधियों को वर्चुअल प्रशिक्षण दिया। इस दौरान पार्टी के सभी प्रत्याशी और संगठन से जुड़े लोगों की मतगणना की बारीकियों के बारे में समझाइश दी गई। वहीं कांग्रेस ने अपने सभी प्रत्याशियों को राजधानी भोपाल बुलाकर उन्हें मतगणना के लिए प्रशिक्षित किया।

दिग्गजों के क्षेत्रों के परिणामों पर नजर

मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान बुधनी से, पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ छिंदवाड़ा से और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर दिमनी से, प्रहलाद पटेल नरसिंहपुर से और फग्गन सिंह कुलस्ते मंडला जिले के निवास से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इसके अलावा भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय इंदौर एक क्षेत्र से तथा चार सांसद, राज्य सरकार के दो दर्जन से अधिक मंत्री और अन्य प्रमुख नेताओं की किस्मत भी मतदान के बाद ईवीएम में कैद हो गई। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के दिग्गज नेताओं के परिणामों पर लोगों की नजरें टिकी हुई है। 


लोकसभा के लिए सक्रिय हुए दावेदार


टिकट से वंचित रहे विधायक करने लगे बैठकें

भोपाल। विधानसभा चुनाव में टिकट कटने से वंचित रहे दावेदार अब लोकसभा के लिए सक्रियता दिखाते नजर आ रहे हैं। इन दावेदारों में भाजपा के वे वर्तमान विधायक भी है, जिनके टिकट काटे गए हैं। 

प्रदेश में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए दावेदारों ने अभी से सक्रियता दिखानी ष्शुरू कर दी है। ये दावेदार अपने समर्थकों के साथ बैठकें करने लगे है। इन बैठकों के जरिए वे संगठन को संकेत दे रहे हैं कि वे लोकसभा चुनाव में सांसद के टिकट के लिए दावेदारी करेंगे। इसका नजारा देखने को मिला खंडवा संसदीय सीट पर। यहां पर भाजपा ने तीन वर्तमान विधायकों के टिकट काटे हैं। इसे लेकर भाजपा नेताओं ने एक बैठक की। इस बैठक में खंडवा से वर्तमान विधायक देवेन्द्र वर्मा, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा और राजेश डोंगरे, कैलाश पाटीदार पूर्व अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक, संतोष राठौड़ प्रदेश महामंत्री पिछड़ा मोर्चा मध्य प्रदेश, कैलाश राठौड़, मुकेश साद भाजपा जिला मंत्री खंडवा सहित जिले के अन्य संगठन पदाधिकारी मौजूद रहे। इसके पहले एक बैठक विधायक देवेंद्र वर्मा के निवास पर हो चुकी है। बैठक में चर्चा की गई कि जिले के किसी एक विधायक को (जिन्हें विस में टिकट नहीं मिला) सांसद पद के लिए उम्मीदवार बनाया जाए।

भाजपा राज्यसभा सदस्यों को उतार सकती है मैदान में

 भाजपा ने विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी चयन के दौरान जिस तरह से सांसदों को मैदान में उतारा उसी तर्ज पर लोकसभा चुनाव में फिर चौंका सकती है। माना जा रहा है कि इस बार राज्यसभा सदस्यों को प्रत्याशी बनाया जा सकता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल जून 2026 तक है। कविता पाटीदार का कार्यकाल जून 2028 तक है। बताया जा रहा है कि इन तीनों को भाजपा राज्यसभा सांसदों को मैदान में उतार सकती है। 


परिणाम को प्रभावित कतरे नजर आएंगे छोटे दल


जीत से ज्यादा समीकरण बिगाड़ने की रही इनकी भूमिका

भोपाल। मतगणना के पहले प्रदेश में छोटे दलों की स्थिति एक बार फिर पिछले चुनावों की तरह इस बार भी आंकी जा रही है। इन दलों के प्रत्याशी केवल भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों की जीत-हार को प्रभावित कर सकते हैं, खुद की जीत के लिए उतने आश्वस्त नजर नहीं आ रहे हैं। 

प्रदेश में इस बार भी हर चुनाव की तरह छोटे दलों सपा, बसपा, गोंगपा, आम आदमी पार्टी ने अपने दम पर चुनाव लड़ते हुए सरकार में भागीदारी की बात कही थी। उन्होंने दावा किया था कि उनके बिना भाजपा और कांग्रेस सरकार नहीं बना सकेंगे। उनका यह दावा उसी वक्त निराधार नजर आया था, जब इन दलों को पूरे 230 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी ही नहीं मिले थे। हालांकि इस बार बसपा ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से गठबंधन कर अजा और अजजा वर्ग को साधने का प्रयास किया, मगर उसका असर कोई खास नजर नहीं आया। इस वर्ग की आरक्षित सीटों पर इन दलों को अपनी विचारधारा वाले प्रत्याशी ही नहीं मिले। ऐसे में फिर यह सवाल उठ रहा है कि मतगणना के दौरान इनकी स्थिति क्या रहेगी। 

राजनीतिक विश्लेशकों की माने तो एक बार फिर इन दलों की स्थिति प्रदेश में उसी तरह रहेगी, जिस तरह अब तक रहती आई है। ये दल दस सीटों के अंदर ही सिमटते नजर आ रहे हैं। नतीजे आने के बाद तीसरी पार्टियां की स्थिति 2013 और 2018 के विधानसभा चुनावों में हुआ था, ठीक उसी तरह नजर आएगी। बसपा और निर्दलीय उम्मीदवार कई सीटों के नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन कई सीटों पर उनके जीतने की संभावना कम है। 

दहाई के आंकड़े को भी नहीं छू पाते छोटे दल

छत्तीसगढ़ के मध्य प्रदेश से अलग होने के बाद 2003 के चुनाव में अन्य दलों को 14 सीटें मिलीं और सपा को सात सीटें मिली थी। 2008 में उन्होंने 16 सीटें जीतीं, जब बसपा को सात सीटें मिलीं और उमा भारती के राजनीतिक संगठन जनशक्ति, जिसने पहली बार चुनाव लड़ा, ने पांच सीटें जीतीं। वहीं, 2013 में इन पार्टियों को सिर्फ सात सीटें मिली थीं।  बसपा को सिर्फ चार सीटें मिलीं और सपा अपना खाता भी नहीं खोल सकी।  क्योंकि इन सभी चुनावों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला था, इसलिए सरकार बनाने में इन पार्टियों की कोई भूमिका नहीं थी. 2018 के चुनाव में अन्य पार्टियों ने सात सीटें जीतीं। बसपा को दो, सपा को एक और निर्दलियों को चार सीटें मिलीं। कांग्रेस को बहुमत के आंकड़े से दो सीटें कम मिलने से इन पार्टियों का महत्व बढ़ गया।  फिर भी, अन्य दलों के कई सीटें जीतने और सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की संभावना कम दिखती है।


मंगलवार, 28 नवंबर 2023

पूर्व मुख्यमंत्रियों के वंशजों की प्रतिष्ठा दांव पर

भाजपा, कांग्रेस में खूब चला परिवारवाद


भोपाल। प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल परिवारवाद से दूर नहीं रहे। दोनों ही दलों ने वरिष्ठ नेताओं के परिजनों को टिकट देकर मैदान में उतारा है। अब इन परिजनों की प्रतिष्ठा दांव पर है। 

विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में टिकट वितरण के दौरान परिवारवाद छाया रहा। वैसे भाजपा इसे लेकर कांग्रेस को जमकर कोसती रही, लेकिन वह भी अपने नेताओं के परिजनों को टिकट देने से दूर नहीं रही है। कांग्रेस की तरह भाजपा ने भी नेताओं के परिजनों को टिकट देने में कोई संकोच नहीं किया है। हर बार की तरह इस बार भी दोनों ही दलों ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे और परिजनों को भी मैदान में उतारा है। जिन पूर्व मुख्यमंत्रियों के वंशजों को टिकट दिया गया है उनमें कांग्रेस के दिग्विजय सिंह के अलावा स्वर्गीय अर्जुन सिंह का नाम शामिल है। दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह और बेटे जयवर्धन सिंह को कांग्रेस ने चुनाव मैदान में उतारा है। दिग्विजय सिंह के अलावा स्वर्गीय अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह और साले राजेन्द्र सिंह को भी कांग्रेस ने मैदान में उतारा है। अजय सिंह पिछला चुनाव हार गए थे। इसके अलावा स्वर्गीय कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी जिनका कुछ माह पूर्व भाजपा से मोह भंग हो गया था, उन्हें भी कांग्रेस ने इस बार खातेगांव सीट से अपना उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है। 

वहीं दूसरी और भाजपा ने स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेन्द्र पटवा, स्वर्गीय वीरेन्द्र सखलेचा के पुत्र ओमप्रकाश सखलेचा, स्वर्गीय बाबूलाल गौर की पुत्रवधु कृश्ण गौर, स्वर्गीय गोविंदनारायण सिंह के पुत्र धु्रवनारायण सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के भतीजे राहुल लोधी को टिकट दिया है। धु्रवनारायण सिंह एक बार भोपाल मध्य विधानसभा सीट से चुनाव हार चुके हैं। इस बार फिर भाजपा ने उन्हें भोपाल मध्य सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है। इसके अलावा गोविंदनाराय सिंह के पोते विक्रम सिंह को भाजपा ने रामपुर बघेलान सीट से उम्मीदवार बनाया है। वे पिछला चुनाव जीत चुके हैं। विक्रम सिंह पूर्व मंत्री हर्श सिंह के बेटे हैं। 


वायरल वीडियो के बाद नोडल अधिकारी को किया निलंबित

बालाघाट में डाक मतपत्रों की कथित गणना का मामला

भोपाल।  बालाघाट के वायरल हुए एक वीडियो ने चुनाव आयोग और भाजपा  सहित प्रशासनिक अमले पर कांग्रेस ने घेराबंदी शुरू कर दी है। डाक मतपत्रों की कथित गणना को लेकर नोडल निर्वाचन अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। 

मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट कर निर्वाचन गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कलेक्टर निलंबन की मांग की थी। हालांकि कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने इसे कन्फ्यूजन बताते हुए मामला क्लीयर होने का दावा किया है। उधर चुनाव आयोग ने पूरे मामले में एक निर्वाचन सहायक नोडल अधिकारी हिम्मत सिंह को निलंबित कर दिया है। 

कलेक्टर ने बताया कि डाक मतपत्रों का स्ट्रॉन्ग रूम तहसील कार्यालय में बनाया गया है। जिसे रोज़ तीन बजे खोला जाता है, क्योंकि एटीपीब्स आते हैं, जिसकी सूचना राजनीतिक दलों को भी दी जाती है। यहां नियमानुसार डाक मतपत्रों की विधानसभावार छंटनी की जा रही थी। इस दौरान ग़लतफ़हमी में कुछ लोगों ने विरोध किया, लेकिन जानकारी स्पष्ट होते ही उन्हें भी यह ज्ञात हो गया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार ही कार्य किया जा रहा है। जहां तक निर्वाचन नोडल अधिकारी के निलंबन की बात है, उस मामले में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को संतुष्टिजनक जवाब ना देने और उन की उपस्थिति में ही सही समय के पहले स्ट्रॉन्ग रूम खोलने को लापरवाही मानते हुए कारवाई की गई है। 

दरअसल बीते दिनों एक बालाघाट में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें नोडल अधिकारी स्ट्रॉन्ग रूप में बैलेट पेपर से छेड़छाड़ करते हुए दिख रहे हैं, जिसके बाद कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से शिकायत थी। कांग्रेस ने इस काम में बालाघाट में पोस्टल बैलेट पेपर नोडल अधिकारी और स्थानीय विधायक बिसेन की मिली भगत का आरोप लगाया है। 

भाजपा ने भी की कार्रवाई की मांग

कांग्रेस के बाद भाजपा ने भी कार्रवाई की मांग की मांग की है। पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता उमाशंकर गुप्ता का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं लापरवाही तो है. चुनाव में लापरवाही नहीं की जाना चाहिए। ऐसे में अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होना चाहिए। जांच होना चाहिए, जिस प्रकार की गड़बड़ है, उस प्रकार की सख्त कार्रवाई होना चाहिए। 

मतपत्रों की नहीं हुई गिनती

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने कहा कि प्रकियात्मक त्रुटि के कारण नोडल अधिकारी को निलंबित किया गया है। मतपत्र की किसी तरह की गिनती नहीं हुई है। केवल डाक पत्र की विधानसभावार शॉर्टिंग की जा रही थी। राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजदूगी में मतपत्र की शॉर्टिंग की गई थी। उन्होंने कहा कि 3 बजे के निर्धारित समय से शॉर्टिंग होनी थी। नोडल अधिकारी ने 1ः30 बजे से शॉर्टिंग शुरू कर दी थी। शॉर्टिंग की सूचना भी ठीक तरह से नहीं दी थी.


जबलपुर में बनेगा दुर्जेय मार्क-84 बम

भोपाल। जबलपुर ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया भारतीय वायु सेना और नौसेना के लिए अत्याधुनिक हथियार बना रही है।  फैक्ट्री ने हाल ही में भारतीय नौसेना को उन्नत हथियार दिए हैं और अब वायु सेना के लिए दुर्जेय मार्क-84 बम का उत्पादन करने की तैयारी कर रही है। सरकार ने इस परियोजना के लिए 3 हजार करोड़ रुपए का महत्वपूर्ण बजट आवंटित किया है। 

मार्क -84 बम एक दुर्जेय हथियार है जो विरोधियों में भय पैदा करता है। 12 फीट लंबाई और लगभग 1,000 किलोग्राम वजन वाले इस बम की विनाशकारी शक्ति अनिवार्य है। विस्फोट होने पर, यह लगभग 30 फीट गहरे और 50 फीट चौड़े गड्ढे का निर्माण करता है, जो सबसे बड़े संरचनाओं को भी नष्ट कर सकता है। मार्क-84 बम का एक दुर्जेय इतिहास है, जिसका उपयोग कई संघर्षों, जिसमें वियतनाम युद्ध भी शामिल है, में किया गया है। वियतनाम युद्ध के दौरान, अमेरिकी बलों ने मार्क-84 बम का उपयोग किया, जिससे विस्फोट स्थल पर 97 लोगों की दुखद मौत हो गई। इस बम की सैन्य हथियार के रूप में प्रतिष्ठा दृढ़ता से स्थापित है।

भारतीय वायु सेना ने पारंपरिक रूप से विदेशी स्रोतों से मार्क-84 बम का आयात किया है। इन बमों के आयात की उच्च लागत के कारण, भारतीय वायु सेना ने एक घरेलू समाधान की तलाश की। फलस्वरूप, जबलपुर में ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया को मार्क-84 बम का निर्माण करने के लिए बोली दी गई, जिसका नेतृत्व जनरल मैनेजर एमएन हालदार के देखरेख में किया गया था। भारत में मार्क-84 बम का विकास आत्मनिर्भरता और तकनीकी प्रगति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस बम के सफल उत्पादन से न केवल भारतीय वायु सेना का शस्त्रागार मजबूत होता है, बल्कि इस हथियार की वैश्विक मांग के कारण इसे अन्य देशों को निर्यात करने के अवसर भी खुल जाते हैं। ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया भी भारतीय नौसेना के लिए एक उन्नत पनडुब्बी भूमिगत खनन का उत्पादन कर रही है।


सोमवार, 27 नवंबर 2023

भाजपा जुटी लोकसभा चुनाव की तैयारी में, करेगी बूथ मजबूत

प्रदेश में फिर चलाया जाएगा अभियान


भोपाल। विधानसभा चुनाव से फुरसत पाते ही भाजपा लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट जाएगी। संगठन स्तर पर एक बार फिर बूथ को मजबूत करने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
पार्टी नेताओं का मानना है कि मध्य प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में हुआ कम मतदान बूथ स्तर के कामकाज में सुधार की आवश्यकता बता रहा है। पार्टी अगले चार महीने बूथ और शक्ति केंद्र को मजबूत बनाने पर ध्यान देगी। संगठन का विचार है कि लोकसभा चुनाव में बाहरी राज्य से कार्यकर्ता नहीं आ पाएंगे, ऐसे में 50 प्रतिशत वोट शेयर प्राप्त करना स्थानीय कार्यकर्ताओं की ही जिम्मेदारी होगी। पार्टी नेताओं ने सभी 64,626 बूथों में हुए मतदान के विश्लेषण का निर्णय किया है। जहां कम वोटिंग हुई है, उसके कारण जानने के साथ ही बूथ कमेटी और खास तौर से त्रिदेव के प्रदर्शन का आकलन भी किया जाएगा। जिन मतदान केंद्रों पर लापरवाही हुई है, उनकी सूची भी तैयार की जाएगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत को लेकर आकलन अलग से होगा।
पार्टी पदाधिकारियों का मानना है कि प्रदेश में इस बार रिकार्ड 77.15 प्रतिशत मतदान हुआ है। इसमें बूथ प्रबंधन की भी भूमिका रही है लेकिन जिन बूथों पर मतदान उम्मीद के अनुरूप नहीं हुआ है, वहां पार्टी लोकसभा चुनाव के हिसाब से नए सिरे से तैयारी करेगी। साथ ही, मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लगभग पांच महीने पहले भाजपा ने चुनाव के माइक्रो मैनेजमेंट प्लान पर काम शुरू करने का निर्णय किया है। इसमें एक बार फिर मतदाताओं के घर, मोहल्ले, गली और बूथ में समरस होने का लक्ष्य रखा गया है।

नतीजों के लिए करना पड़ेगा इंतजार, देर से आएंगे परिणाम


बैलेट पैपर की गिनती और हर राउंड के बाद प्रमाण पत्र देने के चलते होगी दोरी

भोपाल। मतगणना के बाद नतीजों को लेकर इस बार भी पिछली बार की तरह कई स्थानों पर परिणामों के लिए इंतजार करना होगा। इसके पीछे ईवीएम की मतगणना के पहले पोस्टल बैलेट से कराए गए मतदान को बताया जा रहा है। पहले पोस्टल बैलेट की मतगणना कराई जाएगी, जो इस बार वृद्ध और दिव्यांग मतदाताओं के पोस्टल बैलेट से कराए गए मतदान के चलते बढ़ गई है।
दरअसल 3 दिसंबर को होने वाली मतगणना के नतीजों में देरी होगी, जबकि शुरुआती रुझान भी 9 बजे तक ही आने की उम्मीद जताई जा रही है। इन नतीजों के देर से मिलने के पीछे की वजह पोस्टल बैलेट है,  क्योंकि निर्वाचन आयोग ने इस बार केवल अधिकारी और कर्मचारियों के लिए ही नहीं बल्कि वृद्ध और दिव्यांगों के लिए भी पोस्टल बैलेट की सुविधा उपलब्ध कराई थी, जिससे इस बार पोस्टल बैलेट की संख्या में वृद्धि हुई है। ऐसे में जब पोस्टर बैलेट की गिनती पूरी हो जाएगी, उसके बाद ही ईवीएम मशीनों की गिनती शुरू होगी। इसके चलते कई विधानसभा क्षेत्रों की मतगणना में देर रात हो सकती है। इसके लिए प्रत्याशियों से लेकर कार्यकर्ताओं को भी तैयार रहना होगा, क्योंकि हर एक राउंड के बाद निर्वाचन आयोग प्रत्याशियों को उनके वोटों का पत्र भी सौंपेगा।  इसलिए चुनाव आयोग इस बार पूरी तरह से तैयार नजर आ रहा है। इन कारणों से प्रदेश के सभी 230 विधानसभा सीटों के नतीजे आने में देरी होगी।
गौरतलब है कि 2018 में भी परिणाम देर रात तक आए थे। कई सीटों पर नतीजा देर रात तक आया था, इसलिए इस बार भी ऐसी ही स्थिति बनने वाली है। बता दें कि प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर गिनती होगी, जिसके लिए जिला मुख्यालय पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

कांग्रेस की जीत को लेकर लगाई एक लाख की शर्त

हलफनामा तैयार कर तीसरे व्यक्ति को दे दिया एक लाख का चैक


भोपाल। मध्यप्रदेश अजब है, गजब है। वाला वाक्य इन दिनों प्रदेश के विधानसभा चुनाव के दौरान काफी सटीक बैठ रहा है। यहां कभी कांग्रेस प्रत्याशी कमलनाथ की जीत को लेकर दस लाख रूपए की ष्शर्त लगती है तो कभी कांग्रेस की जीत पर एक लाख रूपए की शर्त लगाई जा रही है। मजेदार बात यह है कि इस तरह कीष्शर्त को बकायदा स्टाम्प पेपर पर लिखित में लगाई जा रही है। ताकि ष्शर्त हारने के बाद व्यक्ति मुकर ना जाए। अब हाल ही में प्रदेश में कांग्रेस की हार-जीत को लेकर एक लाख रूपए की शर्त लगाई गई है। 

अब शर्त का लिखित नोट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसको लेकर लोगों की अपनी राय है, कोई इस पत्र के वायरल होने के बाद कांग्रेस तो कोई बीजेपी की सरकार बनने का दावा कर रहा है। यह ष्शर्त पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के गृह जिले छिंदवाड़ा के अमरवाड़ा विधानसभा के ग्राम सुखापुरा के पूर्व सरपंच धनीराम भालवी और हर्रई वार्ड नं 8 में रहने वाले नीरज मालवीय के बीच 1-1 लाख रुपए की शर्त लगाई गई है। बकायदा दोनों के बीच 50 रुपए के स्टाम्प पर शर्त नामा लिखाया हुआ है। धनीराम भालवी का कहना है कि कांग्रेस की सरकार बनेगी तो वहीं नीरज मालवीय का कहना है कि भाजपा की सरकार बनेगी। इसको लेकर दोनों 1-1 लाख रुपए की शर्त लगी है और दोनों व्यक्तियों ने अपने अपने 1-1 लाख रुपए के चेक अपने परिचित अमित पांडे पास सुरक्षित रखवा दिया है। शर्त के मुताबिक दोनों में जो भी जीतेगा, अपना चेक अमित पांडे से प्राप्त कर लेगा। इस शर्त का शपथ पत्र तैयार किया गया तब इसमें तीन गवाह भी उपस्थित रहे। 

गौरतलब है कि इसके पहले मध्य प्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की हार जीत को लेकर भी छिंदवाड़ा में 10 लाख रुपए की शर्त लग चुकी है। छिंदवाड़ा शहर के लालबाग में रहने वाले प्रकाश साहू और राम मोहन साहू ने कांग्रेस के कमलनाथ और भाजपा के बंटी साहू की हार-जीत को लेकर एक ष्शपथ पत्र तैयार कराया था।  इसके मुताबिक अगर कांग्रेस उम्मीदवार कमलनाथ हारते हैं तो प्रकाश साहू, राम मोहन साहू को 10 लाख रुपए देंगे।  वहीं, अगर भाजपा उम्मीदवार बंटी साहू चुनाव हारेंगे तो राम मोहन साहू, प्रकाश साहू को उतने ही रुपए देंगे। इस इकरारनामे में बाकायदा तीन गवाह भी शामिल किए गए थे। 


सरकार और कानून व्यवस्था पर उमा ने उठाए सवाल


भोपाल। शहडोल में पटवारी की हत्या को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी ही सरकार पर नाराजगी जताई है। उमा ने देश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रेत माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने ट्वीट कर कहा कि शहडोल के ब्योहारी में खनन माफिया द्वारा अवैध खनन रोकने के कारण एक सरकारी कर्मचारी की हत्या, मध्य प्रदेश की सारी व्यवस्था समाज, शासन, प्रशासन सबके लिए कलंक एवं शर्मनाक है, अपराधियों पर कठोरतम कार्रवाई हो। उमा भारती से पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी घटना पर शिवराज सरकार पर निशाना साधा था। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह पहला मौका नहीं है जब मध्य प्रदेश में रेत माफिया ने इस तरह से किसी सरकारी व्यक्ति को कुचल कर मार दिया हो। मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार के दौरान पनपा भ्रष्टाचार और घोटालों के कारण यह स्थिति बनी हैं। उन्होंने शिवराज सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा था कि, मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार के दौरान पनपा भ्रष्टाचार और घोटालों के कारण यह स्थिति बनी है।


कर्मचारियों को करना होगा इंतजार, आयोग से नहीं मिली अनुमति


भोपाल। प्रदेश के 7 लाख से अधिक नियमित कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में 4 प्रतिशत वृद्धि के लाभ के लिए अभी और इंतजार करना होगा। चुनाव आयोग ने वित्त विभाग को महंगाई भत्ता 42 से बढ़ाकर 46 प्रतिशत करने की अनुमति नहीं दी है।

चुनाव आयोग ने वित्त विभाग को महंगाई भत्ता 42 से बढ़ाकर 46 प्रतिशत करने की अनुमति नहीं दी है। जबकि, छत्तीसगढ़ सरकार को इसकी अनुमति दी जा चुकी है। केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों का महंगाई भत्ता और पेंशनरों की महंगाई राहत जुलाई में ही 42 से बढ़ाकर 46 प्रतिशत कर चुकी है। वित्त विभाग ने भी इसका प्रस्ताव दस नवंबर को भेजा था,लेकिन 17 नवंबर को मतदान के कारण अनुमति नहीं दी गई। तब से ही यह मामला अटका हुआ है।

वित्त विभाग ने दोबारा प्रस्ताव भी बनाकर प्रशासकीय अनुमति के लिए भेजा, लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ। जबकि, छत्तीसगढ़ सरकार को महंगाई भत्ता बढ़ाने की अनुमति मिल चुकी है। उधर, वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई विभागों में वेतन के बिल बन चुके हैं। अब यदि अनुमति मिल भी जाती है तो नवंबर के वेतन में यह वृद्धि शामिल नहीं हो पाएगी। प्रदेश में कर्मचारियों का 42 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। पेंशनरों की महंगाई राहत में वृद्धि के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की सहमति लेनी होगी। इसके लिए वित्त विभाग द्वारा अलग प्रस्ताव भेजा जाएगा।


कांग्रेस भी बागी नेताओं को साधने की तैयारी में

बागियों का सहारा ले सकती है सरकार बनाने में


भोपाल। कांग्रेस ने अब अपने बगावत कर मैदान में उतरे नेताओं पर नजर रखनी ष्शुरू कर दी है। अगर सरकार बनाने के जादुई आकड़े से वह कुछ सीट पीछे रहती है तो इन बागियों का सहारा कांग्रेस ले सकती है। इसके लिए कांग्रेस ने नेताओं को इन बागियों को साधने के लिए सक्रिय कर दिया है। 

प्रदेश में 17 नवंबर को हुए मतदान की मतगणना 3 दिसंबर को होनी है। कांग्रेस का दावा है कि वह स्पश्ट बहुमत के सहारे सरकार बना रही है। वहीं भाजपा भी यह दावा कर रही है। अब दोनों ही दलों को मतगणना का इंतजार है। ऐसे में कांग्रेस ने अपनी रणनीति के तहत दूसरा काम करना भी ष्शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने अपने नाराज होकर चुनाव मैदान में उतरे नेताओं को साधने की कवायद करनी शुरू कर दी है। इसके लिए वरिश्ठ नेताओं को सक्रिय किया गया है। कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले नेताओं में महू से अंतर सिंह दरबार, गोटेगांव से शेखर चौधरी, आलोट से प्रेमचंद गुड्डु, सिवनी-मालवा से ओम रघुवंशी, धार से कुलदीप बुंदेला, बड़नगर से राजेंद्र सोलंकी, श्यामलाल जोकचंद शामिल हैं। मल्हारगढ़, जतारा से आरआर बंसल और नागौद से यादवेंद्र सिंह वे कांग्रेस नेता है जो दूसरे दलों में जाकर चुनाव लड़े हैं। कांग्रेस संगठन के सूत्रों ने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता बागी नेताओं से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। मतगणना के दिन नेता इन उम्मीदवारों पर फैसला लेने वाले हैं। 

सूत्रों ने दावा किया कि पार्टी उन्हें अपने पाले में लाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे भविष्य में विपरीत खेमे में शामिल न हों और कांग्रेस की सरकार बनने की स्थिति में उन्हें परेशानी न हो। अतीत से सीख लेते हुए कांग्रेस पार्टी सभी एहतियाती कदम उठा रही है और पार्टी नेता नहीं चाहते हैं कि उसे दोबारा सत्ता में आने से कोई रोक सके।


नतीजों के लिए करना पड़ेगा इंतजार, देर से आएंगे परिणाम

बैलेट पैपर की गिनती और हर राउंड के बाद प्रमाण पत्र देने के चलते होगी दोरी


भोपाल। मतगणना के बाद नतीजों को लेकर इस बार भी पिछली बार की तरह कई स्थानों पर परिणामों के लिए इंतजार करना होगा। इसके पीछे ईवीएम की मतगणना के पहले पोस्टल बैलेट से कराए गए मतदान को बताया जा रहा है। पहले पोस्टल बैलेट की मतगणना कराई जाएगी, जो इस बार वृद्ध और दिव्यांग मतदाताओं के पोस्टल बैलेट से कराए गए मतदान के चलते बढ़ गई है। 

दरअसल 3 दिसंबर को होने वाली मतगणना के नतीजों में देरी होगी, जबकि शुरुआती रुझान भी 9 बजे तक ही आने की उम्मीद जताई जा रही है। इन नतीजों के देर से मिलने के पीछे की वजह पोस्टल बैलेट है,  क्योंकि निर्वाचन आयोग ने इस बार केवल अधिकारी और कर्मचारियों के लिए ही नहीं बल्कि वृद्ध और दिव्यांगों के लिए भी पोस्टल बैलेट की सुविधा उपलब्ध कराई थी, जिससे इस बार पोस्टल बैलेट की संख्या में वृद्धि हुई है। ऐसे में जब पोस्टर बैलेट की गिनती पूरी हो जाएगी, उसके बाद ही ईवीएम मशीनों की गिनती शुरू होगी। देर रात हो सकती है। इसके लिए प्रत्याशियों से लेकर कार्यकर्ताओं को भी तैयार रहना होगा, क्योंकि हर एक राउंड के बाद निर्वाचन आयोग प्रत्याशियों को उनके वोटों का पत्र भी सौंपेगा।  इसलिए चुनाव आयोग इस बार पूरी तरह से तैयार नजर आ रहा है। इन कारणों से प्रदेश के सभी 230 विधानसभा सीटों के नतीजे आने में देरी होगी। 

गौरतलब है कि 2018 में भी परिणाम देर रात तक आए थे। कई सीटों पर नतीजा देर रात तक आया था, इसलिए इस बार भी ऐसी ही स्थिति बनने वाली है। बता दें कि प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर गिनती होगी, जिसके लिए जिला मुख्यालय पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। 


रविवार, 26 नवंबर 2023

भारतीय इतिहास का काला दिन, 26/11 हमला

26/11 को भारत के इतिहास में एक काले दिन के रूप में माना जाता है। नवंबर 2008 में मुंबई में चार दिनों तक चले आतंकवादी हमला हुआ था। आज रविवार को 14 साल पूरे हो हो गए, जब पूरे देश में प्रतिष्ठित स्थानों पर 12 समन्वित गोलीबारी और बम विस्फोट हुए थे। इनमें मुंबई का छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, ओबेरॉय ट्राइडेंट और ताज पैलेस और टॉवर शामिल हैं।

29 नवंबर, 2008 को हमले के आखिरी दिन, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) ने ताज होटल से आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन टॉरनेडो चलाया। हमले में विदेशियों और सुरक्षाकर्मियों सहित कुल 166 लोग मारे गए, जबकि पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े नौ आतंकवादियों को मार गिराया गया, और शेष दसवें कसाब को हिरासत में ले लिया गया। उन्हें दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई और बाद में 21 नवंबर 2012 को फांसी दे दी गई। 

यह हुई थी घटना

26 नवंबर, 2008ः पाकिस्तान से “नियंत्रित“ दस युवक स्पीडबोट पर कराची से मुंबई पहुंचे। वे तेजी से फैल गए, दो आतंकवादी ट्राइडेंट में घुस गए, दो ताज की ओर जा रहे थे, और चार नरीमन हाउस की ओर जा रहे थे। कसाब और एक अन्य आतंकवादी, इस्माइल खान, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पर हमला करते हैं और तेजी से गोलीबारी शुरू कर देते हैं, जिससे दहशत और मौत हो जाती है। इसके बाद ये दोनों कामा अस्पताल जाते हैं, जहां वे घात लगाकर छह पुलिस अधिकारियों की हत्या कर देते हैं, जिनमें अशोक काम्टे, विजय सालस्कर और आतंकवाद-रोधी दस्ते के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे भी शामिल हैं। उन्होंने जीप को हाईजैक कर लिया और भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। कसाब को पकड़ लिया गया, जबकि खान गोलीबारी में मारा गया। एक और पुलिस अधिकारी की मौत हो गई थी। 


दहशत में था मुंबई सहित पूरा देश

इस दिन ताज होटल से निकलते धुएं की तस्वीरों ने शहर को दहशत में डाल दिया और देश भर में मुंबई निवासियों और भारतीयों की स्मृति में अंकित हो गई। चार में से दो आतंकवादी, अब्दुल रहमान बादा और अबू अली एक पुलिस चौकी के सामने एक कच्चा आरडीएक्स बम लगाने के बाद मुख्य द्वार पर पहुँचते हैं। वे एके-47, गोला-बारूद और ग्रेनेड से लैस हैं। जैसे ही वे लॉबी क्षेत्र में पहुंचते हैं, वे अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर देते हैं। दो और आतंकवादी, शोएब और उमर, एक अलग दरवाजे से होटल में प्रवेश करते हैं और पूल के किनारे के क्षेत्र में मेहमानों पर गोलीबारी शुरू कर देते हैं। चार विदेशियों, साथ ही एक सुरक्षा गार्ड, रवींद्र कुमार और उसके कुत्ते की गोली मारकर हत्या कर दी गई।


मतगणना के लिए कांग्रेस मुख्यालय में बनेगा कंट्रोल रूम

दिग्विजय, कमलनाथ रहेंगे उपस्थित, वकीलों की टीम भी रहेगी सक्रिय

भोपाल। विधानसभा चुनाव के मतदान की 3 दिसंबर को होने वाली मतगणना को लेकर कां
ग्रेस प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित करेगी। यहां से कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रदेश भर में होने वाली मतगणना की निगरानी करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह के अलावा इस दिन अधिवक्ता और राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा के साथ वकीलों की टीम भी सक्रिय रहेगी।

मतगणना को लेकर कांग्रेस पूरी तरह से गंभीर है। प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर होने वाली मतगणना के दौरान प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है। इस कंट्रोल रूम में खुद कमलनाथ और दिग्विजय सिंह उपस्थित रहेंगे। उनके साथ अधिकवक्ता विवेक तन्खा के अलावा उनकी चालीस वकीलों की टीम भी उपस्थित रहेगी। जो कहीं भी गड़बड़ी होने की स्थिति में सक्रियता दिखाएगी। जानकारी के अनुसार प्रदेश में कही से भी गड़बड़ी होने पर यह टीम तुरंत जरूरी कदम उठाएगा।
प्रत्याशियों, एजेंटों को दिया प्रशिक्षण
कांग्रेस ने मतगणना के पहले आज प्रदेश के सभी कांग्रेस प्रत्याशियों और उनके साथ दो-दो एजेंटों को राजधानी बुलाया था। इन्हें मतगणना को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। सभी प्रत्याशियों और एजेंटों को मतगणना के दौरान किस तरह की सतर्क रहना है और क्या करना है। इस बात का प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें बताया गया कि मतगणना के दौरान किन-किन बातों पर ध्यान रखना है। साथ ही हर राउंड की मतगणना के बाद प्रमाण पत्र लेना है। अगर कहीं पर प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता है तो इसकी जानकारी तुरंत ही कंट्रोल रूम में करना है।
नये नियमों की दी जानकारी
प्रत्याशियों और पोलिंग एजेंट को नए नियमों के बारे में बताया गया। गड़बड़ी होने पर किस तरह आपत्ति जताएं इसके बारे में जानकारी दी गई है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पहली बार चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी को किसी तरीके की दिक्कत ना आए इसलिए प्रशिक्षण जरूरी है।
बिना भय और दबाव के साथ करें मतगणना का कार्य
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ कहा कि मतगणना का कार्य बिना किसी भय और दबाव के साथ करें। कांग्रेस पार्टी के एक एक कार्यकर्ता ने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य किया है। कांग्रेस की सरकार बनने पर प्रदेश की नई तस्वीर बनेगी। युवाओं में नई ऊर्जा का संचार होगा, महिलाओं को सम्मान मिलेगा, किसानों का उत्थान होगा और नई पीढ़ी का भविष्य उज्ज्जवल होगा। उन्होंने कहा कि मतगणना के दिन पूरी निर्भीकता के साथ काम करें, कोई भी समस्या आने पर कांग्रेस प्रत्याशी और चुनाव कार्य में लगे अधिकारियों को सूचित करें, ताकि कानूनी तरीके से उसका निराकरण हो सके।

परिणाम का असर दिखेगा राज्यसभा सीटों पर

अप्रैल में रिक्त होंगी पांच सीटें


भोपाल। विधानसभा के तीन दिसंबर को आने परिणाम प्रदेश की राज्यसभा की 5 सीटों को भी प्रभावित करेंगें। अप्रैल 2024 में रिक्त होने वाली प्रदेश की पांच राज्यसभा सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के खाते में कितनी सीटें जाएंगी यह तय इस परिणाम से ही होगा। 

राज्यसभा के लिए मध्यप्रदेश से 11 सीटें है। इनमें वर्तमान में आठ भाजपा और तीन कांग्रेस के खाते में हैं। इन 11 सीटों में से अप्रैल 2024 में पांच सीटों के सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो जाएगा। इसके चलते अप्रैल में इन पांच सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव होना तय है। इन पांच सीटों पर वर्तमान में भाजपा के चार और कांग्रेस के खातें में एक सीट है। 3 दिसंबर का चुनाव परिणाम इन सीटों पर सीधा असर डालेगा। जानकारों का कहना है कि अगर वर्तमान विधायकों की संख्या में दलवार घट-बढ़ होती है तो सीटें भी भाजपा और कांग्रेस के खाते में कम और ज्यादा होंगी। इस लिहाज से दोनों ही दल राज्यसभा चुनाव को देखते हुए भी चुनाव परिणाम को लेकर गंभीर है। 

गौरतलब है कि विधानसभा के सदस्यों की संख्या के आधार पर सदस्य के मत का मूल्य तय होगा। ऐसे में साफ है कि जिस पार्टी के सदस्यों की संख्या जितनी ज्यादा होगी, उसके उतने ही राज्यसभा सदस्य होंगे।  इन पांच राज्यसभा सीटों को लेकर दोनों ही राजनीतिक दलों में राज्यसभा प्रत्याशियों के लिए अभी से चर्चा भी शुरू हो गई है।  

इस्तीफे के चलते बदल गए थे समीकरण

2020 में राज्यसभा की सीटों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस के 22 विधायकों द्वारा इस्तीफा देने के कारण कांग्रेस के समीकरण बिगड़ गए थे। इस चुनाव में कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह और फूल सिंह बरैया मैदान में थे तो भाजपा की ओर से ज्योतिरादित्य सिंधिया और सूमेर सिंह प्रत्याशी थे। एक सीट के लिए मतदान होना था। इसका कारण था कि कांग्रेस के 22 विधायक चुनाव 10 मार्च 2020 को अपना इस्तीफा दे चुके थे। इस चुनाव में दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुमेर सिंह विजयी हुए थे, जबकि बरैया चुनाव हार गए थे। उन्हें केवल 38 वोट ही हासिल हुए थे। 

अप्रैल  2024 में रिक्त होंगी पांच सीटें

अजय प्रताप सिंह भाजपा 2 अप्रैल 2024

कैलाश सोनी  भाजपा 2 अप्रैल 2024

धमेन्द्र प्रधान भाजपा 2 अप्रैल 2024

डा एल मुरूगन भाजपा 2 अप्रैल 2024

राजमणि पटेल कांग्रेस 2 अप्रैल 2024


हेरिटेज मदिरा बनाने नहीं लेनी होगी प्रदूषण मंडल की एनओसी

आबकारी विभाग ने किया नियमों में बदलाव


भोपाल। राज्य सरकार ने महुआ से निर्मित हेरिटेज मदिरा के बनाने के लिए बने नियमों में बदलाव किया है। अब इसके निर्माण के लिये प्रदूषण नियंत्रण मंडल की एनओसी जमा नहीं कराना होगी। हालांकि आबकारी विभाग ने अपने नियमों में इसका प्रावधान हटा दिया है, परन्तु यदि प्रदूषण नियंत्रण मंडल अपने विनियमों में इसका प्रावधान करेगा तो फिर यह एनओसी लेना जरुरी होगा। 

फिलहाल, प्रदेश में अलीराजपुर जिले के ब्लाक कट्ठीवाड़ा के ग्राम कोछा में आदिवासी वर्ग के हनुमान आजीविका स्वसहायता समूह द्वारा महुआ से हेरिटेज मदिरा का निर्माण किया जा रहा है तथा इससे हेरीटेज को प्रदेश के चुनिंदा एयरपोर्ट, पर्यटन निगम की कतिपय होटलों एवं एमबी वाईन के आउटलेट पर विक्रय के लिये उपलब्ध कराई गई है। डिंडौरी जिले के ब्लाक अमरपुर के ग्राम भाखानाल में स्थित मां नर्मदा आजीविका स्वसहायता समूह द्वारा अभी हेरीटेज मदिरा का निर्माण शुरु नहीं किया गया है। नये बदलावों के अंतर्गत, अब हेरीटेज मदिरा के विनिर्माता मूल्य, अधिकतम फुटकर मूल्य एवं न्यूनतम विक्रय मूल्य का निर्धारण आबकारी आयुक्त के अनुमोदन से होगा। इसी प्रकार, अब हेरीटेज मदिरा के परिवहन हेतु एक ही अनुज्ञा-पत्र होगा जो भले की विनिर्माण इकाई से गोदाम तक एवं गोदाम से रिटेल दुकान तक किया जाये। पहले अलग-अलग परिवहन अनुज्ञा-पत्रों का प्रावधान था। हेरीटेज मदिरा के परिवहन में 0.25 प्रतिशत की छीजन यानि वेस्टेज (टूट-फूट) दी जायेगी। हेरीटेज मदिरा की फुटकर दुकान चलाने का एचएल-2 लायसेंस 5 हजार रुपये प्रति वर्ष के स्थान पर एक हजार रुपये प्रति वर्ष लगेगा।

दसवीं पास की अनिवार्यता भी हुई खत्म

स्वसहायता समूह में कम से कम 25 सदस्य दसवीं कक्षा अथवा उसके समकक्ष अर्हता रखने वाला प्रावधान अब खत्म कर दिया गया है। हेरीटेज मदिरा निर्माण इकाई में योग्यता प्राप्त विशेषज्ञ केवल अनुसूचित जनजाति समुदाय का ही हो सकेगा तथा इकाई में केवल अजजा समूदाय के व्यक्यिं से ही समस्त प्रकार की गतिविधियों का संचालन करवाया जाएगा। 


शनिवार, 25 नवंबर 2023

प्रत्याशियों को कांग्रेस देगी प्रशिक्षण


भोपाल। चुनाव की मतगणना के पहले कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों को 26 नवंबर को भोपाल बुलाया है। इन प्रत्याशियों को कांग्रेस द्वारा मतगणना स्थल पर किस तरह सतर्क रहना है, इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही कांग्रेस हर सीट पर मतदान के बाद परिणाम का आकलन भी करेगी। 

प्रदेश कांग्रेस द्वारा सभी 230 सीटों के प्रत्याशियों को 26 नवंबर को भोपाल बुलाया गया है। इन प्रत्याशियों को कांग्रेस मतगणना के दौरान किस तरह की सावधानियां बरतनी है और किस तरह सतर्क रहना है। इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण दो चरणों में होगा। जानकारी के अनुसार पहले चरण में रीवा, शहडोल, जबलपुर, ग्वालियर, चंबल संभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। दूसरे चरण के प्रशिक्षण में इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, भोपाल, सागर संभाग के प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे। इसके अलावा प्रत्याशियों से उनके विधानसभा क्षेत्र में किस तरह की स्थिति है, मतदान का प्रतिशत और जीत-हार के आकलन को लेकर भी चर्चा की जाएगी। बताया जा रहा है कि कांग्रेस इस बार पिछले अनुभवों को लेकर सतर्क है। इस बा रवह किसी तरह की चूक नहीं होने देना चाहती है। साथ ही वरिश्ठ नेताओं को भी संभागवार प्रत्याशियों पर नजरें रखने को कहा गया है। 

जिला प्रभारियों को सौंपी कमान

प्रत्याशियों को लेकर कांग्रेस ने एक और फैसला लिया है। कांग्रेस ने जिला प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रत्याशियों पर नजर रखें। गौरतलब है कि पिछले चुनाव में सरकार बनने के बाद अपने ही लोगों द्वारा पार्टी छोड़ने के बाद सरकार गिर गई थी। इसे लेकर कांग्रेस इस बार गंभीर है और प्रत्याशियों पर नजरें रखे हुए हैं। 


छोटे दलों से ज्यादा वोट पा जाते हैं निर्दलीय

पिछले चुनाव में निर्दलियों का प्रतिशत था छोटे दलों से ज्यादा


भोपाल। विधानसभा के 2018 के चुनाव में छोटे दलों से ज्यादा वोट निर्दलीय उम्मीदवारों को मिले थे। इनका वोट प्रतिशत भी इन दलों से ज्यादा था। इसके बावजूद छोटे दल खासकर बसपा और गोंगपा गठबंधन यह दावा कर रहा है कि उनके बिना सहारे राज्य में इस बार भाजपा और कांग्रेस सरकार नहीं बना सकते। वहीं भाजपा और कांग्रेस नेता अपने दम पर स्पश्ट बहुमत के सहारे सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। 

विधानसभा चुनाव को लेकर 17 नवंबर को हुए मतदान के बाद अब सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं को 3 दिसंबर को होने वाली मतगणना के परिणाम का इंतजार है। भाजपा और कांग्रेस जहां अपनी सरकार बनाने के दावे कर रहे हैं, वहीं राज्य के छोटे दलों खासकर बसपा और गोंगपा गठबंधन इस बार उसकी भागीदारी के बिना सरकार ना बनने का दावा कर रही है। इस गठबंधन को उम्मीद है कि इस बार भाजपा और कांग्रेस को स्पश्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में वे मजबूत नजर आएंगे। इसके पीछे ग्वालियर-चंबल, विंध्य और बुंदेलखंड की कुछ सीटों पर कई स्थानों पर बने त्रिकोणीय मुकाबले का वे तर्क दे रहे हैं। बसपा, गोंगपा नेताओं को सरकार में भागीदारी की उम्मीद है। 

बसपा नेताओं की माने तो पिछले चुनाव में ग्वालियर-चंबल और विंध्य में उनका अच्छा प्रदर्शन रहा था। सबलगढ़, अटेर, लहरा, ग्वालियर ग्रामीण, पोहरी, पिछोर, कोलारस, चंदेरी, मुंगावली सीटों पर उनके प्रत्याशियों को अच्छे वोट हासिल हुए थे। वहीं विंध्य में अमरपाटन, त्यौंथर, गुन्नौर, माहूगंज, देवतालाब, चुरहट विधानसभा सीट पर मिले वोटों से भाजपा-कांग्रेस के समीकरण बिगड़े थे। वहीं इस बार गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के गठबंधन के साथ बसपा मैदान में उतरी है। पिछले चुनाव में गोंगपा को मैहर, देवरी, जैतपुर, कोतमा, बांधवगढ़, बरघाट, केवलारी, टिमरनी, खातेगांव, मांधाता सीटों पर अच्छे वोट मिले थे। 

दूसरी और सपा और आप की स्थिति पिछले चुनाव में खासा नजर नहीं आई थी। उनका वोट प्रतिशत भी गिरा था। हालांकि आम आदमी पार्टी ने 2018 का चुनाव प्रदेश में पहली बार लड़ा था। आप नेताओं को कहना है कि उनका संगठन कमजोर होने के चलते उनके हित में परिणाम नहीं आए थे। इसके बावजूद इस बार उन्हें अच्छे परिणाम की उम्मीद है। 

2018 में मिले वोट और प्रतिशत

दल        वोट प्रतिशत

बसपा 1911642         5.01   

आप 253106         0.66

सपा         496025         1.30

गोंगपा 675648         1.77

निर्दलीय 2217998        5.82

नोटा 540673        1.42


हार्दिक करेंगे मुंबई इंडियंस में वापसी ?

आईपीएल ट्रेड में इस बार धमाकेदार खबर आ रही है। कहा जा रहा है कि गुजरात टाइटन्स के कप्तान हार्दिक पंड्या 2024 सीज़न से पहले मुंबई इंडियंस के साथ वापस आने के लिए तैयार हैं। 2022 में गुजरात टाइटन्स फ्रेंचाइजी के अस्तित्व में आने के बाद से पंड्या टाइटन्स में शामिल होने से पहले मुंबई के साथ ही थे। गुजरात के साथ दो सीज़न में, पंड्या ने उन्हें दोनों बार आईपीएल फाइनल में पहुंचाया। उन्होंने 2023 में उपविजेता बनने से पहले 2022 में अपने उद्घाटन सत्र में टाइटन्स को अपनी पहली आईपीएल ट्रॉफी जीतने में भी मदद की।

आईपीएल ट्रेड में यह खबर चल रही है, मगर अभी फै्रंचायजी द्वारा किसी तरह की कोई अधिकृत पुश्टि नहीं की है। अगर ऐसा संभव  होता है, तो मुंबई को गुजरात के साथ इस प्रमुख खिलाड़ी के लिए लगभग  15 करोड़ की पूरी फीस के साथ-साथ हस्तांतरण शुल्क राशि भी देनी होगी। रिपोर्ट के अनुसार, पंड्या को ट्रांसफर शुल्क का 50 प्रतिशत तक मिलेगा। हालाँकि, दोनों टीमें अभी तक इन खबरों पर मौन साधे हुए है। अगर ऐसा करना है तो मुंबई को कुछ खिलाड़ियों को रिलीज़ करके धन की व्यवस्था करने की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि पिछली नीलामी से उनके पर्स में केवल 5 लाख बचे हैं। जबकि टीमों को 19 दिसंबर को मिनी-नीलामी से पहले लगभग 5 करोड़ की अतिरिक्त राशि मिलेगी। हार्दिक को अपने साथ लाने में मुंबई को अभी भी अधिक धन की जरूरत होगी।

गौतरलब है कि पंड्या ने 2015 में मुंबई इंडियंस के साथ अपना करियर शुरू किया था इकसे बाद वे गुजरात टाइटन्स में चले गए थे। पहले सात सीज़न तक मुंबई के साथ खेला था। इस ऑलराउंडर ने पांच बार के आईपीएल विजेता एमआई के लिए 92 मैचों में 1,476 रन बनाए और साथ ही 42 विकेट भी लिए। गुजरात के साथ हार्दिक 31 मैचों में 833 रन बनाए हैं और दो सीज़न में 11 विकेट लिए हैं। टाइटंस के कप्तान के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान ही हार्दिक पंड्या को भारत के संभावित भावी कप्तान के रूप में भी देखा जाने लगा था। गुजरात के साथ आईपीएल में उनकी सफलता ने अंततः उन्हें टी20 और वनडे में भी कई मौकों पर भारत की कप्तानी दिलाई।


ड़ेढ़ माह में माननियों ने खर्च कर दिए ढ़ाई सौ करोड़

विधायक निधि, स्वेच्छानुदान के लिए नए विधायकों को करना होगा तीन माह इंतजार


भोपाल। विधानसभा के नए निर्वाचित विधायकों को विधायक निधि और स्वेच्छानुदान मद की राशि के लिए नए वित्तीय वर्श तक इंतजार करना होगा। अगली सरकार के बजट प्रस्तुत करने के बाद ही ये विधायक राशि का उपयोग कर सकेंगे। 

विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के पहले वर्तमान विधायकों ने डेढ़ माह में ढ़ाई सौ करोड़ रूपए से ज्यादा की विधायक निधि और स्वेच्छानुदान से खर्च कर दिए हैं। इसके चलते नए विधायकों को विधायक बनने के बाद अगले वित्तीय वर्श तक इस राशि के लिए इंतजार करना होगा। करीब तीन माह तक नए विधायकों को यह राशि नहीं मिल पाएगी। जानकारी के अनुसार विधायक निधि में अभी करीब 150 करोड़ रुपए ष्शेश बचे हैं। यानी एक विधायक के पास करीब 65 लाख और स्वेच्छानुदान के कुल 1.41 करोड़ यानी एक विधायक के पास 61 हजार रुपए ही बचे हैं। 

चार को बुलाई बैठक

तीन दिसंबर को मतगणना होने के बाद विधानसभा सचिवालय ने नए विधायकों के स्वागत की तैयारियां भी ष्शुरू कर दी है। चार नवंबर को विधानसभा सचिवालय में बैठक बुलाई गई है। वहीं, स्वागत कक्ष बनाया जाएगा। यहां पर नए विधायकों के निर्वाचन प्रमाण पत्र जमा होंगे। इसके बाद उनके परिचय पत्र बनाए जाएंगे। उनके बैंक खाते खोलने से लेकर उनके ई-मेल आईडी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।


दो विधायको के इस्तीफे हुए स्वीकार

त्रिपाठी, बिरला ने दिए थे इस्तीफे

नारायण त्रिपाठी

भोपाल। चुनाव के पहले वर्तमान दो विधायकों नारायण त्रिपाठी और सचिन बिरला ने विधायक पद से इस्तीफा दिया था। विधानसभा सचिवालय ने दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। विधानसभा सचिवालय द्वारा इस फैसले का राजपत्र प्रकाशित कर दिया गया है।  

मैहर से विधायक नारायण त्रिपाठी को भाजपा ने टिकट नहीं दिया था, इसके चलते उन्होंने अपने बनाई पार्टी के प्रत्याशी के रूप में मैहर से चुनाव लड़ने का फैसला किया था। नामांकन भरने के पहले त्रिपाठी ने विधानसभा सचिवालय को अपना इस्तीफा भेज दिया था। इसी तरह खंडवा संसदीय सीट पर लोकसभा के लिए हुए उपचुनाव में बड़वाह विधायक सचिन बिरला कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा में ष्शामिल हो गए थे। मगर उन्होंने भाजपा की सदस्यता नहीं ली थी। हालांकि कांग्रेस ने इसे लेकर विधानसभा आवेदन देकर सदस्यता समाप्त करने की बात कही थी, मगर कानूनी पेंच में यह मामला उलझा इसके चलते कांग्रेस बिरला की सदस्यता समाप्त नहीं करा पाई थी। बाद में बिरला ने विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद भाजपा ने उन्हें बड़वाह से प्रत्याशी बनाया था। अब विधानसभा सचिवालय ने इन दोनां ही विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। विधानसभा सचिवालय द्वारा अपने इस फैसले का राजपत्र भी प्रकाशित कर दिया गया है। वहीं त्यागपत्र स्वीकार होने के बाद परिणाम आने तक दोनों ही विधानसभा क्षेत्र में अभी स्थान खाली रहेगा।


खाद को लेकर किसान परेशान, नहीं मिल रहा समाधान

घंटो लाईन में खड़े रहने पर खाली हाथ लौट रहे किसान


भोपाल।  प्रदेश में रबी बुवाई के लिए किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रही है। समिति केन्द्रों पर घंटों लाईन में खड़े रहने के बाद भी किसान खाली हाथ लौट रहे है। प्रदेश में बोनी के सीजन में किसानों को हर साल खाद की किल्लत का सामना करना पड़ता है, फिर चाहे वो रबी हो या खरीफ। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पिछले दिनों अधिकारियों को निर्देश देने के बाद भी किसान खाद के लिए परेशान हो रहा है। 

प्रदेश में  किसानों के लिए खाद परेशानी का सबब बन चुकी है। इस बार रबी सीजन में भी प्रदेश के किसान यूरिया, डी ए पी  के लिए खासा परेशान हो रहे हैं। शुरुआत में तो प्रशासन ने चुनाव का बहाना बनाया, लेकिन अब जब मतदान संपन्न हो गया है उसके बाद भी खाद की किल्लत जस की तस बनी हुई है। प्रशासनिक लापरवाही के चलते किसानों को दिनभर कतार में लगने के बाद भी खाद नहीं मिल पा रही है। प्रदेश भर में खाद की वितरण व्यवस्था भी लचर बनी हुई है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले कुछ दिनों में प्रदेश में मावठा गिर सकता है, जिसके बाद फिर किसानों को खाद की जरूरत होगी, लेकिन सवाल यह है कि खाद मिलेगी कैसे? मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव से फुर्सत होते ही उर्वरक वितरण की समीक्षा भी की है, लेकिन फिलहाल इस समस्या का समाधान नजर नहीं आ रहा है।

उधर कृशि विभाग के अधिकारी इस बात का दावा कर रहे हैं कि डीएपी, यूरिया सहित अन्य खाद पर्याप्त मात्रा में है परन्तु आचार संहिता, चुनाव ड्यूटी के चलते यह स्थिति बनी है। वहीं प्रधानमंत्री के फोटो खाद की बोरियों पर होने  कारणों से उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था गड़बड़ गई,  जो किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई। यहां उल्लेखनीय है कि सागर सहित कई स्थानों पर आचार संहिता के चलते खाद की बोरियों पर प्रधानमंत्री के फोटो होने की शिकायत कांग्रेस ने की थी। इसके चलते खाद का वितरण रूक गया था। 


शुक्रवार, 24 नवंबर 2023

चुनाव परिणाम के बाद नौकरशाहों की बढ़ेगी मुसीबत


भाजपा-कांग्रेस दोनों ही दलों के निशाने पर अधिकारी

भोपाल। विधानसभा चुनाव के नतीजों के पहले राज्य के आईएएस और आईपीएस अधिकारी सत्ताधारी दल और विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। मतगणना के पहले और बाद तक नौ जिलों के कलेक्टर और पांच पुलिस अधीक्षक इन दलों के निशाने पर हैं। इनकी शिकायतें भी चुनाव आयोग को की गई थी। माना जा रहा है कि चुनाव परिणाम के बाद इन पर गाज गिरना तय है।
विधानसभा के नतीजें आने के पहले राज्य के नौ कलेक्टर और पांच पुलिस अधीक्षकों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। इनके खिलाफ चुनाव के दौरान भाजपा और कांग्रेस नेताओं ने मोर्चा खोला था और इनकी शिकायतें भी चुनाव आयोग को की गई थी।  निष्पक्ष काम न करने, किसी एक दल विशेष के पक्ष में काम करने करने जैसी शिकायतें इन अधिकारियों को लेकर राजनीतिक दलों द्वारा की गई थी। इतना ही नहीं मतदान और मतगणना को प्रभावित करने जैसी शिकायतें भी हैं। जिन जिला कलेक्टरों की शिकायतें की गई उनमें  रिजु बाफना कलेक्टर, नरसिंहपुर, भास्कर लक्षकार कलेक्टर, रतलाम, संजीव श्रीवास्तव  कलेक्टर, भिंड,  सुभाष कुमार द्विवेदी कलेक्टर, अशोकनगर, दीपक आर्य कलेक्टर, सागर, साकेत मालवीय कलेक्टर, सीधी, अनुराग वर्मा कलेक्टर, सतना, संदीप माकिन कलेक्टर, दतिया और संदीप जीआर कलेक्टर छतरपुर हैं। इसके अलावा शैलेंद्र सिंह चौहान मुरैना पुलिस अधीक्षक, प्रदीप शर्मा दतिया पुलिस अधीक्षक, आदित्य प्रताप सिंह जबलपुर पुलिस अधीक्षक, अंकित जायसवाल निवाड़ी पुलिस अधीक्षक और अमित सांघी छतरपुर पुलिस अधीक्षक के नाम शामिल हैं।
डेढ़ दर्जन राज्य प्रशासनिक अधिकारियों की भी शिकायत
भाजपा और कांग्रेस द्वारा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के अलावा राज्य प्रशासनिक अधिकारियों की भी शिकायतें की गई है। करीब 20 राज्य प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ ये शिकायतें चुनाव आयोग को की गई है।

अगले मुख्य सचिव को लेकर लग रहे कयास

नौकरशाहों से लेकर राजनेता भी लगा रहे अटकलें

भोपाल। प्रदेश का अगला मुख्य सचिव कौन होगा, इसे लेकर इन दिनों नौकरशाहों के अलावा राजनेता भी कयास लगा रहे हैं। वर्तमान मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे, उसके बाद इस कुर्सी पर कौन बैठेगा इसका खुलासा निर्वाचन आयोग ने अभी तक नहीं किया है। मगर इस पद को लेकर इन दिनों मंत्रालय से लेकर राजनीतिक दलों के कार्यालयों में खासा चर्चा है।
प्रदेश के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस 30 नवंबर को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। राज्य में विधानसभा चुनाव के मतदान की मतगणना 3 दिसंबर को होगी। इस स्थिति में आचार संहिता के चलते मामला चुनाव आयोग के पास अटका हुआ है। आयोग ने अभी यह फैसला नहीं किया कि कौन सा कदम उठाएगा। माना जा रहा है कि आयोग बैस की एक माह की सेवा वृद्धि कर सकता है या फिर वरिष्ठता क्रम के चलते वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को इस पद का प्रभार सौंप सकता है। फिलहाल इस पद के लिए अटकलों का बाजार गर्म है। नौकरशाहों से लेकर राजनीतिक दलों तक में चुनाव नतीजों के अलावा अगला मुख्य सचिव कौन होगा इसकी चर्चा ज्यादा है।
सूत्रों की माने तो आयोग भी यह चाहता है कि अगली सरकार ही इस पद के लिए कोई फैसला करें। इसे देखते हुए इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा की सरकार आती है तो वीरा राना, मोहम्मद सुलेमान, मलय श्रीवास्तव, राजेश राजौरा में से कोई मुख्य सचिव बन सकता है। वही अनुराग जैन को भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाया जा सकता है। इसके अलावा अगर कांग्रेस की सरकार बनी तो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से संजय बंदोपाध्याय को वापस बुलाया जा सकता है या फिर मोहम्मद सुलेमान को भी मुख्य सचिव बनाया जा सकता है।

भीतरघातियों की जुटाई जा रही जानकारी, जिला अध्यक्षों से मांगी रिपोर्ट

भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने दिखाई सक्रियता

भोपाल। विधानसभा चुनाव के मतदान होने के बाद भाजपा और  कांग्रेस के नेता बूथ स्तर पर जीत-हाल का आकलन कर रहे हैं। साथ ही लगातार मिल रही भीतरघात की शिकायतों को लेकर भी गंभीर हुए हैं। दोनों ही दलों ने अब जिलों से भीतरघात करने वालों की जानकारी जुटाई है। मतदान के परिणाम के बाद इन पर कार्रवाई की जा सकती है। 

विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव प्रचार के दौरान घर बैठ गए और कुछ ने प्रत्याशियों के खिलाफ प्रचार किया। इस तरह की शिकायतें भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के प्रत्याशियों द्वारा संगठन को शिकायत की गई है। इन शिकायतों को अब भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल गंभीरता से ले रहे हैं। संगठन और वरिष्ठ नेताओं ने नाराज पार्टीजनों को साधने की हर संभव कोशिश की, लेकिन कई बगावती तेवर दिखाते हुए खुलकर मैदान में आ गए थे तो कुछ ने पार्टी में रहकर भितरघात किया। भाजपा में खुलकर सामने आने वाले विरोधियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और अब भितरघातियों की पड़ताल कर सूची तैयार की जा रही है। कांग्रेस में खुलकर सामने आए विरोधियों की जानकारी संगठन में उच्च स्तर पर दे दी गई है, वहीं अब भितरघातियों का पता लगाया जा रहा है। इसके लिए दोनों ही दलों ने जिलों से जानकारी भी मंगवाई है। दोनों ही दल चुनाव परिणाम आने के बाद इन भीतरघातियों पर कार्रवाई करने की तैयारी भी कर रहे हैं।


नौकरी छोड़ी, चुनाव लड़ा, अब परिणाम पर नजर

भाजपा-कांग्रेस ने दो-दो नौकरशाहों को उतारा था मैदान में 


भोपाल। विधानसभा चुनाव में नौकरी छोड़कर राजनीति करने के लिए मैदान में उतरे चार नौकरशाहों को मतदान के बाद अब परिणाम का इंतजार है। उनकी नजरें परिणाम पर टिकी है, उन्हें जीत मिलती है या हार। यह तो 3 तारीख को पता चलेगा, मगर इस बात का आकलन भी किया जा रहा है कि नौकरी छोड़ने का जो कदम उन्होंने उठाया वह सही था या गलत। 

विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए वैसे तो प्रदेश में पिछले चुनावों की अपेक्षा इस बार चुनाव में बड़ी संख्या में नौकरशाहों ने सक्रियता दिखाई थी। कुछ भाजपा से तो कुछ कांग्रेस से टिकट के लिए दावेदारी कर रहे थे। दर्जनभर सक्रिय इन नौकरशाहों में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने दो-दो उम्मीदवारों को ही चुनाव मैदान में उतारा था। मजेदार बात यह है कि इन चारों ने नौकरी से इस्तीफा देकर राजनीति की राह को चुना था। ये चार अधिकारी चुनाव तो लड़ लिए, अब उन्हें 3 तारीख को आने वाले चुनाव परिणाम की चिंता सता रही है। चारों कार्यकर्ता की भांति दोनों ही दलों में सक्रिय नहीं रहे, इसके चलते उन्हें परिणाम की चिंता ज्यादा है। 

इन्हें मिला था चुनाव लड़ने का अवसर

भाजपा ने पांढुर्णा विधानसभा सीट जोकि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, वहां से पूर्व न्यायाधीश प्रकाश उईके को मैदान में उतारा है। इसके अलावा जबलपुर मेडिकल कॉलेज के सहायक अधीक्षक डॉक्टर विजय आनंद मरावी को भाजपा ने बिछिया सीट से प्रत्याशी बनाया था। मतदान के बाद दोनों ही सीटों पर भाजपा नेताओं के अलावा दोनों ही नौकरशाहों को अब परिणाम की चिंता हो रही है। इसी तरह कांग्रेस ने मनावर जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी लक्ष्मण सिंह डिंडोर को रतलाम ग्रामीण सीट से चुनावी मैदान में उतारा। इसके अलावा संयुक्त कलेक्टर रहे रमेश सिंह को अनूपपुर सीट से कांग्रेस ने चुनाव लड़ाया है। इसके अलावा डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे ने नौकरी से इस्तीफा तो दिया था, मगर कांग्रेस ने उन्हें एनवक्त पर टिकट नहीं दिया। 

तीन अधिकारी ही रहे सफल

नौकरी छोड़कर या सेवानिवृत्त होने के बाद राजनीति में कदम रखने वाले नौकरशाहों में प्रदेश के तीन अधिकारी ही ऐसे रहे हैं, जो चुनाव जीते है। एक पुलिस अधिकारी तो मंत्री पद तक भी पहुंचे है। इनमें यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता गुमान सिंह डामोर है। डामोर को भाजपा ने पिछला विधानसभा चुनाव झाबुआ से लड़ाया था, जिन्होंने कांग्रेस नेता विक्रांत भूरिया को हराया था। इसके बाद झाबुआ संसदीय सीट से डामोर को भाजपा ने लोकसभा का चुनाव लड़ाया और वे सांसद बने। इसी तरह प्रमुख सचिव रहे डॉ भागीरथ प्रसाद भी सांसद का चुनाव लड़ चुके हैं। भागीरथ प्रसाद ने पहले कांग्रेस फिर भाजपा की सदस्यता ली थी। इनके अलावा  आईपीएस अधिकारी रुस्तम सिंह को भी शिवराज सरकार में मंत्री बनाया गया था। इस बार विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया है। 


गुरुवार, 23 नवंबर 2023

प्रत्याशियों को कांग्रेस दिला सकती है शपथ

पिछली गलतियों से सीख रही सबक


भोपाल। 2018 के चुनाव में सरकार बनाने के बाद सरकार गिर जाने का जख्म कांग्रेस को अब भी जला रहा है। इसके चलते वह इस बार हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। कांग्रेस इसके चलते मतगणना के पहले से ही प्रत्याशियों को कांग्रेस के प्रति निष्ठावान रहने की शपथ दिला सकती है।

प्रदेश कांग्रेस ने मतगणना के पहले प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्र में बड़े नेताओं की तैनाती करने का फैसला लिया है। साथ ही कार्यकर्ताओं को भी मतगणना स्थल पर सजग रहने की बात कही है। इसके अलावा प्रत्याशियों को भी 26 नवंबर को भोपाल बुलाया गया है। प्रत्याशियों को यह जानकारी दी गई है कि उन्हें मतगणना का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मगर बताया यह भी जा रहा है कि मतगणना के प्रशिक्षण के साथ-साथ कांग्रेस प्रत्याशियों को कांग्रेस के प्रति समर्पित रहने की शपथ भी दिला सकती है। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि 2018 के चुनाव में सरकार बनने के बाद कांग्रेस विधायकों ने सिंधिया समर्थकों के साथ भाजपा में जाकर सरकार को गिरा दिया था। इस घटना को लेकर कांग्रेस इस बार ज्यादा सतर्क है। इसके चलते वह मतगणना के पहले ही प्रत्याशियों को कांग्रेस के साथ रहने की बात कह रही है साथ ही शपथ दिलाने की बात सामने आ रही है। ताकि ये प्रत्याशी विधायक बनने के बाद किसी तरह के प्रलोभन में ना आएं। इसके चलते कांग्रेस ने वरिश्ठ विधायकां को संभागवार जिम्मेदारी भी दी है, ताकि दूसरे प्रत्याशियों पर ये नजर रख सकें और अगर कोई गड़बड़ी का आसार हो तो तुरंत ही संगठन तक इसकी जानकारी पहुंचा सकें।
कांग्रेस की इस रणनीति को लेकर कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कहा कि पिछली बार मिस कम्युनिकेशन की वजह से कुछ गलतियां हुई थीं, लेकिन इस बार सभी वरिष्ठ नेता प्रत्याशियों के संपर्क में हैं। गलती की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ही सबसे वरिष्ठ हैं,  ऐसी स्थिति में इस बार पहले जैसे हालात नहीं बनेंगे।

नेता प्रतिपक्ष ने की भिंड कलेक्टर की शिकायत, कहा हटाएं

कलेक्टर पूछते हैं मैं कैसे जीत रहा हूं सात बार से


भोपाल। मतदान के बाद प्रत्याशियों द्वारा चुनाव आयोग को अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें करने का दौर जारी है। नेता प्रतिपक्ष डा गोविंद सिंह ने आज चुनाव आयोग को दो पन्ने का शिकायती आवेदन देकर भिंड कलेक्टर को हटाने की मांग की है। उन्होंने शिकायत में कहा है कि कलेक्टर मेरी जीत कारण पूछते हैं। वे पूछते हैं कि मैं सात बार से कैसे जीतकर आ रहा हूं।

नेता प्रतिपक्ष डा गोविंद सिंह ने निर्वाचन आयोग पहुंचकर निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन को शिकायती पत्र सौंपा। अपनी शिकायत में उन्होंने भिंड कलेक्टर और निर्वाचन अधिकारी संजीव श्रीवास्तव के खिलाफ शिकायत की। उन्होंने कलेक्टर पर भाजपा का एजेंट बनकर काम और चुनाव प्रभावित करने का भी आरोप लगाया है। निर्वाचन आयोग में शिकायत के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद ने कहा कि सुबह 7 बजे से लेकर शाम तक वह लहार विधानसभा क्षेत्र में रहे। भाजपा के जो बूथ थे वहां पर खुलेआम बूथ कैप्चर होते रहे, वहां कोई कार्रवाई नहीं हुई और कांग्रेस के बूथ पर कलेक्टर डटे रहे। कार्यकर्ताओं को पोलिंग बूथ पर मारा गया। फर्जी मतदान होता रहा, 600 सरकारी कर्मचारियों को मतदान से वंचित किया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा वे मेरी जीत का कारण पूछते हैं। वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से पूछते हैं कि मैं सात बार से लगातार कैसे जीत रहा हूं। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि संजीव श्रीवास्तव के रहते लहार विधानसभा में निष्पक्ष काउंटिंग नहीं हो पाएगी। वे भाजपा का एजेंट बनकर काम कर रहे हैं। इसीलिए कलेक्टर श्रीवास्तव को हटाया जाए।
मुख्य सचिव ने जानबूझकर उन्हें भिंड भेजा
उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव ने जानबूझकर भिंड जिले में संजीव श्रीवास्तव की पोस्टिंग की थी। मैंने मुख्य सचिव की शिकायत की थी, इसलिए उन्होंने श्रीवास्तव को वहां भेजा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्य सचिव और कलेक्टर ने मिलकर इस तरीके की कृत्य किया है। हम आयोग से मांग करते हैं की जांच कर ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई करें।

आयोग ने नहीं दी मुख्य सचिव की सेवावृद्धि की अनुमति

भोपाल। प्रदेश के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस की सेवावृद्धि किए जाने की अटकलों को लेकर आज चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि उन्हें सेवावृद्धि नहीं दी है। आयोग ने सोशल मीडिया पर चल रही इन खबरों को फेक खबरें बताया है। 

प्रदेश के मुख्य सचिव को लेकर संशय लगातार गहराता जा रहा है, क्योंकि सोशल मीडिया पर चल रही एक खबर पर चुनाव आयोग ने साफ किया है कि उसने सेवानिवृत्त होने वाले मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस को सेवावृद्धि नहीं दी है। सोशल मीडिया पर बैस को एक्सटेंशन देने की खबर वायरल हो रही है, इस पर चुनाव आयोग ने एक्स पर लिखकर स्थिति स्पष्ट की है। साथ ही बताया है कि,सोशल मीडिया पर एक फर्जी खबर शेयर की जा रही है कि चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश के सेवानिवृत्त होने वाले मुख्य सचिव के कार्यकाल के विस्तार को मंजूरी दे दी है। यह स्पष्ट किया गया है कि आयोग द्वारा ऐसी कोई मंजूरी नहीं दी गई है। ज्ञात हो कि राज्य के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस को दो बार अब तक एक्सटेंशन मिल चुका है। अब उनका दूसरा एक्सटेंशन 30 नवंबर को खत्म होने वाला है। राज्य सरकार की ओर से तीसरी बार एक्सटेंशन दिए जाने का प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है मगर अब तक उस पर मुहर नहीं लगी है।


17 के बजाय 20 को पोस्टल बैलेट से कराया मतदान

आयोग तक पहुंचा मामला, हो सकती है कार्रवाई


भोपाल। खंडवा जिला निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा 17 के बजाय 20 नवंबर को पोस्टल बैलेट से कराए मतदान का मामला गर्मा गया है। चुनाव आयोग तक यह शिकायत पहुंची है। माना जा रहा है कि इसे लेकर आयोग सख्त कदम उठा सकताहै। आयोग ने मामले को गंभीरता से लिया और केन्द्रीय चुनाव आयोग से अभिमत मांगा है। 

दरअसल मामला चुनाव आयोग की अनुमति के बिना पोस्टल बैलेट से 17 नवंबर के बजाय 20 नवंबर को मतदान कराने का है। मध्यप्रदेश में मतदान की तारीख 17 नवंबर बीतने के तीन दिन बाद वोटिंग की गई है। प्रदेश के खंडवा जिले में 20 नवंबर को 123 डाक मतपत्र डलवाये गए है। पूरा मामला केंद्रीय चुनाव आयोग के पास पहुंच गया है। मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने केंद्रीय इलेक्शन कमीशन से अभिमत मांगा है। चौकाने वाले मामला तो यह हैं कि जिला निर्वाचन अधिकारी को बिना बताए डाक मतपत्र डलवाये गए है। मामले को लेकर मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने कहा कि हमारे संज्ञान मे खंडवा का पूरा मामला है। मामले की जानकारी केंद्रीय चुनाव आयोग को दी गई है। केंद्रीय चुनाव आयोग जो हमें आदेश देगा उसके बाद हम कार्रवाई करेंगे।  माना जा रहा है कि इस मामले को लेकर चुनाव आयोग जिला निर्वाचन अधिकारी और पुलिस अधीक्षक पर कार्रवाई कर सकता है। 

इसलिए कराया मतदान

इस पूरे मामले को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश की तरफ से भेजी गई रिपोर्ट में इन वोटों को शून्य घोषित करने को कहा है। मिली जानकारी के अनुसार चुनाव की वोटिंग के लिए तैनात किए गए नोडल अधिकारी ने खंडवा जिला निर्वाचन अधिकारी को बिना बताए ही डाक मतपत्र डलवा दिए। बता दें कि चुनाव में तैनात कर्मचारियों से प्रशिक्षण के दौरान डाक मतपत्र के माध्यम से मतदान कराया गया, इसमें वे कर्मचारी शामिल है जिनकी ड्यूटी 17 नवंबर को खंडवा से बाहर थे। 


अपने दस नाराज नेताओं पर भाजपा की नजर

परिणाम आते ही सरकार बनाने के लिए भाजपा ने बनाई रणनीति

भोपाल। मतदाता के मौन के बीच हुए मतदान के बाद अब भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के लिए सरकार बनाने की जद्दोजहद भी तेज हो गई है। दोनों ही दल स्पश्ट बहुमत ना मिलने की स्थिति में आगे की रणनीति क्या होगी, इसे लेकर मंथन में जुटे हैं। भाजपा नेताओं की हुई बैठक के बाद भाजपा संगठन ने अपने नाराज होकर बागी हुए नेताओं पर फिर से भरोसा दिखाने की रणनीति तय की है। करीब दस नेताओं पर भाजपा संगठन की निगाह है, जो टिकट ना मिलने से बागी हो गए थे। 

प्रदेश में तीन दिसंबर को होने वाली मतगणना को लेकर भाजपा मतगणना के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी ना हो, इसे लेकर रणनीति बनाकर हर मतगणना स्थल पर अपने कार्यकर्ता की तैनाती कर रही है। इसके अलावा भाजपा संगठन वैसे तो भाजपा की जीत का दावा करते हुए सरकार बनाने की बात कह रहा है, लेकिन फिर भी बिगड़ी परिस्थिति में सरकार किस तरह बनाई जाए इसे लेकर भी नेता रणनीति बना रहे हैं। इसे लेकर भाजपा के बड़े नेताओं की बैठकें भी लगातार हो रही है। इन बैठकों में बसपा और निर्दलीय एवं दूसरे दलों के नेताओं का सहारा लेने की बातें भी सामने आ रही है। वहीं भाजपा का पूरा फोकस अपने दल के पुराने नेता जो टिकट ना मिलने से नाराज होकर दूसरे दलों के प्रत्याशी बने और कुछ निर्दलीय मैदान में उतरे हैं, उनका भरोसा जीतने पर भी है। भाजपा नेता इस रणनीति पर काम कर रहे हैं कि किसी तरह इन नाराज नेताओं को फिर से मनाया जाए, ताकि सरकार बनाने की राह आसान हो जाए। सूत्रों की माने तो संगठन ने इसके तहत दस ऐसे नेताओं पर नजरें गढ़ाई है, जो नाराज होकर चुनाव मैदान में उतरे थे। भाजपा पदाधिकारी इन नेताओं को मनाने की कवायद करेंगे। फिलहाल इन नेताओं के मैदान में खड़े होने से त्रिकोणीय हुए मुकाबले के कारण उनकी जीत का आकलन भाजपा द्वारा किया जा रहा है। अगर ये नेता मतगणना के बाद विजयी होते हैं, तो भाजपा इन नेताओं को अपने साथ लाने का प्रयास करेगी। इस रणनीति को लेकर संगठन पदाधिकारी सक्रिय हुए हैं। 

इन बागियों पर है निगाहें

मुरैना में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े राकेश रुस्त, सीधी के भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ल,  नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविन्द सिंह की लहार सीट पर बसपा से चुनाव लड़े रसाल सिंह, चाचौड़ा में पूर्व विधायक और आम आदमी पार्टी  की प्रत्याशी ममता मीना, भिंड से पूर्व विधायक संजीव कुशवाहा जो बसपा से चुनाव लड़े,  टीकमगढ़ में बागी केके श्रीवास्तव,  राजनगर सीट पर बसपा के घासीराम पटेल, नर्मदापुरम सीट पर दो सगे भाइयों के चुनाव परिणाम को प्रभावित करने वाले  भाजपा के बागी भगवती चौरे,  बुरहानपुर में पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के बेटे हर्ष चौहान और  जोबट सीट पर भाजपा के पूर्व विधायक माधव सिंह डाबर जिन्होंने  निर्दलीय चुनाव लड़ा पर भाजपा की निगाहें टिकी है।