पिछली गलतियों से सीख रही सबक
भोपाल। 2018 के चुनाव में सरकार बनाने के बाद सरकार गिर जाने का जख्म कांग्रेस को अब भी जला रहा है। इसके चलते वह इस बार हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। कांग्रेस इसके चलते मतगणना के पहले से ही प्रत्याशियों को कांग्रेस के प्रति निष्ठावान रहने की शपथ दिला सकती है।
प्रदेश कांग्रेस ने मतगणना के पहले प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्र में बड़े नेताओं की तैनाती करने का फैसला लिया है। साथ ही कार्यकर्ताओं को भी मतगणना स्थल पर सजग रहने की बात कही है। इसके अलावा प्रत्याशियों को भी 26 नवंबर को भोपाल बुलाया गया है। प्रत्याशियों को यह जानकारी दी गई है कि उन्हें मतगणना का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मगर बताया यह भी जा रहा है कि मतगणना के प्रशिक्षण के साथ-साथ कांग्रेस प्रत्याशियों को कांग्रेस के प्रति समर्पित रहने की शपथ भी दिला सकती है। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि 2018 के चुनाव में सरकार बनने के बाद कांग्रेस विधायकों ने सिंधिया समर्थकों के साथ भाजपा में जाकर सरकार को गिरा दिया था। इस घटना को लेकर कांग्रेस इस बार ज्यादा सतर्क है। इसके चलते वह मतगणना के पहले ही प्रत्याशियों को कांग्रेस के साथ रहने की बात कह रही है साथ ही शपथ दिलाने की बात सामने आ रही है। ताकि ये प्रत्याशी विधायक बनने के बाद किसी तरह के प्रलोभन में ना आएं। इसके चलते कांग्रेस ने वरिश्ठ विधायकां को संभागवार जिम्मेदारी भी दी है, ताकि दूसरे प्रत्याशियों पर ये नजर रख सकें और अगर कोई गड़बड़ी का आसार हो तो तुरंत ही संगठन तक इसकी जानकारी पहुंचा सकें।
कांग्रेस की इस रणनीति को लेकर कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कहा कि पिछली बार मिस कम्युनिकेशन की वजह से कुछ गलतियां हुई थीं, लेकिन इस बार सभी वरिष्ठ नेता प्रत्याशियों के संपर्क में हैं। गलती की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ही सबसे वरिष्ठ हैं, ऐसी स्थिति में इस बार पहले जैसे हालात नहीं बनेंगे।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें