2018 में कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचने की राह को किया था आसान
भोपाल। प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर भाजपा का जनाधार घटा है। इसके चलते पिछले 2018 के विधानसभा चुनाव में उसकी राह आसान नहीं रही। ये सीटें बहुजन समाज पार्टी को भी अब तक लुभा नहीं पाई है। इन सीटों पर उसके कम संख्या में ही प्रत्याशी जीत कर विधानसभा पहुंचे हैं। इस बार फिर कांग्रेस इन सीटों पर जीत की उम्मीद के साथ मैदान में उतरी है।
मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 35 सीटें आरक्षित है। इन सीटों पर 2003 के बाद से 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का दबदबा रहा है। भाजपा को इस वर्ग की आरक्षित सीटों पर कांग्रेस से ज्यादा सीटें मिलती रही, जिससे उसकी सत्ता में रहने की राह आसान होती रही। मगर 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को इस वर्ग ने साथ नहीं दिया और इस वर्ग की आरक्षित सीटें भाजपा और कांग्रेस में बंट गई। हालांकि इस चुनाव में पहले की तरह बहुजन समाज पार्टी को कोई लाभ नहीं हुआ। बसपा को इस वर्ग की आरक्षित सीटों में से एक भी सीट पर विजय हासिल नहीं हुई। बसपा के जो प्रत्याशी जीते वे सामान्य वर्ग की सीट पर ही जीत हासिल कर पाए थे। 2018 के चुनाव में अनुसूचित जाति वर्ग की आरक्षित 35 सीटों में से भाजपा को 18 और कांग्रेस को 17 सीटें मिली थी। जबकि 2013 के चुनाव में कांग्रेस को मात्र 3 सीटें ही हासिल हुई थी। इस चुनाव में बसपा को जरूर आरक्षित वर्ग की तीन सीटों पर जीत हासिल हुई थी। वहीं भाजपा को 29 सीटें इस वर्ग की मिली थी, जिससे उसकी सत्ता में वापसी की राह आसान हो गई थी।
गौरतलब है कि आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों की नजरें अनुसूचित जाति वर्ग की आरक्षित इन सीटों पर रही है। इस वर्ग का प्रदेश में करीब 18 फीसदी वोट है, जो सरकार बनाने की राह को आसान करता है। पिछले चुनाव में भाजपा को इस वर्ग से जो झटका मिला था, इसके चलते अब इस बार भाजपा को फोकस इस वर्ग की आरक्षित सीटों पर है।
कब किसे कितनी मिली थी अजा वर्ग की सीटें
वर्ष आरक्षित सीटें भाजपा कांग्रेस बसपा अन्य
2003 34 30 03 00 01
2008 35 28 07 00 00
2013 35 29 03 03 00
2018 35 18 17 00 00

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